तेलंगाना में भारतनेट कार्यक्रम: ग्रामीण डिजिटल क्रांति की ओर

तेलंगाना में भारतनेट कार्यक्रम: ग्रामीण डिजिटल क्रांति की ओर

तेलंगाना में भारतनेट कार्यक्रम: ग्रामीण डिजिटल क्रांति की ओर

संशोधित भारतनेट कार्यक्रम का कार्यान्वयनसमझौते पर हस्ताक्षरडीबीएन, दूरसंचार विभाग, तेलंगावित्तीय सहायताभारत सरकार द्वारा 3,189 करोड़ ग्राम पंचायतों को शामि12,769 ग्राम पंचायतेंनेटवर्क उन्नयनलीनियर से रिंग टोपोलॉजीफाइबर कनेक्शनलगभग तीन लाख घरों को
संशोधित भारतनेट कार्यक्रम का कार्यान्वयन

✎ संशोधित भारतनेट (ABP) को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 4 अगस्त 2023 को मंजूरी दी; इसका वित्तीय स्रोत डिजिटल भारत निधि (DBN) है, जो पूर्ववर्ती USOF का दूरसंचार अधिनियम, 2023 के तहत नया नाम है, और इसका कार्यान्वयन राज्य-नेतृत्व वाले मॉडल…

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विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper II — शासन (ई-गवर्नेंस, सरकारी योजनाएँ, केंद्र-राज्य सहयोग और सहकारी संघवाद)  |  GS Paper III — अर्थव्यवस्था (अवसंरचना, समावेशी विकास और डिजिटल अर्थव्यवस्था)  |  GS Paper III — विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी (दूरसंचार और ब्रॉडबैंड अवसंरचना)
  • Prelims: डिजिटल भारत निधि (DBN) और पूर्ववर्ती यूनिवर्सल सर्विस ऑब्लिगेशन फंड (USOF), भारतनेट कार्यक्रम: संशोधित भारतनेट कार्यक्रम (ABP) और इसका राज्य-नेतृत्व वाला मॉडल, दूरसंचार अधिनियम, 2023 और भारतीय तार (संशोधन) अधिनियम, 2003, नेटवर्क टोपोलॉजी: लीनियर बनाम रिंग टोपोलॉजी, ग्राम पंचायत स्तर पर ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी और फाइबर-टू-द-होम (FTTH), बीएसएनएल (BSNL) की भूमिका और सार्वभौमिक सेवा दायित्व की अवधारणा
  • Essay: डिजिटल विभाजन समाप्त करने में सहकारी संघवाद और राज्य-नेतृत्व वाले मॉडल की भूमिका, ग्रामीण ब्रॉडबैंड: समावेशी विकास, ई-गवर्नेंस और ज्ञान-आधारित अर्थव्यवस्था

त्वरित पुनरावृत्ति: संशोधित भारतनेट (ABP) को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 4 अगस्त 2023 को मंजूरी दी; इसका वित्तीय स्रोत डिजिटल भारत निधि (DBN) है, जो पूर्ववर्ती USOF का दूरसंचार अधिनियम, 2023 के तहत नया नाम है, और इसका कार्यान्वयन राज्य-नेतृत्व वाले मॉडल में होता है।

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यह खबर चर्चा में क्यों?

दूरसंचार विभाग के अंतर्गत डिजिटल भारत निधि (डीबीएन) ने नई दिल्ली स्थित संचार भवन में तेलंगाना में संशोधित भारतनेट कार्यक्रम के कार्यान्वयन के लिए समझौते पर हस्ताक्षर किए। इस समझौते में डीबीएन, दूरसंचार विभाग, तेलंगाना सरकार, तेलंगाना रूरल इंटरनेट इन्फ्रास्ट्रक्चर कॉरपोरेशन लिमिटेड (टीआरआईआईसीएल), भारत संचार निगम लिमिटेड (बीएसएनएल) और तेलंगाना फाइबर ग्रिड कॉरपोरेशन लिमिटेड (टी-फाइबर) शामिल हैं। भारत सरकार ने इस कार्यक्रम के लिए 3,189 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता स्वीकृत की है। इसके अंतर्गत राज्य की 12,769 ग्राम पंचायतों को शामिल किया जाएगा, जिनमें प्रथम चरण की 1,946 ग्राम पंचायतों में नेटवर्क टोपोलॉजी को लीनियर से रिंग टोपोलॉजी में उन्नत करना, दूसरे चरण की 10,787 ग्राम पंचायतों को कवर करना और नवगठित 36 ग्राम पंचायतों को जोड़ना शामिल है। अनुमान है कि इससे लगभग तीन लाख घरों को फाइबर कनेक्शन उपलब्ध होंगे। यह समझौता राज्य-नेतृत्व वाले मॉडल के तहत कार्यान्वयन में तेजी लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना गया है।

पृष्ठभूमि

  • भारतनेट की शुरुआत राष्ट्रीय ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क (NOFN) की अवधारणा से हुई, जिसका उद्देश्य सभी ग्राम पंचायतों तक ब्रॉडबैंड पहुँचाना था। बाद में इसे भारतनेट नाम दिया गया।
  • केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 4 अगस्त 2023 को संशोधित भारतनेट कार्यक्रम को मंजूरी दी। इसका लक्ष्य मौजूदा नेटवर्क का उन्नयन, सुदृढ़ीकरण और विस्तार करना है, ताकि मांग के आधार पर सभी ग्राम पंचायतों और गांवों को भविष्य-उन्मुख ब्रॉडबैंड उपलब्ध हो।
  • भारतीय तार (संशोधन) अधिनियम, 2003 के तहत 1 अप्रैल 2002 से यूनिवर्सल सर्विस ऑब्लिगेशन फंड (USOF) प्रभावी रूप से स्थापित किया गया था, जिसका उद्देश्य दूरसंचार सेवाओं की पहुँच वंचित और दूरदराज़ क्षेत्रों तक बढ़ाना था।
  • दूरसंचार अधिनियम, 2023 के प्रावधानों के अनुसार USOF का नाम बदलकर डिजिटल भारत निधि (DBN) कर दिया गया है। इसका उद्देश्य ग्रामीण और दूरदराज़ क्षेत्रों में सार्वभौमिक दूरसंचार पहुँच सुनिश्चित करना है।
  • संशोधित भारतनेट का कार्यान्वयन राज्य-नेतृत्व वाले मॉडल में राज्य की नोडल एजेंसियों और केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रमों के सहयोग से किया जा रहा है, जिसमें केंद्र वित्तीय सहायता प्रदान करता है।

संशोधित भारतनेट कार्यक्रम क्या है?

  • संशोधित भारतनेट कार्यक्रम भारतनेट का उन्नत चरण है, जिसका उद्देश्य मौजूदा ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क को मजबूत करना, उसका विस्तार करना और उसे भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप बनाना है।
  • यह मांग-आधारित दृष्टिकोण अपनाता है, अर्थात् जिन ग्राम पंचायतों और गांवों में ब्रॉडबैंड की माँग है, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर जोड़ा जाता है।
  • नेटवर्क टोपोलॉजी का अर्थ है नेटवर्क के तत्वों के जुड़ने का ढाँचा। लीनियर टोपोलॉजी में एक कड़ी टूटने पर आगे की कनेक्टिविटी बाधित हो सकती है, जबकि रिंग टोपोलॉजी में वैकल्पिक मार्ग होने से नेटवर्क अधिक विश्वसनीय रहता है।
  • राज्य-नेतृत्व वाले मॉडल में परियोजना का कार्यान्वयन राज्य की नामित एजेंसी के माध्यम से होता है, जबकि केंद्र वित्तीय सहायता और नीतिगत दिशा प्रदान करता है। यह सहकारी संघवाद की भावना को दर्शाता है।
  • भारतनेट नेटवर्क को सामान्यतः तीन स्तरों में समझा जाता है: बैकबोन, मिडल माइल और लास्ट माइल। लास्ट माइल में ग्राम पंचायत स्तर तक फाइबर पहुँचाना और उसके आगे घरों तक कनेक्शन देना शामिल है।
  • डिजिटल भारत निधि (DBN) इस कार्यक्रम का वित्तीय स्रोत है, जो दूरसंचार सेवाओं की सार्वभौमिक पहुँच के उद्देश्य से काम करती है।
  • इस कार्यक्रम से ई-गवर्नेंस, ऑनलाइन शिक्षा, टेलीमेडिसिन, डिजिटल भुगतान और नागरिक-केंद्रित सेवाओं तक ग्रामीण पहुँच बढ़ने की अपेक्षा है।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्त्व
कार्यान्वयन मॉडल: राज्य-नेतृत्व वाला मॉडल राज्य सरकार की एजेंसी (टीआरआईआईसीएल) परियोजना का क्रियान्वयन करती है, जबकि डिजिटल भारत निधि वित्तीय सहायता देती है। इससे राज्य की भूमिका और जवाबदेही बढ़ती है।
वित्तीय सहायता: 3,189 करोड़ रुपये तेलंगाना में संशोधित भारतनेट कार्यक्रम के लिए भारत सरकार की स्वीकृत सहायता। यह राशि ग्रामीण दूरसंचार अवसंरचना के उन्नयन पर केंद्रित है।
कवरेज: 12,769 ग्राम पंचायतें परियोजना में राज्य की सभी ग्राम पंचायतों के बराबर बड़ा भौगोलिक दायरा शामिल है, जिसमें नवगठित 36 ग्राम पंचायतें भी सम्मिलित हैं।
नेटवर्क टोपोलॉजी का उन्नयन: लीनियर से रिंग प्रथम चरण की 1,946 ग्राम पंचायतों में रिंग टोपोलॉजी लागू होगी। रिंग संरचना में किसी एक कड़ी के टूटने पर भी सेवा बनी रहती है, इसलिए नेटवर्क की विश्वसनीयता बढ़ती है।
दूसरा चरण: 10,787 ग्राम पंचायतें इस चरण में बड़ी संख्या में ग्राम पंचायतों को नेटवर्क से जोड़ा जाएगा। यह विस्तार मांग-आधारित दृष्टिकोण पर आधारित है।
फाइबर कनेक्शन: लगभग तीन लाख घर सब्सिडी सहायता के माध्यम से ग्रामीण घरों तक फाइबर कनेक्शन पहुँचाने का लक्ष्य है। इससे ई-गवर्नेंस, टेलीमेडिसिन और डिजिटल भुगतान जैसी सेवाओं की पहुँच बढ़ेगी।

महत्व

आर्थिक महत्त्व

  • ग्रामीण ब्रॉडबैंड अवसंरचना आर्थिक संवृद्धि का आधार है। भरोसेमंद कनेक्टिविटी से ग्रामीण उद्यमों, स्वरोजगार और ई-कॉमर्स तक पहुँच बढ़ती है।
  • डिजिटल भुगतान की पहुँच बढ़ने से वित्तीय समावेशन को सहायता मिलती है और नकद लेन-देन पर निर्भरता घटती है।
  • निजी दूरसंचार कंपनियों के लिए दूरदराज क्षेत्रों में सेवा देने का आधार तैयार होता है, क्योंकि बैकहॉल अवसंरचना सार्वजनिक निधि से उपलब्ध होती है।

सामाजिक एवं सेवा-वितरण से जुड़ा महत्त्व

  • ई-गवर्नेंस, टेलीमेडिसिन और ऑनलाइन शिक्षा जैसी सेवाओं से दूरदराज के नागरिकों को बेहतर सुविधाएँ मिलती हैं।
  • ग्रामीण और शहरी डिजिटल अंतर को कम करने में यह परियोजना सहायक है, जो समावेशी विकास के उद्देश्य से जुड़ा है।

प्रशासनिक और संघीय महत्त्व

  • राज्य-नेतृत्व वाले मॉडल में केंद्र और राज्य की साझा भूमिका दिखाई देती है। इसमें केंद्र वित्त उपलब्ध कराता है और राज्य क्रियान्वयन करता है।
  • केंद्रीय दूरसंचार विभाग, डिजिटल भारत निधि, राज्य सरकार, टीआरआईआईसीएल, बीएसएनएल और टी-फाइबर के बीच बहु-पक्षीय समझौता संस्थागत समन्वय का उदाहरण है।

तकनीकी और सामरिक महत्त्व

  • रिंग टोपोलॉजी से नेटवर्क की मजबूती बढ़ती है, जो आपदा या तकनीकी बाधा के समय सेवा निरंतरता के लिए आवश्यक है।
  • सार्वजनिक स्वामित्व वाली बीएसएनएल की भागीदारी से ग्रामीण क्षेत्रों में सुरक्षित और नियंत्रित अवसंरचना का लाभ मिलता है।

चुनौतियाँ

1. परियोजना क्रियान्वयन में विलंब का जोखिम

  • भारतनेट के पिछले चरणों में समय-सीमा से विलंब की शिकायतें सामने आती रही हैं। बहु-पक्षीय ढांचे में समन्वय की जटिलता इस जोखिम को बढ़ाती है।
  • फाइबर बिछाने के लिए भूमि, सड़क खुदाई की अनुमति और स्थानीय निकायों के साथ समन्वय जैसी बाधाएँ परियोजना की गति प्रभावित करती हैं।

2. संस्थागत समन्वय और जवाबदेही

  • केंद्र, राज्य, सार्वजनिक उपक्रम (बीएसएनएल) और राज्य की विशेष निगमों (टीआरआईआईसीएल, टी-फाइबर) के बीच जिम्मेदारियों का स्पष्ट बँटवारा आवश्यक है।
  • एक ही परियोजना में कई एजेंसियाँ होने पर निगरानी और दोष-निर्धारण कठिन हो सकता है।

3. डिजिटल विभाजन और उपयोग की समस्या

  • केवल अवसंरचना उपलब्ध होने से सेवाओं का उपयोग स्वतः नहीं बढ़ता। डिजिटल साक्षरता, स्थानीय भाषा में सामग्री और सेवा-केंद्र की उपलब्धता आवश्यक है।
  • महिलाओं, बुजुर्गों और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए डिजिटल पहुँच की बाधाएँ बनी रह सकती हैं।

4. रखरखाव और दीर्घकालिक वित्तपोषण

  • फाइबर नेटवर्क के रखरखाव, उन्नयन और तकनीकी बदलाव के लिए निरंतर संसाधन चाहिए। केवल प्रारंभिक निवेश पर्याप्त नहीं है।
  • सब्सिडी आधारित मॉडल में परिचालन लागत की जिम्मेदारी स्पष्ट न होने से नेटवर्क की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है।

5. साइबर सुरक्षा और डेटा संरक्षण

  • ग्रामीण नेटवर्क के विस्तार के साथ साइबर हमलों और डेटा दुरुपयोग का जोखिम बढ़ता है, विशेषकर ई-गवर्नेंस सेवाओं में।
  • नेटवर्क अवसंरचना की सुरक्षा के लिए मानक, निगरानी तंत्र और प्रशिक्षित मानव संसाधन आवश्यक हैं।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

समस्या चिंता
समय-सीमा पर क्रियान्वयन तीन चरणों और कई एजेंसियों के कारण परियोजना में विलंब हो सकता है, जिससे लाभ देर से पहुँचेंगे।
भूमि और अनुमति फाइबर बिछाने के लिए सड़क, भूमि और स्थानीय अनुमतियों में बाधा आ सकती है।
बहु-पक्षीय जवाबदेही केंद्र, राज्य, बीएसएनएल और राज्य निगमों के बीच दायित्व स्पष्ट न हो तो निगरानी कमजोर होगी।
रखरखाव लागत निर्माण के बाद परिचालन और रखरखाव के लिए स्थायी वित्तीय व्यवस्था आवश्यक है।
डिजिटल उपयोग का अंतर अवसंरचना होने के बावजूद डिजिटल साक्षरता की कमी से सेवाओं का उपयोग सीमित रह सकता है।
साइबर सुरक्षा नेटवर्क के विस्तार के साथ साइबर जोखिम और डेटा सुरक्षा की चुनौती बढ़ती है।

सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें

  • संशोधित भारतनेट कार्यक्रम (Amended BharatNet Programme)
  • डिजिटल भारत निधि (Digital Bharat Nidhi)

आगे की राह

  • परियोजना की प्रगति के लिए समय-बद्ध मील के पत्थर तय किए जाएँ और उनकी नियमित सार्वजनिक निगरानी हो।
  • केंद्र, राज्य, बीएसएनएल और राज्य निगमों के बीच भूमिकाओं का लिखित और स्पष्ट विभाजन सुनिश्चित किया जाए।
  • भूमि, सड़क खुदाई और स्थानीय अनुमतियों के लिए एकल खिड़की (single window) व्यवस्था विकसित की जाए।
  • परिचालन और रखरखाव के लिए दीर्घकालिक वित्तीय मॉडल तैयार किया जाए, ताकि निर्मित नेटवर्क की गुणवत्ता बनी रहे।
  • ग्राम पंचायत स्तर पर डिजिटल सेवा-केंद्र और स्थानीय भाषा में प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाए जाएँ, ताकि सेवाओं का वास्तविक उपयोग बढ़े।
  • नेटवर्क की सुरक्षा के लिए साइबर सुरक्षा मानक लागू हों और नियमित ऑडिट किया जाए।
  • रिंग टोपोलॉजी के लाभों का मूल्यांकन कर अन्य राज्यों के लिए सर्वोत्तम व्यवहार (best practices) का दस्तावेज़ीकरण हो।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

संशोधित भारतनेट कार्यक्रम (Amended BharatNet Programme) · डिजिटल भारत निधि (Digital Bharat Nidhi) · सार्वभौमिक सेवा दायित्व निधि (USOF) · दूरसंचार अधिनियम, 2023 (Telecommunications Act, 2023) · राज्य-नेतृत्व वाला मॉडल (State-led Model) · रिंग टोपोलॉजी (Ring Topology) · अंतिम छोर तक कनेक्टिविटी (Last-mile Connectivity) · डिजिटल विभाजन (Digital Divide) · सहकारी संघवाद (Cooperative Federalism) · केंद्र प्रायोजित योजना (Centrally Sponsored Scheme) · भारत संचार निगम लिमिटेड (BSNL) · ग्रामीण दूरसंचार अवसंरचना (Rural Telecom Infrastructure)

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • अनुच्छेद 246: संघ और राज्यों के बीच विधायी शक्तियों का वितरण
  • सातवीं अनुसूची, संघ सूची: प्रविष्टि 31, डाक-तार और दूरसंचार
  • अनुच्छेद 282: केंद्र द्वारा राज्यों को सार्वजनिक उद्देश्य हेतु अनुदान
  • अनुच्छेद 243G: पंचायतों को आर्थिक विकास योजना की शक्ति

अवधारणा प्रवाह

केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा संशोधित भारतनेट कार्यक्रम को स्वीकृति (4 अगस्त 2023)  →  डिजिटल भारत निधि द्वारा तेलंगाना के लिए 3,189 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता का अनुमोदन  →  राज्य-नेतृत्व वाले मॉडल में टीआरआईआईसीएल, बीएसएनएल और टी-फाइबर के साथ त्रिपक्षीय क्रियान्वयन समझौता  →  12,769 ग्राम पंचायतों में चरणबद्ध कार्य: रिंग टोपोलॉजी उन्नयन और नई कवरेज  →  फाइबर अवसंरचना के माध्यम से लगभग तीन लाख घरों तक कनेक्शन  →  ग्रामीण क्षेत्रों में ई-गवर्नेंस, टेलीमेडिसिन, ऑनलाइन शिक्षा और डिजिटल भुगतान का विस्तार

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. डिजिटल भारत निधि, पूर्ववर्ती सार्वभौमिक सेवा दायित्व निधि (USOF) का नया नाम है, जिसे दूरसंचार अधिनियम, 2023 के प्रावधानों के अंतर्गत बदला गया।
2. दूरसंचार विषय संघ सूची (Union List) में आता है।
3. संशोधित भारतनेट कार्यक्रम में सभी राज्यों में परियोजना का क्रियान्वयन केवल भारत संचार निगम लिमिटेड (BSNL) द्वारा किया जाता है।

उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. केवल तीन
  4. सभी

उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है: दूरसंचार अधिनियम, 2023 के अंतर्गत USOF का नाम डिजिटल भारत निधि (DBN) किया गया है। कथन 2 सही है: दूरसंचार संविधान की सातवीं अनुसूची की संघ सूची की प्रविष्टि 31 में आता है। कथन 3 गलत है: तेलंगाना जैसे राज्य-नेतृत्व वाले मॉडल में क्रियान्वयन राज्य की एजेंसी (जैसे टीआरआईआईसीएल) के माध्यम से होता है, और BSNL केवल एक भागीदार है। अतः उत्तर ‘केवल दो’ है।

Q2. निम्नलिखित दो कथनों (A और R) पर विचार कीजिए:
कथन (A): संशोधित भारतनेट कार्यक्रम के प्रथम चरण में कुछ ग्राम पंचायतों में नेटवर्क टोपोलॉजी को लीनियर से रिंग टोपोलॉजी में उन्नत किया जा रहा है।
कारण (R): रिंग टोपोलॉजी में किसी एक कड़ी के टूटने पर भी डेटा विपरीत दिशा से पहुँचाया जा सकता है, जिससे नेटवर्क की विश्वसनीयता बढ़ती है।

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनिए:

  1. (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या है।
  2. (A) और (R) दोनों सही हैं, परंतु (R), (A) की सही व्याख्या नहीं है।
  3. (A) सही है, परंतु (R) गलत है।
  4. (A) गलत है, परंतु (R) सही है।

उत्तर: (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या है। — रिंग टोपोलॉजी में हर नोड दो दिशाओं से जुड़ा होता है, इसलिए एक कड़ी टूटने पर भी मार्ग बदलकर संचार जारी रह सकता है। यही विश्वसनीयता बढ़ाने का कारण है, इसलिए (R) (A) की सही व्याख्या है। लीनियर टोपोलॉजी में कड़ी टूटने पर आगे के नोड कट जाते हैं।

Q3. निम्नलिखित में से किस अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार सार्वभौमिक सेवा दायित्व निधि (USOF) का नाम बदलकर डिजिटल भारत निधि (DBN) किया गया?

  1. भारतीय तार अधिनियम, 1885
  2. भारतीय तार (संशोधन) अधिनियम, 2003
  3. दूरसंचार अधिनियम, 2023
  4. सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000

उत्तर: दूरसंचार अधिनियम, 2023 — भारतीय तार (संशोधन) अधिनियम, 2003 के तहत USOF की स्थापना 1 अप्रैल, 2002 से प्रभावी मानी गई थी। दूरसंचार अधिनियम, 2023 के प्रावधानों से इसका नाम डिजिटल भारत निधि किया गया। अन्य अधिनियम इस परिवर्तन से संबंधित नहीं हैं।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ भारतनेट कार्यक्रम के संशोधित चरण में तेलंगाना जैसे राज्य-नेतृत्व वाले मॉडल को अपनाया गया है। ग्रामीण ब्रॉडबैंड अवसंरचना के विस्तार में राज्य-नेतृत्व वाले मॉडल और केंद्र-नेतृत्व वाले मॉडल की तुलनात्मक प्रभावशीलता का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। साथ ही उत्तर दीजिए कि इस मॉडल की सफलता के लिए कौन-सी संस्थागत और वित्तीय शर्तें आवश्यक हैं। (15 Marks)

रूपरेखा: उत्तर संरचना (मॉडल उत्तर संकेत):
1. भूमिका: तेलंगाना में 12,769 ग्राम पंचायतों को संशोधित भारतनेट के दायरे में लाना, ₹3,189 करोड़ की केंद्रीय सहायता, और लगभग तीन लाख घरों को फाइबर कनेक्शन का लक्ष्य; 4 अगस्त 2023 को केंद्रीय मंत्रिमंडल की स्वीकृति।
2. संवैधानिक ढाँचा: दूरसंचार विषय संविधान की सातवीं अनुसूची की संघ सूची (प्रविष्टि 31) में है, अतः नीति-निर्माण केंद्र का विशेषाधिकार है; पंचायती राज संबंधी विकास अनुच्छेद 243G के अंतर्गत आता है; अनुच्छेद 246 के अनुसार विधायी शक्तियों का विभाजन; अनुच्छेद 280 के तहत वित्त आयोग से संबंधित अंतर-सरकारी वित्तीय हस्तांतरण।
3. विकास-क्रम: राष्ट्रीय ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क (NOFN, 2011) से भारतनेट (2015) तक; USOF से डिजिटल भारत निधि (दूरसंचार अधिनियम, 2023) तक वित्तपोषण का संस्थागत परिवर्तन।
4. राज्य-नेतृत्व वाले मॉडल के पक्ष में तर्क: स्थानीय भू-अधिकार (Right of Way) और राज्य एजेंसियों की समन्वय क्षमता; सहकारी संघवाद की भावना; जवाबदेही में निकटता; केरल का KFON जैसे राज्य-स्तरीय प्रयोगों का उदाहरण।
5. केंद्र-नेतृत्व वाले मॉडल के पक्ष में तर्क: एकरूप तकनीकी मानक, बड़े पैमाने पर खरीद में मितव्ययिता, BSNL जैसे CPSU की भूमिका; राज्यों की वित्तीय क्षमता में असमानता।
6. आलोचनात्मक पक्ष: परियोजना क्रियान्वयन में विलंब, रख-रखाव (O&M) की लागत, राज्य SPV की क्षमता, बाज़ार-आधारित विस्तार बनाम ग्राम-स्तरीय अंतिम छोर कनेक्टिविटी का अंतर; डिजिटल विभाजन को कम करने की वास्तविक क्षमता।
7. निष्कर्ष: सफलता के लिए (क) स्पष्ट केंद्र-राज्य वित्तीय अनुबंध और निष्पादन-आधारित भुगतान, (ख) समयबद्ध मांग-आधारित योजना, (ग) ई-गवर्नेंस, टेलीमेडिसिन, ऑनलाइन शिक्षा और डिजिटल भुगतान जैसी सेवाओं से राजस्व-सृजन, (घ) स्वतंत्र निगरानी और डेटा-पारदर्शिता। संतुलित निष्कर्ष: मॉडल की प्रभावशीलता संस्थागत क्षमता और समन्वय पर निर्भर है, न कि केवल स्वामित्व के ढाँचे पर।

स्रोत: PIB (Press Information Bureau)

Telangana PCS (TGPSC (TSPSC)) — राज्य PCS अभ्यास

Prelims: तेलंगाना में संशोधित भारतनेट कार्यक्रम के कार्यान्वयन के लिए निम्नलिखित में से कौन-सा संगठन सीधे तौर पर शामिल नहीं है?

  1. डीबीएन (डिजिटल भारत निधि)
  2. टीआरआईआईसीएल (TRIICL)
  3. बीएसएनएल (BSNL)
  4. टी-फाइबर (T-Fiber)

उत्तर: डीबीएन (डिजिटल भारत निधि) — डीबीएन (डिजिटल भारत निधि) दूरसंचार विभाग के तहत एक कोष है जो भारतनेट कार्यक्रम को वित्तपोषित करता है, लेकिन सीधे कार्यान्वयन में शामिल नहीं होता है। अन्य सभी संगठन कार्यान्वयन भागीदार हैं।

Mains: तेलंगाना में संशोधित भारतनेट कार्यक्रम के सफल कार्यान्वयन में टीआरआईआईसीएल, बीएसएनएल और टी-फाइबर की भूमिकाओं का विश्लेषण करें और राज्य के डिजिटल समावेशन पर इसके संभावित प्रभावों पर चर्चा करें।


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

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