24 Oct ‘इंडिया केम-2026’ मुंबई में संपन्न: वैश्विक रसायन केंद्र बनने की ओर भारत
✎ प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार रसायन एवं पेट्रो-रसायन क्षेत्र को 'विकसित भारत @ 2047' के लिए 2040 तक लगभग 1 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर और 2047 तक लगभग 1.6 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर के बाज़ार तक पहुंचना है, जिसके लिए निवेश, नवाचार और पर्यावरणीय…
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — अंतर्राष्ट्रीय संबंध (भारत-जापान, भारत-अमेरिका और भारत-यूरोपीय संघ के साथ आर्थिक सहयोग) | GS Paper III — अर्थव्यवस्था (औद्योगिक विकास, निवेश और विनिर्माण क्षेत्र) | GS Paper III — पर्यावरण (औद्योगिक प्रदूषण और खतरनाक रसायनों का प्रबंधन)
- Prelims: पेट्रो-रसायन (Petrochemicals), पेट्रोलियम, रसायन एवं पेट्रो-रसायन निवेश क्षेत्र (PCPIR), रसायन एवं पेट्रो-रसायन विभाग (Department of Chemicals and Petrochemicals), फिक्की (FICCI), कृषि रसायन (Agrochemicals), खतरनाक रसायन (निर्माण, भंडारण और आयात) नियम, 1989, पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986, रासायनिक दुर्घटना (आपात स्थिति आयोजन, तैयारी और प्रतिक्रिया) नियम, 1996
- Essay: विकसित भारत @ 2047 के लक्ष्य में विनिर्माण और रसायन क्षेत्र की भूमिका, टिकाऊ औद्योगिक विकास: आर्थिक संवृद्धि और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन
त्वरित पुनरावृत्ति: प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार रसायन एवं पेट्रो-रसायन क्षेत्र को ‘विकसित भारत @ 2047’ के लिए 2040 तक लगभग 1 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर और 2047 तक लगभग 1.6 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर के बाज़ार तक पहुंचना है, जिसके लिए निवेश, नवाचार और पर्यावरणीय संतुलन आवश्यक है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
मुंबई में 22 अक्टूबर को शुरू हुआ तीन दिवसीय कार्यक्रम ‘इंडिया केम-2026’ संपन्न हो गया। यह रसायन एवं पेट्रो-रसायन विभाग और फिक्की द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित 14वाँ द्विवार्षिक अंतर्राष्ट्रीय प्रदर्शनी और सम्मेलन था, जिसका विषय ‘एडवांटेज भारत: एक उभरता हुआ वैश्विक रसायन केंद्र’ था। इसमें जापान साझीदार देश रहा। कार्यक्रम में सीईओ फोरम के अलावा भारत-जापान, भारत-अमेरिका और भारत-यूरोपीय संघ रसायन एवं पेट्रो-रसायन फोरम के सत्र हुए, तथा विशेष रसायन, बुनियादी ढांचा, कृषि रसायन, पर्यावरण, संयंत्र मशीनरी और पंप व वाल्व जैसे विषयों पर गोलमेज चर्चाएं हुईं। प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, केंद्रीय मंत्री ने इस क्षेत्र का मौजूदा बाजार आकार लगभग 220 अरब अमेरिकी डॉलर बताते हुए इसे 2040 तक लगभग 1 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर और 2047 तक लगभग 1.6 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर तक ले जाने का लक्ष्य रखा। ‘इंडिया केम युवा नवाचार चुनौती’ नई पहल के रूप में शुरू की गई, जिसमें छात्रों ने उद्योग से जुड़ी समस्याओं के समाधान प्रस्तुत किए।
पृष्ठभूमि
- स्वतंत्रता के बाद भारत में रसायन उद्योग का आधार मुख्यतः सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों ने रखा। 1991 के आर्थिक सुधारों के बाद निजी और विदेशी निवेश को बढ़ावा मिला और उद्योग का विस्तार तेज़ हुआ।
- रसायन उद्योग को ‘उद्योगों का उद्योग’ कहा जाता है, क्योंकि कृषि, दवा, प्लास्टिक, वस्त्र, इलेक्ट्रॉनिक्स और ऑटोमोबाइल जैसे अनेक क्षेत्र इसके मध्यवर्ती उत्पादों पर निर्भर हैं। इसलिए इसका आर्थिक गुणक प्रभाव व्यापक होता है।
- पेट्रो-रसायन क्षेत्र के विकास के लिए पेट्रोलियम, रसायन एवं पेट्रो-रसायन निवेश क्षेत्र (PCPIR) की अवधारणा अपनाई गई, जिसके तहत गुजरात के दहेज और आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम जैसे क्षेत्र विकसित किए गए।
- रसायन उद्योग से होने वाले पर्यावरणीय जोखिमों के प्रबंधन के लिए पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 बनाया गया। भोपाल गैस त्रासदी (1984) के बाद इस अधिनियम के अंतर्गत खतरनाक रसायनों और रासायनिक दुर्घटनाओं से जुड़े नियम बनाए गए।
- भारत के लिए जापान, अमेरिका और यूरोपीय संघ प्रमुख व्यापारिक और तकनीकी साझेदार हैं, इसलिए इन देशों के साथ द्विपक्षीय फोरम निवेश और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण के मंच बनते हैं।
रसायन एवं पेट्रो-रसायन क्षेत्र क्या है?
- रसायन उद्योग को मोटे तौर पर बुनियादी (Basic) रसायन, विशेष (Specialty) रसायन और उपभोक्ता रसायन में बांटा जाता है। बुनियादी रसायनों में अम्ल और क्षार जैसे उत्पाद आते हैं।
- पेट्रो-रसायन उद्योग कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस से प्राप्त नाफ्था, इथेन जैसे फीडस्टॉक से शुरू होता है। इससे एथिलीन और प्रोपिलीन जैसे आधार रसायन बनते हैं, जिनसे पॉलिमर (जैसे पॉलीएथिलीन और पॉलीप्रोपिलीन) तैयार होते हैं।
- विशेष रसायन कम मात्रा में, परंतु उच्च मूल्य पर बिकते हैं। इनमें कोटिंग, चिपकाने वाले पदार्थ और इलेक्ट्रॉनिक रसायन जैसे उत्पाद आते हैं।
- कृषि रसायन में कीटनाशक और खरपतवारनाशक शामिल हैं। उर्वरक क्षेत्र का प्रशासनिक संबंध भी रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय से है।
- इस क्षेत्र की प्रशासनिक संरचना में रसायन एवं पेट्रो-रसायन विभाग केंद्रीय स्तर पर नीति और समन्वय का कार्य करता है।
- प्रमुख चुनौतियों में कच्चे माल के लिए आयात पर निर्भरता, वैश्विक प्रतिस्पर्धियों के पैमाने का अंतर, बुनियादी ढांचा, नियामक स्पष्टता और पर्यावरणीय अनुपालन शामिल हैं।
- टिकाऊ विकास के लिए हरित रसायन (Green Chemistry), अपशिष्ट पुनर्चक्रण और ऊर्जा-दक्ष संयंत्रों पर बल दिया जा रहा है।
मुख्य विशेषताएँ
| Feature | Significance |
|---|---|
| आयोजक और मंच: रसायन एवं पेट्रोकेमिकल विभाग (Department of Chemicals and Petrochemicals) और फिक्की (FICCI) द्वारा संयुक्त आयोजन | सरकार और उद्योग के बीच नीति-संवाद का संस्थागत मंच, जिसमें निवेश, नियामक ढांचे और रणनीतिक चुनौतियों पर सीधी बातचीत होती है |
| 14वाँ द्विवार्षिक संस्करण और विषय ‘एडवांटेज भारत: एक उभरता हुआ वैश्विक रसायन केंद्र’ | भारत को वैश्विक रसायन केंद्र के रूप में स्थापित करने की दीर्घकालिक नीतिगत दिशा का संकेत |
| साझीदार देश के रूप में जापान की भागीदारी | भारत-जापान रसायन और पेट्रोकेमिकल व्यापार की मजबूत पृष्ठभूमि में उच्च-स्तरीय सहयोग को गहरा करने का अवसर |
| सीईओ फोरम, भारत-जापान, भारत-अमेरिका और भारत-यूरोपीय संघ रसायन एवं पेट्रोकेमिकल फोरम | द्विपक्षीय और बहुपक्षीय साझेदारी के माध्यम से व्यापार, निवेश और तकनीक-हस्तांतरण पर केंद्रित संवाद |
| गोलमेज चर्चाएं: विशेष रसायन, बुनियादी ढांचा, कृषि रसायन, पर्यावरण, संयंत्र मशीनरी तथा पंप और वाल्व | क्षेत्र की उत्पादन-श्रृंखला के विभिन्न खंडों की तकनीकी और संरचनात्मक चुनौतियों की पहचान |
| इंडिया केम युवा नवाचार चुनौती | युवा विद्यार्थियों को उद्योग की समस्याओं के समाधान से जोड़कर कौशल और नवप्रवर्तन की नींव तैयार करना |
महत्व
आर्थिक महत्व
- रसायन और पेट्रोकेमिकल क्षेत्र को विकसित भारत @ 2047 के लक्ष्य में प्रमुख भूमिका निभाने वाला क्षेत्र माना गया है।
- वर्तमान बाजार आकार लगभग 220 अरब अमेरिकी डॉलर से बढ़कर वर्ष 2040 तक लगभग 1 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर और 2047 तक लगभग 1.6 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुँचने का लक्ष्य रखा गया है।
- यह क्षेत्र विनिर्माण, कृषि-आदानों और औद्योगिक इनपुट की आपूर्ति के माध्यम से अन्य क्षेत्रों से गहरे जुड़ा है, इसलिए इसकी वृद्धि का प्रभाव व्यापक होता है।
निवेश और वैश्विक एकीकरण
- विदेशी और घरेलू निवेशकों को नीति-ढांचे, बुनियादी ढांचे और बाजार-संभावनाओं की जानकारी देकर निवेश आकर्षित करने का प्रयास किया गया।
- भारत-जापान, भारत-अमेरिका और भारत-यूरोपीय संघ फोरम से व्यापार और तकनीक में सहयोग के नए रास्ते खुलने की संभावना है।
- वैश्विक आपूर्ति-श्रृंखला में भारत की भूमिका बढ़ाने के लिए प्रतिस्पर्धी रसायन हब की अवधारणा को आगे बढ़ाया गया।
सतत विकास और नवाचार
- टिकाऊ विकास को कार्यक्रम का केंद्रीय उद्देश्य बताया गया, जिसमें उत्पादन-वृद्धि के साथ पर्यावरणीय दायित्वों का संतुलन आवश्यक माना गया।
- युवा नवाचार चुनौती से शैक्षणिक संस्थानों और उद्योग के बीच व्यावहारिक समस्या-समाधान की संस्कृति को बढ़ावा मिलता है।
संघीय और प्रशासनिक आयाम
- महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और ओडिशा के मुख्यमंत्रियों की उपस्थिति से राज्य स्तर पर निवेश-अनुकूल वातावरण और अवसंरचना की भूमिका रेखांकित हुई।
- केंद्र और राज्यों के बीच भूमि, जल, पर्यावरणीय स्वीकृति और अवसंरचना जैसे विषयों पर समन्वय इस क्षेत्र की वृद्धि के लिए महत्वपूर्ण है।
चुनौतियाँ
1. पर्यावरणीय दायित्व और टिकाऊ उत्पादन
- रसायन उद्योग में प्रदूषण नियंत्रण, अपशिष्ट प्रबंधन और उत्सर्जन में कमी एक प्रमुख चुनौती है।
- उत्पादन-वृद्धि और पर्यावरण-संरक्षण के बीच संतुलन बनाना नियामक संस्थाओं और उद्योग दोनों के सामने कठिन कार्य है।
- हरित तकनीक और चक्रीय अर्थव्यवस्था के मॉडल अपनाने में पूंजी और तकनीकी क्षमता की कमी बाधा बन सकती है।
यूपीएससी लिंक: GS-3: पर्यावरण संरक्षण; सतत विकास
2. वैश्विक प्रतिस्पर्धा और तकनीकी निर्भरता
- विशेष रसायन और उन्नत पेट्रोकेमिकल उत्पादों में कई तकनीकें अभी विकसित देशों के पास केंद्रित हैं।
- आयात पर निर्भरता घटाने और घरेलू अनुसंधान एवं विकास (R&D) बढ़ाने की आवश्यकता है।
- वैश्विक बाजार में मूल्य-प्रतिस्पर्धा और गुणवत्ता-मानकों का पालन अनिवार्य है।
यूपीएससी लिंक: GS-3: औद्योगिक नीति; प्रौद्योगिकी और आत्मनिर्भरता
3. अवसंरचना और संयंत्र मशीनरी
- रसायन उद्योग के लिए बंदरगाह-संपर्क, ऊर्जा आपूर्ति और परिवहन की विश्वसनीय सुविधाएं आवश्यक हैं।
- पंप, वाल्व और संयंत्र मशीनरी के घरेलू निर्माण को बढ़ाना आयात-निर्भरता कम करने के लिए महत्वपूर्ण है।
- बड़े औद्योगिक क्षेत्रों में अवसंरचना-विकास की गति राज्य और केंद्र के समन्वय पर निर्भर करती है।
यूपीएससी लिंक: GS-3: बुनियादी ढांचा; GS-2: केंद्र-राज्य समन्वय
4. कृषि रसायन और खाद्य सुरक्षा का संतुलन
- कृषि रसायन उत्पादकता के लिए आवश्यक हैं, किंतु उनके पर्यावरणीय और स्वास्थ्य प्रभाव पर भी ध्यान देना होता है।
- सुरक्षित और प्रभावी उत्पादों के लिए विनियमन, परीक्षण और जागरूकता का सुदृढ़ ढांचा चाहिए।
यूपीएससी लिंक: GS-3: कृषि; खाद्य सुरक्षा; GS-2: सार्वजनिक स्वास्थ्य
5. कौशल और मानव संसाधन
- उन्नत रसायन और पेट्रोकेमिकल उद्योग के लिए प्रशिक्षित रसायनज्ञ, इंजीनियर और तकनीशियनों की मांग बढ़ रही है।
- शिक्षा और उद्योग की आवश्यकताओं के बीच अंतर कम करना एक दीर्घकालिक चुनौती है।
यूपीएससी लिंक: GS-3: कौशल विकास; मानव संसाधन
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| Issue | Concern |
|---|---|
| पर्यावरणीय अनुपालन | उत्पादन-विस्तार के साथ प्रदूषण और अपशिष्ट नियंत्रण का दबाव बढ़ना |
| तकनीकी आत्मनिर्भरता | विशेष रसायन और उन्नत संयंत्र तकनीक में विदेशी निर्भरता |
| अवसंरचना की कमी | बंदरगाह, ऊर्जा और परिवहन संपर्क की असमान उपलब्धता |
| नियामक स्पष्टता | परियोजना-स्वीकृति और मानकों में समय और समन्वय की चुनौती |
| कौशल अंतर | उद्योग की मांग और शैक्षणिक प्रशिक्षण के बीच असंतुलन |
| पूंजी और जोखिम | दीर्घकालिक निवेश के लिए स्थिर नीति और वित्तीय सहयोग की आवश्यकता |
आगे की राह
- पर्यावरण-अनुकूल उत्पादन तकनीकों को प्रोत्साहित करने के लिए स्पष्ट मानक और समयबद्ध अनुपालन ढांचा तैयार किया जाए।
- विशेष रसायन, उन्नत पेट्रोकेमिकल और पंप-वाल्व जैसे संयंत्र-उपकरणों में घरेलू अनुसंधान एवं विकास को बढ़ावा दिया जाए।
- औद्योगिक क्षेत्रों के लिए बंदरगाह, ऊर्जा और परिवहन अवसंरचना का एकीकृत योजना-ढांचा विकसित किया जाए।
- केंद्र और राज्यों के बीच भूमि, जल और पर्यावरणीय स्वीकृति से जुड़ी प्रक्रियाओं में समन्वय तथा एकल-खिड़की व्यवस्था को सुदृढ़ किया जाए।
- शैक्षणिक संस्थानों और उद्योग के बीच इंटर्नशिप, संयुक्त शोध और पाठ्यक्रम-सुधार के माध्यम से कौशल-अंतर कम किया जाए।
- युवा नवाचार चुनौती जैसी पहलों को क्षेत्रीय स्तर तक विस्तारित कर स्टार्टअप और अनुसंधान को समर्थन दिया जाए।
- भारत-जापान, भारत-अमेरिका और भारत-यूरोपीय संघ फोरम की चर्चाओं को व्यापार-समझौतों और तकनीक-साझेदारी के ठोस परिणामों में बदला जाए।
- दीर्घकालिक निवेश के लिए नीति में निरंतरता और पूर्वानुमेयता सुनिश्चित की जाए, ताकि विकसित भारत @ 2047 का लक्ष्य व्यावहारिक रूप से प्राप्त हो सके।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
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संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- अनुच्छेद 51A(g): पर्यावरण संरक्षण का मौलिक कर्तव्य
- अनुच्छेद 48A: पर्यावरण संरक्षण और संवर्धन का राज्य का दायित्व
- सातवीं अनुसूची, संघ सूची: उद्योगों के नियमन में संघ की भूमिका
अवधारणा प्रवाह
वैश्विक साझेदारी और निवेश-आह्वान: इंडिया केम-2026 में साझीदार देश जापान और द्विपक्षीय फोरम के माध्यम से संवाद → सीईओ फोरम और गोलमेज चर्चाएं: विशेष रसायन, बुनियादी ढांचे, कृषि रसायन और पर्यावरण पर चुनौतियों की पहचान → नीतिगत लक्ष्य-निर्धारण: बाजार आकार को 2040 तक लगभग 1 ट्रिलियन और 2047 तक लगभग 1.6 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर तक ले जाने का लक्ष्य → निवेश और तकनीक-हस्तांतरण: व्यापार, निवेश और अनुसंधान में सहयोग से उत्पादन-क्षमता का विस्तार → कौशल और नवाचार: युवा नवाचार चुनौती से मानव संसाधन और समाधान-आधारित शोध का विकास → टिकाऊ विकास और अनुपालन: पर्यावरणीय मानकों के साथ उत्पादन-वृद्धि का संतुलन → विकसित भारत @ 2047: रसायन क्षेत्र का आर्थिक संवृद्धि में योगदान और वैश्विक रसायन केंद्र के रूप में स्थापना
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ‘इंडिया केम-2026’ का 14वां संस्करण मुंबई में आयोजित किया गया था।
2. जापान इस कार्यक्रम में ‘साझीदार देश’ था।
3. ‘इंडिया केम युवा नवाचार चुनौती’ का उद्देश्य रसायन और पेट्रोकेमिकल क्षेत्र में युवा नवोन्मेषकों को जोड़ना था।
उपर्युक्त में से कितने कथन सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीनों
- कोई नहीं
उत्तर: सभी तीनों — कथन 1 सही है क्योंकि ‘इंडिया केम-2026’ का 14वां संस्करण मुंबई में संपन्न हुआ। कथन 2 सही है क्योंकि जापान इस कार्यक्रम में ‘साझीदार देश’ था। कथन 3 सही है क्योंकि ‘इंडिया केम युवा नवाचार चुनौती’ का उद्देश्य युवा नवोन्मेषकों को भारत के रसायन और पेट्रोकेमिकल क्षेत्र से जोड़ना था।
Q2. अभिकथन (A): रसायन और पेट्रोकेमिकल उद्योग भारत के आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है।
कारण (R): ‘विकसित भारत @ 2047’ के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए इस क्षेत्र को अपने बाजार आकार को कई गुना बढ़ाना होगा।
उपर्युक्त कथनों के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन सा सही है?
- A और R दोनों सत्य हैं, और R, A की सही व्याख्या है।
- A और R दोनों सत्य हैं, लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है।
- A सत्य है, लेकिन R असत्य है।
- A असत्य है, लेकिन R सत्य है।
उत्तर: A और R दोनों सत्य हैं, और R, A की सही व्याख्या है। — अभिकथन (A) सही है क्योंकि रसायन और पेट्रोकेमिकल उद्योग में विकास की अपार संभावनाएं हैं और यह आर्थिक विकास में बड़ा योगदान दे सकता है। कारण (R) भी सही है क्योंकि वर्ष 2047 तक ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को हासिल करने के लिए, इस क्षेत्र को अपने मौजूदा बाजार आकार (लगभग 220 अरब अमेरिकी डॉलर) से बढ़कर वर्ष 2040 तक लगभग 1 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर और 2047 तक लगभग 1.6 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंचना होगा। कारण (R) अभिकथन (A) की सही व्याख्या भी करता है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ भारत को एक उभरते हुए वैश्विक रसायन केंद्र के रूप में स्थापित करने में रसायन और पेट्रोकेमिकल क्षेत्र की भूमिका का परीक्षण कीजिए। ‘विकसित भारत @ 2047’ के लक्ष्य को प्राप्त करने में यह क्षेत्र किस प्रकार योगदान दे सकता है? (15 Marks)
रूपरेखा: परिचय में रसायन और पेट्रोकेमिकल क्षेत्र के महत्व का संक्षिप्त उल्लेख करें। मुख्य भाग में, भारत को वैश्विक रसायन केंद्र बनाने में इस क्षेत्र की भूमिका का परीक्षण करें, जिसमें निवेश प्रोत्साहन, सतत विकास, तकनीकी सहयोग और औद्योगिक प्रतिस्पर्धा जैसे बिंदु शामिल हों। ‘विकसित भारत @ 2047’ के लक्ष्य को प्राप्त करने में इसके योगदान को स्पष्ट करें, जिसमें आर्थिक विकास, रोजगार सृजन, निर्यात वृद्धि और नवाचार को बढ़ावा देना शामिल हो। ‘इंडिया केम-2026’ जैसे आयोजनों और ‘इंडिया केम युवा नवाचार चुनौती’ जैसी पहलों का उल्लेख करें। निष्कर्ष में, इस क्षेत्र की चुनौतियों और अवसरों को संक्षेप में बताते हुए एक संतुलित दृष्टिकोण प्रस्तुत करें।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
Maharashtra PCS (MPSC) — राज्य PCS अभ्यास
Prelims: ‘इंडिया केम-2026’ मुंबई में आयोजित होने वाला तीन दिवसीय कार्यक्रम निम्नलिखित में से किस क्षेत्र से संबंधित है?
- A. सूचना प्रौद्योगिकी
- B. रसायन उद्योग
- C. कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण
- D. पर्यटन एवं आतिथ्य
उत्तर: B. रसायन उद्योग — ‘इंडिया केम-2026’ रसायन उद्योग से संबंधित एक प्रमुख अंतर्राष्ट्रीय कार्यक्रम है, जिसका आयोजन मुंबई में किया जा रहा है।
Mains: महाराष्ट्र राज्य में ‘इंडिया केम-2026’ जैसे रसायन उद्योग से संबंधित अंतर्राष्ट्रीय कार्यक्रमों के आयोजन से राज्य के औद्योगिक विकास एवं रोजगार सृजन पर पड़ने वाले प्रभावों की विवेचना कीजिए। साथ ही, महाराष्ट्र सरकार द्वारा इस क्षेत्र के विकास हेतु उठाए गए कदमों का उल्लेख कीजिए।
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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