05 Nov भारत की जलवायु नीति: ’35 तक 35′ लक्ष्य पर सतर्कता
✎ 35 by 2035 एक प्रस्तावित वैश्विक विद्युतीकरण लक्ष्य है, जिसमें वैश्विक ऊर्जा उपयोग में विद्युत का हिस्सा 2023 के 23 प्रतिशत से बढ़ाकर 2035 तक 35 प्रतिशत करने की परिकल्पना है, और भारत ने अभी इसके समर्थन का निर्णय नहीं लिया है।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र II — अंतरराष्ट्रीय संबंध (जलवायु कूटनीति, वैश्विक दक्षिण, अंतरराष्ट्रीय संगठन एवं समूह) | सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र III — पर्यावरण (जलवायु परिवर्तन, पेरिस समझौता, नवीकरणीय ऊर्जा) | सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र III — अर्थव्यवस्था (ऊर्जा सुरक्षा, ऊर्जा संक्रमण)
- Prelims: पेरिस समझौता (Paris Agreement) — 2015 में COP21 में अपनाया गया; तापमान वृद्धि को पूर्व-औद्योगिक स्तर से 2 डिग्री सेल्सियस से काफी नीचे रखने का लक्ष्य, राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान (Nationally Determined Contributions — NDC): प्रत्येक देश द्वारा स्वयं तय किए गए जलवायु लक्ष्य, पंचामृत लक्ष्य — COP26 (ग्लासगो, 2021) में भारत द्वारा घोषित; इनमें 2030 तक 500 गीगावाट गैर-जीवाश्म ऊर्जा क्षमता और 2070 तक शुद्ध-शून्य उत्सर्जन शामिल हैं, अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन (International Solar Alliance — ISA): भारत और फ्रांस की पहल; मुख्यालय गुरुग्राम (हरियाणा), आपदा-रोधी अवसंरचना के लिए गठबंधन (Coalition for Disaster Resilient Infrastructure — CDRI): 2019 में आरंभ; मुख्यालय नई दिल्ली, नई सामूहिक परिमाणात्मक लक्ष्य (New Collective Quantified Goal — NCQG): COP29 (बाकू) में सहमति; 2035 तक विकसित देशों से विकासशील देशों के लिए प्रति वर्ष 300 अरब डॉलर का लक्ष्य, सामान्य किंतु विभेदित उत्तरदायित्व एवं संबंधित क्षमताएँ (Common but Differentiated Responsibilities and Respective Capabilities — CBDR-RC): UNFCCC का मूल सिद्धांत, कार्बन तीव्रता (Carbon Intensity): सकल घरेलू उत्पाद की प्रति इकाई उत्सर्जन की मात्रा
- Essay: जलवायु न्याय और साझा किंतु विभेदित उत्तरदायित्व: ऊर्जा संक्रमण में विकसित और विकासशील देशों की भूमिका कितनी न्यायसंगत है?, ऊर्जा संक्रमण में विद्युतीकरण बनाम नवीकरणीय ऊर्जा: राष्ट्रीय परिस्थितियाँ, विकास की प्राथमिकताएँ और वैश्विक प्रतिबद्धताएँ
त्वरित पुनरावृत्ति: 35 by 2035 एक प्रस्तावित वैश्विक विद्युतीकरण लक्ष्य है, जिसमें वैश्विक ऊर्जा उपयोग में विद्युत का हिस्सा 2023 के 23 प्रतिशत से बढ़ाकर 2035 तक 35 प्रतिशत करने की परिकल्पना है, और भारत ने अभी इसके समर्थन का निर्णय नहीं लिया है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
संघ के पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने तुर्की के अंतल्या में होने वाले 31वें जलवायु COP से पहले कहा कि भारत अभी प्रस्तावित वैश्विक “35 by 2035” विद्युतीकरण लक्ष्य के समर्थन का निर्णय नहीं कर पाया है और हर देश को अपनी संप्रभुता तथा गरीबी उन्मूलन कार्यक्रमों का ध्यान रखना होगा। यह प्रस्ताव COP की सह-अध्यक्षता करने वाले तुर्की और ऑस्ट्रेलिया ने रखा है, जिसके अंतर्गत वैश्विक ऊर्जा उपयोग में विद्युत का हिस्सा 2023 के 23 प्रतिशत से बढ़ाकर 2035 तक 35 प्रतिशत करने की परिकल्पना है। कई विकसित देश विद्युतीकरण को जीवाश्म ईंधन से हटने की प्रक्रिया में सुलभ विकल्प मानते हैं, जबकि भारत ने नवीकरणीय ऊर्जा को प्राथमिकता दी है और ऊर्जा मिश्रण में विद्युत का कोई निश्चित हिस्सा तय नहीं किया है। लेख इस बात पर भी ज़ोर देता है कि भारत पेरिस समझौते की प्रतिबद्धताओं की दिशा में लगातार प्रगति करने वाले कुछ देशों में है, इसलिए उसे जलवायु कूटनीति के बदलते स्वरूप को समझते हुए अपनी भूमिका को और सशक्त करना चाहिए।
पृष्ठभूमि
- पेरिस समझौता (2015) में हर देश अपने राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान के माध्यम से लक्ष्य तय करता है; इस ढाँचे में लक्ष्यों की बाध्यता के बजाय पारदर्शिता और समय-समय पर समीक्षा पर बल है।
- COP26 में भारत द्वारा घोषित पंचामृत लक्ष्यों में नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता का विस्तार, उत्सर्जन में कमी और 2070 तक शुद्ध-शून्य लक्ष्य शामिल हैं। भारत उन गिने-चुने देशों में है जिसने ऊर्जा संबंधी लक्ष्यों को समय से पहले पूरा करने की प्रवृत्ति दिखाई है।
- वित्त और प्रौद्योगिकी का प्रश्न जलवायु वार्ताओं का केंद्रीय विषय रहा है। 2009 में विकसित देशों द्वारा विकासशील देशों के लिए धन जुटाने की जो प्रतिबद्धता दी गई थी, उसके क्रियान्वयन और प्रभाव पर लगातार प्रश्न उठते रहे हैं; COP29 में NCQG इसी असंतुलन को संबोधित करने का प्रयास है।
- भारत की पहल से स्थापित अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन और आपदा-रोधी अवसंरचना के लिए गठबंधन वैश्विक दक्षिण के देशों के साथ सहयोग के प्रमुख मंच हैं, जो भारत की नेतृत्वकारी भूमिका को दर्शाते हैं।
- विद्युतीकरण और नवीकरणीय ऊर्जा की अवधारणाएँ अलग हैं। विद्युत का उत्पादन कोयले या गैस से भी हो सकता है, इसलिए विद्युतीकरण लक्ष्य की स्वच्छता उसके स्रोत पर निर्भर करती है; इसी कारण भारत स्रोत-आधारित दृष्टि पर ज़ोर देता है।
35 by 2035 (विद्युतीकरण लक्ष्य) क्या है?
- यह COP की सह-अध्यक्षता करने वाले तुर्की और ऑस्ट्रेलिया द्वारा प्रस्तावित एक वैश्विक ऊर्जा पहल है, जिसका उद्देश्य विद्युत को ऊर्जा उपयोग का प्रमुख माध्यम बनाना है।
- लक्ष्य के अनुसार वैश्विक ऊर्जा उपयोग में विद्युत का हिस्सा 2023 के 23 प्रतिशत से बढ़ाकर 2035 तक 35 प्रतिशत करना है।
- विद्युतीकरण का अर्थ है परिवहन, भवन, उद्योग और घरेलू उपयोग में ईंधन के स्थान पर विद्युत का प्रयोग बढ़ाना, जैसे इलेक्ट्रिक वाहन और विद्युत ताप-पंप।
- विकसित देश इसे जीवाश्म ईंधन से हटने का सहज और व्यावहारिक मार्ग मानते हैं, क्योंकि विद्युत को अपेक्षाकृत आसानी से नियंत्रित और विस्तारित किया जा सकता है।
- भारत का रुख यह है कि किसी भी वैश्विक लक्ष्य को संप्रभुता, राष्ट्रीय परिस्थितियों और गरीबी उन्मूलन कार्यक्रमों के साथ संतुलित होना चाहिए। अभी भारत ने इस लक्ष्य के समर्थन का निर्णय नहीं लिया है।
- भारत की प्राथमिकता नवीकरणीय ऊर्जा के विस्तार पर है और उसने ऊर्जा मिश्रण में विद्युत का कोई निश्चित हिस्सा तय नहीं किया है।
- विकासशील देशों के सामने कमज़ोर विद्युत ग्रिड, वित्तीय रूप से दबाव में वितरण कंपनियाँ और नई प्रौद्योगिकी में निवेश की सीमित क्षमता जैसी चुनौतियाँ हैं, जो ऐसे लक्ष्यों की व्यावहारिकता को प्रभावित करती हैं।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| प्रस्तावित ’35 by 2035′ लक्ष्य | COP31 के सह-अध्यक्ष तुर्की और ऑस्ट्रेलिया द्वारा प्रस्तावित यह वैश्विक लक्ष्य वैश्विक ऊर्जा उपयोग में विद्युत का हिस्सा 2023 के 23 प्रतिशत से बढ़ाकर 2035 तक 35 प्रतिशत करने की बात करता है। |
| भारत का रुख | भारत ने अभी इस लक्ष्य के समर्थन का निर्णय नहीं लिया है। उसका जोर नवीकरणीय ऊर्जा (Renewable Energy) पर है और उसने ऊर्जा मिश्रण में विद्युत का कोई निश्चित हिस्सा तय नहीं किया है। |
| संप्रभुता और गरीबी उन्मूलन | मंत्री के वक्तव्य के अनुसार प्रत्येक देश को अपनी संप्रभुता और गरीबी उन्मूलन कार्यक्रमों को ध्यान में रखना होगा। यह विकासशील देशों की ऊर्जा नीति के लिए मूल तर्क है। |
| पेरिस समझौते के लक्ष्यों की प्रगति | भारत उन गिने-चुने देशों में है जिन्होंने पेरिस समझौते (Paris Agreement) की प्रतिबद्धताओं की दिशा में लगातार प्रगति की है। इसके ऊर्जा-संबंधी लक्ष्य समय से पहले पूरे होने के उदाहरण हैं। |
| अंतरराष्ट्रीय संस्थागत भूमिका | अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन (International Solar Alliance, ISA) और आपदा-सहनीय अवसंरचना के लिए गठबंधन (Coalition for Disaster-Resilient Infrastructure, CDRI) जैसी पहलों में भारत की नेतृत्वकारी भूमिका है। |
महत्व
आर्थिक महत्व
- विद्युतीकरण पर आधारित ऊर्जा संक्रमण से जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता घटाने की दिशा तय होती है, जो आयात-निर्भरता और ऊर्जा सुरक्षा दोनों से जुड़ा है।
- नवीकरणीय ऊर्जा और ग्रिड-विस्तार में निवेश से आर्थिक संवृद्धि (Economic Growth) के नए अवसर बनते हैं, किंतु इसके लिए वित्तीय संसाधनों की आवश्यकता होती है।
रणनीतिक महत्व
- जलवायु कूटनीति में नेतृत्व से भारत को ग्लोबल साउथ (Global South) के देशों के बीच विश्वसनीय आवाज़ बनने का अवसर मिलता है।
- अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन और आपदा-सहनीय अवसंरचना के लिए गठबंधन जैसी संस्थाओं की पूरी क्षमता का उपयोग भारत की सामरिक पहुँच बढ़ा सकता है।
पर्यावरणीय और विकासात्मक महत्व
- जलवायु संकट से निपटने की तात्कालिकता भारत के विकास-लक्ष्यों से अलग नहीं है, क्योंकि बाढ़, सूखा और लू जैसी आपदाएँ सीधे आजीविका को प्रभावित करती हैं।
- लक्ष्य-निर्धारण में राष्ट्रीय परिस्थितियों का ध्यान रखना और अंतरराष्ट्रीय दायित्वों का पालन करना, दोनों को संतुलित करने की आवश्यकता है।
चुनौतियाँ
1. विकासशील देशों की ग्रिड और वित्तीय सीमाएँ
- विकासशील देशों में विद्युत ग्रिड कमज़ोर हैं और वितरण कंपनियाँ (Distribution Utilities) वित्तीय दबाव में हैं।
- नई प्रौद्योगिकी में निवेश के लिए पूंजी और क्षमता दोनों सीमित हैं, इसलिए तेज़ विद्युतीकरण का बोझ अधिक है।
यूपीएससी लिंक: GS-3: आर्थिक विकास, ऊर्जा सुरक्षा और अवसंरचना
2. विकसित देशों की वित्तीय और प्रौद्योगिकी प्रतिबद्धताएँ
- स्रोत के अनुसार विकसित देशों ने वित्तीय और प्रौद्योगिकी सहायता के अपने वादे पूरे नहीं किए हैं।
- नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में विकसित देशों की अपनी बाधाएँ भी हैं, जिससे लक्ष्यों की तुलना असमान हो जाती है।
यूपीएससी लिंक: GS-2: अंतरराष्ट्रीय संबंध और जलवायु कूटनीति
3. लक्ष्यों की महत्वाकांक्षा पर आलोचना
- भारत के समय-पूर्व लक्ष्य-प्राप्ति के रिकॉर्ड को कुछ आलोचक पर्याप्त महत्वाकांक्षी न होने का संकेत मानते हैं।
- लक्ष्य-निर्धारण और वास्तविक प्रगति के बीच संतुलन बनाए रखना नीति-निर्माण की चुनौती है।
यूपीएससी लिंक: GS-2: पेरिस समझौता और राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान (NDC)
4. ऊर्जा मिश्रण में लचीलेपन की कमी
- किसी निश्चित विद्युत-हिस्सेदारी को अपनाने से भविष्य की नीतिगत विकल्पों पर सीमाएँ लग सकती हैं।
- नवीकरणीय स्रोतों की परिवर्तनशीलता के कारण भंडारण और ग्रिड-संतुलन की आवश्यकता बढ़ती है।
यूपीएससी लिंक: GS-3: ऊर्जा क्षेत्र और नवीकरणीय ऊर्जा
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| वित्तीय सहायता | विकसित देशों द्वारा वित्त और प्रौद्योगिकी के वादों की अपूर्ति से विकासशील देशों की क्षमता सीमित रहती है। |
| ग्रिड अवसंरचना | कमज़ोर ग्रिड और वितरण कंपनियों की वित्तीय स्थिति विद्युतीकरण की गति को धीमा कर सकती है। |
| लक्ष्य-निर्धारण का दबाव | महत्वाकांक्षा की कमी के आरोप से नीति पर बाहरी दबाव बनता है, जबकि राष्ट्रीय परिस्थितियाँ भी महत्वपूर्ण हैं। |
| नीतिगत लचीलापन | निश्चित हिस्सेदारी तय करने से भविष्य में ऊर्जा मिश्रण के समायोजन की गुंजाइश घट सकती है। |
| नवीकरणीय स्रोतों की परिवर्तनशीलता | सौर और पवन ऊर्जा की अस्थिरता के कारण भंडारण और ग्रिड-प्रबंधन पर अतिरिक्त खर्च आता है। |
आगे की राह
- विद्युतीकरण लक्ष्य पर निर्णय से पहले ग्रिड-विस्तार, भंडारण और वितरण कंपनियों की वित्तीय स्थिति का तुलनात्मक आकलन किया जाए।
- विकसित देशों से वित्त और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण की प्रतिबद्धताओं को COP31 के एजेंडे में ठोस रूप से दर्ज कराया जाए।
- राष्ट्रीय परिस्थितियों और अंतरराष्ट्रीय दायित्वों के बीच संतुलन बनाते हुए स्पष्ट और मापनीय लक्ष्य तय किए जाएँ।
- अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन की परियोजनाओं को विकासशील देशों की वास्तविक ज़रूरतों से जोड़कर उनका विस्तार किया जाए।
- आपदा-सहनीय अवसंरचना के लिए गठबंधन के माध्यम से जलवायु-जोखिम वाले क्षेत्रों में अवसंरचना के मानक साझा किए जाएँ।
- ग्लोबल साउथ के देशों के साथ क्षमता-निर्माण और ज्ञान-साझेदारी को बढ़ाकर भारत की नेतृत्वकारी भूमिका को मज़बूत किया जाए।
- जलवायु नीति में नागरिक समाज, उद्योग और शोध संस्थानों की भागीदारी सुनिश्चित कर नीति-प्रक्रिया को पारदर्शी बनाया जाए।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
विद्युतीकरण (Electrification) · पेरिस समझौता (Paris Agreement) · राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान (Nationally Determined Contributions – NDCs) · साझा किंतु विभेदित उत्तरदायित्व (Common but Differentiated Responsibilities and Respective Capabilities – CBDR-RC) · जलवायु वित्त (Climate Finance) · नवीकरणीय ऊर्जा (Renewable Energy) · अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन (International Solar Alliance – ISA) · आपदा-रोधी अवसंरचना के लिए गठबंधन (Coalition for Disaster Resilient Infrastructure – CDRI) · ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) · ऊर्जा निर्धारण और ग्रिड स्थिरता (Grid Stability) · ग्लोबल नॉर्थ और ग्लोबल साउथ (Global North and Global South) · ऊर्जा गरीबी (Energy Poverty)
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- अनुच्छेद 51: अंतरराष्ट्रीय संधि-दायित्वों के सम्मान का आधार
- अनुच्छेद 253: संधि-दायित्वों को लागू करने हेतु संसद की विधायी शक्ति
- अनुच्छेद 48A: पर्यावरण संरक्षण का राज्य का दायित्व
- अनुच्छेद 51A(छ): प्राकृतिक पर्यावरण की रक्षा का मौलिक कर्तव्य
अवधारणा प्रवाह
विकसित देशों द्वारा विद्युतीकरण को संक्रमण का आसान मार्ग बताकर ’35 by 2035′ लक्ष्य का प्रस्ताव → COP31 के सह-अध्यक्षों द्वारा वैश्विक ऊर्जा में विद्युत का हिस्सा 23 प्रतिशत (2023) से 35 प्रतिशत (2035) करने का प्रस्ताव → भारत द्वारा संप्रभुता, गरीबी उन्मूलन और राष्ट्रीय परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए लक्ष्य पर निर्णय टालना → विकासशील देशों की ग्रिड, वित्त और निवेश-क्षमता की सीमाओं के कारण नवीकरणीय ऊर्जा पर जोर → पेरिस समझौते के लक्ष्यों की समय-पूर्व प्राप्ति से भारत पर अधिक महत्वाकांक्षा की अपेक्षा और आलोचना → विकसित देशों की वित्तीय व प्रौद्योगिकी प्रतिबद्धताओं की अपूर्ति को ध्यान में रखते हुए अंतरराष्ट्रीय नेतृत्व की भूमिका
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन (International Solar Alliance) का मुख्यालय भारत में है।
2. आपदा-रोधी अवसंरचना के लिए गठबंधन (CDRI) की स्थापना भारत की पहल पर वर्ष 2019 में की गई थी।
3. पेरिस समझौते के अंतर्गत प्रत्येक देश के उत्सर्जन में कमी के लक्ष्य कानूनी रूप से बाध्यकारी हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- केवल तीन
- उपर्युक्त सभी
उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है: ISA का मुख्यालय हरियाणा के गुरुग्राम में स्थित है। कथन 2 सही है: CDRI की शुरुआत भारत की पहल पर वर्ष 2019 में संयुक्त राष्ट्र जलवायु कार्रवाई शिखर सम्मेलन में हुई थी। कथन 3 गलत है: पेरिस समझौते में देशों के राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान (NDCs) तय होते हैं, जिन्हें देश स्वयं निर्धारित करते हैं; इनके लक्ष्य कानूनी रूप से बाध्यकारी नहीं हैं, केवल NDCs प्रस्तुत करने की प्रक्रिया बाध्यकारी है।
Q2. निम्नलिखित दो कथनों, अभिकथन (A) और कारण (R), पर विचार कीजिए:
अभिकथन (A): पेरिस समझौते के अंतर्गत प्रत्येक देश अपने राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान (NDCs) स्वयं तय करता है।
कारण (R): पेरिस समझौते में ऊपर से नीचे की ओर (top-down) व्यवस्था द्वारा प्रत्येक देश के लिए बाध्यकारी उत्सर्जन कोटा निर्धारित किया गया है।
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनिए:
- (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या है।
- (A) और (R) दोनों सही हैं, किंतु (R), (A) की सही व्याख्या नहीं है।
- (A) सही है, किंतु (R) गलत है।
- (A) गलत है, किंतु (R) सही है।
उत्तर: (A) सही है, किंतु (R) गलत है। — अभिकथन सही है: पेरिस समझौता ‘बॉटम-अप’ दृष्टिकोण पर आधारित है, जिसमें प्रत्येक देश अपने NDCs स्वयं तय करता है। कारण गलत है, क्योंकि पेरिस व्यवस्था में किसी देश के लिए बाध्यकारी उत्सर्जन कोटा नहीं दिया जाता; यही क्योटो प्रोटोकॉल की व्यवस्था से इसका प्रमुख अंतर है।
Q3. निम्नलिखित सूचियों का मिलान कीजिए:
सूची-I (व्यवस्था/प्रावधान)
A. पेरिस समझौता
B. वैश्विक समीक्षा (Global Stocktake)
C. हानि और क्षति कोष (Loss and Damage Fund)
D. नया सामूहिक परिमाणित लक्ष्य (New Collective Quantified Goal)
सूची-II (स्थान/विशेषता)
1. वर्ष 2015 में पक्षकारों के सम्मेलन COP21 (पेरिस) में अपनाया गया
2. सामूहिक प्रगति का आवधिक मूल्यांकन, प्रत्येक पाँच वर्ष पर
3. वर्ष 2022 में COP27 (शर्म अल-शेख) में स्थापित करने पर सहमति
4. COP29 (बाकू) में वर्ष 2035 तक प्रति वर्ष 300 अरब डॉलर का वित्तीय लक्ष्य
सही मिलान चुनिए:
- A-1, B-2, C-3, D-4
- A-2, B-1, C-3, D-4
- A-1, B-3, C-2, D-4
- A-4, B-2, C-1, D-3
उत्तर: A-1, B-2, C-3, D-4 — पेरिस समझौता वर्ष 2015 में COP21 में अपनाया गया (A-1)। वैश्विक समीक्षा प्रत्येक पाँच वर्ष पर सामूहिक प्रगति का मूल्यांकन करती है (B-2)। हानि और क्षति कोष पर सहमति COP27 में बनी (C-3)। NCQG के तहत COP29 में वर्ष 2035 तक 300 अरब डॉलर प्रति वर्ष का जलवायु वित्त लक्ष्य तय हुआ (D-4)।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ यह दावा कि भारत पेरिस समझौते की प्रतिबद्धताओं की दिशा में निरंतर प्रगति कर रहा है, किंतु वैश्विक ‘35 by 2035’ विद्युतीकरण लक्ष्य पर वह अभी निर्णय नहीं ले पाया है, भारत की जलवायु नीति के सामने एक जटिल प्रश्न खड़ा करता है। इस रुख़ के औचित्य का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। साथ ही बताइए कि जलवायु कूटनीति में भारत की नेतृत्वकारी भूमिका के लिए बढ़ी हुई महत्वाकांक्षा कितनी आवश्यक है और उसका व्यावहारिक मार्ग क्या हो सकता है। (15 Marks)
रूपरेखा: उत्तर की संरचना: (1) भूमिका: COP31 (अंतालया, तुर्किये) से पूर्व ‘35 by 2035’ प्रस्ताव (सह-अध्यक्षता तुर्किये और ऑस्ट्रेलिया), जिसमें विश्व की विद्युत की हिस्सेदारी 2023 के 23 प्रतिशत से बढ़ाकर 2035 तक 35 प्रतिशत करने का लक्ष्य है। (2) संवैधानिक-नीतिगत आधार: पेरिस समझौता (2015), UNFCCC (1992) का साझा किंतु विभेदित उत्तरदायित्व और संबंधित क्षमताओं (CBDR-RC) का सिद्धांत, NDCs की स्वैच्छिक-राष्ट्रीय प्रकृति; भारत का 2022 में अद्यतन NDC (2030 तक उत्सर्जन तीव्रता में 45 प्रतिशत कमी का लक्ष्य, 2030 तक गैर-जीवाश्म स्रोतों से 500 GW विद्युत क्षमता), तथा 2070 तक शुद्ध-शून्य (Net Zero) उत्सर्जन का संकल्प। (3) भारत के रुख़ के औचित्य के तर्क: कमज़ोर ग्रिड, वितरण कंपनियों (DISCOM) की वित्तीय दबावग्रस्त स्थिति, ऊर्जा गरीबी दूर करने की विकास आवश्यकता, विद्युत अवसंरचना व भंडारण में निवेश की सीमाएँ, और ‘सार्वभौमिक ऊर्जा पहुँच’ बनाम ‘विद्युतीकरण का अनिवार्य हिस्सा’ का अंतर। (4) आलोचना का पक्ष: आलोचकों द्वारा लक्ष्यों को पर्याप्त महत्वाकांक्षी न मानना; इसके प्रत्युत्तर में विकसित देशों की नवीकरणीय ऊर्जा में बाधाएँ और जलवायु वित्त (NCQG: 2035 तक 300 अरब डॉलर प्रति वर्ष) व प्रौद्योगिकी हस्तांतरण के वादों का पूरा न होना। (5) नेतृत्व की संभावना: ISA (2015, गुरुग्राम मुख्यालय) और CDRI (2019) जैसे मंचों के माध्यम से ग्लोबल साउथ का नेतृत्व; ‘लीड बाय एग्ज़ाम्पल’ के लिए घरेलू नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता, ग्रिड-स्टोरेज, ग्रीन हाइड्रोजन और ऊर्जा दक्षता पर केंद्रित नीति। (6) संतुलित निष्कर्ष: रणनीतिक स्वायत्तता बनाम जलवायु नेतृत्व का समन्वय; सतर्क किंतु सक्रिय कूटनीति, विद्युतीकरण लक्ष्य को राष्ट्रीय परिस्थितियों के अनुरूप अपनाने की शर्तें, और वित्त व प्रौद्योगिकी के वादों को सुनिश्चित कराने पर बल।
स्रोत: The Indian Express
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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