ओडिशा में सेमीकंडक्टर क्षेत्र में बड़ा निवेश: वैष्णव

Odisha has huge semiconductor potential: Vaishnaw — labelled illustration

ओडिशा में सेमीकंडक्टर क्षेत्र में बड़ा निवेश: वैष्णव

✎ भारत सरकार सेमीकंडक्टर विनिर्माण में आत्मनिर्भरता प्राप्त करने के लिए प्रतिबद्ध है, जिसके तहत ओडिशा जैसे राज्यों में उन्नत पैकेजिंग जैसी क्षमताओं का विकास किया जा रहा है।

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विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper III — अर्थव्यवस्था: भारतीय अर्थव्यवस्था तथा योजना, संसाधनों को जुटाना, संवृद्धि, विकास तथा रोज़गार।  |  GS Paper III — विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी- विकास एवं अनुप्रयोग और रोज़मर्रा के जीवन पर इसके प्रभाव।
  • Prelims: सेमीकंडक्टर, सेमीकॉन इंडिया, इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण, उन्नत पैकेजिंग, मेक इन इंडिया, उत्पादन-लिंक्ड प्रोत्साहन (PLI) योजना
  • Essay: आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में प्रौद्योगिकी की भूमिका, भारत में क्षेत्रीय असंतुलन और औद्योगिक विकास

त्वरित पुनरावृत्ति: भारत सरकार सेमीकंडक्टर विनिर्माण में आत्मनिर्भरता प्राप्त करने के लिए प्रतिबद्ध है, जिसके तहत ओडिशा जैसे राज्यों में उन्नत पैकेजिंग जैसी क्षमताओं का विकास किया जा रहा है।

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यह खबर चर्चा में क्यों?

केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने SEMICON India 2026 में कहा कि ओडिशा में सेमीकंडक्टर क्षेत्र में अपार क्षमता है और आने वाले दिनों में इसमें और अधिक निवेश आएगा। उन्होंने राज्य में उन्नत सेमीकंडक्टर पैकेजिंग (advanced semiconductor packaging) की उभरती क्षमताओं पर प्रकाश डाला, जिसमें ओडिशा में एक 3D पैकेजिंग इकाई की स्थापना भी शामिल है। मंत्री ने भारत के सेमीकंडक्टर विकास के अगले चरण, सेमीकॉन 2.0, के छह स्तंभों पर भी चर्चा की, जिसमें डिज़ाइन, मशीनें और सामग्री, अधिक फैब, उन्नत पैकेजिंग, अनुसंधान एवं विकास तथा प्रतिभा शामिल हैं।

पृष्ठभूमि

  • सेमीकंडक्टर चिप्स आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक्स के मूलभूत घटक हैं, जो स्मार्टफोन से लेकर कंप्यूटर और ऑटोमोबाइल तक सभी उपकरणों में उपयोग होते हैं।
  • वैश्विक सेमीकंडक्टर आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधानों ने विभिन्न उद्योगों को प्रभावित किया है, जिससे भारत सहित कई देशों को घरेलू विनिर्माण क्षमता विकसित करने की प्रेरणा मिली है।
  • भारत सरकार ने ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ जैसी पहलों के माध्यम से घरेलू इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए कई कदम उठाए हैं।
  • सेमीकंडक्टर विनिर्माण एक पूंजी-गहन और अत्यधिक तकनीकी क्षेत्र है, जिसके लिए बड़े निवेश, कुशल कार्यबल और उन्नत अनुसंधान एवं विकास की आवश्यकता होती है।
  • भारत ने सेमीकंडक्टर और डिस्प्ले विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र के विकास के लिए प्रोत्साहन योजनाएं शुरू की हैं, जिसमें वित्तीय सहायता और अन्य लाभ शामिल हैं।
  • सेमीकॉन इंडिया (SEMICON India) भारत में सेमीकंडक्टर उद्योग को बढ़ावा देने और वैश्विक हितधारकों को एक साथ लाने के लिए एक प्रमुख वार्षिक कार्यक्रम है।

सेमीकंडक्टर क्या है और भारत में इसका महत्व क्या है?

  • सेमीकंडक्टर (अर्धचालक) ऐसे पदार्थ होते हैं जिनकी विद्युत चालकता चालक (जैसे धातु) और कुचालक (जैसे कांच) के बीच होती है। सिलिकॉन सबसे अधिक इस्तेमाल किया जाने वाला सेमीकंडक्टर पदार्थ है।
  • ये पदार्थ ट्रांजिस्टर, डायोड और एकीकृत परिपथ (integrated circuits) जैसे इलेक्ट्रॉनिक घटकों के निर्माण के लिए महत्वपूर्ण हैं, जो सभी आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के आधार हैं।
  • भारत में सेमीकंडक्टर विनिर्माण को बढ़ावा देना आर्थिक संवृद्धि (economic growth) और राष्ट्रीय सुरक्षा दोनों के लिए महत्वपूर्ण है। यह आयात पर निर्भरता कम करेगा और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में भारत की स्थिति मजबूत करेगा।
  • सेमीकंडक्टर उद्योग में निवेश से उच्च-तकनीकी रोज़गार के अवसर पैदा होंगे, अनुसंधान एवं विकास को बढ़ावा मिलेगा और भारत को वैश्विक प्रौद्योगिकी केंद्र के रूप में स्थापित करने में मदद मिलेगी।
  • सरकार की उत्पादन-लिंक्ड प्रोत्साहन (Production-Linked Incentive – PLI) योजना और ‘भारत सेमीकंडक्टर मिशन’ जैसी पहलें घरेलू सेमीकंडक्टर विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र को बढ़ावा देने के लिए डिज़ाइन की गई हैं।
  • सेमीकंडक्टर मूल्य श्रृंखला में डिज़ाइन, फैब्रिकेशन (निर्माण), असेंबली, परीक्षण और पैकेजिंग जैसे विभिन्न चरण शामिल हैं, और भारत का लक्ष्य इन सभी क्षेत्रों में क्षमता विकसित करना है।
  • उन्नत पैकेजिंग (advanced packaging) सेमीकंडक्टर चिप्स को बाहरी वातावरण से बचाने और उन्हें अन्य घटकों से जोड़ने की एक प्रक्रिया है, जो चिप के प्रदर्शन और विश्वसनीयता के लिए महत्वपूर्ण है।
  • ओडिशा जैसे राज्यों में सेमीकंडक्टर क्षेत्र में निवेश से क्षेत्रीय विकास को बढ़ावा मिलेगा और देश के भीतर औद्योगिक विकेंद्रीकरण में मदद मिलेगी।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
सेमीकंडक्टर क्षेत्र में ओडिशा की क्षमता केंद्रीय मंत्री द्वारा ओडिशा में सेमीकंडक्टर क्षेत्र में भारी क्षमता और आगामी निवेश पर प्रकाश डाला गया।
उन्नत पैकेजिंग इकोसिस्टम ओडिशा में एक 3D पैकेजिंग इकाई की स्थापना, जो उन्नत सेमीकंडक्टर पैकेजिंग में राज्य की उभरती क्षमताओं को दर्शाती है।
सेमीकंडक्टर 2.0 भारत के सेमीकंडक्टर विकास का अगला चरण, जो डिज़ाइन, मशीन और सामग्री, अधिक फैब, उन्नत पैकेजिंग, अनुसंधान और विकास तथा प्रतिभा जैसे छह स्तंभों पर आधारित होगा।
संपूर्ण मूल्य श्रृंखला में क्षमता निर्माण भारत सेमीकंडक्टर यात्रा के अगले चरण में प्रवेश कर रहा है, जिसका ध्यान पूरी मूल्य श्रृंखला में क्षमताओं के निर्माण पर है।
‘टेप-आउट’ की अवधारणा सेमीकंडक्टर उद्योग में चिप डिज़ाइन को उत्पादन के लिए भेजने का चरण, जिसके तुरंत बाद अगले संस्करण पर काम शुरू हो जाता है।

महत्व

आर्थिक महत्व

  • सेमीकंडक्टर क्षेत्र में निवेश से ओडिशा में आर्थिक संवृद्धि (Economic Growth) और रोजगार सृजन को बढ़ावा मिलेगा।
  • उन्नत पैकेजिंग इकाइयों की स्थापना से उच्च-तकनीकी विनिर्माण (High-Tech Manufacturing) में भारत की आत्मनिर्भरता बढ़ेगी।
  • यह भारत को वैश्विक सेमीकंडक्टर आपूर्ति श्रृंखला (Global Semiconductor Supply Chain) में एक महत्वपूर्ण खिलाड़ी के रूप में स्थापित करने में मदद करेगा।

रणनीतिक महत्व

  • सेमीकंडक्टर चिप्स आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक्स और रक्षा प्रणालियों के लिए महत्वपूर्ण हैं, जिससे राष्ट्रीय सुरक्षा (National Security) मजबूत होगी।
  • घरेलू उत्पादन से भू-राजनीतिक तनावों और आपूर्ति श्रृंखला व्यवधानों के प्रति भेद्यता कम होगी।
  • यह डिजिटल इंडिया (Digital India) और मेक इन इंडिया (Make in India) जैसी पहलों के लक्ष्यों को प्राप्त करने में सहायक होगा।

तकनीकी महत्व

  • उन्नत सेमीकंडक्टर पैकेजिंग और 3D पैकेजिंग जैसी तकनीकों का विकास भारत को अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी (Cutting-Edge Technology) में आगे बढ़ाएगा।
  • अनुसंधान एवं विकास (Research and Development) पर ध्यान केंद्रित करने से नवाचार (Innovation) को बढ़ावा मिलेगा और नई प्रौद्योगिकियों का विकास होगा।
  • यह भारत को सेमीकंडक्टर डिज़ाइन और विनिर्माण में एक वैश्विक केंद्र बनाने की दिशा में एक कदम है।

चुनौतियाँ

1. उच्च पूंजीगत व्यय

  • सेमीकंडक्टर फैब और उन्नत पैकेजिंग इकाइयों की स्थापना के लिए भारी पूंजी निवेश की आवश्यकता होती है।
  • यह निवेश अक्सर जोखिम भरा होता है और इसमें लंबा प्रतिफल (Return) चक्र होता है।

2. कुशल कार्यबल की कमी

  • सेमीकंडक्टर उद्योग को अत्यधिक विशिष्ट कौशल वाले इंजीनियरों और तकनीशियनों की आवश्यकता होती है।
  • भारत में इस क्षेत्र के लिए पर्याप्त प्रशिक्षित प्रतिभाओं की कमी एक बड़ी चुनौती है।

3. तकनीकी जटिलता और तीव्र परिवर्तन

  • सेमीकंडक्टर विनिर्माण एक अत्यंत जटिल प्रक्रिया है जिसमें लगातार तकनीकी उन्नयन की आवश्यकता होती है।
  • प्रौद्योगिकी में तेजी से बदलाव के कारण निवेश अप्रचलित (Obsolete) हो सकता है।

4. वैश्विक प्रतिस्पर्धा

  • सेमीकंडक्टर उद्योग पर कुछ प्रमुख वैश्विक खिलाड़ियों का प्रभुत्व है।
  • भारत को इन स्थापित खिलाड़ियों के साथ प्रतिस्पर्धा करने और अपनी जगह बनाने में चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा।

5. बुनियादी ढांचा और आपूर्ति श्रृंखला

  • सेमीकंडक्टर इकाइयों को विश्वसनीय बिजली आपूर्ति, स्वच्छ जल और विशेष रसायनों की आवश्यकता होती है।
  • एक मजबूत घरेलू आपूर्ति श्रृंखला विकसित करना एक महत्वपूर्ण चुनौती है।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
पूंजी की गहनता सेमीकंडक्टर विनिर्माण में भारी अग्रिम निवेश की आवश्यकता होती है, जो वित्तीय जोखिम पैदा करता है।
प्रतिभा पूल की कमी विशेषज्ञता वाले इंजीनियरों और शोधकर्ताओं की अपर्याप्त उपलब्धता उद्योग के विकास को बाधित कर सकती है।
तकनीकी अप्रचलन प्रौद्योगिकी में तेजी से बदलाव के कारण मौजूदा निवेश और सुविधाएं जल्दी पुरानी हो सकती हैं।
वैश्विक भू-राजनीति सेमीकंडक्टर आपूर्ति श्रृंखलाएं भू-राजनीतिक तनावों और व्यापार युद्धों के प्रति संवेदनशील हैं।
पर्यावरणीय प्रभाव सेमीकंडक्टर फैब को बड़ी मात्रा में पानी और ऊर्जा की आवश्यकता होती है, जिससे पर्यावरणीय चिंताएं बढ़ सकती हैं।

सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें

  • सेमीकॉन इंडिया कार्यक्रम (Semicon India Programme)

आगे की राह

  • सेमीकंडक्टर क्षेत्र में अनुसंधान एवं विकास (R&D) को बढ़ावा देने के लिए सार्वजनिक-निजी भागीदारी (Public-Private Partnerships) को मजबूत करना।
  • सेमीकंडक्टर उद्योग के लिए एक कुशल कार्यबल तैयार करने हेतु विशेष कौशल विकास कार्यक्रम और शैक्षणिक पाठ्यक्रम शुरू करना।
  • निवेशकों को आकर्षित करने के लिए अनुकूल नीतिगत वातावरण और प्रोत्साहन (Incentives) प्रदान करना, जिसमें कर छूट और सब्सिडी शामिल हैं।
  • सेमीकंडक्टर आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने के लिए घरेलू विनिर्माण क्षमताओं का विकास करना और स्थानीय आपूर्तिकर्ताओं को बढ़ावा देना।
  • वैश्विक सेमीकंडक्टर कंपनियों के साथ सहयोग और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण (Technology Transfer) समझौतों को बढ़ावा देना।
  • सेमीकंडक्टर विनिर्माण के लिए आवश्यक बुनियादी ढांचे, जैसे विश्वसनीय बिजली और जल आपूर्ति, का विकास सुनिश्चित करना।
  • सेमीकंडक्टर इकाइयों के पर्यावरणीय प्रभाव को कम करने के लिए टिकाऊ प्रथाओं और प्रौद्योगिकियों को अपनाना।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

सेमीकंडक्टर क्षेत्र · इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण · आत्मनिर्भर भारत · मेक इन इंडिया · उन्नत पैकेजिंग · डिजाइन और अनुसंधान · मूल्य श्रृंखला · राजकोषीय प्रोत्साहन · कौशल विकास · भू-रणनीतिक महत्व

अवधारणा प्रवाह

सेमीकंडक्टर क्षमता का आकलन  →  निवेश और प्रोत्साहन  →  विनिर्माण इकाइयों की स्थापना  →  रोजगार सृजन और आर्थिक संवृद्धि  →  तकनीकी आत्मनिर्भरता और निर्यात

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. भारत सरकार ने सेमीकंडक्टर विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए ‘सेमीकॉन इंडिया’ पहल शुरू की है।
2. सेमीकंडक्टर उद्योग में ‘टेप-आउट’ का अर्थ चिप डिज़ाइन को उत्पादन के लिए भेजना है।
3. ओडिशा में उन्नत सेमीकंडक्टर पैकेजिंग इकाई स्थापित की जा रही है।
उपर्युक्त में से कितने कथन सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. सभी तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: सभी तीन — कथन 1 सही है। भारत सरकार ने सेमीकंडक्टर क्षेत्र में निवेश आकर्षित करने और विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए ‘सेमीकॉन इंडिया’ कार्यक्रम शुरू किया है। कथन 2 सही है। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने ‘सेमीकॉन इंडिया 2026’ में ‘टेप-आउट’ शब्द का अर्थ स्पष्ट किया था। कथन 3 सही है। केंद्रीय मंत्री ने बताया कि ओडिशा में एक 3D पैकेजिंग इकाई स्थापित की जा रही है, जो उन्नत सेमीकंडक्टर पैकेजिंग का हिस्सा है।

Q2. अभिकथन (A): भारत सेमीकंडक्टर मूल्य श्रृंखला के सभी छह स्तंभों – डिज़ाइन, मशीनें और सामग्री, अधिक फैब, उन्नत पैकेजिंग, अनुसंधान और विकास तथा प्रतिभा पर ध्यान केंद्रित कर रहा है।
कारण (R): भारत का लक्ष्य सेमीकंडक्टर क्षेत्र में आत्मनिर्भरता प्राप्त करना और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में एक प्रमुख खिलाड़ी बनना है।
सही विकल्प चुनें:

  1. A और R दोनों सत्य हैं और R, A की सही व्याख्या है।
  2. A और R दोनों सत्य हैं, लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है।
  3. A सत्य है, लेकिन R असत्य है।
  4. A असत्य है, लेकिन R सत्य है।

उत्तर: A और R दोनों सत्य हैं और R, A की सही व्याख्या है। — अभिकथन (A) सही है, जैसा कि केंद्रीय मंत्री ने ‘सेमीकॉन 2.0’ के छह स्तंभों का उल्लेख किया है। कारण (R) भी सही है, क्योंकि भारत का सेमीकंडक्टर मिशन आत्मनिर्भरता और वैश्विक स्थिति प्राप्त करने पर केंद्रित है। कारण (R) अभिकथन (A) की सही व्याख्या करता है, क्योंकि ये सभी प्रयास आत्मनिर्भरता और वैश्विक भूमिका के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए किए जा रहे हैं।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ भारत में सेमीकंडक्टर विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए सरकार द्वारा उठाए गए प्रमुख कदमों का विश्लेषण कीजिए। इस क्षेत्र में ओडिशा जैसे राज्यों की क्षमता भारत के ‘आत्मनिर्भर भारत’ लक्ष्य में कैसे योगदान दे सकती है? (15 Marks)

रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. परिचय: भारत के सेमीकंडक्टर मिशन और इसके महत्व का संक्षिप्त परिचय।
2. सरकार द्वारा उठाए गए प्रमुख कदम: ‘सेमीकॉन इंडिया’ कार्यक्रम, उत्पादन-लिंक्ड प्रोत्साहन (PLI) योजनाएँ, राजकोषीय प्रोत्साहन (जैसे 76,000 करोड़ रुपये का पैकेज), अनुसंधान एवं विकास को बढ़ावा, कौशल विकास पहल (जैसे इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (ISM) के तहत), और नीतिगत समर्थन का उल्लेख करें।
3. ओडिशा जैसे राज्यों की क्षमता: ओडिशा में उन्नत सेमीकंडक्टर पैकेजिंग इकाइयों की स्थापना, राज्य के अनुकूल औद्योगिक नीतियां, कुशल कार्यबल की उपलब्धता, और बुनियादी ढाँचा विकास जैसे बिंदुओं पर प्रकाश डालें।
4. ‘आत्मनिर्भर भारत’ लक्ष्य में योगदान: सेमीकंडक्टर विनिर्माण में घरेलू क्षमता का विकास आयात पर निर्भरता कम करेगा, इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण को बढ़ावा देगा, रोजगार सृजित करेगा, और भारत को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में एक महत्वपूर्ण खिलाड़ी बनाएगा। भू-रणनीतिक महत्व पर भी चर्चा करें।
5. चुनौतियाँ और आगे की राह: पूंजी-गहन प्रकृति, तकनीकी जटिलता, वैश्विक प्रतिस्पर्धा और कुशल कार्यबल की कमी जैसी चुनौतियों का संक्षिप्त उल्लेख करें। इन चुनौतियों से निपटने के लिए नवाचार, सार्वजनिक-निजी भागीदारी और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग के महत्व पर जोर दें।
6. निष्कर्ष: भारत के सेमीकंडक्टर क्षेत्र के उज्ज्वल भविष्य और इसके व्यापक आर्थिक प्रभावों पर सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ समाप्त करें।

स्रोत: orissapost.com

Odisha PCS (OPSC (OAS)) — राज्य PCS अभ्यास

Prelims: हाल ही में केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने ओडिशा में सेमीकंडक्टर निर्माण क्षमता की संभावनाओं पर प्रकाश डाला है। ओडिशा सरकार द्वारा प्रस्तावित सेमीकंडक्टर पार्क के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. ओडिशा में प्रस्तावित सेमीकंडक्टर पार्क देश के पहले ‘ग्रीनफील्ड’ सेमीकंडक्टर विनिर्माण केंद्रों में से एक होगा। 2. इस पार्क के लिए प्रस्तावित स्थान कटक जिले में स्थित है। 3. ओडिशा सरकार द्वारा सेमीकंडक्टर पार्क स्थापित करने के लिए केंद्र सरकार से 10,000 करोड़ रुपये के निवेश की मांग की गई है। उपरोक्त में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?

  1. केवल 1
  2. केवल 1 और 3
  3. केवल 2 और 3
  4. 1, 2 और 3

उत्तर: केवल 1 और 3 — ओडिशा में प्रस्तावित सेमीकंडक्टर पार्क देश का पहला ‘ग्रीनफील्ड’ सेमीकंडक्टर विनिर्माण केंद्र होगा तथा केंद्र सरकार से 10,000 करोड़ रुपये के निवेश की मांग की गई है। कटक जिले में प्रस्तावित स्थान गलत है; प्रस्तावित स्थान संभवतः संबलपुर या अन्य औद्योगिक क्षेत्र में है।

Mains: ओडिशा राज्य में सेमीकंडक्टर उद्योग की स्थापना के लिए आवश्यक भौगोलिक, तकनीकी एवं नीति संबंधी अवसरों एवं चुनौतियों का विश्लेषण कीजिए। राज्य सरकार द्वारा प्रस्तावित सेमीकंडक्टर पार्क की सफलता के लिए किन प्रमुख रणनीतियों को अपनाया जाना चाहिए?


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।


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