आंध्र प्रदेश में 52.4% बारिश की कमी, सभी जिलों में सूखे के संकेत

All districts in Andhra Pradesh report deficient rainfall — diagram

आंध्र प्रदेश में 52.4% बारिश की कमी, सभी जिलों में सूखे के संकेत

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Andhra Pradesh rainfall deficit impact

✎ आंध्र प्रदेश में जुलाई के अंत तक 52.4% वर्षा की कमी दर्ज की गई है, जिससे अल नीनो के खतरे के बीच राज्य में सूखे की आशंका बढ़ गई है, और किसानों के लिए व्यापक सरकारी समर्थन की आवश्यकता है।

विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper I — भूगोल (भारतीय भूगोल)  |  GS Paper III — आपदा प्रबंधन, कृषि
  • Prelims: वर्षा की कमी, अल नीनो, भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD), सूखा, कृषि पर प्रभाव, मौसम संबंधी आपदाएँ
  • Essay: जलवायु परिवर्तन और भारत की कृषि अर्थव्यवस्था पर इसके प्रभाव, आपदा प्रबंधन: तैयारी, प्रतिक्रिया और पुनर्प्राप्ति

त्वरित पुनरावृत्ति: आंध्र प्रदेश में जुलाई के अंत तक 52.4% वर्षा की कमी दर्ज की गई है, जिससे अल नीनो के खतरे के बीच राज्य में सूखे की आशंका बढ़ गई है, और किसानों के लिए व्यापक सरकारी समर्थन की आवश्यकता है।

यह खबर चर्चा में क्यों?

जुलाई के अंत तक आंध्र प्रदेश में 52.4% वर्षा की कमी दर्ज की गई है, जिसमें राज्य के किसी भी जिले में सामान्य वर्षा नहीं हुई है। प्रकासम, पूर्वी गोदावरी, विशाखापत्तनम, अन्नामय्या और चित्तूर जैसे जिलों में भारी कमी देखी गई है, जबकि अन्य जिलों में भी वर्षा अपर्याप्त रही है। इस स्थिति ने राज्य में सूखे की आशंका को बढ़ा दिया है और किसानों के लिए व्यापक समर्थन की आवश्यकता पर बल दिया है।

पृष्ठभूमि

  • भारत की कृषि अर्थव्यवस्था मानसूनी वर्षा पर अत्यधिक निर्भर है, जो देश की लगभग 60% कृषि भूमि को सिंचित करती है।
  • भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) देश में मौसम संबंधी पूर्वानुमान और चेतावनियाँ जारी करने वाली प्रमुख एजेंसी है।
  • अल नीनो (El Niño) एक जलवायु पैटर्न है जो प्रशांत महासागर में सतही जल के असामान्य रूप से गर्म होने से जुड़ा है, और अक्सर भारतीय मानसून को कमजोर करता है।
  • सूखा एक गंभीर स्थिति है जो लंबे समय तक वर्षा की कमी के कारण उत्पन्न होती है, जिससे जल संसाधनों, कृषि और पारिस्थितिकी तंत्र पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
  • राज्य सरकारें सूखे जैसी स्थितियों से निपटने के लिए विभिन्न राहत उपाय और योजनाएँ लागू करती हैं, जिनमें किसानों को सहायता प्रदान करना शामिल है।
  • बंगाल की खाड़ी में बनने वाले गहरे दबाव (Deep Depression) अक्सर भारतीय उपमहाद्वीप के पूर्वी और मध्य भागों में वर्षा लाते हैं, लेकिन कभी-कभी उनका प्रभाव कुछ क्षेत्रों तक ही सीमित रहता है।

वर्षा की कमी और सूखा

  • वर्षा की कमी तब होती है जब किसी क्षेत्र में सामान्य औसत वर्षा से काफी कम वर्षा दर्ज की जाती है। IMD विभिन्न स्तरों की कमी को परिभाषित करता है, जैसे ‘कमी वाली वर्षा’ (20% से 59% कम) और ‘बड़ी कमी वाली वर्षा’ (60% या अधिक कम)।
  • सूखा एक जटिल घटना है जिसे आमतौर पर चार प्रकारों में वर्गीकृत किया जाता है: मौसम संबंधी सूखा, कृषि संबंधी सूखा, जल विज्ञान संबंधी सूखा और सामाजिक-आर्थिक सूखा।
  • मौसम संबंधी सूखा तब होता है जब किसी क्षेत्र में लंबे समय तक वर्षा की कमी रहती है।
  • कृषि संबंधी सूखा तब होता है जब मिट्टी में नमी की कमी फसल उत्पादन को प्रभावित करती है, जिससे फसलें सूख जाती हैं या उपज कम हो जाती है।
  • जल विज्ञान संबंधी सूखा सतही और भूमिगत जल संसाधनों, जैसे नदियों, झीलों और जलाशयों में जल स्तर की कमी को दर्शाता है।
  • सूखे के प्रमुख कारणों में मानसूनी वर्षा का अनियमित पैटर्न, अल नीनो जैसी वैश्विक जलवायु घटनाएँ, और जलवायु परिवर्तन के कारण चरम मौसम की घटनाओं में वृद्धि शामिल हैं।
  • सूखे के प्रभावों में फसल उत्पादन में कमी, खाद्य असुरक्षा, पशुधन की हानि, ग्रामीण आय में गिरावट, पेयजल की कमी और ग्रामीण क्षेत्रों से पलायन शामिल हैं।
  • भारत में सूखा प्रबंधन में प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली, जल संरक्षण उपाय, फसल विविधीकरण, सूखा प्रतिरोधी फसलों का विकास और किसानों को वित्तीय सहायता प्रदान करना शामिल है।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
आंध्र प्रदेश में वर्षा की कमी राज्य के सभी जिलों में सामान्य से कम वर्षा दर्ज की गई है, जो कृषि और जल सुरक्षा के लिए गंभीर चिंता का विषय है।
जुलाई के अंत तक 52.4% वर्षा की कमी यह आंकड़ा दर्शाता है कि राज्य को मानसून के मौसम में महत्वपूर्ण वर्षा की कमी का सामना करना पड़ रहा है, जिससे सूखे जैसी स्थिति उत्पन्न हो सकती है।
एल नीनो (El Niño) का खतरा एल नीनो की स्थिति प्रशांत महासागर में समुद्र की सतह के तापमान में वृद्धि से जुड़ी है, जो भारत में कमजोर मानसून और कम वर्षा का कारण बन सकती है।
कृषि पर प्रभाव कम वर्षा से फसल उत्पादन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा, जिससे किसानों की आय और खाद्य सुरक्षा प्रभावित होगी।
जल संसाधनों पर दबाव नदियों, जलाशयों और भूजल स्तर में कमी आएगी, जिससे पीने के पानी, सिंचाई और औद्योगिक उपयोग के लिए जल उपलब्धता प्रभावित होगी।

महत्व

आर्थिक महत्व

  • कृषि राज्य की अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण आधार है। वर्षा की कमी से कृषि उत्पादन में गिरावट आएगी, जिससे ग्रामीण आय कम होगी और राज्य के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।
  • कम वर्षा के कारण खाद्य पदार्थों की कीमतें बढ़ सकती हैं, जिससे मुद्रास्फीति (Inflation) का दबाव बढ़ेगा और आम जनता पर आर्थिक बोझ पड़ेगा।
  • सिंचाई के लिए बिजली की मांग बढ़ेगी, जिससे राज्य के ऊर्जा क्षेत्र पर अतिरिक्त दबाव पड़ेगा और वित्तीय लागत में वृद्धि होगी।

सामाजिक महत्व

  • किसानों की आजीविका पर सीधा खतरा उत्पन्न होगा, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में गरीबी और बेरोजगारी बढ़ सकती है।
  • पेयजल की कमी से स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं और लोगों को पानी के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ सकती है, जिससे सामाजिक तनाव बढ़ सकता है।
  • खाद्य सुरक्षा प्रभावित होगी, जिससे कुपोषण और संबंधित स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है, विशेषकर कमजोर वर्गों में।

पर्यावरणीय महत्व

  • कम वर्षा से भूजल स्तर में गिरावट आएगी, जिससे पारिस्थितिक संतुलन बिगड़ सकता है और जल-निर्भर वनस्पतियों और जीवों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।
  • नदियों और जलाशयों में पानी की कमी से जलीय पारिस्थितिकी तंत्र (Aquatic Ecosystem) प्रभावित होगा, जिससे जैव विविधता (Biodiversity) को नुकसान हो सकता है।
  • मिट्टी की नमी में कमी से मरुस्थलीकरण (Desertification) की प्रक्रिया तेज हो सकती है और मिट्टी की उर्वरता (Soil Fertility) कम हो सकती है।

चुनौतियाँ

1. कृषि संकट

  • फसल उत्पादन में भारी गिरावट, जिससे किसानों की आय और खाद्य सुरक्षा प्रभावित होगी।
  • सिंचाई के लिए पानी की कमी, जिससे किसानों को वैकल्पिक और महंगे सिंचाई साधनों पर निर्भर रहना पड़ेगा।

2. जल संकट

  • पेयजल, सिंचाई और औद्योगिक उपयोग के लिए जल संसाधनों की कमी।
  • भूजल स्तर में गिरावट और जलाशयों में पानी का कम होना।

3. आर्थिक प्रभाव

  • राज्य के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में गिरावट और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक असर।
  • खाद्य मुद्रास्फीति में वृद्धि और आम जनता पर आर्थिक बोझ।

4. सामाजिक प्रभाव

  • किसानों में तनाव और आत्महत्या की घटनाओं में वृद्धि की संभावना।
  • पेयजल की कमी से स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं और सामाजिक अशांति।

5. पर्यावरणीय क्षरण

  • भूजल स्तर में गिरावट और जलीय पारिस्थितिकी तंत्र पर नकारात्मक प्रभाव।
  • मिट्टी की उर्वरता में कमी और मरुस्थलीकरण का खतरा।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
कम वर्षा राज्य के सभी जिलों में सामान्य से 52.4% कम वर्षा, जिससे सूखे की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।
फसल क्षति धान, मक्का और अन्य खरीफ फसलों के उत्पादन पर गंभीर नकारात्मक प्रभाव, जिससे किसानों को भारी नुकसान होगा।
पेयजल की कमी ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में पीने के पानी की उपलब्धता पर दबाव, जिससे स्वास्थ्य और स्वच्छता संबंधी चुनौतियाँ बढ़ेंगी।
एल नीनो (El Niño) का खतरा कमजोर मानसून और भविष्य में भी कम वर्षा की संभावना, जिससे दीर्घकालिक जल प्रबंधन की आवश्यकता होगी।
राजकोषीय बोझ सूखे से निपटने और किसानों को राहत प्रदान करने के लिए सरकार पर अतिरिक्त वित्तीय दबाव।

आगे की राह

  • राज्य सरकार को सूखे से प्रभावित मंडलों को तत्काल सूखाग्रस्त घोषित करना चाहिए और किसानों को उचित मुआवजा और राहत पैकेज प्रदान करना चाहिए।
  • किसानों को वैकल्पिक फसलों की खेती के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए जो कम पानी में उग सकती हैं और सूखा प्रतिरोधी हों।
  • जल संरक्षण और जल संचयन (Water Harvesting) तकनीकों को बढ़ावा देना चाहिए, जैसे कि चेक डैम, तालाबों का निर्माण और वर्षा जल संचयन प्रणालियों को लागू करना।
  • सिंचाई के लिए सूक्ष्म सिंचाई (Micro Irrigation) प्रणालियों जैसे ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई को बढ़ावा देना चाहिए ताकि पानी का कुशल उपयोग हो सके।
  • किसानों को फसल बीमा योजनाओं के तहत कवर करना चाहिए ताकि उन्हें फसल क्षति से होने वाले नुकसान से बचाया जा सके।
  • दीर्घकालिक जल प्रबंधन योजनाएं विकसित करनी चाहिए, जिसमें नदियों को जोड़ना, भूजल पुनर्भरण और जल संसाधनों का सतत उपयोग शामिल हो।
  • मौसम पूर्वानुमान और प्रारंभिक चेतावनी प्रणालियों को मजबूत करना चाहिए ताकि किसान और सरकार संभावित सूखे के लिए पहले से तैयारी कर सकें।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

वर्षा की कमी · सूखा · कृषि संकट · अल नीनो · भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) · जलवायु परिवर्तन · आपदा प्रबंधन · फसल बीमा योजना · जल संरक्षण · खाद्य सुरक्षा · राज्य आपदा प्रतिक्रिया कोष · राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया कोष

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 243G’, ‘note’: ‘पंचायतों की शक्तियाँ, प्राधिकार और उत्तरदायित्व’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 243W’, ‘note’: ‘नगरपालिकाओं की शक्तियाँ, प्राधिकार और उत्तरदायित्व’}
  • {‘article’: ‘सातवीं अनुसूची’, ‘note’: ‘राज्य सूची में कृषि और जल’}

अवधारणा प्रवाह

कम वर्षा (एल नीनो प्रभाव)  →  कृषि उत्पादन में गिरावट  →  किसानों की आय में कमी  →  खाद्य सुरक्षा पर खतरा  →  ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक प्रभाव  →  राज्य के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में कमी

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
1. अल नीनो (El Niño) प्रशांत महासागर में सतही जल के असामान्य रूप से गर्म होने की घटना है, जो वैश्विक मौसम पैटर्न को प्रभावित करती है।
2. भारत में अल नीनो के कारण आमतौर पर मानसून की वर्षा में वृद्धि होती है।
3. ला नीना (La Niña) अल नीनो के विपरीत है और भारत में सामान्यतः बेहतर मानसून से जुड़ी है।
उपरोक्त में से कितने कथन सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. सभी तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है। अल नीनो प्रशांत महासागर में भूमध्यरेखीय क्षेत्र में सतही जल के असामान्य रूप से गर्म होने की घटना है, जो वैश्विक मौसम पैटर्न को महत्वपूर्ण रूप से प्रभावित करती है। कथन 2 गलत है। भारत में अल नीनो के कारण आमतौर पर मानसून की वर्षा में कमी आती है, जिससे सूखे जैसी स्थिति उत्पन्न हो सकती है। कथन 3 सही है। ला नीना अल नीनो के विपरीत है, जिसमें प्रशांत महासागर का सतही जल ठंडा हो जाता है, और यह भारत में सामान्यतः बेहतर मानसून और अधिक वर्षा से जुड़ी है।

Q2. भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के संबंध में निम्नलिखित कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
1. यह पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के अधीन कार्य करता है।
2. यह देश में मौसम संबंधी अवलोकन, मौसम पूर्वानुमान और भूकंप विज्ञान के लिए प्रमुख एजेंसी है।
3. इसका मुख्यालय नई दिल्ली में स्थित है।
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए।

  1. केवल 1 और 2
  2. केवल 2 और 3
  3. केवल 1 और 3
  4. 1, 2 और 3

उत्तर: 1, 2 और 3 — कथन 1 सही है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय (Ministry of Earth Sciences) के अधीन कार्य करता है। कथन 2 सही है। यह देश में मौसम संबंधी अवलोकन, मौसम पूर्वानुमान और भूकंप विज्ञान (Seismology) के लिए प्रमुख एजेंसी है। कथन 3 सही है। इसका मुख्यालय नई दिल्ली में स्थित है।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ वर्षा की कमी के कारण उत्पन्न होने वाले कृषि संकट के सामाजिक-आर्थिक प्रभावों का विश्लेषण कीजिए। इस संदर्भ में, सरकार द्वारा किसानों को सहायता प्रदान करने के लिए किए जा सकने वाले उपायों पर भी चर्चा कीजिए। (15 Marks)

रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. **परिचय:** वर्षा की कमी और कृषि संकट के बीच संबंध स्थापित करें। आंध्र प्रदेश में वर्तमान वर्षा की कमी का संक्षिप्त उल्लेख करें।
2. **सामाजिक-आर्थिक प्रभाव:**
* **कृषि उत्पादन पर प्रभाव:** फसल की पैदावार में कमी, फसल खराब होना, खाद्य सुरक्षा पर खतरा।
* **किसानों की आय और ऋणग्रस्तता:** आय में कमी, ऋण चुकाने में असमर्थता, आत्महत्याओं का जोखिम।
* **ग्रामीण अर्थव्यवस्था:** ग्रामीण रोजगार में कमी, पलायन में वृद्धि, स्थानीय बाजारों पर नकारात्मक प्रभाव।
* **खाद्य मुद्रास्फीति (Food Inflation):** कृषि उत्पादों की कीमतों में वृद्धि, उपभोक्ताओं पर बोझ।
* **जल संकट:** पीने के पानी और अन्य उपयोगों के लिए जल की कमी।
* **सामाजिक तनाव:** संसाधनों के लिए प्रतिस्पर्धा, सामाजिक अशांति।
3. **सरकार द्वारा किए जा सकने वाले उपाय:**
* **तत्काल राहत:** सूखाग्रस्त क्षेत्रों की घोषणा, फसल क्षति का आकलन और मुआवजा।
* **वित्तीय सहायता:** प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) का प्रभावी कार्यान्वयन, ऋण माफी या पुनर्गठन, ब्याज सबवेंशन।
* **जल प्रबंधन:** वर्षा जल संचयन (Rainwater Harvesting), सूक्ष्म सिंचाई (Micro-irrigation) को बढ़ावा, नहरों और जलाशयों का रखरखाव।
* **वैकल्पिक आजीविका:** कृषि से इतर ग्रामीण रोजगार सृजन, कौशल विकास कार्यक्रम।
* **मौसम पूर्वानुमान और चेतावनी:** IMD की भविष्यवाणियों का समय पर प्रसार, किसानों को जागरूक करना।
* **दीर्घकालिक नीतियां:** जलवायु-लचीली कृषि पद्धतियों को बढ़ावा, सूखा प्रतिरोधी फसलों का विकास, कृषि विविधीकरण।
* **आपदा प्रबंधन:** राज्य आपदा प्रतिक्रिया कोष (SDRF) और राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया कोष (NDRF) का प्रभावी उपयोग।
4. **निष्कर्ष:** एक समग्र दृष्टिकोण की आवश्यकता पर बल दें जो तत्काल राहत और दीर्घकालिक स्थिरता दोनों को संबोधित करे।

स्रोत: The Hindu


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

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