महिलाओं की सुरक्षा: एनएचआरसी की नई सलाह और चुनौतियाँ

महिलाओं की सुरक्षा: एनएचआरसी की नई सलाह और चुनौतियाँ

महिलाओं की सुरक्षा: एनएचआरसी की नई सलाह और चुनौतियाँ

महिलाओं की सुरक्षा संबंधी NHRC सलाहसंवैधानिक आधारअनुच्छेद 14,15,21विधिक ढांचाPOSH अधिनियम 2013न्यायिक निर्देशविशाखा दिशा-निर्देशNHRC सलाहक्रियान्वयन मार्गदर्शनप्रभावी कार्यान्वयनराज्य/संस्थाओं द्वारा
महिलाओं की सुरक्षा संबंधी NHRC सलाह

✎ कार्यस्थल पर महिलाओं की सुरक्षा के लिए POSH अधिनियम, 2013 (विशाखा दिशा-निर्देशों से संहिताबद्ध) कानूनी आधार है, जबकि राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग की सलाह गैर-बाध्यकारी किंतु नीतिगत मार्गदर्शक है।

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विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper II — Polity and Governance (मौलिक अधिकार, वैधानिक निकाय, सरकारी नीतियाँ और हस्तक्षेप)  |  GS Paper I — Society (महिलाओं से संबंधित मुद्दे और सामाजिक सशक्तिकरण)
  • Prelims: राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग (NHRC) और मानव अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993, कार्यस्थल पर महिलाओं का यौन उत्पीड़न (निवारण, प्रतिषेध और प्रतितोष) अधिनियम, 2013 (POSH Act, 2013), विशाखा दिशा-निर्देश (Vishaka Guidelines), 1997, आंतरिक शिकायत समिति (Internal Complaints Committee – ICC) और स्थानीय समिति (Local Committee), अनुच्छेद 14, 15(3), 21 और 42, भारतीय न्याय संहिता, 2023 (Bharatiya Nyaya Sanhita, 2023) में यौन अपराधों से संबंधित प्रावधान, SHe-Box पोर्टल (महिला एवं बाल विकास मंत्रालय), आयोग की सिफारिशों की गैर-बाध्यकारी प्रकृति
  • Essay: अधिकार की गारंटी और क्रियान्वयन की चुनौती: महिलाओं के लिए सुरक्षित कार्यस्थल और सार्वजनिक स्थान, सुरक्षित समाज का निर्माण: कानून, संस्थाएँ और सामाजिक दृष्टिकोण की भूमिका

त्वरित पुनरावृत्ति: कार्यस्थल पर महिलाओं की सुरक्षा के लिए POSH अधिनियम, 2013 (विशाखा दिशा-निर्देशों से संहिताबद्ध) कानूनी आधार है, जबकि राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग की सलाह गैर-बाध्यकारी किंतु नीतिगत मार्गदर्शक है।

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यह खबर चर्चा में क्यों?

राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग (National Human Rights Commission – NHRC) ने ‘कार्यस्थल और सार्वजनिक स्थानों पर महिलाओं की सुरक्षा’ विषय पर एक सलाह (Advisory) जारी की है। यह सलाह महिलाओं के कार्यस्थल और सार्वजनिक स्थानों पर सुरक्षित रहने के अधिकार को रेखांकित करती है, जो जीवन और गरिमा के अधिकार से जुड़ा मानव अधिकार है। आयोग की सलाहें सामान्यतः संबंधित सरकारों, विभागों और संस्थाओं के लिए मार्गदर्शक होती हैं, इसलिए ऐसे दस्तावेज़ नीति-निर्माण और प्रशासनिक सुधारों के संदर्भ में महत्वपूर्ण माने जाते हैं। परीक्षा की दृष्टि से इस समाचार का मुख्य बिंदु यह है कि संस्थागत तंत्र और मौजूदा कानूनी ढांचा मौजूद होने के बावजूद व्यवहार में सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रभावी क्रियान्वयन आवश्यक है। विस्तृत सिफारिशों के लिए मूल प्रेस विज्ञप्ति का अवलोकन उपयोगी रहेगा।

पृष्ठभूमि

  • भारत में महिलाओं की सुरक्षा का संवैधानिक आधार अनुच्छेद 14 (समता), अनुच्छेद 15(3) (महिलाओं और बच्चों के लिए विशेष प्रावधान) और अनुच्छेद 21 (जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता) में निहित है। अनुच्छेद 42 कार्य की न्यायोचित और मानवीय दशाओं का प्रावधान करता है।
  • वर्ष 1997 में सर्वोच्च न्यायालय ने विशाखा बनाम राजस्थान राज्य मामले में कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न रोकने के लिए दिशा-निर्देश दिए, जो विधायी शून्यता के समय मार्गदर्शक बने।
  • कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न से संबंधित विस्तृत विधिक ढांचा कार्यस्थल पर महिलाओं का यौन उत्पीड़न (निवारण, प्रतिषेध और प्रतितोष) अधिनियम, 2013 के माध्यम से लागू हुआ, जिसमें आंतरिक शिकायत समिति और जिला स्तर पर स्थानीय समिति की व्यवस्था है।
  • मानव अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 के तहत स्थापित राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग एक वैधानिक निकाय है, जो मानव अधिकारों से जुड़े मामलों की जांच, सिफारिश और जागरूकता का कार्य करता है।
  • सार्वजनिक स्थानों पर सुरक्षा का प्रश्न पुलिस, नगरीय प्रशासन, परिवहन व्यवस्था और सामुदायिक सहभागिता से जुड़ा बहुआयामी विषय है, जिसके लिए समन्वित नीतिगत प्रयास आवश्यक हैं।

राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग की सलाह और महिला सुरक्षा का विधिक ढांचा क्या है?

  • राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग (NHRC) की स्थापना मानव अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 के अंतर्गत हुई है। यह एक वैधानिक निकाय है, जो संवैधानिक निकाय नहीं है।
  • आयोग की सलाह (Advisory) सामान्यतः नीतिगत मार्गदर्शन और सिफारिश के रूप में होती है; इसका पालन बाध्यकारी नहीं होता, परंतु यह संबंधित प्राधिकारियों पर नैतिक और नीतिगत दबाव उत्पन्न करती है।
  • कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न अधिनियम, 2013 के अनुसार दस या अधिक कर्मचारियों वाले प्रत्येक संगठन में आंतरिक शिकायत समिति का गठन अनिवार्य है, जिसकी अध्यक्षता वरिष्ठ महिला कर्मचारी करती है।
  • जिला स्तर पर स्थानीय समिति उन कार्यस्थलों से शिकायतें सुनती है जहाँ आंतरिक शिकायत समिति नहीं है या जहाँ शिकायत स्वयं नियोक्ता के विरुद्ध हो।
  • विशाखा दिशा-निर्देशों से शुरू हुआ न्यायिक मार्गदर्शन कानून में परिवर्तित होकर 2013 के अधिनियम के रूप में संहिताबद्ध हुआ, जो न्यायिक सक्रियता और विधायी प्रतिक्रिया का उदाहरण है।
  • सार्वजनिक स्थानों पर महिला सुरक्षा के लिए भारतीय न्याय संहिता, 2023 के यौन अपराधों से संबंधित प्रावधान, पुलिस व्यवस्था और नगरीय अवसंरचना (प्रकाश, परिवहन, निगरानी) की भूमिका महत्वपूर्ण है।
  • मानव अधिकार संरक्षण में राज्य का दायित्व है कि वह महिलाओं को भय-मुक्त वातावरण उपलब्ध कराए; इसी दृष्टि से मानवाधिकार आयोग की सलाहें राज्य की सकारात्मक बाध्यता को सुदृढ़ करती हैं।

मुख्य विशेषताएँ

Feature Significance
राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग (National Human Rights Commission) की भूमिका मानव अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 के तहत स्थापित वैधानिक निकाय के रूप में परामर्श जारी करना
परामर्श का विषय-क्षेत्र कार्यस्थल और सार्वजनिक स्थानों, दोनों में महिलाओं की सुरक्षा
परामर्श का स्वरूप गैर-बाध्यकारी (Non-binding) दिशा-निर्देश; स्वयं में कानून नहीं, परन्तु मौजूदा कानूनी ढाँचे के क्रियान्वयन को सुदृढ़ करने का साधन
संबंधित कानूनी ढाँचा कार्यस्थल पर महिलाओं का यौन उत्पीड़न (निवारण, प्रतिषेध और निवारण) अधिनियम, 2013 (POSH Act) तथा विशाखा दिशा-निर्देश (1997)
लक्षित हितधारक नियोक्ता, सरकारी विभाग, स्थानीय प्रशासन और कानून-प्रवर्तन एजेंसियाँ

महत्व

मानवाधिकार और सामाजिक आयाम

  • सुरक्षा को गरिमापूर्ण जीवन के अधिकार का हिस्सा मानते हुए महिलाओं की सार्वजनिक और कार्य-जीवन में भागीदारी को सुनिश्चित करना
  • असुरक्षा के कारण महिलाओं की गतिशीलता और शिक्षा-रोज़गार के अवसरों पर पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभाव को कम करने में सहायता

संवैधानिक आयाम

  • समानता के अधिकार (अनुच्छेद 14) और लैंगिक आधार पर भेदभाव के निषेध (अनुच्छेद 15) के व्यापक संदर्भ में महिलाओं की सुरक्षा को सुदृढ़ करना
  • राज्य द्वारा महिलाओं के लिए विशेष उपबंध (अनुच्छेद 15(3)) की संवैधानिक भावना को व्यवहार में उतारना

प्रशासनिक और नीतिगत आयाम

  • POSH अधिनियम, 2013 के प्रावधानों के प्रभावी अनुपालन पर बल देकर आंतरिक समिति और स्थानीय समिति की भूमिका को स्पष्ट करना
  • सार्वजनिक स्थानों पर सुरक्षा के लिए शहरी प्रशासन, पुलिस और नागरिक निकायों के बीच समन्वय की आवश्यकता रेखांकित करना

आर्थिक आयाम

  • सुरक्षित कार्यस्थल से महिला श्रम-बल भागीदारी दर (Female Labour Force Participation Rate) में सुधार की संभावना, जो आर्थिक संवृद्धि में योगदान देती है

चुनौतियाँ

1. कार्यस्थल पर शिकायत तंत्र की पहुँच

  • POSH अधिनियम के अनुसार दस या अधिक कर्मचारियों वाले प्रत्येक कार्यस्थल पर आंतरिक समिति गठित करना अनिवार्य है, परन्तु अनेक छोटे और असंगठित क्षेत्र के प्रतिष्ठानों में यह व्यवस्था प्रभावी नहीं दिखती
  • असंगठित क्षेत्र की महिलाओं के लिए स्थानीय समिति की उपलब्धता और उसकी जानकारी सीमित है

2. सार्वजनिक स्थानों की सुरक्षा

  • पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था, सीसीटीवी निगरानी और सार्वजनिक परिवहन में सुरक्षा उपायों का असमान विस्तार
  • पुलिस बल की संख्या, प्रशिक्षण और लैंगिक संवेदनशीलता की कमी से शिकायत-निवारण पर प्रभाव

3. गैर-बाध्यकारी परामर्श की सीमा

  • राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग की सिफारिशें और परामर्श सामान्यतः बाध्यकारी नहीं होते, इसलिए उनके अनुपालन के लिए संबंधित प्राधिकरणों की इच्छाशक्ति पर निर्भरता रहती है
  • आयोग के पास न्यायालय जैसी दंडात्मक शक्तियाँ सीमित हैं, जिससे प्रभावी अनुवर्ती कार्रवाई पर प्रश्न उठते हैं

4. कम रिपोर्टिंग और सामाजिक मानसिकता

  • सामाजिक कलंक, प्रतिशोध के भय और प्रक्रियागत जटिलता के कारण अनेक घटनाएँ दर्ज नहीं होतीं
  • लैंगिक संवेदनशीलता के अभाव में शिकायतकर्ता को प्रायः दोषी ठहराने की प्रवृत्ति

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

Issue Concern
आंतरिक समिति का गठन छोटे और असंगठित प्रतिष्ठानों में अनुपालन की कमी
स्थानीय समिति की पहुँच जिला स्तर पर समिति की जानकारी और क्रियाशीलता सीमित
सार्वजनिक स्थानों की सुरक्षा प्रकाश, निगरानी और परिवहन सुरक्षा में असमान व्यवस्था
परामर्श का अनुपालन गैर-बाध्यकारी प्रकृति के कारण प्रवर्तन पर निर्भरता
शिकायत दर्ज करने की प्रवृत्ति सामाजिक कलंक और प्रतिशोध के भय से कम रिपोर्टिंग

सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें

  • मिशन शक्ति (Mission Shakti) — इसके अंतर्गत वन स्टॉप सेंटर और महिला हेल्पलाइन (181) जैसी सेवाएँ हिंसा-पीड़ित महिलाओं को सहायता देती हैं
  • निर्भया निधि (Nirbhaya Fund) — इसके अंतर्गत सार्वजनिक स्थानों पर महिला सुरक्षा से जुड़ी परियोजनाओं (जैसे सुरक्षित शहर परियोजनाएँ) के लिए वित्तीय सहायता दी गई है

आगे की राह

  • POSH अधिनियम, 2013 के अंतर्गत सभी कार्यस्थलों पर आंतरिक समिति और जिला स्तर पर स्थानीय समिति के गठन की नियमित निगरानी की जाए
  • असंगठित क्षेत्र के लिए शिकायत-निवारण की सरल और सुलभ व्यवस्था विकसित की जाए
  • सार्वजनिक स्थानों पर प्रकाश, सीसीटीवी और सुरक्षित परिवहन जैसे भौतिक अवसंरचना उपायों को शहरी योजना में समाहित किया जाए
  • पुलिस बल को लैंगिक संवेदनशीलता का नियमित प्रशिक्षण दिया जाए और महिला पुलिस की संख्या बढ़ाई जाए
  • शिकायतकर्ता की गोपनीयता और सुरक्षा सुनिश्चित करने हेतु प्रभावी तंत्र बनाया जाए
  • राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग के परामर्श पर संबंधित विभागों की कार्रवाई की समयबद्ध समीक्षा और सार्वजनिक रिपोर्टिंग की व्यवस्था हो
  • विद्यालय और कार्यस्थल स्तर पर लैंगिक समानता और सम्मान पर जागरूकता कार्यक्रम चलाए जाएँ

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • अनुच्छेद 14 — विधि के समक्ष समानता और समान संरक्षण
  • अनुच्छेद 15(3) — महिलाओं के लिए विशेष उपबंध की शक्ति
  • अनुच्छेद 21 — गरिमापूर्ण जीवन और व्यक्तिगत सुरक्षा का अधिकार
  • अनुच्छेद 19(1)(g) — व्यवसाय और रोज़गार की स्वतंत्रता, सुरक्षित कार्यस्थल से संबंध
  • अनुच्छेद 42 — कार्य की मानवोचित दशाएँ सुनिश्चित करने का राज्य का दायित्व

अवधारणा प्रवाह

महिलाओं की सुरक्षा से संबंधित घटनाएँ और शिकायतें कार्यस्थल तथा सार्वजनिक स्थानों पर सामने आती हैं  →  राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग मानव अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 के तहत स्थिति का संज्ञान लेकर परामर्श जारी करता है  →  परामर्श में POSH अधिनियम, 2013 और विशाखा दिशा-निर्देशों के प्रभावी क्रियान्वयन पर बल दिया जाता है  →  संबंधित नियोक्ता, स्थानीय प्रशासन और पुलिस परामर्श के आधार पर आंतरिक और स्थानीय समितियों तथा सुरक्षा उपायों को सुदृढ़ करते हैं  →  संवैधानिक मूल्यों (अनुच्छेद 14, 15(3) और 21) के अनुरूप महिलाओं की सुरक्षित कार्य और सार्वजनिक भागीदारी सुनिश्चित होती है

स्रोत: PIB (Press Information Bureau)


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।


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