ई-गवर्नेंस: डिजिटल युग में शासन का रूपांतरण

ई-गवर्नेंस: डिजिटल युग में शासन का रूपांतरण

यह लेख “ई-गवर्नेंस: डिजिटल युग में शासन का रूपांतरण  को कवर करता है” जो कि दैनिक समसामयिक मामलों से सम्बंधित है।

पाठ्यक्रम :

GS–2 –शासन व्यवस्था– ई-शासन: अनुप्रयोग, मॉडल, सफलताएँ, सीमाएँ और संभावनाएँ

प्रारंभिक परीक्षा के लिए

डिजिटल इंडिया मिशन के मुख्य उद्देश्य क्या हैं?

मुख्य परीक्षा के लिए

भारत में ई-गवर्नेंस पहल की प्रगति पर चर्चा करें तथा उनके प्रभावी कार्यान्वयन में प्रमुख चुनौतियों पर प्रकाश डालें।

समाचार में क्यों?

ई-गवर्नेंस पर 28वां राष्ट्रीय सम्मेलन (एनसीईजी) 2025, 22 सितंबर, 2025 को विशाखापत्तनम, आंध्र प्रदेश में शुरू हुआ, जिसका विषय था “विकसित भारत: सिविल सेवा और डिजिटल परिवर्तन”। प्रशासनिक सुधार एवं लोक शिकायत विभाग (डीएआरपीजी), इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (एमईआईटीवाई) और आंध्र प्रदेश सरकार द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य ई-गवर्नेंस में सर्वोत्तम प्रथाओं, नवाचारों और रणनीतियों को प्रदर्शित करना है। सम्मेलन में विभिन्न शासन स्तरों पर अनुकरणीय पहलों को मान्यता देने के लिए छह श्रेणियों में ई-गवर्नेंस 2025 के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार भी प्रदान किए जाएँगे।

ई-गवर्नेंस क्या है?

ई-गवर्नेंस का अर्थ है सेवा वितरण, पारदर्शिता, दक्षता और नागरिक भागीदारी में सुधार के लिए सरकारी कामकाज में सूचना और संचार प्रौद्योगिकी (आईसीटी) का उपयोग।
यह शामिल करता है:
जी2सी (सरकार से नागरिक): उदाहरणार्थ, उमंग ऐप, डिजीलॉकर।
जी2बी (सरकार से व्यवसाय): उदाहरणार्थ, एमसीए21 पोर्टल, जीएसटीएन।
जी2ई (सरकार से कर्मचारी): उदाहरणार्थ, ई-ऑफिस।
जी2जी (सरकार से सरकार): उदाहरणार्थ, सीपीजीआरएएमएस शिकायत निवारण।
विश्व बैंक (2023) ने संयुक्त राष्ट्र ई-गवर्नेंस विकास सूचकांक (ईजीडीआई) में भारत को वैश्विक स्तर पर 10वां स्थान दिया है, जो आईसीटी अपनाने में महत्वपूर्ण प्रगति दर्शाता है।

ई-गवर्नेंस में सरकार की प्रगति

पहल उद्देश्य उपलब्धियाँ
डिजिटल इंडिया मिशन (2015) भारत को डिजिटल रूप से सशक्त समाज में बदलना 35 करोड़ से अधिक जनधन खाते आधार और मोबाइल से जोड़े गए
आधार प्रमाणीकरण एवं डीबीटी के लिए अद्वितीय बायोमेट्रिक आईडी 1.35 अरब आधार कार्ड जारी; डुप्लिकेट कार्ड हटाकर ₹2.25 लाख करोड़ की बचत (यूआईडीएआई, 2024)
DigiLocker & UMANG सुरक्षित क्लाउड स्टोरेज और एकल सेवा पहुंच 21 करोड़ से अधिक पंजीकृत उपयोगकर्ता; 7.5 अरब दस्तावेज जारी
CoWIN & Aarogya Setu महामारी से संबंधित डिजिटल प्लेटफॉर्म CoWIN के माध्यम से 200+ करोड़ वैक्सीन खुराकें दी गईं
जीएसटीएन (वस्तु एवं सेवा कर नेटवर्क) एकीकृत कर अनुपालन और फाइलिंग मंच 1.4 करोड़ से अधिक व्यवसाय पंजीकृत
ई-एनएएम (राष्ट्रीय कृषि बाजार) किसानों के लिए ऑनलाइन ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म 22 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में 1,260+ मंडियों को जोड़ा गया

आदर्श पहल और सफलता की कहानियाँ

भूमि परियोजना (कर्नाटक): भूमि अभिलेखों का कम्प्यूटरीकरण – बिचौलियों और भ्रष्टाचार में कमी।
पासपोर्ट सेवा परियोजना: कई शहरों में पासपोर्ट बनवाने में लगने वाला समय घटकर मात्र 3-7 दिन रह गया।
ई-कोर्ट मिशन मोड परियोजना: 20 करोड़ केस रिकॉर्ड तक ऑनलाइन पहुंच; 98% जिला अदालतें कम्प्यूटरीकृत।
डिजिटल आंध्र प्रदेश: राज्य मॉडल के रूप में रियल-टाइम गवर्नेंस सोसाइटी (आरटीजीएस) और ब्लॉकचेन-आधारित भूमि रिकॉर्ड का उपयोग।
आधार सक्षम भुगतान प्रणाली (एईपीएस): अंतिम छोर तक वित्तीय समावेशन को सक्षम बनाया गया – प्रतिवर्ष 500 करोड़ से अधिक लेनदेन।

ई-गवर्नेंस की सीमाएँ

1. डिजिटल विभाजन:ट्राई (2024) के अनुसार, ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट की पहुंच 44% है, जबकि शहरी क्षेत्रों में यह 72% है।
2. साइबर सुरक्षा जोखिम:भारत में 2022 में 13 लाख से अधिक साइबर सुरक्षा घटनाएं घटीं (सीईआरटी-इन रिपोर्ट)।
3. डेटा गोपनीयता संबंधी चिंताएँ:मजबूत डेटा संरक्षण कानूनों का अभाव (हालांकि डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम, 2023 एक शुरुआत है)।
4. क्षमता एवं जागरूकता अंतराल:केवल 38% ग्रामीण परिवार डिजिटल साक्षरता रखते हैं (एनएसएसओ डेटा)।
5. बुनियादी ढांचे की बाधाएं:सुदूर आदिवासी और पहाड़ी क्षेत्रों में अनियमित बिजली और कम बैंडविड्थ।
6. परिवर्तन का प्रतिरोध:नौकरशाही जड़ता और प्लेटफार्मों के बीच अंतर-संचालन की कमी।

आगे की राह :

1. डिजिटल विभाजन को पाटना:सभी 2.5 लाख ग्राम पंचायतों को ऑप्टिकल फाइबर कनेक्टिविटी प्रदान करने के लिए भारतनेट का विस्तार।
2. साइबर सुरक्षा और डेटा संरक्षण:सीईआरटी-इन को मजबूत करना, डीपीडीपी अधिनियम को प्रभावी ढंग से लागू करना, तथा सुदृढ़ बुनियादी ढांचे का निर्माण करना।
3. क्षमता निर्माण:मिशन कर्मयोगी के अंतर्गत 20 लाख से अधिक सिविल सेवकों को डिजिटल कौशल का प्रशिक्षण दिया जाएगा।
4. एकीकरण और अंतरसंचालनीयता:राज्यों में एकल-खिड़की नागरिक प्लेटफार्मों का विकास।
5. उभरती प्रौद्योगिकियों का उपयोग:पूर्वानुमानित शासन के लिए एआई, पारदर्शी भूमि और आपूर्ति श्रृंखला रिकॉर्ड के लिए ब्लॉकचेन, स्मार्ट कृषि के लिए IoT।
6. सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी):एआई डेटा सेंटर और सब-सी केबल इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे क्षेत्रों में उद्योग सहयोग को प्रोत्साहित करना।

निष्कर्ष:

भारत की ई-गवर्नेंस यात्रा 1990 के दशक में सरकारी कार्यालयों के कम्प्यूटरीकरण से लेकर आज एआई-संचालित नीति-निर्माण तक विकसित हुई है। डिजिटल इंडिया, आधार और कोविन जैसी पहलों ने शासन में बदलाव लाने में आईसीटी की शक्ति को प्रदर्शित किया है।
हालाँकि चुनौतियाँ अभी भी बनी हुई हैं—खासकर डिजिटल विभाजन, साइबर जोखिम और क्षमता अंतराल—ई-गवर्नेंस पर 28वें राष्ट्रीय सम्मेलन जैसे मंच एक समावेशी, पारदर्शी और डिजिटल रूप से सशक्त भारत बनाने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता को उजागर करते हैं। अगर इसे समता और लचीलेपन को केंद्र में रखकर लागू किया जाए, तो ई-गवर्नेंस 2047 तक विकसित भारत का प्रमुख स्तंभ होगा।

प्रारंभिक परीक्षा के लिए प्रश्न :

प्रश्न: भारत में ई-गवर्नेंस के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
1. भारत को डिजिटल रूप से सशक्त समाज में बदलने के लिए 2015 में डिजिटल इंडिया मिशन शुरू किया गया था।
2. अनुमान है कि आधार-सक्षम प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) प्रणाली से लीकेज समाप्त होने से सरकार को 2 लाख करोड़ रुपये से अधिक की बचत होगी।
3. ई-नाम प्लेटफॉर्म विशेष रूप से उर्वरकों और बीजों के डिजिटल व्यापार के लिए डिज़ाइन किया गया है।
उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
(a) केवल 1 और 2
(b) केवल 2
(c) केवल 1 और 3
(d) 1, 2 और 3
उत्तर: A

मुख्य परीक्षा के लिए प्रश्न :

प्रश्न: भारत में ई-गवर्नेंस ने पारदर्शिता और सेवा वितरण में सुधार किया है, फिर भी डिजिटल डिवाइड और साइबर सुरक्षा जैसी चुनौतियाँ बनी हुई हैं। चर्चा कीजिए।                                            (250 शब्द)

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