अंतर्देशीय जलमार्ग विकास: भारत की परिवहन क्रांति की आधारशिला 2026-27

अंतर्देशीय जलमार्ग विकास: भारत की परिवहन क्रांति की आधारशिला 2026-27

विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper I — भूगोल (भारत का भौतिक भूगोल, संसाधन)  |  GS Paper III — अर्थव्यवस्था (बुनियादी ढाँचा, परिवहन, आर्थिक विकास), पर्यावरण (प्रदूषण, जलवायु परिवर्तन)
  • Prelims: अंतर्देशीय जल परिवहन (IWT), राष्ट्रीय जलमार्ग (NW), भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण (IWAI), मैरीटाइम इंडिया विजन 2030, पीएम गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान, जलवाहक योजना, टन भार कर, PANI पोर्टल, जलयान और नाविक पोर्टल, CAR-D पोर्टल
  • Essay: भारत के आर्थिक विकास में अवसंरचना का महत्व: अंतर्देशीय जलमार्गों के विशेष संदर्भ में, सतत परिवहन प्रणाली: पर्यावरण संरक्षण और आर्थिक दक्षता के बीच संतुलन

त्वरित पुनरावृत्ति: अंतर्देशीय जलमार्गों का विकास भारत में आर्थिक दक्षता बढ़ाने, रसद लागत कम करने और पर्यावरण-अनुकूल परिवहन को बढ़ावा देने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है, जिसे पीएम गति शक्ति जैसे राष्ट्रीय मास्टर प्लान के तहत एकीकृत किया जा रहा है।

यह खबर चर्चा में क्यों?

भारत सरकार ने मैरीटाइम इंडिया विजन 2030 और मैरीटाइम अमृत काल विजन 2047 के तहत अंतर्देशीय जल परिवहन (IWT) को देश की बहुआयामी परिवहन प्रणाली का एक प्रमुख स्तंभ बनाने के लिए एक परिवर्तनकारी अभियान शुरू किया है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य विश्व स्तरीय जलमार्ग अवसंरचना का निर्माण करना, डिजिटल नेविगेशन उपकरणों को बढ़ावा देना और हरित पोत प्रौद्योगिकी को अपनाना है, जिससे देश भर में 32 राष्ट्रीय जलमार्गों पर परिचालन शुरू हो सके और रसद लागत कम हो।

पृष्ठभूमि

  • भारत में अंतर्देशीय जलमार्गों का एक विशाल नेटवर्क है, जिसमें नदियाँ, नहरें, बैकवाटर और खाड़ियाँ शामिल हैं, जिनकी कुल नौगम्य लंबाई लगभग 14,500 किलोमीटर है।
  • हालांकि, इस क्षमता का उपयोग ऐतिहासिक रूप से सड़क और रेल परिवहन की तुलना में कम हुआ है, जिससे परिवहन लागत अधिक रही है और पर्यावरणीय प्रभाव भी बढ़ा है।
  • सरकार ने ‘मैरीटाइम इंडिया विजन 2030’ और ‘मैरीटाइम अमृत काल विजन 2047’ जैसे दूरदर्शी कार्यक्रमों के माध्यम से अंतर्देशीय जल परिवहन को पुनर्जीवित करने का लक्ष्य रखा है।
  • पीएम गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के तहत, विभिन्न परिवहन माध्यमों के बीच निर्बाध एकीकरण सुनिश्चित करने पर जोर दिया जा रहा है, जिसमें अंतर्देशीय जलमार्ग भी शामिल हैं।
  • भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण (IWAI) पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय के तहत राष्ट्रीय जलमार्गों के विकास और विनियमन के लिए जिम्मेदार स्वायत्त संगठन है।
  • रसद लागत कम करने, हरित गतिशीलता को बढ़ावा देने और समावेशी आर्थिक विकास को गति देने के लिए अंतर्देशीय जलमार्गों का विकास महत्वपूर्ण माना जाता है।

अंतर्देशीय जल परिवहन (IWT) और संबंधित पहलें

  • अंतर्देशीय जल परिवहन (IWT) नदियों, नहरों और अन्य आंतरिक जल निकायों के माध्यम से माल और यात्रियों की आवाजाही को संदर्भित करता है। यह सड़क और रेल परिवहन का एक किफायती और पर्यावरण के अनुकूल विकल्प है।
  • मैरीटाइम इंडिया विजन 2030 और मैरीटाइम अमृत काल विजन 2047: ये भारत के समुद्री क्षेत्र के समग्र विकास के लिए सरकार के महत्वाकांक्षी रोडमैप हैं, जिनमें IWT को एक प्रमुख घटक के रूप में शामिल किया गया है।
  • डिजिटल सुधार: ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ को बढ़ावा देने के लिए IWAI ने कई डिजिटल पोर्टल लॉन्च किए हैं, जैसे PANI (परिसंपत्ति एवं नौपरिवहन सूचना), जलयान और नाविक पोर्टल, CAR-D (कार्गो डेटा पोर्टल) और जल समृद्धि पोर्टल।
  • आर्थिक दक्षता: IWT की माल ढुलाई लागत (1.06 रुपये प्रति टन-किलोमीटर) रेलवे (1.36 रुपये) और सड़क परिवहन (2.50 रुपये) की तुलना में काफी कम है, जिससे रसद लागत में कमी आती है।
  • पर्यावरणीय लाभ: IWT का ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन और वायु प्रदूषण लागत सड़क परिवहन की तुलना में काफी कम है। इसका ध्वनि, मृदा और जल प्रदूषण पर भी नगण्य प्रभाव पड़ता है।
  • नीतिगत उपाय: ‘जलवाहक योजना’ भारत-बांग्लादेश प्रोटोकॉल (IBP) मार्ग पर माल ढुलाई के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करती है।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
विश्व स्तरीय जलमार्ग इंफ्रास्ट्रक्चर जलमार्गों का विकास, बहुआयामी टर्मिनल, सामुदायिक जेट्टी, नदी क्रूज टर्मिनल, क्षेत्रीय उत्कृष्टता केंद्र, डिजिटल नेविगेशन उपकरण और हरित पोत प्रौद्योगिकी के माध्यम से परिवहन क्षमता में वृद्धि।
पीएम गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के साथ एकीकरण परिवहन के विभिन्न साधनों के बीच निर्बाध कनेक्टिविटी सुनिश्चित करना, जिससे रसद दक्षता में सुधार हो।
डिजिटल सुधार (PANI, जलयान और नाविक, CAR-D, जल समृद्धि पोर्टल) ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को बढ़ावा देना, मंजूरी प्रक्रियाओं को सरल बनाना, सटीक ट्रैकिंग और रणनीतिक योजना को सक्षम करना।
राष्ट्रीय जलमार्गों का विकास और विनियमन अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण (IWAI) द्वारा देश भर में 32 राष्ट्रीय जलमार्गों का संचालन, जिससे परिवहन नेटवर्क का विस्तार होता है।
आर्थिक और पर्यावरणीय लाभ रेल और सड़क परिवहन की तुलना में किफायती माल ढुलाई लागत, कम ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन और न्यूनतम प्रदूषण।
नीतिगत उपाय (जलवाहक योजना, टन भार कर का विस्तार, राष्ट्रीय जलमार्ग विनियम 2025) अंतर्देशीय जल परिवहन को वित्तीय सहायता, कर प्रोत्साहन और नियामक स्पष्टता प्रदान करना, जिससे क्षेत्र में निवेश और संचालन को बढ़ावा मिले।

महत्व

आर्थिक महत्व

  • अंतर्देशीय जल परिवहन (IWT) सड़क और रेल परिवहन की तुलना में काफी अधिक किफायती है, जिससे माल ढुलाई लागत कम होती है। यह व्यापार और उद्योग के लिए प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाता है।
  • बेहतर कनेक्टिविटी और कम रसद लागत से नए बाजारों तक पहुंच बढ़ती है, जिससे क्षेत्रीय आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलता है।
  • टन भार कर का विस्तार और जलवाहक योजना जैसी पहलें निजी निवेश को आकर्षित करती हैं और क्षेत्र में रोजगार सृजन को बढ़ावा देती हैं।

पर्यावरणीय महत्व

  • IWT में सड़क और रेल परिवहन की तुलना में प्रति टन-किलोमीटर ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन काफी कम होता है, जिससे भारत के जलवायु परिवर्तन लक्ष्यों को प्राप्त करने में मदद मिलती है।
  • यह वायु, ध्वनि, मृदा और जल प्रदूषण पर नगण्य प्रभाव डालता है, जिससे पर्यावरणीय स्थिरता को बढ़ावा मिलता है।
  • मौजूदा परिवहन नेटवर्क पर भीड़भाड़ कम करके, IWT समग्र पर्यावरणीय पदचिह्न को कम करने में योगदान देता है।

सामरिक महत्व

  • IWT भारत की बहुआयामी परिवहन प्रणाली का एक प्रमुख स्तंभ है, जो परिवहन के विभिन्न साधनों के बीच संतुलन स्थापित करता है और रसद लचीलापन बढ़ाता है।
  • राष्ट्रीय जलमार्गों का विकास दूरदराज के क्षेत्रों को मुख्यधारा से जोड़ता है, जिससे समावेशी विकास सुनिश्चित होता है।
  • डिजिटल नेविगेशन उपकरण और हरित पोत प्रौद्योगिकी का उपयोग परिवहन क्षेत्र में तकनीकी प्रगति और आधुनिकीकरण को दर्शाता है, जो वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता के लिए महत्वपूर्ण है।

शासनिक महत्व

  • डिजिटल सुधार जैसे PANI, जलयान और नाविक पोर्टल, CAR-D और जल समृद्धि पोर्टल ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को बढ़ाते हैं और पारदर्शिता लाते हैं।
  • IWAI द्वारा राष्ट्रीय जलमार्गों का विनियमन और विकास एक सुव्यवस्थित और कुशल परिवहन प्रणाली सुनिश्चित करता है।
  • पीएम गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के साथ एकीकरण विभिन्न मंत्रालयों और विभागों के बीच समन्वय को बढ़ावा देता है, जिससे परियोजनाओं का समय पर क्रियान्वयन सुनिश्चित होता है।

चुनौतियाँ

1. बुनियादी ढाँचागत अंतराल

  • कई राष्ट्रीय जलमार्गों पर पर्याप्त गहराई और चौड़ाई की कमी है, जिससे बड़े जहाजों का संचालन बाधित होता है।
  • टर्मिनल, घाट और नेविगेशनल सहायता जैसी आवश्यक बुनियादी सुविधाओं का विकास अभी भी कई क्षेत्रों में अपर्याप्त है।

2. मौसमी और पर्यावरणीय बाधाएँ

  • नदियों में पानी का स्तर मौसमी रूप से बदलता रहता है, जिससे पूरे वर्ष नौपरिवहन की निरंतरता प्रभावित होती है।
  • गाद जमा होना और नदी के कटाव जैसी पर्यावरणीय चुनौतियाँ जलमार्गों के रखरखाव और संचालन को जटिल बनाती हैं।

3. अंतर-राज्यीय समन्वय

  • जलमार्गों के विकास और विनियमन में विभिन्न राज्यों के बीच समन्वय की आवश्यकता होती है, जो कभी-कभी जटिल हो सकता है।
  • भूमि अधिग्रहण और स्थानीय अनुमतियों से संबंधित मुद्दे परियोजनाओं में देरी का कारण बन सकते हैं।

4. निजी क्षेत्र की भागीदारी

  • IWT क्षेत्र में निजी निवेश को आकर्षित करने के लिए और अधिक प्रोत्साहन और एक स्थिर नीतिगत ढाँचे की आवश्यकता है।
  • वित्तपोषण के विकल्प और जोखिम-साझाकरण मॉडल को और अधिक आकर्षक बनाने की आवश्यकता है।

5. तकनीकी और कौशल अंतराल

  • आधुनिक हरित पोत प्रौद्योगिकी और डिजिटल नेविगेशन उपकरणों के संचालन के लिए कुशल कार्यबल की कमी है।
  • क्षेत्रीय उत्कृष्टता केंद्रों को और अधिक विकसित करने और प्रशिक्षण कार्यक्रमों को मजबूत करने की आवश्यकता है।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
कम गहराई और चौड़ाई बड़े जहाजों के संचालन में बाधा, क्षमता का कम उपयोग।
गाद जमा होना जलमार्गों की नौपरिवहन क्षमता में कमी, नियमित रखरखाव की आवश्यकता।
सीमित टर्मिनल सुविधाएँ माल के कुशल लोडिंग और अनलोडिंग में बाधा, कनेक्टिविटी की समस्या।
मौसमी जल स्तर वर्ष भर नौपरिवहन की निरंतरता में व्यवधान, संचालन की अनिश्चितता।
अंतर-राज्यीय विवाद परियोजनाओं के क्रियान्वयन में देरी, समन्वय की कमी।
कुशल जनशक्ति की कमी आधुनिक प्रौद्योगिकी के प्रभावी उपयोग में बाधा, सुरक्षा जोखिम।

सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें

  • मैरीटाइम इंडिया विजन 2030
  • मैरीटाइम अमृत काल विजन 2047
  • पीएम गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान
  • जलवाहक योजना

आगे की राह

  • जलमार्गों की गहराई और चौड़ाई बढ़ाने के लिए नियमित ड्रेजिंग और नदी प्रबंधन तकनीकों का उपयोग करना।
  • आधुनिक बहुआयामी टर्मिनलों, सामुदायिक जेट्टी और नेविगेशनल सहायता का तेजी से विकास करना।
  • हरित पोत प्रौद्योगिकी और डिजिटल नेविगेशन उपकरणों को अपनाने के लिए अनुसंधान एवं विकास को बढ़ावा देना और वित्तीय प्रोत्साहन प्रदान करना।
  • IWT क्षेत्र में निजी निवेश को आकर्षित करने के लिए आकर्षक नीतिगत ढाँचा, कर प्रोत्साहन और सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल को मजबूत करना।
  • जलमार्गों के कुशल संचालन और रखरखाव के लिए कुशल जनशक्ति तैयार करने हेतु क्षेत्रीय उत्कृष्टता केंद्रों और प्रशिक्षण कार्यक्रमों को मजबूत करना।
  • राज्यों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने और भूमि अधिग्रहण जैसे मुद्दों को हल करने के लिए एक मजबूत अंतर-राज्यीय तंत्र विकसित करना।
  • IWT को सड़क और रेल परिवहन के साथ निर्बाध रूप से एकीकृत करने के लिए पीएम गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के तहत परियोजनाओं को प्राथमिकता देना।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

अंतर्देशीय जलमार्ग · मैरीटाइम इंडिया विजन 2030 · पीएम गति शक्ति · राष्ट्रीय जलमार्ग · आईडब्ल्यूएआई · डिजिटल सुधार · रसद लागत · हरित गतिशीलता · जलवाहक योजना · टन भार कर

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • अनुच्छेद 246: संघ और राज्यों के बीच विधायी शक्तियों का वितरण
  • सातवीं अनुसूची (संघ सूची): प्रविष्टि 24 – राष्ट्रीय जलमार्ग
  • सातवीं अनुसूची (समवर्ती सूची): प्रविष्टि 32 – अंतर-राज्यीय नदियाँ

अवधारणा प्रवाह

सरकार की नीतिगत पहलें (मैरीटाइम विजन)  →  बुनियादी ढाँचा विकास (जलमार्ग, टर्मिनल, जेट्टी)  →  डिजिटल सुधार (PANI, CAR-D पोर्टल)  →  रसद लागत में कमी और पर्यावरणीय लाभ  →  आर्थिक संवृद्धि और समावेशी विकास

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. अंतर्देशीय जलमार्गों के विकास और विनियमन के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण (IWAI) पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय के अंतर्गत एक स्वायत्त संगठन है।
2. ‘पीएएनआई’ पोर्टल का उद्देश्य जलयान और नाविकों के ऑनलाइन पंजीकरण के लिए एक केंद्रीकृत डेटाबेस प्रदान करना है।
3. ‘जल समृद्धि पोर्टल’ राष्ट्रीय जलमार्गों पर वाणिज्यिक और कार्यान्वयन गतिविधियों के लिए समर्पित है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. सभी तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है क्योंकि IWAI पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय के अंतर्गत एक स्वायत्त संगठन है। कथन 2 गलत है क्योंकि ‘पीएएनआई’ सरल नौपरिवहन योजनाओं के लिए परिसंपत्ति एवं नौपरिवहन सूचना पोर्टल है, जबकि जलयान और नाविक पोर्टल ‘वाहन’ और ‘सारथी’ की तर्ज पर विकसित किया गया है। कथन 3 सही है क्योंकि ‘जल समृद्धि पोर्टल’ राष्ट्रीय जलमार्गों पर वाणिज्यिक और कार्यान्वयन गतिविधियों के लिए समर्पित है।

Q2. भारत में परिवहन के विभिन्न साधनों की आर्थिक दक्षता और पर्यावरणीय प्रभाव के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. अंतर्देशीय जल परिवहन (IWT) की माल ढुलाई लागत रेलवे और सड़क परिवहन दोनों से कम है।
2. ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन के मामले में, IWT का उत्सर्जन रेलवे के बराबर है और सड़क परिवहन से काफी कम है।
3. वायु प्रदूषण लागत के संदर्भ में, IWT की लागत रेलवे और सड़क परिवहन दोनों से अधिक है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

  1. केवल 1
  2. केवल 1 और 2
  3. केवल 2 और 3
  4. 1, 2 और 3

उत्तर: केवल 1 और 2 — कथन 1 सही है क्योंकि IWT की माल ढुलाई लागत ₹1.06 प्रति टन-किलोमीटर है, जो रेलवे (₹1.36) और सड़क (₹2.50) से कम है। कथन 2 सही है क्योंकि IWT का ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन रेलवे के बराबर है (₹0.0006/टीकेएम) और सड़क परिवहन (₹0.0031/टीकेएम) से काफी कम है। कथन 3 गलत है क्योंकि वायु प्रदूषण लागत के संदर्भ में, IWT की लागत (₹0.03/टीकेएम) रेलवे (₹0.0366/टीकेएम) और सड़क परिवहन (₹0.202/टीकेएम) दोनों से कम है।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ भारत में अंतर्देशीय जलमार्गों के विकास के महत्व का विश्लेषण कीजिए और इस क्षेत्र में सरकार द्वारा किए गए प्रमुख नीतिगत उपायों और डिजिटल सुधारों पर प्रकाश डालिए। यह किस प्रकार देश की रसद दक्षता और पर्यावरणीय स्थिरता में योगदान दे सकता है? (250 शब्द)

रूपरेखा: प्रश्न के पहले भाग में अंतर्देशीय जलमार्गों के महत्व को रेखांकित करें, जैसे कि लागत-दक्षता, पर्यावरण-मित्रता और भीड़भाड़ कम करना। दूसरे भाग में, सरकार द्वारा उठाए गए नीतिगत उपायों (जैसे जलवाहक योजना, टन भार कर का विस्तार) और डिजिटल सुधारों (जैसे पीएएनआई, जलयान और नाविक पोर्टल) का उल्लेख करें। अंत में, यह बताएं कि ये पहलें रसद लागत को कम करके, हरित गतिशीलता को बढ़ावा देकर और समावेशी आर्थिक विकास को गति देकर देश की दक्षता और स्थिरता में कैसे योगदान करती हैं।

स्रोत: PIB (Press Information Bureau)


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