22 Aug ऑनलाइन गेमिंग विधेयक, 2025 : नवाचार और सामाजिक सुरक्षा के बीच संतुलन
पाठ्यक्रम सामान्य अध्ययन – 2 और 3 – भारतीय राजनीति एवं शासन व्यवस्था और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी – संरक्षण के साथ नवाचार का संतुलन : ऑनलाइन गेमिंग विधेयक, 2025
प्रारंभिक परीक्षा के लिए – विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO), गेमिंग डिसऑर्डर, डिजिटल अर्थव्यवस्था, ऑनलाइन गेमिंग विधेयक, 2025 के कार्यान्वयन में क्या चुनौतियाँ आ सकती हैं?
मुख्य परीक्षा के लिए – ऑनलाइन गेमिंग संवर्धन और विनियमन विधेयक, 2025 के प्रमुख उद्देश्य क्या हैं?
ख़बरों में क्यों?

- हाल ही में भारत के संसद द्वारा ऑनलाइन गेमिंग के प्रोत्साहन और विनियमन विधेयक, 2025 को 21 अगस्त 2025 को पारित किया गया। यह एक ऐतिहासिक कदम है जिसका उद्देश्य नागरिकों को भ्रामक ऑनलाइन मनी गेम्स से बचाना और उसे नियंत्रित करना है।
- यह विधेयक एक तरफ जहां परिवारों को वित्तीय और मानसिक संकट से बचाने की दिशा में काम करता है, वहीं दूसरी ओर भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था को सुरक्षित और सतत विकास की ओर ले जाने का मार्ग प्रशस्त करता है।
- विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने भी “गेमिंग डिसऑर्डर” को एक मानसिक स्वास्थ्य स्थिति के रूप में मान्यता दी है, जो व्यक्ति के जीवन को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकती है। भारत में इस खतरे के प्रति गंभीर कार्रवाई की आवश्यकता लंबे समय से महसूस की जा रही थी।
- ऑनलाइन मनी गेमिंग प्लेटफॉर्म्स ने अनेक परिवारों को आर्थिक संकट में धकेला है। युवाओं में इसकी लत की स्थिति बन गई थी और कई मामलों में आत्महत्या जैसी दुखद घटनाएँ भी सामने आई हैं। यह विधेयक नागरिकों को ऑनलाइन मनी गेमिंग की लत, आर्थिक बर्बादी और धोखाधड़ी से सुरक्षा प्रदान करने के साथ-साथ डिजिटल रचनात्मकता, रोजगार और नवाचार को भी बढ़ावा देने का प्रयास करता है।
विधेयक लाने की आवश्यकता क्यों थी?
- व्यसन और वित्तीय संकट : मनी गेम्स लोगों को झूठे लाभ के झांसे में फँसाकर उनकी बचत खत्म कर देते हैं।
- मानसिक स्वास्थ्य : भारी नुकसान के कारण अवसाद और आत्महत्या के मामले बढ़े हैं।
- धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग : कई प्लेटफॉर्म्स को अवैध गतिविधियों के लिए प्रयोग किया गया है।
- राष्ट्रीय सुरक्षा पर खतरा : आतंकवादी वित्त पोषण और अवैध संदेशों के आदान-प्रदान के लिए कुछ प्लेटफॉर्म्स का इस्तेमाल हुआ है।
- कानूनी खामियों को दूर करना : भौतिक जुए पर रोक है लेकिन डिजिटल क्षेत्र में अब तक स्पष्ट कानून नहीं था।
- सकारात्मक विकल्पों को प्रोत्साहन : सरकार ई-स्पोर्ट्स और शैक्षणिक खेलों को बढ़ावा दे रही है।
ऑनलाइन गेमिंग क्षेत्र की प्रमुख श्रेणियाँ :
ऑनलाइन गेमिंग को तीन प्रमुख श्रेणियों में बांटा जा सकता है –
- ई-स्पोर्ट्स (E-sports) : संगठित डिजिटल प्रतिस्पर्धाएं जिनमें टीम या व्यक्ति हिस्सा लेते हैं। इसमें रणनीति, समन्वय और निर्णय लेने की कुशलता की आवश्यकता होती है।
- ऑनलाइन सामाजिक एवं शैक्षणिक गेम्स : ये मनोरंजन, शिक्षा या सामाजिक संपर्क हेतु बनाए गए सामान्य स्किल-बेस्ड खेल होते हैं। इनमें कोई वित्तीय दांव नहीं होता और ये अपेक्षाकृत सुरक्षित माने जाते हैं।
- ऑनलाइन मनी गेम्स : ऐसे खेल जिनमें पैसों का दांव होता है – चाहे वे स्किल पर आधारित हो या चांस पर, या फिर चांस या स्किल दोनों पर आधारित हों। ये खेल व्यसन, आर्थिक नुकसान, मनी लॉन्ड्रिंग और आत्महत्या जैसी गंभीर समस्याओं से जुड़े पाए गए हैं।
ऑनलाइन गेमिंग से संबंधित मुख्य खतरों की पहचान करना :
- लत और आर्थिक नुकसान : उपयोगकर्ता त्वरित मुनाफे की उम्मीद में लगातार पैसे हारते रहते हैं, जिससे परिवार आर्थिक संकट में पड़ जाते हैं।
- मानसिक स्वास्थ्य और आत्महत्याएं : भारी वित्तीय हानि के तनाव से कई युवा डिप्रेशन में चले जाते हैं और आत्महत्या जैसे कदम उठा लेते हैं।
- धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग : कई प्लेटफॉर्म अवैध रूप से पैसे को वैध रूप में दिखाने के लिए इस्तेमाल होते हैं।
- राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा : कुछ मामलों में ये प्लेटफॉर्म आतंकवाद वित्तपोषण और अवैध संचार के लिए भी उपयोग किए गए हैं।
- कानूनी खामियों का फायदा : भौतिक दुनिया में जुआ और सट्टा प्रतिबंधित हैं लेकिन ऑनलाइन स्पेस काफी हद तक अनियंत्रित था। यह विधेयक डिजिटल और वास्तविक दुनिया में समान मानक सुनिश्चित करता है।
- स्वस्थ विकल्पों को बढ़ावा : ई-स्पोर्ट्स और शैक्षणिक खेलों को बढ़ावा देकर युवा वर्ग को सुरक्षित और रचनात्मक डिजिटल विकल्प प्रदान किए जाएंगे।

ऑनलाइन गेमिंग विधेयक 2025 : प्रमुख प्रावधान :
| क्र. | प्रावधान | विवरण |
| 1 | लागू या प्रवर्तन क्षेत्र | भारत भर में लागू, भारत से बाहर संचालित लेकिन भारत में उपलब्ध सेवाओं पर भी लागू |
| 2 | ई-स्पोर्ट्स का प्रोत्साहन | वैध प्रतिस्पर्धी खेल के रूप में मान्यता, खेल मंत्रालय द्वारा दिशा-निर्देश, अकादमियों व प्लेटफॉर्म्स की स्थापना |
| 3 | सामाजिक एवं शैक्षणिक खेलों का समर्थन | केंद्र सरकार द्वारा सुरक्षित और उपयुक्त खेलों की पहचान और पंजीकरण; डिजिटल साक्षरता और सांस्कृतिक मूल्यों को बढ़ावा देना |
| 4 | ऑनलाइन मनी गेम्स पर प्रतिबंध | पूर्ण प्रतिबंध (संयोग, कौशल या हाइब्रिड आधारित), विज्ञापन और भुगतान सेवा निषिद्ध, प्लेटफॉर्म ब्लॉक करने की शक्ति |
| 5 | ऑनलाइन गेमिंग प्राधिकरण की स्थापना | राष्ट्रीय स्तर पर रजिस्ट्रेशन, श्रेणीकरण, शिकायत समाधान, कोड ऑफ प्रैक्टिस जारी करना |
| 6 | दंड और अपराध | 3 साल जेल + ₹1 करोड़ जुर्माना (खेल संचालकों हेतु), विज्ञापन हेतु 2 साल + ₹50 लाख, पुनरावृत्ति पर सख्त दंड |
| 7 | कॉर्पोरेट जिम्मेदारी | कंपनियों और अधिकारियों की जवाबदेही, उचित सतर्कता दिखाने पर निर्दोष निदेशकों को छूट |
| 8 | जांच और प्रवर्तन अधिकार | गिरफ्तारी, तलाशी और संपत्ति जब्त करने की शक्ति, वारंट के बिना कार्यवाही संभव |
| 9 | नियम बनाने की शक्ति | केंद्र सरकार को ई-स्पोर्ट्स, सामाजिक खेलों के संवर्धन एवं नियमन हेतु नियम बनाने की शक्ति |
विधेयक के प्रमुख सामाजिक लाभ :
| अनु. | लाभ क्षेत्र | विवरण |
| 1 | रचनात्मक अर्थव्यवस्था को बढ़ावा | डिजिटल नवाचार, निर्यात, स्टार्टअप, रोजगार और वैश्विक प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा |
| 2 | युवाओं को सशक्त बनाना | सुरक्षित डिजिटल अवसर; ई-स्पोर्ट्स के माध्यम से आत्मविश्वास, अनुशासन और टीम भावना को प्रोत्साहन |
| 3 | सुरक्षित डिजिटल वातावरण | शोषणकारी प्लेटफॉर्म से सुरक्षा; व्यसन, वित्तीय नुकसान और मानसिक संकट से राहत |
| 4 | वैश्विक नेतृत्व को मजबूत करना | जिम्मेदार गेमिंग नीति के क्षेत्र में भारत को वैश्विक नेतृत्व प्रदान करता है और यह अन्य देशों के लिए उदाहरण प्रस्तुत करता है। |
ऑनलाइन गेमिंग से संबंधित वर्तमान कानूनी और नियामक ढांचा :
वर्तमान कानूनी और नियामक ढांचे के अंतर्गत निम्नलिखित प्रावधान लागू किए गए हैं –
- सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 (संशोधित नियम 2023) के तहत अवैध सामग्री और मनी गेमिंग प्लेटफॉर्म पर प्रतिबंध लगाया गया है। इसके अतिरिक्त, स्व-नियामक संस्थाओं (SRB) को खेलों की वैधता का परीक्षण करने का अधिकार दिया गया है। अब तक कुल 1,524 सट्टेबाजी वेबसाइटों और ऐप्स को ब्लॉक किया जा चुका है।
- भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 111 और 112 के अंतर्गत अवैध आर्थिक गतिविधियों और सट्टेबाजी में शामिल व्यक्तियों के लिए सजा का प्रावधान किया गया है।
- जीएसटी अधिनियम (IGST), 2017 के अंतर्गत अनियमित या विदेशी गेमिंग प्लेटफार्मों को Simplified Registration Scheme के तहत लाने की व्यवस्था की गई है, और इनकी निगरानी का कार्य GST खुफिया निदेशालय द्वारा किया जा रहा है।
- उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 के अंतर्गत भ्रामक विज्ञापनों पर रोक लगाई गई है, तथा केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (CCPA) को इस संबंध में कार्रवाई करने का अधिकार प्राप्त है।
- सूचना और प्रसारण मंत्रालय के द्वारा अन्य सलाह और जागरूकता अभियानों के तहत मीडिया और सेलेब्रिटी को भ्रामक विज्ञापनों से दूर रहने के लिए परामर्श जारी किया है। शिक्षा मंत्रालय द्वारा अभिभावकों और शिक्षकों के लिए गेमिंग से संबंधित सुरक्षा दिशा-निर्देश प्रदान किए गए हैं।
- राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (cybercrime.gov.in) और हेल्पलाइन नंबर 1930 के माध्यम से ऑनलाइन शिकायत दर्ज करने की सुविधा उपलब्ध कराई गई है।
निष्कर्ष :

- “ऑनलाइन गेमिंग (प्रोत्साहन और विनियमन) विधेयक, 2025” भारत की डिजिटल नीति में एक संतुलित, दूरदर्शी और निर्णायक कदम है। यह विधेयक एक ओर जहाँ ऑनलाइन मनी गेमिंग से उत्पन्न खतरों पर सख्ती से नियंत्रण स्थापित करता है, वहीं दूसरी ओर ई-स्पोर्ट्स, शैक्षणिक खेलों और नवाचार को प्रोत्साहन देकर रचनात्मकता, कौशल विकास और रोजगार के नए अवसरों को जन्म देता है।
- यह पहल न केवल समाज के कमजोर वर्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करती है, बल्कि डिजिटल प्रौद्योगिकी को एक सकारात्मक और जिम्मेदार दिशा में आगे ले जाती है।
- इस विधेयक के माध्यम से भारत ने वैश्विक स्तर पर यह संदेश दिया है कि वह डिजिटल नवाचार और सामाजिक उत्तरदायित्व के संतुलन के साथ डिजिटल नीति निर्धारण में अग्रणी भूमिका निभाने को तैयार है।
- यह विधेयक भारत के लिए एक सुरक्षित, नैतिक और सशक्त डिजिटल भविष्य की मजबूत नींव रखता है, जहाँ तकनीक समाज की सेवा करती है, न कि उसे नुकसान पहुँचाती है।
- यह नवाचार और जिम्मेदारी के संतुलन के साथ न केवल डिजिटल वातावरण को सुरक्षित बनाता है, बल्कि भारत को वैश्विक डिजिटल नीति निर्धारण में अग्रणी बनाता है।
स्त्रोत – पी. आई. बी एवं द हिन्दू।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न :
Q.1. “ऑनलाइन गेमिंग के प्रोत्साहन और विनियमन विधेयक, 2025” के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
- यह विधेयक कौशल, संयोग या हाइब्रिड फॉर्मेट पर आधारित सभी ऑनलाइन मनी गेम्स को पूरी तरह से प्रतिबंधित करता है।
- यह खेलों के पंजीकरण और वर्गीकरण के लिए एक राष्ट्रीय स्तर के प्राधिकरण की स्थापना करता है।
- यह विधेयक केंद्र सरकार को ई-स्पोर्ट्स और शैक्षिक खेलों के संवर्धन हेतु नियम बनाने के लिए सशक्त करता है।
- ई-स्पोर्ट्स टूर्नामेंट के प्रचार के लिए भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) की पूर्व स्वीकृति आवश्यक होगी।
उपर्युक्त कथनों में से सही उत्तर को चुनें :
(a) केवल 1 और 2
(b) केवल1, 2 और 3
(c) केवल 2, 3 और 4
(d) उपरोक्त सभी
उत्तर – (b) केवल 1, 2 और 3
मुख्य परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न :
Q.1. “ऑनलाइन गेमिंग के प्रोत्साहन और विनियमन विधेयक, 2025” डिजिटल नवाचार और सामाजिक सुरक्षा के बीच संतुलन स्थापित करने का प्रयास करता है।” इस कथन के आलोक में इस विधेयक के प्रमुख प्रावधानों की चर्चा करें और भारत में ऑनलाइन गेमिंग से संबंधित चुनौतियों के समाधान में इसकी भूमिका का विश्लेषण करें। ( शब्द सीमा – 250 अंक – 15 )

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