05 Nov गढ़चिरौली: नक्सल मुक्त भारत की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम
✎ वामपंथी उग्रवाद से निपटने में स्थायी सफलता के लिए सुरक्षा अभियान, विकास, पुनर्वास और सामुदायिक भागीदारी का समन्वित दृष्टिकोण आवश्यक है, जिसकी कानूनी सीमा संविधान और राज्य सूची के विषयों द्वारा तय होती है।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper III — आंतरिक सुरक्षा (वामपंथी उग्रवाद, सुरक्षा बल और खुफिया तंत्र की भूमिका) | GS Paper II — शासन और संघवाद (पुलिस और लोक व्यवस्था का राज्य सूची में होना, केंद्र-राज्य समन्वय) | GS Paper I — समाज (जनजातीय क्षेत्रों का विकास और सामाजिक एकीकरण)
- Prelims: वामपंथी उग्रवाद (Left Wing Extremism), गढ़चिरौली जिला, महाराष्ट्र (पूर्वी विदर्भ), समाधान (SAMADHAN) रणनीति, गृह मंत्रालय, सुरक्षा संबंधी व्यय (Security Related Expenditure) योजना, विशेष अवसंरचना योजना (Special Infrastructure Scheme), आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति (Surrender and Rehabilitation Policy), पेसा अधिनियम, 1996 और वन अधिकार अधिनियम, 2006, पीआईबी (Press Information Bureau) की भूमिका
- Essay: आंतरिक सुरक्षा और विकास: क्या दोनों एक-दूसरे के पूरक हो सकते हैं?, लोकतंत्र में उग्रवाद का सामना: बल, विकास और विश्वास का संतुलन
त्वरित पुनरावृत्ति: वामपंथी उग्रवाद से निपटने में स्थायी सफलता के लिए सुरक्षा अभियान, विकास, पुनर्वास और सामुदायिक भागीदारी का समन्वित दृष्टिकोण आवश्यक है, जिसकी कानूनी सीमा संविधान और राज्य सूची के विषयों द्वारा तय होती है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
पत्र सूचना कार्यालय (पीआईबी), नागपुर ने गढ़चिरौली पुलिस के सहयोग से 4 नवंबर 2026 को गढ़चिरौली स्थित पुलिस मुख्यालय के एकलव्य हॉल में ‘नक्सल मुक्त भारत’ विषय पर एक दिवसीय मीडिया कार्यशाला आयोजित की। इसमें स्थानीय पत्रकार, वरिष्ठ पुलिस अधिकारी और विषय विशेषज्ञ शामिल हुए। नागपुर रेंज के विशेष पुलिस महानिरीक्षक श्री संदीप पाटिल ने बताया कि निरंतर सुरक्षा अभियानों और कई राष्ट्रीय महत्व की पहलों से गढ़चिरौली वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित क्षेत्र से नक्सल मुक्त जिले के रूप में परिवर्तित हुआ है। उन्होंने सुरक्षा बलों, प्रभावी पुलिस व्यवस्था और विकास पहलों के समन्वय पर बल दिया तथा लोकतांत्रिक संस्थाओं की मजबूती और कल्याणकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन की आवश्यकता बताई। नीति विश्लेषक श्री पी. वाई. रमना ने वामपंथी उग्रवाद के आर्थिक पहलुओं, स्थानीय संसाधनों और वित्तीय नेटवर्क पर चर्चा की, जबकि गढ़चिरौली के पुलिस अधीक्षक श्री एम. रमेश ने निरंतर अभियानों, बेहतर खुफिया तंत्र और समन्वित कार्रवाई से हुई प्रगति की जानकारी दी। यह समाचार इसलिए प्रासंगिक है क्योंकि यह आंतरिक सुरक्षा के समग्र दृष्टिकोण को एक ठोस उदाहरण के रूप में सामने रखता है।
पृष्ठभूमि
- वामपंथी उग्रवाद की वैचारिक जड़ें 1967 के नक्सलबाड़ी आंदोलन (पश्चिम बंगाल) से जोड़ी जाती हैं। बाद में यह आंदोलन कई राज्यों के वन और आदिवासी क्षेत्रों तक फैल गया।
- गढ़चिरौली महाराष्ट्र का वन-आच्छादित और आदिवासी बहुल जिला है, जो पूर्वी विदर्भ में स्थित है। भौगोलिक दुर्गमता और विकास की कमी ने यहाँ उग्रवाद के लिए अनुकूल परिस्थितियाँ बनाईं।
- वामपंथी उग्रवाद से निपटने की रणनीति में पुलिस और लोक व्यवस्था मुख्यतः राज्यों का विषय हैं, जबकि केंद्र सरकार गृह मंत्रालय के माध्यम से सलाह, वित्तीय सहायता और समन्वय प्रदान करती है।
- केंद्र सरकार ने 2017 में ‘समाधान’ नामक व्यापक रणनीति अपनाई, जिसमें खुफिया सूचना, प्रौद्योगिकी के उपयोग, कार्य-योजना और विकास के साथ सुरक्षा कार्रवाई पर बल दिया गया।
- सरकारी नीति में सुरक्षा के साथ आत्मसमर्पण और पुनर्वास तथा अवसंरचना विकास (सड़क, संचार और सेवाएँ) को भी शामिल किया गया है, ताकि प्रभावित क्षेत्रों में राज्य की उपस्थिति और जन-विश्वास बढ़ सके।
नक्सल मुक्त भारत (वामपंथी उग्रवाद) की अवधारणा क्या है?
- वामपंथी उग्रवाद (Left Wing Extremism) ऐसा सशस्त्र आंदोलन है जो मार्क्सवादी-लेनिनवादी विचारधारा के नाम पर संवैधानिक व्यवस्था को हिंसा के माध्यम से बदलना चाहता है।
- यह मुख्यतः वन और आदिवासी क्षेत्रों में सक्रिय रहा है, जहाँ भूमि, वन-संसाधन, खनिज और विकास से जुड़े असंतोष को आधार बनाया गया।
- संवैधानिक दृष्टि से पुलिस और लोक व्यवस्था सातवीं अनुसूची की राज्य सूची में आते हैं, इसलिए राज्य सरकारें मुख्य कार्यान्वयनकर्ता हैं और केंद्र सहायक भूमिका निभाता है।
- ‘समाधान’ रणनीति के अंतर्गत स्मार्ट नेतृत्व, आक्रामक किंतु संयमित रणनीति, खुफिया सूचना, प्रौद्योगिकी आधारित निगरानी और वित्तीय नेटवर्क को रोकना जैसे पहलू शामिल हैं।
- सुरक्षा संबंधी व्यय योजना के तहत राज्यों को सुरक्षा बलों, प्रशिक्षण और अभियान से जुड़े उपकरणों के लिए केंद्रीय सहायता दी जाती है।
- विशेष अवसंरचना योजना और सड़क आवश्यकता योजना जैसे कार्यक्रम दूरस्थ क्षेत्रों में सड़क, संचार और सेवाओं के विस्तार का लक्ष्य रखते हैं।
- आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति उग्रवाद छोड़कर मुख्यधारा में लौटने वालों को आर्थिक सहायता, प्रशिक्षण और सामाजिक पुनर्वास का अवसर देती है।
- पेसा अधिनियम, 1996 और वन अधिकार अधिनियम, 2006 ग्राम सभाओं और वनवासियों के अधिकारों को मान्यता देते हैं, जो स्थायी शांति के लिए सामुदायिक भागीदारी का आधार बनते हैं।
मुख्य विशेषताएँ
| Feature | Significance |
|---|---|
| कार्यक्रम का स्वरूप: पीआईबी नागपुर (Press Information Bureau) द्वारा गढ़चिरौली पुलिस के सहयोग से 4 नवंबर 2026 को आयोजित एक दिवसीय मीडिया कार्यशाला | सरकार और क्षेत्रीय मीडिया के बीच संवाद का मंच, जिससे नीतिगत जानकारी ज़मीनी स्तर तक पहुँचती है |
| सुरक्षा, विकास और सामुदायिक भागीदारी का समग्र दृष्टिकोण | वामपंथी उग्रवाद (Left Wing Extremism – LWE) से निपटने में केवल बल-प्रयोग को पर्याप्त नहीं माना गया; जन-जागरूकता और कल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन को भी आवश्यक बताया गया |
| गढ़चिरौली का परिवर्तन: माओवाद प्रभावित क्षेत्र से नक्सल मुक्त जिले की ओर | वक्ता के अनुसार निरंतर सुरक्षा अभियानों, खुफिया तंत्र और समन्वित कार्रवाई से यह परिवर्तन आया; इसे राष्ट्रीय संकल्प के लिए एक उदाहरण बताया गया |
| माओवादी चुनौती का विस्तार: केवल दूरदराज़ के सशस्त्र क्षेत्रों तक सीमित नहीं | संगठनात्मक ढाँचा, वैचारिक प्रभाव और संघर्ष-प्रभावित क्षेत्रों से बाहर सक्रिय नेटवर्क, जिन पर निगरानी आवश्यक है |
| आर्थिक आयाम: खनिज संपदा, स्थानीय अर्थव्यवस्था और वित्तीय नेटवर्क | वामपंथी उग्रवाद के आर्थिक स्रोतों और स्थानीय संसाधनों से उसके संबंध को समझना नीति-निर्माण के लिए आवश्यक है |
| संवैधानिक संदर्भ: संविधान के माध्यम से परिवर्तन और डॉ. बी. आर. आंबेडकर का विचार | लोकतांत्रिक संस्थाओं को मज़बूत करने और संवैधानिक साधनों से सामाजिक परिवर्तन पर बल |
महत्व
सुरक्षा और प्रशासनिक
- सुरक्षा अभियानों, खुफिया जानकारी के बेहतर संग्रह और समन्वित कार्रवाई से माओवादी गतिविधियों पर अंकुश लगाने में प्रगति का दावा किया गया।
- राज्य पुलिस, केंद्रीय बलों और प्रशासन के बीच तालमेल को परिणाम देने वाला कारक बताया गया।
- सुरक्षा की स्थिति में सुधार को विकास कार्यों के लिए पूर्व-शर्त माना गया।
सामाजिक-आर्थिक विकास
- अवसंरचना (सड़क, संचार और अन्य सुविधाएँ) के सुधार से दूरदराज़ क्षेत्रों में सरकारी सेवाओं की पहुँच बढ़ती है।
- सरकारी कल्याणकारी योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन स्थानीय समुदायों का भरोसा जीतने में सहायक होता है।
- आत्मसमर्पण करने वालों का पुनर्वास और उनकी मुख्यधारा में वापसी संघर्ष समाप्त करने का व्यावहारिक मार्ग है।
संवैधानिक और लोकतांत्रिक
- वक्ता ने संवैधानिक लोकतंत्र के समक्ष संगठित माओवादी नेटवर्कों से उत्पन्न चुनौती को रेखांकित किया।
- संविधान के ढाँचे के भीतर विकास और संस्थागत सुदृढ़ीकरण को स्थायी समाधान का आधार बताया गया।
सूचना और मीडिया
- सरकारी पहलों और विकास कार्यों की सटीक जानकारी आम नागरिकों तक पहुँचाने में क्षेत्रीय पत्रकारों की भूमिका रेखांकित की गई।
- संवेदनशील विषयों पर तथ्यपरक और संतुलित रिपोर्टिंग की आवश्यकता पर बल दिया गया, ताकि भ्रामक सूचना से बचा जा सके।
चुनौतियाँ
1. संगठनात्मक और शहरी नेटवर्क
- माओवादी आंदोलन का दायरा केवल वनांचल तक सीमित नहीं है; शहरी और संघर्ष-क्षेत्र से बाहर के नेटवर्क भी सक्रिय बताए गए।
- संगठन का ढाँचा और वैचारिक प्रभाव सुरक्षा बलों की कार्रवाई के बाद भी बने रह सकते हैं।
- ऐसे नेटवर्कों की पहचान के लिए केवल भौतिक अभियान नहीं, बल्कि खुफिया और अंतर-एजेंसी समन्वय आवश्यक है।
यूपीएससी लिंक: GS-3: आंतरिक सुरक्षा; वामपंथी उग्रवाद की चुनौती
2. आर्थिक स्रोत और वित्तीय नेटवर्क
- खनिज संपदा और स्थानीय आर्थिक गतिविधियाँ संघर्ष के आर्थिक आधार से जुड़ी हो सकती हैं।
- वित्तीय नेटवर्क की पहचान और उन पर नियंत्रण कठिन है, क्योंकि ये अनौपचारिक तंत्रों से संचालित हो सकते हैं।
- आर्थिक पहलुओं को समझे बिना दीर्घकालिक समाधान अधूरा रहता है।
यूपीएससी लिंक: GS-3: आंतरिक सुरक्षा; खनिज संसाधन और उनका प्रबंधन
3. विकास और सुरक्षा में संतुलन
- सुरक्षा अभियानों के बाद विकास कार्यों का समय पर और प्रभावी क्रियान्वयन चुनौतीपूर्ण रहा है।
- स्थानीय समुदायों की आकांक्षाओं और प्रशासन की प्राथमिकताओं में तालमेल आवश्यक है।
- अवसंरचना के विकास के साथ स्थानीय लोगों की भागीदारी सुनिश्चित करना भी आवश्यक है।
यूपीएससी लिंक: GS-2: सरकारी नीतियाँ और हस्तक्षेप; GS-3: समावेशी विकास
4. पुनर्वास और मुख्यधारा में वापसी
- आत्मसमर्पण करने वालों के लिए आजीविका, सामाजिक स्वीकृति और सुरक्षा सुनिश्चित करना चुनौतीपूर्ण होता है।
- पुनर्वास नीति का प्रभावी क्रियान्वयन तभी संभव है जब स्थानीय प्रशासन और समुदाय दोनों सहयोग करें।
यूपीएससी लिंक: GS-2: सामाजिक न्याय और कल्याणकारी योजनाएँ
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| Issue | Concern |
|---|---|
| शहरी और बाहरी नेटवर्क | संघर्ष-क्षेत्र से बाहर सक्रिय नेटवर्कों की पहचान और उन पर प्रभावी नियंत्रण कठिन |
| वित्तीय स्रोत | अनौपचारिक वित्तीय तंत्र और खनिज संसाधनों से जुड़े हित संघर्ष को बनाए रख सकते हैं |
| विकास में विलंब | सुरक्षा स्थिति सुधरने के बाद भी अवसंरचना और सेवाओं की पहुँच में अंतर बना रह सकता है |
| पुनर्वास की गुणवत्ता | आजीविका और सामाजिक स्वीकृति के अभाव में पुनः सक्रियता का जोखिम |
| सूचना का असंतुलन | एकपक्षीय या सनसनीखेज़ रिपोर्टिंग से स्थानीय समुदायों में अविश्वास बढ़ सकता है |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- सुरक्षा संबंधी व्यय (Security Related Expenditure – SRE) योजना, जिसके अंतर्गत वामपंथी उग्रवाद प्रभावित क्षेत्रों में सड़क, संचार और अन्य नागरिक अवसंरचना के विकास हेतु सहायता दी जाती है
आगे की राह
- सुरक्षा अभियानों के साथ-साथ प्रभावित क्षेत्रों में सड़क, संचार और बुनियादी सेवाओं के विकास को समयबद्ध रूप से आगे बढ़ाया जाए।
- खुफिया तंत्र को अंतर-एजेंसी समन्वय से जोड़कर संगठनात्मक और वित्तीय नेटवर्कों की पहचान को सुदृढ़ किया जाए।
- खनिज संसाधनों और स्थानीय अर्थव्यवस्था से संबंधित वित्तीय प्रवाह की निगरानी के लिए नियामक क्षमता बढ़ाई जाए।
- आत्मसमर्पण और पुनर्वास नीति के अंतर्गत आजीविका, कौशल विकास और सामाजिक स्वीकृति सुनिश्चित की जाए।
- पंचायती राज संस्थाओं और ग्राम सभाओं की भागीदारी से विकास योजनाओं में स्थानीय समुदायों की सहभागिता बढ़ाई जाए।
- कल्याणकारी योजनाओं के लाभ की पहुँच का नियमित मूल्यांकन कर कमियों को समय पर दूर किया जाए।
- मीडिया के लिए तथ्यपरक और संतुलित रिपोर्टिंग के मानक मज़बूत किए जाएँ, ताकि जनजागरूकता और विश्वास दोनों बढ़ें।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
वामपंथी उग्रवाद (Left Wing Extremism) · समग्र दृष्टिकोण (Holistic Approach) · अनुसूचित क्षेत्र (Scheduled Areas) · पेसा अधिनियम, 1996 (PESA Act, 1996) · वन अधिकार अधिनियम, 2006 (Forest Rights Act, 2006) · ग्राम सभा (Gram Sabha) · सुरक्षा-विकास संतुलन · आत्मसमर्पण और पुनर्वास नीति (Surrender and Rehabilitation Policy) · सुरक्षा संबंधी व्यय (Security Related Expenditure) · संवैधानिक लोकतंत्र (Constitutional Democracy) · न्यायिक समीक्षा (Judicial Review) · आदिवासी स्वायत्तता (Tribal Autonomy)
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- अनुच्छेद 19(1)(a): मीडिया की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और संवाद का अधिकार
- अनुच्छेद 19(2): लोक व्यवस्था के आधार पर उचित प्रतिबंध
- सातवीं अनुसूची: पुलिस और लोक व्यवस्था राज्य सूची के विषय
- अनुच्छेद 355: आंतरिक अशांति से राज्यों की सुरक्षा का संघ का कर्तव्य
अवधारणा प्रवाह
माओवादी आंदोलन का संगठित नेटवर्क और वैचारिक प्रभाव (कारण) → सुरक्षा अभियान, खुफिया जानकारी और राज्य-केंद्र समन्वित कार्रवाई → प्रभावित क्षेत्र में सुरक्षा स्थिति का सुधार और प्रशासन की पहुँच → अवसंरचना विकास और कल्याणकारी योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन → आत्मसमर्पण, पुनर्वास और स्थानीय समुदाय की भागीदारी → वामपंथी उग्रवाद में कमी और ‘नक्सल मुक्त’ जिले के रूप में परिवर्तन (परिणाम) → तथ्यपरक मीडिया रिपोर्टिंग से जनजागरूकता और लोकतांत्रिक विश्वास का सुदृढ़ीकरण
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. पंचायत (अनुसूचित क्षेत्रों तक विस्तार) अधिनियम, 1996 संविधान के भाग IX के उपबंधों को कुछ परिवर्तनों के साथ अनुसूचित क्षेत्रों तक विस्तारित करता है।
2. अनुसूचित जनजाति और अन्य पारंपरिक वन निवासी (वन अधिकारों की मान्यता) अधिनियम, 2006 सामुदायिक वन संसाधन अधिकारों की मान्यता का प्रावधान करता है।
3. इस अधिनियम के अंतर्गत वन अधिकारों की मान्यता केवल अनुसूचित जनजातियों के लिए है, अन्य पारंपरिक वन निवासी इसमें शामिल नहीं हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- केवल तीन
- सभी
उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है: पेसा, 1996 संविधान के अनुच्छेद 243M के माध्यम से भाग IX के उपबंधों को अनुसूचित क्षेत्रों तक विस्तारित करता है। कथन 2 सही है: वन अधिकार अधिनियम, 2006 सामुदायिक वन संसाधन अधिकारों को मान्यता देता है। कथन 3 गलत है: इस अधिनियम में ‘अन्य पारंपरिक वन निवासी’ भी शामिल हैं, इसलिए केवल अनुसूचित जनजातियों तक सीमित कहना गलत है।
Q2. निम्नलिखित में से प्रत्येक के साथ एक कथन (A) और एक तर्क (R) दिया गया है।
कथन (A): वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित क्षेत्रों में सरकार की रणनीति में सुरक्षा अभियानों के साथ विकास और पुनर्वास को शामिल किया जाता है।
तर्क (R): विकास की कमी और प्रशासनिक अनुपस्थिति को उन परिस्थितियों में से एक माना गया है जिनमें वामपंथी उग्रवाद पनपता है।
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनिए:
- (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या है।
- (A) और (R) दोनों सही हैं, परंतु (R), (A) की सही व्याख्या नहीं है।
- (A) सही है, परंतु (R) गलत है।
- (A) गलत है, परंतु (R) सही है।
उत्तर: (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या है। — सरकार की वामपंथी उग्रवाद संबंधी नीति में सुरक्षा, विकास और पुनर्वास का समन्वित दृष्टिकोण अपनाया गया है, इसलिए (A) सही है। विकास की कमी और प्रशासनिक शून्यता को प्रभावित क्षेत्रों में उग्रवाद के पोषक कारकों के रूप में पहचाना गया है, अतः (R) भी सही है और वह (A) की व्याख्या करता है।
Q3. निम्नलिखित सुमेलों पर विचार कीजिए:
सूची I (अधिनियम/नीति)
1. पेसा, 1996
2. वन अधिकार अधिनियम, 2006
3. सैमाधान (SAMADHAN)
सूची II (विशेषता)
a. ग्राम सभा से अनुसूचित क्षेत्रों में भूमि अधिग्रहण से पूर्व परामर्श का प्रावधान
b. सामुदायिक वन संसाधन अधिकारों की मान्यता
c. वामपंथी उग्रवाद से निपटने हेतु गृह मंत्रालय की बहु-आयामी रणनीति
सही सुमेलन चुनिए:
- 1-b, 2-a, 3-c
- 1-a, 2-c, 3-b
- 1-a, 2-b, 3-c
- 1-c, 2-a, 3-b
उत्तर: 1-a, 2-b, 3-c — पेसा, 1996 में अनुसूचित क्षेत्रों में भूमि अधिग्रहण से पूर्व ग्राम सभा से परामर्श का प्रावधान है (1-a)। वन अधिकार अधिनियम, 2006 सामुदायिक वन संसाधन अधिकारों को मान्यता देता है (2-b)। सैमाधान गृह मंत्रालय की वामपंथी उग्रवाद विरोधी बहु-आयामी रणनीति है, जो एक कानून नहीं बल्कि नीतिगत ढांचा है (3-c)।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ गढ़चिरौली का अनुभव यह दर्शाता है कि वामपंथी उग्रवाद को केवल सुरक्षा समस्या मानकर हल नहीं किया जा सकता। सुरक्षा, विकास और सामुदायिक भागीदारी के समन्वय का आलोचनात्मक परीक्षण कीजिए। साथ ही बताइए कि पुनर्वास और विकास के परिणाम स्थायी बने रहने के लिए किन संस्थागत और संवैधानिक शर्तों का पूरा होना आवश्यक है। (15 Marks)
रूपरेखा: MODEL-ANSWER SKELETON:
1. भूमिका: गढ़चिरौली में पीआईबी नागपुर की वार्तालाप कार्यशाला (4 नवंबर 2026) में सुरक्षा, विकास और सामुदायिक भागीदारी पर बल; पुलिस अधीक्षक एम. रमेश और विशेष पुलिस महानिरीक्षक संदीप पाटिल के वक्तव्यों का संदर्भ, जिसमें जिले को वामपंथी उग्रवाद-मुक्त बताया गया। (इसे संबंधित अधिकारियों का दावा मानते हुए तटस्थ रूप से प्रस्तुत करें।)
2. सुरक्षा पक्ष: सैमाधान (SAMADHAN) रणनीति; वर्ष 2015 की राष्ट्रीय नीति और कार्ययोजना; खुफिया सूचना का सुदृढ़ तंत्र; आत्मसमर्पण और पुनर्वास नीति; सुरक्षा संबंधी व्यय (SRE) योजना की भूमिका। नंदिनी सुंदर बनाम छत्तीसगढ़ राज्य (2011) में सुप्रीम कोर्ट द्वारा विशेष पुलिस अधिकारियों (SPO) की नियुक्ति को असंवैधानिक ठहराए जाने से यह सीख कि सुरक्षा उपाय संवैधानिक सीमाओं में होने चाहिए।
3. विकास पक्ष: एकीकृत कार्य योजना (IAP, 2010) के अंतर्गत सड़क, संचार और सेवाओं का विस्तार; सड़क आवश्यकता योजना (RRP) और विशेष अवसंरचना योजना (SIS) का उल्लेख; अमर्त्य सेन का क्षमता दृष्टिकोण (Capability Approach) — विकास को अवसर और स्वतंत्रता के विस्तार के रूप में समझना।
4. संवैधानिक और कानूनी ढांचा: अनुच्छेद 244 और पाँचवीं अनुसूची; पेसा, 1996 के अंतर्गत ग्राम सभा की भूमिका; वन अधिकार अधिनियम, 2006 के अंतर्गत सामुदायिक वन संसाधन अधिकार; अनुच्छेद 21 के अंतर्गत आजीविका और गरिमा; न्यायिक समीक्षा की भूमिका।
5. समुदाय और पारदर्शिता: स्थानीय समुदायों की सहमति; मीडिया द्वारा तथ्यपरक और संतुलित रिपोर्टिंग; मानवाधिकार संबंधी चिंताएँ तथा सुरक्षा बलों की जवाबदेही।
6. संतुलित दृष्टि: सुरक्षा उपायों की प्रभावशीलता बनाम दीर्घकालिक विश्वास-निर्माण; अल्पकालिक परिणाम बनाम संरचनात्मक सुधार; पुनर्वास की गुणवत्ता और रोजगार अवसर।
7. निष्कर्ष: समन्वित शासन के लिए संस्थागत सुदृढ़ीकरण (ग्राम सभा, स्थानीय प्रशासन, न्यायपालिका की निगरानी) आवश्यक है; संविधान के मूल्य — जिसे श्री पाटिल ने डॉ. बी. आर. आंबेडकर से जोड़ा — इसका आधार होने चाहिए।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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