11 Aug परिवहन सुधारों पर संसदीय समिति की 392वीं रिपोर्ट: जानिए प्रमुख सिफारिशें
✎ संसदीय स्थायी समिति की रिपोर्ट समावेशी, डिजिटल और टिकाऊ बस परिवहन को बढ़ावा देने के लिए एक व्यापक रोडमैप प्रस्तुत करती है, जिसमें परमिट सुधार, अवसंरचना विकास, डिजिटलीकरण, सुरक्षा और बेड़े के आधुनिकीकरण पर जोर दिया गया है।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — शासन, संविधान, राजव्यवस्था, सामाजिक न्याय और अंतर्राष्ट्रीय संबंध | GS Paper III — प्रौद्योगिकी, आर्थिक विकास, जैव विविधता, पर्यावरण, सुरक्षा और आपदा प्रबंधन
- Prelims: संसदीय स्थायी समिति, अखिल भारतीय यात्री परमिट, राष्ट्रीय बस टर्मिनल प्राधिकरण, राष्ट्रीय बस डिजिटल ग्रिड, फास्टैग, सार्वजनिक-निजी भागीदारी, इलेक्ट्रिक बसें, वाहन स्क्रैपिंग नीति, महिला सशक्तिकरण
- Essay: भारत में शहरी और ग्रामीण गतिशीलता का भविष्य, डिजिटल नवाचार और सार्वजनिक सेवाओं का वितरण
त्वरित पुनरावृत्ति: संसदीय स्थायी समिति की रिपोर्ट समावेशी, डिजिटल और टिकाऊ बस परिवहन को बढ़ावा देने के लिए एक व्यापक रोडमैप प्रस्तुत करती है, जिसमें परमिट सुधार, अवसंरचना विकास, डिजिटलीकरण, सुरक्षा और बेड़े के आधुनिकीकरण पर जोर दिया गया है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
परिवहन, पर्यटन और संस्कृति संबंधी संसदीय स्थायी समिति ने “समावेशी, डिजिटल और टिकाऊ बस परिवहन को सक्षम बनाना: अगली पीढ़ी की गतिशीलता के लिए नीति, विनियमन और सार्वजनिक-निजी भागीदारी” विषय पर अपनी 392वीं रिपोर्ट प्रस्तुत की है। इस रिपोर्ट में बस परिवहन क्षेत्र में सुधार के लिए कई महत्वपूर्ण सिफारिशें की गई हैं, जिनमें अखिल भारतीय यात्री परमिट, राष्ट्रीय बस टर्मिनल प्राधिकरण, राष्ट्रीय बस डिजिटल ग्रिड और बेड़े के आधुनिकीकरण जैसे मुद्दे शामिल हैं।
पृष्ठभूमि
- भारत में बस परिवहन सार्वजनिक परिवहन का एक महत्वपूर्ण साधन है, जो लाखों लोगों को दैनिक आवागमन की सुविधा प्रदान करता है।
- वर्तमान बस परिवहन प्रणाली विभिन्न राज्यों में अलग-अलग नियमों, परमिटों और अवसंरचनात्मक कमियों से ग्रस्त है, जिससे यात्रियों और ऑपरेटरों दोनों को असुविधा होती है।
- डिजिटल प्रौद्योगिकियों को अपनाने और टिकाऊ परिवहन समाधानों को एकीकृत करने की आवश्यकता महसूस की जा रही है ताकि दक्षता, सुरक्षा और पहुंच में सुधार किया जा सके।
- संसदीय स्थायी समितियाँ (Parliamentary Standing Committees) संसद के कामकाज में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं, मंत्रालयों और विभागों के कामकाज की गहन जांच करती हैं और नीतिगत सिफारिशें करती हैं।
- सार्वजनिक-निजी भागीदारी (Public-Private Partnership – PPP) मॉडल को परिवहन अवसंरचना के विकास और संचालन में तेजी लाने के लिए एक प्रभावी तंत्र के रूप में देखा जाता है।
- सरकार ने इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने और पुराने वाहनों को स्क्रैप करने के लिए नीतियां पेश की हैं, जिनका उद्देश्य वायु प्रदूषण को कम करना और ऊर्जा सुरक्षा में सुधार करना है।
संसदीय स्थायी समिति की प्रमुख सिफारिशें क्या हैं?
- अखिल भारतीय यात्री परमिट: मौजूदा अखिल भारतीय पर्यटक परमिट को एक वर्ष के भीतर अखिल भारतीय यात्री परमिट से प्रतिस्थापित किया जाए, जिसमें इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों से निगरानी और सीमा चौकियों को समाप्त करने पर जोर दिया गया है।
- राष्ट्रीय बस टर्मिनल प्राधिकरण: हवाईअड्डा प्राधिकरण के मॉडल पर एक समर्पित टर्मिनल प्राधिकरण का गठन किया जाए, जो बस संचालन से टर्मिनल के स्वामित्व को अलग करे और एक वर्ष के भीतर बस टर्मिनलों के लिए एक राष्ट्रीय संहिता तैयार करे।
- राष्ट्रीय बस डिजिटल ग्रिड: एक वर्ष के भीतर अंतरसंचालनीयता मानकों को अधिसूचित किया जाए, जिसमें सार्वजनिक लाइव-ट्रैकिंग, एकीकृत बुकिंग, क्राउडसोर्स्ड रेटिंग प्रणाली और जीआईएस-आधारित नेटवर्क एटलस शामिल हो।
- संचालक-केंद्रित सुरक्षा: छह महीने के भीतर स्वचालित परीक्षण स्टेशनों के लिए जिलावार योजना, अग्नि सुरक्षा, आपातकालीन चेतावनी प्रणाली और परमिट नवीनीकरण के समय संचालक सुरक्षा रेटिंग को ध्यान में रखना सुनिश्चित किया जाए।
- फ्लीट ट्रांजिशन कॉम्पैक्ट: पंजीकृत स्क्रैपिंग सुविधाओं पर स्क्रैप-एंड-लीज के माध्यम से बसों के संचालन की सुविधा प्रदान की जाए, इलेक्ट्रिक बसों के लिए एक समयबद्ध योजना और चार्जिंग व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| अखिल भारतीय यात्री परमिट | पूरे देश में बस यात्रा को सुव्यवस्थित करेगा, अंतर-राज्यीय बाधाओं को कम करेगा। |
| राष्ट्रीय बस टर्मिनल प्राधिकरण | बस टर्मिनलों के प्रबंधन को मानकीकृत करेगा, यात्रियों के अनुभव को बेहतर बनाएगा। |
| राष्ट्रीय बस डिजिटल ग्रिड | डिजिटल एकीकरण के माध्यम से बस सेवाओं की दक्षता और पारदर्शिता बढ़ाएगा। |
| संचालक-केंद्रित सुरक्षा | यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए बसों में सुरक्षा मानकों को मजबूत करेगा। |
| फ्लीट ट्रांजिशन कॉम्पैक्ट | इलेक्ट्रिक बसों को अपनाने और पुराने वाहनों को स्क्रैप करने को बढ़ावा देकर स्थिरता को बढ़ावा देगा। |
| महिलाओं के लिए, महिलाओं द्वारा संचालित सेवाएं | महिला यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा में सुधार करेगा, महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देगा। |
महत्व
आर्थिक महत्व
- बेहतर बस परिवहन से व्यापार और वाणिज्य को बढ़ावा मिलेगा, जिससे आर्थिक संवृद्धि (Economic Growth) होगी।
- पर्यटन क्षेत्र को बढ़ावा मिलेगा, जिससे राजस्व और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।
- डिजिटल समाधानों के माध्यम से परिचालन लागत में कमी आएगी, जिससे परिवहन क्षेत्र की लाभप्रदता बढ़ेगी।
सामाजिक महत्व
- सार्वजनिक परिवहन की पहुंच और गुणवत्ता में सुधार से नागरिकों के जीवन स्तर में सुधार होगा।
- महिलाओं के लिए सुरक्षित और सुविधाजनक परिवहन विकल्प उपलब्ध होने से उनकी गतिशीलता और भागीदारी बढ़ेगी।
- समावेशी बस परिवहन से समाज के सभी वर्गों, विशेषकर ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों के लोगों को लाभ होगा।
पर्यावरणीय महत्व
- इलेक्ट्रिक बसों को अपनाने से कार्बन उत्सर्जन (Carbon Emission) में कमी आएगी, जिससे वायु प्रदूषण नियंत्रित होगा।
- पुराने वाहनों को स्क्रैप करने से पर्यावरणीय क्षति कम होगी और संसाधनों का बेहतर उपयोग होगा।
- टिकाऊ परिवहन समाधानों से जलवायु परिवर्तन (Climate Change) के प्रभावों को कम करने में मदद मिलेगी।
शासन और नीतिगत महत्व
- राष्ट्रीय नीतियां और प्राधिकरण स्थापित करने से परिवहन क्षेत्र में बेहतर विनियमन और मानकीकरण आएगा।
- सार्वजनिक-निजी भागीदारी (Public-Private Partnership) मॉडल से बुनियादी ढांचे के विकास में निवेश को बढ़ावा मिलेगा।
- डिजिटल ग्रिड और नागरिक सतर्कता चैनल पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाएंगे।
चुनौतियाँ
1. बुनियादी ढांचे का अभाव
- आधुनिक बस टर्मिनलों और चार्जिंग स्टेशनों की कमी, विशेषकर छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में।
- मौजूदा बुनियादी ढांचे का उन्नयन और रखरखाव एक बड़ी चुनौती है।
यूपीएससी लिंक: बुनियादी ढांचा, परिवहन
2. वित्तीय बाधाएँ
- इलेक्ट्रिक बसों और डिजिटल प्रणालियों में निवेश के लिए पर्याप्त वित्तपोषण की आवश्यकता।
- निजी ऑपरेटरों के लिए उच्च प्रारंभिक लागत और वित्तीय प्रोत्साहन की कमी।
यूपीएससी लिंक: आर्थिक विकास, निवेश मॉडल
3. तकनीकी एकीकरण
- विभिन्न ऑपरेटरों और राज्यों के बीच अंतरसंचालनीयता (Interoperability) मानकों को स्थापित करना।
- डिजिटल ग्रिड और ट्रैकिंग प्रणालियों के लिए डेटा सुरक्षा और गोपनीयता सुनिश्चित करना।
यूपीएससी लिंक: विज्ञान और प्रौद्योगिकी, ई-गवर्नेंस
4. नियामक और नीतिगत चुनौतियाँ
- मौजूदा कानूनों और विनियमों को अद्यतन करना और उन्हें नई सिफारिशों के अनुरूप बनाना।
- राज्यों के बीच समन्वय स्थापित करना और नीतियों के प्रभावी कार्यान्वयन को सुनिश्चित करना।
यूपीएससी लिंक: शासन, सार्वजनिक नीति
5. मानव संसाधन और प्रशिक्षण
- महिला बस चालकों और कर्मचारियों के लिए प्रशिक्षण और कौशल विकास कार्यक्रमों की आवश्यकता।
- डिजिटल प्रणालियों के संचालन और रखरखाव के लिए कुशल कार्यबल की कमी।
यूपीएससी लिंक: मानव संसाधन विकास, कौशल विकास
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| अखिल भारतीय परमिट का कार्यान्वयन | राज्यों के बीच समन्वय की कमी और इलेक्ट्रॉनिक निगरानी प्रणालियों को स्थापित करने में देरी। |
| राष्ट्रीय बस टर्मिनल प्राधिकरण का गठन | भूमि अधिग्रहण, वित्तपोषण और विभिन्न हितधारकों के बीच सहमति प्राप्त करना। |
| राष्ट्रीय बस डिजिटल ग्रिड का विकास | डेटा मानकीकरण, गोपनीयता के मुद्दे और छोटे ऑपरेटरों की डिजिटल साक्षरता। |
| संचालक-केंद्रित सुरक्षा मानकों का पालन | मौजूदा बेड़े में रेट्रोफिटमेंट की उच्च लागत और नियमित निरीक्षण की कमी। |
| फ्लीट ट्रांजिशन कॉम्पैक्ट | इलेक्ट्रिक बसों की उच्च खरीद लागत, चार्जिंग बुनियादी ढांचे की कमी और स्क्रैपिंग सुविधाओं की उपलब्धता। |
| महिलाओं के लिए सेवाओं का विस्तार | महिला चालकों की भर्ती, प्रशिक्षण और सुरक्षा सुनिश्चित करना, विशेषकर रात की पाली में। |
आगे की राह
- एक वर्ष के भीतर अखिल भारतीय यात्री परमिट प्रणाली को पूरी तरह से इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से लागू किया जाए, जिसमें सीमा चौकियों को समाप्त करना और घायल यात्री के दावों को विवादमुक्त बनाना शामिल हो।
- हवाईअड्डा प्राधिकरण के मॉडल पर एक समर्पित राष्ट्रीय बस टर्मिनल प्राधिकरण का गठन किया जाए और एक वर्ष के भीतर बस टर्मिनलों के लिए एक राष्ट्रीय संहिता विकसित की जाए।
- छह महीने के भीतर अंतरसंचालनीयता मानकों को अधिसूचित किया जाए और एक राष्ट्रीय बस डिजिटल ग्रिड विकसित किया जाए, जिसमें सार्वजनिक लाइव-ट्रैकिंग, एकीकृत बुकिंग और नागरिक सतर्कता चैनल शामिल हों।
- छह महीने के भीतर स्वचालित परीक्षण स्टेशनों के लिए जिलावार पूर्णता योजना लागू की जाए और प्रत्येक फिटनेस परीक्षण पर अग्नि सुरक्षा और निकास उपकरणों का सत्यापन सुनिश्चित किया जाए।
- इलेक्ट्रिक बसों को अपनाने के लिए एक समयबद्ध योजना बनाई जाए, जिसमें ऑपरेटरों को पंजीकृत स्क्रैपिंग सुविधाओं पर स्क्रैप-एंड-लीज के माध्यम से बसों का संचालन करने की सुविधा दी जाए।
- छह महीने के भीतर महिला बस चालकों और महिला कर्मचारियों द्वारा संचालित व्यस्त समय की सेवाओं का एक कार्यक्रम शुरू किया जाए और नई बसों में सीसीटीवी कैमरे लगाना अनिवार्य किया जाए।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
समावेशी बस परिवहन · डिजिटल गतिशीलता · सार्वजनिक-निजी भागीदारी · राष्ट्रीय बस टर्मिनल प्राधिकरण · राष्ट्रीय बस डिजिटल ग्रिड · अखिल भारतीय यात्री परमिट · फ्लीट ट्रांजिशन कॉम्पैक्ट · महिला-केंद्रित सेवाएं · संसदीय स्थायी समिति · सड़क परिवहन नीति
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 19(1)(d)’, ‘note’: ‘पूरे भारत में स्वतंत्र रूप से घूमने का अधिकार’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 246’, ‘note’: ‘संघ और राज्यों के बीच विधायी शक्तियों का वितरण’}
- {‘article’: ‘सातवीं अनुसूची’, ‘note’: ‘सड़क परिवहन समवर्ती सूची का विषय’}
अवधारणा प्रवाह
संसदीय समिति की रिपोर्ट → नीतिगत सिफारिशें (परमिट, टर्मिनल, डिजिटल ग्रिड) → बेहतर बस परिवहन प्रणाली का विकास → आर्थिक संवृद्धि, सामाजिक समावेशन, पर्यावरणीय स्थिरता → नागरिकों के लिए बेहतर गतिशीलता और जीवन की गुणवत्ता
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. परिवहन, पर्यटन और संस्कृति संबंधी संसदीय स्थायी समिति की 392वीं रिपोर्ट के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
1. रिपोर्ट का विषय ‘समावेशी, डिजिटल और टिकाऊ बस परिवहन को सक्षम बनाना: अगली पीढ़ी की गतिशीलता के लिए नीति, विनियमन और सार्वजनिक-निजी भागीदारी’ था।
2. रिपोर्ट में अखिल भारतीय पर्यटक परमिट को अखिल भारतीय यात्री परमिट से बदलने की सिफारिश की गई है।
3. समिति ने राष्ट्रीय बस टर्मिनल प्राधिकरण के गठन का सुझाव दिया है, जो हवाईअड्डा प्राधिकरण के मॉडल पर आधारित होगा।
उपरोक्त में से कितने कथन सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: सभी तीन — कथन 1 सही है क्योंकि रिपोर्ट का विषय समावेशी, डिजिटल और टिकाऊ बस परिवहन पर केंद्रित था। कथन 2 सही है क्योंकि रिपोर्ट में अखिल भारतीय पर्यटक परमिट को एक वर्ष के भीतर अखिल भारतीय यात्री परमिट से प्रतिस्थापित करने की सिफारिश की गई है। कथन 3 सही है क्योंकि समिति ने हवाईअड्डा प्राधिकरण के मॉडल पर एक समर्पित राष्ट्रीय बस टर्मिनल प्राधिकरण के गठन का सुझाव दिया है।
Q2. निम्नलिखित में से कौन-सी सिफारिशें परिवहन, पर्यटन और संस्कृति संबंधी संसदीय स्थायी समिति की 392वीं रिपोर्ट में शामिल हैं?
1. राष्ट्रीय बस डिजिटल ग्रिड के लिए अंतरसंचालनीयता मानकों को अधिसूचित करना।
2. वाणिज्यिक परमिट धारकों के लिए चरणबद्ध और अनिवार्य भागीदारी के साथ एक नियंत्रित क्राउडसोर्स्ड रेटिंग प्रणाली।
3. महिलाओं के लिए, महिलाओं द्वारा संचालित व्यस्त समय की बस सेवाओं का कार्यक्रम शुरू करना।
4. प्रत्येक फिटनेस परीक्षण पर अग्नि सुरक्षा और निकास उपकरणों का सत्यापन।
सही विकल्प चुनें:
- केवल 1 और 2
- केवल 2 और 3
- केवल 1, 3 और 4
- 1, 2, 3 और 4
उत्तर: 1, 2, 3 और 4 — कथन 1, 3 और 4 सही हैं। रिपोर्ट में राष्ट्रीय बस डिजिटल ग्रिड के लिए अंतरसंचालनीयता मानकों को अधिसूचित करने, महिलाओं के लिए, महिलाओं द्वारा संचालित व्यस्त समय की बस सेवाओं का कार्यक्रम शुरू करने और प्रत्येक फिटनेस परीक्षण पर अग्नि सुरक्षा और निकास उपकरणों का सत्यापन करने की सिफारिश की गई है। हालांकि, रिपोर्ट में वाणिज्यिक परमिट धारकों के लिए अनिवार्य भागीदारी के साथ एक नियंत्रित क्राउडसोर्स्ड रेटिंग प्रणाली का उल्लेख है, लेकिन यह स्पष्ट रूप से ‘चरणबद्ध और अनिवार्य भागीदारी’ के रूप में नहीं है, बल्कि ‘चरणबद्ध भागीदारी और अनिवार्य भागीदारी’ के रूप में है। इसलिए, कथन 2 पूरी तरह से सटीक नहीं है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ परिवहन, पर्यटन और संस्कृति संबंधी संसदीय स्थायी समिति की 392वीं रिपोर्ट में ‘समावेशी, डिजिटल और टिकाऊ बस परिवहन’ को सक्षम बनाने के लिए की गई प्रमुख सिफारिशों का आलोचनात्मक परीक्षण कीजिए। इस संदर्भ में, भारत में सार्वजनिक बस परिवहन के आधुनिकीकरण में सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) की भूमिका का मूल्यांकन कीजिए। (15 Marks)
रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. परिचय: संसदीय स्थायी समिति की रिपोर्ट और उसके मुख्य विषय ‘समावेशी, डिजिटल और टिकाऊ बस परिवहन’ का संक्षिप्त उल्लेख।
2. रिपोर्ट की प्रमुख सिफारिशें: निम्नलिखित बिंदुओं को विस्तार से समझाएं:
क. अखिल भारतीय यात्री परमिट: इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से पूर्ण कार्यान्वयन, निगरानी केंद्र, सीमा चौकियों का उन्मूलन।
ख. राष्ट्रीय बस टर्मिनल प्राधिकरण: हवाईअड्डा प्राधिकरण मॉडल पर आधारित, टर्मिनल स्वामित्व को बस संचालन से अलग करना, राष्ट्रीय संहिता।
ग. राष्ट्रीय बस डिजिटल ग्रिड: अंतरसंचालनीयता मानक, एकीकृत बुकिंग, लाइव-ट्रैकिंग, क्राउडसोर्स्ड रेटिंग, GIS-आधारित नेटवर्क एटलस।
घ. संचालक-केंद्रित सुरक्षा: स्वचालित परीक्षण स्टेशन, अग्नि सुरक्षा, निकास उपकरणों का सत्यापन, आपातकालीन चेतावनी प्रणाली।
ङ. फ्लीट ट्रांजिशन कॉम्पैक्ट: स्क्रैप-एंड-लीज मॉडल, इलेक्ट्रिक बसों के लिए योजना, चार्जिंग व्यवस्था, क्षेत्रीय विनिर्माण क्लस्टर।
च. महिला-केंद्रित सेवाएं: महिला चालकों द्वारा संचालित सेवाएं, CCTV, अलर्ट सिस्टम, बसों में शौचालयों का मानकीकरण।
3. आलोचनात्मक परीक्षण: सिफारिशों की व्यवहार्यता, कार्यान्वयन में चुनौतियाँ (जैसे वित्तपोषण, राज्यों के साथ समन्वय, तकनीकी अवसंरचना, डेटा गोपनीयता) और संभावित लाभों (दक्षता, सुरक्षा, पहुँच, पर्यावरण संरक्षण) पर चर्चा।
4. सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) की भूमिका: भारत में सार्वजनिक बस परिवहन के आधुनिकीकरण में PPP मॉडल की क्षमता का मूल्यांकन करें। उदाहरण के लिए, बुनियादी ढाँचा विकास (बस टर्मिनल), प्रौद्योगिकी एकीकरण (डिजिटल ग्रिड), फ्लीट आधुनिकीकरण (इलेक्ट्रिक बसें) और सेवा वितरण में PPP की भूमिका। इसके लाभ (पूंजी निवेश, विशेषज्ञता, दक्षता) और चुनौतियाँ (नियामक ढाँचा, जोखिम साझाकरण, सेवा गुणवत्ता) पर प्रकाश डालें।
5. निष्कर्ष: समावेशी, डिजिटल और टिकाऊ बस परिवहन के लिए इन सिफारिशों के समग्र महत्व और PPP के प्रभावी कार्यान्वयन की आवश्यकता पर बल देते हुए एक संतुलित निष्कर्ष।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
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