08 Aug जम्मू-कश्मीर में 2019 के बाद 90% उद्योग स्थानीय उद्यमियों द्वारा स्थापित: संसदीय पैनल रिपोर्ट

✎ जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 के निरस्त होने के बाद से स्थापित अधिकांश औद्योगिक इकाइयाँ स्थानीय उद्यमियों द्वारा स्थापित की गई हैं, हालांकि गैर-स्थानीय इकाइयों ने अधिक रोजगार सृजित किए हैं, जो नई केंद्रीय क्षेत्र योजना-2021…
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — भारतीय राजव्यवस्था, संघवाद, केंद्र-राज्य संबंध | GS Paper III — भारतीय अर्थव्यवस्था, आर्थिक विकास, निवेश मॉडल, क्षेत्रीय असमानता
- Prelims: जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम, 2019, अनुच्छेद 370, नई केंद्रीय क्षेत्र योजना-2021 (NCSS-2021), संसदीय स्थायी समिति, औद्योगिक इकाइयाँ, सकल घरेलू उत्पाद (GDP), कुल प्रजनन दर (TFR)
- Essay: भारत में क्षेत्रीय असमानताएँ और समावेशी विकास, संघवाद और केंद्र शासित प्रदेशों का प्रशासन
त्वरित पुनरावृत्ति: जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 के निरस्त होने के बाद से स्थापित अधिकांश औद्योगिक इकाइयाँ स्थानीय उद्यमियों द्वारा स्थापित की गई हैं, हालांकि गैर-स्थानीय इकाइयों ने अधिक रोजगार सृजित किए हैं, जो नई केंद्रीय क्षेत्र योजना-2021 (NCSS-2021) द्वारा समर्थित है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
हाल ही में, गृह मामलों पर संसदीय स्थायी समिति (Parliamentary Standing Committee on Home Affairs) की एक रिपोर्ट संसद में पेश की गई, जिसमें बताया गया है कि जम्मू-कश्मीर में वर्ष 2019 के बाद स्थापित लगभग 90% औद्योगिक इकाइयाँ स्थानीय उद्यमियों द्वारा स्थापित की गई हैं। यह रिपोर्ट केंद्र सरकार के उस दावे की पृष्ठभूमि में महत्वपूर्ण है कि अनुच्छेद 370 (Article 370) के निरस्त होने के बाद क्षेत्र में निवेश और विकास के नए अवसर खुलेंगे।
पृष्ठभूमि
- 5 अगस्त, 2019 को संविधान के अनुच्छेद 370 को निरस्त कर जम्मू-कश्मीर के विशेष दर्जे को समाप्त कर दिया गया था।
- इसके साथ ही, जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम, 2019 (Jammu and Kashmir Reorganisation Act, 2019) के माध्यम से इसे दो केंद्र शासित प्रदेशों – जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में विभाजित कर दिया गया।
- केंद्र सरकार ने इस कदम को जम्मू-कश्मीर में विकास, निवेश और रोजगार सृजन को बढ़ावा देने के लिए आवश्यक बताया था।
- संसदीय समिति की रिपोर्ट के अनुसार, 2019-20 से 2025-26 के बीच जम्मू-कश्मीर में 2,279 औद्योगिक इकाइयाँ स्थापित हुईं, जिनमें कुल ₹16,598.97 करोड़ का निवेश आया और 75,848 नौकरियाँ सृजित हुईं।
- इनमें से 2,056 इकाइयाँ स्थानीय उद्यमियों द्वारा स्थापित की गईं, जबकि 223 इकाइयाँ गैर-स्थानीय उद्यमियों द्वारा स्थापित की गईं।
- रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि गैर-स्थानीय उद्यमियों द्वारा स्थापित परियोजनाएँ आमतौर पर बड़ी थीं और अधिक रोजगार सृजित करती थीं।
नई केंद्रीय क्षेत्र योजना-2021 (NCSS-2021) क्या है?
- नई केंद्रीय क्षेत्र योजना-2021 (New Central Sector Scheme-2021) जम्मू-कश्मीर में औद्योगिक विकास को बढ़ावा देने के लिए भारत सरकार द्वारा शुरू की गई एक प्रोत्साहन योजना है।
- इस योजना को उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (Department for Promotion of Industry and Internal Trade) द्वारा अधिसूचित किया गया था।
- इसका कुल परिव्यय ₹28,400 करोड़ है, जिसका उद्देश्य जम्मू-कश्मीर में नए निवेश को आकर्षित करना और मौजूदा उद्योगों का विस्तार करना है।
- योजना के तहत, उद्योगों को पूंजी निवेश प्रोत्साहन, ब्याज सबवेंशन, GST से जुड़ी प्रोत्साहन राशि और कार्यशील पूंजी ब्याज प्रोत्साहन जैसे लाभ प्रदान किए जाते हैं।
- रिपोर्ट के अनुसार, इस योजना के तहत 971 इकाइयाँ पंजीकृत हुईं, जिनमें से 754 स्थानीय और 217 गैर-स्थानीय उद्यमियों द्वारा स्थापित की गईं।
- NCSS-2021 से जुड़ी स्थानीय इकाइयों ने 20,629 नौकरियों का प्रस्ताव किया, जबकि गैर-स्थानीय इकाइयों ने 31,268 नौकरियों का प्रस्ताव किया।
- समिति ने औद्योगिक विकास में हुई प्रगति को महत्वपूर्ण बताया और कहा कि स्थानीय तथा गैर-स्थानीय दोनों उद्यमियों की सक्रिय भागीदारी क्षेत्र में बढ़ते निवेशक विश्वास को दर्शाती है।
- योजना का लक्ष्य जम्मू-कश्मीर में एक मजबूत औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र बनाना है, जिससे रोजगार सृजन और आर्थिक संवृद्धि को बढ़ावा मिल सके।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| स्थानीय उद्यमियों का प्रभुत्व | जम्मू-कश्मीर में स्थापित कुल औद्योगिक इकाइयों में से 90% स्थानीय उद्यमियों द्वारा स्थापित की गई हैं, जो क्षेत्र में आत्मनिर्भरता और स्थानीय क्षमता को दर्शाता है। |
| निवेश और रोजगार सृजन | 2019-20 से 2025-26 के बीच 2,279 औद्योगिक इकाइयों में ₹16,598.97 करोड़ का निवेश हुआ और 75,848 रोजगार सृजित हुए। |
| गैर-स्थानीय इकाइयों का बड़ा आकार | गैर-स्थानीय उद्यमियों द्वारा स्थापित इकाइयाँ संख्या में कम (223) होने के बावजूद, उन्होंने स्थानीय इकाइयों की तुलना में अधिक रोजगार (31,268 बनाम 20,629) प्रस्तावित किए, जो बड़े पैमाने के निवेश का संकेत है। |
| नई केंद्रीय क्षेत्र योजना-2021 (NCSS-2021) की भूमिका | ₹28,400 करोड़ की इस प्रोत्साहन योजना ने औद्योगिक विकास को बढ़ावा दिया है, जिसके तहत 971 इकाइयाँ पंजीकृत हुईं और ₹814.68 करोड़ वितरित किए गए। |
| निवेशक विश्वास में सुधार | स्थानीय और गैर-स्थानीय दोनों उद्यमियों की सक्रिय भागीदारी क्षेत्र में बढ़ते निवेशक विश्वास और अनुकूल कारोबारी माहौल को दर्शाती है। |
महत्व
आर्थिक महत्व
- यह रिपोर्ट जम्मू-कश्मीर में आर्थिक पुनरुद्धार और औद्योगिक विकास की गति को दर्शाती है, विशेषकर अनुच्छेद 370 के निरसन के बाद।
- स्थानीय उद्यमियों की उच्च भागीदारी क्षेत्र में समावेशी विकास और स्थानीय अर्थव्यवस्था के सशक्तिकरण का संकेत देती है।
- निवेश और रोजगार सृजन से क्षेत्र में गरीबी कम करने और जीवन स्तर सुधारने में मदद मिलेगी।
सामाजिक महत्व
- रोजगार के अवसर बढ़ने से युवाओं में असंतोष कम हो सकता है और उन्हें मुख्यधारा में शामिल होने का प्रोत्साहन मिल सकता है।
- औद्योगिक विकास से सामाजिक बुनियादी ढांचे (शिक्षा, स्वास्थ्य) में सुधार की मांग बढ़ेगी, जिससे समग्र मानव विकास होगा।
प्रशासनिक महत्व
- यह रिपोर्ट केंद्र सरकार की नीतियों, विशेषकर नई केंद्रीय क्षेत्र योजना-2021 (NCSS-2021) की सफलता का मूल्यांकन करने में मदद करती है।
- यह दर्शाता है कि जम्मू-कश्मीर में व्यापार करने में आसानी (Ease of Doing Business) में सुधार हुआ है, जिससे निवेशक आकर्षित हो रहे हैं।
चुनौतियाँ
1. रोजगार सृजन की गति
- हालांकि 75,848 रोजगार सृजित हुए हैं, जम्मू-कश्मीर की युवा आबादी और बेरोजगारी दर को देखते हुए यह संख्या अभी भी अपर्याप्त हो सकती है।
- गैर-स्थानीय इकाइयों द्वारा अधिक रोजगार सृजन यह दर्शाता है कि स्थानीय इकाइयों को बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन के लिए और प्रोत्साहन की आवश्यकता है।
यूपीएससी लिंक: अर्थव्यवस्था, रोजगार, समावेशी विकास
2. स्थायी औद्योगिक विकास
- औद्योगिक विकास की गति को बनाए रखने के लिए निरंतर नीतिगत समर्थन और अनुकूल कारोबारी माहौल आवश्यक है।
- बुनियादी ढांचागत चुनौतियों (जैसे बिजली, कनेक्टिविटी) को दूर करना दीर्घकालिक विकास के लिए महत्वपूर्ण होगा।
यूपीएससी लिंक: अर्थव्यवस्था, औद्योगिक नीति
3. निवेश का क्षेत्रीय असंतुलन
- यह सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है कि निवेश और औद्योगिक इकाइयाँ जम्मू-कश्मीर के सभी क्षेत्रों में समान रूप से वितरित हों, ताकि क्षेत्रीय असमानताएँ न बढ़ें।
यूपीएससी लिंक: आर्थिक भूगोल, क्षेत्रीय विकास
4. सुरक्षा और स्थिरता
- क्षेत्र में स्थायी शांति और सुरक्षा बनाए रखना निवेशक विश्वास और औद्योगिक विकास के लिए सर्वोपरि है।
- किसी भी सुरक्षा संबंधी चुनौती का औद्योगिक गतिविधियों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
यूपीएससी लिंक: आंतरिक सुरक्षा, शासन
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| रोजगार सृजन की दर | कुल सृजित रोजगार (75,848) क्षेत्र की बेरोजगारी दर और युवा आबादी की आवश्यकताओं के अनुरूप पर्याप्त नहीं हो सकते। |
| गैर-स्थानीय बनाम स्थानीय रोजगार | गैर-स्थानीय इकाइयों द्वारा अधिक रोजगार सृजन स्थानीय उद्यमियों को बड़े पैमाने पर रोजगार देने में सक्षम बनाने की चुनौती को उजागर करता है। |
| बुनियादी ढांचागत बाधाएँ | बिजली की आपूर्ति, सड़क संपर्क और लॉजिस्टिक्स जैसी बुनियादी ढाँचागत चुनौतियाँ औद्योगिक विकास को बाधित कर सकती हैं। |
| स्थायी नीति समर्थन | औद्योगिक विकास की वर्तमान गति को बनाए रखने के लिए निरंतर और प्रभावी नीतिगत समर्थन की आवश्यकता है। |
| सुरक्षा संबंधी चिंताएँ | क्षेत्र में किसी भी सुरक्षा संबंधी घटना से निवेशक विश्वास और औद्योगिक गतिविधियों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- नई केंद्रीय क्षेत्र योजना-2021 (New Central Sector Scheme-2021)
आगे की राह
- स्थानीय उद्यमियों को वित्तीय सहायता, तकनीकी प्रशिक्षण और बाजार पहुंच प्रदान करने के लिए विशेष कार्यक्रम शुरू किए जाएँ।
- जम्मू-कश्मीर में औद्योगिक बुनियादी ढांचे (जैसे औद्योगिक पार्क, बिजली आपूर्ति, सड़क संपर्क) को और मजबूत किया जाए।
- निवेशकों के लिए ‘एकल खिड़की प्रणाली’ (Single Window System) को और अधिक प्रभावी और पारदर्शी बनाया जाए ताकि व्यापार करने में आसानी बढ़े।
- स्थानीय उत्पादों और हस्तशिल्प को बढ़ावा देने के लिए ‘वोकल फॉर लोकल’ (Vocal for Local) जैसी पहलों को मजबूत किया जाए।
- सुरक्षा स्थिति को और बेहतर बनाने और स्थायी शांति सुनिश्चित करने के लिए निरंतर प्रयास किए जाएँ, जिससे निवेशक विश्वास और बढ़े।
- कौशल विकास कार्यक्रमों को औद्योगिक आवश्यकताओं के अनुरूप बनाया जाए ताकि स्थानीय युवाओं को रोजगार के लिए तैयार किया जा सके।
- पर्यावरण-अनुकूल उद्योगों और पर्यटन जैसे क्षेत्रों में निवेश को प्रोत्साहित किया जाए, जिनमें क्षेत्र की विशिष्ट क्षमता है।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
जम्मू-कश्मीर औद्योगिक विकास · स्थानीय उद्यमिता · अनुच्छेद 370 का निरसन · नई केंद्रीय क्षेत्र योजना-2021 · निवेश संवर्धन · रोजगार सृजन · संसदीय स्थायी समिति · क्षेत्रीय आर्थिक विकास · आत्मनिर्भर भारत · संघवाद
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 370’, ‘note’: ‘जम्मू-कश्मीर के विशेष दर्जे का निरसन’}
अवधारणा प्रवाह
अनुच्छेद 370 का निरसन → नई केंद्रीय क्षेत्र योजना-2021 का कार्यान्वयन → निवेशक विश्वास में वृद्धि → औद्योगिक इकाइयों की स्थापना (स्थानीय/गैर-स्थानीय) → निवेश और रोजगार सृजन → जम्मू-कश्मीर में आर्थिक विकास
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
1. संसदीय स्थायी समिति की रिपोर्ट के अनुसार, 2019 से जम्मू-कश्मीर में स्थापित 90% से अधिक औद्योगिक इकाइयाँ स्थानीय उद्यमियों द्वारा स्थापित की गई हैं।
2. नई केंद्रीय क्षेत्र योजना-2021 (NCSS-2021) का उद्देश्य जम्मू-कश्मीर में औद्योगिक विकास को बढ़ावा देना है।
3. NCSS-2021 के तहत, गैर-स्थानीय उद्यमियों द्वारा स्थापित इकाइयों ने स्थानीय उद्यमियों द्वारा स्थापित इकाइयों की तुलना में अधिक नौकरियाँ प्रस्तावित की हैं।
उपरोक्त में से कितने कथन सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: सभी तीन — कथन 1 सही है। रिपोर्ट में कहा गया है कि 2019 से 2,279 औद्योगिक इकाइयों में से 2,056 स्थानीय लोगों द्वारा स्थापित की गईं, जो लगभग 90% है। कथन 2 सही है। NCSS-2021 एक ₹28,400 करोड़ का प्रोत्साहन कार्यक्रम है जिसे जम्मू-कश्मीर में औद्योगिक विकास को बढ़ावा देने के लिए अधिसूचित किया गया था। कथन 3 भी सही है। रिपोर्ट के अनुसार, NCSS-2021 के तहत, स्थानीय लोगों द्वारा स्थापित 754 इकाइयों ने 20,629 नौकरियाँ प्रस्तावित कीं, जबकि गैर-स्थानीय लोगों द्वारा स्थापित 217 इकाइयों ने 31,268 नौकरियाँ प्रस्तावित कीं, जो प्रति इकाई अधिक है।
Q2. अभिकथन (A): जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 के निरसन के बाद औद्योगिक निवेश और विकास में वृद्धि देखी गई है।
कारण (R): नई केंद्रीय क्षेत्र योजना-2021 (NCSS-2021) जैसे सरकारी प्रोत्साहन कार्यक्रमों ने इस विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
- A और R दोनों सत्य हैं, और R, A की सही व्याख्या है।
- A और R दोनों सत्य हैं, लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है।
- A सत्य है, लेकिन R असत्य है।
- A असत्य है, लेकिन R सत्य है।
उत्तर: A और R दोनों सत्य हैं, और R, A की सही व्याख्या है। — अभिकथन (A) सत्य है। संसदीय समिति की रिपोर्ट में 2019 के बाद से जम्मू-कश्मीर में औद्योगिक इकाइयों की स्थापना और निवेश में वृद्धि का उल्लेख है। कारण (R) भी सत्य है। रिपोर्ट स्पष्ट रूप से बताती है कि NCSS-2021 ने औद्योगिक विकास को गति दी है और यह एक महत्वपूर्ण प्रोत्साहन कार्यक्रम है। R, A की सही व्याख्या भी है क्योंकि NCSS-2021 जैसे प्रोत्साहन कार्यक्रमों ने ही निवेश और विकास को आकर्षित करने में मदद की है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ जम्मू-कश्मीर में औद्योगिक विकास को बढ़ावा देने में स्थानीय उद्यमिता की भूमिका का परीक्षण करें। क्या नई केंद्रीय क्षेत्र योजना-2021 (NCSS-2021) जैसे प्रोत्साहन कार्यक्रम क्षेत्रीय असमानताओं को कम करने और समावेशी विकास को बढ़ावा देने में प्रभावी रहे हैं? (15 Marks)
रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. परिचय: जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 के निरसन के बाद के औद्योगिक परिदृश्य का संक्षिप्त परिचय और संसदीय समिति की रिपोर्ट का संदर्भ।
2. स्थानीय उद्यमिता की भूमिका: रिपोर्ट के आंकड़ों का उल्लेख (90% स्थानीय इकाइयाँ, कुल निवेश और रोजगार में योगदान)। स्थानीय उद्यमियों द्वारा स्थापित इकाइयों की संख्या और उनके द्वारा सृजित रोजगार। स्थानीय उद्यमिता के महत्व पर प्रकाश डालें (आत्मनिर्भरता, स्थानीय संसाधनों का उपयोग, समावेशी विकास)।
3. NCSS-2021 का प्रभाव: योजना का उद्देश्य, परिव्यय (₹28,400 करोड़), और इसके तहत पंजीकृत इकाइयों की संख्या। स्थानीय और गैर-स्थानीय उद्यमियों द्वारा स्थापित NCSS-2021-लिंक्ड इकाइयों के आंकड़े और उनके द्वारा प्रस्तावित रोजगार (गैर-स्थानीय इकाइयों द्वारा अधिक रोजगार सृजन का उल्लेख)।
4. प्रभावशीलता का विश्लेषण: NCSS-2021 जैसे कार्यक्रमों की सफलता का मूल्यांकन – निवेश आकर्षित करने, रोजगार सृजन और उद्यमी विश्वास बढ़ाने में। क्षेत्रीय असमानताओं को कम करने और समावेशी विकास को बढ़ावा देने में इसकी भूमिका की चर्चा। यह भी उल्लेख करें कि गैर-स्थानीय निवेश से बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन हुआ है, जो स्थानीय और बाहरी निवेश के संतुलन को दर्शाता है।
5. चुनौतियाँ और आगे की राह: औद्योगिक विकास की गति को बनाए रखने के लिए निरंतर नीतिगत समर्थन की आवश्यकता। संभावित चुनौतियों (बुनियादी ढाँचा, कौशल विकास) और भविष्य की रणनीतियों पर संक्षिप्त चर्चा।
6. निष्कर्ष: जम्मू-कश्मीर के समग्र आर्थिक विकास में स्थानीय उद्यमिता और सरकारी प्रोत्साहन कार्यक्रमों के सहयोगात्मक प्रभाव का सारांश।
स्रोत: The Hindu
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

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