20 Nov कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और रोजगार के प्रति भारत का दृष्टिकोण
यह लेख कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और रोजगार के प्रति भारत का दृष्टिकोण पर आधारित है। जो कि दैनिक समसामयिक मामलों से संबंधित है।
पाठ्यक्रम : सामान्य अध्ययन-II सरकारी नीतियाँ और हस्तक्षेपसामान्य अध्ययन-III – रोबोटिक्सकृत्रिम बुद्धिमत्तावैज्ञानिक नवाचार और खोजसूचना प्रौद्योगिकी और कंप्यूटर
चर्चा में क्यों?
कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) भारत की अगली आर्थिक वृद्धि को गति देने वाली है और नीति आयोग का अनुमान है कि AI वर्ष 2030 तक भारत की GDP में 500–600 बिलियन अमेरिकी डॉलर का योगदान कर सकती है।
भारत की अर्थव्यवस्था पर AI के प्रभाव को लेकर नीति आयोग की रिपोर्ट क्या निष्कर्ष प्रस्तुत करती है?
AI अर्थव्यवस्था में रोज़गार सृजन के रोडमैप : यह रिपोर्ट भारत की रणनीतिक योजना प्रस्तुत करती है, जिसका उद्देश्य AI से उत्पन्न होने वाले बदलावों का समाधान करना और देश को AI-संचालित कार्यबल विकास का वैश्विक केंद्र बनाना है। रिपोर्ट 3W फ्रेमवर्क प्रस्तुत करती है, जो AI के Work (कार्य), Workers (कार्य करने वाले) और Workforce (कार्यबल) पर प्रभाव को रेखांकित करता है।
समावेशी सामाजिक विकास हेतु AI रोडमैप : यह रिपोर्ट अत्याधुनिक तकनीकों का उपयोग करके अनौपचारिक श्रमिकों को अधिक औपचारिक, सशक्त और भविष्य-उन्मुख कार्यबल में परिवर्तित करने पर केंद्रित है। यह समावेशिता को बढ़ाने और सतत् विकास को बढ़ावा देने में AI की क्षमता पर ज़ोर देता है।
भारत के लिये चुनौती और अवसर, दोनों के रूप में AI : AI भारत की अर्थव्यवस्था के लिये चुनौतियाँ भी लाता है और अवसर भी।
जहाँ यह पारंपरिक औपचारिक रोज़गार में व्यवधान उत्पन्न करता है, वहीं यह विशाल अनौपचारिक कार्यबल को औपचारिक रूप देने और उसकी उत्पादकता को उल्लेखनीय रूप से बढ़ाने का एक अनोखा अवसर भी प्रदान करता है।
भारत के आर्थिक परिवर्तन के लिये AI में क्या संभावनाएँ हैं?

नए, उच्च-मूल्य वाले क्षेत्रों में रोज़गार सृजन : भारत वर्ष 2031 तक लगभग 4 मिलियन नए रोज़गार उत्पन्न कर सकता है, विशेषकर तकनीक और ग्राहक सेवा क्षेत्रों में। इन रोज़गारों में प्रॉम्प्ट इंजीनियर, क्वांटम ML इंजीनियर और उन्नत AI मॉडल डेवलपर जैसे उच्च-कौशल वाले पद शामिल होंगे।
वैश्विक आर्थिक स्थिति में सुधार: मज़बूत डिजिटल प्रतिभा आधार का उपयोग करते हुए, पारंपरिक IT सेवाओं से AI-आधारित कार्य और नवाचार की ओर बढ़कर भारत विश्व की ‘AI वर्कफोर्स कैपिटल’ बन सकता है। प्रस्तावित इंडिया AI टैलेंट मिशन सिंगापुर और UAE जैसी पहल की तरह भारत में प्रतिभा पलायन को रोकने में भी सहायता कर सकता है।
नए राजस्व स्रोत और उद्योग : यह AI-संचालित दवा खोज और स्मार्ट विनिर्माण जैसे उभरते क्षेत्रों में नई संभावनाएँ प्रस्तुत कर रहा है, जबकि क्वांटम कंप्यूटिंग, IoT तथा 5G के साथ इसका अभिसरण स्मार्ट सिटीज़ एवं लॉजिस्टिक्स अनुकूलन में अवसर उत्पन्न कर रहा है।
उत्पादकता लाभ : AI दक्षता और वैश्विक प्रतिस्पर्द्धात्मकता को बढ़ाता है, सॉफ्टवेयर विकास में 10-20% उत्पादकता लाभ प्रदान करता है तथा चैटबॉट एवं रियल-टाइम ट्रांसलेशन के माध्यम से ग्राहक सेवा में लागत को कम करता है।
भविष्य-उन्मुख अर्थव्यवस्था की नींव : एक ओपन-सोर्स इंडिया AI कॉमन्स की स्थापना से डेटासेट, मॉडल और बेंचमार्क उपलब्ध होंगे, जिससे नवाचार को लोकतांत्रिक बनाया जा सकेगा। साथ ही इंडिया AI कंप्यूट ग्रिड साझा हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग उपलब्ध कराएगा, जिससे स्थानीय अनुसंधान एवं विकास को बढ़ावा मिलेगा तथा प्रतिभा भारत में बनी रहेगी।
भारतीय अर्थव्यवस्था के लिये AI द्वारा प्रस्तुत चुनौतियाँ क्या हैं?
तकनीकी क्षेत्र में रोज़गार हानि : नीति आयोग के अनुसार, IT सेवा क्षेत्र का कार्यबल वर्ष 2023 में 7.5–8 मिलियन से घटकर वर्ष 2031 तक 6 मिलियन तक पहुँच सकता है।सामान्य रूप से भारत में वर्ष 2030 तक औपचारिक रोज़गार का लगभग 60% हिस्सा ऑटोमेशन के जोखिम में है, जिसमें IT और BPO क्षेत्र विशेष रूप से संवेदनशील हैं, क्योंकि इन क्षेत्रों में दिनचर्या आधारित पैमाने योग्य कार्य अधिक हैं।
शिक्षा प्रणाली में अंतराल : भारत में कंप्यूटर विज्ञान शिक्षा में अंतराल है, जिसकी पहुँच सीमित है और AI पाठ्यक्रम पुराना है, जिसमें रिट्रीवल ऑग्मेंटेड जेनरेशन (RAG) जैसी उभरती अवधारणाएँ शामिल नहीं हैं। इन कमियों के कारण अनुसंधान उत्पादन कम है, AI पेटेंट में हिस्सेदारी 5% से भी कम है और प्रतिवर्ष AI से संबंधित 500 से कम पीएचडी ही प्रदान की जाती हैं।
AI प्रतिभा की मांग–आपूर्ति का अंतर : AI प्रतिभा की मांग 25% की संयोजित वार्षिक वृद्धि दर (CAGR) से बढ़ रही है (वर्ष 2026 तक 8 लाख से बढ़कर 12.5 लाख तक), जबकि आपूर्ति केवल 15% CAGR से बढ़ रही है।भारत को नकारात्मक प्रतिभा प्रवासन का भी सामना करना पड़ रहा है, जिसमें शीर्ष AI शोधकर्त्ता 10,000 में से 1.55 की दर से विदेश जा रहे हैं।
व्यापक प्रणालीगत जोखिम : भारत प्रतिस्पर्द्धात्मकता और रणनीतिक बढ़त चीन, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और सिंगापुर जैसे देशों के मुकाबले खोने के जोखिम का सामना कर रहा है। सामजिक रूप से, 40 करोड़ अनौपचारिक श्रमिकों के लिये सीमित सुरक्षा और विभिन्न क्षेत्रों व समूहों पर असमान प्रभाव बड़े चुनौतियाँ उत्पन्न करते हैं।
भारत में AI के सतत् उपयोग के लिये नीति आयोग ने क्या सिफारिशें की हैं?
शिक्षा प्रणाली में AI का एकीकरण : स्कूल स्तर से ही AI शिक्षा को शामिल किया जाए, AI-केंद्रित उच्च शिक्षा कार्यक्रमों का विस्तार किया जाए तथा अनुसंधान को सशक्त बनाने के लिये AI पीएचडी फेलोशिप बढ़ाई जाए। साथ ही संकाय–उद्योग सहयोग के माध्यम से पाठ्यक्रम को निरंतर अद्यतन बनाए रखना सुनिश्चित किया जाए।
वैश्विक AI प्रतिभा का केंद्र बनना : भारतीय AI शोधकर्त्ताओं को बनाए रखने और उन्हें वापस आकर्षित करने के लिये प्रतिस्पर्द्धी अनुदान, बेहतर वेतन और राष्ट्रीय कंप्यूटिंग ग्रिड तक प्राथमिकता वाली पहुँच प्रदान की जाए। साथ ही वैश्विक विशेषज्ञों को आकर्षित करने हेतु एक विशेष AI टैलेंट वीज़ा शुरू किया जाए।
एआई कौशल आधार का निर्माण : व्यापक AI साक्षरता को बढ़ावा देने के लिये NAPS (राष्ट्रीय शिक्षुता संवर्द्धन योजना) और PMKVY (प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना) को विस्तृत करते हुए एक राष्ट्रीय पुनर्कौशल कार्यक्रम शुरू किया जाए। साथ ही कार्यरत पेशेवरों को उच्च-स्तरीय भूमिकाओं में उन्नत करने हेतु अनुकूल AI मास्टर और डॉक्टरेट कार्यक्रम आरंभ किये जाएँ।
भारत ओपन-सोर्स AI कॉमन्स की स्थापना : उच्च गुणवत्ता वाले डेटासेट, मॉडल और बेंचमार्क के साथ एक केंद्रीय AI कॉमन्स बनाएँ, विश्वविद्यालयों और मंत्रालयों से डेटा योगदान को प्रोत्साहित करना तथा विश्वसनीय सत्यापन उपकरणों के माध्यम से विश्वास और पारदर्शिता सुनिश्चित करना।
संघीय राष्ट्रीय कंप्यूट एवं नवाचार ग्रिड : विखंडित HPC संसाधनों को एकीकृत कंप्यूट ग्रिड में समेकित करना तथा उन्नत मॉडल प्रशिक्षण का समर्थन करने तथा विदेशी बुनियादी ढाँचे पर निर्भरता को कम करने के लिये छात्रों, स्टार्टअप और शोधकर्त्ताओं के लिये स्तरीय, किफायती पहुँच प्रदान करना।

निष्कर्ष:
AI भारत के लिये एक परिवर्तनकारी आर्थिक अवसर प्रस्तुत करता है नीति आयोग का अनुमान है कि यदि इसे पुनर्कौशल, सुदृढ़ AI शिक्षा, मज़बूत डेटा गवर्नेंस, ओपन-सोर्स संसाधनों और राष्ट्रीय कम्प्यूटेशनल अवसंरचना के साथ जोड़ा जाए तो यह वर्ष 2030 तक जीडीपी में 500–600 अरब अमेरिकी डॉलर की बढ़ोतरी कर सकता है। सतत् विकास सुनिश्चित करने के लिये नौकरी विस्थापन और क्षेत्रीय असमानताओं को कम करने हेतु रणनीतिक नीतियाँ, समावेशी कौशल विकास और अनुसंधान निवेश अत्यंत आवश्यक हैं।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न :
Q. भारत में AI-संचालित अर्थव्यवस्था के निर्माण के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1.भारत सरकार का “National Programme on Artificial Intelligence” NITI Aayog द्वारा संचालित है।
2.“India AI Mission” का उद्देश्य स्वास्थ्य, कृषि और शिक्षा जैसे प्रमुख क्षेत्रों में AI-आधारित समाधान को बढ़ावा देना है।
3.भारत की “Computing Infrastructure for AI” नीति का उद्देश्य एक राष्ट्रीय AI सुपरकंप्यूटिंग क्षमता स्थापित करना है।
ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
(a) केवल 1 और 2
(b) केवल 2
(c) केवल 1 और 3
(d) 1, 2 और 3
उत्तर: (d) 1, 2 और 3
मुख्य परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न :
Q. “कृत्रिम बुद्धिमत्ता भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक दोधारी तलवार है।” इस कथन का आलोचनात्मक मूल्यांकन कीजिए तथा समावेशी AI के क्षेत्र में भारत को वैश्विक अग्रणी बनाने हेतु एक रणनीतिक रोडमैप प्रस्तावित कीजिए। ( शब्द सीमा – 250, अंक – 15 )
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