अंतर्देशीय जलमार्ग विकास: सरकार की नई पहल और पीएम गति शक्ति में एकीकरण

अंतर्देशीय जलमार्ग विकास: सरकार की नई पहल और पीएम गति शक्ति में एकीकरण — अंतर्देशीय जलमार्ग विकास के प्रमुख चरण

अंतर्देशीय जलमार्ग विकास: सरकार की नई पहल और पीएम गति शक्ति में एकीकरण

विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper I — भूगोल (भारत का भौतिक भूगोल, संसाधन)  |  GS Paper III — अर्थव्यवस्था (बुनियादी ढाँचा, परिवहन, रसद दक्षता, पर्यावरणीय अर्थशास्त्र)  |  GS Paper III — पर्यावरण (प्रदूषण नियंत्रण, हरित ऊर्जा)
  • Prelims: अंतर्देशीय जल परिवहन (IWT), राष्ट्रीय जलमार्ग (NW), भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण (IWAI), मैरीटाइम इंडिया विजन 2030, पीएम गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान, जलवाहक योजना, टन भार कर, भारत-बांग्लादेश प्रोटोकॉल (IBP) मार्ग, PANI पोर्टल, जलयान और नाविक पोर्टल
  • Essay: भारत के आर्थिक विकास में अवसंरचना का महत्व: अंतर्देशीय जलमार्गों के विशेष संदर्भ में, सतत परिवहन प्रणाली और भारत का भविष्य: चुनौतियाँ एवं अवसर

त्वरित पुनरावृत्ति: भारत में अंतर्देशीय जलमार्गों का विकास रसद लागत को कम करने, हरित गतिशीलता को बढ़ावा देने और समावेशी आर्थिक विकास को गति देने के लिए एक रणनीतिक पहल है, जिसमें अवसंरचना, डिजिटल और नीतिगत सुधारों पर ध्यान केंद्रित किया गया है।

यह खबर चर्चा में क्यों?

भारत सरकार ने मैरीटाइम इंडिया विजन 2030 और मैरीटाइम अमृत काल विजन 2047 के अंतर्गत अंतर्देशीय जल परिवहन (IWT) को देश की बहुआयामी परिवहन प्रणाली का एक प्रमुख स्तंभ बनाने के लिए एक परिवर्तनकारी अभियान शुरू किया है। पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय के तहत भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण (IWAI) द्वारा जलमार्गों के विकास, डिजिटल नवाचारों और नीतिगत सुधारों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, जिसका उद्देश्य विश्व स्तरीय जलमार्ग अवसंरचना का निर्माण करना और रसद लागत को कम करना है।

पृष्ठभूमि

  • भारत में परिवहन व्यवस्था मुख्य रूप से सड़क और रेल पर निर्भर है, जिससे भीड़भाड़ और उच्च रसद लागत की समस्याएँ उत्पन्न होती हैं।
  • अंतर्देशीय जलमार्ग परिवहन का एक किफायती और पर्यावरण के अनुकूल साधन है, जिसमें देश की रसद दक्षता में सुधार करने की अपार क्षमता है।
  • सरकार ने ‘मैरीटाइम इंडिया विजन 2030’ और ‘मैरीटाइम अमृत काल विजन 2047’ जैसे महत्वाकांक्षी लक्ष्यों के माध्यम से जलमार्गों के विकास को प्राथमिकता दी है।
  • पीएम गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के तहत विभिन्न परिवहन माध्यमों के निर्बाध एकीकरण पर जोर दिया गया है, जिसमें अंतर्देशीय जलमार्ग भी शामिल हैं।
  • भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण (IWAI) पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय के अंतर्गत एक स्वायत्त संगठन है, जो राष्ट्रीय जलमार्गों के विकास और विनियमन के लिए जिम्मेदार है।
  • देश में 32 राष्ट्रीय जलमार्गों पर परिचालन शुरू हो गया है, जो प्रौद्योगिकी-संचालित और प्रतिस्पर्धी जलमार्ग इकोसिस्टम की नींव रख रहा है।

अंतर्देशीय जलमार्ग और इनसे जुड़ी परियोजनाएँ

  • अंतर्देशीय जलमार्ग (IWT) नदियों, नहरों, झीलों और ज्वारीय खाड़ियों जैसे आंतरिक जल निकायों का उपयोग करके माल और यात्रियों के परिवहन को संदर्भित करता है।
  • यह परिवहन का एक लागत प्रभावी और पर्यावरण के अनुकूल साधन है, जो सड़क और रेल परिवहन की तुलना में कम ईंधन खपत और कम उत्सर्जन करता है।
  • भारत में राष्ट्रीय जलमार्गों (NW) की पहचान भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण अधिनियम, 1985 के तहत की जाती है और इनका विकास व विनियमन भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण (IWAI) द्वारा किया जाता है।
  • सरकार का लक्ष्य जलमार्ग विकास, बहुआयामी टर्मिनल, सामुदायिक जेट्टी, नदी क्रूज टर्मिनल और हरित पोत प्रौद्योगिकी के माध्यम से विश्व स्तरीय जलमार्ग अवसंरचना का निर्माण करना है।
  • डिजिटल सुधारों में PANI (परिसंपत्ति एवं नौपरिवहन सूचना पोर्टल), जलयान और नाविक पोर्टल (जहाज और चालक दल के ऑनलाइन पंजीकरण के लिए), CAR-D (कार्गो डेटा पोर्टल) और जल समृद्धि पोर्टल शामिल हैं, जो ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ को बढ़ावा देते हैं।
  • आर्थिक विश्लेषण से पता चलता है कि IWT की माल ढुलाई लागत (₹1.06 प्रति टन-किलोमीटर) रेलवे (₹1.36) और सड़क (₹2.50) की तुलना में काफी कम है।
  • पर्यावरणीय रूप से, IWT का ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन और वायु प्रदूषण लागत सड़क परिवहन से काफी कम है, और ध्वनि, मृदा व जल प्रदूषण पर इसका नगण्य प्रभाव पड़ता है।
  • नीतिगत उपायों में ‘जलवाहक योजना’ शामिल है, जो भारत-बांग्लादेश प्रोटोकॉल (IBP) मार्ग पर माल ढुलाई के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करती है।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
विश्व स्तरीय जलमार्ग इंफ्रास्ट्रक्चर का निर्माण जलमार्ग विकास, बहुआयामी टर्मिनल, सामुदायिक जेट्टी, नदी क्रूज टर्मिनल और हरित पोत प्रौद्योगिकी के माध्यम से परिवहन क्षमता में वृद्धि।
डिजिटल नेविगेशन उपकरण नाविकों की सुरक्षा में सुधार और नौपरिवहन को अधिक कुशल बनाने के लिए आधुनिक हाइड्रोग्राफिक चार्ट और डिजिटल उपकरण।
पीएम गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के साथ एकीकरण परिवहन के विभिन्न साधनों के बीच निर्बाध कनेक्टिविटी और रसद दक्षता में सुधार।
डिजिटल सुधार (PANI, जलयान और नाविक, CAR-D, जल समृद्धि पोर्टल) व्यवसाय करने में आसानी (Ease of Doing Business) को बढ़ावा देना, मंजूरी प्रक्रियाओं को सरल बनाना और सटीक डेटा ट्रैकिंग सुनिश्चित करना।
रसद दक्षता एवं पर्यावरणीय तुलनात्मक विश्लेषण रेल और सड़क परिवहन की तुलना में कम लागत और कम ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन के साथ पर्यावरण-अनुकूल परिवहन विकल्प।
टन भार कर का विस्तार अंतर्देशीय पोतों के लिए स्थिर, पूर्वानुमानित और कम कर भार सुनिश्चित करना, जिससे उद्योग को प्रोत्साहन मिलेगा।

महत्व

आर्थिक महत्व

  • अंतर्देशीय जल परिवहन (IWT) सड़क और रेल परिवहन की तुलना में काफी किफायती है, जिससे माल ढुलाई लागत कम होती है।
  • कम रसद लागत से भारतीय उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ती है, जिससे निर्यात को बढ़ावा मिलता है।
  • जलमार्गों के विकास से नए रोजगार के अवसर सृजित होते हैं, विशेषकर टर्मिनल संचालन, नौपरिवहन और संबद्ध सेवाओं में।

पर्यावरणीय महत्व

  • अंतर्देशीय जल परिवहन में सड़क और रेल की तुलना में ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन काफी कम होता है, जिससे जलवायु परिवर्तन से निपटने में मदद मिलती है।
  • यह वायु, ध्वनि, मृदा और जल प्रदूषण पर नगण्य प्रभाव डालता है, जिससे पर्यावरण संरक्षण में योगदान मिलता है।
  • मौजूदा परिवहन नेटवर्क पर भीड़भाड़ कम करके कार्बन पदचिह्न को कम करने में सहायक।

रणनीतिक महत्व

  • परिवहन के एक वैकल्पिक साधन के रूप में अंतर्देशीय जलमार्ग राष्ट्रीय परिवहन प्रणाली को अधिक लचीला और मजबूत बनाते हैं।
  • यह भारत के भीतरी इलाकों को बंदरगाहों से जोड़कर व्यापार और वाणिज्य को सुगम बनाता है, विशेषकर सीमावर्ती क्षेत्रों में।
  • डिजिटल नेविगेशन और हरित पोत प्रौद्योगिकी का उपयोग भारत को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी जलमार्ग इकोसिस्टम बनाने में मदद करता है।

सामाजिक महत्व

  • सामुदायिक जेट्टी और नदी क्रूज टर्मिनल जैसे इंफ्रास्ट्रक्चर से स्थानीय समुदायों को लाभ होता है और पर्यटन को बढ़ावा मिलता है।
  • बेहतर कनेक्टिविटी से दूरदराज के क्षेत्रों तक पहुंच बढ़ती है, जिससे समावेशी विकास को गति मिलती है।
  • सुरक्षित और कुशल जलमार्ग परिवहन से लोगों और सामानों की आवाजाही आसान होती है।

चुनौतियाँ

1. सीमित गहराई और गाद जमाव

  • कई राष्ट्रीय जलमार्गों पर पूरे वर्ष पर्याप्त गहराई बनाए रखना एक चुनौती है, खासकर शुष्क मौसम में।
  • गाद जमाव (Siltation) नौपरिवहन में बाधा डालता है और नियमित ड्रेजिंग की आवश्यकता होती है, जो महंगा है।

2. मौसमी निर्भरता

  • नदियों में पानी का स्तर मानसून पर निर्भर करता है, जिससे गैर-मानसून महीनों में नौपरिवहन क्षमता प्रभावित होती है।
  • बाढ़ और सूखे जैसी मौसमी घटनाएं जलमार्गों के संचालन को बाधित कर सकती हैं।

3. कनेक्टिविटी का अभाव

  • अंतिम-मील कनेक्टिविटी (Last-mile connectivity) की कमी के कारण जलमार्गों से माल को सड़क या रेल तक ले जाने में अतिरिक्त लागत और समय लगता है।
  • बहुआयामी टर्मिनलों (Multimodal terminals) का अपर्याप्त विकास समग्र रसद दक्षता को प्रभावित करता है।

4. निजी क्षेत्र की भागीदारी

  • जलमार्ग इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास और संचालन में निजी क्षेत्र की भागीदारी अभी भी सीमित है।
  • निवेश के लिए आकर्षक प्रोत्साहन और स्पष्ट नियामक ढाँचे की आवश्यकता है।

5. तकनीकी और कौशल संबंधी बाधाएँ

  • आधुनिक पोतों और डिजिटल नेविगेशन प्रणालियों के संचालन के लिए प्रशिक्षित जनशक्ति की कमी।
  • नई प्रौद्योगिकियों को अपनाने और रखरखाव के लिए तकनीकी विशेषज्ञता की आवश्यकता।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
जलमार्गों की गहराई कई राष्ट्रीय जलमार्गों पर पूरे वर्ष पर्याप्त गहराई बनाए रखना मुश्किल, जिससे बड़े पोतों का संचालन बाधित होता है।
गाद और अवसादन नदियों में गाद जमाव नौपरिवहन चैनलों को अवरुद्ध करता है, जिसके लिए निरंतर ड्रेजिंग की आवश्यकता होती है।
अंतिम-मील कनेक्टिविटी जलमार्गों को प्रमुख उत्पादन और उपभोग केंद्रों से जोड़ने वाले सड़क/रेल नेटवर्क का अभाव।
पर्यावरणीय प्रभाव ड्रेजिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर निर्माण से जलीय पारिस्थितिकी तंत्र पर संभावित नकारात्मक प्रभाव।
नियामक और संस्थागत ढाँचा विभिन्न मंत्रालयों और राज्यों के बीच समन्वय की कमी से परियोजनाओं के कार्यान्वयन में देरी।
वित्तपोषण और निवेश जलमार्ग इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास के लिए पर्याप्त और सतत वित्तपोषण सुनिश्चित करना।

सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें

  • मैरीटाइम इंडिया विजन 2030
  • मैरीटाइम अमृत काल विजन 2047
  • पीएम गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान
  • जलवाहक योजना

आगे की राह

  • जलमार्गों की गहराई बनाए रखने के लिए उन्नत ड्रेजिंग तकनीकों का उपयोग करना और गाद प्रबंधन रणनीतियों को लागू करना।
  • बहुआयामी टर्मिनलों और अंतिम-मील कनेक्टिविटी को मजबूत करने के लिए पीएम गति शक्ति के तहत एकीकृत योजना बनाना।
  • निजी क्षेत्र की भागीदारी को बढ़ावा देने के लिए आकर्षक निवेश मॉडल, कर प्रोत्साहन और स्पष्ट नियामक ढाँचा विकसित करना।
  • हरित पोत प्रौद्योगिकी और डिजिटल नेविगेशन उपकरणों को अपनाने के लिए अनुसंधान एवं विकास में निवेश करना।
  • जलमार्ग क्षेत्र में आवश्यक कौशल विकास कार्यक्रमों को बढ़ावा देना और प्रशिक्षित जनशक्ति तैयार करना।
  • अंतर-राज्यीय और केंद्र-राज्य समन्वय को मजबूत करना ताकि परियोजनाओं के कार्यान्वयन में तेजी लाई जा सके।
  • पर्यावरणीय प्रभाव आकलन (Environmental Impact Assessment) को मजबूत करना और सतत विकास प्रथाओं को अपनाना।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

अंतर्देशीय जलमार्ग · मैरीटाइम इंडिया विजन 2030 · मैरीटाइम अमृत काल विजन 2047 · PM गति शक्ति · राष्ट्रीय जलमार्ग · अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण (IWAI) · बहुआयामी परिवहन प्रणाली · लॉजिस्टिक्स लागत · हरित गतिशीलता · जलवाहक योजना · टन भार कर · डिजिटल सुधार

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 246’, ‘note’: ‘संसद को संघ सूची पर कानून बनाने का अधिकार’}
  • {‘article’: ‘सातवीं अनुसूची (संघ सूची)’, ‘note’: ‘राष्ट्रीय जलमार्गों पर संघ का विधायी अधिकार’}

अवधारणा प्रवाह

सरकार द्वारा अंतर्देशीय जलमार्गों के विकास पर ध्यान केंद्रित करना  →  मैरीटाइम इंडिया विजन 2030 और 2047 जैसे कार्यक्रमों की शुरुआत  →  जलमार्ग इंफ्रास्ट्रक्चर (टर्मिनल, जेट्टी) और डिजिटल उपकरण (PANI, CAR-D) का विकास  →  रसद लागत में कमी, पर्यावरणीय लाभ और आर्थिक संवृद्धि को बढ़ावा  →  राष्ट्रीय परिवहन प्रणाली का विविधीकरण और सुदृढ़ीकरण

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. अंतर्देशीय जल परिवहन (IWT) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
1. अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण (IWAI) पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय के अंतर्गत एक स्वायत्त संगठन है।
2. ‘जलयान और नाविक’ पोर्टल का उद्देश्य पूरे देश में जहाज और चालक दल के ऑनलाइन पंजीकरण के लिए एक केंद्रीकृत डेटाबेस प्रदान करना है।
3. ‘जलवाहक योजना’ राष्ट्रीय जलमार्गों पर माल ढुलाई के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करती है।
उपरोक्त कथनों में से कितने सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. सभी तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: सभी तीन — कथन 1 सही है क्योंकि IWAI पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय के अंतर्गत एक स्वायत्त संगठन है। कथन 2 भी सही है क्योंकि ‘जलयान और नाविक’ पोर्टल जहाज और चालक दल के ऑनलाइन पंजीकरण के लिए है। कथन 3 भी सही है क्योंकि ‘जलवाहक योजना’ माल ढुलाई के लिए वित्तीय मदद प्रदान करती है।

Q2. भारत में विभिन्न परिवहन माध्यमों की लॉजिस्टिक्स लागत (प्रति टन-किलोमीटर) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
1. अंतर्देशीय जल परिवहन (IWT) की लागत रेलवे की तुलना में अधिक है।
2. सड़क परिवहन की लागत अंतर्देशीय जल परिवहन और रेलवे दोनों से अधिक है।
3. ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन के मामले में, अंतर्देशीय जल परिवहन सड़क परिवहन की तुलना में काफी कम उत्सर्जन करता है।
उपरोक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

  1. केवल 1 और 2
  2. केवल 2 और 3
  3. केवल 3
  4. 1, 2 और 3

उत्तर: केवल 2 और 3 — कथन 1 गलत है क्योंकि IWT (1.06 रुपये/टीकेएम) की लागत रेलवे (1.36 रुपये/टीकेएम) से कम है। कथन 2 सही है क्योंकि सड़क परिवहन (2.50 रुपये/टीकेएम) की लागत IWT और रेलवे दोनों से अधिक है। कथन 3 सही है क्योंकि IWT का ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन सड़क परिवहन की तुलना में काफी कम है।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ भारत में अंतर्देशीय जलमार्गों के विकास के महत्व और इससे जुड़ी प्रमुख पहलों का समालोचनात्मक विश्लेषण कीजिए। यह देश की लॉजिस्टिक्स दक्षता और पर्यावरणीय स्थिरता में कैसे योगदान दे सकता है? (250 शब्द)

रूपरेखा: प्रश्न के पहले भाग में अंतर्देशीय जलमार्गों के महत्व पर प्रकाश डालें, जैसे कि लागत-प्रभावशीलता, पर्यावरण-मित्रता और भीड़भाड़ कम करना। दूसरे भाग में, मैरीटाइम इंडिया विजन 2030, PM गति शक्ति, IWAI की भूमिका, डिजिटल सुधार (PANI, जलयान और नाविक, CAR-D, जल समृद्धि) और ‘जलवाहक योजना’ जैसी प्रमुख पहलों का उल्लेख करें। अंत में, लॉजिस्टिक्स लागत में कमी, हरित गतिशीलता को बढ़ावा देने और समावेशी आर्थिक विकास के माध्यम से लॉजिस्टिक्स दक्षता और पर्यावरणीय स्थिरता में इसके योगदान को स्पष्ट करें।

स्रोत: PIB (Press Information Bureau)


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

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