04 Aug आईआईटी हैदराबाद ने शुरू किया भारत का पहला परमाणु तकनीक उद्योग-अकादमिया कार्यक्रम
✎ ANUGYAN कार्यक्रम IIT हैदराबाद और क्रिमसन एनर्जी एक्सपर्ट्स का एक संयुक्त उद्योग-अकादमिक पहल है, जो भारत के तेजी से बढ़ते नागरिक परमाणु ऊर्जा क्षेत्र के लिए कुशल पेशेवरों को तैयार करेगा और परमाणु ऊर्जा में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा…
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- Essay: भारत की ऊर्जा सुरक्षा: चुनौतियाँ और अवसर, आत्मनिर्भर भारत में विज्ञान और प्रौद्योगिकी की भूमिका
त्वरित पुनरावृत्ति: ANUGYAN कार्यक्रम IIT हैदराबाद और क्रिमसन एनर्जी एक्सपर्ट्स का एक संयुक्त उद्योग-अकादमिक पहल है, जो भारत के तेजी से बढ़ते नागरिक परमाणु ऊर्जा क्षेत्र के लिए कुशल पेशेवरों को तैयार करेगा और परमाणु ऊर्जा में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देगा।
यह खबर चर्चा में क्यों?
IIT हैदराबाद ने क्रिमसन एनर्जी एक्सपर्ट्स प्राइवेट लिमिटेड (CEEPL) के सहयोग से ‘ANUGYAN – परमाणु प्रौद्योगिकी अभिविन्यास कार्यक्रम (NTOP)’ का शुभारंभ किया है। यह भारत का पहला उद्योग-अकादमिक कार्यक्रम है जिसे तेजी से बढ़ते नागरिक परमाणु ऊर्जा क्षेत्र के लिए इंजीनियरों और उद्योग पेशेवरों को तैयार करने हेतु डिज़ाइन किया गया है। यह कार्यक्रम भारत की परमाणु इंजीनियरिंग शिक्षा, कार्यबल विकास और स्वच्छ ऊर्जा प्रौद्योगिकियों में आत्मनिर्भरता को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।
पृष्ठभूमि
- भारत अपनी परमाणु ऊर्जा उत्पादन क्षमता को वर्तमान में लगभग 8.8 GWe से बढ़ाकर 2047 तक 100 GWe करने की योजना बना रहा है, जिसके लिए प्रशिक्षित पेशेवरों की भारी मांग है।
- नागरिक परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में कुशल कार्यबल की आवश्यकता को पूरा करने के लिए उद्योग और शिक्षा जगत के बीच सहयोग महत्वपूर्ण है।
- यह कार्यक्रम IIT हैदराबाद, डसॉल्ट सिस्टम्स और क्रिमसन एनर्जी एक्सपर्ट्स के बीच ‘भारत इनोवेट 2026’ के दौरान हस्ताक्षरित समझौता ज्ञापन (MoU) के समर्थन में शुरू किया गया है।
- समझौता ज्ञापन में उन्नत परमाणु इंजीनियरिंग डिजाइन, डिजिटल सिमुलेशन और सहयोगात्मक अनुसंधान पर ध्यान केंद्रित करने के लिए परमाणु इंजीनियरिंग में डिजाइन उत्कृष्टता केंद्र (CODENE) की स्थापना का प्रस्ताव था।
- भारत सरकार स्वच्छ ऊर्जा स्रोतों को बढ़ावा देने और जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करने के लिए प्रतिबद्ध है, जिसमें परमाणु ऊर्जा एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
- छोटे मॉड्यूलर रिएक्टर (SMRs) जैसी नई प्रौद्योगिकियां परमाणु ऊर्जा को अधिक लचीला और सुरक्षित बनाने की क्षमता रखती हैं, जिसके लिए विशेष प्रशिक्षण की आवश्यकता है।
ANUGYAN – परमाणु प्रौद्योगिकी अभिविन्यास कार्यक्रम (NTOP) क्या है?
- यह IIT हैदराबाद और क्रिमसन एनर्जी एक्सपर्ट्स प्राइवेट लिमिटेड (CEEPL) के सहयोग से शुरू किया गया भारत का पहला उद्योग-अकादमिक कार्यक्रम है।
- यह तीन महीने का पूर्णतः आवासीय कार्यक्रम है जिसका उद्देश्य उम्मीदवारों को अकादमिक शिक्षा के साथ-साथ वास्तविक दुनिया का औद्योगिक अनुभव प्रदान करना है।
- पाठ्यक्रम में रिएक्टर भौतिकी, थर्मल हाइड्रोलिक्स, विकिरण सुरक्षा, छोटे मॉड्यूलर रिएक्टर (SMRs), इंजीनियरिंग डिजाइन, गुणवत्ता आश्वासन और AERB नियामक अनुपालन जैसे प्रमुख परमाणु ऊर्जा-संबंधित क्षेत्र शामिल हैं।
- यह कार्यक्रम इंजीनियरिंग स्नातकों, कार्यरत पेशेवरों, PSU अधिकारियों, EPC ठेकेदारों और औद्योगिक उपकरण निर्माताओं को देश की उभरती परमाणु आपूर्ति श्रृंखला में योगदान करने के लिए आवश्यक क्षमताएं हासिल करने के अवसर प्रदान करता है।
- कार्यक्रम पूरा करने वाले प्रतिभागियों को IIT हैदराबाद और क्रिमसन एनर्जी एक्सपर्ट्स प्राइवेट लिमिटेड से संयुक्त प्रमाणन प्राप्त होगा।
- इसका मुख्य लक्ष्य भारत की परमाणु इंजीनियरिंग शिक्षा, कार्यबल विकास और स्वच्छ ऊर्जा प्रौद्योगिकियों में आत्मनिर्भरता को मजबूत करना है।
- यह कार्यक्रम देश की बढ़ती परमाणु ऊर्जा उत्पादन क्षमता की मांग को पूरा करने के लिए प्रशिक्षित पेशेवरों की आवश्यकता को संबोधित करता है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| भारत का पहला उद्योग-अकादमिक कार्यक्रम | नागरिक परमाणु ऊर्जा क्षेत्र के लिए प्रशिक्षित पेशेवरों की बढ़ती मांग को पूरा करने में सहायक। |
| तीन महीने का पूर्ण आवासीय कार्यक्रम | अभ्यर्थियों को गहन शैक्षणिक ज्ञान और वास्तविक औद्योगिक अनुभव प्रदान करेगा। |
| पाठ्यक्रम में शामिल विषय | रिएक्टर भौतिकी, थर्मल हाइड्रोलिक्स, विकिरण सुरक्षा, छोटे मॉड्यूलर रिएक्टर (SMRs) आदि शामिल हैं, जो आधुनिक परमाणु इंजीनियरिंग के लिए आवश्यक हैं। |
| उद्योग-अकादमिक सहयोग | आईआईटी हैदराबाद की शैक्षणिक उत्कृष्टता और क्रिमसन एनर्जी एक्सपर्ट्स के औद्योगिक अनुभव का समन्वय। |
| आत्मनिर्भरता को बढ़ावा | परमाणु इंजीनियरिंग शिक्षा, कार्यबल विकास और स्वच्छ ऊर्जा प्रौद्योगिकियों में भारत की आत्मनिर्भरता को मजबूत करेगा। |
| लक्षित प्रतिभागी | इंजीनियरिंग स्नातक, कार्यरत पेशेवर, PSU अधिकारी, EPC ठेकेदार और औद्योगिक उपकरण निर्माता। |
महत्व
ऊर्जा सुरक्षा और आत्मनिर्भरता
- यह कार्यक्रम भारत की परमाणु ऊर्जा उत्पादन क्षमता को 2047 तक 8.8 GWe से 100 GWe तक बढ़ाने के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए आवश्यक प्रशिक्षित कार्यबल तैयार करेगा।
- यह परमाणु इंजीनियरिंग शिक्षा और कार्यबल विकास में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देगा, जिससे विदेशी विशेषज्ञता पर निर्भरता कम होगी।
आर्थिक संवृद्धि और रोजगार सृजन
- परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में कुशल पेशेवरों की उपलब्धता से इस क्षेत्र में निवेश बढ़ेगा, जिससे आर्थिक संवृद्धि को गति मिलेगी।
- यह कार्यक्रम परमाणु आपूर्ति श्रृंखला में योगदान करने के लिए आवश्यक क्षमताओं का निर्माण कर नए रोजगार के अवसर पैदा करेगा।
तकनीकी प्रगति और नवाचार
- छोटे मॉड्यूलर रिएक्टर (SMRs) जैसी आधुनिक परमाणु प्रौद्योगिकियों पर ध्यान केंद्रित करने से भारत परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में नवाचार और अनुसंधान को बढ़ावा मिलेगा।
- डिजिटल सिमुलेशन और सहयोगी अनुसंधान पर केंद्रित ‘सेंटर ऑफ डिजाइन एक्सीलेंस इन न्यूक्लियर इंजीनियरिंग (CODENE)’ की स्थापना से उन्नत इंजीनियरिंग डिजाइन को बढ़ावा मिलेगा।
पर्यावरण और स्वच्छ ऊर्जा
- परमाणु ऊर्जा एक स्वच्छ ऊर्जा स्रोत है जो कार्बन उत्सर्जन को कम करने में मदद करता है, जिससे भारत के जलवायु परिवर्तन लक्ष्यों को प्राप्त करने में सहायता मिलेगी।
- प्रशिक्षित पेशेवरों की उपलब्धता से स्वच्छ ऊर्जा प्रौद्योगिकियों के विकास और तैनाती में तेजी आएगी।
चुनौतियाँ
1. कुशल मानव संसाधन की कमी
- परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में विशेषज्ञता प्राप्त पेशेवरों की मांग लगातार बढ़ रही है, लेकिन आपूर्ति सीमित है।
- यह कार्यक्रम इस अंतर को पाटने का प्रयास करेगा, लेकिन बड़े पैमाने पर आवश्यकता को पूरा करने के लिए और अधिक ऐसे कार्यक्रमों की आवश्यकता है।
यूपीएससी लिंक: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी – भारत में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी का विकास और अनुप्रयोग
2. सुरक्षा और नियामक अनुपालन
- परमाणु ऊर्जा संयंत्रों के संचालन में सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है, जिसके लिए कठोर नियामक मानकों का पालन आवश्यक है।
- कार्यक्रम में AERB नियामक अनुपालन को शामिल किया गया है, जो सुरक्षा प्रोटोकॉल के महत्व को दर्शाता है।
यूपीएससी लिंक: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी – परमाणु ऊर्जा नीति और सुरक्षा
3. सार्वजनिक धारणा और स्वीकृति
- परमाणु ऊर्जा को लेकर सार्वजनिक धारणा अक्सर सुरक्षा चिंताओं से प्रभावित होती है, जिससे नए परियोजनाओं के लिए स्वीकृति प्राप्त करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
- प्रशिक्षित पेशेवर सुरक्षा मानकों को बनाए रखने और सार्वजनिक विश्वास बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
यूपीएससी लिंक: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी – परमाणु ऊर्जा के सामाजिक-आर्थिक प्रभाव
4. प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और स्थानीयकरण
- उन्नत परमाणु प्रौद्योगिकियों के लिए अंतर्राष्ट्रीय सहयोग महत्वपूर्ण है, लेकिन प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और स्थानीयकरण एक चुनौती हो सकता है।
- यह कार्यक्रम घरेलू क्षमताओं का निर्माण कर इस चुनौती का समाधान करने में मदद करेगा।
यूपीएससी लिंक: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी – स्वदेशीकरण और प्रौद्योगिकी विकास
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| विशेषज्ञता की कमी | तेजी से बढ़ते परमाणु ऊर्जा क्षेत्र के लिए पर्याप्त कुशल कार्यबल का अभाव। |
| सुरक्षा मानक | परमाणु ऊर्जा संयंत्रों के संचालन में उच्च सुरक्षा मानकों और नियामक अनुपालन को बनाए रखना। |
| प्रौद्योगिकी का आधुनिकीकरण | छोटे मॉड्यूलर रिएक्टर (SMRs) जैसी नई प्रौद्योगिकियों को अपनाने और उनमें विशेषज्ञता विकसित करना। |
| उद्योग-अकादमिक अंतर | शैक्षणिक ज्ञान और औद्योगिक आवश्यकताओं के बीच के अंतर को पाटना। |
| अंतर्राष्ट्रीय सहयोग | उन्नत परमाणु प्रौद्योगिकियों के लिए अंतर्राष्ट्रीय सहयोग और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण की आवश्यकता। |
आगे की राह
- परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में अनुसंधान और विकास को बढ़ावा देने के लिए सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल को और मजबूत करना।
- शैक्षणिक संस्थानों और उद्योग के बीच सहयोग को बढ़ावा देने के लिए अधिक उद्योग-अकादमिक कार्यक्रमों की शुरुआत करना।
- परमाणु ऊर्जा से संबंधित कौशल विकास कार्यक्रमों को राष्ट्रीय कौशल विकास मिशन (National Skill Development Mission) के तहत एकीकृत करना।
- छोटे मॉड्यूलर रिएक्टर (SMRs) जैसी अगली पीढ़ी की परमाणु प्रौद्योगिकियों में विशेषज्ञता विकसित करने पर ध्यान केंद्रित करना।
- परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए विशेष प्रोत्साहन और प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू करना।
- अंतर्राष्ट्रीय सहयोग के माध्यम से उन्नत परमाणु प्रौद्योगिकियों और सर्वोत्तम प्रथाओं का आदान-प्रदान करना।
- परमाणु ऊर्जा के सुरक्षित और स्वच्छ पहलू के बारे में जन जागरूकता बढ़ाना।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
परमाणु ऊर्जा · नागरिक परमाणु ऊर्जा क्षेत्र · उद्योग-अकादमिक सहयोग · आत्मनिर्भर भारत · स्वच्छ ऊर्जा · कौशल विकास · लघु मॉड्यूलर रिएक्टर (SMRs) · परमाणु इंजीनियरिंग शिक्षा · ऊर्जा सुरक्षा · राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन
अवधारणा प्रवाह
आईआईटी हैदराबाद द्वारा ‘अनुज्ञान’ कार्यक्रम का शुभारंभ → नागरिक परमाणु ऊर्जा क्षेत्र के लिए प्रशिक्षित पेशेवरों का विकास → भारत की परमाणु ऊर्जा उत्पादन क्षमता में वृद्धि → ऊर्जा सुरक्षा और स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्यों की प्राप्ति → आर्थिक संवृद्धि और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ANUGYAN कार्यक्रम भारत का पहला उद्योग-अकादमिक कार्यक्रम है जो नागरिक परमाणु ऊर्जा क्षेत्र के लिए इंजीनियरों और उद्योग पेशेवरों को प्रशिक्षित करने के उद्देश्य से शुरू किया गया है।
2. यह कार्यक्रम IIT हैदराबाद और क्रिमसन एनर्जी एक्सपर्ट्स प्राइवेट लिमिटेड (CEEPL) के सहयोग से शुरू किया गया है।
3. ANUGYAN कार्यक्रम का उद्देश्य भारत की परमाणु ऊर्जा उत्पादन क्षमता को 2047 तक 100 GWe तक बढ़ाना है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: सभी तीन — कथन 1 और 2 सही हैं। ANUGYAN कार्यक्रम भारत का पहला उद्योग-अकादमिक कार्यक्रम है और इसे IIT हैदराबाद तथा क्रिमसन एनर्जी एक्सपर्ट्स प्राइवेट लिमिटेड (CEEPL) के सहयोग से शुरू किया गया है। कथन 3 गलत है क्योंकि कार्यक्रम का उद्देश्य प्रशिक्षित पेशेवरों की बढ़ती मांग को पूरा करना है, जबकि परमाणु ऊर्जा उत्पादन क्षमता को 2047 तक 100 GWe तक बढ़ाने की योजना देश की है, न कि सीधे कार्यक्रम का उद्देश्य।
Q2. अभिकथन (A): भारत में परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में प्रशिक्षित पेशेवरों की बढ़ती मांग है।
कारण (R): भारत सरकार ने 2047 तक अपनी परमाणु ऊर्जा उत्पादन क्षमता को 8.8 GWe से बढ़ाकर 100 GWe करने की योजना बनाई है।
उपरोक्त कथनों के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन सा सही है?
- A और R दोनों सही हैं, और R, A की सही व्याख्या है।
- A और R दोनों सही हैं, लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है।
- A सही है, लेकिन R गलत है।
- A गलत है, लेकिन R सही है।
उत्तर: A और R दोनों सही हैं, और R, A की सही व्याख्या है। — अभिकथन (A) सही है क्योंकि परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में विस्तार के कारण प्रशिक्षित पेशेवरों की मांग बढ़ रही है। कारण (R) भी सही है क्योंकि भारत ने 2047 तक अपनी परमाणु ऊर्जा क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि का लक्ष्य रखा है। कारण (R) अभिकथन (A) की सही व्याख्या करता है, क्योंकि क्षमता वृद्धि की योजना ही प्रशिक्षित पेशेवरों की मांग का मुख्य कारण है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ भारत के नागरिक परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में उद्योग-अकादमिक सहयोग के महत्व का परीक्षण कीजिए। राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन (National Green Hydrogen Mission) जैसे स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्यों को प्राप्त करने में यह किस प्रकार सहायक हो सकता है? (15 Marks)
रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. **परिचय:** नागरिक परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में भारत की बढ़ती आकांक्षाओं और प्रशिक्षित कार्यबल की आवश्यकता का संक्षिप्त उल्लेख। IIT हैदराबाद के ANUGYAN कार्यक्रम जैसे उद्योग-अकादमिक सहयोग की प्रासंगिकता।
2. **उद्योग-अकादमिक सहयोग का महत्व:**
* **कौशल विकास और कार्यबल की तैयारी:** उद्योग की वास्तविक आवश्यकताओं के अनुरूप इंजीनियरिंग स्नातकों और पेशेवरों को प्रशिक्षित करना।
* **अनुसंधान और नवाचार:** अकादमिक उत्कृष्टता और औद्योगिक विशेषज्ञता का संयोजन, जिससे नई प्रौद्योगिकियों (जैसे लघु मॉड्यूलर रिएक्टर – SMRs) का विकास हो सके।
* **आत्मनिर्भरता:** परमाणु इंजीनियरिंग शिक्षा और कार्यबल विकास में भारत की आत्मनिर्भरता को मजबूत करना।
* **नियामक अनुपालन और सुरक्षा:** परमाणु ऊर्जा नियामक बोर्ड (AERB) के दिशानिर्देशों का पालन सुनिश्चित करना और सुरक्षा मानकों को बढ़ाना।
* **आपूर्ति श्रृंखला का विकास:** उभरती परमाणु आपूर्ति श्रृंखला में योगदान करने के लिए पेशेवरों को तैयार करना।
3. **स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्यों में सहायता (राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन के संदर्भ में):**
* **स्थिर बेसलोड बिजली:** परमाणु ऊर्जा स्वच्छ ऊर्जा स्रोतों के लिए एक स्थिर और विश्वसनीय बेसलोड प्रदान करती है, जो नवीकरणीय ऊर्जा की परिवर्तनशीलता को संतुलित कर सकती है।
* **हरित हाइड्रोजन उत्पादन:** हरित हाइड्रोजन के उत्पादन के लिए आवश्यक भारी मात्रा में स्वच्छ बिजली की आपूर्ति में परमाणु ऊर्जा एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
* **तकनीकी तालमेल:** परमाणु प्रौद्योगिकी में विकसित विशेषज्ञता और इंजीनियरिंग कौशल अन्य स्वच्छ ऊर्जा प्रौद्योगिकियों, जैसे हरित हाइड्रोजन उत्पादन, में भी लागू हो सकते हैं।
* **कार्बन उत्सर्जन में कमी:** परमाणु ऊर्जा का विस्तार भारत के समग्र कार्बन उत्सर्जन को कम करने और जलवायु परिवर्तन लक्ष्यों को प्राप्त करने में योगदान देगा।
4. **चुनौतियाँ और आगे की राह:** सहयोग को और मजबूत करने के लिए नीतिगत समर्थन, वित्तपोषण और नियामक ढांचे में सुधार की आवश्यकता।
5. **निष्कर्ष:** भारत की ऊर्जा सुरक्षा और स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्यों को प्राप्त करने में उद्योग-अकादमिक सहयोग की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित करना।
स्रोत: The Indian Express
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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