23 Oct रक्षा मंत्री का सेना प्रमुखों को महत्वपूर्ण निर्देश: सुरक्षा चुनौतियों का सामना करने की तैयारी
✎ सेना की सर्वोच्च कमान अनुच्छेद 53 के अंतर्गत राष्ट्रपति में निहित है और उसका व्यावहारिक प्रयोग मंत्रिपरिषद की सलाह से होता है, इसलिए दीर्घकालिक रक्षा नियोजन और तात्कालिक परिचालन-तत्परता दोनों निर्वाचित नागरिक नेतृत्व के…
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — शासन एवं संविधान (नागरिक-सैन्य संबंध, संघ की कार्यकारी शक्ति, रक्षा प्रशासन) | GS Paper III — आंतरिक सुरक्षा और रक्षा (सुरक्षा चुनौतियाँ, रक्षा आधुनिकीकरण, स्वदेशीकरण)
- Prelims: अनुच्छेद 53 (संघ की कार्यकारी शक्ति और सेनाओं की सर्वोच्च कमान), मुख्य रक्षा स्टाफ (Chief of Defence Staff — CDS), वर्ष 2019 में सृजित पद, एकीकृत थिएटर कमान (Integrated Theatre Command), अंडमान एवं निकोबार कमान (Andaman and Nicobar Command) — भारत की एकमात्र त्रि-सेवा थिएटर कमान, रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया (Defence Acquisition Procedure — DAP), रक्षा उत्पादन एवं निर्यात संवर्धन नीति (Defence Production and Export Promotion Policy — DPEPP), 2020, संघ सूची की प्रविष्टि 1 और 2 (रक्षा; नौसेना, सैन्य एवं वायु सेना)
- Essay: सामरिक दूरदृष्टि और तात्कालिक तैयारी के बीच संतुलन: लोकतांत्रिक राष्ट्र की रक्षा नीति, आत्मनिर्भरता और रक्षा तकनीक: सुरक्षा स्वायत्तता का मार्ग
त्वरित पुनरावृत्ति: सेना की सर्वोच्च कमान अनुच्छेद 53 के अंतर्गत राष्ट्रपति में निहित है और उसका व्यावहारिक प्रयोग मंत्रिपरिषद की सलाह से होता है, इसलिए दीर्घकालिक रक्षा नियोजन और तात्कालिक परिचालन-तत्परता दोनों निर्वाचित नागरिक नेतृत्व के मार्गदर्शन में संचालित होते हैं।
यह खबर चर्चा में क्यों?
भारत के रक्षा मंत्री ने सेना के कमांडरों को संबोधित करते हुए इस बात पर बल दिया कि सैन्य नेतृत्व को दीर्घकालिक सामरिक दृष्टि बनाए रखनी चाहिए और साथ ही उभरती तथा तात्कालिक चुनौतियों का सामना करने के लिए भी पूरी तरह तैयार रहना चाहिए। यह संदेश इसलिए महत्त्वपूर्ण है क्योंकि आधुनिक सुरक्षा परिवेश में पारंपरिक सीमाई खतरों के साथ साइबर, अंतरिक्ष, सूचना और तकनीकी क्षेत्रों की चुनौतियाँ भी उभर रही हैं। प्रेस विज्ञप्ति से यह स्पष्ट होता है कि सरकार की रक्षा नीति में योजना-निर्माण और परिचालन-तत्परता दोनों को एक साथ साधने की आवश्यकता पर जोर है।
पृष्ठभूमि
- भारतीय संविधान के अनुच्छेद 53 के अनुसार संघ की कार्यकारी शक्ति राष्ट्रपति में निहित है और सशस्त्र बलों की सर्वोच्च कमान भी राष्ट्रपति में निहित है, जिसका प्रयोग विधि द्वारा विनियमित होता है। व्यवहार में यह शक्ति मंत्रिपरिषद की सलाह पर प्रयुक्त होती है, जिससे नागरिक सर्वोच्चता (civil supremacy) का सिद्धांत सुनिश्चित होता है।
- वर्ष 2019 में मुख्य रक्षा स्टाफ (CDS) का पद सृजित किया गया, ताकि तीनों सेनाओं के बीच समन्वय बढ़े और संयुक्तता (jointness) को संस्थागत रूप मिले। CDS सैन्य मामलों के विभाग का प्रमुख भी है।
- भारत ने एकीकृत थिएटर कमान की दिशा में क्रमिक प्रयास किए हैं, जिनमें अंडमान एवं निकोबार कमान वर्ष 2001 से कार्यरत त्रि-सेवा कमान के रूप में एक प्रारंभिक उदाहरण है।
- आत्मनिर्भर भारत के अंतर्गत रक्षा क्षेत्र में स्वदेशी उत्पादन और निर्यात को बढ़ावा देने के लिए DPEPP 2020 जैसी नीतियाँ लागू हैं, और रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया में स्वदेशी खरीद को प्राथमिकता दी गई है।
सैन्य नेतृत्व में दीर्घकालिक दृष्टि और तात्कालिक तत्परता क्या है?
- यह रक्षा नियोजन का दोहरा सिद्धांत है: दीर्घकालिक नियोजन में क्षमता-विकास, तकनीकी आधुनिकीकरण और बल-संरचना का निर्धारण होता है, जबकि तात्कालिक तत्परता में युद्ध-संसाधनों, प्रशिक्षण और परिचालन-गति को बनाए रखा जाता है।
- संवैधानिक रूप से रक्षा नीति का अंतिम नियंत्रण निर्वाचित सरकार के पास है। अनुच्छेद 53 और संघ सूची की प्रविष्टि 1 व 2 इसके संवैधानिक आधार हैं।
- सेना के कमांडर परिचालन निर्णयों के साथ-साथ दीर्घकालिक सिद्धांत (doctrine) और योजना के भी भागीदार होते हैं, इसलिए उनसे रणनीतिक सोच की अपेक्षा की जाती है।
- रक्षा नियोजन में राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय के अधीन रक्षा नियोजन समिति (Defence Planning Committee) जैसी संस्थाएँ नीति-समन्वय में भूमिका निभाती हैं।
- संयुक्तता और एकीकरण इस तत्परता के केंद्र में हैं, जिससे तीनों सेनाएँ संसाधनों का साझा और समन्वित उपयोग कर सकें।
- स्वदेशीकरण और तकनीकी आत्मनिर्भरता दीर्घकालिक दृष्टि का अनिवार्य अंग हैं, क्योंकि आयात-निर्भरता रणनीतिक स्वायत्तता को सीमित करती है।
- साइबर, अंतरिक्ष और सूचना-युद्ध जैसे उभरते क्षेत्र तात्कालिक और दीर्घकालिक, दोनों प्रकार की तैयारी की माँग करते हैं।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| दीर्घकालिक रणनीतिक दृष्टि (Long-term Strategic Vision) | सेना की क्षमता-योजना को तात्कालिक संकटों के बजाय भविष्य के खतरों, तकनीकी बदलावों और भू-राजनीतिक परिवर्तनों के अनुरूप ढालने पर बल |
| तात्कालिक तत्परता (Operational Readiness) | अचानक उत्पन्न होने वाली सीमावर्ती या आंतरिक सुरक्षा चुनौतियों का सामना करने के लिए युद्ध-तैयारी, संसाधन और कमान-नियंत्रण का सतत बने रहना |
| उभरती चुनौतियों की पहचान (Emerging Challenges) | पारंपरिक सैन्य खतरों के साथ साइबर, अंतरिक्ष, सूचना और ड्रोन जैसे नए आयामों को भी सैन्य योजना में शामिल करने की आवश्यकता |
| नागरिक-सैन्य नेतृत्व का संवाद | निर्वाचित नेतृत्व द्वारा सेना के वरिष्ठ कमांडरों को नीतिगत दिशा देना, जिससे संविधानिक नियंत्रण और सैन्य पेशेवर स्वायत्तता के बीच संतुलन बना रहे |
| संस्थागत निरंतरता | रणनीतिक संदेश के माध्यम से सेना की प्राथमिकताओं, प्रशिक्षण और आधुनिकीकरण की दिशा में एकरूपता सुनिश्चित करना |
महत्व
रणनीतिक और सुरक्षा संबंधी महत्व
- दीर्घकालिक सोच से सीमा-प्रबंधन, प्रतिरोध (Deterrence) और त्वरित प्रतिक्रिया, दोनों क्षमताओं का संतुलित विकास संभव होता है।
- तात्कालिक और उभरते खतरों के बीच संतुलन राष्ट्रीय सुरक्षा नीति की व्यावहारिक कसौटी है।
नागरिक-सैन्य संबंध और शासन
- भारत में सेना पर निर्वाचित सरकार का नियंत्रण है, और रक्षा मंत्री इस नियंत्रण का प्रमुख माध्यम हैं।
- सेना कमांडरों के साथ नीतिगत संवाद से सैन्य नेतृत्व को सरकार की प्राथमिकताओं की स्पष्ट जानकारी मिलती है।
संसाधन और आधुनिकीकरण
- दीर्घकालिक दृष्टि आधुनिकीकरण और पूंजीगत व्यय की योजना को बजट-चक्र से आगे ले जाती है।
- तकनीक-आधारित युद्ध में प्रशिक्षण, अनुसंधान और घरेलू रक्षा उत्पादन की निरंतरता आवश्यक होती है।
चुनौतियाँ
1. तात्कालिक और दीर्घकालिक आवश्यकताओं में संतुलन
- सीमित रक्षा बजट में वर्तमान परिचालन आवश्यकताओं और भविष्य के अधिग्रहण के बीच प्राथमिकता तय करना कठिन होता है।
- तात्कालिक तैयारी पर अधिक ध्यान देने से दीर्घकालिक क्षमता-निर्माण प्रभावित हो सकता है।
यूपीएससी लिंक: सुरक्षा चुनौतियाँ; रक्षा बजट और संसाधन आवंटन
2. हाइब्रिड और गैर-पारंपरिक खतरे
- साइबर हमले, सूचना युद्ध और ड्रोन जैसे साधनों से पारंपरिक सीमा-रेखा धुंधली हो जाती है।
- इन खतरों के लिए सेना, वायुसेना और नौसेना के बीच समन्वय तथा नागरिक एजेंसियों के साथ तालमेल आवश्यक है।
यूपीएससी लिंक: आंतरिक सुरक्षा; साइबर सुरक्षा; सुरक्षा चुनौतियाँ
3. तकनीकी आधुनिकीकरण और आत्मनिर्भरता
- उन्नत प्रणालियों के आयात पर निर्भरता रणनीतिक स्वायत्तता को सीमित कर सकती है।
- स्वदेशी अनुसंधान एवं विकास, और रक्षा उद्योग में निजी भागीदारी का समन्वय एक चुनौती है।
यूपीएससी लिंक: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी; आत्मनिर्भर भारत; रक्षा उत्पादन
4. संयुक्तता और सेवाओं के बीच समन्वय
- थल, वायु और नौसेना के बीच संसाधनों और योजना का समन्वित उपयोग अब भी पूर्ण रूप से विकसित नहीं है।
- बदलते युद्ध-सिद्धांत के अनुरूप कमान-ढांचे में सुधार पर सर्वसम्मति बनाना प्रशासनिक चुनौती है।
यूपीएससी लिंक: रक्षा प्रशासन; संघ सूची की प्रविष्टि 1 और 2 से संबंधित विषय
5. मानव संसाधन और प्रशिक्षण
- बदलती तकनीक के लिए सैनिकों और अधिकारियों का निरंतर पुनः-कौशलन आवश्यक है।
- सेवा-शर्तों और सैन्य जीवन की चुनौतियाँ भर्ती व प्रतिधारण को प्रभावित करती हैं।
यूपीएससी लिंक: मानव संसाधन विकास; कौशल विकास
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| बजट सीमाएँ | वर्तमान और भविष्य की क्षमताओं के बीच संसाधन-आवंटन का दबाव |
| हाइब्रिड खतरे | साइबर, सूचना और ड्रोन आधारित हमलों से पारंपरिक रक्षा-ढांचे की अपर्याप्तता |
| तकनीकी निर्भरता | उन्नत रक्षा प्रणालियों के आयात से रणनीतिक स्वायत्तता पर असर |
| अंतर-सेवा समन्वय | थल, वायु और नौसेना के बीच योजना और संचालन में पूर्ण एकीकरण की कमी |
| मानव संसाधन | बदलती तकनीक के अनुरूप प्रशिक्षण और कौशल-उन्नयन की आवश्यकता |
आगे की राह
- रक्षा योजना में पांच से दस वर्षीय क्षमता-रोडमैप को बजट-चक्र से जोड़कर आधुनिकीकरण की प्राथमिकताएँ स्पष्ट की जाएँ।
- साइबर, अंतरिक्ष और सूचना युद्ध की क्षमताओं को मुख्य सैन्य योजना का अंग बनाया जाए।
- थल, वायु और नौसेना के बीच संयुक्त प्रशिक्षण और संयुक्त योजना को संस्थागत रूप दिया जाए।
- स्वदेशी अनुसंधान एवं विकास और रक्षा उत्पादन में निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाकर आयात-निर्भरता घटाई जाए।
- सैनिकों और अधिकारियों के लिए तकनीक-आधारित प्रशिक्षण और पुनः-कौशलन कार्यक्रम नियमित किए जाएँ।
- नागरिक-सैन्य संवाद को नियमित और पारदर्शी प्रक्रिया के रूप में विकसित किया जाए, ताकि नीति और परिचालन में तालमेल रहे।
- तात्कालिक तत्परता के मानक स्पष्ट कर उनकी नियमित समीक्षा की जाए।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
दीर्घकालिक सामरिक दृष्टि (Long-term Strategic Vision) · तात्कालिक एवं उभरती चुनौतियों हेतु तत्परता · नागरिक सर्वोच्चता (Civil Supremacy) · सशस्त्र बलों पर संसदीय नियंत्रण · चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (Chief of Defence Staff) · सैन्य मामलों का विभाग (Department of Military Affairs) · रक्षा योजना समिति (Defence Planning Committee) · एकीकृत थिएटर कमान (Integrated Theatre Commands) · संयुक्तता (Jointness) और एकीकृत रक्षा स्टाफ · रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया (Defence Acquisition Procedure) · स्वदेशीकरण और आत्मनिर्भरता · सैन्य संस्कृति और संवैधानिक मर्यादा
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- अनुच्छेद 53: सेना का सर्वोच्च कमान राष्ट्रपति में निहित होता है
- संघ सूची, प्रविष्टि 1 और 2: रक्षा तथा सशस्त्र बलों पर संघ का विधायी अधिकार
- अनुच्छेद 75: मंत्रिपरिषद द्वारा संसद के प्रति उत्तरदायी नियंत्रण
अवधारणा प्रवाह
दीर्घकालिक रणनीतिक दृष्टि का निर्धारण (भू-राजनीतिक और तकनीकी रुझानों का आकलन) → रक्षा मंत्री द्वारा सेना कमांडरों को नीतिगत दिशा और प्राथमिकताओं से अवगत कराना → सेना कमांडरों द्वारा कमांड-स्तर पर परिचालन योजना और तत्परता का पुनर्मूल्यांकन → बजट, प्रशिक्षण और आधुनिकीकरण कार्यक्रमों में उन प्राथमिकताओं का समावेश → उभरते खतरों (साइबर, ड्रोन, हाइब्रिड युद्ध) के प्रति त्वरित प्रतिक्रिया-क्षमता का विकास → संयुक्त संचालन और अंतर-सेवा समन्वय से समग्र राष्ट्रीय सुरक्षा का सुदृढ़ीकरण
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 53(1) के अंतर्गत संघ के सशस्त्र बलों की सर्वोच्च कमान राष्ट्रपति में निहित है, जिसका प्रयोग विधि के अनुसार किया जाता है।
2. संघ सूची की प्रविष्टि 1 में भारत की रक्षा तथा सेना, नौसेना और वायुसेना का उल्लेख है।
3. चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ का पद वर्ष 2019 में सृजित किया गया और इस पद पर आसीन अधिकारी सैन्य मामलों के विभाग का भी प्रमुख होता है।
4. रक्षा योजना समिति की अध्यक्षता प्रधानमंत्री करते हैं।
उपर्युक्त में से कितने कथन सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- केवल तीन
- सभी चार
उत्तर: केवल तीन — कथन 1 सही है: अनुच्छेद 53(1) के अनुसार संघ की कार्यपालिका शक्ति राष्ट्रपति में निहित है और सशस्त्र बलों की सर्वोच्च कमान भी उन्हीं में है, जिसका प्रयोग विधि के अनुसार होता है। कथन 2 सही है: संघ सूची की प्रविष्टि 1 रक्षा से संबंधित है। कथन 3 सही है: CDS पद 2019 में सृजित हुआ और यह सैन्य मामलों के विभाग का प्रमुख भी है। कथन 4 गलत है: रक्षा योजना समिति (2018) की अध्यक्षता राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार करते हैं, प्रधानमंत्री नहीं।
Q2. निम्नलिखित दो कथनों पर विचार कीजिए:
अभिकथन (A): एकीकृत थिएटर कमान का प्रस्ताव इसलिए किया जाता है ताकि सीमित संसाधनों का अधिक प्रभावी उपयोग हो सके।
कारण (R): थिएटर कमान में तीनों सेवाओं के संसाधन एक ही कमांडर के अधीन आने से दोहराव (duplication) घटता है।
उपर्युक्त के संबंध में सही उत्तर चुनिए:
- (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या है
- (A) और (R) दोनों सही हैं, परंतु (R), (A) की सही व्याख्या नहीं है
- (A) सही है, परंतु (R) गलत है
- (A) गलत है, परंतु (R) सही है
उत्तर: (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या है — यह प्रस्ताव कार्यान्वयन-विवाद का विषय है, पर इसका उद्देश्य संसाधनों के दोहराव को कम करना और संयुक्त संचालन क्षमता बढ़ाना बताया जाता है। शेकटकर समिति (2016) और कारगिल समीक्षा समिति (1999) ने एकीकरण की दिशा में सुझाव दिए थे। अतः (R) (A) की सही व्याख्या है।
Q3. निम्नलिखित में से कौन-सा अनुच्छेद संसद को यह अधिकार देता है कि वह सशस्त्र बलों के सदस्यों के मौलिक अधिकारों पर उनके कर्तव्यों के उचित निर्वहन और अनुशासन हेतु सीमाएँ निर्धारित कर सके?
- अनुच्छेद 19
- अनुच्छेद 33
- अनुच्छेद 53
- अनुच्छेद 73
उत्तर: अनुच्छेद 33 — अनुच्छेद 33 के अंतर्गत संसद विधि द्वारा यह तय कर सकती है कि सशस्त्र बलों, पुलिस तथा अन्य समान बलों के सदस्यों के मौलिक अधिकार किस सीमा तक सीमित किए जाएँ। अनुच्छेद 19 सामान्य नागरिकों की स्वतंत्रताओं से संबंधित है, अनुच्छेद 53 सर्वोच्च कमान से और अनुच्छेद 73 कार्यपालिका शक्ति के विस्तार से संबंधित है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ भारत में सशस्त्र बलों पर नागरिक सर्वोच्चता संवैधानिक प्रावधानों और संस्थागत ढाँचे पर टिकी है, न कि किसी एक व्यक्ति की व्यक्तिगत समझ पर। सेना कमांडरों को दीर्घकालिक सामरिक दृष्टि के साथ-साथ तात्कालिक एवं उभरती चुनौतियों के लिए समान रूप से तैयार रहने के संदर्भ में इस कथन का आलोचनात्मक परीक्षण कीजिए। साथ ही यह भी बताइए कि चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जैसी संयुक्त संस्थाओं के सृजन से परिचालन स्वायत्तता और संसदीय नियंत्रण के बीच संतुलन पर क्या प्रभाव पड़ता है। (15 Marks)
रूपरेखा: उत्तर की संरचना: (1) भूमिका: सेना कमांडर सम्मेलन में रक्षा मंत्री का संदेश सामरिक दीर्घकालिकता और परिचालन तत्परता के संतुलन को रेखांकित करता है; सैम हटिंगटन की पुस्तक ‘द सोल्जर एंड द स्टेट’ में वस्तुनिष्ठ एवं व्यक्तिपरक नागरिक नियंत्रण की अवधारणा और सैमुअल फाइनर की ‘द मैन ऑन हॉर्सबैक’ का संदर्भ दें। (2) संवैधानिक ढाँचा: अनुच्छेद 53(1) (संघ के सशस्त्र बलों की सर्वोच्च कमान राष्ट्रपति में, विधि द्वारा विनियमित); अनुच्छेद 73 (संघ की कार्यपालिका शक्ति का विस्तार); अनुच्छेद 33 (सशस्त्र बलों के मौलिक अधिकारों पर संसदीय सीमा); संघ सूची की प्रविष्टि 1; सेना अधिनियम, 1950 तथा संसद की रक्षा संबंधी स्थायी समिति। (3) संस्थागत विकास: कारगिल समीक्षा समिति (1999) के सुझाव जिनमें एकीकृत रक्षा दृष्टिकोण और राष्ट्रीय सुरक्षा ढाँचे पर बल था; रक्षा योजना समिति (2018, अध्यक्ष: राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार); चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ का सृजन (2019) तथा सैन्य मामलों के विभाग का गठन; शेकटकर समिति (2016) की संयुक्तता संबंधी सिफारिशें। (4) दीर्घकालिक एवं तात्कालिक तत्परता: 2018 में प्रकाशित भारतीय सेना सिद्धांत, रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया, सकारात्मक स्वदेशीकरण सूचियाँ और आत्मनिर्भरता की नीति; सीमा पर तत्कालिक दबाव तथा तकनीकी परिवर्तनों (ड्रोन, साइबर, अंतरिक्ष) जैसी उभरती चुनौतियों का समन्वय। (5) संतुलित दृष्टि: थिएटर कमान के पक्ष में संसाधन-दक्षता और संयुक्त संचालन के तर्क; विरोध में वित्तीय स्वायत्तता, सेवाओं के बीच प्रशासनिक हित और संस्थागत तालमेल की चिंताएँ; नागरिक सर्वोच्चता को परिचालन दक्षता से अलग न करते हुए निर्णय-प्रक्रिया में पारदर्शिता और संसदीय जवाबदेही पर बल। (6) निष्कर्ष: संवैधानिक सीमाओं के भीतर संस्थागत सुधार तथा सेना की व्यावसायिक स्वायत्तता का संतुलन ही दीर्घकालिक और तात्कालिक दोनों चुनौतियों के लिए टिकाऊ आधार है।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
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