तेलंगाना का नया एयरोस्पेस और रक्षा नीति 2.0: UPSC के लिए महत्वपूर्ण जानकारी

तेलंगाना का नया एयरोस्पेस और रक्षा नीति 2.0: UPSC के लिए महत्वपूर्ण जानकारी

तेलंगाना का नया एयरोस्पेस और रक्षा नीति 2.0: UPSC के लिए महत्वपूर्ण जानकारी

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✎ संविधान के अनुसार रक्षा संघ सूची का विषय है जबकि उद्योग राज्य सूची में आता है (संघ सूची प्रविष्टि 52 के अधीन), इसलिए रक्षा विनिर्माण में केंद्र और राज्य का सहयोग अनिवार्य है।

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विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper III — सुरक्षा (रक्षा उत्पादन, स्वदेशीकरण और रक्षा निर्यात)  |  GS Paper III — अर्थव्यवस्था (औद्योगिक नीति, निवेश और विनिर्माण)  |  GS Paper II — शासन और संघवाद (राज्यों की औद्योगिक नीति और संवैधानिक विभाजन)
  • Prelims: रक्षा औद्योगिक गलियारे (Defence Industrial Corridors): वर्तमान में उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु में, iDEX (Innovations for Defence Excellence): रक्षा मंत्रालय की नवाचार पहल, IN-SPACe (Indian National Space Promotion and Authorisation Centre): निजी अंतरिक्ष गतिविधियों हेतु प्राधिकरण, सकारात्मक स्वदेशीकरण सूची (Positive Indigenisation List): आयात प्रतिस्थापन का साधन, VLF (Very Low Frequency) संचार सुविधा: पनडुब्बियों से संचार हेतु, संविधान की सातवीं अनुसूची: संघ सूची प्रविष्टि 1 (रक्षा) और राज्य सूची प्रविष्टि 24 (उद्योग), संघ सूची प्रविष्टि 52: संसद द्वारा घोषित उद्योगों पर संघ का नियंत्रण, दोहरे उपयोग (Dual-use) प्रौद्योगिकी: ड्रोन, AI और अंतरिक्ष तकनीक का नागरिक-सैन्य उपयोग
  • Essay: संघवाद और राज्यों की औद्योगिक प्रतिस्पर्धा: क्या राज्य-स्तरीय निवेश नीतियाँ राष्ट्रीय रक्षा विनिर्माण को सुदृढ़ कर सकती हैं?, आत्मनिर्भर रक्षा उत्पादन से रक्षा निर्यात तक: भारत की सामरिक स्वायत्तता और आर्थिक संवृद्धि

त्वरित पुनरावृत्ति: संविधान के अनुसार रक्षा संघ सूची का विषय है जबकि उद्योग राज्य सूची में आता है (संघ सूची प्रविष्टि 52 के अधीन), इसलिए रक्षा विनिर्माण में केंद्र और राज्य का सहयोग अनिवार्य है।

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यह खबर चर्चा में क्यों?

तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने Raksha Expo-2026 की पूर्व-घोषणा (curtain-raiser) के अवसर पर कहा कि राज्य सरकार शीघ्र ही अपनी वैमानिकी एवं रक्षा नीति 2.0 जारी करेगी, जो तेलंगाना राइजिंग विजन 2047 के अनुरूप होगी। राज्य का लक्ष्य रक्षा विनिर्माण का देश का सबसे बड़ा औद्योगिक केंद्र बनना बताया गया है, और रक्षा विनिर्माण, वैमानिकी, अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी, साइबर सुरक्षा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और ड्रोन प्रौद्योगिकी में निवेश का आह्वान किया गया है। हैदराबाद में स्थित अनुसंधान संस्थानों और सैन्य प्रतिष्ठानों का उल्लेख किया गया तथा दक्षिण भारत के इकलौते स्थल-रुद्ध (landlocked) राज्य द्वारा नौसेना के लिए निर्माणाधीन VLF सुविधा का भी संदर्भ दिया गया। मुख्यमंत्री ने नीतिगत स्थिरता और निवेशकों के लिए अनुकूल वातावरण पर बल दिया। राज्य की आर्थिक भूमिका के संदर्भ में बताया गया कि तेलंगाना की जनसंख्या भारत की 2.5 प्रतिशत से अधिक है, जबकि सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में उसका योगदान लगभग 5 प्रतिशत है, और 2047 तक इसे 10 प्रतिशत तक ले जाने का लक्ष्य रखा गया है। यह घोषणा इसलिए महत्त्वपूर्ण है क्योंकि रक्षा उत्पादन में राज्यों की भूमिका संवैधानिक रूप से उद्योग के विषय से जुड़ी है।

पृष्ठभूमि

  • रक्षा उत्पादन परंपरागत रूप से सार्वजनिक क्षेत्र के प्रतिष्ठानों के माध्यम से संचालित होता रहा है। वर्ष 2021 में आयुध निर्माणी बोर्ड की निर्माणियों को सात रक्षा सार्वजनिक उपक्रमों (DPSU) में पुनर्गठित किया गया, जिससे प्रबंधन और दक्षता पर ज़ोर बढ़ा।
  • ‘मेक इन इंडिया’ के अंतर्गत रक्षा विनिर्माण को प्राथमिक क्षेत्रों में रखा गया है, और रक्षा आयात पर निर्भरता घटाने के लिए स्वदेशीकरण को नीतिगत लक्ष्य बनाया गया है।
  • केंद्र सरकार ने उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु में दो रक्षा औद्योगिक गलियारे विकसित किए हैं। इससे राज्यों के बीच रक्षा निवेश आकर्षित करने की प्रतिस्पर्धा बढ़ी है, और कई राज्य अपनी वैमानिकी व रक्षा नीतियाँ घोषित कर रहे हैं।
  • तेलंगाना राज्य 2 जून 2014 को अस्तित्व में आया। हैदराबाद में रक्षा और वैमानिकी से जुड़े अनुसंधान एवं उत्पादन संस्थानों की उपस्थिति ने राज्य को इस क्षेत्र में अग्रणी बनने की संभावना दी है।
  • तेलंगाना राइजिंग विजन 2047 राज्य का दीर्घकालिक विकास दस्तावेज़ है, जो राष्ट्रीय स्तर पर विकसित भारत 2047 के लक्ष्य से संगत है।

रक्षा एवं वैमानिकी नीति क्या है?

  • संवैधानिक ढाँचा: संविधान की सातवीं अनुसूची के अंतर्गत रक्षा संघ सूची की प्रविष्टि 1 में आती है, जबकि उद्योग राज्य सूची की प्रविष्टि 24 में है, जो संघ सूची की प्रविष्टि 7 और 52 के अधीन है। इसी कारण रक्षा विनिर्माण में केंद्र और राज्य दोनों की भूमिका होती है।
  • राज्य सरकारें भूमि आवंटन, निवेश प्रोत्साहन, एक-खिड़की स्वीकृति और कौशल विकास के माध्यम से उद्योगों को आकर्षित करती हैं। यही उपाय राज्य की वैमानिकी एवं रक्षा नीति का केंद्र होते हैं।
  • सकारात्मक स्वदेशीकरण सूची (Positive Indigenisation List) उन रक्षा वस्तुओं की सूची है, जिनका आयात चरणबद्ध रूप से बंद कर उन्हें स्वदेशी स्रोतों से प्राप्त किया जाता है।
  • iDEX (Innovations for Defence Excellence) स्टार्टअप और MSME के नवाचारों को रक्षा आवश्यकताओं से जोड़ने का मंच है, जिससे रक्षा अनुसंधान में निजी भागीदारी बढ़ती है।
  • IN-SPACe (Indian National Space Promotion and Authorisation Centre) भारत में निजी अंतरिक्ष गतिविधियों के लिए प्राधिकरण और संवर्धन का कार्य करता है, जो अंतरिक्ष-आधारित रक्षा तकनीक से भी जुड़ता है।
  • ड्रोन, AI और अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी दोहरे उपयोग (dual-use) वाली तकनीकें हैं, जिनका नागरिक और सैन्य, दोनों क्षेत्रों में उपयोग होता है। इसलिए इन पर नीतिगत ध्यान बढ़ा है।
  • VLF (Very Low Frequency) सुविधा मुख्यतः पनडुब्बियों के साथ संचार के लिए प्रयुक्त होती है। समाचार में इसे ‘radar’ सुविधा कहा गया है, जबकि तकनीकी रूप से यह संचार सुविधा है। परीक्षा में इस अंतर को ध्यान में रखें।
  • रक्षा निर्यात पर बल का अर्थ है कि भारत केवल प्रौद्योगिकी आयात करने के बजाय उन्नत रक्षा उपकरणों का उत्पादन और निर्यात करे। इससे विदेशी मुद्रा अर्जन, औद्योगिक विस्तार और सामरिक प्रभाव तीनों को लाभ मिलता है।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
नीति का स्वरूप एयरोस्पेस और रक्षा नीति 2.0 (Aerospace and Defence Policy 2.0) राज्य स्तर पर उद्योग-केंद्रित नीति है, जिसे तेलंगाना राइजिंग विज़न 2047 (Telangana Rising Vision 2047) के अनुरूप बनाया जा रहा है।
प्रमुख लक्ष्य राज्य को देश का सबसे बड़ा रक्षा उद्योग केंद्र बनाना और राष्ट्रीय सकल घरेलू उत्पाद (Gross Domestic Product, GDP) में राज्य की हिस्सेदारी को लगभग 5 प्रतिशत से बढ़ाकर 2047 तक 10 प्रतिशत करना।
लक्षित क्षेत्र रक्षा विनिर्माण, एयरोस्पेस, अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी, साइबर सुरक्षा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence, AI) और ड्रोन प्रौद्योगिकी।
आधारभूत ढाँचा हैदराबाद में अनुसंधान संस्थान, कुशल मानव संसाधन और सेना तथा वायुसेना से जुड़े रणनीतिक प्रतिष्ठान, जो रक्षा पारिस्थितिकी तंत्र को सहारा देते हैं।
नौसैनिक योगदान विकाराबाद ज़िले के दमगुंडम आरक्षित वन में निर्माणाधीन बहुत निम्न आवृत्ति (Very Low Frequency, VLF) नौसैनिक रडार सुविधा, जो भू-आवेष्टित राज्य होने के बावजूद नौसेना की क्षमता में योगदान देती है।
घोषणा का संदर्भ रक्षा एक्सपो-2026 (Raksha Expo-2026) के पूर्व-परिचय (curtain-raiser) कार्यक्रम में नीति की घोषणा, जो राज्य की औद्योगिक प्राथमिकताओं को रेखांकित करती है।

महत्व

आर्थिक महत्व

  • रक्षा और एयरोस्पेस विनिर्माण में निवेश बढ़ने से औद्योगिक गतिविधि और आपूर्ति शृंखला का विस्तार होता है।
  • राज्य की राष्ट्रीय आर्थिक हिस्सेदारी बढ़ाने का लक्ष्य क्षेत्रीय असमानता को कम करने की दिशा में एक नीतिगत प्रयास है।
  • उच्च तकनीक क्षेत्रों में निर्यात-उन्मुख विनिर्माण से विदेशी मुद्रा अर्जन की संभावना बनती है।

रणनीतिक एवं सुरक्षा महत्व

  • विदेशी रक्षा तकनीक पर निर्भरता घटाना आत्मनिर्भर भारत की रक्षा नीति के उद्देश्य से जुड़ा है।
  • मज़बूत रक्षा क्षमता को प्रतिरोधक (deterrence) के रूप में देखा जाता है, जिससे संघर्ष की संभावना कम हो सकती है।
  • नौसैनिक रडार जैसी सुविधाएँ देश की समुद्री निगरानी और संचार क्षमता को सुदृढ़ करती हैं।

तकनीकी एवं नवाचार महत्व

  • अंतरिक्ष, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, साइबर सुरक्षा और ड्रोन जैसे दोहरे उपयोग (dual-use) वाले क्षेत्रों में नवाचार को बढ़ावा मिलता है।
  • अनुसंधान संस्थानों और उद्योग के बीच सहयोग से स्वदेशी प्रौद्योगिकी विकसित करने की संभावना बढ़ती है।

संघीय एवं प्रशासनिक महत्व

  • रक्षा विनिर्माण मूलतः संघ सरकार का विषय है, जबकि राज्य अपनी औद्योगिक नीति के माध्यम से इस क्षेत्र में योगदान देता है। यह सहकारी संघवाद (Cooperative Federalism) का व्यावहारिक उदाहरण है।
  • राज्य द्वारा भूमि, अवसंरचना और निवेशक सहायता उपलब्ध कराने की प्रतिबद्धता नीति के क्रियान्वयन की क्षमता को दर्शाती है।

चुनौतियाँ

1. केंद्र-राज्य अधिकार-क्षेत्र का समन्वय

  • रक्षा और सशस्त्र बलों से जुड़े विषय संघ सूची में आते हैं, जबकि उद्योग राज्य सूची का विषय है। इसलिए दोनों स्तरों के बीच स्पष्ट समन्वय आवश्यक है।
  • राज्य की नीति और केंद्र के रक्षा अधिग्रहण तथा विनिर्माण ढाँचे के बीच तालमेल न होने पर निवेश की गति प्रभावित हो सकती है।

2. भूमि और वन-भूमि की उपलब्धता

  • रक्षा और नौसैनिक सुविधाओं के लिए बड़े भूखंडों की आवश्यकता होती है, और दमगुंडम जैसे आरक्षित वन क्षेत्रों में भूमि उपयोग परिवर्तन संवेदनशील विषय है।
  • वन-भूमि के उपयोग हेतु वन संरक्षण अधिनियम (Forest Conservation Act) के अंतर्गत अनुमतियाँ आवश्यक होती हैं, जिससे परियोजनाओं में समय लग सकता है।
  • भूमि अधिग्रहण में स्थानीय समुदायों के हितों और पर्यावरणीय संतुलन का ध्यान रखना होता है।

3. कुशल मानव संसाधन की कमी

  • एयरोस्पेस और रक्षा विनिर्माण में उन्नत इंजीनियरिंग, सटीक मशीनिंग और सॉफ़्टवेयर कौशल वाले श्रमिकों की आवश्यकता होती है।
  • अनुसंधान संस्थानों से निकले कौशल और उद्योग की माँग के बीच मेल बैठाना एक चुनौती है।

4. दोहरे उपयोग प्रौद्योगिकी का नियंत्रण

  • ड्रोन, साइबर और कृत्रिम बुद्धिमत्ता जैसी तकनीकों का नागरिक और सैन्य, दोनों उपयोग संभव है, जिससे सुरक्षा और निर्यात नियंत्रण की जटिलताएँ बढ़ती हैं।
  • रक्षा तकनीक के निर्यात के लिए केंद्र स्तर पर निर्यात नियंत्रण व्यवस्था और सुरक्षा मानकों का पालन अनिवार्य है।

5. नीति की निरंतरता और निवेशक विश्वास

  • दीर्घकालिक औद्योगिक निवेश के लिए नीतियों में स्थिरता और पूर्वानुमेयता आवश्यक है।
  • नीति घोषणा और उसके क्रियान्वयन के बीच अंतर होने पर निवेशकों की अपेक्षाएँ प्रभावित हो सकती हैं।

6. आपूर्ति शृंखला और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) का एकीकरण

  • रक्षा विनिर्माण की आपूर्ति शृंखला में बड़ी कंपनियों के साथ छोटे और मध्यम उद्यमों को जोड़ना एक व्यावहारिक चुनौती है।
  • गुणवत्ता प्रमाणन और तकनीकी मानकों की पूर्ति छोटे उद्यमों के लिए कठिन हो सकती है।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
केंद्र-राज्य समन्वय रक्षा विषय संघ सूची में होने से राज्य नीति और केंद्रीय अधिग्रहण में तालमेल आवश्यक है।
वन-भूमि उपयोग दमगुंडम जैसे आरक्षित वन में सुविधा निर्माण के लिए वन संरक्षण संबंधी अनुमतियों और पर्यावरणीय सावधानी की आवश्यकता।
कौशल अंतराल उन्नत विनिर्माण और अंतरिक्ष क्षेत्र के लिए प्रशिक्षित श्रमशक्ति की सीमित उपलब्धता।
दोहरे उपयोग तकनीक ड्रोन, साइबर और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के सैन्य दुरुपयोग की आशंका और निर्यात नियंत्रण की जटिलता।
नीति की स्थिरता घोषित लक्ष्यों और वास्तविक निवेश के बीच की दूरी, तथा दीर्घकालिक निवेशक विश्वास।
MSME एकीकरण छोटे विनिर्माताओं का गुणवत्ता मानकों और बड़ी आपूर्ति शृंखला से जुड़ पाना।

आगे की राह

  • केंद्र और राज्य के बीच रक्षा विनिर्माण, अधिग्रहण और निर्यात से जुड़े सहयोग के लिए स्पष्ट संस्थागत तंत्र बनाया जाए।
  • वन-भूमि उपयोग के लिए वन संरक्षण संबंधी प्रक्रियाओं को पारदर्शी और समयबद्ध बनाया जाए, तथा पर्यावरणीय प्रभाव आकलन को सुदृढ़ किया जाए।
  • राज्य के तकनीकी संस्थानों और अनुसंधान केंद्रों में एयरोस्पेस, ड्रोन और साइबर सुरक्षा से जुड़े कौशल-प्रशिक्षण कार्यक्रम विकसित किए जाएँ।
  • दोहरे उपयोग प्रौद्योगिकी के लिए सुरक्षा मानकों और निर्यात नियंत्रण अनुपालन की स्पष्ट मार्गदर्शिका तैयार की जाए।
  • MSME इकाइयों को रक्षा आपूर्ति शृंखला से जोड़ने हेतु गुणवत्ता प्रमाणन, वित्तीय सहायता और तकनीकी परामर्श की व्यवस्था की जाए।
  • नीति 2.0 के लक्ष्यों की प्रगति को मापने के लिए निवेश, रोजगार और उत्पादन से जुड़े स्पष्ट संकेतक तय किए जाएँ।
  • नीति की घोषणा के बाद निवेशकों के लिए एकल-खिड़की स्वीकृति और भूमि आवंटन की पारदर्शी प्रक्रिया सुनिश्चित की जाए।
  • तेलंगाना राइजिंग विज़न 2047 के साथ नीति के उद्देश्यों का समन्वय रखते हुए नियमित समीक्षा और सार्वजनिक रिपोर्टिंग की जाए।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

रक्षा विनिर्माण · एयरोस्पेस नीति · रक्षा औद्योगिक गलियारा · आत्मनिर्भर भारत · मेक इन इंडिया · रक्षा निर्यात · राज्य औद्योगिक नीति · प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) · तकनीकी हस्तांतरण · कौशल विकास · अनुसंधान एवं विकास (R&D) · सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP)

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • अनुच्छेद 246 और सातवीं अनुसूची: संघ और राज्य के विधायी अधिकार-क्षेत्र का आधार
  • अनुच्छेद 48A: वनों और वन्यजीवों के संरक्षण का राज्य का दायित्व
  • अनुच्छेद 300A: भूमि अधिग्रहण में संपत्ति के अधिकार की संवैधानिक सीमा

अवधारणा प्रवाह

राज्य द्वारा एयरोस्पेस और रक्षा नीति 2.0 की घोषणा, जो तेलंगाना राइजिंग विज़न 2047 के अनुरूप है  →  भूमि, अवसंरचना और निवेशक सहायता के माध्यम से निजी और सार्वजनिक निवेश को आकर्षित करना  →  रक्षा विनिर्माण, एयरोस्पेस और अंतरिक्ष इकाइयों का विस्तार तथा आपूर्ति शृंखला का विकास  →  अनुसंधान संस्थानों और कुशल श्रमशक्ति से नवाचार और दोहरे उपयोग प्रौद्योगिकी का विकास  →  आयात पर निर्भरता में कमी और रक्षा निर्यात में वृद्धि के साथ राष्ट्रीय सुरक्षा क्षमता का सुदृढ़ीकरण  →  राज्य की राष्ट्रीय आर्थिक हिस्सेदारी में वृद्धि, जिसका लक्ष्य 2047 तक सकल घरेलू उत्पाद में 10 प्रतिशत है

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. तेलंगाना भारत का एकमात्र भू-आबद्ध (landlocked) दक्षिणी राज्य है।
2. भारत में रक्षा विनिर्माण क्षेत्र में निजी क्षेत्र की भागीदारी को बढ़ावा देने के लिए ‘रक्षा औद्योगिक गलियारे’ स्थापित किए गए हैं।
3. ‘रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया (DAP)’ का उद्देश्य रक्षा खरीद में पारदर्शिता और दक्षता बढ़ाना है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. सभी तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: सभी तीन — कथन 1 सही है। तेलंगाना दक्षिणी भारत का एकमात्र भू-आबद्ध राज्य है। कथन 2 सही है। रक्षा औद्योगिक गलियारे (जैसे उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु में) रक्षा विनिर्माण में निजी और विदेशी निवेश को आकर्षित करने के लिए बनाए गए हैं। कथन 3 सही है। रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया (DAP) का उद्देश्य रक्षा खरीद प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करना, स्वदेशीकरण को बढ़ावा देना और पारदर्शिता सुनिश्चित करना है।

Q2. अभिकथन (A): भारत रक्षा प्रौद्योगिकियों के आयात से आगे बढ़कर उन्नत रक्षा प्रौद्योगिकियों का निर्यात करने वाला देश बनना चाहता है।
कारण (R): मजबूत रक्षा क्षमताएं न केवल युद्ध लड़ने के लिए आवश्यक हैं, बल्कि विरोधियों को संघर्ष शुरू करने से रोककर शांति बनाए रखने के लिए भी आवश्यक हैं।

  1. A और R दोनों सत्य हैं, और R, A की सही व्याख्या है।
  2. A और R दोनों सत्य हैं, लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है।
  3. A सत्य है, लेकिन R असत्य है।
  4. A असत्य है, लेकिन R सत्य है।

उत्तर: A और R दोनों सत्य हैं, और R, A की सही व्याख्या है। — अभिकथन (A) और कारण (R) दोनों सत्य हैं। भारत ‘आत्मनिर्भर भारत’ पहल के तहत रक्षा निर्यात को बढ़ावा देने पर जोर दे रहा है। कारण (R) इस नीतिगत बदलाव के पीछे के रणनीतिक औचित्य को बताता है, जिसमें रक्षा क्षमताओं को शांति बनाए रखने और प्रतिरोध के साधन के रूप में देखा जाता है। इस प्रकार, R, A की सही व्याख्या है।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ भारत में रक्षा विनिर्माण क्षेत्र के विकास में राज्य सरकारों की भूमिका का परीक्षण कीजिए। इस संदर्भ में, तेलंगाना की प्रस्तावित एयरोस्पेस और रक्षा नीति 2.0 भारत के रक्षा पारिस्थितिकी तंत्र को कैसे मजबूत कर सकती है? (15 Marks)

रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. परिचय: भारत के रक्षा विनिर्माण क्षेत्र के महत्व और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के लक्ष्य का संक्षिप्त उल्लेख।
2. राज्य सरकारों की भूमिका का परीक्षण:
a. औद्योगिक नीतियां: राज्य-विशिष्ट नीतियां (जैसे तेलंगाना की प्रस्तावित नीति) जो निवेश, भूमि आवंटन, कर प्रोत्साहन और नियामक सुविधा प्रदान करती हैं।
b. बुनियादी ढांचा विकास: रक्षा औद्योगिक गलियारों का निर्माण, कनेक्टिविटी और लॉजिस्टिक्स का समर्थन।
c. कौशल विकास: स्थानीय कार्यबल को प्रशिक्षित करने के लिए शैक्षणिक संस्थानों और उद्योग के साथ साझेदारी।
d. अनुसंधान एवं विकास (R&D) को बढ़ावा देना: राज्य-आधारित अनुसंधान संस्थानों और स्टार्टअप्स को समर्थन।
e. निवेश आकर्षित करना: घरेलू और विदेशी निवेश (FDI) को आकर्षित करने के लिए रोड शो और प्रोत्साहन।
f. नियामक वातावरण: व्यापार करने में आसानी (Ease of Doing Business) सुनिश्चित करना।
3. तेलंगाना की एयरोस्पेस और रक्षा नीति 2.0 का विश्लेषण:
a. लक्ष्य: तेलंगाना को देश के सबसे बड़े औद्योगिक केंद्र के रूप में स्थापित करना।
b. प्रमुख क्षेत्र: एयरोस्पेस, रक्षा विनिर्माण, अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी, साइबर सुरक्षा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और ड्रोन प्रौद्योगिकी।
c. पारिस्थितिकी तंत्र: हैदराबाद में मौजूदा रक्षा अनुसंधान संस्थानों और औद्योगिक क्षमताओं का लाभ उठाना।
d. ‘तेलंगाना राइजिंग विजन 2047’ के साथ संरेखण: राज्य की आर्थिक वृद्धि और राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में हिस्सेदारी बढ़ाने का लक्ष्य।
e. संभावित प्रभाव: राष्ट्रीय रक्षा उत्पादन में वृद्धि, निर्यात क्षमता में सुधार, रोजगार सृजन और तकनीकी आत्मनिर्भरता।
4. चुनौतियां और सुझाव: अंतर-राज्यीय प्रतिस्पर्धा, केंद्र-राज्य समन्वय, तकनीकी हस्तांतरण में बाधाएं। नीतियों के प्रभावी कार्यान्वयन और निरंतर समर्थन की आवश्यकता।
5. निष्कर्ष: भारत के रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता प्राप्त करने और वैश्विक स्तर पर एक प्रमुख रक्षा निर्यातक बनने में राज्य सरकारों की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित करना।

स्रोत: The Hindu

Telangana PCS (TGPSC (TSPSC)) — राज्य PCS अभ्यास

Prelims: तेलंगाना सरकार द्वारा प्रस्तावित ‘एयरोस्पेस और रक्षा नीति 2.0’ का मुख्य उद्देश्य क्या है?

  1. राज्य में एयरोस्पेस और रक्षा विनिर्माण को बढ़ावा देना
  2. राज्य में पर्यटन को बढ़ावा देना
  3. राज्य में कृषि उत्पादन बढ़ाना
  4. राज्य में सूचना प्रौद्योगिकी उद्योग को विकसित करना

उत्तर: राज्य में एयरोस्पेस और रक्षा विनिर्माण को बढ़ावा देना — तेलंगाना सरकार द्वारा प्रस्तावित ‘एयरोस्पेस और रक्षा नीति 2.0’ का मुख्य उद्देश्य राज्य में एयरोस्पेस और रक्षा विनिर्माण क्षेत्र को प्रोत्साहित करना तथा निवेश आकर्षित करना है।

Mains: तेलंगाना राज्य में ‘एयरोस्पेस और रक्षा नीति 2.0’ के क्रियान्वयन से राज्य की अर्थव्यवस्था और रोजगार सृजन पर पड़ने वाले संभावित प्रभावों का विश्लेषण कीजिए।


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।


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