उड़ीसा में चक्रवात अरनब के बाद बचाव अभियान तेज, जानिए नवीनतम स्थिति

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चक्रवात आपदा प्रबंधन प्रक्रियापूर्वानुमानमार्ग बदलनेतैयारीबल तैनातीबचावहेलीकॉप्टर/नावराहतभोजन/शिविरपुनर्वासमरम्मत
चक्रवात आपदा प्रबंधन प्रक्रिया

✎ चक्रवात की तीव्रता का वर्गीकरण IMD करता है, आपदा प्रबंधन का वैधानिक ढाँचा आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 से तय होता है, और NDRF तथा SDRF इसके प्रमुख बल एवं निधि हैं।

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विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper I — भूगोल (बंगाल की खाड़ी में चक्रवात की उत्पत्ति, तटीय क्षेत्रों की भेद्यता)  |  GS Paper III — आपदा प्रबंधन (आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 के अंतर्गत संस्थागत ढाँचा, NDRF और SDRF की भूमिका, बचाव एवं राहत)  |  GS Paper II — शासन (केंद्र-राज्य समन्वय, प्रशासनिक सेवाओं की तैनाती, आपदा के बाद अनुग्रह राशि)
  • Prelims: आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 (Disaster Management Act, 2005), राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF), राज्य आपदा प्रतिक्रिया निधि (SDRF), ओडिशा आपदा त्वरित कार्य बल (ODRAF), चक्रवात की श्रेणियाँ (भारत मौसम विज्ञान विभाग, IMD), रुशिकुल्या नदी (ओडिशा, गंजम जिला), सेंडाई फ्रेमवर्क (Sendai Framework for Disaster Risk Reduction, 2015-2030), राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA)
  • Essay: प्राकृतिक आपदाएँ और जलवायु परिवर्तन: तटीय राज्यों के लिए तैयारी की चुनौती, आपदा प्रबंधन में सामुदायिक भागीदारी और स्थानीय प्रशासन की भूमिका

त्वरित पुनरावृत्ति: चक्रवात की तीव्रता का वर्गीकरण IMD करता है, आपदा प्रबंधन का वैधानिक ढाँचा आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 से तय होता है, और NDRF तथा SDRF इसके प्रमुख बल एवं निधि हैं।

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यह खबर चर्चा में क्यों?

बंगाल की खाड़ी में उत्पन्न चक्रवात अर्नब का मार्ग अनुमान से बदल जाने के कारण ओडिशा के गंजम, गजपति और कंधमाल जिलों में व्यापक बाढ़ और भूस्खलन की स्थिति बन गई। भारतीय नौसेना और भारतीय तटरक्षक बल ने दुर्गम क्षेत्रों में खाद्य सामग्री गिराने के लिए चार हेलीकॉप्टर तैनात किए, जबकि NDRF और ODRAF की टीमें नावों से पका हुआ भोजन पहुँचा रही हैं। राज्य सरकार ने 313 बचाव दलों की तैनाती की है, लगभग 23,000 लोग राहत शिविरों में हैं और मुख्यमंत्री ने अतिरिक्त 20 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की है। यह घटना इस दृष्टि से महत्वपूर्ण है कि इसमें चक्रवात के पूर्वानुमान और वास्तविक प्रभाव के बीच अंतर ने आपदा प्रबंधन की तैयारी, केंद्र से समय पर सहायता माँगने की प्रक्रिया और स्थानीय प्रशासन की क्षमता को परीक्षा में डाल दिया है।

पृष्ठभूमि

  • भारत में आपदा प्रबंधन का वैधानिक आधार आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 है, जिसके अंतर्गत राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) की अध्यक्षता प्रधानमंत्री करते हैं और राज्य स्तर पर राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की अध्यक्षता मुख्यमंत्री करते हैं।
  • इसी अधिनियम के तहत राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF) और राज्य आपदा प्रतिक्रिया निधि (SDRF) का प्रावधान किया गया है। राज्यों की अपनी आपदा त्वरित कार्य बल (जैसे ओडिशा का ODRAF) भी होते हैं।
  • ओडिशा तटीय राज्य होने के कारण बंगाल की खाड़ी में बनने वाले चक्रवातों से बार-बार प्रभावित होता रहा है। इसलिए राज्य ने चक्रवात आश्रय स्थलों और प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली के माध्यम से जन-हानि घटाने पर विशेष ध्यान दिया है।
  • भारत ने आपदा जोखिम न्यूनीकरण के लिए सेंडाई फ्रेमवर्क (2015-2030) को अपनाया है, जो आपदा-पूर्व तैयारी, जोखिम की पहचान और समुदाय-आधारित प्रबंधन पर बल देता है।
  • आपदा के बाद अनुग्रह राशि (Ex gratia) का भुगतान राज्य सरकार अपने संसाधनों और SDRF से करती है, और इसकी दरें केंद्र सरकार द्वारा समय-समय पर निर्धारित मानदंडों के आधार पर तय होती हैं।

चक्रवात और आपदा प्रबंधन की व्यवस्था क्या है?

  • चक्रवात निम्न वायुदाब वाला एक तीव्र घूर्णनशील तूफ़ान है, जो गर्म समुद्री सतह और अनुकूल वायुमंडलीय परिस्थितियों में बनता है। बंगाल की खाड़ी में बनने वाले चक्रवात अक्सर अक्टूबर-नवंबर और अप्रैल-मई में अधिक सक्रिय होते हैं।
  • भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) चक्रवातों की तीव्रता के आधार पर उन्हें अवदाब, गहन अवदाब, चक्रवाती तूफ़ान, गंभीर चक्रवाती तूफ़ान और अति गंभीर चक्रवाती तूफ़ान जैसी श्रेणियों में वर्गीकृत करता है।
  • चक्रवात के नाम विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) और एस्कैप (ESCAP) की पैनल व्यवस्था के अंतर्गत तय होते हैं। नाम का उद्देश्य संचार और चेतावनी को स्पष्ट बनाना है।
  • आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 की धारा 44 के अंतर्गत NDRF का गठन किया गया है, जबकि राज्य स्तर पर SDRF और राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल कार्य करते हैं।
  • आपदा के समय बचाव कार्य में प्रायः वायु सेना, नौसेना, तटरक्षक बल और स्थानीय प्रशासन का समन्वित प्रयोग होता है। दुर्गम क्षेत्रों में हेलीकॉप्टर से राहत सामग्री गिराना इसी समन्वय का हिस्सा है।
  • आपदा के बाद चरण तीन प्रकार के होते हैं: बचाव (जीवन रक्षा), राहत (भोजन, पेयजल, चिकित्सा और अस्थायी आश्रय) और पुनर्वास (सड़क, पुल, बिजली और आजीविका की बहाली)।
  • केंद्र से सहायता माँगने की प्रक्रिया राज्य सरकार की पहल पर शुरू होती है, और आपदा की गंभीरता के आधार पर केंद्र अतिरिक्त संसाधन उपलब्ध कराता है।

मुख्य विशेषताएँ

Feature Significance
चक्रवात अर्णब के मार्ग में परिवर्तन प्रारंभिक पूर्वानुमान में आंध्र प्रदेश पर अधिक प्रभाव और ओडिशा में सीमित क्षति का अनुमान था, किंतु गंजम, गजपति और कंधमाल में व्यापक नुकसान हुआ। यह पूर्वानुमान-आधारित तैयारी की सीमा को दर्शाता है।
भारतीय नौसेना और भारतीय तटरक्षक बल द्वारा हवाई आपूर्ति चार हेलीकॉप्टरों से गंजम में 21 चिह्नित स्थानों पर खाद्य पैकेट गिराए गए। सड़क-संपर्क टूटने पर दुर्गम क्षेत्रों में यह सहायता सबसे प्रभावी साधन बनी।
बाढ़ और भूस्खलन का दोहरा संकट रुशिकुल्या नदी के उफान से कई गाँव जलमग्न हुए, पुल और सड़कें बह गईं। लगातार भारी वर्षा से जिलों में लगभग एक दर्जन भूस्खलन हुए।
एनडीआरएफ और ओडीआरएएफ की नौकाओं से राहत राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (National Disaster Response Force, NDRF) और राज्य आपदा मोचन बल (Odisha Disaster Rapid Action Force, ODRAF) की टीमें तेज़ धाराओं और खराब मौसम में भी बाढ़ में फँसे लोगों तक पका भोजन पहुँचा रही हैं।
राहत शिविर और प्रभावित जनसंख्या 23,000 से अधिक लोग राहत शिविरों में हैं। गंजम में लगभग 50,000, गजपति में 30,000 और कंधमाल में 12,000 लोग गंभीर रूप से प्रभावित बताए गए हैं।
प्रशासनिक और वित्तीय उपाय गंजम के लिए अतिरिक्त 20 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए, 30 वरिष्ठ ओडिशा प्रशासनिक सेवा (Odisha Administrative Service) अधिकारी तैनात हुए और मृतकों के परिजनों को 4 लाख रुपये की अनुग्रह राशि (Ex Gratia) देने की घोषणा हुई।

महत्व

आपदा प्रबंधन (Disaster Management)

  • आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 (Disaster Management Act, 2005) के अंतर्गत राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण और जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की भूमिका सीधे परीक्षण में आती है। आपात प्रतिक्रिया, राहत और पुनर्वास का समन्वय इन्हीं संस्थाओं के माध्यम से होता है।
  • बचाव, राहत और पुनर्वास के चरण एक-दूसरे से जुड़े हैं। इस घटना में बचाव का काम पूरा होने से पहले ही राहत वितरण और सड़क-पुल की मरम्मत का कार्य शुरू करना पड़ा, जो आपदा प्रबंधन के चक्रीय स्वरूप को दर्शाता है।

केंद्र-राज्य समन्वय (Centre-State Coordination)

  • राज्य सरकार द्वारा मार्ग-परिवर्तन की जानकारी मिलते ही केंद्र से सहायता माँगी गई। इससे स्पष्ट होता है कि राज्य स्तर पर आपदा-प्रतिक्रिया में केंद्र की सशस्त्र और विशेषज्ञ बलों की क्षमता कितनी निर्णायक होती है।
  • नौसेना और तटरक्षक बल जैसे केंद्रीय बलों तथा राज्य के बलों का संयुक्त उपयोग सहकारी संघवाद (Cooperative Federalism) की व्यावहारिक झलक है।

मानवीय और सामाजिक आयाम

  • बड़ी संख्या में लोग राहत शिविरों में हैं, इसलिए पीने का पानी, भोजन और आपातकालीन चिकित्सा सेवा की उपलब्धता सीधे जीवन-रक्षा से जुड़ी है।
  • भूस्खलन में एक परिवार के सदस्यों की मृत्यु यह बताती है कि पहाड़ी और वनीय क्षेत्रों में जोखिम अधिक है। ऐसे परिवारों के लिए अनुग्रह राशि सामाजिक सुरक्षा का तात्कालिक उपाय है।

आर्थिक प्रभाव

  • सड़कों, पुलों और बिजली की क्षति से परिवहन और आपूर्ति शृंखला बाधित होती है, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था और कृषि पर दीर्घकालिक असर पड़ता है।
  • आपदा-पश्चात पुनर्निर्माण के लिए राज्य आपदा प्रतिक्रिया कोष जैसे वित्तीय साधनों और अतिरिक्त राशि की आवश्यकता होती है, जिससे राजकोषीय संसाधनों पर दबाव बढ़ता है।

चुनौतियाँ

1. पूर्वानुमान की अनिश्चितता

  • चक्रवात का मार्ग और तीव्रता बदलने से प्रारंभिक योजना कमज़ोर पड़ी। जिन जिलों पर कम प्रभाव का अनुमान था, वहीं व्यापक क्षति हुई।
  • तटीय और भीतरी जिलों के लिए प्रभाव-आधारित चेतावनी (Impact-based Warning) को अधिक सटीक बनाना आवश्यक है।

2. दुर्गम क्षेत्रों तक पहुँच

  • सड़क और पुल टूटने से कई गाँव सीधे पहुँच से बाहर हो गए, जिसके कारण हवाई आपूर्ति पर निर्भरता बढ़ी।
  • बाढ़ में नौकाओं द्वारा राहत पहुँचाना तेज़ धाराओं और खराब मौसम में जोखिमपूर्ण होता है।

3. भूस्खलन और नदी-बाढ़ का संयुक्त जोखिम

  • लगातार भारी वर्षा से नदियाँ उफनीं और पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन हुए। दोनों खतरे एक साथ सक्रिय होने से बचाव कार्य अधिक जटिल हो गया।
  • भूमि-उपयोग नियोजन और जल-निकासी का अभाव इन जोखिमों को बढ़ा सकता है।

4. राहत वितरण और पुनर्वास

  • 23,000 से अधिक लोग राहत शिविरों में हैं। भोजन, पानी और चिकित्सा सेवा का समान वितरण सुनिश्चित करना चुनौती है।
  • अनुग्रह राशि का समय पर और पारदर्शी वितरण प्रभावित परिवारों का भरोसा बनाए रखने के लिए आवश्यक है।

5. ढाँचागत क्षति और पुनर्निर्माण

  • पुल, सड़कें और बिजली आपूर्ति प्रभावित होने से आपदा के बाद भी सामान्य जीवन लंबे समय तक बाधित रह सकता है।
  • आपदा-रोधी (Disaster-resilient) ढाँचे के निर्माण से भविष्य की क्षति कम की जा सकती है।

6. संसाधनों का केंद्र-राज्य समन्वय

  • केंद्र से सहायता माँगने, केंद्रीय बलों की तैनाती और अतिरिक्त राशि की स्वीकृति के बीच समय-समन्वय महत्वपूर्ण है।
  • सहायता प्रक्रिया में देरी से राहत-कार्य प्रभावित हो सकते हैं, इसलिए स्पष्ट प्रोटोकॉल आवश्यक है।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

Issue Concern
पूर्वानुमान में बदलाव चक्रवात का मार्ग बदलने से कम प्रभाव वाले अनुमानित जिलों में अधिक क्षति हुई और तैयारी असंतुलित रही।
दुर्गम क्षेत्रों में पहुँच सड़क और पुल टूटने से हवाई और नाव-आधारित राहत पर निर्भरता बढ़ी, जो खर्चीली और जोखिमपूर्ण है।
भूस्खलन और बाढ़ का संयोजन एक साथ सक्रिय खतरों से बचाव-कार्य की गति और सुरक्षा दोनों प्रभावित होती हैं।
राहत शिविरों का प्रबंधन बड़ी संख्या में विस्थापित लोगों के लिए भोजन, पेयजल, स्वच्छता और चिकित्सा सेवा सुनिश्चित करना कठिन है।
ढाँचागत पुनर्निर्माण क्षतिग्रस्त सड़कों, पुलों और बिजली लाइनों की मरम्मत में विलंब से सामान्य जीवन और आर्थिक गतिविधि प्रभावित रहती है।

सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें

  • राज्य आपदा प्रतिक्रिया कोष (State Disaster Response Fund, SDRF)

आगे की राह

  • प्रभाव-आधारित चेतावनी प्रणाली को मज़बूत किया जाए, ताकि चक्रवात का मार्ग बदलने पर भी समय से सटीक जानकारी जिलों तक पहुँचे।
  • दुर्गम क्षेत्रों के लिए पहले से चिह्नित हवाई और नाव-आधारित आपूर्ति बिंदु तय किए जाएँ, जिनकी नियमित ड्रिल हो।
  • भूस्खलन-प्रवण और बाढ़-प्रवण गाँवों का जोखिम-मानचित्रण करके भूमि-उपयोग नियोजन में उसका समावेश किया जाए।
  • राहत शिविरों में भोजन, पेयजल, स्वच्छता और चिकित्सा मानकों को पहले से निर्धारित कर उनकी निगरानी की जाए।
  • केंद्र से सहायता माँगने और अतिरिक्त राशि स्वीकृत करने की प्रक्रिया को समयबद्ध करने के लिए स्पष्ट प्रोटोकॉल बनाए जाएँ।
  • अनुग्रह राशि और क्षति-आकलन का वितरण पारदर्शी डिजिटल प्रणाली के माध्यम से हो, ताकि पात्र परिवार बिना विलंब लाभ पा सकें।
  • सड़कों, पुलों और विद्युत-ढाँचे के पुनर्निर्माण में आपदा-रोधी डिज़ाइन अपनाया जाए।
  • स्थानीय समुदायों और स्वयंसेवी संगठनों को आपदा-प्रशिक्षण देकर प्रारंभिक बचाव और राहत में उनकी भागीदारी बढ़ाई जाए।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

आपदा प्रबंधन (Disaster Management) · राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) · राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (SDMA) · राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF) · राज्य आपदा प्रतिक्रिया निधि (SDRF) · सेंडाई आपदा जोखिम न्यूनीकरण ढाँचा (Sendai Framework) · पूर्व चेतावनी प्रणाली (Early Warning System) · सहकारी संघवाद (Cooperative Federalism) · बेहतर पुनर्निर्माण (Build Back Better) · आपदा जोखिम न्यूनीकरण (Disaster Risk Reduction) · चक्रवात-जनित बाढ़ और भूस्खलन · समुदाय-आधारित आपदा प्रबंधन (Community-Based Disaster Management)

अवधारणा प्रवाह

चक्रवात अर्णब का प्रारंभिक पूर्वानुमान आंध्र प्रदेश पर अधिक प्रभाव का था।  →  चक्रवात का मार्ग बदला और ओडिशा के गंजम, गजपति व कंधमाल जिलों में व्यापक वर्षा हुई।  →  लगातार भारी वर्षा से नदियाँ उफनीं और लगभग एक दर्जन भूस्खलन हुए।  →  बाढ़ से गाँव जलमग्न हुए, पुल और सड़कें बहीं और लोग दुर्गम क्षेत्रों में फँस गए।  →  राज्य सरकार ने केंद्र से सहायता माँगी और अतिरिक्त 20 करोड़ रुपये स्वीकृत किए।  →  एनडीआरएफ, ओडीआरएएफ, नौसेना और तटरक्षक बल ने नौकाओं और हेलीकॉप्टरों से राहत सामग्री पहुँचाई।  →  राहत शिविरों में लोगों को रखा गया और मृतकों के परिजनों को अनुग्रह राशि के साथ पुनर्वास और पुनर्निर्माण का कार्य शुरू हुआ।

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) का अध्यक्ष प्रधानमंत्री होता है।
2. राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF) का गठन आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 की धारा 44 के अंतर्गत किया गया है।
3. राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (SDMA) की अध्यक्षता राज्यपाल करता है।
उपर्युक्त में से कितने कथन सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. केवल तीन
  4. सभी

उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है: NDMA की अध्यक्षता प्रधानमंत्री करते हैं। कथन 2 सही है: NDRF की स्थापना आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 की धारा 44 के अंतर्गत होती है। कथन 3 गलत है: SDMA की अध्यक्षता राज्य के मुख्यमंत्री करते हैं, राज्यपाल नहीं।

Q2. सूची-I (संस्था/ढाँचा) को सूची-II (कार्य/विशेषता) से सुमेलित कीजिए:
सूची-I
1. राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA)
2. राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF)
3. आपदा-रोधी अवसंरचना हेतु गठबंधन (CDRI)
4. सेंडाई आपदा जोखिम न्यूनीकरण ढाँचा
सूची-II
a. विशेषीकृत और प्रशिक्षित बल द्वारा आपदा के समय त्वरित राहत और बचाव
b. आपदा प्रबंधन नीति और दिशानिर्देशों का शीर्ष निकाय, जिसकी अध्यक्षता प्रधानमंत्री करते हैं
c. भारत की पहल पर बना देशों और संस्थाओं का गठबंधन, जो आपदा-रोधी अवसंरचना को बढ़ावा देता है
d. वर्ष 2015 में जापान के सेंदाई में अपनाया गया वैश्विक ढाँचा (2015–2030)
सही सुमेलन चुनिए:

  1. 1-b, 2-a, 3-c, 4-d
  2. 1-a, 2-b, 3-d, 4-c
  3. 1-b, 2-c, 3-a, 4-d
  4. 1-c, 2-a, 3-b, 4-d

उत्तर: 1-b, 2-a, 3-c, 4-d — NDMA आपदा प्रबंधन नीति का शीर्ष निकाय है (b)। NDRF विशेषीकृत बल है (a)। CDRI भारत की पहल पर 2019 में बना गठबंधन है (c)। सेंडाई ढाँचा 2015 में जापान के सेंदाई में अपनाया गया और इसकी अवधि 2015–2030 है (d)।

Q3. निर्देश: नीचे दिए गए प्रश्न में दो कथन दिए गए हैं, जिनमें एक अभिकथन (A) और एक कारण (R) है।
अभिकथन (A): भारत में आपदा प्रबंधन का ढाँचा बहु-स्तरीय है।
कारण (R): आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 के अंतर्गत राष्ट्रीय, राज्य और ज़िला स्तर पर प्राधिकरण गठित करने का प्रावधान है।
नीचे दिए विकल्पों में से सही उत्तर चुनिए:

  1. (a) A और R दोनों सही हैं और R, A की सही व्याख्या है
  2. (b) A और R दोनों सही हैं, परंतु R, A की सही व्याख्या नहीं है
  3. (c) A सही है, परंतु R गलत है
  4. (d) A गलत है, परंतु R सही है

उत्तर: (a) A और R दोनों सही हैं और R, A की सही व्याख्या है — अभिकथन सही है, क्योंकि आपदा प्रबंधन ढाँचा राष्ट्रीय (NDMA), राज्य (SDMA) और ज़िला (DDMA) स्तर पर संगठित है। कारण भी सही है और यही बहु-स्तरीय ढाँचे का वैधानिक आधार है, इसलिए R, A की सही व्याख्या करता है।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ चक्रवात-जनित बाढ़ और भूस्खलन की स्थिति में आपदा प्रबंधन के बहु-स्तरीय ढाँचे की भूमिका का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। चक्रवात अर्नब के हालिया अनुभव के संदर्भ में बताइए कि जब चक्रवात का मार्ग पूर्वानुमान से भिन्न हो जाए, तब भी त्वरित राहत और बचाव के लिए केंद्र और राज्य के बीच प्रभावी समन्वय किस प्रकार सुनिश्चित किया जा सकता है। (15 Marks)

रूपरेखा: उत्तर संरचना (आदर्श बिंदु):
1. भूमिका: ओडिशा के गंजम, गजपति और कंधमाल में चक्रवात अर्नब का मार्ग पूर्वानुमान से हटकर आंध्र प्रदेश की बजाय ओडिशा में व्यापक विनाश का कारण बना। इसमें बाढ़, भूस्खलन और नदी-उफान की स्थिति बनी। हेलीकॉप्टर से खाद्य पैकेट गिराना, नौकाओं से नौसेना/तटरक्षक और NDRF/ODRAF का राहत कार्य, और अनुग्रह राशि (Rs 4 लाख प्रति मृतक) के उदाहरण लिए जा सकते हैं।
2. वैधानिक ढाँचा: आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 के अंतर्गत राष्ट्रीय स्तर पर NDMA (धारा 3), राज्य स्तर पर SDMA (धारा 14), ज़िला स्तर पर DDMA (धारा 25) और विशेषीकृत बल के रूप में NDRF (धारा 44) का प्रावधान है। ओडिशा राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (OSDMA) और ODRAF की भूमिका भी स्पष्ट करें।
3. वित्तीय ढाँचा: SDRF और NDRF के माध्यम से राज्य को संसाधन मिलते हैं। वित्त आयोग की सिफ़ारिशें इनका आधार हैं। राज्य द्वारा अतिरिक्त राशि (Rs 20 करोड़ गंजम के लिए) स्वीकृत करने और केंद्र से सहायता माँगने की प्रक्रिया पर चर्चा करें।
4. अंतरराष्ट्रीय ढाँचा: सेंडाई आपदा जोखिम न्यूनीकरण ढाँचा (2015–2030) की चार प्राथमिकताएँ, यथा जोखिम की समझ, शासन को सुदृढ़ करना, लचीलेपन में निवेश और तैयारी व प्रतिक्रिया का सुदृढ़ीकरण, तथा बेहतर पुनर्निर्माण (Build Back Better) का सिद्धांत।
5. सफलता के पक्ष: 1999 के ओडिशा सुपर साइक्लोन के बाद चक्रवात आश्रय-स्थल, पूर्व चेतावनी प्रणाली (भारत मौसम विज्ञान विभाग के पूर्वानुमान) और समुदाय-आधारित तैयारी से मानवीय हानि में उल्लेखनीय कमी आई है।
6. चुनौतियाँ: पूर्वानुमान में अनिश्चितता, जलवायु परिवर्तन से बढ़ती तीव्रता, ज़िला प्राधिकरणों की क्षमता-सीमा, राहत-केंद्रित दृष्टिकोण बनाम निवारक दृष्टिकोण, तथा केंद्र-राज्य और विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय की कमियाँ।
7. समन्वय के उपाय: सहकारी संघवाद के अंतर्गत आपात स्थिति में पूर्व-स्वीकृत प्रोटोकॉल, बहु-एजेंसी अभ्यास, ज़िला स्तर पर त्वरित निर्णय-क्षमता, OAS अधिकारियों की तैनाती जैसे प्रशासनिक उपाय, सड़क-पुल-बिजली की त्वरित बहाली, तथा जोखिम-आधारित भूमि-उपयोग योजना।
8. निष्कर्ष: प्रभावी आपदा प्रबंधन के लिए केवल राहत नहीं, बल्कि जोखिम न्यूनीकरण, संस्थागत क्षमता और केंद्र-राज्य सहयोग का संतुलित समन्वय आवश्यक है।

स्रोत: orissapost.com

Odisha PCS (OPSC (OAS)) — राज्य PCS अभ्यास

Prelims: चक्रवात ‘अर्नब’ के बाद ओडिशा में राहत एवं बचाव अभियानों के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन सा राज्य सरकार द्वारा उठाया गया प्रमुख कदम नहीं है?

  1. तटीय क्षेत्रों से लोगों को सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित करना
  2. राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF) और राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF) की तैनाती
  3. अंतर्राष्ट्रीय सीमा पर सैन्य बलों की तैनाती
  4. बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में हेलीकॉप्टरों द्वारा राहत सामग्री पहुंचाना

उत्तर: अंतर्राष्ट्रीय सीमा पर सैन्य बलों की तैनाती — ओडिशा सरकार द्वारा चक्रवात ‘अर्नब’ के बाद राहत एवं बचाव अभियानों में अंतर्राष्ट्रीय सीमा पर सैन्य बलों की तैनाती नहीं की गई थी।

Mains: चक्रवात ‘अर्नब’ के बाद ओडिशा में आपदा प्रबंधन तंत्र की प्रभावशीलता का मूल्यांकन करते हुए, राज्य सरकार द्वारा अपनाई गई रणनीतियों एवं चुनौतियों पर प्रकाश डालिए। साथ ही, भविष्य में इस प्रकार की आपदाओं से निपटने के लिए सुधारात्मक उपाय सुझाइए।


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।


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