06 Aug जल जीवन मिशन 2.0: केंद्र ने राज्यों को 6,154 करोड़ रुपये जारी किए, जानिए पूरी डिटेल्स
✎ जल जीवन मिशन 2.0 का लक्ष्य दिसंबर 2028 तक प्रत्येक ग्रामीण परिवार को नल से जल उपलब्ध कराना है, जिसमें संचालन एवं रखरखाव, सामुदायिक स्वामित्व और डिजिटल गवर्नेंस पर विशेष ध्यान दिया गया है।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — शासन, पारदर्शिता एवं जवाबदेही के महत्वपूर्ण पक्ष, केंद्र एवं राज्यों द्वारा जनसंख्या के अति संवेदनशील वर्गों के लिए कल्याणकारी योजनाएँ और इन योजनाओं का कार्य-निष्पादन | GS Paper III — बुनियादी ढाँचा: ऊर्जा, बंदरगाह, सड़कें, विमानपत्तन, रेलवे आदि
- Prelims: जल जीवन मिशन (JJM), जल शक्ति मंत्रालय, ग्रामीण पेयजल आपूर्ति, ग्राम पंचायत, ग्राम जल एवं स्वच्छता समितियाँ (VWSC), SNA स्पर्श प्लेटफॉर्म, सुजलम भारत आईडी, पीएम गति शक्ति
- Essay: ग्रामीण भारत में जल सुरक्षा और सतत विकास, सहकारी संघवाद और केंद्र-राज्य वित्तीय संबंध
त्वरित पुनरावृत्ति: जल जीवन मिशन 2.0 का लक्ष्य दिसंबर 2028 तक प्रत्येक ग्रामीण परिवार को नल से जल उपलब्ध कराना है, जिसमें संचालन एवं रखरखाव, सामुदायिक स्वामित्व और डिजिटल गवर्नेंस पर विशेष ध्यान दिया गया है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
भारत सरकार ने जल जीवन मिशन (JJM) 2.0 के कार्यान्वयन में तेजी लाने के लिए वित्त वर्ष 2026-27 के दौरान राज्यों को कुल 6,154.96 करोड़ रुपये जारी किए हैं। इसमें 10 राज्यों को केंद्रीय हिस्से के तौर पर 5,289.09 करोड़ रुपये की प्रतिपूर्ति और 13 राज्यों को ‘एसएनए स्पर्श’ प्लेटफॉर्म के माध्यम से 865.87 करोड़ रुपये का वितरण शामिल है। यह कदम ग्रामीण परिवारों को विश्वसनीय, पर्याप्त और सुरक्षित पेयजल सेवाएं सुनिश्चित करने के मिशन के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है, जिसकी अवधि दिसंबर 2028 तक बढ़ा दी गई है।
पृष्ठभूमि
- जल जीवन मिशन (JJM) को माननीय प्रधानमंत्री द्वारा 15 अगस्त 2019 को घोषित किया गया था, जिसका लक्ष्य 2024 तक प्रत्येक ग्रामीण परिवार को नल से जल कनेक्शन प्रदान करना था।
- मिशन का उद्देश्य केवल बुनियादी ढाँचा तैयार करना नहीं, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में कार्यात्मक घरेलू नल कनेक्शन (FHTC) के माध्यम से सुरक्षित और पर्याप्त पेयजल उपलब्ध कराना था।
- JJM 1.0 की सफलता के बाद, केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 10 मार्च 2026 को ‘जल जीवन मिशन 2.0’ को मंजूरी दी, जो मिशन की अवधि को दिसंबर 2028 तक बढ़ाता है।
- JJM 2.0 को कुल 8.69 लाख करोड़ रुपये के परिव्यय के साथ अनुमोदित किया गया है, जिसमें 3.59 लाख करोड़ रुपये की केंद्रीय सहायता शामिल है, जिसका उद्देश्य सभी के लिए सुरक्षित पेयजल सुनिश्चित करना है।
- पुराने JJM 1.0 और JJM 2.0 के बीच की अवधि में, कई राज्यों ने अपने वित्तीय संसाधनों का उपयोग करके ग्रामीण जल आपूर्ति योजनाओं को जारी रखा, जिसके लिए अब केंद्र सरकार द्वारा प्रतिपूर्ति की जा रही है।
- केंद्रीय जलशक्ति मंत्री श्री सी.आर. पाटिल ने संबंधित राज्यों के सांसदों के साथ राज्य-विशिष्ट चर्चाएं की हैं, जिससे मिशन के कार्यान्वयन में सहयोग और गति सुनिश्चित हो सके।
जल जीवन मिशन 2.0 क्या है?
- जल जीवन मिशन 2.0 एक महत्वाकांक्षी कार्यक्रम है जिसका लक्ष्य दिसंबर 2028 तक भारत के प्रत्येक ग्रामीण परिवार को विश्वसनीय, पर्याप्त और सुरक्षित पेयजल सेवाएं उपलब्ध कराना है।
- यह मिशन बुनियादी ढांचे के निर्माण से हटकर जलापूर्ति प्रणाली के संचालन एवं रखरखाव (O&M) को ग्राम पंचायत के नेतृत्व में मजबूत करने पर विशेष जोर देता है।
- मिशन के तहत स्रोत की स्थिरता, पानी की गुणवत्ता की निगरानी, सामुदायिक स्वामित्व और डिजिटल गवर्नेंस के माध्यम से सेवाओं की भरोसेमंद आपूर्ति सुनिश्चित की जाती है।
- ‘एसएनए स्पर्श’ प्लेटफॉर्म एक प्रमुख सुधार है, जो योजना-आधारित भुगतान और फंड जारी करने की सुविधा देता है, जिससे फंड जारी करने, व्यय पर नजर रखने और वित्तीय प्रगति की वास्तविक निगरानी संभव होती है।
- यह प्लेटफॉर्म अलग-अलग जलापूर्ति योजनाओं से संबंधित भुगतान को सुगम बनाता है, जिससे जवाबदेही, पारदर्शिता, अंकेक्षण की सुविधा और सार्वजनिक कोष के उपयोग से जुड़ी दक्षता बेहतर होती है।
- पेयजल से जुड़ी परिसंपत्तियों के लिए विशिष्ट ‘सुजलम भारत आईडी’ बनाना और पीएम गति शक्ति प्लेटफॉर्म पर ग्रामीण जलापूर्ति से संबंधित बुनियादी ढांचे की जियो-टैगिंग और डिजिटल मैपिंग भी इस मिशन का हिस्सा है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| अवधि विस्तार | मिशन की अवधि को दिसंबर 2028 तक बढ़ाया गया, जिससे ग्रामीण परिवारों को विश्वसनीय, पर्याप्त और सुरक्षित पेयजल सेवाएं सुनिश्चित करने के लिए अधिक समय मिलेगा। |
| परिव्यय और केंद्रीय सहायता | कुल 8.69 लाख करोड़ रुपये का परिव्यय, जिसमें 3.59 लाख करोड़ रुपये की केंद्रीय सहायता शामिल है, जो मिशन के व्यापक दायरे और सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। |
| बुनियादी ढांचे से हटकर सेवा वितरण | जेजेएम 2.0 का ध्यान बुनियादी ढांचे के निर्माण से हटकर जलापूर्ति प्रणाली के संचालन एवं रखरखाव (O&M) को ग्राम पंचायत के नेतृत्व में मजबूत करने पर है, जिससे दीर्घकालिक सेवा सुनिश्चित होती है। |
| SNA स्पर्श प्लेटफॉर्म | यह योजना-आधारित भुगतान और फंड जारी करने की सुविधा देता है, जिससे फंड जारी करने, व्यय पर नजर रखने और वित्तीय प्रगति की वास्तविक निगरानी में जवाबदेही, पारदर्शिता और दक्षता आती है। |
| जल अर्पण और सुजलम भारत आईडी | पूरी हो चुकी योजनाओं को ग्राम पंचायतों को औपचारिक रूप से सौंपना और पेयजल परिसंपत्तियों के लिए विशिष्ट आईडी बनाना, सामुदायिक स्वामित्व और परिसंपत्ति प्रबंधन को बढ़ावा देता है। |
| डिजिटल गवर्नेंस और जियो-टैगिंग | पीएम गति शक्ति प्लेटफॉर्म पर ग्रामीण जलापूर्ति बुनियादी ढांचे की जियो-टैगिंग और डिजिटल मैपिंग, योजना और निगरानी में दक्षता लाती है। |
महत्व
सामाजिक महत्व
- ग्रामीण परिवारों को सुरक्षित पेयजल की उपलब्धता से जल-जनित बीमारियों में कमी आएगी, जिससे सार्वजनिक स्वास्थ्य में सुधार होगा।
- महिलाओं और लड़कियों पर पानी लाने के बोझ को कम करेगा, जिससे उन्हें शिक्षा और आर्थिक गतिविधियों में भाग लेने के लिए अधिक समय मिलेगा, लैंगिक समानता को बढ़ावा मिलेगा।
- सामुदायिक स्वामित्व और ग्राम पंचायतों की भागीदारी से स्थानीय स्तर पर सशक्तिकरण होगा और सेवाओं की स्थिरता सुनिश्चित होगी।
आर्थिक महत्व
- ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा क्योंकि सुरक्षित पानी की उपलब्धता से कृषि और अन्य स्थानीय उद्योगों को लाभ होगा।
- जल आपूर्ति बुनियादी ढांचे के निर्माण और रखरखाव से रोजगार के अवसर सृजित होंगे।
- बेहतर स्वास्थ्य से उत्पादकता में वृद्धि होगी, जिससे राष्ट्रीय आर्थिक संवृद्धि (Economic Growth) में योगदान मिलेगा।
शासनिक महत्व
- SNA स्पर्श जैसे प्लेटफॉर्म के माध्यम से फंड के उपयोग में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ेगी, जिससे सार्वजनिक धन का कुशल उपयोग सुनिश्चित होगा।
- डिजिटल गवर्नेंस और जियो-टैगिंग से योजनाओं की बेहतर निगरानी और कार्यान्वयन होगा, जिससे दक्षता बढ़ेगी।
- केंद्र और राज्यों के बीच सहयोग को बढ़ावा मिलेगा, क्योंकि केंद्र सरकार राज्यों को मिशन के कार्यान्वयन में सहायता प्रदान कर रही है।
पर्यावरणीय महत्व
- स्रोत की स्थिरता पर जोर देने से जल संसाधनों का स्थायी प्रबंधन सुनिश्चित होगा।
- जल गुणवत्ता की निगरानी से पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य दोनों के लिए सुरक्षित पानी सुनिश्चित होगा।
चुनौतियाँ
1. फंड का कुशल उपयोग और रिसाव
- बड़ी मात्रा में फंड के आवंटन के साथ, यह सुनिश्चित करना एक चुनौती है कि फंड का उपयोग प्रभावी ढंग से हो और भ्रष्टाचार या रिसाव को रोका जा सके।
- राज्यों द्वारा फंड के उपयोग की रिपोर्टिंग और वास्तविक व्यय के बीच अंतर हो सकता है, जिससे निगरानी में कठिनाई हो सकती है।
यूपीएससी लिंक: शासन, पारदर्शिता और जवाबदेही
2. संचालन और रखरखाव (O&M) की स्थिरता
- बुनियादी ढांचे के निर्माण के बाद, जल आपूर्ति प्रणालियों का दीर्घकालिक संचालन और रखरखाव सुनिश्चित करना एक बड़ी चुनौती है, खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में जहां तकनीकी विशेषज्ञता और वित्तीय संसाधन सीमित हो सकते हैं।
- ग्राम पंचायतों की क्षमता निर्माण और उन्हें O&M के लिए पर्याप्त संसाधन उपलब्ध कराना महत्वपूर्ण है।
यूपीएससी लिंक: स्थानीय स्वशासन, ग्रामीण विकास
3. जल गुणवत्ता निगरानी और स्रोत स्थिरता
- ग्रामीण क्षेत्रों में जल स्रोतों की गुणवत्ता की नियमित निगरानी और उसे बनाए रखना एक चुनौती है, खासकर प्रदूषण और भूजल स्तर में गिरावट के संदर्भ में।
- जलवायु परिवर्तन और अत्यधिक दोहन के कारण जल स्रोतों की स्थिरता सुनिश्चित करना एक गंभीर मुद्दा है।
यूपीएससी लिंक: पर्यावरण संरक्षण, आपदा प्रबंधन
4. सामुदायिक भागीदारी और स्वामित्व
- यह सुनिश्चित करना कि ग्रामीण समुदाय वास्तव में जल आपूर्ति प्रणालियों का स्वामित्व लें और उनके रखरखाव में सक्रिय रूप से भाग लें, एक चुनौती है।
- जागरूकता की कमी या स्थानीय विवादों के कारण सामुदायिक भागीदारी बाधित हो सकती है।
यूपीएससी लिंक: सामाजिक सशक्तिकरण, सहभागिता
5. डिजिटल गवर्नेंस का कार्यान्वयन
- पीएम गति शक्ति प्लेटफॉर्म पर जियो-टैगिंग और डिजिटल मैपिंग जैसे डिजिटल उपकरणों का प्रभावी ढंग से उपयोग करने के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल साक्षरता और कनेक्टिविटी सुनिश्चित करना एक चुनौती है।
- डेटा सुरक्षा और गोपनीयता सुनिश्चित करना भी महत्वपूर्ण है।
यूपीएससी लिंक: ई-गवर्नेंस, सूचना प्रौद्योगिकी
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| फंड का कुशल उपयोग | बड़ी राशि के आवंटन में भ्रष्टाचार और रिसाव का जोखिम। |
| दीर्घकालिक संचालन और रखरखाव | ग्रामीण क्षेत्रों में तकनीकी विशेषज्ञता और वित्तीय संसाधनों की कमी। |
| जल गुणवत्ता और स्रोत स्थिरता | प्रदूषण और भूजल स्तर में गिरावट से जल स्रोतों की सुरक्षा। |
| सामुदायिक भागीदारी | स्थानीय स्वामित्व और रखरखाव में सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करना। |
| डिजिटल साक्षरता और कनेक्टिविटी | ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल उपकरणों के प्रभावी उपयोग में बाधाएं। |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- जल जीवन मिशन (JJM) 2.0
- पीएम गति शक्ति प्लेटफॉर्म
आगे की राह
- राज्य सरकारों और स्थानीय निकायों की क्षमता निर्माण पर विशेष ध्यान दिया जाए, ताकि वे जल आपूर्ति प्रणालियों का प्रभावी ढंग से संचालन और रखरखाव कर सकें।
- SNA स्पर्श जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म का पूर्ण और कुशल उपयोग सुनिश्चित करने के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल साक्षरता और कनेक्टिविटी को बढ़ावा दिया जाए।
- जल गुणवत्ता निगरानी को मजबूत किया जाए और दूषित जल स्रोतों के उपचार के लिए नवीन तकनीकों का उपयोग किया जाए।
- सामुदायिक भागीदारी को बढ़ावा देने के लिए जागरूकता अभियान चलाए जाएं और ग्राम जल एवं स्वच्छता समितियों (VWSC) को सशक्त किया जाए।
- जल संरक्षण और भूजल पुनर्भरण के लिए स्थानीय स्तर पर योजनाओं को एकीकृत किया जाए ताकि जल स्रोतों की दीर्घकालिक स्थिरता सुनिश्चित हो सके।
- मिशन के कार्यान्वयन में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए नियमित अंकेक्षण (Audit) और सार्वजनिक रिपोर्टिंग तंत्र को मजबूत किया जाए।
- जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को ध्यान में रखते हुए, जल आपूर्ति योजनाओं को लचीला और भविष्य के लिए तैयार बनाया जाए।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
जल जीवन मिशन 2.0 · हर घर जल · ग्रामीण जलापूर्ति · पेयजल सुरक्षा · डिजिटल गवर्नेंस · सामुदायिक स्वामित्व · ग्राम पंचायत · वित्तीय प्रबंधन · राजकोषीय संघवाद · सतत विकास लक्ष्य
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 243G’, ‘note’: ‘पंचायतों की शक्तियों, प्राधिकार और उत्तरदायित्व’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 243W’, ‘note’: ‘नगरपालिकाओं की शक्तियों, प्राधिकार और उत्तरदायित्व’}
- {‘article’: ‘राज्य सूची (सूची II), सातवीं अनुसूची’, ‘note’: ‘जल आपूर्ति राज्य का विषय’}
अवधारणा प्रवाह
केंद्र सरकार द्वारा जल जीवन मिशन 2.0 को मंजूरी → राज्यों को केंद्रीय फंड जारी/प्रतिपूर्ति → ग्रामीण जल आपूर्ति योजनाओं का कार्यान्वयन → ग्राम पंचायतों द्वारा संचालन एवं रखरखाव → ग्रामीण परिवारों को सुरक्षित पेयजल की उपलब्धता → सार्वजनिक स्वास्थ्य और जीवन स्तर में सुधार
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. जल जीवन मिशन 2.0 के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. इस मिशन का लक्ष्य दिसंबर 2028 तक हर ग्रामीण परिवार को भरोसेमंद, पर्याप्त एवं सुरक्षित पेयजल सेवाएं उपलब्ध कराना है।
2. ‘एसएनए स्पर्श’ प्लेटफॉर्म का उद्देश्य योजना-आधारित भुगतान और फंड जारी करने में पारदर्शिता और दक्षता लाना है।
3. मिशन के तहत ‘जल अर्पण’ कार्यक्रम का संबंध पूरी हो चुकी योजनाओं को ग्राम पंचायतों को औपचारिक रूप से सौंपने से है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: सभी तीन — कथन 1: जल जीवन मिशन 2.0 की अवधि दिसंबर 2028 तक बढ़ाई गई है और इसका मुख्य लक्ष्य हर ग्रामीण परिवार को भरोसेमंद, पर्याप्त एवं सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराना है, जो सही है।
कथन 2: ‘एसएनए स्पर्श’ प्लेटफॉर्म को योजना के स्तर पर फंड जारी करने, व्यय पर नजर रखने और वित्तीय प्रगति की वास्तविक निगरानी करने के लिए शुरू किया गया है, जिससे जवाबदेही, पारदर्शिता और दक्षता बढ़ती है, जो सही है।
कथन 3: ‘जल अर्पण’ पूरी हो चुकी योजनाओं को ग्राम पंचायतों और ग्राम जल एवं स्वच्छता समितियों (VWSC) को औपचारिक रूप से सौंपने से संबंधित है, जो सही है।
Q2. निम्नलिखित में से कौन-सा/से जल जीवन मिशन 2.0 का/के एक प्रमुख परिवर्तनकारी सुधार है/हैं?
1. पेयजल से जुड़ी परिसंपत्तियों के लिए विशिष्ट ‘सुजलम भारत आईडी’ बनाना।
2. पीएम गति शक्ति प्लेटफॉर्म पर ग्रामीण जलापूर्ति से संबंधित बुनियादी ढांचे की जियो-टैगिंग।
3. ‘जल सेवा आकलन’ के जरिए समुदाय के नेतृत्व में मूल्यांकन।
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:
- केवल 1
- केवल 1 और 2
- केवल 2 और 3
- 1, 2 और 3
उत्तर: 1, 2 और 3 — दिए गए तीनों विकल्प (1. पेयजल से जुड़ी परिसंपत्तियों के लिए विशिष्ट ‘सुजलम भारत आईडी’ बनाना, 2. पीएम गति शक्ति प्लेटफॉर्म पर ग्रामीण जलापूर्ति से संबंधित बुनियादी ढांचे की जियो-टैगिंग, 3. ‘जल सेवा आकलन’ के जरिए समुदाय के नेतृत्व में मूल्यांकन) जल जीवन मिशन 2.0 के तहत किए जा रहे परिवर्तनकारी सुधारों का हिस्सा हैं।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ जल जीवन मिशन 2.0 ग्रामीण भारत में पेयजल सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इस मिशन के प्रमुख उद्देश्यों और परिवर्तनकारी सुधारों का विश्लेषण कीजिए। (15 Marks)
रूपरेखा: परिचय: जल जीवन मिशन 2.0 का संक्षिप्त परिचय, इसकी अवधि और मुख्य लक्ष्य (हर ग्रामीण परिवार को नल से जल)।
मुख्य उद्देश्य: मिशन के व्यापक उद्देश्यों पर प्रकाश डालें, जैसे विश्वसनीय, पर्याप्त और सुरक्षित पेयजल सेवाएं, स्रोत स्थिरता, जल गुणवत्ता निगरानी, सामुदायिक स्वामित्व और डिजिटल गवर्नेंस।
परिवर्तनकारी सुधार: विस्तृत विश्लेषण करें:
1. बुनियादी ढांचे से सेवा वितरण पर जोर: संचालन एवं रखरखाव (O&M) को ग्राम पंचायत के नेतृत्व में मजबूत करना।
2. वित्तीय प्रबंधन में पारदर्शिता: ‘एसएनए स्पर्श’ प्लेटफॉर्म की भूमिका (योजना-आधारित भुगतान, फंड जारी करना, व्यय पर नजर रखना, वास्तविक निगरानी)।
3. डिजिटल गवर्नेंस: ‘सुजलम भारत आईडी’, पीएम गति शक्ति प्लेटफॉर्म पर जियो-टैगिंग और डिजिटल मैपिंग।
4. सामुदायिक भागीदारी: ‘जल अर्पण’ (योजनाओं को ग्राम पंचायतों को सौंपना) और ‘जल सेवा आकलन’ के जरिए समुदाय के नेतृत्व में मूल्यांकन।
5. दीर्घकालिक स्थिरता: दीर्घकालिक व्यवस्था और सेवा प्रदान करने पर अधिक जोर।
निष्कर्ष: मिशन के संभावित प्रभाव, सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) के साथ इसका तालमेल और ग्रामीण जीवन की गुणवत्ता में सुधार पर संक्षिप्त टिप्पणी।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

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