डाक विभाग और यूटीआई म्यूचुअल फंड ने शुरू किया केवाईसी सत्यापन का नया अभियान

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डाक विभाग और यूटीआई म्यूचुअल फंड ने शुरू किया केवाईसी सत्यापन का नया अभियान

डाकघर-UTI KYC सत्यापन प्रक्रियासाझेदारीडाकघर + UTIनेटवर्कडाकघरों कासुलभतासीमित क्षेत्रों तकKYC सत्यापनग्राहक पहचानवित्तीय समावेशननिवेशकों तक पहुंच
डाकघर-UTI KYC सत्यापन प्रक्रिया

✎ KYC वित्तीय समावेशन और धन-शोधन निवारण दोनों का आधार है; PMLA, 2002 इसका विधिक ढांचा है और डाक नेटवर्क इसकी अंतिम छोर तक पहुंच बढ़ाने का माध्यम बन सकता है।

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विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper II — शासन (Governance): सरकारी संस्थाओं की भूमिका, सार्वजनिक सेवा वितरण में डाक विभाग का योगदान  |  GS Paper III — अर्थव्यवस्था (Economy): वित्तीय समावेशन, पूंजी बाजार का नियमन, मनी लॉन्ड्रिंग निवारण
  • Prelims: KYC (Know Your Customer), PMLA, 2002 (धन-शोधन निवारण अधिनियम), SEBI (भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड) और KRA, CKYCR (केंद्रीय KYC रजिस्ट्री) — CERSAI द्वारा संचालित, India Post Payments Bank (IPPB), Aadhaar-आधारित e-KYC और आधार अधिनियम, 2016, DPDP अधिनियम, 2023 (डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम), पारस्परिक निधि (Mutual Fund) और AMFI
  • Essay: वित्तीय समावेशन के लिए सार्वजनिक डाक नेटवर्क: अंतिम छोर तक पहुंच की चुनौतियां और अवसर, पहचान सत्यापन में सुविधा और निजता का संतुलन: डिजिटल KYC का भविष्य

त्वरित पुनरावृत्ति: KYC वित्तीय समावेशन और धन-शोधन निवारण दोनों का आधार है; PMLA, 2002 इसका विधिक ढांचा है और डाक नेटवर्क इसकी अंतिम छोर तक पहुंच बढ़ाने का माध्यम बन सकता है।

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यह खबर चर्चा में क्यों?

इंडिया पोस्ट (India Post) और यूटीआई म्यूचुअल फंड (UTI Mutual Fund) ने अपनी साझेदारी को और सुदृढ़ किया है, ताकि देशभर में KYC सत्यापन सेवाओं का विस्तार किया जा सके। इस सहयोग का मूल उद्देश्य डाकघरों के व्यापक भौगोलिक नेटवर्क का उपयोग करके उन क्षेत्रों तक भी सत्यापन सुविधा पहुंचाना है, जहां वित्तीय सेवाओं की औपचारिक पहुंच सीमित है। यह समाचार इसलिए महत्त्वपूर्ण है क्योंकि पूंजी बाजार में निवेश के लिए KYC अनिवार्य शर्त है, और सार्वजनिक संस्थाओं के माध्यम से इस प्रक्रिया का विकेंद्रीकरण वित्तीय समावेशन की दिशा में एक व्यावहारिक कदम माना जा सकता है।

पृष्ठभूमि

  • KYC मानदंडों की नींव धन-शोधन निवारण अधिनियम, 2002 (PMLA) में है, जिसके तहत वित्तीय मध्यस्थों को ग्राहक की पहचान और पते की पुष्टि करना अनिवार्य है।
  • भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने पूंजी बाजार के मध्यस्थों के लिए KYC के नियम निर्धारित किए हैं और KYC रजिस्ट्रेशन एजेंसी (KRA) की व्यवस्था लागू की है।
  • आधार आधारित e-KYC की व्यवस्था आधार अधिनियम, 2016 के तहत की गई। सर्वोच्च न्यायालय के 2018 के निर्णय (पुट्टस्वामी मामला) ने आधार के उपयोग की सीमाएं तय कीं, जिसके बाद निजी संस्थाओं के उपयोग से जुड़े प्रावधानों में संशोधन हुए।
  • केंद्रीय KYC रजिस्ट्री (CKYCR) एक केंद्रीकृत भंडार है, जहां एक बार सत्यापित ग्राहक का विवरण विभिन्न वित्तीय संस्थाओं द्वारा साझा किया जा सकता है। इसका संचालन CERSAI करता है।
  • इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक (IPPB) की स्थापना 2018 में हुई और यह डाक विभाग के अंतर्गत कार्य करता है। इससे डाक विभाग की वित्तीय सेवाओं के माध्यम से जमा और भुगतान सुविधाओं का विस्तार हुआ है।

KYC सत्यापन क्या है?

  • KYC (Know Your Customer) वह प्रक्रिया है जिसमें कोई वित्तीय संस्था अपने ग्राहक की पहचान, पते और वित्तीय पृष्ठभूमि की पुष्टि करती है।
  • इसका मूल उद्देश्य धन-शोधन, आतंकवाद के वित्तपोषण और धोखाधड़ी जैसी गतिविधियों पर रोक लगाना है। यह प्रावधान PMLA, 2002 से निर्देशित है।
  • सत्यापन के प्रमुख तरीके हैं: प्रत्यक्ष (भौतिक) सत्यापन, आधार आधारित e-KYC, वीडियो KYC और CKYCR के माध्यम से पूर्व-सत्यापित विवरण का उपयोग।
  • पारस्परिक निधि (Mutual Fund) में निवेश के लिए SEBI के नियमों के अनुसार KYC पूरा होना अनिवार्य है। इसके बिना निवेश खाता खोला नहीं जा सकता।
  • डाकघरों का व्यापक नेटवर्क ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में भौतिक सत्यापन की सुविधा को संभव बना सकता है, जहां बैंक शाखाओं या डिजिटल आधारभूत ढांचे की पहुंच कम है।
  • वित्तीय समावेशन का अर्थ है समाज के हर वर्ग तक किफायती और उपयुक्त वित्तीय सेवाओं की पहुंच। सार्वजनिक संस्थाओं के माध्यम से KYC का विस्तार इसी लक्ष्य से जुड़ा है।
  • डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम, 2023 (DPDP) के तहत ग्राहक के व्यक्तिगत डेटा के संग्रह, उपयोग और भंडारण के लिए सहमति और सुरक्षा के प्रावधान लागू होते हैं। इसलिए सत्यापन प्रक्रिया में डेटा सुरक्षा एक केंद्रीय चिंता है।
  • इंडिया पोस्ट डाक विभाग के अंतर्गत आता है, जो संचार मंत्रालय का अंग है। यह साझेदारी सार्वजनिक संस्था और निजी वित्तीय संस्था के बीच सेवा-सहयोग का एक उदाहरण है।

मुख्य विशेषताएँ

Feature Significance
साझेदारी का स्वरूप डाक विभाग (Department of Posts) और UTI म्यूचुअल फंड के बीच सहयोग, जिसके अंतर्गत डाकघर नेटवर्क के माध्यम से देशभर में KYC सत्यापन सेवाओं का विस्तार किया जा रहा है
पहुँच का विस्तार डाकघरों का व्यापक ग्रामीण और अर्ध-शहरी नेटवर्क निवेशकों को बैंक शाखा या ऑनलाइन माध्यम के अतिरिक्त एक और सत्यापन विकल्प उपलब्ध कराता है
सत्यापन का उद्देश्य निवेशक की पहचान और पते की पुष्टि, जो PMLA तथा SEBI के KYC ढाँचे के अंतर्गत म्यूचुअल फंड में निवेश की पूर्व-शर्त है
नियामकीय संदर्भ म्यूचुअल फंड उद्योग SEBI के विनियमों और KYC रजिस्ट्रेशन एजेंसी (KRA) की व्यवस्था के अधीन संचालित होता है
वित्तीय समावेशन डाक नेटवर्क के माध्यम से कम सेवित और बैंकिंग-सेवा से दूर क्षेत्रों तक पूँजी बाज़ार के उत्पादों की पहुँच का मार्ग खुलता है

महत्व

आर्थिक

  • घरेलू बचत को भौतिक संपत्ति और नकदी से हटाकर वित्तीय आस्तियों, विशेषकर म्यूचुअल फंड, की ओर मोड़ने में सहायक
  • निवेशक आधार का विस्तार होने से पूँजी बाज़ार की गहराई बढ़ती है और दीर्घकालिक पूँजी के स्रोत मज़बूत होते हैं
  • वित्तीय बचत के प्रवाह से उद्योग और अवसंरचना के लिए निधि की उपलब्धता में सुधार की संभावना

वित्तीय समावेशन

  • ग्रामीण और छोटे नगरों के निवासियों को औपचारिक निवेश प्रणाली से जोड़ने का व्यावहारिक माध्यम
  • डाकघरों की सार्वजनिक विश्वसनीयता के कारण निवेश संबंधी संस्थागत भरोसे में वृद्धि

प्रशासनिक और सेवा वितरण

  • सार्वजनिक क्षेत्र के नेटवर्क का निजी वित्तीय संस्थान के साथ उपयोग, जो सार्वजनिक-निजी सहयोग का एक रूप है
  • मौजूदा डाक अवसंरचना का बहुउद्देश्यीय उपयोग, जिससे नई भौतिक संरचना की आवश्यकता कम पड़ती है

नियामकीय और वित्तीय अपराध निरोध

  • PMLA के अंतर्गत ग्राहक-पहचान की व्यवस्था को भौगोलिक रूप से सुदृढ़ करना, जिससे मनी लॉन्ड्रिंग और फर्जी खातों के जोखिम के विरुद्ध नियंत्रण सुदृढ़ होता है

चुनौतियाँ

1. गोपनीयता और डेटा सुरक्षा

  • KYC के दौरान पहचान-पत्र, पता और वित्तीय विवरण जैसे संवेदनशील व्यक्तिगत डेटा का संग्रह और भंडारण होता है
  • एक से अधिक एजेंसियों के बीच डेटा साझा होने पर दुरुपयोग और अनधिकृत पहुँच का जोखिम बढ़ता है
  • डेटा संरक्षण के स्पष्ट मानकों और दायित्वों के अभाव में निवेशक का भरोसा प्रभावित हो सकता है

2. सत्यापन की गुणवत्ता और धोखाधड़ी

  • भौतिक सत्यापन में दस्तावेज़ों की वास्तविकता जाँचने की क्षमता पर प्रशिक्षण और प्रक्रिया-अनुपालन का प्रभाव पड़ता है
  • फर्जी पहचान या बेनामी निवेश के लिए सत्यापन की कमज़ोर कड़ी का दुरुपयोग संभव है

3. डिजिटल और भौगोलिक बहिष्करण

  • सत्यापन की प्रक्रिया यदि केवल ऑनलाइन हो, तो डिजिटल साक्षरता कम वाले निवेशक वंचित रह सकते हैं
  • डाकघरों में सुविधाओं की उपलब्धता और कार्य-समय सभी क्षेत्रों में एकरूप नहीं है

4. संस्थागत समन्वय और उत्तरदायित्व

  • सार्वजनिक विभाग और म्यूचुअल फंड कंपनी के बीच उत्तरदायित्व, शिकायत निवारण और त्रुटि-दायित्व का स्पष्ट विभाजन आवश्यक है
  • नियामक निगरानी का दायरा सेवा प्रदाताओं तक स्पष्ट रूप से विस्तारित होना चाहिए

5. डाक नेटवर्क की परिचालन क्षमता

  • बढ़ते सत्यापन अनुरोधों को संभालने के लिए कर्मचारियों का प्रशिक्षण, तकनीकी उपकरण और समय-सीमा का प्रबंधन आवश्यक है
  • सेवा की गति और सटीकता बनाए रखने के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) का एकरूप पालन चुनौतीपूर्ण है

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

Issue Concern
डेटा सुरक्षा संवेदनशील पहचान-डेटा के संग्रह, भंडारण और साझाकरण में दुरुपयोग और रिसाव का जोखिम
सत्यापन की विश्वसनीयता फर्जी दस्तावेज़ों की पहचान में त्रुटि से मनी लॉन्ड्रिंग और बेनामी निवेश का खतरा
डिजिटल बहिष्करण डिजिटल साक्षरता और तकनीकी पहुँच की कमी से कुछ वर्गों का सेवा से वंचित रहना
उत्तरदायित्व का विभाजन सार्वजनिक विभाग और निजी फंड हाउस के बीच त्रुटि और शिकायत की ज़िम्मेदारी अस्पष्ट होने की आशंका
परिचालन दबाव सत्यापन अनुरोधों में वृद्धि के साथ डाक कर्मचारियों की क्षमता और समय-सीमा का संतुलन

आगे की राह

  • डाक सेवा के माध्यम से होने वाले KYC सत्यापन के लिए डेटा संरक्षण के स्पष्ट मानक और सहमति-आधारित डेटा उपयोग का ढाँचा सुनिश्चित किया जाए
  • सत्यापन प्रक्रिया की नियमित लेखा-परीक्षा और नियामकीय निरीक्षण की व्यवस्था हो, ताकि फर्जी पहचान के मामले समय पर पकड़े जा सकें
  • डाक कर्मचारियों को KYC नियमों, दस्तावेज़ जाँच और साइबर सुरक्षा का नियमित प्रशिक्षण दिया जाए
  • शिकायत निवारण की स्पष्ट प्रक्रिया बनाई जाए, जिसमें डाक विभाग, म्यूचुअल फंड कंपनी और नियामक की भूमिकाएँ परिभाषित हों
  • डिजिटल साक्षरता कम वाले क्षेत्रों में सहायता केंद्र और भौतिक सत्यापन विकल्प बनाए रखे जाएँ, ताकि कोई वर्ग सेवा से बाहर न रहे
  • सत्यापन के बाद निवेशक को एकीकृत KYC रिकॉर्ड की सुविधा मिले, जिससे बार-बार दस्तावेज़ जमा करने का बोझ कम हो
  • सार्वजनिक-निजी सहयोग के ऐसे मॉडलों का प्रभाव-मूल्यांकन समय-समय पर किया जाए, ताकि सेवा गुणवत्ता और पहुँच के आँकड़े नीति-निर्माण में उपयोग हो सकें

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

वित्तीय समावेशन (Financial Inclusion) · KYC (Know Your Customer) सत्यापन · धन शोधन निवारण अधिनियम, 2002 (Prevention of Money Laundering Act, 2002) · केंद्रीय KYC अभिलेख रजिस्ट्री (Central KYC Records Registry) · आधार अधिनियम, 2016 (Aadhaar Act, 2016) · के.एस. पुट्टस्वामी बनाम भारत संघ निर्णय (2018) · डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम, 2023 (Digital Personal Data Protection Act, 2023) · अंतिम मील संपर्क (Last-mile Connectivity) · भारतीय डाक भुगतान बैंक (India Post Payments Bank) · डाक विभाग (Department of Posts) · प्रतिभूति बाजार नियामक (SEBI) और म्यूचुअल फंड विनियमन · गोपनीयता का अधिकार और अनुच्छेद 21

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • अनुच्छेद 21: निजता और व्यक्तिगत डेटा की सुरक्षा (Puttaswamy निर्णय)
  • सातवीं अनुसूची, संघ सूची की प्रविष्टि 31: डाक एवं तार (India Post का संघीय विषय)

अवधारणा प्रवाह

म्यूचुअल फंड में निवेश हेतु SEBI और PMLA के अंतर्गत KYC सत्यापन अनिवार्य है  →  निवेशक को सत्यापन के लिए बैंक, ऑनलाइन या अन्य सेवा केंद्र तक पहुँचना पड़ता है  →  डाक विभाग और UTI म्यूचुअल फंड की साझेदारी से डाकघर नेटवर्क सत्यापन का एक अतिरिक्त बिंदु बनता है  →  सत्यापन सुलभ होने से नए निवेशक, विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में, म्यूचुअल फंड से जुड़ते हैं  →  निवेश के विस्तार से घरेलू बचत का पूँजी बाज़ार में प्रवाह बढ़ता है और वित्तीय समावेशन सुदृढ़ होता है  →  साथ ही डेटा सुरक्षा और सत्यापन मानकों की निरंतर निगरानी आवश्यक हो जाती है

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. भारत में KYC मानदंड धन शोधन निवारण अधिनियम, 2002 के अंतर्गत अनिवार्य किए गए हैं और विभिन्न विनियमित संस्थाएँ अपने-अपने नियामक के निर्देशों के अनुसार इन्हें लागू करती हैं।
2. केंद्रीय KYC अभिलेख रजिस्ट्री में संग्रहीत एक बार की KYC जानकारी का उपयोग विभिन्न वित्तीय संस्थाएँ कर सकती हैं, जिससे दोहरी प्रक्रिया कम होती है।
3. म्यूचुअल फंड भारत में भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम, 1934 के अंतर्गत भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा विनियमित किए जाते हैं।

उपर्युक्त में से कितने कथन सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. केवल तीन
  4. सभी

उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है: KYC मानदंड PMLA, 2002 से जुड़े हैं और RBI, SEBI जैसे नियामक अपने क्षेत्र में इन्हें लागू कराते हैं। कथन 2 सही है: केंद्रीय KYC अभिलेख रजिस्ट्री (CKYCR) एक बार के KYC रिकॉर्ड को साझा उपयोग के लिए उपलब्ध कराती है। कथन 3 गलत है: म्यूचुअल फंड का विनियमन भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) करता है, RBI नहीं।

Q2. निम्नलिखित में से प्रत्येक के लिए दिए गए कथन A (Assertion) और कारण R (Reason) को पढ़िए:
अभिकथन (A): सर्वोच्च न्यायालय के 2018 के पुट्टस्वामी निर्णय के बाद निजी संस्थाएँ सेवा के लिए आधार प्रमाणीकरण की मांग को विधिक रूप से बाध्य नहीं कर सकतीं।
कारण (R): आधार अधिनियम, 2016 की धारा 57, जो निजी निकायों को आधार प्रमाणीकरण माँगने की अनुमति देती थी, सर्वोच्च न्यायालय द्वारा असंवैधानिक घोषित की गई।

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनिए:

  1. A और R दोनों सही हैं और R, A की सही व्याख्या है।
  2. A और R दोनों सही हैं, परंतु R, A की सही व्याख्या नहीं है।
  3. A सही है, परंतु R गलत है।
  4. A गलत है, परंतु R सही है।

उत्तर: A और R दोनों सही हैं और R, A की सही व्याख्या है। — पुट्टस्वामी निर्णय (2018) में सर्वोच्च न्यायालय ने आधार अधिनियम की धारा 57 को असंवैधानिक ठहराया, जिससे निजी निकायों द्वारा आधार की अनिवार्य मांग पर रोक लगी। यही कारण अभिकथन की व्याख्या करता है। आधार की संवैधानिक वैधता को सीमित रूप में बनाए रखा गया था, इसलिए अभिकथन भी सही है।

Q3. निम्नलिखित सूचियों का मिलान कीजिए:
सूची-I
A. केंद्रीय KYC अभिलेख रजिस्ट्री (CKYCR)
B. KYC पंजीकरण एजेंसी (KRA)
C. यूनिट ट्रस्ट ऑफ इंडिया अधिनियम, 1963
D. धन शोधन निवारण अधिनियम, 2002

सूची-II
1. प्रतिभूति बाजार निवेशकों, जिनमें म्यूचुअल फंड निवेशक भी शामिल हैं, के KYC रिकॉर्ड रखना
2. धन शोधन रोकने के लिए रिपोर्टिंग संस्थाओं पर दायित्व लगाने हेतु बनाया गया विधान
3. यूनिट ट्रस्ट ऑफ इंडिया को विधिक आधार प्रदान करने वाला अधिनियम
4. एक ही KYC रिकॉर्ड को विभिन्न वित्तीय संस्थाओं द्वारा उपयोग के लिए संग्रहीत करने वाली केंद्रीय रजिस्ट्री

सही मिलान के लिए कौन-सा विकल्प सही है?

  1. A-4, B-1, C-3, D-2
  2. A-1, B-4, C-3, D-2
  3. A-4, B-3, C-1, D-2
  4. A-4, B-1, C-2, D-3

उत्तर: A-4, B-1, C-3, D-2 — CKYCR एक केंद्रीय रजिस्ट्री है (4)। KRA प्रतिभूति बाजार निवेशकों के KYC रिकॉर्ड रखती है (1)। UTI का विधिक आधार यूनिट ट्रस्ट ऑफ इंडिया अधिनियम, 1963 है (3)। PMLA, 2002 धन शोधन पर दायित्व लगाने वाला विधान है (2)।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ भारतीय डाक का विस्तृत नेटवर्क वित्तीय समावेशन में ‘अंतिम मील’ तक पहुँच का प्रभावी माध्यम बन सकता है। डाक विभाग और म्यूचुअल फंड कंपनी की साझेदारी से पैन-इंडिया KYC सत्यापन सेवाओं के विस्तार के संदर्भ में इस कथन का आलोचनात्मक परीक्षण कीजिए। साथ ही उन संवैधानिक एवं वैधानिक उपायों की व्याख्या कीजिए जो ऐसी सत्यापन प्रक्रिया में ग्राहकों की गोपनीयता और डेटा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक हैं। (15 Marks)

रूपरेखा: उत्तर संरचना (मॉडल उत्तर के बिंदु):
1. भूमिका: वित्तीय समावेशन की अवधारणा; 2008 की सी. रंगराजन समिति (Rangarajan Committee on Financial Inclusion) द्वारा वित्तीय समावेशन की परिभाषा; PMJDY (2014) के बाद बैंक खातों का विस्तार और KYC की भूमिका।
2. KYC का विधिक ढाँचा: धन शोधन निवारण अधिनियम, 2002 और उसके अंतर्गत बने नियम; RBI का KYC मास्टर डायरेक्शन; SEBI का KYC पंजीकरण एजेंसी (KRA) विनियमन, 2011; केंद्रीय KYC अभिलेख रजिस्ट्री (CKYCR) से एक बार KYC के साझा उपयोग का लाभ।
3. डाक नेटवर्क का तर्क (पक्ष): भारतीय डाक का ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों तक विस्तार; भारतीय डाक भुगतान बैंक (IPPB, 2018) के माध्यम से डाकिये द्वारा घर पर सेवा; लागत में कमी और पहुँच में वृद्धि; 2016 में नंदन नीलेकणि समिति (डिजिटल भुगतान पर उच्चस्तरीय समिति) द्वारा डिजिटल वित्तीय ढाँचे पर बल।
4. आलोचनात्मक पक्ष: भौतिक सत्यापन की सीमाएँ, डाकिये द्वारा बायोमेट्रिक या दस्तावेज़ संग्रह में त्रुटि की संभावना, फर्जी पहचान का जोखिम; सेवा-वितरण में मानकीकरण की चुनौती; निगरानी और उत्तरदायित्व का प्रश्न।
5. गोपनीयता और संवैधानिक आयाम: पुट्टस्वामी बनाम भारत संघ (2017) में निजता को अनुच्छेद 21 के अंतर्गत मौलिक अधिकार घोषित करना; पुट्टस्वामी (2018) में आधार की सीमित वैधता और धारा 57 की असंवैधानिकता; आधार अधिनियम, 2016 में सीमित उद्देश्य का सिद्धांत (purpose limitation) और सहमति आधारित प्रमाणीकरण।
6. डेटा सुरक्षा ढाँचा: डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम, 2023 के अंतर्गत डेटा न्यासी (Data Fiduciary) के दायित्व, सहमति प्रबंधन, डेटा न्यूनीकरण और भंग की सूचना; डेटा संरक्षण बोर्ड की भूमिका।
7. तुलनात्मक दृष्टि: सार्वजनिक क्षेत्र की साझेदारी बनाम निजी फिनटेक द्वारा डिजिटल KYC; सुविधा बनाम गोपनीयता के बीच संतुलन का सिद्धांत।
8. निष्कर्ष: डाक नेटवर्क की पहुँच वास्तविक है, परंतु उसकी सफलता तभी सुनिश्चित होगी जब सत्यापन प्रक्रिया संस्थागत निगरानी, स्पष्ट विधिक सीमाओं और डेटा संरक्षण के सुदृढ़ उपायों के साथ चले।

स्रोत: PIB (Press Information Bureau)


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।


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