08 Aug तेलंगाना का पुलिचिंतला लिफ्ट सिंचाई परियोजना पर विवाद, सीपीआई ने आंध्र प्रदेश सरकार से हस्तक्षेप की मांग

✎ अंतर-राज्यीय जल विवादों का समाधान भारतीय संघवाद की एक महत्वपूर्ण चुनौती है, जिसके लिए संवैधानिक प्रावधानों, विधायी निकायों और नियामक प्राधिकरणों के माध्यम से सहकारी संघवाद के सिद्धांतों का पालन करना आवश्यक है।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — भारतीय संविधान: संघवाद, केंद्र-राज्य संबंध, अंतर-राज्यीय जल विवाद | GS Paper III — पर्यावरण: जल संसाधन प्रबंधन, सिंचाई परियोजनाएँ
- Prelims: पुलिचंतला परियोजना, कृष्णा नदी, राजीव गांधी लिफ्ट सिंचाई योजना, आंध्र प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम, 2014, शीर्ष परिषद (Apex Council), कृष्णा नदी प्रबंधन बोर्ड (KRMB)
- Essay: भारत में अंतर-राज्यीय जल विवाद: चुनौतियाँ और समाधान, सहकारी संघवाद और जल संसाधन प्रबंधन
त्वरित पुनरावृत्ति: अंतर-राज्यीय जल विवादों का समाधान भारतीय संघवाद की एक महत्वपूर्ण चुनौती है, जिसके लिए संवैधानिक प्रावधानों, विधायी निकायों और नियामक प्राधिकरणों के माध्यम से सहकारी संघवाद के सिद्धांतों का पालन करना आवश्यक है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) ने आंध्र प्रदेश सरकार से तेलंगाना सरकार द्वारा कृष्णा नदी पर पुलिचंतला परियोजना के पास प्रस्तावित राजीव गांधी लिफ्ट सिंचाई योजना को रोकने का आग्रह किया है। सीपीआई का दावा है कि यह नई परियोजना आंध्र प्रदेश में पुलिचंतला जलाशय पर निर्भर कई मौजूदा लिफ्ट सिंचाई योजनाओं और पेयजल आपूर्ति को प्रतिकूल रूप से प्रभावित कर सकती है, तथा इसके लिए आवश्यक वैधानिक अनुमोदन भी प्राप्त नहीं किए गए हैं।
पृष्ठभूमि
- कृष्णा नदी भारत की प्रमुख नदियों में से एक है, जो महाराष्ट्र, कर्नाटक, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश राज्यों से होकर बहती है।
- इन राज्यों के बीच कृष्णा नदी के जल के बंटवारे को लेकर लंबे समय से विवाद रहा है, जिसे विभिन्न न्यायाधिकरणों और समझौतों के माध्यम से सुलझाने का प्रयास किया गया है।
- पुलिचंतला परियोजना कृष्णा नदी पर एक महत्वपूर्ण नियामक परियोजना है, जिसे आंध्र प्रदेश के गुंटूर, पाल्नाडु, प्रकाशम, बापटला, कृष्णा, NTR और एलुरु जिलों में लगभग 13 लाख एकड़ कृषि भूमि को सिंचाई सुरक्षा प्रदान करने और निचले इलाकों में पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
- आंध्र प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम, 2014 (Andhra Pradesh Reorganisation Act, 2014) की धारा 84 और 85 कृष्णा बेसिन में किसी भी नई लिफ्ट सिंचाई योजना को शुरू करने से पहले केंद्रीय जल शक्ति मंत्री की अध्यक्षता वाली शीर्ष परिषद (Apex Council) और कृष्णा नदी प्रबंधन बोर्ड (Krishna River Management Board – KRMB) के अनुमोदन को अनिवार्य करती हैं।
- तेलंगाना सरकार द्वारा प्रस्तावित राजीव गांधी लिफ्ट सिंचाई योजना का उद्देश्य सूर्यापेट जिले में लगभग 14,000 एकड़ भूमि के लिए सिंचाई सुविधाओं को स्थिर करना है, जिसकी अनुमानित लागत ₹394 करोड़ है।
- सीपीआई का तर्क है कि इस नई परियोजना के लिए आवश्यक अनुमोदन प्राप्त नहीं किए गए हैं, जिससे कानूनी चिंताएँ बढ़ गई हैं और आंध्र प्रदेश के किसानों को गंभीर कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है।
- यह विवाद अंतर-राज्यीय जल बंटवारे के जटिल मुद्दे और संघवाद के सिद्धांतों को उजागर करता है, जहाँ राज्यों के बीच संसाधनों के न्यायसंगत वितरण के लिए केंद्रीय हस्तक्षेप और नियामक निकायों की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है।
अंतर-राज्यीय जल विवाद और संबंधित प्रावधान
- भारत में अंतर-राज्यीय जल विवाद (Inter-State Water Disputes) एक संवेदनशील मुद्दा है, जो अक्सर राज्यों के बीच तनाव का कारण बनता है। संविधान में इसके समाधान के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं।
- संविधान का अनुच्छेद 262 (Article 262) संसद को अंतर-राज्यीय नदी विवादों के न्यायनिर्णयन के लिए कानून बनाने का अधिकार देता है।
- इस अनुच्छेद के तहत, संसद ने दो कानून बनाए हैं: नदी बोर्ड अधिनियम, 1956 (River Boards Act, 1956) और अंतर-राज्यीय जल विवाद अधिनियम, 1956 (Inter-State Water Disputes Act, 1956)।
- नदी बोर्ड अधिनियम का उद्देश्य अंतर-राज्यीय नदियों और नदी घाटियों के विनियमन और विकास के लिए नदी बोर्डों की स्थापना करना है, जबकि अंतर-राज्यीय जल विवाद अधिनियम केंद्र सरकार को अंतर-राज्यीय नदी विवादों के न्यायनिर्णयन के लिए एक न्यायाधिकरण (Tribunal) स्थापित करने का अधिकार देता है।
- न्यायाधिकरण का निर्णय अंतिम और संबंधित पक्षों के लिए बाध्यकारी होता है, और इस तरह के विवादों पर सर्वोच्च न्यायालय या किसी अन्य न्यायालय का कोई क्षेत्राधिकार नहीं होता है।
- कृष्णा नदी जल विवाद के संदर्भ में, कृष्णा जल विवाद न्यायाधिकरण (Krishna Water Disputes Tribunal – KWDT) की स्थापना की गई थी, जिसने विभिन्न चरणों में अपने निर्णय दिए हैं।
- आंध्र प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम, 2014 के तहत, कृष्णा नदी प्रबंधन बोर्ड (KRMB) और गोदावरी नदी प्रबंधन बोर्ड (Godavari River Management Board – GRMB) की स्थापना की गई थी, ताकि आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के बीच नदी जल के बंटवारे और परियोजनाओं के प्रबंधन की निगरानी की जा सके।
- शीर्ष परिषद (Apex Council), जिसकी अध्यक्षता केंद्रीय जल शक्ति मंत्री करते हैं, इन दोनों राज्यों के बीच जल बंटवारे से संबंधित मुद्दों पर निर्णय लेने और KRMB व GRMB के कार्यों का समन्वय करने के लिए एक महत्वपूर्ण मंच है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| पुलीचिंतला परियोजना | कृष्णा नदी पर स्थित यह परियोजना डाउनस्ट्रीम क्षेत्रों को सिंचाई और पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करती है। यह कृष्णा डेल्टा के 13 लाख एकड़ से अधिक क्षेत्र को सिंचाई सुरक्षा प्रदान करती है। |
| राजीव गांधी लिफ्ट सिंचाई योजना | तेलंगाना सरकार द्वारा प्रस्तावित यह योजना प्रतिदिन 2,500 क्यूसेक पानी उठाने की क्षमता रखती है। इसका उद्देश्य नागार्जुनसागर लेफ्ट नहर प्रणाली के तहत लगभग 14,000 एकड़ में सिंचाई सुविधाओं को स्थिर करना है। |
| अंतर-राज्यीय जल विवाद | यह परियोजना आंध्र प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम, 2014 की धारा 84 और 85 के तहत आवश्यक अनुमोदन के बिना शुरू की जा रही है, जिससे कानूनी और अंतर-राज्यीय विवाद उत्पन्न हो रहा है। |
| कृष्णा नदी प्रबंधन बोर्ड (KRMB) | यह बोर्ड कृष्णा नदी के जल के प्रबंधन और आवंटन के लिए जिम्मेदार है। किसी भी नई परियोजना के लिए इसकी मंजूरी आवश्यक है। |
महत्व
आर्थिक महत्व
- प्रस्तावित लिफ्ट सिंचाई योजना से आंध्र प्रदेश में पुलीचिंतला जलाशय पर निर्भर 70 से अधिक मौजूदा लिफ्ट सिंचाई योजनाओं पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
- यह लगभग 50,000 एकड़ कृषि भूमि को प्रभावित कर सकता है और हजारों किसानों के लिए कठिनाई पैदा कर सकता है, जिससे कृषि उत्पादन और ग्रामीण आजीविका पर नकारात्मक असर पड़ेगा।
अंतर-राज्यीय संबंध
- यह मुद्दा आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के बीच जल-साझाकरण विवादों को बढ़ाता है, जिससे दोनों राज्यों के बीच तनाव बढ़ सकता है।
- यह केंद्र सरकार, विशेष रूप से जल शक्ति मंत्रालय, और कृष्णा नदी प्रबंधन बोर्ड (KRMB) की भूमिका को महत्वपूर्ण बनाता है।
पर्यावरण और जल सुरक्षा
- अनाधिकृत परियोजनाओं से नदी के पारिस्थितिकी तंत्र पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है और डाउनस्ट्रीम क्षेत्रों में पानी की उपलब्धता कम हो सकती है, जिससे पेयजल संकट उत्पन्न हो सकता है।
- यह जल संसाधनों के सतत प्रबंधन और भविष्य की पीढ़ियों के लिए जल सुरक्षा सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर प्रकाश डालता है।
शासन और कानूनी निहितार्थ
- आंध्र प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम, 2014 के प्रावधानों का उल्लंघन कानूनी चुनौतियां पैदा करता है और संघीय ढांचे में अंतर-राज्यीय जल विवादों के समाधान के लिए स्थापित तंत्रों के महत्व को दर्शाता है।
- यह दिखाता है कि कैसे संवैधानिक और विधायी प्रावधानों का पालन करना अंतर-राज्यीय सद्भाव और संसाधन प्रबंधन के लिए महत्वपूर्ण है।
चुनौतियाँ
1. अंतर-राज्यीय जल विवाद
- राज्यों के बीच जल-साझाकरण समझौतों और परियोजनाओं पर सहमति का अभाव।
- एक राज्य द्वारा दूसरे राज्य के हितों को प्रभावित करने वाली परियोजनाओं का एकतरफा निर्माण।
यूपीएससी लिंक: संघवाद, अंतर-राज्यीय संबंध
2. नियामक अनुमोदन का अभाव
- कृष्णा नदी प्रबंधन बोर्ड (KRMB) और एपेक्स काउंसिल की मंजूरी के बिना नई परियोजनाओं का निर्माण।
- आंध्र प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम, 2014 के प्रावधानों का उल्लंघन।
यूपीएससी लिंक: संवैधानिक निकाय, जल प्रशासन
3. कृषि और पेयजल आपूर्ति पर प्रभाव
- डाउनस्ट्रीम क्षेत्रों में मौजूदा सिंचाई योजनाओं और पेयजल आपूर्ति पर संभावित नकारात्मक प्रभाव।
- हजारों किसानों की आजीविका और कृषि भूमि को खतरा।
यूपीएससी लिंक: कृषि, जल संसाधन
4. संघीय ढांचे में समन्वय
- केंद्र सरकार और राज्य सरकारों के बीच जल विवादों के समाधान में समन्वय की कमी।
- अंतर-राज्यीय परिषदों और बोर्डों की प्रभावशीलता।
यूपीएससी लिंक: केंद्र-राज्य संबंध, संघीय शासन
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| अनाधिकृत परियोजना | तेलंगाना द्वारा राजीव गांधी लिफ्ट सिंचाई योजना का निर्माण बिना आवश्यक अनुमोदन के किया जा रहा है। |
| जल उपलब्धता में कमी | यह परियोजना आंध्र प्रदेश में पुलीचिंतला जलाशय पर निर्भर 70 से अधिक लिफ्ट सिंचाई योजनाओं और ग्रामीण पेयजल आपूर्ति को प्रभावित कर सकती है। |
| कानूनी उल्लंघन | आंध्र प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम, 2014 की धारा 84 और 85 के तहत एपेक्स काउंसिल और KRMB की मंजूरी का उल्लंघन। |
| कृषि पर प्रभाव | लगभग 50,000 एकड़ कृषि भूमि और हजारों किसानों की आजीविका को संभावित नुकसान। |
आगे की राह
- आंध्र प्रदेश सरकार को केंद्र सरकार, विशेष रूप से जल शक्ति मंत्रालय, के साथ इस मुद्दे को उठाना चाहिए।
- एपेक्स काउंसिल और कृष्णा नदी प्रबंधन बोर्ड (KRMB) को तत्काल हस्तक्षेप करना चाहिए और मामले की जांच करनी चाहिए।
- तेलंगाना सरकार को सभी आवश्यक नियामक और वैधानिक अनुमोदन प्राप्त होने तक परियोजना पर काम रोकना चाहिए।
- दोनों राज्यों को जल-साझाकरण समझौतों और परियोजनाओं के संबंध में बातचीत और सहयोग के माध्यम से समाधान खोजना चाहिए।
- यदि आवश्यक हो, तो आंध्र प्रदेश सरकार को परियोजना को रोकने के लिए कानूनी कार्रवाई करनी चाहिए।
- KRMB को कृष्णा नदी बेसिन में सभी नई परियोजनाओं की निगरानी और अनुमोदन प्रक्रिया को मजबूत करना चाहिए।
- केंद्र सरकार को अंतर-राज्यीय जल विवादों के समाधान के लिए एक प्रभावी और समयबद्ध तंत्र सुनिश्चित करना चाहिए।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
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संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- अनुच्छेद 262: अंतर-राज्यीय नदी जल विवादों का न्यायनिर्णयन।
- अनुच्छेद 263: अंतर-राज्यीय परिषद के माध्यम से समन्वय।
- सातवीं अनुसूची (सूची II, प्रविष्टि 17): राज्य सूची में जल का विषय।
- सातवीं अनुसूची (सूची I, प्रविष्टि 56): संघ सूची में अंतर-राज्यीय नदियों का विनियमन।
अवधारणा प्रवाह
तेलंगाना द्वारा राजीव गांधी लिफ्ट सिंचाई योजना का प्रस्ताव। → बिना आवश्यक नियामक अनुमोदन के परियोजना का निर्माण। → आंध्र प्रदेश में पुलीचिंतला जलाशय पर निर्भर योजनाओं पर प्रतिकूल प्रभाव। → कृषि भूमि, पेयजल आपूर्ति और किसानों की आजीविका को खतरा। → आंध्र प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम, 2014 का उल्लंघन। → अंतर-राज्यीय जल विवाद और केंद्र सरकार के हस्तक्षेप की मांग।
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. कृष्णा नदी प्रायद्वीपीय भारत की दूसरी सबसे बड़ी पूर्व-प्रवाह वाली नदी है।
2. कृष्णा नदी का उद्गम महाबलेश्वर, महाराष्ट्र के पास होता है।
3. कृष्णा नदी प्रबंधन बोर्ड (KRMB) का गठन आंध्र प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम, 2014 के तहत किया गया था।
उपरोक्त में से कितने कथन सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: सभी तीन — कथन 1 गलत है। कृष्णा नदी प्रायद्वीपीय भारत की दूसरी सबसे बड़ी पूर्व-प्रवाह वाली नदी नहीं है, बल्कि गोदावरी के बाद दूसरी सबसे बड़ी पूर्व-प्रवाह वाली नदी है। कथन 2 सही है। कृष्णा नदी का उद्गम महाराष्ट्र में महाबलेश्वर के पास होता है। कथन 3 सही है। कृष्णा नदी प्रबंधन बोर्ड (KRMB) का गठन आंध्र प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम, 2014 की धारा 85 के तहत किया गया था, जिसका उद्देश्य कृष्णा नदी के जल संसाधनों का प्रबंधन करना है।
Q2. कथन (A): अंतर-राज्यीय जल विवादों का समाधान भारतीय संघवाद की एक महत्वपूर्ण चुनौती है।
कारण (R): संविधान का अनुच्छेद 262 संसद को अंतर-राज्यीय नदी विवादों के न्यायनिर्णयन के लिए कानून बनाने का अधिकार देता है।
- A और R दोनों सही हैं, और R, A की सही व्याख्या है।
- A और R दोनों सही हैं, लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है।
- A सही है, लेकिन R गलत है।
- A गलत है, लेकिन R सही है।
उत्तर: A और R दोनों सही हैं, और R, A की सही व्याख्या है। — कथन (A) सही है क्योंकि अंतर-राज्यीय जल विवाद भारत में संघवाद के समक्ष एक बड़ी चुनौती प्रस्तुत करते हैं, जिससे राज्यों के बीच तनाव पैदा होता है। कारण (R) भी सही है क्योंकि संविधान का अनुच्छेद 262 संसद को अंतर-राज्यीय नदी विवादों के न्यायनिर्णयन के लिए कानून बनाने का अधिकार देता है, जैसे नदी बोर्ड अधिनियम, 1956 और अंतर-राज्यीय जल विवाद अधिनियम, 1956। कारण (R) कथन (A) की सही व्याख्या भी है, क्योंकि यह बताता है कि ऐसे विवादों को हल करने के लिए संवैधानिक तंत्र मौजूद है।
Q3. निम्नलिखित में से कौन-सा निकाय कृष्णा नदी जल विवाद के समाधान में शामिल नहीं है?
- कृष्णा नदी प्रबंधन बोर्ड (KRMB)
- सर्वोच्च परिषद (Apex Council)
- अंतर-राज्यीय जल विवाद न्यायाधिकरण
- कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण (CWMA)
उत्तर: कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण (CWMA) — कृष्णा नदी जल विवाद के समाधान में कृष्णा नदी प्रबंधन बोर्ड (KRMB), सर्वोच्च परिषद और अंतर-राज्यीय जल विवाद न्यायाधिकरण शामिल हैं। कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण (CWMA) कावेरी नदी जल विवाद से संबंधित है, कृष्णा नदी से नहीं।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ अंतर-राज्यीय नदी जल विवाद भारतीय संघवाद के समक्ष एक गंभीर चुनौती प्रस्तुत करते हैं। आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के बीच कृष्णा नदी जल विवाद के संदर्भ में इस कथन का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। (15 Marks)
रूपरेखा: एक आदर्श उत्तर में निम्नलिखित बिंदुओं को शामिल किया जाना चाहिए:
1. **परिचय:** अंतर-राज्यीय नदी जल विवादों की प्रकृति और भारतीय संघवाद पर उनके प्रभाव का संक्षिप्त परिचय। यह बताएं कि ये विवाद राज्यों के बीच सहयोग और विश्वास को कैसे प्रभावित करते हैं।
2. **संवैधानिक प्रावधान:** भारतीय संविधान के अनुच्छेद 262 का उल्लेख करें, जो अंतर-राज्यीय नदी जल विवादों के न्यायनिर्णयन के लिए संसद को अधिकार देता है। नदी बोर्ड अधिनियम, 1956 और अंतर-राज्यीय जल विवाद अधिनियम, 1956 जैसे संबंधित कानूनों का भी उल्लेख करें।
3. **कृष्णा नदी जल विवाद का संदर्भ:**
* कृष्णा नदी बेसिन में शामिल राज्यों (महाराष्ट्र, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना) का उल्लेख करें।
* आंध्र प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम, 2014 के बाद उत्पन्न हुई विशिष्ट चुनौतियों पर प्रकाश डालें, विशेष रूप से तेलंगाना के गठन के बाद जल-बंटवारे के मुद्दों पर।
* पुलीचिंतला परियोजना और राजीव गांधी लिफ्ट सिंचाई योजना जैसे हालिया विवादों का उल्लेख करें, जो समाचार में हैं, और उनके संभावित प्रभावों पर चर्चा करें।
4. **संबंधित संस्थाएँ और उनकी भूमिका:**
* **कृष्णा नदी प्रबंधन बोर्ड (KRMB):** इसके गठन, अधिदेश और जल संसाधनों के प्रबंधन में इसकी भूमिका का वर्णन करें। इसकी प्रभावशीलता और चुनौतियों पर चर्चा करें।
* **सर्वोच्च परिषद (Apex Council):** केंद्रीय जल शक्ति मंत्री की अध्यक्षता में इस परिषद की भूमिका और अंतर-राज्यीय परियोजनाओं के लिए इसकी मंजूरी की आवश्यकता पर प्रकाश डालें।
* **न्यायाधिकरण (Tribunals):** कृष्णा जल विवाद न्यायाधिकरण (KWDT-I और KWDT-II) के निर्णयों और उनके कार्यान्वयन में आने वाली बाधाओं का उल्लेख करें।
5. **चुनौतियाँ और समालोचना:**
* राज्यों के बीच राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी और सहयोग का अभाव।
* KRMB और सर्वोच्च परिषद जैसे निकायों की सीमित शक्तियाँ और उनके निर्णयों को लागू करने में कठिनाइयाँ।
* जल को राज्य सूची का विषय होने के कारण उत्पन्न होने वाली जटिलताएँ।
* नए परियोजनाओं के लिए आवश्यक अनुमोदन प्रक्रियाओं का उल्लंघन।
* पर्यावरणीय और सामाजिक प्रभावों की अनदेखी।
6. **समाधान और आगे का रास्ता:**
* सहकारी संघवाद को बढ़ावा देना और राज्यों के बीच संवाद।
* KRMB जैसी संस्थाओं को अधिक स्वायत्तता और प्रवर्तन शक्तियाँ प्रदान करना।
* वैज्ञानिक डेटा-आधारित जल प्रबंधन और आवंटन।
* जल-बंटवारे के लिए एक राष्ट्रीय नीति का विकास।
* विवादों के शीघ्र समाधान के लिए न्यायिक प्रक्रिया में सुधार।
7. **निष्कर्ष:** अंतर-राज्यीय जल विवादों के समाधान के लिए एक समग्र और सहयोगात्मक दृष्टिकोण की आवश्यकता पर बल दें, जो संघवाद की भावना को मजबूत करे और सभी हितधारकों के हितों की रक्षा करे।
स्रोत: The Hindu
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

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