भारतीय नौसेना हेतु 8 नेक्स्ट जनरेशन कॉर्वेट्स का अधिग्रहण

भारतीय नौसेना हेतु 8 नेक्स्ट जनरेशन कॉर्वेट्स का अधिग्रहण

भारतीय नौसेना हेतु 8 नेक्स्ट जनरेशन कॉर्वेट्स का अधिग्रहण

नेक्स्ट जेनरेशन कार्वेट निर्माण प्रक्रियामांगनौसेना की आवश्यकताअनुबंधGRSE, GSL सेनिर्माणघरेलू शिपयार्ड द्वारावितरणनौसेना को पोत
नेक्स्ट जेनरेशन कार्वेट निर्माण प्रक्रिया

✎ आत्मनिर्भर भारत के अंतर्गत रक्षा मंत्रालय ने GRSE और GSL के साथ ₹53,866.50 करोड़ के अनुबंधों से आठ नेक्स्ट जेनरेशन कार्वेट का स्वदेशी निर्माण सुनिश्चित किया, जो सार्वजनिक रक्षा उपक्रमों के माध्यम से नौसेना के आधुनिकीकरण और…

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विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper III — आंतरिक सुरक्षा और रक्षा: रक्षा अधिग्रहण, स्वदेशीकरण और रक्षा सार्वजनिक उपक्रम  |  GS Paper III — अर्थव्यवस्था: विनिर्माण क्षेत्र, मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत पहल  |  GS Paper II — शासन: केंद्र सरकार के मंत्रालयों के बीच नीति-क्रियान्वयन और सार्वजनिक उपक्रमों की भूमिका
  • Prelims: नेक्स्ट जेनरेशन कार्वेट (Next Generation Corvette – NGC) और कार्वेट की परिभाषा, गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स लिमिटेड (GRSE) — रक्षा सार्वजनिक उपक्रम, कोलकाता, गोवा शिपयार्ड लिमिटेड (GSL) — रक्षा सार्वजनिक उपक्रम, गोवा, रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया (Defence Acquisition Procedure – DAP) 2020, सकारात्मक स्वदेशीकरण सूची (Positive Indigenisation List), मेक इन इंडिया के अंतर्गत ‘मेक-II’ श्रेणी की परियोजनाएँ, सुरक्षा संबंधी मंत्रिमंडलीय समिति (Cabinet Committee on Security – CCS) की भूमिका, रक्षा औद्योगिक गलियारे (Defence Industrial Corridors)
  • Essay: आत्मनिर्भरता और रक्षा विनिर्माण: स्वदेशी पोत निर्माण से सामरिक स्वायत्तता तक, सार्वजनिक क्षेत्र के रक्षा उपक्रम और निजी उद्योग के बीच सहयोग: भारत के रक्षा औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र की चुनौतियाँ

त्वरित पुनरावृत्ति: आत्मनिर्भर भारत के अंतर्गत रक्षा मंत्रालय ने GRSE और GSL के साथ ₹53,866.50 करोड़ के अनुबंधों से आठ नेक्स्ट जेनरेशन कार्वेट का स्वदेशी निर्माण सुनिश्चित किया, जो सार्वजनिक रक्षा उपक्रमों के माध्यम से नौसेना के आधुनिकीकरण और स्वदेशीकरण की दिशा को दर्शाता है।

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यह खबर चर्चा में क्यों?

रक्षा मंत्रालय (Ministry of Defence) ने आत्मनिर्भर भारत के अंतर्गत भारतीय नौसेना के लिए आठ नेक्स्ट जेनरेशन कार्वेट के निर्माण हेतु ₹53,866.50 करोड़ के अनुबंध गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स लिमिटेड (GRSE) और गोवा शिपयार्ड लिमिटेड (GSL) के साथ किए हैं। सूचना के अनुसार इनमें से पाँच पोत GRSE और तीन पोत GSL द्वारा बनाए जाएँगे। यह समझौता इस दृष्टि से महत्वपूर्ण है कि बड़े युद्धपोतों का निर्माण अब मुख्यतः देश के भीतर के सार्वजनिक उपक्रमों द्वारा किया जा रहा है, जिससे विदेशी आपूर्ति पर निर्भरता घटती है और घरेलू पोत-निर्माण क्षमता, आपूर्ति शृंखला तथा रोजगार को बल मिलता है। सामरिक दृष्टि से यह भारतीय नौसेना की समुद्री क्षमता के आधुनिकीकरण का हिस्सा है।

पृष्ठभूमि

  • आत्मनिर्भर भारत अभियान की घोषणा मई 2020 में की गई थी, जिसका उद्देश्य रक्षा सहित विभिन्न क्षेत्रों में आयात पर निर्भरता घटाकर घरेलू उत्पादन और नवाचार को बढ़ावा देना है।
  • मेक इन इंडिया कार्यक्रम सितंबर 2014 में आरंभ हुआ था। रक्षा क्षेत्र में इसके अंतर्गत लाइसेंसिंग, औद्योगिक नीति और अधिग्रहण प्रक्रियाओं में सुधार करके स्वदेशी उत्पादन को प्रोत्साहित किया गया है।
  • रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया (DAP) 2020 में स्वदेशी उपकरणों की खरीद को प्राथमिकता देने वाले प्रावधान शामिल किए गए, और रक्षा मंत्रालय द्वारा समय-समय पर सकारात्मक स्वदेशीकरण सूचियाँ जारी की जाती रही हैं, जिनमें शामिल वस्तुओं का आयात प्रतिबंधित या सीमित किया जाता है।
  • रक्षा औद्योगिक गलियारे उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु में स्थापित किए गए हैं, जिनका उद्देश्य रक्षा विनिर्माण को क्षेत्रीय स्तर पर केंद्रित करना और निजी तथा सार्वजनिक निवेश को आकर्षित करना है।
  • भारतीय नौसेना पहले से ही स्वदेशी रूप से निर्मित युद्धपोतों की शृंखलाएँ, जैसे शिवालिक श्रेणी, संचालित कर रही है, जिनमें GRSE और अन्य भारतीय शिपयार्ड की भूमिका रही है। यह अनुभव नई परियोजनाओं के लिए आधार बनता है।

नेक्स्ट जेनरेशन कार्वेट और स्वदेशी पोत-निर्माण क्या है?

  • कार्वेट (Corvette) अपेक्षाकृत छोटा, तेज़ और बहु-भूमिका वाला युद्धपोत है, जो प्रायः तटीय और खुले समुद्र में गश्त, पनडुब्बी-रोधी अभियान और सतही निगरानी के लिए प्रयोग होता है। आकार में यह फ्रिगेट से छोटा और गश्ती पोत से बड़ा माना जाता है।
  • नेक्स्ट जेनरेशन कार्वेट (NGC) नौसेना की अगली पीढ़ी के छोटे युद्धपोतों की श्रेणी है, जिसमें उन्नत सेंसर, हथियार प्रणाली और स्वदेशी उपकरणों के उपयोग पर बल दिया गया है।
  • स्वदेशी पोत-निर्माण का अर्थ है कि पोत का डिज़ाइन, संरचना, प्रणोदन और हथियार प्रणालियों में अधिकतम घरेलू सामग्री और तकनीक का उपयोग हो, जिससे आयात-निर्भरता कम हो।
  • GRSE (कोलकाता) और GSL (गोवा) रक्षा मंत्रालय के अधीन कार्यरत सार्वजनिक क्षेत्र के रक्षा पोत-निर्माण उपक्रम हैं। सरकारी उपक्रमों को ऐसे बड़े अनुबंध देना सरकार की स्वदेशी क्षमता विकसित करने की नीति को दर्शाता है।
  • बड़े रक्षा अनुबंधों का अनुमोदन सामान्यतः उच्च मूल्य के आधार पर सक्षम प्राधिकारी द्वारा किया जाता है; अत्यधिक मूल्य वाले प्रस्तावों के लिए सुरक्षा संबंधी मंत्रिमंडलीय समिति (CCS) की स्वीकृति आवश्यक होती है।
  • सैन्य नौवहन और समुद्री सुरक्षा में आत्मनिर्भरता से शिपयार्डों को दीर्घकालिक ऑर्डर बुक मिलती है, जिससे उनकी उत्पादन क्षमता, कौशल विकास और सहायक उद्योगों (MSME सहित) का विस्तार होता है।
  • पोत-निर्माण में स्वदेशीकरण की सफलता के लिए डिज़ाइन क्षमता, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण, गुणवत्ता नियंत्रण और समय पर परियोजना-क्रियान्वयन जैसी चुनौतियों का समाधान भी आवश्यक है।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
परियोजना का स्वरूप रक्षा मंत्रालय (Ministry of Defence, MoD) ने भारतीय नौसेना के लिए आठ अगली पीढ़ी के लघु युद्धपोत (Next Generation Corvettes, NGC) हेतु 53,866.50 करोड़ रुपये के अनुबंध किए हैं, जो घरेलू पोत निर्माण क्षमता के प्रयोग का स्पष्ट उदाहरण है।
अनुबंधित कंपनियाँ गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स लिमिटेड (Garden Reach Shipbuilders & Engineers Limited, GRSE) और गोवा शिपयार्ड लिमिटेड (Goa Shipyard Limited, GSL) दोनों सार्वजनिक क्षेत्र के रक्षा पोत निर्माता हैं। इससे सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों की भूमिका सुदृढ़ होती है।
अनुबंध की प्रकृति यह भारत सरकार की ओर से की गई बड़ी पूंजीगत खरीद है, जिसमें बहु-वर्षीय निर्माण, प्रौद्योगिकी अंतरण और स्थानीय आपूर्ति शृंखला का समावेश होता है।
नौसेना की क्षमता अगली पीढ़ी के लघु युद्धपोत तटीय एवं समुद्री सुरक्षा, पनडुब्बी-रोधी अभियान और गश्त जैसे कार्यों के लिए उपयोगी होते हैं, जिससे भारतीय नौसेना के बेड़े का आधुनिकीकरण होता है।
आत्मनिर्भरता का संदर्भ यह अनुबंध आत्मनिर्भर भारत अभियान (Aatmanirbhar Bharat) के अंतर्गत स्वदेशीकरण को बढ़ावा देने के लक्ष्य से जुड़ा है, जिससे रक्षा आयात पर निर्भरता घटाने की दिशा में कदम बढ़ता है।

महत्व

सामरिक महत्व

  • समुद्री सीमाओं और हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की नौसैनिक उपस्थिति सुदृढ़ होती है, जिससे समुद्री सुरक्षा की क्षमता बढ़ती है।
  • आधुनिक लघु युद्धपोत बेड़े की संख्या और क्षमता में वृद्धि से नौसेना की परिचालन तत्परता बढ़ती है।
  • पुराने पोतों की सेवा-निवृत्ति के बाद बेड़े में निरंतरता बनाए रखना दीर्घकालिक सामरिक नियोजन का हिस्सा है।

आर्थिक महत्व

  • बड़े रक्षा अनुबंध से पोत निर्माण क्षेत्र में उत्पादन, रोजगार और सहायक उद्योगों की गतिविधि बढ़ती है।
  • घरेलू शिपयार्ड को दीर्घकालिक ऑर्डर बुक मिलने से उनकी वित्तीय योजना और क्षमता विस्तार को स्थिरता मिलती है।
  • रक्षा विनिर्माण में घरेलू मूल्य संवर्धन बढ़ने से आयात में कमी और विदेशी मुद्रा की बचत संभव होती है, जो आर्थिक संवृद्धि के लिए सहायक है।

नीतिगत महत्व

  • यह अनुबंध आत्मनिर्भर भारत अभियान की भावना को व्यावहारिक रूप देता है और स्वदेशीकरण की नीति को मजबूती प्रदान करता है।
  • सार्वजनिक क्षेत्र के शिपयार्ड के माध्यम से राज्य-स्वामित्व वाले उपक्रमों की रक्षा उत्पादन में भूमिका स्पष्ट होती है।

चुनौतियाँ

1. परियोजना प्रबंधन और समय-सीमा

  • बहु-इकाई पोत निर्माण परियोजनाओं में निर्धारित समय पर डिलीवरी सुनिश्चित करना कठिन होता है।
  • देरी से लागत में वृद्धि और नौसेना की क्षमता-योजना पर प्रभाव पड़ सकता है।

2. प्रौद्योगिकी और स्वदेशीकरण का स्तर

  • उन्नत सेंसर, हथियार प्रणाली और इंजन जैसे घटकों में अभी भी आयात पर निर्भरता रह सकती है।
  • पूर्ण स्वदेशीकरण के लिए अनुसंधान एवं विकास तथा उत्पादन-आधारित प्रौद्योगिकी विकास दोनों आवश्यक हैं।

3. आपूर्ति शृंखला और एमएसएमई की भागीदारी

  • रक्षा पोत निर्माण में बड़ी संख्या में उप-घटक आपूर्तिकर्ताओं से आते हैं, जिनमें सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) शामिल हो सकते हैं।
  • आपूर्तिकर्ताओं की गुणवत्ता, वित्त और समय-पालन की समस्याएँ पूरी परियोजना को प्रभावित कर सकती हैं।

4. सार्वजनिक क्षेत्र के शिपयार्ड की क्षमता और वित्तीय सुदृढ़ता

  • सार्वजनिक क्षेत्र के शिपयार्ड को आधुनिक सुविधाओं, कुशल श्रमबल और पूंजी निवेश की निरंतर आवश्यकता होती है।
  • प्रतिस्पर्धी माहौल और निजी क्षेत्र की बढ़ती भागीदारी के बीच इनकी दक्षता बनाए रखना चुनौतीपूर्ण है।

5. वित्तीय अनुशासन और सार्वजनिक व्यय

  • इतने बड़े पूंजीगत व्यय से राजकोषीय संसाधनों पर दबाव आता है और बजट-आवंटन में प्राथमिकताओं का संतुलन आवश्यक होता है।
  • लागत-मूल्य निर्धारण और भुगतान की शर्तों में पारदर्शिता बनाए रखना आवश्यक है।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
समय पर डिलीवरी निर्माण में देरी से लागत बढ़ने और नौसेना की योजना प्रभावित होने का जोखिम रहता है।
घटकों का आयात महत्वपूर्ण प्रणालियों में विदेशी घटकों पर निर्भरता से स्वदेशीकरण का लक्ष्य अधूरा रह सकता है।
एमएसएमई की भागीदारी छोटे आपूर्तिकर्ताओं की वित्तीय और तकनीकी क्षमता सीमित हो सकती है, जिससे आपूर्ति शृंखला कमजोर होती है।
शिपयार्ड की क्षमता आधुनिकीकरण और कौशल-विकास में निवेश न होने पर उत्पादन क्षमता पर दबाव आ सकता है।
राजकोषीय दबाव बड़े पूंजीगत व्यय से अन्य विकास मदों के लिए संसाधनों का संतुलन कठिन हो सकता है।

सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें

  • आत्मनिर्भर भारत अभियान (Aatmanirbhar Bharat)

आगे की राह

  • परियोजना की प्रगति की नियमित समीक्षा और समय-सीमा की निगरानी के लिए स्पष्ट प्रदर्शन संकेतक तय किए जाएँ।
  • प्रमुख प्रणालियों में स्वदेशी घटकों की पहचान कर उनके विकास के लिए अनुसंधान एवं विकास में निवेश बढ़ाया जाए।
  • एमएसएमई आपूर्तिकर्ताओं को गुणवत्ता प्रमाणन, तकनीकी सहायता और समय पर भुगतान की व्यवस्था से जोड़ा जाए।
  • सार्वजनिक क्षेत्र के शिपयार्ड में आधुनिक सुविधाओं, कौशल-विकास और प्रबंधन सुधारों के लिए दीर्घकालिक योजना बनाई जाए।
  • निजी शिपयार्ड और सार्वजनिक क्षेत्र के बीच सहयोग के मॉडल विकसित कर प्रतिस्पर्धा और क्षमता दोनों को बढ़ाया जाए।
  • रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया के अंतर्गत स्वदेशीकरण सूचियों को नियमित रूप से अद्यतन किया जाए, ताकि घरेलू उद्योग को स्पष्ट संकेत मिलें।
  • बड़े पूंजीगत व्यय के लिए बजट-प्रबंधन और लागत-नियंत्रण की पारदर्शी प्रणाली सुनिश्चित की जाए।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

आत्मनिर्भर भारत (Aatmanirbhar Bharat) · स्वदेशीकरण (Indigenisation) · सकारात्मक स्वदेशीकरण सूची (Positive Indigenisation List) · रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया (Defence Acquisition Procedure) · रक्षा सार्वजनिक उपक्रम (Defence Public Sector Undertakings) · अगली पीढ़ी के कॉर्वेट (Next Generation Corvettes) · भारतीय नौसेना की समुद्री क्षमता (Naval Maritime Capability) · रक्षा औद्योगिक गलियारे (Defence Industrial Corridors) · संविदा और अनुच्छेद 299(1) (Contracts and Article 299(1)) · संघ सूची की प्रविष्टि 1: रक्षा (Union List Entry 1: Defence) · मेक इन इंडिया (Make in India) · रक्षा उत्पादन एवं निर्यात संवर्धन नीति (Defence Production and Export Promotion Policy)

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • अनुच्छेद 53: रक्षा सेवाओं का संचालन संघ की कार्यपालिका शक्ति का भाग
  • अनुच्छेद 299: संघ की ओर से अनुबंध राष्ट्रपति के नाम से होते हैं
  • सातवीं अनुसूची, संघ सूची प्रविष्टि 1 और 2: रक्षा एवं नौसेना संघ का विषय

अवधारणा प्रवाह

भारतीय नौसेना की क्षमता-आवश्यकता से अगली पीढ़ी के लघु युद्धपोतों की मांग उत्पन्न होती है।  →  रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया के अंतर्गत स्वदेशी शिपयार्ड का चयन और अनुबंध-प्रक्रिया पूरी की जाती है।  →  जीआरएसई और जीएसएल द्वारा पोत निर्माण शुरू होता है, जिसमें घरेलू उप-घटक और एमएसएमई आपूर्तिकर्ता जुड़ते हैं।  →  स्वदेशी उत्पादन से आयात घटता है, रोजगार और औद्योगिक गतिविधि बढ़ती है और आर्थिक संवृद्धि को सहारा मिलता है।  →  समयबद्ध डिलीवरी से नौसेना का बेड़ा सुदृढ़ होता है और समुद्री सुरक्षा की क्षमता बढ़ती है।  →  सफल परियोजना से आत्मनिर्भर भारत अभियान का लक्ष्य व्यावहारिक रूप में पुष्ट होता है और भविष्य की रक्षा खरीद के लिए विश्वसनीय मॉडल बनता है।

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 299(1) के अंतर्गत भारत सरकार की कार्यपालिका शक्ति के प्रयोग में की गई संविदाएँ राष्ट्रपति के नाम से व्यक्त की जाती हैं।
2. रक्षा संघ सूची (Union List) की प्रविष्टि 1 में आती है, इसलिए यह राज्य सूची का विषय नहीं है।
3. सकारात्मक स्वदेशीकरण सूची (Positive Indigenisation List) में शामिल वस्तुओं का आयात प्रतिबंधित करके घरेलू विनिर्माण को प्रोत्साहित किया जाता है।

उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. केवल तीन
  4. उपर्युक्त में से कोई नहीं

उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है: अनुच्छेद 299(1) के अनुसार संघ की कार्यपालिका शक्ति के अंतर्गत की गई संविदाएँ राष्ट्रपति के नाम से व्यक्त होनी चाहिए। कथन 2 गलत है: रक्षा संघ सूची की प्रविष्टि 1 में है, इसलिए यह संघ का विषय है, राज्य का नहीं। कथन 3 सही है: सकारात्मक स्वदेशीकरण सूची में शामिल वस्तुओं के आयात पर रोक लगाकर स्वदेशी निर्माण को बढ़ावा दिया जाता है।

Q2. निम्नलिखित दो कथनों पर विचार कीजिए:
अभिकथन (A): भारतीय नौसेना के लिए अगली पीढ़ी के कॉर्वेट जैसे युद्धपोतों की खरीद घरेलू शिपयार्डों को सौंपने से आत्मनिर्भर भारत के उद्देश्य को बल मिलता है।
कारण (R): रक्षा सार्वजनिक उपक्रमों को संविदा देने से आयात पर निर्भरता घटती है और देश में पोत-निर्माण की क्षमता एवं कौशल का विकास होता है।

उपर्युक्त के संदर्भ में सही उत्तर चुनिए:

  1. (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या है।
  2. (A) और (R) दोनों सही हैं, परंतु (R), (A) की सही व्याख्या नहीं है।
  3. (A) सही है, परंतु (R) गलत है।
  4. (A) गलत है, परंतु (R) सही है।

उत्तर: (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या है। — अभिकथन और कारण दोनों सही हैं। घरेलू शिपयार्ड को संविदा देने से आयात घटता है और उत्पादन-क्षमता, तकनीकी कौशल तथा आपूर्ति-श्रृंखला का विकास होता है, जो आत्मनिर्भरता का मूल आधार है। अतः कारण अभिकथन की सही व्याख्या करता है।

Q3. निम्नलिखित सूचियों का मिलान कीजिए:
सूची-I (संवैधानिक प्रावधान)
1. अनुच्छेद 53
2. अनुच्छेद 77
3. अनुच्छेद 299(1)
4. संघ सूची की प्रविष्टि 1

सूची-II (विषय-वस्तु)
a. संघ की कार्यपालिका शक्ति राष्ट्रपति में निहित होना
b. भारत सरकार के कार्यों के संचालन से संबंधित नियम
c. संघ की कार्यपालिका शक्ति के अंतर्गत संविदाएँ राष्ट्रपति के नाम से व्यक्त होना
d. रक्षा

सही मिलान चुनिए:

  1. 1-a, 2-b, 3-c, 4-d
  2. 1-b, 2-a, 3-c, 4-d
  3. 1-a, 2-c, 3-b, 4-d
  4. 1-d, 2-b, 3-c, 4-a

उत्तर: 1-a, 2-b, 3-c, 4-d — अनुच्छेद 53 संघ की कार्यपालिका शक्ति राष्ट्रपति में निहित करता है (1-a)। अनुच्छेद 77 भारत सरकार के कार्य-संचालन के नियम देता है (2-b)। अनुच्छेद 299(1) संविदाओं को राष्ट्रपति के नाम से व्यक्त करने की अपेक्षा रखता है (3-c)। संघ सूची की प्रविष्टि 1 ‘रक्षा’ से संबंधित है (4-d)।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ आत्मनिर्भर भारत की पहल के अंतर्गत रक्षा मंत्रालय द्वारा घरेलू शिपयार्डों के साथ युद्धपोतों की बड़ी संविदाएँ किए जाने को समुद्री सुरक्षा और औद्योगिक नीति दोनों दृष्टियों से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस नीति की सफलता का आलोचनात्मक परीक्षण कीजिए। साथ ही बताइए कि यदि रक्षा सार्वजनिक उपक्रमों पर घरेलू आपूर्ति की अत्यधिक निर्भरता बनी रहे, तो समय-सीमा, गुणवत्ता और प्रतिस्पर्धा के स्तर पर क्या जोखिम उत्पन्न हो सकते हैं। (15 Marks)

रूपरेखा: उत्तर की संरचना (मॉडल-उत्तर संकेत-बिंदु):
1. भूमिका: 8 अगली पीढ़ी के कॉर्वेट (Next Generation Corvettes) हेतु लगभग 53,866.50 करोड़ रुपये की संविदाएँ गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (GRSE) और गोवा शिपयार्ड लिमिटेड (GSL) के साथ; आत्मनिर्भर भारत अभियान (मई 2020) की पृष्ठभूमि।
2. संवैधानिक एवं विधिक आधार: संघ सूची की प्रविष्टि 1 (रक्षा) के कारण विषय पर संघ की विधायी-कार्यकारी क्षमता; अनुच्छेद 53 (कार्यपालिका शक्ति), अनुच्छेद 77 (कार्य-संचालन), अनुच्छेद 299(1) (संविदाएँ राष्ट्रपति के नाम से व्यक्त)।
3. नीतिगत ढाँचा: रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया (Defence Acquisition Procedure) में ‘मेक’ श्रेणियों का महत्व; सकारात्मक स्वदेशीकरण सूची (Positive Indigenisation List) द्वारा आयात-प्रतिबंध; मेक इन इंडिया (2014); रक्षा उत्पादन एवं निर्यात संवर्धन नीति (DPEPP 2020); रक्षा औद्योगिक गलियारे (उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु)।
4. सुधार-समितियाँ और विचार: कारगिल समीक्षा समिति (1999) द्वारा रक्षा तैयारी की कमियों पर टिप्पणी; नरेश चंद्र कार्य-बल (2001) की राष्ट्रीय सुरक्षा समीक्षा; शेकतकर समिति (2016) द्वारा उच्च रक्षा संगठन के पुनर्गठन की सिफारिशें।
5. पक्ष में तर्क: आयात-निर्भरता में कमी, विदेशी मुद्रा की बचत, घरेलू रोज़गार और कौशल-विकास, आपूर्ति-श्रृंखला की सुरक्षा, MSME और सहायक उद्योगों (vendor base) को लाभ।
6. चिंताएँ और सीमाएँ: सार्वजनिक क्षेत्र के एकाधिकार से प्रतिस्पर्धा सीमित होना; परियोजना में विलंब और लागत-वृद्धि की समस्या; प्रौद्योगिकी-अंतरण और उन्नत इंजन/प्रणालियों पर विदेशी निर्भरता; निजी क्षेत्र की भागीदारी का सीमित विस्तार।
7. संतुलित समाधान: समय-सीमा आधारित अनुबंध, स्वतंत्र निगरानी, निजी और सार्वजनिक क्षेत्र की साझेदारी, रणनीतिक साझेदारी मॉडल का विवेकपूर्ण प्रयोग, अनुसंधान एवं विकास में निवेश।
8. निष्कर्ष: आत्मनिर्भरता को केवल आयात-कटौती के रूप में नहीं, बल्कि गुणवत्ता, प्रतिस्पर्धा और नवाचार की क्षमता के रूप में परखना आवश्यक है।

स्रोत: PIB (Press Information Bureau)


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

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