24 Oct 19वें ‘अर्बन मोबिलिटी इंडिया सम्मेलन 2026’ का उद्घाटन: भुवनेश्वर में हुआ आयोजन
✎ शहरी गतिशीलता का मूल सिद्धांत है कि शहर में यात्रा व्यक्ति-केंद्रित, सुगम्य, संवहनीय और डिजिटल रूप से एकीकृत हो, और इसका मार्गदर्शक ढाँचा राष्ट्रीय शहरी परिवहन नीति, 2006 है।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — शासन और संविधान (शहरी स्थानीय निकाय, 74वाँ संविधान संशोधन, केंद्र-राज्य समन्वय) | GS Paper II — सामाजिक न्याय (दिव्यांगजनों, महिलाओं, बच्चों और वरिष्ठ नागरिकों के लिए सुगम्यता) | GS Paper III — अवसंरचना (शहरी परिवहन, मेट्रो रेल, सार्वजनिक परिवहन) | GS Paper III — पर्यावरण और ऊर्जा (संवहनीय परिवहन, उत्सर्जन में कमी, स्वच्छ गतिशीलता) | GS Paper III — विज्ञान और प्रौद्योगिकी (डिजिटल प्रौद्योगिकी और इंटेलिजेंट परिवहन प्रणालियाँ)
- Prelims: राष्ट्रीय शहरी परिवहन नीति (NUTP), 2006 और इसका मंत्रालय, 74वाँ संविधान संशोधन अधिनियम, 1992 और बारहवीं अनुसूची (सड़क, बस अड्डे, पार्किंग स्थल), राष्ट्रीय सामान्य गतिशीलता कार्ड (National Common Mobility Card), पीएम ई-बस सेवा (PM e-Bus Sewa), मेट्रो रेल नेटवर्क की वृद्धि और मेट्रो रेल संचालन से संबंधित विधि, सुगम्य भारत अभियान (Accessible India Campaign) और दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016, स्मार्ट सिटीज़ मिशन (Smart Cities Mission) और अटल नवीकरण एवं शहरी परिवर्तन मिशन (AMRUT), परिवहन विषय की संवैधानिक स्थिति: मोटर वाहन (समवर्ती सूची) और स्थानीय शासन (राज्य सूची)
- Essay: डिजिटल युग में शहरी सुगम्यता: समावेशी और सुरक्षित शहर का निर्माण, शहरी गतिशीलता और संवहनीय विकास: सार्वजनिक परिवहन आधारित शहरी नियोजन की चुनौतियाँ
त्वरित पुनरावृत्ति: शहरी गतिशीलता का मूल सिद्धांत है कि शहर में यात्रा व्यक्ति-केंद्रित, सुगम्य, संवहनीय और डिजिटल रूप से एकीकृत हो, और इसका मार्गदर्शक ढाँचा राष्ट्रीय शहरी परिवहन नीति, 2006 है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय ने ओडिशा सरकार के सहयोग से भुवनेश्वर में 19वाँ अर्बन मोबिलिटी इंडिया (यूएमआई) सम्मेलन एवं प्रदर्शनी 2026 आयोजित किया, जिसका उद्घाटन केंद्रीय आवासन और शहरी कार्य राज्य मंत्री श्री तोखन साहू ने किया। 23-24 अक्टूबर 2026 के इस दो दिवसीय सम्मेलन का विषय ‘डिजिटल युग में शहरी सुगम्यता और सुगमता’ है। इसमें 28 प्रदर्शकों ने शहरी परिवहन के सर्वश्रेष्ठ तरीके और नवीन प्रौद्योगिकियाँ प्रदर्शित कीं तथा पहले दिन की चर्चा डिजिटल गतिशीलता, इंटेलिजेंट परिवहन, लैंगिक संवेदनशील योजना और संवहनीय शहरी परिवहन पर केंद्रित रही। केंद्र ने मेट्रो रेल नेटवर्क के विस्तार, राष्ट्रीय सामान्य गतिशीलता कार्ड, क्यूआर-आधारित टिकटिंग और पीएम ई-बस सेवा का उल्लेख करते हुए शहरी गतिशीलता में हो रहे बदलावों को रेखांकित किया। यह समाचार शहरी परिवहन नीति के क्रियान्वयन, सुगम्यता के मानदंड और केंद्र-राज्य सहयोग की दृष्टि से परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण है।
पृष्ठभूमि
- राष्ट्रीय शहरी परिवहन नीति (NUTP), 2006 शहरी परिवहन पर केंद्र सरकार का मार्गदर्शक दस्तावेज़ है। यह व्यक्ति-केंद्रित, न्यायसंगत और संवहनीय परिवहन पर बल देती है, जिसमें पैदल यात्री, साइकिल और सार्वजनिक परिवहन को निजी वाहनों से ऊपर रखा गया है। यूएमआई सम्मेलन इसी नीति के अंतर्गत आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय की वार्षिक पहल है।
- संविधान के 74वें संशोधन (1992) द्वारा शहरी स्थानीय निकायों को संस्थागत स्वरूप मिला। बारहवीं अनुसूची में सड़क, पुल, सार्वजनिक सुविधाएँ, जिनमें बस अड्डे और पार्किंग स्थल शामिल हैं, नगरपालिकाओं के कार्य क्षेत्र में रखे गए हैं। इसी कारण शहरी परिवहन का वास्तविक क्रियान्वयन स्थानीय और राज्य स्तर पर होता है।
- भारत में मेट्रो रेल का विस्तार पिछले दशक में तेज़ी से हुआ है। सम्मेलन में बताए गए आँकड़ों के अनुसार चालू मेट्रो नेटवर्क 2014 के 248 किलोमीटर से बढ़कर 26 शहरों में 1,185 किलोमीटर से अधिक हो गया है, और 998 किलोमीटर की अतिरिक्त लाइनों पर कार्य जारी है।
- दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 में सार्वजनिक परिवहन और भवनों की सुगम्यता को अधिकार के रूप में मान्यता दी गई है। सुगम्य भारत अभियान (2015) इसी दिशा में भौतिक और डिजिटल सुगम्यता सुनिश्चित करने का राष्ट्रीय कार्यक्रम है।
- ओडिशा की ‘अमा बस/मो बस’ सेवाएँ राज्य स्तर पर सार्वजनिक परिवहन के प्रौद्योगिकी-सक्षम मॉडल के रूप में उल्लेखित की गईं, जो राज्य सरकार और शहरी निकायों के सहयोग से संचालित होती हैं।
शहरी गतिशीलता और सुगम्यता क्या है?
- शहरी गतिशीलता (Urban Mobility) से तात्पर्य लोगों और वस्तुओं के शहर के भीतर सुरक्षित, कुशल और सुलभ आवागमन की व्यवस्था से है। इसमें पैदल पथ, साइकिल मार्ग, बस, मेट्रो, रेल और निजी वाहन सभी सम्मिलित हैं।
- संवहनीय शहरी परिवहन (Sustainable Urban Transport) का अर्थ ऐसी व्यवस्था है जो वाहनों की भीड़, वायु प्रदूषण और ऊर्जा खपत को कम करे तथा सार्वजनिक परिवहन, पैदल यात्रा और गैर-मोटरीकृत साधनों को प्राथमिकता दे।
- बहु-मॉडल एकीकरण (Multimodal Integration) में विभिन्न परिवहन साधनों को एक टिकट और समन्वित समय-सारणी के माध्यम से जोड़ा जाता है, जिससे यात्रा की निरंतरता बनी रहती है। ‘आरम्भ और अंत की कनेक्टिविटी’ (First and Last Mile Connectivity) इसी का हिस्सा है।
- सुगम्यता (Accessibility) का अर्थ है कि परिवहन सुविधाएँ, स्टेशन, वाहन और सूचना प्रणाली दिव्यांगजनों, वरिष्ठ नागरिकों, बच्चों और महिलाओं सहित सभी के लिए उपयोग योग्य हों। डिजिटल सुगम्यता में ऑनलाइन टिकटिंग, मार्ग सूचना और भुगतान प्रणाली की पहुँच भी आती है।
- राष्ट्रीय सामान्य गतिशीलता कार्ड (National Common Mobility Card) एक ही कार्ड से विभिन्न सार्वजनिक परिवहन साधनों में भुगतान की सुविधा देता है। क्यूआर-आधारित टिकटिंग इसी डिजिटल एकीकरण का एक रूप है।
- पीएम ई-बस सेवा (PM e-Bus Sewa) शहरों में इलेक्ट्रिक बसों की उपलब्धता बढ़ाने के उद्देश्य से शुरू की गई योजना है, जिसका लक्ष्य सार्वजनिक परिवहन को स्वच्छ बनाना है।
- शहरी परिवहन पर कानूनी और संस्थागत ढाँचा बहु-स्तरीय है। मोटर वाहन संबंधी विधि केंद्र सरकार के मोटर वाहन अधिनियम, 1988 से संचालित होती है, जबकि स्थानीय परिवहन सेवाओं और सार्वजनिक सुविधाओं का प्रबंधन मुख्य रूप से राज्य और शहरी स्थानीय निकायों के दायित्व में आता है।
मुख्य विशेषताएँ
| Feature | Significance |
|---|---|
| सम्मेलन का स्वरूप | 19वाँ अर्बन मोबिलिटी इंडिया (यूएमआई) सम्मेलन एवं प्रदर्शनी 2026 भुवनेश्वर में 23-24 अक्टूबर 2026 को दो दिवसीय रूप में आयोजित हुआ। इसका आयोजन आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय ने ओडिशा सरकार के सहयोग से शहरी परिवहन संस्थान (भारत) के माध्यम से किया। |
| मुख्य विषय | ‘डिजिटल युग में शहरी सुगम्यता और सुगमता’ विषय के अंतर्गत डिजिटल तकनीक के माध्यम से शहरी पहुँच, एकीकृत परिवहन अवसंरचना और शहरी जीवन की गुणवत्ता में सुधार पर चर्चा हुई। |
| आधार नीति | यह सम्मेलन राष्ट्रीय शहरी परिवहन नीति (National Urban Transport Policy), 2006 के अंतर्गत मंत्रालय की वार्षिक पहल है। नीति राज्य और शहर स्तर पर क्षमता निर्माण और न्यायसंगत व संवहनीय परिवहन प्रणालियों पर बल देती है। |
| प्रदर्शनी | 28 प्रदर्शकों ने शहरी परिवहन में सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों, नवीन प्रौद्योगिकी और समाधानों का प्रदर्शन किया, जिससे नीति-निर्माताओं, परिवहन उपक्रमों और उद्योग के बीच संवाद का मंच बना। |
| पहले दिन की चर्चाएँ | डिजिटल गतिशीलता, इंटेलिजेंट परिवहन (Intelligent Transport System), लैंगिक संवेदनशीलता को ध्यान में रखकर बनाई गई योजनाएँ और संवहनीय शहरी परिवहन पर केंद्रित रहीं। |
| मेट्रो रेल विस्तार | भारत का चालू मेट्रो नेटवर्क 2014 के 248 किलोमीटर से बढ़कर 26 शहरों में 1,185 किलोमीटर से अधिक हो गया है, और 998 किलोमीटर की अतिरिक्त लाइनों पर कार्य जारी है। |
महत्व
सामाजिक और समावेशी आयाम
- शहरी विकास की वास्तविक प्रगति को इस आधार पर आँका जाना चाहिए कि महिलाएँ, बच्चे, वरिष्ठ नागरिक और दिव्यांगजन शहरों में कितनी सुरक्षा, आराम और स्वतंत्रता से यात्रा कर सकते हैं।
- सुगम्यता को परिवहन नीति का केंद्रीय मानदंड बनाना सामाजिक न्याय और समान अवसर के सिद्धांत को व्यवहार में लाने का प्रयास है।
- लैंगिक संवेदनशील नियोजन से मार्ग, समय-सारणी और सुरक्षा व्यवस्था महिलाओं की वास्तविक आवश्यकताओं के अनुरूप बनती है।
आर्थिक और पर्यावरणीय आयाम
- सार्वजनिक परिवहन का विस्तार वाहनों की भीड़ और यातायात में होने वाले समय-नुकसान को घटाकर नगरीय उत्पादकता बढ़ाता है।
- संवहनीय और कम कार्बन उत्सर्जन वाला परिवहन वायु गुणवत्ता सुधारने और जलवायु लक्ष्यों की दिशा में योगदान देता है।
- इलेक्ट्रिक बसों और मेट्रो जैसे साधनों से ईंधन आयात पर निर्भरता और शहरी प्रदूषण, दोनों में कमी की संभावना बनती है।
संघीय और प्रशासनिक आयाम
- ओडिशा सरकार के सहयोग से केंद्र द्वारा सम्मेलन का आयोजन केंद्र-राज्य समन्वय का व्यावहारिक उदाहरण है।
- शहरी परिवहन मुख्यतः राज्य और नगर निकायों का विषय है, इसलिए नीति के स्तर पर क्षमता निर्माण और सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों का आदान-प्रदान महत्वपूर्ण है।
- ‘अमा बस/मो बस’ जैसी राज्य सेवाओं को उदाहरण के रूप में रेखांकित करना राज्य स्तर के नवाचारों के प्रसार का माध्यम बनता है।
विकसित भारत 2047 से संबंध
- मंत्री के अनुसार कुशल और समावेशी शहरी गतिशीलता ‘विकसित भारत 2047’ के दृष्टिकोण को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
- शहरीकरण की तीव्र गति को देखते हुए आर्थिक गतिविधियों की कुशल पहुँच के लिए सुदृढ़ सार्वजनिक परिवहन आवश्यक है।
चुनौतियाँ
1. डिजिटल विभाजन (Digital Divide)
- डिजिटल टिकटिंग, मोबाइल ऐप और ऑनलाइन सूचना प्रणाली का लाभ वही उठा पाते हैं जिनके पास स्मार्टफोन और डिजिटल साक्षरता है।
- वरिष्ठ नागरिक, गरीब वर्ग और दिव्यांगजन डिजिटल सेवाओं से बाहर रह सकते हैं, जिससे सुगमता का लक्ष्य अधूरा रहता है।
- डिजिटल प्रणालियों के साथ गैर-डिजिटल विकल्प बनाए रखना समावेशी नीति की आवश्यकता है।
यूपीएससी लिंक: GS-2: सामाजिक न्याय, संवेदनशील वर्ग; GS-3: डिजिटल अर्थव्यवस्था
2. वित्तीय और संस्थागत क्षमता
- मेट्रो परियोजनाओं की लागत अधिक और निर्माण अवधि लंबी होती है, जिससे राज्यों और नगर निकायों पर वित्तीय दबाव बढ़ता है।
- नगर निकायों के पास परिवहन का नियोजन, संचालन और राजस्व संग्रह की पर्याप्त क्षमता अक्सर नहीं होती।
- सार्वजनिक परिवहन के संचालन और किराया-नीति के संतुलन की चुनौती बनी रहती है।
यूपीएससी लिंक: GS-2: स्थानीय स्वशासन, संघवाद; GS-3: आधारभूत संरचना, सार्वजनिक वित्त
3. मल्टीमॉडल एकीकरण और आरंभ-अंत कनेक्टिविटी
- मेट्रो, बस, रेल और पैदल यात्रा के बीच निर्बाध संक्रमण न होने से यात्री निजी वाहनों की ओर लौटते हैं।
- ‘फर्स्ट एंड लास्ट माइल’ (First and Last Mile) कनेक्टिविटी का अभाव सार्वजनिक परिवहन की उपयोगिता घटाता है।
- एकीकृत टिकटिंग (जैसे राष्ट्रीय सामान्य गतिशीलता कार्ड) की सफलता अलग-अलग एजेंसियों के समन्वय पर निर्भर करती है।
यूपीएससी लिंक: GS-3: आधारभूत संरचना, शहरीकरण की चुनौतियाँ
4. सुरक्षा और लैंगिक संवेदनशीलता
- रात्रि यात्रा, भीड़भाड़ वाले वाहनों और सुनसान स्टॉपों पर महिलाओं की सुरक्षा एक बड़ी बाधा है।
- परिवहन नियोजन अक्सर पुरुष यात्रा-पैटर्न को आधार बनाता है, जिससे महिलाओं की यात्रा-आवश्यकताएँ उपेक्षित रहती हैं।
यूपीएससी लिंक: GS-1: शहरीकरण की समस्याएँ; GS-2: महिला सशक्तीकरण और सुरक्षा
5. वायु प्रदूषण और वाहन भीड़
- निजी वाहनों की बढ़ती संख्या से यातायात जाम, ईंधन खपत और वाहन-जनित प्रदूषण बढ़ता है।
- संवहनीय परिवहन की ओर संक्रमण के लिए चार्जिंग अवसंरचना और बैटरी प्रबंधन जैसी सुविधाएँ आवश्यक हैं।
यूपीएससी लिंक: GS-3: पर्यावरण संरक्षण, ऊर्जा; GS-3: प्रौद्योगिकी का उपयोग
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| Issue | Concern |
|---|---|
| डिजिटल पहुँच | स्मार्टफोन, इंटरनेट और डिजिटल साक्षरता के अभाव में वरिष्ठ नागरिक, गरीब और दिव्यांगजन सेवाओं से बाहर रह सकते हैं। |
| वित्तीय दबाव | मेट्रो और इलेक्ट्रिक बस परियोजनाओं की पूँजी-लागत और संचालन-व्यय का भार राज्यों और नगर निकायों पर पड़ता है। |
| संस्थागत समन्वय | मेट्रो, बस और अन्य साधनों के अलग-अलग प्राधिकरणों के बीच समन्वय की कमी से एकीकृत यात्रा कठिन होती है। |
| महिला सुरक्षा | रात्रि यात्रा और सार्वजनिक स्थानों पर असुरक्षा महिलाओं की स्वतंत्र आवाजाही को सीमित करती है। |
| प्रदूषण और भीड़ | निजी वाहनों पर निर्भरता से यातायात जाम और वायु प्रदूषण बढ़ते हैं। |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- प्रधानमंत्री ई-बस सेवा (PM e-Bus Sewa)
- राष्ट्रीय सामान्य गतिशीलता कार्ड (National Common Mobility Card)
- अमा बस/मो बस (ओडिशा सरकार की बस सेवाएँ)
आगे की राह
- सार्वजनिक परिवहन की योजना में सुगम्यता के मानक (दिव्यांगजन, वरिष्ठ नागरिक और बच्चों की आवश्यकताएँ) अनिवार्य रूप से शामिल किए जाएँ।
- डिजिटल टिकटिंग के साथ नकद, कार्ड और हेल्पलाइन जैसे गैर-डिजिटल विकल्प बनाए रखे जाएँ ताकि डिजिटल विभाजन न बढ़े।
- मेट्रो, बस और पैदल मार्गों के बीच एकीकृत टिकटिंग और समयबद्ध संपर्क-व्यवस्था (Last Mile Connectivity) को प्राथमिकता दी जाए।
- नगर निकायों की नियोजन, वित्तीय प्रबंधन और परियोजना-संचालन क्षमता को सुदृढ़ करने हेतु प्रशिक्षण और तकनीकी सहायता बढ़ाई जाए।
- महिलाओं की सुरक्षा के लिए लैंगिक संवेदनशील परिवहन नियोजन, पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था और सुरक्षित स्टॉप सुनिश्चित किए जाएँ।
- इलेक्ट्रिक बसों और गैर-मोटरीकृत परिवहन (Non-Motorised Transport) के लिए चार्जिंग और मार्ग-अवसंरचना का समेकित विकास किया जाए।
- राज्यों की सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों का दस्तावेजीकरण और प्रसार कर उन्हें अन्य शहरों के लिए मानक-प्रारूप के रूप में अपनाया जाए।
- मेट्रो और अन्य परियोजनाओं की वित्तीय व्यवहार्यता के लिए विकास-आधारित राजस्व और सार्वजनिक-निजी भागीदारी के मॉडलों का मूल्यांकन किया जाए।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
शहरी गतिशीलता (Urban Mobility) · राष्ट्रीय शहरी परिवहन नीति, 2006 (National Urban Transport Policy, 2006) · सुगम्यता (Accessibility) · मेट्रो रेल अवसंरचना · एकीकृत बहु-मॉडल परिवहन (Integrated Multimodal Transport) · संवहनीय सार्वजनिक परिवहन (Sustainable Public Transport) · राष्ट्रीय सामान्य गतिशीलता कार्ड (National Common Mobility Card) · पीएम ई-बस सेवा (PM e-Bus Sewa) · 74वाँ संविधान संशोधन अधिनियम, 1992 (74th Constitutional Amendment Act, 1992) · नगरपालिकाओं की वित्तीय स्वायत्तता · लैंगिक संवेदनशीलता (Gender Sensitivity) · विकसित भारत 2047
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- अनुच्छेद 243W: नगरपालिकाओं के कार्य, सड़क और नगर नियोजन
- अनुच्छेद 19(1)(घ): देश के भीतर स्वतंत्र आवागमन का अधिकार
- अनुच्छेद 15(3): महिलाओं और बच्चों के लिए विशेष प्रावधान
अवधारणा प्रवाह
राष्ट्रीय शहरी परिवहन नीति (2006) शहरी गतिशीलता के लिए नीतिगत दिशा और क्षमता निर्माण का ढाँचा प्रदान करती है। → वार्षिक सम्मेलन के माध्यम से केंद्र, राज्य, नगर निकाय और उद्योग के बीच सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों और नवाचारों का आदान-प्रदान होता है। → मेट्रो नेटवर्क, इलेक्ट्रिक बस और एकीकृत टिकटिंग जैसी अवसंरचना और सेवाओं का विस्तार होता है। → डिजिटल तकनीक (कार्ड, क्यूआर टिकट, इंटेलिजेंट परिवहन) से यात्रा सुगम और निर्बाध बनती है। → सुगम्यता और लैंगिक संवेदनशीलता के मानक नियोजन में जुड़ने से सभी वर्गों की सुरक्षित और स्वतंत्र आवाजाही संभव होती है। → सार्वजनिक परिवहन पर निर्भरता बढ़ने से वाहन-भीड़ और उत्सर्जन घटते हैं, जिससे संवहनीय शहरी विकास आगे बढ़ता है। → संवहनीय शहरी गतिशीलता विकसित भारत 2047 के लक्ष्य में योगदान देती है।
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. Consider the following statements regarding urban transport and urban governance in India:
1. ‘Urban planning including town planning’ is an item in the Twelfth Schedule of the Constitution.
2. ‘Parking lots’ and ‘bus stops’ are listed among the public amenities in the Twelfth Schedule.
3. ‘Urban transport’ is a subject enumerated in the Union List of the Seventh Schedule.
How many of the above statements are correct?
- Only one
- Only two
- Only three
- All
उत्तर: Only two — कथन 1 सही है: बारहवीं अनुसूची की पहली मद नगर नियोजन, जिसमें टाउन प्लानिंग शामिल है, नगरपालिकाओं को सौंपी गई है। कथन 2 सही है: उसी अनुसूची की अठारहवीं मद में सड़क-बत्ती, पार्किंग स्थल और बस अड्डे जैसी सार्वजनिक सुविधाएँ आती हैं। कथन 3 गलत है: शहरी परिवहन का कोई सीधा उल्लेख संघ सूची में नहीं है; अतः सही कथन दो हैं।
Q2. निम्नलिखित में से प्रत्येक को उसकी विशेषता से सुमेलित कीजिए:
सूची-I (पहल/विधि)
1. राष्ट्रीय सामान्य गतिशीलता कार्ड (National Common Mobility Card)
2. मेट्रो रेल अधिनियम, 2002 (Metro Rail Act, 2002)
3. राष्ट्रीय शहरी परिवहन नीति, 2006 (National Urban Transport Policy, 2006)
सूची-II (विशेषता)
a. मेट्रो रेल परियोजनाओं के निर्माण, संचालन और नियमन हेतु वैधानिक ढाँचा
b. निजी वाहनों से हटकर सार्वजनिक एवं गैर-मोटरीकृत परिवहन की ओर बढ़ने पर बल
c. विभिन्न परिवहन साधनों में एक ही कार्ड से भुगतान की अंतर-संचालनीयता (Interoperability)
सही सुमेलन चुनिए:
- 1-a, 2-b, 3-c
- 1-c, 2-a, 3-b
- 1-b, 2-c, 3-a
- 1-c, 2-b, 3-a
उत्तर: 1-c, 2-a, 3-b — राष्ट्रीय सामान्य गतिशीलता कार्ड (1) का संबंध अंतर-संचालनीय भुगतान प्रणाली से है, अतः 1-c। मेट्रो रेल अधिनियम, 2002 (2) एक वैधानिक ढाँचा है, अतः 2-a। राष्ट्रीय शहरी परिवहन नीति, 2006 (3) एक नीति-दस्तावेज़ है जो सार्वजनिक एवं गैर-मोटरीकृत परिवहन पर बल देती है, अतः 3-b।
Q3. निम्नलिखित पर विचार कीजिए:
अभिकथन (A): राष्ट्रीय शहरी परिवहन नीति, 2006 शहरों में निजी वाहनों पर निर्भरता घटाकर सार्वजनिक परिवहन और गैर-मोटरीकृत परिवहन को प्राथमिकता देने पर बल देती है।
कारण (R): यह नीति संसद द्वारा पारित एक वैधानिक अधिनियम है, जो सभी नगरपालिकाओं पर बाध्यकारी है।
उपर्युक्त के संदर्भ में सही उत्तर चुनिए:
- A और R दोनों सही हैं और R, A की सही व्याख्या है
- A और R दोनों सही हैं, किंतु R, A की सही व्याख्या नहीं है
- A सही है, किंतु R गलत है
- A गलत है, किंतु R सही है
उत्तर: A सही है, किंतु R गलत है — अभिकथन (A) सही है, क्योंकि नीति का केंद्रीय जोर सार्वजनिक एवं गैर-मोटरीकृत परिवहन पर है। कारण (R) गलत है, क्योंकि राष्ट्रीय शहरी परिवहन नीति, 2006 एक नीति-दस्तावेज़ है, संसदीय अधिनियम नहीं; इसलिए यह बाध्यकारी कानून नहीं है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ भारत के बड़े शहरों में मेट्रो रेल नेटवर्क के तीव्र विस्तार और डिजिटल भुगतान तथा टिकट प्रणालियों के एकीकरण से सार्वजनिक परिवहन अधिक सुलभ हो रहा है। इस कथन के संदर्भ में शहरी गतिशीलता में हुए सुधारों का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। साथ ही बताइए कि नगरपालिकाओं की वित्तीय एवं प्रशासनिक क्षमता इस विस्तार को संवहनीय बनाने में कहाँ तक बाधक है? (15 Marks)
रूपरेखा: उत्तर-कंकाल (Model-Answer Skeleton):
1. भूमिका: मेट्रो नेटवर्क का आँकड़ा (2014 में लगभग 248 किमी से बढ़कर 26 शहरों में 1,185 किमी से अधिक; लगभग 998 किमी पर कार्य जारी, सम्मेलन के उद्घाटन में मंत्री द्वारा उल्लिखित) तथा ‘डिजिटल युग में शहरी सुगम्यता’ विषय।
2. संवैधानिक ढाँचा: शहरी नियोजन और सड़क, बस अड्डे व पार्किंग स्थल जैसी सुविधाएँ 74वें संविधान संशोधन (1992) के अंतर्गत अनुच्छेद 243W तथा बारहवीं अनुसूची की मदों 1, 4 और 18 से जुड़ी हैं; परिवहन में राज्यों और नगरपालिकाओं की भूमिका का विश्लेषण। अनुच्छेद 243Y (राज्य वित्त आयोग) और अनुच्छेद 243I (वित्त आयोग) के माध्यम से नगरपालिका वित्त।
3. नीतिगत एवं विधिक ढाँचा: राष्ट्रीय शहरी परिवहन नीति, 2006 (सार्वजनिक एवं गैर-मोटरीकृत परिवहन, क्षमता निर्माण), मेट्रो रेल अधिनियम, 2002, मेट्रो रेल नीति, 2017; राष्ट्रीय सामान्य गतिशीलता कार्ड, क्यूआर-आधारित टिकटिंग, पीएम ई-बस सेवा।
4. सुधारों का समालोचनात्मक मूल्यांकन: एकीकृत बहु-मॉडल संपर्क (पहला/अंतिम मील कनेक्टिविटी), ओडिशा की ‘अमा बस/मो बस’ जैसे राज्य-स्तरीय मॉडल, उत्सर्जन में कमी और संवहनीय परिवहन के पक्ष में तर्क।
5. बाधाएँ: मेट्रो परियोजनाओं की उच्च पूँजी लागत और कम किराया-आय (fare-box) से वित्तीय व्यवहार्यता; नगरपालिकाओं की राजस्व-क्षमता, संचालन-संधारण और तकनीकी कर्मचारियों की कमी; कई एजेंसियों (राज्य, नगर निगम, विकास प्राधिकरण, मेट्रो निगम) के बीच समन्वय की समस्या; डिजिटल विभाजन, डेटा गोपनीयता (डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम, 2023) की चिंता।
6. सुगम्यता और समावेशन: दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 के सुगम्यता प्रावधान (धारा 40 सहित); महिलाओं, बच्चों और वरिष्ठ नागरिकों की सुरक्षा और लैंगिक संवेदनशील योजना की आवश्यकता।
7. संतुलित दृष्टि और निष्कर्ष: केंद्र की पहल बनाम राज्य/स्थानीय स्वशासन की वास्तविक स्वायत्तता; सुझाव के रूप में नगरीय वित्त का सुदृढ़ीकरण, राज्य वित्त आयोगों की सिफारिशों का सम्मान, क्षमता निर्माण, और ‘विकसित भारत 2047’ के संदर्भ में समावेशी शहरी परिवहन का संतुलित निष्कर्ष।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
Odisha PCS (OPSC (OAS)) — राज्य PCS अभ्यास
Prelims: ओडिशा राज्य लोक सेवा आयोग (OPSC) द्वारा आयोजित ओडिशा प्रशासनिक सेवा (OAS) प्रारंभिक परीक्षा 2026 में ‘अर्बन मोबिलिटी इंडिया सम्मेलन एवं प्रदर्शनी 2026’ के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सही है?
- A. यह सम्मेलन 2025 में भुवनेश्वर में आयोजित किया जाएगा।
- B. यह सम्मेलन 2026 में भुवनेश्वर में आयोजित किया जाएगा और इसका उद्घाटन मुख्यमंत्री द्वारा किया जाएगा।
- C. यह सम्मेलन ओडिशा में पहली बार आयोजित किया जा रहा है।
- D. यह सम्मेलन केवल अंतर्राष्ट्रीय प्रतिभागियों के लिए आयोजित किया जाएगा।
उत्तर: B. यह सम्मेलन 2026 में भुवनेश्वर में आयोजित किया जाएगा और इसका उद्घाटन मुख्यमंत्री द्वारा किया जाएगा। — 2026 में भुवनेश्वर में ‘अर्बन मोबिलिटी इंडिया सम्मेलन एवं प्रदर्शनी’ का आयोजन किया जाएगा, जिसका उद्घाटन राज्य के मुख्यमंत्री द्वारा किया जाएगा।
Mains: ओडिशा राज्य में ‘अर्बन मोबिलिटी इंडिया सम्मेलन एवं प्रदर्शनी 2026’ के आयोजन के महत्व और इसके द्वारा राज्य के शहरी परिवहन क्षेत्र में उत्पन्न होने वाले संभावित अवसरों एवं चुनौतियों पर लगभग 250 शब्दों में चर्चा कीजिए।
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
- केरल में बच्चों की कुपोषण और उपेक्षा से मृत्यु रोकने की तैयारी, जानिए कैसे - October 24, 2026
- Liechtenstein Prince’s India Visit: Key Agreements & Bilateral Focus - October 24, 2026
- 19वें ‘अर्बन मोबिलिटी इंडिया सम्मेलन 2026’ का उद्घाटन: भुवनेश्वर में हुआ आयोजन - October 24, 2026

No Comments