07 Nov माय भारत का ‘अपना वोट जानें’ अभियान: युवा चुनावी जागरूकता पर प्रभाव
✎ मतदान का अधिकार अनुच्छेद 326 से मिलता है, मताधिकार की आयु 61वें संशोधन (1988) से 18 वर्ष हुई, और सूचित मतदान के लिए सत्यापित जानकारी व निर्वाचन आयोग के SVEEP जैसे कार्यक्रम आवश्यक हैं।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — भारतीय राजव्यवस्था (निर्वाचन आयोग, मताधिकार, जन प्रतिनिधित्व) | GS Paper II — शासन (सरकारी योजनाएँ और युवा सहभागिता) | GS Paper I — समाज (युवा और सामाजिक परिवर्तन)
- Prelims: अनुच्छेद 326 (वयस्क मताधिकार), 61वाँ संविधान संशोधन अधिनियम, 1988 (मताधिकार की आयु 21 से घटाकर 18 वर्ष), अनुच्छेद 324 (निर्वाचन आयोग), जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 और 1951, SVEEP (मतदाता शिक्षा एवं निर्वाचन सहभागिता कार्यक्रम), EPIC (निर्वाचक फोटो पहचान पत्र), NOTA (उपरोक्त में से कोई नहीं), पीयूसीएल बनाम भारत संघ, 2013, राष्ट्रीय मतदाता दिवस (25 जनवरी)
- Essay: लोकतंत्र की मजबूती में युवा मतदाता की भूमिका: अधिकार से जिम्मेदारी तक, सूचना-संपन्न नागरिकता: सत्यापित जानकारी और लोकतांत्रिक निर्णय
त्वरित पुनरावृत्ति: मतदान का अधिकार अनुच्छेद 326 से मिलता है, मताधिकार की आयु 61वें संशोधन (1988) से 18 वर्ष हुई, और सूचित मतदान के लिए सत्यापित जानकारी व निर्वाचन आयोग के SVEEP जैसे कार्यक्रम आवश्यक हैं।
यह खबर चर्चा में क्यों?
युवा मामले और खेल मंत्रालय ने माय भारत (MY Bharat) के माध्यम से राष्ट्रव्यापी ‘विकसित भारत युवा संवाद: अपना वोट जानें’ अभियान का समापन किया। यह अभियान 26 अक्टूबर से 5 नवंबर 2026 तक चला, जिसमें 31 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 536 युवा संवाद आयोजित हुए और 1 लाख से अधिक (100,493) युवाओं तक पहुँच बनाई गई। इसका लक्ष्य लगभग 500 विश्वविद्यालयों, कॉलेजों और शैक्षणिक संस्थानों तक पहुँचना था। समापन दिवस पर 28 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 123 संवाद हुए, जिनमें 22,588 युवा और 123 युवा आदर्श शामिल हुए। कार्यक्रमों में राज्यपालों, केंद्रीय और राज्य मंत्रियों, सांसदों तथा खेल जगत की हस्तियों ने भाग लिया। सत्रों में प्रश्नोत्तर, लोकतांत्रिक प्रतिज्ञा और माय इंडिया पोर्टल पर पंजीकरण भी हुआ। इस अभियान की खबर इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह मतदाता शिक्षा को संस्थागत रूप से युवाओं तक ले जाने का एक व्यवस्थित प्रयास है, विशेषकर पहली बार मतदान करने वाले मतदाताओं के लिए।
पृष्ठभूमि
- संविधान के अनुच्छेद 326 के अंतर्गत लोकसभा और विधानसभा चुनावों के लिए वयस्क मताधिकार का प्रावधान है। 61वें संविधान संशोधन (1988) द्वारा मताधिकार की न्यूनतम आयु 21 वर्ष से घटाकर 18 वर्ष की गई, जिससे बड़ी संख्या में युवा मतदाता मतदाता सूची में जुड़े।
- मतदाता सूची की तैयारी और निर्वाचन संबंधी नियम जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 और 1951 के अंतर्गत आते हैं, जबकि चुनाव संचालन की जिम्मेदारी अनुच्छेद 324 के तहत निर्वाचन आयोग के पास है।
- निर्वाचन आयोग का SVEEP कार्यक्रम मतदाता शिक्षा और मतदान में अधिक भागीदारी के लिए चलाया जाता है। शिक्षण संस्थानों में युवा संवाद इसी दिशा में सरकारी और गैर-सरकारी संस्थाओं के साझा प्रयास का उदाहरण हैं।
- युवा मामले और खेल मंत्रालय के अंतर्गत माय भारत एक मंच के रूप में युवाओं को सामुदायिक सेवा, नागरिक गतिविधियों और विकास कार्यक्रमों से जोड़ता है।
- सर्वोच्च न्यायालय ने पीयूसीएल बनाम भारत संघ (2013) में मतदाताओं को NOTA का विकल्प देने का निर्णय दिया था, जो मतदाता के अभिव्यक्ति के अधिकार से जुड़ा है।
लोकतांत्रिक सहभागिता और युवा मतदाता अभियान क्या है?
- मतदाता शिक्षा का अर्थ है नागरिकों को मतदान के अधिकार, मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने की प्रक्रिया, उम्मीदवारों की जानकारी और मतदान केंद्र पर अपनाई जाने वाली प्रक्रिया से अवगत कराना।
- अनुच्छेद 326 के अनुसार प्रत्येक वयस्क नागरिक को मतदान का अधिकार है, जबकि जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 मतदाता सूची और 1951 अधिनियम चुनाव संचालन से जुड़े विस्तृत प्रावधान देता है।
- निर्वाचन आयोग (अनुच्छेद 324) स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराने के लिए मतदाता सहभागिता बढ़ाने के कार्यक्रम चलाता है, जिनमें SVEEP प्रमुख है।
- सत्यापित स्रोतों से जानकारी लेना सूचित मतदान की बुनियाद है। इसीलिए अभियान में अफवाह और गलत सूचना से बचने पर जोर दिया गया।
- EPIC और निर्वाचन आयोग के ऑनलाइन पोर्टल व ऐप मतदाता पंजीकरण और मतदाता विवरण सुधार में सहायता करते हैं।
- शिक्षण संस्थानों में संवाद से युवा मतदाताओं में प्रश्न पूछने, तर्क करने और जनप्रतिनिधियों से सीधे संवाद की क्षमता विकसित होती है, जो प्रतिभागी लोकतंत्र का आधार है।
- इस अभियान का मूल्यांकन इस आधार पर होना चाहिए कि क्या यह मतदान प्रतिशत, मतदाता पंजीकरण और सूचित निर्णय क्षमता पर वास्तविक प्रभाव डालता है।
मुख्य विशेषताएँ
| Feature | Significance |
|---|---|
| अभियान का स्वरूप | राष्ट्रव्यापी युवा संवाद, जिसमें प्रत्यक्ष संवाद, चर्चा, प्रश्नोत्तर सत्र और लोकतांत्रिक प्रतिज्ञा शामिल थे |
| आयोजक | युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय, मेरा युवा भारत (माय भारत) के माध्यम से |
| अवधि और पहुंच | 26 अक्टूबर से 5 नवंबर 2026 तक; 31 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में 536 संवाद; 1 लाख से अधिक (100,493) युवाओं तक पहुंच |
| केंद्रीय विषय | चुनावी जागरूकता, सूचित मतदान, मतदान अधिकारों और निर्वाचन प्रक्रिया की समझ |
| सहभागी | राज्यपाल, केंद्रीय और राज्य मंत्री, सांसद, खेल तथा युवा हस्तियां; विशेष रूप से पहली बार मतदान करने वाले युवा लक्ष्य समूह |
| डिजिटल कड़ी | माय इंडिया पोर्टल पर पंजीकरण; सूचना को प्रामाणिक स्रोतों से सत्यापित करने पर बल |
महत्व
लोकतांत्रिक सहभागिता
- मताधिकार का प्रयोग तभी सार्थक होता है जब मतदाता प्रक्रिया को समझता हो; इस अभियान ने सूचित मतदान पर बल दिया।
- पहली बार मतदान करने वाले युवाओं को संवैधानिक अधिकार और नागरिक कर्तव्य से जोड़ना लोकतंत्र की निरंतरता के लिए आवश्यक है।
- प्रत्यक्ष संवाद से युवा और जनप्रतिनिधि के बीच सीधा संपर्क बना, जो प्रतिनिधिक लोकतंत्र की भावना को मजबूत करता है।
शैक्षणिक और सामाजिक
- कॉलेजों और शैक्षणिक संस्थानों को केंद्र में रखने से नागरिक शिक्षा को पाठ्येतर गतिविधि के रूप में संस्थागत स्वरूप मिला।
- सत्रों में सत्यापन और निर्णय-क्षमता पर जोर देने से आलोचनात्मक चिंतन और सूचना-साक्षरता का विकास होता है।
शासन और संस्थागत
- युवा मामले और खेल मंत्रालय द्वारा मतदाता जागरूकता में भागीदारी दर्शाती है कि निर्वाचन से जुड़े विषय अब कई मंत्रालयों और संस्थाओं के सहयोग से देखे जा रहे हैं।
- निर्वाचन आयोग द्वारा संचालित मतदाता शिक्षा कार्यक्रमों के पूरक के रूप में ऐसे अभियान सहभागी लोकतंत्र का ढांचा मजबूत करते हैं।
युवा नीति और खेल
- खेल हस्तियों की भागीदारी से अनुशासन, आत्मविश्वास और नागरिक मूल्यों को जोड़ने का प्रयास हुआ, जो युवा नीति के व्यापक उद्देश्यों से मेल खाता है।
चुनौतियाँ
1. प्रभाव मापन की चुनौती
- स्रोत में पहुंच के आंकड़े (1 लाख से अधिक युवा, 536 संवाद) दिए गए हैं, परंतु मतदान व्यवहार में वास्तविक बदलाव के आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं।
- केवल संख्या आधारित पहुंच और वास्तविक जागरूकता के बीच अंतर को मापने के लिए आधारभूत सर्वेक्षण और अनुवर्ती मूल्यांकन आवश्यक है।
यूपीएससी लिंक: GS-2: शासन में कल्याणकारी योजनाओं और कार्यक्रमों का मूल्यांकन
2. सूचना की विश्वसनीयता
- डिजिटल माध्यमों पर भ्रामक सूचनाएं मतदाता के निर्णय को प्रभावित कर सकती हैं।
- सत्रों में प्रामाणिक स्रोतों से जानकारी सत्यापित करने पर बल दिया गया, जो इस चुनौती का व्यावहारिक उत्तर है।
यूपीएससी लिंक: GS-2: लोकतांत्रिक संस्थाएं और जन-जागरूकता
3. मतदाता सूची में नामांकन और पहुंच का अंतर
- पहली बार मतदान करने वाले युवाओं का मतदाता सूची में नामांकन होना मताधिकार के प्रयोग की पूर्व शर्त है।
- कॉलेज केंद्रित पहुंच से वे युवा छूट सकते हैं जो शिक्षा या रोजगार के कारण शैक्षणिक संस्थानों से बाहर हैं।
यूपीएससी लिंक: GS-2: निर्वाचन प्रक्रिया और मतदाता सूची का प्रबंधन
4. पहुंच में क्षेत्रीय असमानता
- राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में आयोजनों की संख्या और भागीदारी में अंतर स्वाभाविक है, जिससे दूरस्थ और ग्रामीण क्षेत्रों की भागीदारी सीमित रह सकती है।
- भाषा और स्थानीय संदर्भ के अनुरूप सामग्री के बिना संदेश का प्रभाव घट सकता है।
यूपीएससी लिंक: GS-1 और GS-2: क्षेत्रीय असमानता और समावेशी विकास
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| Issue | Concern |
|---|---|
| प्रभाव का मापन | पहुंच के आंकड़ों से वास्तविक मतदान व्यवहार में बदलाव का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता |
| भ्रामक सूचना | डिजिटल माध्यमों पर गलत जानकारी से सूचित निर्णय प्रभावित हो सकता है |
| मतदाता सूची में नामांकन | पहली बार मतदाता बनने वाले युवाओं का नामांकन न होने पर मताधिकार का प्रयोग सीमित रहता है |
| संस्थागत पहुंच की सीमा | कॉलेज केंद्रित कार्यक्रमों से शैक्षणिक संस्थानों से बाहर के युवा छूट सकते हैं |
| क्षेत्रीय असमानता | दूरस्थ और ग्रामीण क्षेत्रों में आयोजनों और संसाधनों की कमी असमान भागीदारी का कारण बन सकती है |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- मेरा युवा भारत (माय भारत) (MY Bharat)
- खेलो इंडिया (Khelo India)
आगे की राह
- अभियान के बाद आधारभूत और अनुवर्ती सर्वेक्षण कर जागरूकता में वास्तविक बदलाव का मूल्यांकन किया जाए।
- पहली बार मतदाता बनने वाले युवाओं के मतदाता सूची में नामांकन की प्रक्रिया को शैक्षणिक संस्थानों के माध्यम से सरल बनाया जाए।
- निर्वाचन आयोग के मतदाता शिक्षा कार्यक्रमों के साथ तालमेल बनाकर स्थानीय भाषाओं में सामग्री तैयार की जाए।
- कॉलेज के बाहर के युवाओं, जैसे स्वयं सहायता समूहों, श्रमिक वर्ग और ग्रामीण युवाओं तक पहुंचने के लिए सामुदायिक माध्यमों का उपयोग हो।
- सूचना-सत्यापन पर केंद्रित डिजिटल साक्षरता को पाठ्यक्रम और युवा कार्यक्रमों में नियमित रूप से शामिल किया जाए।
- दूरस्थ और पिछड़े क्षेत्रों में आयोजनों के लिए अधिक संसाधन और स्थानीय सहभागिता सुनिश्चित की जाए।
- राजनीतिक तटस्थता बनाए रखते हुए मतदान को नागरिक कर्तव्य के रूप में स्थापित करने वाली शिक्षा को निरंतर बढ़ाया जाए।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
मतदाता शिक्षा (Voter Education) · निर्वाचन सहभागिता (Electoral Participation) · वयस्क मताधिकार (Adult Suffrage) · अनुच्छेद 326 (Article 326) · भारत निर्वाचन आयोग (Election Commission of India) · व्यवस्थित मतदाता शिक्षा एवं निर्वाचन सहभागिता (SVEEP) · राष्ट्रीय मतदाता दिवस (National Voters’ Day) · सहभागी लोकतंत्र (Participatory Democracy) · पहली बार मतदान करने वाले युवा (First-time Voters) · अनिवार्य मतदान (Compulsory Voting) · सूचित मतदान (Informed Voting) · नागरिक कर्तव्य (Civic Duties)
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- अनुच्छेद 326: वयस्क मताधिकार, 18 वर्ष आयु का मतदाता
- अनुच्छेद 324: निर्वाचन आयोग में निर्वाचनों के अधीक्षण का अधिकार
अवधारणा प्रवाह
युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय द्वारा मेरा युवा भारत के माध्यम से अभियान की योजना और समन्वय → 26 अक्टूबर से 5 नवंबर 2026 तक देश भर के कॉलेजों और संस्थानों में संवाद सत्रों का आयोजन → राज्यपाल, मंत्री, सांसद और खेल-युवा हस्तियों की सहभागिता से प्रत्यक्ष चर्चा और प्रश्नोत्तर → प्रामाणिक स्रोतों से जानकारी सत्यापित करने और सूचित निर्णय लेने पर बल → पहली बार मतदाता युवाओं में मताधिकार और निर्वाचन प्रक्रिया की समझ का विकास → माय इंडिया पोर्टल पर पंजीकरण और लोकतांत्रिक प्रतिज्ञा से सहभागी लोकतंत्र में जिम्मेदार भागीदारी
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान का अनुच्छेद 326 लोकसभा और विधानसभाओं के निर्वाचन का आधार वयस्क मताधिकार घोषित करता है।
2. मतदान की न्यूनतम आयु 61वें संविधान संशोधन, 1988 द्वारा 21 वर्ष से घटाकर 18 वर्ष की गई।
3. मतदान का अधिकार संविधान के भाग III में मौलिक अधिकार के रूप में सूचीबद्ध है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- केवल तीन
- सभी चार
उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है: अनुच्छेद 326 वयस्क मताधिकार का प्रावधान करता है। कथन 2 सही है: 61वें संविधान संशोधन (1988) से मतदान आयु 18 वर्ष हुई। कथन 3 गलत है: मतदान का अधिकार भाग III में मौलिक अधिकार नहीं है; यह संवैधानिक-सांविधिक अधिकार है, जिसका विनियमन जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 और 1951 करते हैं।
Q2. निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही है?
अभिकथन (A): भारत में मतदान का अधिकार संवैधानिक अधिकार तो है, किन्तु मौलिक अधिकार नहीं है।
कारण (R): अनुच्छेद 326 वयस्क मताधिकार की व्यवस्था करता है, जबकि भाग III में मताधिकार को मौलिक अधिकारों की सूची में नहीं रखा गया है।
विकल्प:
- (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या है
- (A) और (R) दोनों सही हैं, किन्तु (R), (A) की सही व्याख्या नहीं है
- (A) सही है, किन्तु (R) गलत है
- (A) गलत है, किन्तु (R) सही है
उत्तर: (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या है — अभिकथन सही है: मताधिकार अनुच्छेद 326 और जन प्रतिनिधित्व अधिनियमों से नियंत्रित सांविधिक-संवैधानिक अधिकार है। कारण भी सही है और अभिकथन की सही व्याख्या करता है, क्योंकि मौलिक अधिकारों की सूची में मताधिकार नहीं है।
Q3. राष्ट्रीय मतदाता दिवस (National Voters’ Day) प्रतिवर्ष 25 जनवरी को मनाया जाता है। यह दिवस किस घटना की स्मृति में है?
- भारत निर्वाचन आयोग की स्थापना
- पहले आम चुनाव की घोषणा
- लोकसभा का पहला अधिवेशन
- जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 का लागू होना
उत्तर: भारत निर्वाचन आयोग की स्थापना — 25 जनवरी 1950 को भारत निर्वाचन आयोग की स्थापना हुई थी, इसी स्मृति में राष्ट्रीय मतदाता दिवस मनाया जाता है। अन्य विकल्प इस तिथि से संबंधित नहीं हैं।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ भारत में युवा मतदाताओं की सहभागिता को केवल मतदाता-पंजीकरण बढ़ाने तक सीमित नहीं रखा जा सकता। मतदाता शिक्षा कार्यक्रमों की भूमिका का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। क्या अनिवार्य मतदान इस समस्या का उचित समाधान है? तर्क दीजिए। (15 Marks)
रूपरेखा: उत्तर संरचना: (1) भूमिका: वयस्क मताधिकार और सहभागी लोकतंत्र की अवधारणा; अनुच्छेद 326 के अंतर्गत 18 वर्ष आयु (61वां संविधान संशोधन, 1988); मताधिकार का स्वरूप सांविधिक है, जिसे जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 (मतदाता सूची) और जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 नियंत्रित करते हैं। (2) मतदाता शिक्षा की संस्थागत व्यवस्था: अनुच्छेद 324 के अंतर्गत भारत निर्वाचन आयोग की अधीक्षण शक्ति; व्यवस्थित मतदाता शिक्षा एवं निर्वाचन सहभागिता (SVEEP) कार्यक्रम; राष्ट्रीय मतदाता दिवस (25 जनवरी, आयोग की स्थापना की स्मृति); फॉर्म 6 द्वारा नए मतदाता का पंजीकरण; EPIC और मतदाता सूची का सत्यापन। (3) समालोचनात्मक परीक्षण: पंजीकरण और जागरूकता अभियानों के बावजूद मतदान-दिवस पर सहभागिता में अंतर; मतदाता सूची से नाम कटने, पते में परिवर्तन और शहरी प्रवास जैसी व्यावहारिक बाधाएँ; सूचना के सत्यापन की क्षमता, क्योंकि जागरूकता का मूल्य तभी है जब जानकारी प्रामाणिक स्रोतों से प्राप्त हो; कॉलेज-आधारित संवाद की सीमा कि वह शिक्षा-संस्थानों से बाहर के युवाओं तक कम पहुँचता है। (4) अनिवार्य मतदान पर संतुलित दृष्टि: पक्ष में—ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों का अनुभव और उच्च सहभागिता; विपक्ष में—जे.एस. मिल के प्रतिनिधि शासन विमर्श के अनुसार सहभागिता स्वैच्छिक और जागरूक होनी चाहिए; अनुच्छेद 19(1)(a) के अंतर्गत न मतदान करने की नकारात्मक स्वतंत्रता; PUCL बनाम भारत संघ (2013) में नकारात्मक मताधिकार (NOTA) की मान्यता; गुजरात स्थानीय निकाय कानून (2009) में अनिवार्य मतदान का प्रावधान, जो व्यवहार में व्यापक रूप से लागू नहीं हुआ। (5) निष्कर्ष: मतदाता शिक्षा को सतत, सूचना-सत्यापन और नागरिक कर्तव्य के समन्वित ढाँचे में देखना; अनिवार्य मतदान के बजाय सहभागिता की गुणवत्ता और प्रवेश-बाधाओं (पंजीकरण, प्रवास, पहुँच) को दूर करने पर बल देना, साथ में प्रामाणिक तथ्यों पर आधारित संवाद को बढ़ावा देना।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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