पंचायत विकास सूचकांक 2.0: ग्राम पंचायतों के प्रदर्शन का आकलन और सुधार

पंचायत विकास सूचकांक — concept mind map

पंचायत विकास सूचकांक 2.0: ग्राम पंचायतों के प्रदर्शन का आकलन और सुधार

✎ पंचायत विकास सूचकांक (PAI) पंचायती राज मंत्रालय द्वारा विकसित एक उपकरण है जो सतत विकास लक्ष्यों के स्थानीयकरण (LSDG) के नौ विषयों पर ग्राम पंचायतों के प्रदर्शन का मूल्यांकन करता है, जिससे स्थानीय स्तर पर शासन और विकास में सुधार…

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पंचायत विकास सूचकांक ढांचा

विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper II — भारतीय संविधान: पंचायती राज, संघवाद, स्थानीय स्वशासन  |  GS Paper III — आर्थिक विकास: सतत विकास लक्ष्य, समावेशी विकास
  • Prelims: पंचायत विकास सूचकांक (PDI/PAI), सतत विकास लक्ष्यों का स्थानीयकरण (LSDG), राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान (RGSA), ग्राम पंचायत विकास योजना (GPDP), पंचायती राज मंत्रालय, 73वाँ संविधान संशोधन अधिनियम
  • Essay: स्थानीय स्वशासन के माध्यम से समावेशी और सतत विकास, भारत में ग्रामीण परिवर्तन में पंचायतों की भूमिका

त्वरित पुनरावृत्ति: पंचायत विकास सूचकांक (PAI) पंचायती राज मंत्रालय द्वारा विकसित एक उपकरण है जो सतत विकास लक्ष्यों के स्थानीयकरण (LSDG) के नौ विषयों पर ग्राम पंचायतों के प्रदर्शन का मूल्यांकन करता है, जिससे स्थानीय स्तर पर शासन और विकास में सुधार को बढ़ावा मिल सके।

यह खबर चर्चा में क्यों?

पंचायती राज मंत्रालय ने हाल ही में पंचायत विकास सूचकांक (PAI) के विकास और कार्यान्वयन की जानकारी दी है, जिसे पहले पंचायत डेवलपमेंट इंडेक्स (PDI) के नाम से जाना जाता था। यह सूचकांक ग्राम पंचायतों के सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) के स्थानीयकरण के विषयों पर क्रमिक प्रदर्शन सुधार को मापने के लिए एक समग्र मूल्यांकन ढाँचा है। वित्तीय वर्ष 2023-24 के लिए PAI 2.0 के तहत 33 राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों की कुल 2.59 लाख ग्राम पंचायतों को इसमें शामिल किया गया है, जो स्थानीय स्तर पर विकास और शासन में सुधार के प्रयासों को दर्शाता है।

पृष्ठभूमि

  • भारत में पंचायती राज व्यवस्था को 73वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1992 द्वारा संवैधानिक दर्जा दिया गया, जिसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में स्थानीय स्वशासन को मजबूत करना था।
  • पंचायती राज संस्थाएँ (PRIs) ग्रामीण विकास और सामाजिक न्याय सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
  • सतत विकास लक्ष्य (SDGs) संयुक्त राष्ट्र द्वारा 2015 में अपनाए गए 17 वैश्विक लक्ष्य हैं, जिनका उद्देश्य गरीबी समाप्त करना, ग्रह की रक्षा करना और सभी के लिए शांति व समृद्धि सुनिश्चित करना है।
  • पंचायती राज मंत्रालय ने SDGs को जमीनी स्तर पर अधिक प्रासंगिक और क्रियान्वयन योग्य बनाने के लिए ‘सतत विकास लक्ष्यों के स्थानीयकरण (LSDG)’ के नौ विषयों का एक फ्रेमवर्क विकसित किया है।
  • ग्राम पंचायत विकास योजना (GPDP) पंचायतों द्वारा तैयार की जाने वाली वार्षिक विकास योजना है, जिसमें स्थानीय आवश्यकताओं और प्राथमिकताओं को शामिल किया जाता है।
  • राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान (RGSA) एक केंद्र प्रायोजित योजना है जिसका उद्देश्य पंचायतों की क्षमताओं को बढ़ाना और पंचायत शासन में सुधार करना है।

पंचायत विकास सूचकांक (PAI) क्या है?

  • पंचायत विकास सूचकांक (PAI) पंचायती राज मंत्रालय द्वारा विकसित एक समग्र मूल्यांकन ढाँचा है, जिसका उद्देश्य ग्राम पंचायतों के प्रदर्शन को मापना है।
  • यह सूचकांक सतत विकास लक्ष्यों के स्थानीयकरण (LSDG) के नौ विषयों पर पंचायतों के प्रदर्शन का मूल्यांकन करता है, जिससे उनके क्रमिक सुधार को ट्रैक किया जा सके।
  • PAI स्कोरकार्ड और डैशबोर्ड के माध्यम से विषय-वार और समग्र स्कोर प्रदान करता है, जिससे पंचायत स्तर पर निष्पादन में कमियों, सापेक्ष मज़बूती और विशेष ध्यान देने योग्य क्षेत्रों की पहचान की जा सकती है।
  • नौ LSDG विषयों में ‘बाल-अनुकूल गांव’, ‘जल-पर्याप्त पंचायत’, ‘स्वच्छ और हरित पंचायत’ आदि शामिल हैं, जो प्रभावी ग्रामीण शासन और बेहतर सेवा प्रदायगी को सुगम बनाते हैं।
  • PAI 2.0 वित्तीय वर्ष 2023-24 में लागू किया गया है, जिसमें बड़ी संख्या में ग्राम पंचायतों को शामिल किया गया है ताकि उनके प्रदर्शन का व्यापक मूल्यांकन हो सके।
  • यह सूचकांक पंचायतों को अपनी ग्राम पंचायत विकास योजनाओं (GPDP) को LSDG विषयों के अनुरूप तैयार करने में मदद करता है, जिससे विकास के मुख्य क्षेत्रों (‘संकल्प’) को प्राथमिकता दी जा सके।
  • PAI का उद्देश्य पंचायतों को सशक्त बनाना, जवाबदेही बढ़ाना और ग्रामीण क्षेत्रों में सतत और समावेशी विकास को बढ़ावा देना है।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
समग्र मूल्यांकन ढाँचा ग्राम पंचायतों (GP) के प्रदर्शन में क्रमिक सुधार को मापने के लिए डिज़ाइन किया गया।
विषय-वार और समग्र स्कोर पंचायत स्तर पर निष्पादन में कमियों, सापेक्ष मज़बूती और विशेष ध्यान देने वाले क्षेत्रों की पहचान करने में सहायक।
सतत विकास लक्ष्यों (SDG) का स्थानीयकरण (LSDG) वैश्विक SDG एजेंडा को जमीनी स्तर पर अधिक प्रासंगिक और क्रियान्वयन योग्य बनाता है।
PDI से PAI में परिवर्तन पंचायत विकास सूचकांक (PDI) का नाम बदलकर पंचायत एडवांसमेंट इंडेक्स (PAI) किया गया, जो अधिक व्यापक मूल्यांकन को दर्शाता है।
क्षमता निर्माण और प्रशिक्षण (CB&T) पंचायतों के निर्वाचित प्रतिनिधियों और हितधारकों के नेतृत्व कौशल और शासन में सुधार पर केंद्रित।
ग्राम पंचायत विकास योजनाएँ (GPDP) LSDG विषयों के अनुरूप विषय-आधारित योजना बनाने में पंचायतों की सहायता करता है।

महत्व

शासन और विकेंद्रीकरण

  • PAI पंचायतों को उनके प्रदर्शन का मूल्यांकन करने और जवाबदेही बढ़ाने के लिए एक मानकीकृत ढाँचा प्रदान करता है, जिससे जमीनी स्तर पर शासन में सुधार होता है।
  • यह पंचायतों को सतत विकास लक्ष्यों (SDG) के स्थानीयकरण (LSDG) के माध्यम से स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप विकास योजनाएँ बनाने में सशक्त बनाता है, जिससे विकेंद्रीकरण मजबूत होता है।

सामाजिक-आर्थिक विकास

  • बाल-अनुकूल गाँव, जल-पर्याप्त पंचायत और स्वच्छ एवं हरित पंचायत जैसे विषयों पर ध्यान केंद्रित करके, PAI ग्रामीण क्षेत्रों में जीवन की गुणवत्ता में सुधार और समावेशी विकास को बढ़ावा देता है।
  • क्षमता निर्माण और प्रशिक्षण (CB&T) कार्यक्रम निर्वाचित प्रतिनिधियों को प्रभावी ढंग से योजना बनाने और सेवाओं को वितरित करने के लिए आवश्यक कौशल से लैस करते हैं, जिससे विकास परिणामों में वृद्धि होती है।

पर्यावरण स्थिरता

  • जल-पर्याप्त पंचायत और स्वच्छ एवं हरित पंचायत जैसे विषयों के तहत कुशल जल प्रबंधन, वाटरशेड विकास और टिकाऊ कृषि पद्धतियों को एकीकृत करके, PAI पर्यावरणीय स्थिरता को बढ़ावा देता है।
  • यह जलवायु-अनुकूल कृषि पद्धतियों को अपनाने के लिए पंचायतों को प्रोत्साहित करता है, जिससे ग्रामीण समुदायों की जलवायु परिवर्तन के प्रति लचीलापन बढ़ता है।

चुनौतियाँ

1. डेटा की गुणवत्ता और उपलब्धता

  • पंचायतों से विश्वसनीय और अद्यतन डेटा एकत्र करना एक चुनौती हो सकती है, जिससे PAI स्कोर की सटीकता प्रभावित हो सकती है।
  • दूरदराज के क्षेत्रों में डिजिटल साक्षरता और कनेक्टिविटी की कमी डेटा प्रविष्टि और रिपोर्टिंग में बाधा डाल सकती है।

2. क्षमता निर्माण में असमानताएँ

  • सभी पंचायतों में निर्वाचित प्रतिनिधियों और पदाधिकारियों के लिए प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण के अवसरों तक समान पहुँच सुनिश्चित करना एक चुनौती है।
  • प्रशिक्षण के बाद सीखे गए कौशल को प्रभावी ढंग से लागू करने में पंचायतों की क्षमता भिन्न हो सकती है।

3. संसाधनों की कमी

  • कई पंचायतों को वित्तीय और मानव संसाधनों की कमी का सामना करना पड़ता है, जो उन्हें PAI द्वारा पहचाने गए क्षेत्रों में सुधार के लिए आवश्यक पहल करने से रोक सकता है।
  • विशेष प्रोत्साहन निधि की अनुपस्थिति पंचायतों को उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए प्रेरित करने में बाधा डाल सकती है।

4. स्थानीयकरण और कार्यान्वयन

  • SDG के नौ विषयों को स्थानीय संदर्भ में प्रभावी ढंग से एकीकृत करना और उन्हें ग्राम पंचायत विकास योजनाओं (GPDP) में बदलना एक जटिल प्रक्रिया हो सकती है।
  • विभिन्न पंचायतों की विशिष्ट आवश्यकताओं और प्राथमिकताओं के अनुरूप समाधान तैयार करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
PDI से PAI में परिवर्तन नए सूचकांक के तहत पंचायतों को अनुकूलित करने और उनके प्रदर्शन को मापने में समय लग सकता है।
प्रोत्साहन निधि का अभाव उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली पंचायतों के लिए विशेष प्रोत्साहन निधि की अनुपस्थिति उन्हें ‘फ्रंटरनर’ बनने के लिए प्रेरित करने में बाधा डाल सकती है।
प्रशिक्षण की प्रभावशीलता प्रशिक्षण कार्यक्रमों की गुणवत्ता और उनके वास्तविक प्रभाव को सुनिश्चित करना एक सतत चुनौती है।
GPDP में संकल्पों का कार्यान्वयन ग्राम पंचायतों द्वारा चुने गए ‘संकल्पों’ को प्रभावी ढंग से लागू करने और वांछित परिणाम प्राप्त करने में चुनौतियाँ।
तकनीकी एकीकरण सभी पंचायतों में PAI स्कोरकार्ड और डैशबोर्ड जैसे तकनीकी उपकरणों के उपयोग को बढ़ावा देना और तकनीकी बाधाओं को दूर करना।

सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें

  • संशोधित राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान (RGSA)

आगे की राह

  • उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली पंचायतों के लिए विशेष प्रोत्साहन निधि का प्रावधान किया जाना चाहिए ताकि उन्हें सतत विकास लक्ष्यों के स्थानीयकरण (LSDG) में ‘फ्रंटरनर’ बनने के लिए प्रेरित किया जा सके।
  • PDI से PAI में परिवर्तन के साथ, पंचायतों को नए मूल्यांकन ढाँचे को समझने और अपनाने में सहायता करने के लिए व्यापक जागरूकता और अभिविन्यास कार्यक्रम आयोजित किए जाने चाहिए।
  • क्षमता निर्माण और प्रशिक्षण (CB&T) कार्यक्रमों को और अधिक लक्षित और आवश्यकता-आधारित बनाया जाना चाहिए, जिसमें पंचायतों की विशिष्ट कमजोरियों और आवश्यकताओं पर ध्यान केंद्रित किया जाए।
  • डेटा संग्रह और रिपोर्टिंग तंत्र को मजबूत किया जाना चाहिए, जिसमें डिजिटल साक्षरता को बढ़ावा देना और दूरदराज के क्षेत्रों में कनेक्टिविटी में सुधार करना शामिल है।
  • ग्राम पंचायत विकास योजनाओं (GPDP) में ‘संकल्पों’ के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए पंचायतों को पर्याप्त वित्तीय और तकनीकी सहायता प्रदान की जानी चाहिए।
  • पंचायतों के बीच सर्वोत्तम प्रथाओं और सफल मॉडलों को साझा करने के लिए एक मंच स्थापित किया जाना चाहिए, जिससे वे एक-दूसरे से सीख सकें और अपने प्रदर्शन में सुधार कर सकें।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

पंचायत विकास सूचकांक (PAI) · सतत विकास लक्ष्य (SDG) · स्थानीयकरण (Localization) · ग्राम पंचायत विकास योजना (GPDP) · राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान (RGSA) · क्षमता निर्माण और प्रशिक्षण (CB&T) · पंचायती राज मंत्रालय · विषय-आधारित योजना · ग्रामीण शासन · विकेन्द्रीकृत नियोजन · स्वच्छ और हरित पंचायत · जल-पर्याप्त पंचायत

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 40’, ‘note’: ‘ग्राम पंचायतों का संगठन’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 243-G’, ‘note’: ‘पंचायतों की शक्तियाँ, प्राधिकार और उत्तरदायित्व’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 243-H’, ‘note’: ‘पंचायतों द्वारा कर अधिरोपित करने की शक्ति’}
  • {‘article’: ‘ग्यारहवीं अनुसूची’, ‘note’: ‘पंचायतों के 29 कार्यात्मक विषय’}

अवधारणा प्रवाह

पंचायती राज मंत्रालय PAI विकसित करता है  →  PAI पंचायतों के प्रदर्शन का मूल्यांकन करता है  →  LSDG विषयों पर पंचायतों का ध्यान केंद्रित होता है  →  RGSA के तहत क्षमता निर्माण और प्रशिक्षण  →  GPDP में विषय-आधारित योजना का निर्माण  →  स्थानीय स्तर पर SDG लक्ष्यों की प्राप्ति

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. पंचायत विकास सूचकांक (PAI) को पंचायती राज मंत्रालय द्वारा सतत विकास लक्ष्यों (SDG) के स्थानीयकरण के विषयों पर ग्राम पंचायतों के प्रदर्शन को मापने के लिए विकसित किया गया है।
2. PAI फ्रेमवर्क नौ स्थानीयकृत सतत विकास लक्ष्यों (LSDG) विषयों पर आधारित है।
3. राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान (RGSA) योजना का उद्देश्य पंचायतों के निर्वाचित प्रतिनिधियों और हितधारकों के नेतृत्व कौशल और शासन में सुधार के लिए क्षमता निर्माण और प्रशिक्षण प्रदान करना है।
उपरोक्त में से कितने कथन सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. सभी तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: सभी तीन — कथन 1 सही है। PAI को पंचायतों के प्रदर्शन को मापने के लिए पंचायती राज मंत्रालय द्वारा विकसित किया गया है। कथन 2 सही है। PAI फ्रेमवर्क नौ LSDG विषयों पर आधारित है। कथन 3 सही है। RGSA का मुख्य उद्देश्य पंचायतों के निर्वाचित प्रतिनिधियों और अन्य हितधारकों के नेतृत्व कौशल को बढ़ाना और पंचायत शासन में सुधार के लिए क्षमता निर्माण और प्रशिक्षण प्रदान करना है।

Q2. पंचायत विकास सूचकांक (PAI) के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन सा कथन सही नहीं है?

  1. PAI को पहले पंचायत डेवलपमेंट इंडेक्स (PDI) के नाम से जाना जाता था।
  2. यह पंचायतों को विषय-वार और समग्र स्कोर प्रदान करता है ताकि निष्पादन में कमियों की पहचान की जा सके।
  3. वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में ‘फ्रंटरनर’ पंचायतों के लिए विशेष प्रोत्साहन निधि बनाई गई है।
  4. यह सतत विकास लक्ष्यों के स्थानीयकरण (LSDG) के नौ विषयों के अनुरूप है।

उत्तर: वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में ‘फ्रंटरनर’ पंचायतों के लिए विशेष प्रोत्साहन निधि बनाई गई है। — विकल्प C सही नहीं है। प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, वित्त वर्ष 2026-27 बजट में ‘फ्रंटरनर’ पंचायतों के लिए कोई विशेष प्रोत्साहन निधि नहीं बनाई गई है। अन्य सभी कथन सही हैं।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ पंचायत विकास सूचकांक (PAI) ग्रामीण स्थानीय स्वशासन को मजबूत करने में किस प्रकार सहायक है? इसके प्रमुख उद्देश्यों और सतत विकास लक्ष्यों (SDG) के स्थानीयकरण में इसकी भूमिका का विश्लेषण कीजिए। (15 Marks)

रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. **परिचय:** पंचायत विकास सूचकांक (PAI) का संक्षिप्त परिचय दें, जिसमें इसके विकास और उद्देश्य शामिल हों (पंचायती राज मंत्रालय, सतत विकास लक्ष्यों का स्थानीयकरण)।
2. **ग्रामीण स्थानीय स्वशासन को मजबूत करने में सहायता:**
* **प्रदर्शन मूल्यांकन:** PAI कैसे पंचायतों के प्रदर्शन का समग्र मूल्यांकन करता है (स्कोरकार्ड, डैशबोर्ड)।
* **कमियों की पहचान:** निष्पादन में कमियों और सापेक्ष मज़बूती वाले क्षेत्रों की पहचान में मदद।
* **जवाबदेही और पारदर्शिता:** पंचायतों की जवाबदेही में वृद्धि।
* **नीति निर्माण में सहायता:** राज्य/संघ राज्य क्षेत्र स्तर पर बेहतर नीति निर्माण के लिए डेटा प्रदान करना।
3. **प्रमुख उद्देश्य:**
* सतत विकास लक्ष्यों (SDG) के स्थानीयकरण के विषयों पर पंचायतों के क्रमिक प्रदर्शन सुधार को मापना।
* पंचायत स्तर पर विशिष्ट ध्यान देने योग्य क्षेत्रों की पहचान करना।
* ग्राम पंचायत विकास योजनाओं (GPDP) के प्रभावी निर्माण को बढ़ावा देना।
4. **सतत विकास लक्ष्यों (SDG) के स्थानीयकरण में भूमिका:**
* **नौ LSDG विषय:** PAI फ्रेमवर्क नौ स्थानीयकृत SDG विषयों पर आधारित है (जैसे बाल-अनुकूल गांव, जल-पर्याप्त पंचायत, स्वच्छ और हरित पंचायत)।
* **वैश्विक एजेंडा का स्थानीयकरण:** वैश्विक विकास एजेंडा को जमीनी स्तर पर अधिक प्रासंगिक और क्रियान्वयन योग्य बनाना।
* **विषय-आधारित योजना:** GPDP को विषय-आधारित योजना बनाने में मदद करना (‘संकल्प’ की अवधारणा)।
* **परिणाम-उन्मुख विकास:** प्रभावी ग्रामीण शासन, बेहतर सेवा प्रदायगी और परिणाम-उन्मुख पंचायत विकास को सुगम बनाना।
5. **चुनौतियाँ और आगे का मार्ग (संक्षिप्त):** डेटा संग्रह, क्षमता निर्माण की आवश्यकता, वित्तीय प्रोत्साहन की कमी।
6. **निष्कर्ष:** PAI को ग्रामीण विकास और विकेन्द्रीकृत नियोजन के लिए एक महत्वपूर्ण उपकरण के रूप में सारांशित करें, जो भारत के संघीय ढांचे में पंचायतों की भूमिका को सशक्त बनाता है।

स्रोत: PIB (Press Information Bureau)


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