02 Nov चक्रवात मुरुसु: गंभीर चक्रवाती तूफान, आंध्र प्रदेश तट की ओर अग्रसर
✎ चक्रवात की तीव्रता IMD द्वारा हवा की अधिकतम स्थायी गति (knots) से तय होती है, जबकि जनहानि का सबसे बड़ा कारण प्रायः तूफ़ानी लहर और पूर्व चेतावनी-आधारित निकासी की कमी होती है।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper I — भूगोल (Geography): उष्णकटिबंधीय चक्रवात की उत्पत्ति, उत्तर-पूर्वी मानसून और तटीय भूगोल | GS Paper III — आपदा प्रबंधन (Disaster Management): चक्रवात की पूर्व चेतावनी, राहत और पुनर्वास; आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 का ढाँचा | GS Paper III — पर्यावरण (Environment): जलवायु परिवर्तन और तटीय संवेदनशीलता
- Prelims: तीव्र चक्रवाती तूफ़ान (Severe Cyclonic Storm) और IMD का वर्गीकरण, भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD), उत्तर-पूर्वी मानसून (Northeast Monsoon) की अवधि और प्रभाव-क्षेत्र, बंगाल की खाड़ी में चक्रवात की उत्पत्ति और मार्ग, चक्रवात के नामकरण की व्यवस्था (WMO/ESCAP पैनल), राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) और राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (SDMA), राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF) और आपदा प्रतिक्रिया निधि, तूफ़ानी लहर (Storm Surge) और उसका तटीय प्रभाव
- Essay: प्राकृतिक आपदाओं के प्रबंधन में पूर्व चेतावनी और सामुदायिक तैयारी की भूमिका, जलवायु परिवर्तन के दौर में तटीय समुदायों की संवेदनशीलता और अनुकूलन की चुनौतियाँ
त्वरित पुनरावृत्ति: चक्रवात की तीव्रता IMD द्वारा हवा की अधिकतम स्थायी गति (knots) से तय होती है, जबकि जनहानि का सबसे बड़ा कारण प्रायः तूफ़ानी लहर और पूर्व चेतावनी-आधारित निकासी की कमी होती है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार 1 नवंबर 2026 को बंगाल की खाड़ी के ऊपर बना गहरा अवदाब तीव्र होकर चक्रवात में बदला, जिसका नाम मुरासु रखा गया। 2 नवंबर को यह दक्षिण-पश्चिम और पश्चिम-मध्य बंगाल की खाड़ी में तीव्र चक्रवाती तूफ़ान बन गया। अनुमान है कि इसकी हवाएँ 100 से 110 किलोमीटर प्रति घंटा की गति से चलेंगी, जिनके झोंके 120 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुँच सकते हैं। यह तूफ़ान 3 नवंबर की सुबह नेल्लोर और नरसापुर के बीच, दक्षिण आंध्र प्रदेश के ओंगोल के आसपास तट से टकराने का अनुमान है। इसके प्रभाव में चेन्नई और तिरुवल्लुर जिलों में विद्यालय और महाविद्यालय बंद रखे गए। तेलंगाना के छह जिलों में नारंगी और पाँच में पीली चेतावनी जारी की गई तथा गुंटूर जिले में शैक्षणिक संस्थान बंद रहे। ओडिशा में पहले आए चक्रवात अर्णब से हुई जनहानि के बाद राहत पैकेज की घोषणा की गई। यह घटनाक्रम उत्तर-पूर्वी मानसून के दौरान बंगाल की खाड़ी में चक्रवातों की लगातार सक्रियता को दिखाता है।
पृष्ठभूमि
- उत्तर-पूर्वी मानसून (अक्टूबर से दिसंबर) के दौरान बंगाल की खाड़ी का तापमान और वायुमंडलीय अस्थिरता चक्रवात की उत्पत्ति के लिए अनुकूल होती है। इसी कारण भारत के पूर्वी तट पर इस मौसम में चक्रवात अधिक आते हैं। तमिलनाडु, पुदुचेरी, आंध्र प्रदेश और दक्षिणी ओडिशा इसके प्रमुख प्रभाव-क्षेत्र हैं।
- भारत में चक्रवात की पूर्व चेतावनी का कार्य IMD करता है। इसके लिए उपग्रह चित्रों, रडार नेटवर्क और मौसम मॉडलों का उपयोग होता है। चक्रवात-पूर्व चेतावनी प्रणाली से राज्य प्रशासन को समय पर निकासी और सुरक्षा के निर्णय लेने में सहायता मिलती है।
- उत्तर हिंद महासागर क्षेत्र में चक्रवातों के नामकरण की व्यवस्था विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) और ESCAP के पैनल के अंतर्गत है। इसके सदस्य देश नाम प्रस्तावित करते हैं। मुरासु इसी व्यवस्था के तहत दिया गया नाम है और इसका अर्थ युद्ध-नगाड़ा बताया गया है।
- आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 के अंतर्गत राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) की नीतियाँ और दिशा-निर्देश बनते हैं, जबकि राज्य स्तर पर राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (SDMA) और विशेष राहत आयुक्त (Special Relief Commissioner) कार्यान्वयन करते हैं। राहत और बचाव के लिए राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF) की टुकड़ियाँ तैनात की जाती हैं।
- एक ही मौसम में एक के बाद एक चक्रवात आने से राहत और बिजली बहाली जैसे कार्यों पर दबाव बढ़ता है। इसी कारण राज्यों के बीच संसाधनों की सहायता, जैसे बिजली पुनर्स्थापन के लिए अन्य राज्यों से सहयोग, महत्वपूर्ण हो जाता है।
चक्रवाती तूफ़ान क्या है?
- चक्रवाती तूफ़ान निम्न दाब वाला एक बड़ा वायुमंडलीय तंत्र है, जिसमें हवाएँ केंद्र के चारों ओर तेज़ी से घूमती हैं। उत्तरी गोलार्ध में इसकी दिशा वामावर्ती (anticlockwise) होती है।
- उष्णकटिबंधीय महासागरों के गर्म समुद्री सतह तापमान (आम तौर पर 26 डिग्री सेल्सियस से अधिक), पर्याप्त आर्द्रता और कोरिओलिस बल चक्रवात के विकास के मुख्य कारक हैं।
- IMD हवा की अधिकतम स्थायी गति (knots में) के आधार पर वर्गीकरण करता है: गहरा अवदाब 28–33 knots (52–61 किमी/घंटा), चक्रवाती तूफ़ान 34–47 knots (63–88 किमी/घंटा), तीव्र चक्रवाती तूफ़ान 48–63 knots (89–117 किमी/घंटा), अति तीव्र चक्रवाती तूफ़ान 64–119 knots (118–220 किमी/घंटा) और सुपर चक्रवाती तूफ़ान 120 knots या उससे अधिक।
- मुरासु को तीव्र चक्रवाती तूफ़ान के रूप में वर्गीकृत किया गया है, जिसकी गति IMD के इसी वर्गीकरण के अनुरूप है।
- तटीय क्षेत्र में सबसे अधिक जनहानि प्रायः तूफ़ानी लहर (Storm Surge) से होती है, यानी समुद्र के पानी का असामान्य रूप से ऊपर उठकर तट के भीतर घुस आना। इसके बाद तेज़ हवाओं से मकान, बिजली के खंभे और फसलें प्रभावित होती हैं।
- भारी वर्षा से बाढ़ और जलभराव होता है। नदियों और नालों में बहाव बढ़ने से खतरा और बढ़ जाता है, इसलिए चेतावनी में नदी-नालों से दूर रहने की सलाह दी जाती है।
- पूर्व चेतावनी, तटीय क्षेत्रों से समय पर निकासी, आश्रय-स्थल और सामुदायिक जागरूकता मिलकर जनहानि घटाने की प्रमुख रणनीति बनाते हैं।
मुख्य विशेषताएँ
| Feature | Significance |
|---|---|
| तीव्र चक्रवाती तूफ़ान (Severe Cyclonic Storm) की स्थिति | बंगाल की खाड़ी के दक्षिण-पश्चिम और पश्चिम-मध्य भाग में गहरे अवदाब से तीव्र होकर बना; IMD के अनुसार निरंतर हवा 100–110 किमी प्रति घंटा और झोंके 120 किमी प्रति घंटा तक |
| स्थलपात (Landfall) का अनुमानित स्थान | नेल्लोर और नरसापुर के बीच; दक्षिण आंध्र प्रदेश तट पर ओंगोल के निकट से पार करने का पूर्वानुमान; स्थलपात की तिथि 3 नवंबर, 2026 |
| मौसमी संदर्भ | उत्तर-पूर्वी मानसून (Northeast Monsoon) के दौरान बंगाल की खाड़ी में चक्रवात बनना सामान्य है, विशेषतः तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश के तटों पर इसका प्रभाव अधिक होता है |
| लगातार दो चक्रवात | चक्रवात अर्नब के कुछ ही दिनों बाद मुरासु का बनना; ओडिशा में अर्नब से जनहानि (स्रोत के अनुसार मृतकों की संख्या छह और दस लापता) और राहत-पुनर्वास के समानांतर नए चक्रवात की तैयारी |
| प्रभावित राज्य और क्षेत्र | आंध्र प्रदेश के तटीय ज़िले, तमिलनाडु (चेन्नई और तिरुवल्लुर में स्कूल-कॉलेज बंद), तेलंगाना (छह ज़िलों में ऑरेंज और पाँच में येलो अलर्ट) |
| चेतावनी और सुरक्षा तंत्र | IMD द्वारा पूर्वानुमान और चेतावनी; ज़िला प्रशासन द्वारा शैक्षणिक संस्थानों का अवकाश, तटीय क्षेत्रों में मत्स्यन पर रोक और जर्जर भवनों से दूर रहने के निर्देश |
महत्व
मानवीय और सामाजिक
- समय पर चेतावनी और निकासी से जीवन-हानि घटाने का सीधा लाभ; आपदा प्रबंधन में जीवन-रक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाती है
- विद्यार्थियों की सुरक्षा हेतु चेन्नई, तिरुवल्लुर और गुंटूर में अवकाश घोषित होना, जिससे शिक्षा-व्यवस्था पर अल्पकालिक प्रभाव पड़ता है
- आंगनवाड़ी केंद्रों को बंद रखना बच्चों और माताओं के पोषण व स्वास्थ्य सेवाओं में अस्थायी व्यवधान उत्पन्न करता है
प्रशासनिक और शासन
- ज़िला कलेक्टरों द्वारा अवकाश, अलर्ट और सुरक्षा परामर्श जारी करना आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 के तहत स्थापित बहु-स्तरीय ढांचे का व्यावहारिक रूप है
- ओडिशा द्वारा विशेष राहत पैकेज की घोषणा राज्य स्तर पर आपदा-पश्चात पुनर्वास की नीतिगत प्रक्रिया को दर्शाती है
- आंध्र प्रदेश द्वारा तमिलनाडु और कर्नाटक से बिजली पुनर्स्थापन में सहायता माँगना अंतर-राज्यीय सहयोग की व्यावहारिक आवश्यकता को रेखांकित करता है
आर्थिक
- बिजली और परिवहन सेवाओं के बाधित होने से औद्योगिक व घरेलू गतिविधियाँ प्रभावित होती हैं; पुनर्स्थापन की गति आर्थिक नुकसान की सीमा तय करती है
- तटीय मत्स्य गतिविधियों पर रोक से मछुआरा समुदाय की आय पर अल्पकालिक दबाव पड़ता है
- खड़ी फसलों और तटीय बुनियादी ढांचे को हवा और वर्षा से क्षति होने की आशंका रहती है
पर्यावरणीय और जलवायु
- बंगाल की खाड़ी में तीव्र चक्रवातों की बढ़ती आवृत्ति पर वैज्ञानिक अध्ययनों में चर्चा हो रही है, जिससे दीर्घकालिक अनुकूलन की आवश्यकता रेखांकित होती है
- तटीय पारिस्थितिकी (मैंग्रोव, बालू के टीले) चक्रवात के प्रभाव को कुछ हद तक कम करने में सहायक मानी जाती है
चुनौतियाँ
1. पूर्वानुमान से निकासी तक का अंतर
- IMD का पूर्वानुमान सटीक होने के बावजूद उसे अंतिम नागरिक तक समय पर और समझ में आने योग्य रूप में पहुँचाना चुनौती है
- ग्रामीण और तटीय बस्तियों में अलर्ट का प्रसार सीमित रहने से निकासी देर से शुरू होती है
- भाषा, पहुँच और डिजिटल साधनों की असमानता के कारण कमज़ोर वर्गों तक सूचना सबसे आखिर में पहुँचती है
यूपीएससी लिंक: आपदा प्रबंधन; प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली; सुशासन और सूचना का अधिकार
2. बिजली और बुनियादी ढांचे की बहाली
- तेज़ हवा से खंभे और तार गिरने से बिजली आपूर्ति लंबे समय तक बाधित रहती है
- एक राज्य की बहाली क्षमता सीमित होने पर अन्य राज्यों से मानव-संसाधन और उपकरण मँगाने पड़ते हैं
- जर्जर बुनियादी ढांचे की बार-बार मरम्मत से राज्य के वित्तीय संसाधनों पर दबाव बढ़ता है
यूपीएससी लिंक: संघवाद और अंतर-राज्यीय समन्वय; बुनियादी ढांचा और आपदा-सहनीय अवसंरचना
3. तटीय कमज़ोर वर्गों की सुरक्षा
- तटीय क्षेत्रों में कच्चे घरों, झुग्गियों और जर्जर भवनों में रहने वाले परिवार सर्वाधिक जोखिम में होते हैं
- आश्रय-गृहों की संख्या, क्षमता और बुनियादी सुविधाएँ हमेशा पर्याप्त नहीं होतीं
- मछुआरा समुदाय की आजीविका में अचानक ठहराव से गरीबी और ऋणग्रस्तता बढ़ने का खतरा रहता है
यूपीएससी लिंक: आपदा में कमज़ोर वर्गों की सुरक्षा; सामाजिक सुरक्षा; तटीय आजीविका
4. लगातार आपदाओं से राहत-संसाधनों पर दबाव
- कम अंतराल में दो चक्रवात (अर्नब और मुरासु) से राहत-कोष और मानव-संसाधन एक साथ खिंच जाते हैं
- राहत-कार्य और अगले चक्रवात की तैयारी साथ-साथ चलाने से प्रशासनिक क्षमता पर भार पड़ता है
- राज्य आपदा प्रतिक्रिया कोष (State Disaster Response Fund – SDRF) की सीमित उपलब्धता दीर्घकालिक पुनर्निर्माण में बाधा बन सकती है
यूपीएससी लिंक: आपदा प्रबंधन वित्त; केंद्र-राज्य वित्तीय संबंध; आपदा न्यूनीकरण
5. जलवायु-जनित तीव्रता और अनुकूलन
- समुद्र की सतह के तापमान में बढ़ोतरी को चक्रवातों की तीव्रता से जोड़कर देखने की वैज्ञानिक चर्चा जारी है
- तटीय नियोजन और भवन-संहिता में आपदा-प्रतिरोधी मानकों का पालन सभी जगह समान नहीं है
- जलवायु-अनुकूल तटीय शहरी नियोजन की कमी से भविष्य में नुकसान की आशंका बढ़ती है
यूपीएससी लिंक: जलवायु परिवर्तन और उसका प्रभाव; तटीय प्रबंधन; सतत विकास
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| Issue | Concern |
|---|---|
| चेतावनी का अंतिम मील तक संप्रेषण | सूचना देर से या अधूरी पहुँचने पर निकासी प्रभावित होती है; कमज़ोर वर्ग सबसे अधिक जोखिम में रहते हैं |
| बिजली और संचार का बाधित होना | तेज़ हवा से खंभे और टावर गिरने पर राहत-कार्य और चेतावनी प्रसार दोनों धीमे पड़ते हैं |
| तटीय आवास की असुरक्षा | कच्चे घर और झुग्गियाँ तेज़ हवा और वर्षा में सबसे पहले क्षतिग्रस्त होती हैं |
| मछुआरों की आजीविका | मत्स्यन पर रोक से आय रुकती है और राहत पहुँचने तक परिवार ऋण के दबाव में आ सकते हैं |
| राहत-संसाधनों की सीमितता | लगातार चक्रवातों से SDRF और मानव-संसाधन पर भार बढ़ता है, जिससे पुनर्निर्माण में विलंब हो सकता है |
| जलवायु-जनित जोखिम का बढ़ना | तटीय नियोजन में आपदा-प्रतिरोधी मानकों की कमी भविष्य के नुकसान को बढ़ा सकती है |
आगे की राह
- प्रारंभिक चेतावनी को स्थानीय भाषाओं में, SMS, रेडियो, सामुदायिक नेटवर्क और स्थानीय स्वयंसेवकों के माध्यम से अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाया जाए
- तटीय गाँवों और झुग्गियों में पूर्व-चिह्नित सुरक्षित आश्रय-गृह तैयार रखे जाएँ, जिनमें पेयजल, शौचालय और चिकित्सा सुविधा उपलब्ध हो
- बिजली वितरण कंपनियों के लिए आपदा-पूर्व मरम्मत दल, आवश्यक उपकरणों का भंडार और अंतर-राज्यीय सहायता के स्पष्ट प्रोटोकॉल बनाए जाएँ
- मछुआरा परिवारों के लिए मत्स्यन-अवधि की आय-क्षतिपूर्ति और त्वरित नकद सहायता की व्यवस्था की जाए
- राज्य आपदा प्रतिक्रिया कोष और राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (National Disaster Response Force – NDRF) के बीच समन्वय के लिए संयुक्त अभ्यास नियमित किए जाएँ
- तटीय ज़िलों की भवन-संहिता में चक्रवात-प्रतिरोधी मानक सख्ती से लागू हों और जर्जर भवनों की पहचान कर उनका पुनर्वास किया जाए
- लगातार चक्रवातों के बाद प्रभाव-मूल्यांकन और सीखे गए सबक का दस्तावेज़ीकरण किया जाए, ताकि अगली बार की तैयारी और अधिक प्रभावी हो सके
- जलवायु-जोखिम मानचित्रण को राज्य और ज़िला आपदा योजनाओं में शामिल कर तटीय नियोजन को दीर्घकालिक दृष्टि दी जाए
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
चक्रवाती तूफ़ान (Cyclonic Storm) · IMD वर्गीकरण (IMD Classification) · बंगाल की खाड़ी (Bay of Bengal) · पूर्वोत्तर मानसून (Northeast Monsoon) · आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 (Disaster Management Act, 2005) · राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) · प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली (Early Warning System) · राष्ट्रीय चक्रवात जोखिम न्यूनीकरण परियोजना (NCRMP) · आपदा न्यूनीकरण हेतु सेंडाई फ्रेमवर्क (Sendai Framework) · जलवायु परिवर्तन और तीव्र चक्रवात (Climate Change and Intensifying Cyclones) · राज्य आपदा प्रतिक्रिया कोष (SDRF) · सहकारी संघवाद (Cooperative Federalism)
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- अनुच्छेद 21 (जीवन का अधिकार) — जीवन-रक्षा और सुरक्षित निकासी का आधार
अवधारणा प्रवाह
बंगाल की खाड़ी में निम्न दबाव क्षेत्र से गहरा अवदाब बनता है → अनुकूल समुद्री और वायुमंडलीय परिस्थितियों में अवदाब तीव्र होकर चक्रवात बनता है → चक्रवात तीव्र होकर तीव्र चक्रवाती तूफ़ान (Severe Cyclonic Storm) की श्रेणी में पहुँचता है → IMD पूर्वानुमान और चेतावनी जारी करता है; ज़िला प्रशासन अवकाश, अलर्ट और निकासी के निर्देश देता है → नेल्लोर और नरसापुर के बीच स्थलपात होता है, जिससे तेज़ हवा और भारी वर्षा होती है → बिजली, सड़क और संचार बाधित होते हैं; राहत-कार्य के लिए SDRF और NDRF सक्रिय होते हैं → अंतर-राज्यीय सहयोग से बिजली पुनर्स्थापन और दीर्घकालिक पुनर्वास की प्रक्रिया आरंभ होती है
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए, जो उत्तर हिंद महासागर में उष्णकटिबंधीय चक्रवातों से संबंधित हैं:
1. भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के वर्गीकरण में ‘गंभीर चक्रवाती तूफ़ान’ (Severe Cyclonic Storm) की श्रेणी तब दी जाती है जब 3-मिनट की औसत स्थायी पवन गति 48 से 63 नॉट के बीच हो।
2. बंगाल की खाड़ी में अक्टूबर–दिसंबर के दौरान बनने वाले चक्रवात प्रायः लौटते दक्षिण-पश्चिम मानसून से जुड़े होते हैं।
3. उत्तर हिंद महासागर क्षेत्र के चक्रवातों के नाम भारत मौसम विज्ञान विभाग अकेले तय करता है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- केवल तीन
- सभी
उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है: 48–63 नॉट (लगभग 89–117 किमी प्रति घंटा) की सीमा ‘गंभीर चक्रवाती तूफ़ान’ की है। कथन 2 सही है: अक्टूबर–दिसंबर का चक्रवाती मौसम लौटते दक्षिण-पश्चिम मानसून की अवधि में आता है। कथन 3 गलत है: नाम WMO-ESCAP पैनल के सदस्य देशों द्वारा प्रस्तावित होते हैं, किसी एक देश का अधिकार नहीं।
Q2. निम्नलिखित पर विचार कीजिए:
अभिकथन (A): राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण भारत में आपदा प्रबंधन की शीर्ष संस्था है।
कारण (R): आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 के अंतर्गत राष्ट्रीय, राज्य और ज़िला स्तर पर त्रि-स्तरीय संस्थागत ढाँचा स्थापित किया गया है।
उपर्युक्त के संदर्भ में, नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनिए:
- (a) A और R दोनों सही हैं और R, A की सही व्याख्या है।
- (b) A और R दोनों सही हैं, किंतु R, A की सही व्याख्या नहीं है।
- (c) A सही है, किंतु R गलत है।
- (d) A गलत है, किंतु R सही है।
उत्तर: (b) A और R दोनों सही हैं, किंतु R, A की सही व्याख्या नहीं है। — NDMA आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 के तहत गठित शीर्ष संस्था है और इसके अध्यक्ष प्रधानमंत्री होते हैं, अतः A सही है। त्रि-स्तरीय ढाँचा (राष्ट्रीय, राज्य, ज़िला) भी अधिनियम में है, अतः R सही है। परन्तु R संस्थागत संरचना बताता है, यह नहीं बताता कि NDMA शीर्ष संस्था क्यों है; इसलिए R, A की व्याख्या नहीं करता।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ चक्रवात पूर्वानुमान में भारत की प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली आज एक सफल उदाहरण मानी जाती है, फिर भी तटीय चक्रवातों से जान-माल की हानि पूरी तरह नहीं रुकी है। इस कथन का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। साथ ही बताइए कि बढ़ती तीव्रता वाले चक्रवातों के दौर में केंद्र और राज्यों की भूमिका को किस प्रकार पुनर्संरचित करने की आवश्यकता है। (15 Marks)
रूपरेखा: मॉडल उत्तर के बिंदु:
(1) भूमिका: मिचौंग/फानी जैसे उदाहरणों के बजाय इस समाचार से जुड़ा संदर्भ लें—बंगाल की खाड़ी में कुछ ही दिनों में दो चक्रवात (आर्नब और मुरासु) बने; IMD द्वारा ‘गंभीर चक्रवाती तूफ़ान’ घोषित, 100–110 किमी/घंटा और 120 किमी/घंटा तक झोंकों के साथ आंध्र प्रदेश तट (ओंगोल के पास) से स्थलपात का पूर्वानुमान।
(2) सफलता के पक्ष: IMD का चक्रवात-वर्गीकरण (डिप्रेशन से सुपर साइक्लोन तक) और समय-पूर्व चेतावनी; 1999 ओडिशा सुपर साइक्लोन की तुलना में 2013 फेलिन/फैलिन और बाद के चक्रवातों में मृत्यु-संख्या में भारी कमी; चक्रवात आश्रय-स्थल, तटीय ज़िलों में निकासी (evacuation) तथा स्कूल-कॉलेज बंदी जैसे एहतियाती उपाय।
(3) कमियाँ: तीव्र वर्षा और बाढ़, तेज़ हवाओं से बिजली और संचार ठप होना (आंध्र प्रदेश का विद्युत-पुनर्स्थापन हेतु तमिलनाडु और कर्नाटक से सहायता माँगना), कच्चे मकान, मछुआरों की आजीविका, पूर्वानुमान और ज़मीनी प्रतिक्रिया के बीच की दूरी, ‘अंतिम मील’ तक चेतावनी का पहुँचना, वर्षा-आधारित बाढ़ के लिए कम ध्यान।
(4) संस्थागत ढाँचा: आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 की धारा 3 (NDMA), धारा 14 (SDMA), धारा 25 (DDMA); राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन योजना (NDMP), 2019; राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF) और राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF); राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया कोष और राज्य आपदा प्रतिक्रिया कोष (SDRF) के माध्यम से वित्त-पोषण; राज्य के विशेष राहत आयुक्त (Special Relief Commissioner) की भूमिका।
(5) नीतिगत कार्यक्रम: विश्व बैंक-सहायता प्राप्त राष्ट्रीय चक्रवात जोखिम न्यूनीकरण परियोजना (NCRMP) के तहत चक्रवात आश्रय-स्थल, तटीय सुरक्षा और संचार उपकरण; सेंडाई फ्रेमवर्क (2015–2030) के चार प्राथमिकता क्षेत्र; मैंग्रोव और तटीय हरित अवसंरचना।
(6) संघवाद का विश्लेषण: आपदा प्रबंधन में प्राथमिक दायित्व राज्यों का है, जबकि केंद्र वित्तीय और तकनीकी सहायता देता है। सहकारी संघवाद के पक्ष में तर्क (अंतर-राज्यीय संसाधन-साझेदारी, जैसे आंध्र–तमिलनाडु–कर्नाटक सहायता) और केंद्रीकरण के पक्ष में तर्क (एक समान मानक, तेज़ निर्णय) दोनों रखें और संतुलित निष्कर्ष दें।
(7) जलवायु परिवर्तन: गर्म समुद्री सतह तापमान से चक्रवातों की तीव्रता में वृद्धि की वैज्ञानिक संभावना (IPCC AR6 के अनुसार), इसलिए ‘तीव्रता-आधारित’ तैयारी और भू-उपयोग नियोजन (तटीय विनियमन क्षेत्र अधिसूचनाएँ) की आवश्यकता।
(8) निष्कर्ष: चेतावनी से अधिक जोखिम-घटाव (risk reduction) और ज़िला-स्तरीय क्षमता-निर्माण पर बल देने वाला समेकित दृष्टिकोण।
स्रोत: The Hindu
Andhra Pradesh PCS (APPSC) — राज्य PCS अभ्यास
Prelims: हाल ही में, ‘मुरसु’ नामक चक्रवाती तूफान ने गंभीर चक्रवाती तूफान का रूप ले लिया है और यह किस भारतीय राज्य के दक्षिणी तट की ओर बढ़ रहा है?
- तमिलनाडु
- ओडिशा
- आंध्र प्रदेश
- केरल
उत्तर: आंध्र प्रदेश — चक्रवात ‘मुरसु’ दक्षिणी आंध्र प्रदेश की ओर बढ़ रहा है, जो राज्य के तटीय क्षेत्रों के लिए चिंता का विषय है।
Mains: चक्रवात ‘मुरसु’ के दक्षिणी आंध्र प्रदेश की ओर बढ़ने के संदर्भ में, राज्य सरकार द्वारा आपदा प्रबंधन और तटीय समुदायों की सुरक्षा के लिए उठाए जाने वाले संभावित कदमों पर चर्चा करें।
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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