24 Jul आरबीआई द्वारा 91, 182 और 364 दिनों के ट्रेजरी बिलों की नीलामी: जानिए पूरी प्रक्रिया
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper III — भारतीय अर्थव्यवस्था तथा योजना, संसाधनों को जुटाने, प्रगति, विकास तथा रोज़गार से संबंधित विषय। सरकारी बजट के घटक तथा राजकोषीय नीति। | GS Paper III — वित्तीय बाज़ार और भारतीय रिज़र्व बैंक की भूमिका।
- Prelims: ट्रेजरी बिल (Treasury Bills), सरकारी प्रतिभूतियाँ (Government Securities), अल्पकालिक ऋण साधन, मुद्रा बाज़ार (Money Market), राजकोषीय घाटा (Fiscal Deficit), भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI), खुला बाज़ार परिचालन (Open Market Operations), गैर-प्रतिस्पर्धी बोली (Non-Competitive Bidding), RBI रिटेल डायरेक्ट स्कीम (RBI Retail Direct Scheme)
- Essay: भारत में राजकोषीय स्थिरता और आर्थिक संवृद्धि के लिए मौद्रिक नीति की भूमिका।, सरकारी उधारी: चुनौतियाँ और समाधान।
त्वरित पुनरावृत्ति: ट्रेजरी बिल भारत सरकार द्वारा जारी किए गए अल्पकालिक, शून्य-कूपन ऋण साधन हैं जो सरकार की अल्पकालिक उधारी आवश्यकताओं को पूरा करते हैं और RBI द्वारा मौद्रिक नीति के तहत तरलता प्रबंधन में उपयोग किए जाते हैं।
यह खबर चर्चा में क्यों?
यह नीलामी सरकार की अल्पकालिक उधारी आवश्यकताओं को पूरा करने और बाज़ार में तरलता (Liquidity) को प्रबंधित करने के लिए एक नियमित प्रक्रिया का हिस्सा है। इस घोषणा में ट्रेजरी बिलों की नीलामी प्रक्रिया, पात्रता मानदंड और खुदरा निवेशकों की भागीदारी के संबंध में महत्वपूर्ण विवरण शामिल हैं, जो सरकारी वित्त और मौद्रिक प्रबंधन के लिए इन उपकरणों के महत्व को रेखांकित करते हैं।
पृष्ठभूमि
- भारत सरकार अपनी अल्पकालिक वित्तीय आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए ट्रेजरी बिल जारी करती है।
- ये बिल मुद्रा बाज़ार (Money Market) के महत्वपूर्ण घटक हैं और भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा सरकार के एजेंट के रूप में जारी किए जाते हैं।
- ट्रेजरी बिलों की नीलामी भारतीय रिज़र्व बैंक की मौद्रिक नीति (Monetary Policy) के कार्यान्वयन और बाज़ार में तरलता प्रबंधन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
- ये उपकरण निवेशकों के लिए सुरक्षित निवेश विकल्प प्रदान करते हैं और बैंकों तथा वित्तीय संस्थानों के लिए अपनी अल्पकालिक तरलता को प्रबंधित करने में सहायक होते हैं।
- हालिया नीलामी में व्यक्तिगत निवेशक भी RBI रिटेल डायरेक्ट पोर्टल के माध्यम से गैर-प्रतिस्पर्धी आधार पर भाग ले सकते हैं, जिससे खुदरा भागीदारी को बढ़ावा मिलता है।
- ट्रेजरी बिलों की बिक्री से प्राप्त धन का उपयोग सरकार अपने राजकोषीय घाटे (Fiscal Deficit) को वित्तपोषित करने और विभिन्न सरकारी व्ययों को पूरा करने के लिए करती है।
ट्रेजरी बिल (Treasury Bills) क्या हैं?
- ट्रेजरी बिल, जिन्हें ‘टी-बिल’ भी कहा जाता है, भारत सरकार द्वारा जारी किए गए अल्पकालिक ऋण साधन हैं।
- ये वर्तमान में तीन परिपक्वता अवधियों में जारी किए जाते हैं: 91 दिन, 182 दिन और 364 दिन।
- ट्रेजरी बिल शून्य-कूपन प्रतिभूतियाँ (Zero-Coupon Securities) होती हैं, जिसका अर्थ है कि उन पर कोई ब्याज नहीं दिया जाता है। इसके बजाय, उन्हें अंकित मूल्य (Face Value) से छूट पर जारी किया जाता है और परिपक्वता पर अंकित मूल्य पर भुनाया जाता है।
- इनका जारीकर्ता भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) है, जो सरकार के लिए ऋण प्रबंधक के रूप में कार्य करता है।
- ट्रेजरी बिल मुद्रा बाज़ार का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं, जो अल्पकालिक निधियों के उधार और उधार देने के लिए एक मंच प्रदान करते हैं।
- ये अत्यधिक तरल (Highly Liquid) होते हैं और इन्हें द्वितीयक बाज़ार (Secondary Market) में आसानी से खरीदा और बेचा जा सकता है।
- ट्रेजरी बिल सरकार के लिए अल्पकालिक धन जुटाने का एक साधन हैं और RBI के लिए खुले बाज़ार परिचालन (Open Market Operations) के माध्यम से बाज़ार में तरलता को नियंत्रित करने का एक उपकरण भी हैं।
- व्यक्तिगत निवेशक अब RBI रिटेल डायरेक्ट स्कीम के तहत गैर-प्रतिस्पर्धी बोली (Non-Competitive Bidding) के माध्यम से ट्रेजरी बिलों में निवेश कर सकते हैं, जिससे खुदरा भागीदारी बढ़ती है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| ट्रेजरी बिल (टी-बिल) | ये भारत सरकार द्वारा जारी किए गए अल्पकालिक ऋण साधन हैं, जिनकी परिपक्वता अवधि एक वर्ष से कम होती है। इनका उपयोग सरकार की अल्पकालिक नकदी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए किया जाता है। |
| अवधि | वर्तमान नीलामी में 91-दिवसीय, 182-दिवसीय और 364-दिवसीय ट्रेजरी बिल शामिल हैं, जो विभिन्न परिपक्वता अवधि के विकल्प प्रदान करते हैं। |
| अधिसूचित राशि | कुल 24,000 करोड़ रुपये की अधिसूचित राशि के लिए नीलामी की जा रही है, जिसमें 91-दिवसीय टी-बिल के लिए 9,000 करोड़, 182-दिवसीय टी-बिल के लिए 8,000 करोड़ और 364-दिवसीय टी-बिल के लिए 7,000 करोड़ शामिल हैं। |
| नीलामी विधि | यह नीलामी ‘मल्टीपल प्राइस मेथड’ का उपयोग करके मूल्य-आधारित होगी, जिसका अर्थ है कि सफल बोलीदाताओं को उनकी बोली लगाई गई कीमतों पर भुगतान करना होगा। |
| गैर-प्रतिस्पर्धी बोली | राज्य सरकारें, केंद्र शासित प्रदेश, पात्र भविष्य निधि, नामित विदेशी केंद्रीय बैंक और व्यक्ति (खुदरा निवेशक) गैर-प्रतिस्पर्धी आधार पर भाग ले सकते हैं, जिससे छोटे निवेशकों की भागीदारी सुनिश्चित होती है। |
| खुदरा निवेशकों की भागीदारी | खुदरा निवेशक RBI रिटेल डायरेक्ट पोर्टल के माध्यम से गैर-प्रतिस्पर्धी आधार पर बोली लगा सकते हैं, जिसमें अधिसूचित राशि का अधिकतम 5 प्रतिशत उनके लिए आरक्षित है। |
महत्व
आर्थिक महत्व
- ट्रेजरी बिलों की नीलामी सरकार के लिए अल्पकालिक धन जुटाने का एक महत्वपूर्ण साधन है, जिससे राजकोषीय प्रबंधन (Fiscal Management) में सहायता मिलती है।
- यह बाजार में तरलता (Liquidity) को प्रभावित करता है, क्योंकि सरकार द्वारा धन जुटाने से बैंकिंग प्रणाली से तरलता कम होती है।
- टी-बिल की यील्ड (Yield) अल्पकालिक ब्याज दरों के लिए एक बेंचमार्क के रूप में कार्य करती है, जो अर्थव्यवस्था में अन्य अल्पकालिक उधार दरों को प्रभावित करती है।
राजकोषीय प्रबंधन
- सरकार इन उपकरणों का उपयोग अपने दैनिक खर्चों और अल्पकालिक वित्तीय आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए करती है, जिससे राजकोषीय स्थिरता बनी रहती है।
- यह सरकार को अपने ऋण पोर्टफोलियो (Debt Portfolio) का प्रभावी ढंग से प्रबंधन करने में सक्षम बनाता है, जिससे दीर्घकालिक ऋण पर निर्भरता कम होती है।
मौद्रिक नीति
- भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) इन नीलामियों के माध्यम से बाजार में तरलता को नियंत्रित करने और मौद्रिक नीति (Monetary Policy) के उद्देश्यों को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
- टी-बिल की यील्ड में बदलाव RBI के नीतिगत रुख का संकेत दे सकता है, जो निवेशकों और वित्तीय संस्थानों के लिए महत्वपूर्ण है।
वित्तीय समावेशन
- खुदरा निवेशकों के लिए गैर-प्रतिस्पर्धी बोली और RBI रिटेल डायरेक्ट पोर्टल के माध्यम से भागीदारी की अनुमति देना वित्तीय समावेशन (Financial Inclusion) को बढ़ावा देता है और व्यक्तियों को सरकारी प्रतिभूतियों में निवेश करने का अवसर प्रदान करता है।
चुनौतियाँ
1. बढ़ता सरकारी ऋण
- लगातार टी-बिल नीलामियां सरकार की बढ़ती उधारी आवश्यकताओं को दर्शाती हैं, जो दीर्घकालिक राजकोषीय स्थिरता के लिए चिंता का विषय हो सकता है।
- उच्च सरकारी उधारी निजी क्षेत्र के लिए उपलब्ध धन को कम कर सकती है, जिससे ‘क्राउडिंग आउट’ प्रभाव (Crowding Out Effect) हो सकता है।
यूपीएससी लिंक: अर्थव्यवस्था: सरकारी बजट, राजकोषीय नीति
2. ब्याज दर जोखिम
- बढ़ती ब्याज दरें सरकार के लिए उधार लेने की लागत को बढ़ा सकती हैं, जिससे भविष्य में ऋण चुकाने का बोझ बढ़ सकता है।
- बाजार में ब्याज दरों में उतार-चढ़ाव निवेशकों के लिए जोखिम पैदा कर सकता है।
यूपीएससी लिंक: अर्थव्यवस्था: मुद्रास्फीति, मौद्रिक नीति
3. तरलता प्रबंधन
- RBI के लिए बाजार में तरलता का प्रभावी ढंग से प्रबंधन करना एक चुनौती है, खासकर जब सरकार की उधारी आवश्यकताएं अधिक हों।
- अत्यधिक तरलता या तरलता की कमी दोनों ही वित्तीय बाजारों को अस्थिर कर सकते हैं।
यूपीएससी लिंक: अर्थव्यवस्था: बैंकिंग, मौद्रिक नीति
4. खुदरा भागीदारी की सीमाएं
- खुदरा निवेशकों के लिए अधिकतम 5 प्रतिशत की सीमा उनकी भागीदारी को सीमित कर सकती है, खासकर बड़े निर्गमों में।
- छोटे निवेशकों के बीच सरकारी प्रतिभूतियों के बारे में जागरूकता और समझ की कमी भी एक चुनौती हो सकती है।
यूपीएससी लिंक: अर्थव्यवस्था: वित्तीय बाजार, वित्तीय समावेशन
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| उच्च सरकारी उधारी | राजकोषीय घाटा बढ़ सकता है और भविष्य में ऋण चुकाने का बोझ बढ़ सकता है। |
| ब्याज दर में अस्थिरता | सरकार और निवेशकों दोनों के लिए उधार लेने की लागत और निवेश पर रिटर्न को प्रभावित कर सकती है। |
| बाजार तरलता पर प्रभाव | अत्यधिक सरकारी उधारी से बाजार में तरलता की कमी हो सकती है, जिससे निजी निवेश प्रभावित हो सकता है। |
| खुदरा निवेशकों की सीमित पहुंच | छोटे निवेशकों के लिए सरकारी प्रतिभूतियों में निवेश के अवसरों को प्रतिबंधित कर सकती है। |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- RBI रिटेल डायरेक्ट योजना (RBI Retail Direct Scheme)
आगे की राह
- सरकार को राजकोषीय अनुशासन बनाए रखने और धीरे-धीरे राजकोषीय घाटे को कम करने का प्रयास करना चाहिए ताकि उधारी पर निर्भरता कम हो सके।
- RBI को बाजार में तरलता का सावधानीपूर्वक प्रबंधन जारी रखना चाहिए ताकि वित्तीय स्थिरता सुनिश्चित हो सके और ब्याज दरों में अत्यधिक उतार-चढ़ाव को रोका जा सके।
- खुदरा निवेशकों के बीच सरकारी प्रतिभूतियों में निवेश के लाभों और प्रक्रिया के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए शैक्षिक अभियान चलाए जाने चाहिए।
- सरकारी प्रतिभूतियों के बाजार को और अधिक गहरा और तरल बनाने के लिए उपाय किए जाने चाहिए, जिससे सभी प्रकार के निवेशकों के लिए पहुंच आसान हो।
- सार्वजनिक ऋण प्रबंधन कार्यालय (Public Debt Management Agency) की स्थापना पर विचार किया जा सकता है ताकि सरकार की उधारी रणनीति को अधिक पेशेवर और प्रभावी बनाया जा सके।
- दीर्घकालिक विकास को बढ़ावा देने के लिए पूंजीगत व्यय (Capital Expenditure) पर ध्यान केंद्रित किया जाना चाहिए, जिससे राजस्व सृजन में वृद्धि हो और उधारी की आवश्यकता कम हो।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
ट्रेजरी बिल (Treasury Bills) · अल्पकालिक ऋण साधन (Short-term Debt Instrument) · राजकोषीय घाटा (Fiscal Deficit) · भारतीय रिज़र्व बैंक (Reserve Bank of India) · सरकारी प्रतिभूतियाँ (Government Securities) · खुले बाज़ार परिचालन (Open Market Operations) · मुद्रा बाज़ार (Money Market) · गैर-प्रतिस्पर्धी बोली (Non-Competitive Bidding) · खुदरा निवेशक (Retail Investors) · सार्वजनिक ऋण प्रबंधन (Public Debt Management)
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 292’, ‘note’: ‘भारत सरकार द्वारा उधार लेने की शक्ति’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 293’, ‘note’: ‘राज्यों द्वारा उधार लेने की शक्ति’}
अवधारणा प्रवाह
सरकार को अल्पकालिक धन की आवश्यकता होती है। → RBI ट्रेजरी बिलों की नीलामी की घोषणा करता है। → संस्थागत और खुदरा निवेशक बोली लगाते हैं। → सफल बोलीदाताओं को टी-बिल आवंटित किए जाते हैं। → सरकार को धन प्राप्त होता है और निवेशकों को प्रतिभूति मिलती है। → यह सरकार की नकदी आवश्यकताओं को पूरा करता है और बाजार तरलता को प्रभावित करता है।
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. ट्रेजरी बिल के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ये भारत सरकार द्वारा जारी किए गए अल्पकालिक ऋण साधन हैं।
2. इनकी परिपक्वता अवधि 365 दिनों से अधिक होती है।
3. इन्हें भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा नीलाम किया जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
- केवल 1
- केवल 2 और 3
- केवल 1 और 3
- 1, 2 और 3
उत्तर: केवल 1 और 3 — कथन 1 सही है क्योंकि ट्रेजरी बिल भारत सरकार द्वारा जारी किए गए अल्पकालिक ऋण साधन हैं। कथन 2 गलत है क्योंकि इनकी परिपक्वता अवधि 365 दिनों से कम होती है (जैसे 91 दिन, 182 दिन, 364 दिन)। कथन 3 सही है क्योंकि RBI भारत सरकार की ओर से ट्रेजरी बिलों की नीलामी करता है।
Q2. ट्रेजरी बिलों की नीलामी में गैर-प्रतिस्पर्धी बोली (Non-Competitive Bidding) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. यह छोटे निवेशकों को नीलामी प्रक्रिया में भाग लेने की अनुमति देता है।
2. इसमें निवेशक अपनी बोली में उपज दर (yield rate) निर्दिष्ट करते हैं।
3. खुदरा निवेशक RBI के रिटेल डायरेक्ट पोर्टल के माध्यम से इसमें भाग ले सकते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
- केवल 1 और 2
- केवल 2 और 3
- केवल 1 और 3
- 1, 2 और 3
उत्तर: केवल 1 और 3 — कथन 1 सही है क्योंकि गैर-प्रतिस्पर्धी बोली छोटे और खुदरा निवेशकों को नीलामी में भाग लेने का अवसर देती है। कथन 2 गलत है क्योंकि गैर-प्रतिस्पर्धी बोली में निवेशक उपज दर निर्दिष्ट नहीं करते, बल्कि उन्हें प्रतिस्पर्धी बोलीदाताओं द्वारा निर्धारित भारित औसत उपज दर पर आवंटन मिलता है। कथन 3 सही है क्योंकि खुदरा निवेशक RBI के रिटेल डायरेक्ट पोर्टल के माध्यम से गैर-प्रतिस्पर्धी आधार पर बोली लगा सकते हैं।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ ट्रेजरी बिल क्या हैं और ये भारतीय अर्थव्यवस्था में राजकोषीय प्रबंधन तथा मौद्रिक नीति के उद्देश्यों को प्राप्त करने में कैसे सहायक होते हैं? भारत में खुदरा निवेशकों के लिए ट्रेजरी बिलों में निवेश के अवसरों का समालोचनात्मक विश्लेषण कीजिए। (250 शब्द)
रूपरेखा: प्रश्न के पहले भाग में ट्रेजरी बिलों की परिभाषा, उनकी विशेषताओं और राजकोषीय प्रबंधन (सरकार के अल्पकालिक वित्तपोषण) तथा मौद्रिक नीति (RBI के खुले बाज़ार परिचालन) में उनकी भूमिका को स्पष्ट करें। दूसरे भाग में खुदरा निवेशकों के लिए ट्रेजरी बिलों में निवेश के अवसरों (जैसे रिटेल डायरेक्ट योजना, सुरक्षा, तरलता) का उल्लेख करें और साथ ही इससे जुड़ी चुनौतियों या सीमाओं (जैसे कम प्रतिफल, जागरूकता की कमी) का भी विश्लेषण करें। निष्कर्ष में उनके महत्व को संक्षेप में दोहराएँ।
स्रोत: RBI
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

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