06 Aug ‘इंडिया-एआई मिशन’ से स्वदेशी एआई अवसंरचना को मिलेगा बड़ा बढ़ावा, जानिए कैसे होगा फायदा
✎ इंडिया-एआई मिशन और सेमीकंडक्टर पहलें भारत को कृत्रिम बुद्धिमत्ता और सेमीकंडक्टर प्रौद्योगिकियों में आत्मनिर्भर बनाने, नवाचार को बढ़ावा देने और आर्थिक संवृद्धि सुनिश्चित करने के लिए सरकार की एक रणनीतिक पहल है।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper III — विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी | GS Paper III — अर्थव्यवस्था
- Prelims: इंडिया-एआई मिशन, सेमीकंडक्टर, फाउंडेशन मॉडल, लार्ज मल्टीमॉडल मॉडल (एलएमएम), स्मॉल लैंग्वेज मॉडल (एसएलएम), एनएम-आईसीपीएस, साइबर-फिजिकल सिस्टम्स, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई)
- Essay: भारत में तकनीकी आत्मनिर्भरता और आर्थिक संवृद्धि में कृत्रिम बुद्धिमत्ता की भूमिका, डिजिटल इंडिया: चुनौतियाँ और अवसर
त्वरित पुनरावृत्ति: इंडिया-एआई मिशन और सेमीकंडक्टर पहलें भारत को कृत्रिम बुद्धिमत्ता और सेमीकंडक्टर प्रौद्योगिकियों में आत्मनिर्भर बनाने, नवाचार को बढ़ावा देने और आर्थिक संवृद्धि सुनिश्चित करने के लिए सरकार की एक रणनीतिक पहल है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
भारत सरकार ने ‘इंडिया-एआई मिशन’ और ‘इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन’ के माध्यम से देश में स्वदेशी कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) अवसंरचना और सेमीकंडक्टर विनिर्माण क्षमताओं के विस्तार की घोषणा की है। यह पहलें भारत को एआई मूल्य श्रृंखला में आत्मनिर्भर बनाने और प्रौद्योगिकी के उपयोग को सभी के लिए सुलभ बनाने के प्रधानमंत्री के दृष्टिकोण के अनुरूप हैं, जिसका उद्देश्य भारत-केंद्रित चुनौतियों का समाधान करना और आर्थिक व रोजगार के अवसर पैदा करना है।
पृष्ठभूमि
- भारत सरकार एआई मूल्य श्रृंखला में स्वदेशी प्रौद्योगिकी विकसित करने के लिए एक बहु-आयामी और संतुलित दृष्टिकोण अपना रही है, ताकि सेमीकंडक्टर विनिर्माण, कंप्यूटिंग अवसंरचना, फाउंडेशनल मॉडल और उन्नत अनुसंधान इकोसिस्टम में सीमित घरेलू क्षमताओं से जुड़े जोखिमों को कम किया जा सके।
- ‘इंडिया-एआई मिशन’ को 7 मार्च 2024 को 10,371.92 करोड़ रुपये के कुल बजट के साथ पाँच वर्षों के लिए मंज़ूरी दी गई थी, जिसका उद्देश्य भारत के विकास लक्ष्यों के अनुरूप एक मज़बूत और समावेशी एआई इकोसिस्टम का निर्माण करना है।
- इस मिशन के तहत, 20 स्वदेशी फाउंडेशन मॉडल प्रस्तावों की सहायता के लिए पहचान की गई है, जिनमें 12 लार्ज मल्टीमॉडल मॉडल (एलएमएम) और 8 स्मॉल लैंग्वेज मॉडल (एसएलएम) शामिल हैं, जिनके बौद्धिक संपदा अधिकार आवेदकों के पास ही रहेंगे।
- घरेलू सेमीकंडक्टर विनिर्माण को मज़बूती प्रदान करने के लिए ‘आत्मनिर्भर भारत’ और भारत को इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण का एक वैश्विक केंद्र बनाने के दृष्टिकोण से प्रेरित होकर, सरकार ने सेमीकंडक्टर सहित संपूर्ण मूल्य श्रृंखला में इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण के विकास के लिए लक्षित नीतिगत पहलें अपनाई हैं।
- विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग ‘इंटरडिसिप्लिनरी साइबर-फिजिकल सिस्टम्स पर राष्ट्रीय मिशन’ (एनएम-आईसीपीएस) को 3,660 करोड़ रुपये के परिव्यय के साथ लागू कर रहा है, जिसके तहत देश भर में 25 प्रौद्योगिकी नवाचार केंद्र (टीआईएच) स्थापित किए गए हैं।
- इन पहलों का उद्देश्य भारत को एआई और सेमीकंडक्टर प्रौद्योगिकियों में वैश्विक नेता बनाना, नवाचार को बढ़ावा देना और कुशल कार्यबल तैयार करना है।
- सरकार ने सब्सिडी वाले कंप्यूट सपोर्ट के लिए 237 परियोजनाओं को मंज़ूरी दी है और 93.18 लाख GPU घंटे स्वीकृत किए हैं, साथ ही NIC डेटा सेंटर, शास्त्री पार्क, दिल्ली में हाई-परफॉर्मेंस एआई कंप्यूट सिस्टम के लिए खरीद का आदेश जारी किया है।
इंडिया-एआई मिशन और सेमीकंडक्टर पहलें क्या हैं?
- इंडिया-एआई मिशन: यह भारत में एक मज़बूत और समावेशी कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) इकोसिस्टम बनाने के लिए एक व्यापक सरकारी पहल है, जिसमें स्वदेशी फाउंडेशन मॉडल, एआई कंप्यूट क्षमता, एप्लिकेशन विकास, उत्कृष्टता केंद्र और सुरक्षित व विश्वसनीय एआई पर ध्यान केंद्रित किया गया है।
- स्वदेशी फाउंडेशन मॉडल: मिशन के तहत, भारत-केंद्रित चुनौतियों का समाधान करने के लिए लार्ज मल्टीमॉडल मॉडल (एलएमएम) और स्मॉल लैंग्वेज मॉडल (एसएलएम) सहित स्वदेशी एआई मॉडल विकसित किए जा रहे हैं, जिनके बौद्धिक संपदा अधिकार आवेदकों के पास रहेंगे।
- एआई कंप्यूट क्षमता: सरकार एआई अनुसंधान और विकास को बढ़ावा देने के लिए सब्सिडी वाले कंप्यूट सपोर्ट और हाई-परफॉर्मेंस एआई कंप्यूट सिस्टम की खरीद के माध्यम से आवश्यक कंप्यूटिंग अवसंरचना प्रदान कर रही है।
- एप्लिकेशन विकास: सार्वजनिक क्षेत्र के संस्थानों में एआई समाधानों को तैनात करने और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रीय स्तर के हैकाथॉन और नवाचार चुनौतियाँ शुरू की गई हैं, जिससे विभिन्न क्षेत्रों में एआई प्रोटोटाइप विकसित किए जा रहे हैं।
- एआई उत्कृष्टता केंद्र: राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में एआई उत्कृष्टता केंद्रों की स्थापना की जा रही है, जो एआई अनुसंधान, विकास और कौशल निर्माण के लिए हब के रूप में कार्य करेंगे।
- सुरक्षित एवं विश्वसनीय एआई: मिशन पूर्वाग्रह उन्मूलन, मशीन अनलर्निंग, गोपनीयता-संरक्षित एआई, एल्गोरिदम ऑडिटिंग और व्याख्यात्मकता जैसी चिंताओं को दूर करने वाली परियोजनाओं का समर्थन करके सुरक्षित और नैतिक एआई के विकास पर भी केंद्रित है।
- इंटरडिसिप्लिनरी साइबर-फिजिकल सिस्टम्स पर राष्ट्रीय मिशन (एनएम-आईसीपीएस): यह मिशन विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा कार्यान्वित किया जा रहा है, जिसका उद्देश्य साइबर-फिजिकल सिस्टम्स (CPS) में प्रौद्योगिकी विकास, मानव संसाधन विकास और नवाचार को बढ़ावा देना है, जिसमें एआई और मशीन लर्निंग जैसे क्षेत्र शामिल हैं।
- सेमीकंडक्टर पहलें: भारत सरकार सेमीकंडक्टर विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए लक्षित नीतिगत पहलें अपना रही है, ताकि भारत को इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण का एक वैश्विक केंद्र बनाया जा सके और सेमीकंडक्टर मूल्य श्रृंखला में आत्मनिर्भरता हासिल की जा सके।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| स्वदेशी फाउंडेशन मॉडल | भारत-केंद्रित चुनौतियों का समाधान करने और बौद्धिक संपदा अधिकारों को देश में बनाए रखने में सहायक। |
| एआई कंप्यूट क्षमता का विस्तार | उच्च प्रदर्शन वाले एआई कंप्यूट सिस्टम की खरीद और सब्सिडी वाले कंप्यूट सपोर्ट से अनुसंधान एवं विकास को बढ़ावा। |
| एप्लिकेशन विकास और हैकाथॉन | सार्वजनिक क्षेत्र के लिए एआई समाधानों का विकास और नवाचार को प्रोत्साहन। |
| एआई उत्कृष्टता केंद्र | राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में एआई इकोसिस्टम को मजबूत करना और स्थानीय नवाचार को बढ़ावा देना। |
| सुरक्षित एवं विश्वसनीय एआई | पूर्वाग्रह उन्मूलन, गोपनीयता-संरक्षण और एल्गोरिदम ऑडिटिंग के माध्यम से नैतिक एआई विकास सुनिश्चित करना। |
| सेमीकंडक्टर विनिर्माण को मजबूती | इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण में आत्मनिर्भरता और वैश्विक केंद्र बनने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम। |
महत्व
आर्थिक महत्व
- एआई और सेमीकंडक्टर क्षेत्रों में घरेलू क्षमताओं के विकास से आर्थिक संवृद्धि (Economic Growth) को बढ़ावा मिलेगा।
- नए रोजगार के अवसर सृजित होंगे, विशेषकर उन्नत प्रौद्योगिकी और विनिर्माण क्षेत्रों में।
- तकनीकी आत्मनिर्भरता से आयात पर निर्भरता कम होगी, जिससे विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव घटेगा।
सामरिक महत्व
- स्वदेशी एआई अवसंरचना और सेमीकंडक्टर विनिर्माण से राष्ट्रीय सुरक्षा मजबूत होगी, क्योंकि महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों पर बाहरी निर्भरता कम होगी।
- भारत वैश्विक प्रौद्योगिकी आपूर्ति श्रृंखला में एक महत्वपूर्ण खिलाड़ी के रूप में उभरेगा।
- डेटा संप्रभुता (Data Sovereignty) और गोपनीयता सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी, क्योंकि एआई मॉडल और कंप्यूट क्षमताएं देश के भीतर विकसित होंगी।
सामाजिक महत्व
- भारत-केंद्रित एआई समाधानों से शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा और कृषि जैसे क्षेत्रों में सामाजिक चुनौतियों का समाधान होगा।
- डिजिटल समावेशन (Digital Inclusion) को बढ़ावा मिलेगा, जिससे प्रौद्योगिकी का लाभ समाज के सभी वर्गों तक पहुंचेगा।
- मानव संसाधन और कौशल विकास कार्यक्रमों से युवाओं को भविष्य की नौकरियों के लिए तैयार किया जाएगा।
तकनीकी महत्व
- स्वदेशी फाउंडेशन मॉडल और उच्च प्रदर्शन कंप्यूटिंग क्षमता से अत्याधुनिक अनुसंधान और विकास को गति मिलेगी।
- साइबर-फिजिकल सिस्टम्स (Cyber-Physical Systems) में नवाचार से विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों में दक्षता बढ़ेगी।
- सुरक्षित और विश्वसनीय एआई के विकास से प्रौद्योगिकी के नैतिक उपयोग को बढ़ावा मिलेगा।
चुनौतियाँ
1. कुशल मानव संसाधन की कमी
- एआई और सेमीकंडक्टर जैसे उन्नत प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में विशेषज्ञता वाले पेशेवरों की उपलब्धता सीमित है।
- तेजी से विकसित हो रही प्रौद्योगिकी के साथ तालमेल बिठाने के लिए निरंतर कौशल उन्नयन (Skill Upgradation) की आवश्यकता है।
यूपीएससी लिंक: सामान्य अध्ययन-III: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी
2. उच्च पूंजी निवेश और लंबी गर्भावधि
- सेमीकंडक्टर विनिर्माण सुविधाओं की स्थापना के लिए भारी पूंजी निवेश की आवश्यकता होती है।
- इन परियोजनाओं की गर्भावधि (Gestation Period) लंबी होती है, जिससे निवेश पर रिटर्न देर से मिलता है।
यूपीएससी लिंक: सामान्य अध्ययन-III: भारतीय अर्थव्यवस्था
3. वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर निर्भरता
- कुछ महत्वपूर्ण घटकों और प्रौद्योगिकियों के लिए अभी भी वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं पर निर्भरता बनी हुई है।
- भू-राजनीतिक तनाव और व्यापार बाधाएं आपूर्ति में व्यवधान पैदा कर सकती हैं।
यूपीएससी लिंक: सामान्य अध्ययन-III: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी
4. डेटा गोपनीयता और सुरक्षा संबंधी चिंताएं
- एआई सिस्टम के लिए बड़ी मात्रा में डेटा की आवश्यकता होती है, जिससे डेटा गोपनीयता (Data Privacy) और सुरक्षा (Security) से संबंधित चुनौतियां उत्पन्न होती हैं।
- एल्गोरिथम में पूर्वाग्रह (Bias) की संभावना नैतिक और सामाजिक मुद्दों को जन्म दे सकती है।
यूपीएससी लिंक: सामान्य अध्ययन-III: आंतरिक सुरक्षा
5. अनुसंधान एवं विकास में निवेश
- उन्नत एआई और सेमीकंडक्टर प्रौद्योगिकियों में निरंतर अनुसंधान एवं विकास (Research and Development) के लिए पर्याप्त और स्थायी निवेश की आवश्यकता है।
- निजी क्षेत्र की भागीदारी को और अधिक प्रोत्साहित करने की आवश्यकता है।
यूपीएससी लिंक: सामान्य अध्ययन-III: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| घरेलू क्षमताएं | सेमीकंडक्टर विनिर्माण, कंप्यूटिंग अवसंरचना और फाउंडेशनल मॉडल में सीमित घरेलू क्षमताएं। |
| बौद्धिक संपदा | स्वदेशी मॉडलों के बौद्धिक संपदा अधिकारों का संरक्षण और उनका वाणिज्यिक उपयोग। |
| सुरक्षित एआई | पूर्वाग्रह उन्मूलन, मशीन अनलर्निंग, गोपनीयता-संरक्षित एआई और एल्गोरिथम ऑडिटिंग सुनिश्चित करना। |
| मानव संसाधन | उन्नत एआई और साइबर-फिजिकल सिस्टम्स के लिए कुशल कार्यबल का विकास। |
| वित्तपोषण | सेमीकंडक्टर और एआई अनुसंधान एवं विकास के लिए निरंतर और पर्याप्त वित्तीय सहायता। |
| प्रौद्योगिकी हस्तांतरण | सरकारी संगठनों और उद्योग के बीच प्रौद्योगिकी हस्तांतरण को सुगम बनाना। |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- इंडिया-एआई मिशन
- इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन
- इंटरडिसिप्लिनरी साइबर-फिजिकल सिस्टम्स पर राष्ट्रीय मिशन (NM-ICPS)
आगे की राह
- एआई और सेमीकंडक्टर क्षेत्रों में अनुसंधान एवं विकास के लिए सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के निवेश को और बढ़ाना।
- शैक्षणिक संस्थानों, उद्योग और सरकार के बीच सहयोग को मजबूत करना ताकि नवाचार को बढ़ावा मिल सके।
- उन्नत प्रौद्योगिकी कौशल वाले कार्यबल को विकसित करने के लिए शिक्षा और प्रशिक्षण कार्यक्रमों में सुधार करना।
- डेटा गोपनीयता और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए मजबूत नियामक ढांचा विकसित करना और नैतिक एआई सिद्धांतों को लागू करना।
- वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में लचीलापन लाने और महत्वपूर्ण घटकों के लिए घरेलू उत्पादन क्षमताओं को बढ़ाना।
- एआई अनुप्रयोगों के लिए एक मजबूत और सुरक्षित डिजिटल अवसंरचना (Digital Infrastructure) का निर्माण करना।
- छोटे और मध्यम उद्यमों (MSMEs) तथा स्टार्टअप्स को एआई और सेमीकंडक्टर क्षेत्रों में नवाचार के लिए प्रोत्साहित करना।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
इंडिया-एआई मिशन · सेमीकंडक्टर पहलें · स्वदेशी एआई अवसंरचना · फाउंडेशन मॉडल · एआई कंप्यूट क्षमता · प्रौद्योगिकी आत्मनिर्भरता · राष्ट्रीय इंटरडिसिप्लिनरी साइबर-फिजिकल सिस्टम्स मिशन · एआई उत्कृष्टता केंद्र · सुरक्षित एवं विश्वसनीय एआई · डिजिटल इंडिया · मेक इन इंडिया · आत्मनिर्भर भारत
अवधारणा प्रवाह
सीमित घरेलू क्षमताएं → सरकार की बहु-आयामी रणनीति (इंडिया-एआई, इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन) → स्वदेशी फाउंडेशन मॉडल और कंप्यूट क्षमता का विकास → अनुसंधान, विकास और अनुप्रयोगों में वृद्धि → प्रौद्योगिकी आत्मनिर्भरता और आर्थिक संवृद्धि
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ‘इंडिया-एआई मिशन’ का उद्देश्य भारत-केंद्रित चुनौतियों का समाधान करना और सभी भारतीयों के लिए आर्थिक और रोजगार के अवसर पैदा करना है।
2. इस मिशन के तहत, स्वदेशी फाउंडेशन मॉडल के बौद्धिक संपदा अधिकार सरकार के पास रहेंगे।
3. ‘इंटरडिसिप्लिनरी साइबर-फिजिकल सिस्टम्स पर राष्ट्रीय मिशन’ (एनएम-आईसीपीएस) विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा कार्यान्वित किया जा रहा है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- केवल तीन
- कोई नहीं
उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है। ‘इंडिया-एआई मिशन’ का उद्देश्य भारत-केंद्रित चुनौतियों का समाधान करना और सभी भारतीयों के लिए आर्थिक और रोजगार के अवसर पैदा करना है। कथन 2 गलत है। स्वदेशी फाउंडेशन मॉडल के बौद्धिक संपदा अधिकार आवेदकों के पास ही रहेंगे, सरकार के पास नहीं। कथन 3 सही है। एनएम-आईसीपीएस विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा कार्यान्वित किया जा रहा है।
Q2. निम्नलिखित में से कौन-सा/से ‘इंडिया-एआई मिशन’ का/के प्रमुख घटक है/हैं?
1. स्वदेशी फाउंडेशन मॉडल का विकास
2. एआई कंप्यूट क्षमता का विस्तार
3. एआई अनुप्रयोग विकास को बढ़ावा देना
4. एआई उत्कृष्टता केंद्रों की स्थापना
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:
- केवल 1 और 2
- केवल 2, 3 और 4
- केवल 1, 3 और 4
- 1, 2, 3 और 4
उत्तर: 1, 2, 3 और 4 — दिए गए सभी घटक ‘इंडिया-एआई मिशन’ के प्रमुख भाग हैं। इसमें स्वदेशी मॉडल का विकास, कंप्यूट क्षमता का विस्तार, एप्लिकेशन विकास और उत्कृष्टता केंद्रों की स्थापना शामिल है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ भारत में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) अवसंरचना के विस्तार में ‘इंडिया-एआई मिशन’ और सेमीकंडक्टर पहलों की भूमिका का परीक्षण कीजिए। यह किस प्रकार प्रौद्योगिकी आत्मनिर्भरता और समावेशी विकास को बढ़ावा देगा? (15 Marks)
रूपरेखा: परिचय: ‘इंडिया-एआई मिशन’ और सेमीकंडक्टर पहलों का संक्षिप्त परिचय दें।
मुख्य भाग:
1. ‘इंडिया-एआई मिशन’ के प्रमुख घटकों की व्याख्या करें: स्वदेशी फाउंडेशन मॉडल (जैसे सर्वम, इंडस, भारतजेन), एआई कंप्यूट क्षमता का विस्तार (GPU घंटे, हाई-परफॉर्मेंस सिस्टम), एप्लिकेशन विकास (हैकाथॉन, प्रोटोटाइप), उत्कृष्टता केंद्र और सुरक्षित एवं विश्वसनीय एआई पर ध्यान।
2. सेमीकंडक्टर पहलों की भूमिका: घरेलू सेमीकंडक्टर विनिर्माण को मजबूत करने और इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण में आत्मनिर्भरता प्राप्त करने में महत्व।
3. प्रौद्योगिकी आत्मनिर्भरता को बढ़ावा: कैसे ये पहलें आयात पर निर्भरता कम करेंगी, घरेलू नवाचार को प्रोत्साहित करेंगी और भारत को वैश्विक प्रौद्योगिकी केंद्र बनाएंगी।
4. समावेशी विकास: भारत-केंद्रित चुनौतियों का समाधान, आर्थिक और रोजगार के अवसर पैदा करना, डिजिटल विभाजन को कम करना और सभी भारतीयों तक प्रौद्योगिकी की पहुंच सुनिश्चित करना।
निष्कर्ष: भारत के डिजिटल भविष्य और वैश्विक एआई परिदृश्य में इसकी भूमिका पर इन पहलों के समग्र प्रभाव का सारांश प्रस्तुत करें।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

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