कैबिनेट ने मंजूर की ‘भव्य रसायन’ योजना: तीन रसायन पार्क स्थापित होंगे

कैबिनेट ने मंजूर की 'भव्य रसायन' योजना: तीन रसायन पार्क स्थापित होंगे — भव्य रसायन योजना: तीन रासायनिक पार्क स्थापना प्रक्रिया

कैबिनेट ने मंजूर की ‘भव्य रसायन’ योजना: तीन रसायन पार्क स्थापित होंगे

विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper III — अर्थव्यवस्था  |  GS Paper III — पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी
  • Prelims: भव्य-रसायन योजना, रसायन पार्क, औद्योगिक विकास, विनिर्माण क्षेत्र, पर्यावरण अनुकूल उद्योग, आत्मनिर्भर भारत
  • Essay: भारत के औद्योगिक विकास में रसायन क्षेत्र की भूमिका और चुनौतियाँ, सतत विकास के लक्ष्य प्राप्त करने में औद्योगिक नीतियों का महत्व

त्वरित पुनरावृत्ति: भव्य-रसायन योजना का उद्देश्य तीन समर्पित रासायनिक पार्क स्थापित करके भारतीय रासायनिक उद्योग को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाना और सतत विकास को बढ़ावा देना है।

यह खबर चर्चा में क्यों?

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने ‘भारत औद्योगिक विकास योजना रसायन’ (भव्य-रसायन योजना) को मंजूरी दी है। इस योजना का उद्देश्य देश में तीन समर्पित रासायनिक पार्क स्थापित करना है, जिसके लिए वित्त वर्ष 2026-27 से वित्त वर्ष 2030-31 तक पांच वर्षों की अवधि के लिए 3,030 करोड़ रुपये का वित्तीय आवंटन किया गया है। यह पहल भारत के रासायनिक उद्योग को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने और सतत विकास को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

पृष्ठभूमि

  • भारत का रसायन और पेट्रोकेमिकल उद्योग कृषि, वस्त्र, फार्मास्यूटिकल्स, निर्माण, ऑटोमोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे विभिन्न क्षेत्रों के लिए महत्वपूर्ण कच्चे माल का उत्पादन करता है।
  • यह क्षेत्र भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक प्रमुख योगदानकर्ता है, जो रोजगार सृजन और निर्यात में वृद्धि में सहायक है।
  • वर्तमान में, भारतीय रासायनिक उद्योग को वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं में एकीकरण, लागत प्रतिस्पर्धात्मकता और पर्यावरणीय अनुपालन जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।
  • वित्त वर्ष 2026-27 के केंद्रीय बजट में इस योजना की घोषणा की गई थी, जो सरकार की ‘आत्मनिर्भर भारत’ पहल के अनुरूप है।
  • समर्पित रासायनिक पार्कों की स्थापना से साझा बुनियादी ढाँचे और उपयोगिताओं के माध्यम से इन चुनौतियों का समाधान करने में मदद मिलेगी।
  • यह योजना घरेलू और विदेशी निवेश को आकर्षित करके, उत्पादन क्षमता बढ़ाकर और रोजगार सृजित करके इस क्षेत्र के विकास में सहायता करेगी।

भव्य-रसायन योजना क्या है?

  • भव्य-रसायन योजना का पूरा नाम ‘भारत औद्योगिक विकास योजना रसायन’ है, जिसका लक्ष्य देश में तीन समर्पित रासायनिक पार्क स्थापित करना है।
  • इस योजना के लिए कुल 3,030 करोड़ रुपये का वित्तीय आवंटन किया गया है, जिसमें से 3,000 करोड़ रुपये पार्क की भीतरी अवसंरचना सुविधाओं और बुनियादी उपयोगिताओं के लिए तथा 30 करोड़ रुपये प्रशासनिक व्यय के लिए हैं।
  • यह योजना वित्त वर्ष 2026-27 से वित्त वर्ष 2030-31 तक पांच वर्षों की अवधि के लिए लागू रहेगी।
  • केंद्र सरकार प्रत्येक पार्क के लिए संबंधित राज्य सरकार के न्यूनतम 500 करोड़ रुपये के योगदान के बाद 1,000 करोड़ रुपये तक का अनुदान प्रदान करेगी।
  • प्रत्येक पार्क में कम से कम आठ वर्ग किलोमीटर (कम से कम 2,000 एकड़) का निर्बाध भूमि क्षेत्र होगा, जो रासायनिक उद्योग के लिए सामान्य अवसंरचना प्रदान करेगा।
  • इन पार्कों में सामान्य अपशिष्ट उपचार संयंत्र (CETP), उपचार, भंडारण और निपटान सुविधा (TSDF), जल आपूर्ति, विलायक पुनर्प्राप्ति, भाप उत्पादन, पाइपलाइन नेटवर्क और लॉजिस्टिक्स जैसी सुविधाएं शामिल होंगी।
  • यह योजना प्रतिस्पर्धी, प्रदर्शन-आधारित वित्त पोषण तंत्र (चैलेंज रूट) के अंतर्गत राज्य सरकारों द्वारा रासायनिक पार्कों के विकास में सहायता प्रदान करेगी।
  • योजना का उद्देश्य कच्चे माल की सोर्सिंग (अपस्ट्रीम) से लेकर अंतिम उपभोक्ता तक आपूर्ति (डाउनस्ट्रीम) और सहायक उद्योगों सहित संपूर्ण मूल्य श्रृंखलाओं में रासायनिक उद्योग के विकास को बढ़ावा देना है।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
योजना का नाम भारत औद्योगिक विकास योजना रसायन (भव्य रसायन)
उद्देश्य देश में तीन समर्पित रासायनिक पार्क स्थापित करना
वित्तीय आवंटन कुल 3,030 करोड़ रुपये (3,000 करोड़ रुपये अवसंरचना के लिए, 30 करोड़ रुपये प्रशासनिक व्यय के लिए)
कार्यकाल वित्त वर्ष 2026-27 से वित्त वर्ष 2030-31 तक (पांच वर्ष)
केंद्र सरकार का योगदान प्रत्येक पार्क के लिए 1,000 करोड़ रुपये तक का अनुदान, राज्य सरकार के न्यूनतम 500 करोड़ रुपये के योगदान के बाद
पार्क का न्यूनतम क्षेत्र कम से कम आठ वर्ग किलोमीटर (2,000 एकड़)

महत्व

आर्थिक महत्व

  • यह योजना रासायनिक उद्योग की संपूर्ण मूल्य श्रृंखलाओं (कच्चे माल की सोर्सिंग से लेकर अंतिम उपभोक्ता तक आपूर्ति और सहायक उद्योगों तक) के विकास को बढ़ावा देगी।
  • साझा बुनियादी ढांचा सुविधाओं और मूलभूत उपयोगिताओं के माध्यम से लागत प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ेगी, जिससे भारतीय उद्योग वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बन सकेगा।
  • निर्यात में वृद्धि होगी और आयात प्रतिस्थापन में सुधार होगा, जिससे भारतीय रसायन उद्योग वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं में बेहतर ढंग से एकीकृत हो पाएगा।
  • घरेलू और विदेशी निवेश आकर्षित करके, घरेलू उत्पादन क्षमता बढ़ाकर और रोजगार सृजित करके इस क्षेत्र के विकास में सहायता मिलेगी।

पर्यावरणीय महत्व

  • यह योजना पर्यावरण के अनुकूल पारिस्थितिकी तंत्र बनाकर भारतीय रसायन उद्योग के सतत विकास को बढ़ावा देगी।
  • केंद्रीकृत सुविधाएं जैसे साझा अपशिष्ट उपचार संयंत्र (CETP), उपचार, भंडारण और निपटान सुविधा (TSDF), तथा खतरनाक अपशिष्ट प्रबंधन अवसंरचना पर्यावरण नियमों का बेहतर अनुपालन सुनिश्चित करेंगी।

सामरिक महत्व

  • यह योजना कृषि, वस्त्र, फार्मास्यूटिकल्स, न्यूट्रास्यूटिकल्स, निर्माण, ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे विभिन्न उद्योगों के लिए आवश्यक रसायनों और पेट्रोकेमिकल्स के उत्पादन को बढ़ावा देगी।
  • यह क्षेत्र की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ावा देगी और इस प्रकार आत्मनिर्भरता को बल मिलेगा, जो ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य को प्राप्त करने में सहायक होगा।
  • रसायन क्षेत्र के विकास से अर्थव्यवस्था के अन्य क्षेत्रों के विकास में भी सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा, जिससे रोजगार सृजन में वृद्धि होगी और समग्र आर्थिक विकास होगा।

चुनौतियाँ

1. भूमि अधिग्रहण और स्थान चयन

  • प्रत्येक पार्क के लिए कम से कम 2,000 एकड़ के निर्बाध भूमि क्षेत्र की आवश्यकता है, जो घनी आबादी वाले क्षेत्रों में एक चुनौती हो सकती है।
  • उपयुक्त स्थानों का चयन, जो कच्चे माल की उपलब्धता, परिवहन नेटवर्क और पर्यावरणीय संवेदनशीलता को संतुलित करे, महत्वपूर्ण होगा।

2. पर्यावरणीय अनुपालन और सतत विकास

  • रसायन उद्योग में पर्यावरणीय जोखिम अधिक होते हैं; साझा अपशिष्ट उपचार संयंत्रों और खतरनाक अपशिष्ट प्रबंधन सुविधाओं का प्रभावी संचालन सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण होगा।
  • पर्यावरणीय प्रभाव आकलन (EIA) और नियमों का सख्त अनुपालन सुनिश्चित करना एक सतत चुनौती बनी रहेगी।

3. अंतर-राज्यीय प्रतिस्पर्धा और समन्वय

  • चैलेंज रूट के तहत राज्य सरकारों द्वारा पार्कों के विकास में सहायता प्रदान की जाएगी, जिससे राज्यों के बीच प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी।
  • केंद्र और राज्य सरकारों के बीच प्रभावी समन्वय और सहयोग सुनिश्चित करना योजना की सफलता के लिए महत्वपूर्ण होगा।

4. तकनीकी उन्नयन और नवाचार

  • वैश्विक प्रतिस्पर्धा में बने रहने के लिए भारतीय रसायन उद्योग को लगातार तकनीकी उन्नयन और नवाचार पर ध्यान केंद्रित करना होगा।
  • अनुसंधान और विकास (R&D) में निवेश को बढ़ावा देना और नवीनतम उत्पादन तकनीकों को अपनाना एक चुनौती हो सकती है।

5. कुशल जनशक्ति की उपलब्धता

  • रसायन उद्योग के लिए विशिष्ट कौशल और विशेषज्ञता वाली जनशक्ति की आवश्यकता होती है।
  • इन पार्कों के संचालन और विकास के लिए पर्याप्त कुशल श्रमिकों और पेशेवरों की उपलब्धता सुनिश्चित करना एक चुनौती हो सकती है।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
भूमि अधिग्रहण बड़ी निर्बाध भूमि की उपलब्धता और स्थानीय प्रतिरोध
पर्यावरणीय जोखिम रसायन उद्योग से जुड़े प्रदूषण और अपशिष्ट प्रबंधन की चुनौतियाँ
राज्य सरकारों का योगदान राज्यों द्वारा न्यूनतम 500 करोड़ रुपये के योगदान की क्षमता और इच्छा
वैश्विक प्रतिस्पर्धा भारतीय उत्पादों की गुणवत्ता और लागत में वैश्विक मानकों को पूरा करना
बुनियादी ढांचा रखरखाव साझा सुविधाओं का दीर्घकालिक रखरखाव और उन्नयन सुनिश्चित करना

सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें

  • भारत औद्योगिक विकास योजना रसायन (भव्य रसायन)

आगे की राह

  • भूमि अधिग्रहण प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित और पारदर्शी बनाना, जिसमें स्थानीय समुदायों के हितों का ध्यान रखा जाए।
  • पर्यावरणीय प्रभाव आकलन (EIA) और जोखिम प्रबंधन योजनाओं को सख्ती से लागू करना, साथ ही सतत उत्पादन पद्धतियों को बढ़ावा देना।
  • राज्यों को वित्तीय सहायता और तकनीकी मार्गदर्शन प्रदान कर उनके योगदान को प्रोत्साहित करना, विशेषकर कम विकसित राज्यों में।
  • अनुसंधान और विकास (R&D) में निवेश को बढ़ावा देना और उद्योग-अकादमिक सहयोग को मजबूत करना ताकि नवाचार और तकनीकी उन्नयन को बढ़ावा मिल सके।
  • रसायन उद्योग के लिए विशिष्ट कौशल विकास कार्यक्रमों को शुरू करना ताकि कुशल जनशक्ति की उपलब्धता सुनिश्चित हो सके।
  • वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं को अपनाना और भारतीय रसायन उद्योग को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप बनाने के लिए निर्यात प्रोत्साहन नीतियों को मजबूत करना।
  • पार्कों में स्थापित होने वाले उद्योगों के लिए सिंगल विंडो क्लीयरेंस (Single Window Clearance) प्रणाली को प्रभावी बनाना ताकि निवेश आकर्षित हो सके।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

भारत औद्योगिक विकास योजना रसायन (भव्य रसायन) योजना · रासायनिक पार्क · रसायन उद्योग · विनिर्माण क्षेत्र · आत्मनिर्भर भारत · पर्यावरण अनुकूल विकास · रोजगार सृजन · वैश्विक मूल्य श्रृंखला

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 246’, ‘note’: ‘संघ और राज्यों के बीच विधायी शक्तियों का वितरण’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 282’, ‘note’: ‘संघ या राज्य द्वारा अनुदान’}
  • {‘article’: ‘सातवीं अनुसूची’, ‘note’: ‘उद्योगों और आर्थिक नियोजन से संबंधित प्रविष्टियाँ’}

अवधारणा प्रवाह

केंद्रीय मंत्रिमंडल की मंजूरी  →  तीन समर्पित रासायनिक पार्कों की स्थापना  →  साझा बुनियादी ढांचे और उपयोगिताओं का विकास  →  लागत प्रतिस्पर्धात्मकता और निर्यात में वृद्धि  →  रोजगार सृजन और आर्थिक विकास

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. भारत औद्योगिक विकास योजना रसायन (भव्य रसायन) योजना के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. इस योजना का उद्देश्य देश में तीन समर्पित रासायनिक पार्क स्थापित करना है।
2. यह योजना वित्त वर्ष 2026-27 से वित्त वर्ष 2030-31 तक पांच वर्षों की अवधि के लिए लागू रहेगी।
3. केंद्र सरकार प्रत्येक पार्क के लिए संबंधित राज्य सरकार की ओर से न्यूनतम 500 करोड़ रुपये का योगदान करने के बाद 1,000 करोड़ रुपये तक का अनुदान प्रदान करेगी।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. सभी तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: सभी तीन — कथन 1 सही है क्योंकि योजना का मुख्य उद्देश्य देश में तीन समर्पित रासायनिक पार्क स्थापित करना है। कथन 2 सही है क्योंकि योजना की अवधि वित्त वर्ष 2026-27 से वित्त वर्ष 2030-31 तक पांच वर्ष निर्धारित की गई है। कथन 3 भी सही है क्योंकि केंद्र सरकार प्रत्येक पार्क के लिए राज्य सरकार के न्यूनतम 500 करोड़ रुपये के योगदान के बाद 1,000 करोड़ रुपये तक का अनुदान देगी।

Q2. भव्य रसायन योजना के अपेक्षित लाभों के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
1. यह योजना कच्चे माल की सोर्सिंग से लेकर अंतिम उपभोक्ता तक आपूर्ति सहित संपूर्ण मूल्य श्रृंखलाओं में रासायनिक उद्योग के विकास को बढ़ावा देगी।
2. यह भारतीय रसायन उद्योग को वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं में बेहतर ढंग से एकीकृत होने में मदद करेगी, जिससे निर्यात में वृद्धि होगी और आयात प्रतिस्थापन में सुधार होगा।
3. यह केंद्रीकृत अपशिष्ट उपचार संयंत्रों और खतरनाक अपशिष्ट प्रबंधन अवसंरचना जैसी सुविधाओं के माध्यम से पर्यावरण के अनुकूल पारिस्थितिकी तंत्र को बढ़ावा देगी।

  1. केवल 1 और 2
  2. केवल 2 और 3
  3. केवल 1 और 3
  4. 1, 2 और 3

उत्तर: 1, 2 और 3 — कथन 1 सही है क्योंकि योजना का लक्ष्य रासायनिक उद्योग की संपूर्ण मूल्य श्रृंखला का विकास करना है। कथन 2 सही है क्योंकि यह योजना निर्यात बढ़ाने और आयात प्रतिस्थापन में सुधार करके भारतीय उद्योग को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाएगी। कथन 3 भी सही है क्योंकि यह योजना पर्यावरण अनुकूल प्रथाओं को बढ़ावा देने के लिए साझा अपशिष्ट उपचार संयंत्रों जैसी सुविधाओं पर जोर देती है।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ भारत औद्योगिक विकास योजना रसायन (भव्य रसायन) योजना के प्रमुख उद्देश्यों और अपेक्षित लाभों का आलोचनात्मक विश्लेषण कीजिए। यह योजना किस प्रकार भारत के विनिर्माण क्षेत्र को सुदृढ़ करने और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के लक्ष्य को प्राप्त करने में सहायक सिद्ध हो सकती है? चर्चा कीजिए।

रूपरेखा: प्रश्न के पहले भाग में भव्य रसायन योजना के प्रमुख उद्देश्यों, जैसे समर्पित रासायनिक पार्क स्थापित करना, साझा अवसंरचना प्रदान करना और रासायनिक उद्योग की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाना, का उल्लेख करें। इसके बाद, योजना से अपेक्षित लाभों, जैसे मूल्य श्रृंखला का विकास, निर्यात वृद्धि, आयात प्रतिस्थापन और पर्यावरण अनुकूल विकास, का विश्लेषण करें। दूसरे भाग में, यह बताएं कि कैसे यह योजना घरेलू उत्पादन क्षमता बढ़ाकर, रोजगार सृजित करके और वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं में एकीकरण को बढ़ावा देकर भारत के विनिर्माण क्षेत्र को मजबूत कर सकती है, जिससे ‘आत्मनिर्भर भारत’ के लक्ष्य की प्राप्ति में सहायता मिलेगी।

स्रोत: PIB (Press Information Bureau)


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

No Comments

Post A Comment