27 Jul जल जीवन मिशन: ग्रामीण जलापूर्ति में 82% कवरेज, जानिए नई सरकारी पहल
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — शासन, पारदर्शिता एवं जवाबदेही के महत्वपूर्ण पक्ष, केंद्र एवं राज्यों द्वारा जनसंख्या के अति संवेदनशील वर्गों के लिए कल्याणकारी योजनाएँ और इन योजनाओं का कार्य-निष्पादन, सामाजिक क्षेत्र/सेवाओं के विकास और प्रबंधन से संबंधित विषय | GS Paper III — आर्थिक संवृद्धि एवं विकास
- Prelims: जल जीवन मिशन, हर घर जल, जल शक्ति मंत्रालय, ग्राम जल एवं स्वच्छता समिति (VWSC), पानी समिति, BIS: 10500 मानक, जल अर्पण पहल
- Essay: ग्रामीण भारत में जल सुरक्षा और सतत विकास, जनभागीदारी से संचालित कल्याणकारी योजनाएँ: चुनौतियाँ और समाधान
त्वरित पुनरावृत्ति: जल जीवन मिशन का लक्ष्य 2024 तक प्रत्येक ग्रामीण परिवार को नल कनेक्शन के माध्यम से गुणवत्तापूर्ण और पर्याप्त पेयजल उपलब्ध कराना है, जिसमें सामुदायिक भागीदारी और राज्यों की सक्रिय भूमिका पर विशेष जोर दिया गया है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
जल शक्ति मंत्रालय ने हाल ही में जल जीवन मिशन (JJM) के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में नल जल कवरेज में हुई उल्लेखनीय वृद्धि की जानकारी दी है। 2019 में मिशन की शुरुआत के बाद से, ग्रामीण परिवारों तक नल जल कनेक्शन की पहुंच 16.71 प्रतिशत से बढ़कर 82.09 प्रतिशत हो गई है, जिसमें लगभग 15.89 करोड़ ग्रामीण परिवारों को कार्यात्मक घरेलू नल कनेक्शन प्रदान किए गए हैं। इसके अतिरिक्त, केंद्रीय मंत्रिमंडल ने मार्च 2026 में जल जीवन मिशन 2.0 के अंतर्गत मिशन की अवधि को दिसंबर 2028 तक बढ़ाने और इसके वित्तीय परिव्यय में महत्वपूर्ण वृद्धि को मंजूरी दी है, जो ग्रामीण पेयजलापूर्ति क्षेत्र में संरचनात्मक सुधारों पर केंद्रित है।
पृष्ठभूमि
- भारत सरकार ने अगस्त 2019 में राज्यों के साथ साझेदारी में जल जीवन मिशन (JJM) – हर घर जल का कार्यान्वयन शुरू किया था।
- मिशन का प्राथमिक उद्देश्य देश के प्रत्येक ग्रामीण परिवार को नल कनेक्शन के माध्यम से नियमित, दीर्घकालिक और निर्धारित गुणवत्ता (BIS: 10500) का पर्याप्त मात्रा (प्रति व्यक्ति प्रतिदिन 55 लीटर) में सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराना है।
- मिशन के शुभारंभ के समय, केवल 3.23 करोड़ (16.71 प्रतिशत) ग्रामीण परिवारों के पास नल जल कनेक्शन थे।
- 18 जुलाई 2026 तक, लगभग 12.66 करोड़ अतिरिक्त ग्रामीण परिवारों को नल जल कनेक्शन उपलब्ध कराए गए हैं, जिससे कुल कवरेज 15.89 करोड़ (82.09 प्रतिशत) परिवारों तक पहुँच गया है।
- पेयजल राज्य का विषय है, इसलिए पेयजलापूर्ति योजनाओं की योजना, अनुमोदन, कार्यान्वयन, संचालन और अनुरक्षण (O&M) की जिम्मेदारी संबंधित राज्य/केंद्रशासित प्रदेश सरकारों की है। केंद्र सरकार तकनीकी और वित्तीय सहायता प्रदान करती है।
- मार्च 2026 में, केंद्रीय मंत्रिमंडल ने जल जीवन मिशन 2.0 को मंजूरी दी, जिसमें मिशन की अवधि को दिसंबर 2028 तक बढ़ाया गया और कुल वित्तीय परिव्यय को 3.60 लाख करोड़ रुपये से बढ़ाकर 8.69 लाख करोड़ रुपये कर दिया गया।
जल जीवन मिशन (JJM) क्या है?
- मिशन का उद्देश्य प्रति व्यक्ति प्रतिदिन 55 लीटर पानी की आपूर्ति सुनिश्चित करना है, जो भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) के मानक 10500 के अनुरूप गुणवत्ता वाला हो।
- यह मिशन जल शक्ति मंत्रालय के तहत कार्यान्वित किया जा रहा है और इसका मुख्य फोकस सामुदायिक भागीदारी पर है, जिसमें ग्राम पंचायतें (GP), ग्राम जल एवं स्वच्छता समितियाँ (VWSC) और पानी समितियाँ महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
- ‘जल अर्पण’ एक समुदाय-नेतृत्व वाली जन पहल है, जिसका उद्देश्य जलापूर्ति योजनाओं के सफल संचालन का जश्न मनाना और ग्रामीण जल अवसंरचना की दीर्घकालिक स्थिरता को बढ़ावा देना है।
- ‘समुदाय-प्रबंधित पाइप आधारित जलापूर्ति प्रणालियों पर मार्गदर्शिका’ ‘जल अर्पण’ पहल के तहत शुरू की गई है, जो जलापूर्ति योजनाओं के सुचारू हस्तांतरण और सतत संचालन के लिए 15-दिवसीय परीक्षण अवधि का प्रावधान करती है।
- राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों को व्यापक संचालन एवं अनुरक्षण (O&M) नीति अधिसूचित करने की सलाह दी गई है, जिसमें योजनाओं को ग्राम पंचायतों/VWSC को हस्तांतरित करना, उपयोगकर्ता शुल्क निर्धारित करना और महिला स्वयं सहायता समूहों (SHG) को शुल्क संग्रहण में शामिल करना शामिल है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| हर घर जल का लक्ष्य | प्रत्येक ग्रामीण परिवार को नल कनेक्शन के माध्यम से पर्याप्त मात्रा (प्रति व्यक्ति प्रतिदिन 55 लीटर), निर्धारित गुणवत्ता (BIS: 10500) का सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराना। |
| समुदाय-नेतृत्व वाली जनभागीदारी | ‘जल अर्पण’ जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से जनप्रतिनिधियों, ग्राम सभाओं और स्थानीय समुदायों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करना, जिससे योजनाओं की स्थिरता बढ़े। |
| कवरेज में उल्लेखनीय वृद्धि | अगस्त 2019 में 16.71% से बढ़कर जुलाई 2026 तक 82.09% ग्रामीण परिवारों तक नल जल कनेक्शन की पहुँच। |
| राज्यों का विषय | पेयजल राज्य का विषय है, इसलिए योजना, अनुमोदन, कार्यान्वयन और रखरखाव की जिम्मेदारी संबंधित राज्य/केंद्र शासित प्रदेश सरकारों की है। |
| जल जीवन मिशन 2.0 | मिशन की अवधि दिसंबर 2028 तक बढ़ाई गई, कुल वित्तीय परिव्यय 3.60 लाख करोड़ रुपये से बढ़ाकर 8.69 लाख करोड़ रुपये किया गया। |
| संचालन एवं अनुरक्षण (O&M) नीति | ग्राम पंचायतों/ग्राम जल एवं स्वच्छता समितियों को योजनाओं के हस्तांतरण, उपयोगकर्ता शुल्क निर्धारण और महिला स्वयं सहायता समूहों की भागीदारी को प्रोत्साहित करना। |
महत्व
सामाजिक महत्व
- ग्रामीण क्षेत्रों में सुरक्षित पेयजल की उपलब्धता से जल-जनित बीमारियों में कमी आएगी, जिससे सार्वजनिक स्वास्थ्य में सुधार होगा।
- महिलाओं और लड़कियों को पानी लाने में लगने वाले समय और श्रम से मुक्ति मिलेगी, जिससे उन्हें शिक्षा और अन्य उत्पादक गतिविधियों में शामिल होने का अवसर मिलेगा।
- समुदाय-आधारित दृष्टिकोण से स्थानीय स्वामित्व और योजनाओं की दीर्घकालिक स्थिरता सुनिश्चित होती है, जिससे सामाजिक एकजुटता बढ़ती है।
आर्थिक महत्व
- ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा क्योंकि पानी की उपलब्धता से कृषि और संबद्ध गतिविधियों को लाभ होगा।
- जल जीवन मिशन 2.0 के तहत बढ़े हुए वित्तीय परिव्यय से ग्रामीण अवसंरचना विकास में निवेश बढ़ेगा, जिससे रोजगार सृजन होगा।
- उपयोगकर्ता शुल्क के संग्रहण में महिला स्वयं सहायता समूहों (SHG) को शामिल करने से ग्रामीण महिलाओं का आर्थिक सशक्तिकरण होगा।
शासनिक महत्व
- ग्राम पंचायतों और ग्राम जल एवं स्वच्छता समितियों को योजनाओं के संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी सौंपने से स्थानीय स्वशासन मजबूत होता है।
- केंद्र सरकार द्वारा राज्यों को तकनीकी और वित्तीय सहायता प्रदान करना सहकारी संघवाद (Cooperative Federalism) का एक उदाहरण है।
- समग्र कार्यान्वयन एवं सुधार योजना (CIRP) के माध्यम से प्रभावी योजना निर्माण और क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाएगा, जिससे पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ेगी।
चुनौतियाँ
1. जल गुणवत्ता की निगरानी
- BIS: 10500 मानकों के अनुसार पेयजल की गुणवत्ता सुनिश्चित करना एक सतत चुनौती है, विशेषकर दूरदराज के क्षेत्रों में।
- जल स्रोतों के प्रदूषण और भूजल में आर्सेनिक, फ्लोराइड जैसे दूषकों की उपस्थिति से निपटना आवश्यक है।
यूपीएससी लिंक: स्वास्थ्य, पर्यावरण प्रदूषण
2. संचालन एवं अनुरक्षण (O&M) की स्थिरता
- ग्राम पंचायतों और ग्राम जल एवं स्वच्छता समितियों के पास तकनीकी विशेषज्ञता और वित्तीय संसाधनों की कमी हो सकती है, जिससे योजनाओं का दीर्घकालिक रखरखाव प्रभावित हो सकता है।
- उपयोगकर्ता शुल्क के संग्रहण और उसके प्रभावी उपयोग को सुनिश्चित करना एक महत्वपूर्ण चुनौती है।
यूपीएससी लिंक: स्थानीय स्वशासन, ग्रामीण विकास
3. अंतर-राज्यीय असमानताएँ
- कुछ राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में नल जल कवरेज में अभी भी काफी अंतर है, जिससे क्षेत्रीय असमानताएँ बनी हुई हैं।
- कठिन भौगोलिक परिस्थितियों वाले क्षेत्रों में पाइपलाइन बिछाना और पानी पहुँचाना अधिक चुनौतीपूर्ण होता है।
यूपीएससी लिंक: क्षेत्रीय असमानताएँ, सामाजिक न्याय
4. जनभागीदारी और जागरूकता
- समुदाय-प्रबंधित प्रणालियों की सफलता के लिए स्थानीय समुदायों की सक्रिय भागीदारी और जागरूकता महत्वपूर्ण है, जिसे बनाए रखना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
- पानी के विवेकपूर्ण उपयोग और बर्बादी को रोकने के लिए व्यवहार परिवर्तन लाना आवश्यक है।
यूपीएससी लिंक: सामाजिक सशक्तिकरण, नागरिक सहभागिता
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| जल स्रोतों की स्थिरता | जलवायु परिवर्तन, अत्यधिक दोहन और प्रदूषण के कारण जल स्रोतों का सूखना या दूषित होना। |
| तकनीकी क्षमता का अभाव | ग्रामीण स्तर पर जल अवसंरचना के संचालन और छोटे-मोटे मरम्मत के लिए प्रशिक्षित कर्मियों की कमी। |
| वित्तीय प्रबंधन | उपयोगकर्ता शुल्क के संग्रहण में अनियमितता और रखरखाव के लिए पर्याप्त वित्तीय प्रावधानों की कमी। |
| योजनाओं का हस्तांतरण | राज्य सरकारों द्वारा ग्राम पंचायतों को योजनाओं के सुचारु और प्रभावी हस्तांतरण में देरी या बाधाएँ। |
| सूचना का अभाव | ग्रामीण परिवारों को जल गुणवत्ता, उपलब्धता और शिकायत निवारण तंत्र के बारे में पर्याप्त जानकारी न होना। |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- जल जीवन मिशन (Jal Jeevan Mission)
आगे की राह
- जल गुणवत्ता परीक्षण प्रयोगशालाओं की संख्या और क्षमता में वृद्धि की जाए तथा ग्रामीण स्तर पर फील्ड टेस्ट किट (FTK) के उपयोग को बढ़ावा दिया जाए।
- ग्राम पंचायतों और ग्राम जल एवं स्वच्छता समितियों के सदस्यों के लिए नियमित प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाएँ, जिसमें तकनीकी, वित्तीय और प्रबंधन कौशल शामिल हों।
- उपयोगकर्ता शुल्क के संग्रहण के लिए एक पारदर्शी और प्रभावी तंत्र विकसित किया जाए तथा यह सुनिश्चित किया जाए कि एकत्रित धन का उपयोग केवल संचालन और रखरखाव के लिए हो।
- महिला स्वयं सहायता समूहों (SHG) को जल प्रबंधन और जागरूकता अभियानों में अधिक सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रोत्साहित किया जाए।
- राज्यों के बीच सर्वोत्तम प्रथाओं (Best Practices) का आदान-प्रदान किया जाए ताकि कम कवरेज वाले राज्यों को तेजी से प्रगति करने में मदद मिल सके।
- जल संरक्षण और वर्षा जल संचयन (Rainwater Harvesting) जैसी पहलों को जल जीवन मिशन के साथ एकीकृत किया जाए ताकि जल स्रोतों की स्थिरता सुनिश्चित हो सके।
- डिजिटल निगरानी प्रणालियों का उपयोग करके योजनाओं के कार्यान्वयन, जल गुणवत्ता और सेवा वितरण की वास्तविक समय (Real-time) पर निगरानी की जाए।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
जल जीवन मिशन · हर घर जल · सामुदायिक भागीदारी · ग्राम जल एवं स्वच्छता समिति · स्थानीय स्वशासन · पेयजल सुरक्षा · सतत विकास लक्ष्य · संघवाद · ग्रामीण अवसंरचना · सार्वजनिक स्वास्थ्य
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- {‘अनुच्छेद 243G’: ‘ग्राम पंचायतों की शक्तियाँ, प्राधिकार और उत्तरदायित्व’}
- {‘अनुच्छेद 243W’: ‘नगरपालिकाओं की शक्तियाँ, प्राधिकार और उत्तरदायित्व’}
- {‘राज्य सूची (सातवीं अनुसूची)’: ‘पेयजल राज्य का विषय’}
अवधारणा प्रवाह
भारत सरकार द्वारा जल जीवन मिशन का शुभारंभ (अगस्त 2019) → ग्रामीण परिवारों को कार्यात्मक घरेलू नल कनेक्शन उपलब्ध कराना → जल कवरेज में वृद्धि (16.71% से 82.09% तक) → समुदाय-प्रबंधित प्रणालियों पर मार्गदर्शिका का शुभारंभ (‘जल अर्पण’) → ग्राम पंचायतों/VWSC को योजनाओं का हस्तांतरण → दीर्घकालिक संचालन, अनुरक्षण और स्थिरता सुनिश्चित करना
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. जल जीवन मिशन (JJM) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. इसका उद्देश्य देश के प्रत्येक ग्रामीण परिवार को नल कनेक्शन के माध्यम से नियमित और दीर्घकालिक आधार पर सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराना है।
2. ‘पेयजल’ भारत के संविधान की सातवीं अनुसूची के तहत संघ सूची का विषय है।
3. जल जीवन मिशन 2.0 के अंतर्गत, मिशन की अवधि को दिसंबर 2028 तक बढ़ा दिया गया है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है। जल जीवन मिशन का प्राथमिक उद्देश्य ग्रामीण परिवारों को नल जल कनेक्शन प्रदान करना है। कथन 2 गलत है। ‘पेयजल’ राज्य सूची का विषय है, न कि संघ सूची का। केंद्र सरकार राज्यों को तकनीकी और वित्तीय सहायता प्रदान करती है। कथन 3 सही है। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने जल जीवन मिशन 2.0 के तहत मिशन की अवधि दिसंबर 2028 तक बढ़ा दी है।
Q2. निम्नलिखित में से कौन-सा/से जल जीवन मिशन (JJM) के कार्यान्वयन में ‘जनभागीदारी’ को बढ़ावा देने के लिए एक पहल है/हैं?
1. ‘जल अर्पण’ कार्यक्रम का आयोजन
2. ‘समुदाय-प्रबंधित पाइप आधारित जलापूर्ति प्रणालियों पर मार्गदर्शिका’ का शुभारंभ
3. महिला स्वयं सहायता समूहों (SHG) को उपयोगकर्ता शुल्क संग्रहण में शामिल करना
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:
- केवल 1 और 2
- केवल 2 और 3
- केवल 1 और 3
- 1, 2 और 3
उत्तर: 1, 2 और 3 — सभी तीनों पहलें जल जीवन मिशन में जनभागीदारी को बढ़ावा देने से संबंधित हैं। ‘जल अर्पण’ समुदाय के नेतृत्व वाला जन कार्यक्रम है। ‘समुदाय-प्रबंधित पाइप आधारित जलापूर्ति प्रणालियों पर मार्गदर्शिका’ ग्राम पंचायतों और ग्राम जल एवं स्वच्छता समितियों की भागीदारी सुनिश्चित करती है। महिला स्वयं सहायता समूहों को उपयोगकर्ता शुल्क संग्रहण में शामिल करना भी सामुदायिक भागीदारी का एक रूप है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ जल जीवन मिशन (JJM) ग्रामीण भारत में पेयजल सुरक्षा सुनिश्चित करने में एक महत्वपूर्ण कदम है। इस मिशन के उद्देश्यों, उपलब्धियों और सामुदायिक भागीदारी के महत्व का आलोचनात्मक विश्लेषण कीजिए। साथ ही, ‘पेयजल’ के राज्य सूची का विषय होने के बावजूद केंद्र सरकार की भूमिका पर प्रकाश डालिए।
रूपरेखा: प्रश्न के पहले भाग में जल जीवन मिशन के उद्देश्यों को संक्षेप में बताएं। फिर, नल जल कवरेज में वृद्धि जैसे प्रमुख उपलब्धियों का उल्लेख करें। सामुदायिक भागीदारी, जैसे ‘जल अर्पण’ और ग्राम जल एवं स्वच्छता समितियों की भूमिका, को विस्तार से समझाएं और इसके महत्व पर प्रकाश डालें। दूसरे भाग में, ‘पेयजल’ के राज्य सूची का विषय होने के बावजूद केंद्र सरकार द्वारा तकनीकी और वित्तीय सहायता प्रदान करने की भूमिका का विश्लेषण करें, जो संघवाद के सहकारी स्वरूप को दर्शाता है।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

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