उपराष्ट्रपति 10 अक्टूबर को झारखंड दौरे पर, देवघर में होंगे प्रमुख कार्यक्रम

उपराष्ट्रपति 10 अक्टूबर को झारखंड दौरे पर, देवघर में होंगे प्रमुख कार्यक्रम

उपराष्ट्रपति 10 अक्टूबर को झारखंड दौरे पर, देवघर में होंगे प्रमुख कार्यक्रम

✎ उपराष्ट्रपति भारत का दूसरा सर्वोच्च संवैधानिक पद है, जो राज्यसभा के पदेन सभापति के रूप में कार्य करता है और राष्ट्रपति की अनुपस्थिति या पद रिक्त होने पर उनके कर्तव्यों का निर्वहन करता है।

💬 Doubt on this topic? Ask Aanya, your free AI study-buddy, for an instant explanation. Ask Aanya →

विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper II — भारतीय संविधान: संघ एवं राज्यों के कार्य तथा उत्तरदायित्व, संघवाद, केंद्र-राज्य संबंध, शक्तियों का पृथक्करण, संवैधानिक पद, विभिन्न संवैधानिक निकायों की भूमिका।
  • Prelims: उपराष्ट्रपति का पद, अनुच्छेद 63, राज्यसभा का पदेन सभापति, राष्ट्रपति का पद रिक्त होने पर उपराष्ट्रपति की भूमिका, अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS), संवैधानिक पदधारक के कार्य
  • Essay: भारत में संवैधानिक पदों का महत्व और उनकी भूमिका, संघवाद और केंद्र-राज्य संबंधों में संवैधानिक पदाधिकारियों का योगदान

त्वरित पुनरावृत्ति: उपराष्ट्रपति भारत का दूसरा सर्वोच्च संवैधानिक पद है, जो राज्यसभा के पदेन सभापति के रूप में कार्य करता है और राष्ट्रपति की अनुपस्थिति या पद रिक्त होने पर उनके कर्तव्यों का निर्वहन करता है।

💬 Doubt on this topic? Ask Aanya, your free AI study-buddy, for an instant explanation. Ask Aanya →

यह खबर चर्चा में क्यों?

यह दौरा उपराष्ट्रपति के संवैधानिक कर्तव्यों और सार्वजनिक कार्यक्रमों में उनकी सक्रिय भागीदारी को रेखांकित करता है।

पृष्ठभूमि

  • भारत का संविधान उपराष्ट्रपति के पद का प्रावधान करता है, जो देश का दूसरा सर्वोच्च संवैधानिक पद है।
  • उपराष्ट्रपति का पद अमेरिकी उपराष्ट्रपति के पद से प्रेरित है, लेकिन भारतीय संदर्भ में इसकी अपनी विशिष्ट भूमिकाएँ और शक्तियाँ हैं।
  • उपराष्ट्रपति का चुनाव संसद के दोनों सदनों के सदस्यों से मिलकर बने एक निर्वाचक मंडल (Electoral College) द्वारा आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली के अनुसार एकल संक्रमणीय मत द्वारा होता है।
  • उपराष्ट्रपति राज्यसभा (Rajya Sabha) का पदेन सभापति (ex-officio Chairman) होता है और इस क्षमता में सदन की कार्यवाही का संचालन करता है।
  • राष्ट्रपति के पद रिक्त होने पर (मृत्यु, त्यागपत्र, पद से हटाए जाने या अन्य कारणों से) उपराष्ट्रपति कार्यवाहक राष्ट्रपति (acting President) के रूप में कार्य करता है।
  • उपराष्ट्रपति का कार्यकाल पाँच वर्ष का होता है और वह पुन: चुनाव के लिए पात्र होता है।

भारत के उपराष्ट्रपति की भूमिका और कार्य

  • उपराष्ट्रपति भारत गणराज्य का दूसरा सर्वोच्च संवैधानिक पदधारक है, जिसका उल्लेख संविधान के अनुच्छेद 63 में किया गया है।
  • वह राज्यसभा का पदेन सभापति होता है और सदन की बैठकों की अध्यक्षता करता है, कार्यवाही का संचालन करता है तथा सदन में व्यवस्था बनाए रखता है।
  • राष्ट्रपति की अनुपस्थिति में, बीमारी के कारण या किसी अन्य कारण से अपने कर्तव्यों का निर्वहन करने में असमर्थ होने पर, उपराष्ट्रपति राष्ट्रपति के कर्तव्यों का निर्वहन करता है।
  • यदि राष्ट्रपति का पद मृत्यु, त्यागपत्र, महाभियोग या अन्य कारणों से रिक्त हो जाता है, तो उपराष्ट्रपति कार्यवाहक राष्ट्रपति के रूप में कार्य करता है जब तक कि नया राष्ट्रपति निर्वाचित न हो जाए।
  • कार्यवाहक राष्ट्रपति के रूप में कार्य करते समय, उपराष्ट्रपति को राष्ट्रपति की सभी शक्तियाँ और उन्मुक्तियाँ प्राप्त होती हैं तथा वह राज्यसभा के सभापति के रूप में कार्य नहीं करता।
  • उपराष्ट्रपति का चुनाव संसद के दोनों सदनों के सदस्यों से मिलकर बने एक निर्वाचक मंडल द्वारा होता है, जिसमें संसद के मनोनीत सदस्य भी शामिल होते हैं।
  • योग्यता के लिए, व्यक्ति को भारत का नागरिक होना चाहिए, 35 वर्ष की आयु पूरी कर चुका हो, और राज्यसभा का सदस्य चुने जाने की योग्यता रखता हो।
  • उपराष्ट्रपति को पद से हटाने का प्रस्ताव केवल राज्यसभा में ही पेश किया जा सकता है, जिसे राज्यसभा के तत्कालीन समस्त सदस्यों के बहुमत से पारित किया गया हो और लोकसभा द्वारा सहमत किया गया हो।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
उपराष्ट्रपति का झारखंड दौरा यह संवैधानिक पद की गरिमा और संघीय ढांचे में राज्यों के महत्व को दर्शाता है।
AIIMS देवघर का दीक्षांत समारोह यह देश में चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य सेवा के विस्तार का प्रतीक है, विशेषकर टियर-2 और टियर-3 शहरों में।
सैन्य संपर्क मेला यह सशस्त्र बलों और नागरिक समाज के बीच संबंधों को मजबूत करने तथा युवाओं को सैन्य सेवा के प्रति आकर्षित करने का एक मंच है।
क्षेत्रीय विकास पर ध्यान झारखंड जैसे राज्यों में ऐसे आयोजनों से समावेशी विकास (Inclusive Development) को बढ़ावा मिलता है।

महत्व

सामाजिक महत्व

  • AIIMS देवघर का दीक्षांत समारोह क्षेत्र में उच्च गुणवत्ता वाली चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता में वृद्धि को रेखांकित करता है।
  • सैन्य संपर्क मेला युवाओं को राष्ट्र सेवा के लिए प्रेरित करता है और सशस्त्र बलों के प्रति सम्मान की भावना को बढ़ावा देता है।

संस्थागत महत्व

  • उपराष्ट्रपति का दौरा संवैधानिक पदों की भूमिका और संघीय व्यवस्था में उनके महत्व को दर्शाता है।
  • AIIMS जैसे संस्थानों का विस्तार देश भर में समान स्वास्थ्य सेवा पहुंच सुनिश्चित करने की सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

क्षेत्रीय विकास

  • झारखंड जैसे राज्यों में ऐसे आयोजनों से स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलता है और रोजगार के अवसर सृजित होते हैं।
  • चिकित्सा और सैन्य क्षेत्रों में जागरूकता और सुविधाओं का विस्तार क्षेत्रीय असंतुलन को कम करने में सहायक है।

चुनौतियाँ

1. स्वास्थ्य सेवा तक पहुंच

  • ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में अभी भी विशेषज्ञ डॉक्टरों और आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं की कमी है।
  • स्वास्थ्य बीमा और गुणवत्तापूर्ण उपचार का खर्च आम जनता के लिए एक चुनौती बना हुआ है।

2. चिकित्सा शिक्षा की गुणवत्ता

  • नए AIIMS जैसे संस्थानों में संकाय (Faculty) की कमी और बुनियादी ढांचे के पूर्ण विकास में समय लगना एक चुनौती है।
  • चिकित्सा पाठ्यक्रम को बदलते वैश्विक मानकों और स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप अद्यतन करना आवश्यक है।

3. युवाओं का सैन्य सेवा में रुझान

  • सैन्य सेवाओं में करियर के अवसरों और चुनौतियों के बारे में युवाओं में जागरूकता की कमी।
  • शारीरिक फिटनेस और मानसिक दृढ़ता के उच्च मानकों को पूरा करने में चुनौतियाँ।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
स्वास्थ्य सेवा का क्षेत्रीय असंतुलन शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के बीच स्वास्थ्य सुविधाओं और कर्मियों की उपलब्धता में बड़ा अंतर।
चिकित्सा शिक्षा में निवेश नए संस्थानों के लिए पर्याप्त वित्तीय और मानव संसाधन सुनिश्चित करना।
सैन्य-नागरिक संपर्क सशस्त्र बलों के बारे में गलत धारणाओं को दूर करना और सकारात्मक छवि बनाना।
बुनियादी ढांचा विकास दूरदराज के क्षेत्रों में AIIMS जैसे संस्थानों के लिए सड़क, बिजली और कनेक्टिविटी का अभाव।

आगे की राह

  • ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार के लिए सार्वजनिक-निजी भागीदारी (Public-Private Partnership) को प्रोत्साहित करना।
  • चिकित्सा शिक्षा में नवाचार और प्रौद्योगिकी के उपयोग को बढ़ावा देना, जैसे टेलीमेडिसिन (Telemedicine) और ई-लर्निंग।
  • सैन्य संपर्क मेलों को नियमित रूप से आयोजित करना और उन्हें करियर परामर्श सत्रों के साथ जोड़ना।
  • AIIMS जैसे संस्थानों में संकाय और सहायक कर्मचारियों की भर्ती प्रक्रिया को सुव्यवस्थित और तेज करना।
  • स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में अनुसंधान और विकास को बढ़ावा देना, विशेषकर स्थानीय रोगों और स्वास्थ्य चुनौतियों पर ध्यान केंद्रित करना।
  • युवाओं को सैन्य सेवा के विभिन्न पहलुओं से परिचित कराने के लिए स्कूल और कॉलेज स्तर पर जागरूकता कार्यक्रम चलाना।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

उपराष्ट्रपति का पद · संवैधानिक भूमिकाएँ · एम्स · स्वास्थ्य सेवाएँ · सैन्य संपर्क · नागरिक-सैन्य संबंध · संघीय ढाँचा · राज्यों का दौरा · सार्वजनिक कार्यक्रम · दीक्षांत समारोह

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 63’, ‘note’: ‘भारत के उपराष्ट्रपति का पद’}

अवधारणा प्रवाह

उपराष्ट्रपति का दौरा  →  AIIMS दीक्षांत समारोह में भागीदारी  →  चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य सेवा का विस्तार  →  सैन्य संपर्क मेला  →  नागरिक-सैन्य संबंध सुदृढ़ीकरण  →  क्षेत्रीय विकास और राष्ट्र निर्माण

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. भारत के उपराष्ट्रपति के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. उपराष्ट्रपति राज्यसभा का पदेन सभापति होता है।
2. उपराष्ट्रपति का चुनाव संसद के दोनों सदनों के निर्वाचित सदस्यों द्वारा किया जाता है।
3. उपराष्ट्रपति को हटाने का प्रस्ताव केवल राज्यसभा में ही प्रस्तुत किया जा सकता है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. सभी तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: सभी तीन — कथन 1 सही है। अनुच्छेद 64 के अनुसार, उपराष्ट्रपति राज्यसभा का पदेन सभापति होता है। कथन 2 गलत है। उपराष्ट्रपति का चुनाव संसद के दोनों सदनों के सदस्यों (निर्वाचित और मनोनीत दोनों) द्वारा आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली के अनुसार एकल संक्रमणीय मत द्वारा किया जाता है। कथन 3 सही है। अनुच्छेद 67 (ख) के अनुसार, उपराष्ट्रपति को हटाने का संकल्प राज्यसभा में ही प्रस्तुत किया जा सकता है और उसे राज्यसभा के तत्कालीन समस्त सदस्यों के बहुमत से पारित किया जाना चाहिए तथा लोकसभा द्वारा सहमत होना चाहिए।

Q2. निम्नलिखित में से कौन-सा कथन अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) के संबंध में सही है?

  1. AIIMS की स्थापना केवल चिकित्सा शिक्षा प्रदान करने के लिए की गई थी।
  2. AIIMS एक स्वायत्त संस्थान है जो स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अधीन कार्य करता है।
  3. AIIMS केवल स्नातकोत्तर चिकित्सा पाठ्यक्रम प्रदान करता है।
  4. AIIMS की स्थापना राज्य सरकारों द्वारा की जाती है।

उत्तर: AIIMS एक स्वायत्त संस्थान है जो स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अधीन कार्य करता है। — AIIMS एक स्वायत्त संस्थान है जो स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अधीन कार्य करता है। इसकी स्थापना चिकित्सा शिक्षा, अनुसंधान और रोगी देखभाल तीनों उद्देश्यों के लिए की गई थी। यह स्नातक और स्नातकोत्तर दोनों पाठ्यक्रम प्रदान करता है। AIIMS की स्थापना केंद्र सरकार द्वारा संसद के एक अधिनियम के माध्यम से की जाती है।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ भारत के उपराष्ट्रपति की संवैधानिक भूमिकाओं का विश्लेषण कीजिए। साथ ही, सार्वजनिक कार्यक्रमों में उनकी भागीदारी देश के संघीय ढांचे और शासन में किस प्रकार योगदान करती है, चर्चा कीजिए। (15 Marks)

रूपरेखा: उत्तर में उपराष्ट्रपति के पद की संवैधानिक स्थिति (अनुच्छेद 63, 64, 65, 66, 67, 68, 69) का उल्लेख करें। उनकी प्राथमिक भूमिकाओं, जैसे राज्यसभा के पदेन सभापति और राष्ट्रपति की अनुपस्थिति में उनके कार्यों का निर्वहन, पर प्रकाश डालें। इसके बाद, सार्वजनिक कार्यक्रमों (जैसे AIIMS दीक्षांत समारोह, सैन्य संपर्क मेला) में उनकी भागीदारी के महत्व पर चर्चा करें। इसमें केंद्र और राज्यों के बीच समन्वय, स्वास्थ्य और रक्षा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों को बढ़ावा देना, जनता से जुड़ाव और संवैधानिक मूल्यों का प्रचार शामिल होना चाहिए। संघीय ढांचे में राज्यों के साथ केंद्र के संबंधों को मजबूत करने और शासन में पारदर्शिता व जवाबदेही को बढ़ावा देने में उनकी भूमिका का विश्लेषण करें।

स्रोत: PIB (Press Information Bureau)

Jharkhand PCS (JPSC) — राज्य PCS अभ्यास

Prelims: झारखंड राज्य के दौरे के दौरान उपराष्ट्रपति श्री सी.पी. राधाकृष्णन द्वारा मुख्य रूप से किस विषय पर ध्यान केंद्रित किए जाने की संभावना है?

  1. झारखंड में औद्योगिक विकास और निवेश आकर्षण
  2. झारखंड की जनजातीय संस्कृति एवं पारंपरिक शासन प्रणाली
  3. झारखंड में शिक्षा सुधार एवं तकनीकी संस्थानों का विकास
  4. झारखंड में पर्यटन विकास एवं अंतर्राष्ट्रीय संबंध

उत्तर: झारखंड की जनजातीय संस्कृति एवं पारंपरिक शासन प्रणाली — उपराष्ट्रपति श्री सी.पी. राधाकृष्णन झारखंड की जनजातीय संस्कृति एवं पारंपरिक शासन प्रणाली (मुंडा/नागवंशी व्यवस्था) पर विशेष ध्यान दे सकते हैं, क्योंकि यह राज्य की पहचान एवं विरासत का प्रमुख अंग है।

Mains: झारखंड की जनजातीय शासन प्रणाली (मुंडा/नागवंशी व्यवस्था) की ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक विशेषताओं का वर्णन करते हुए बताएं कि आधुनिक प्रशासनिक व्यवस्था में इन प्रणालियों के संरक्षण एवं पुनर्स्थापना के लिए क्या कदम उठाए जा सकते हैं?


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

No Comments

Post A Comment