03 Aug पश्चिम बंगाल में समग्र शिक्षा योजना: सीएजी रिपोर्ट में बड़े पैमाने पर ड्रॉपआउट और शिक्षक की कमी
✎ समग्र शिक्षा योजना पूर्व-विद्यालय से कक्षा 12 तक स्कूली शिक्षा के सभी स्तरों को कवर करने वाली एक एकीकृत योजना है, जिसका उद्देश्य समावेशी और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करना है, लेकिन पश्चिम बंगाल में CAG रिपोर्ट ने इसके…
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — सामाजिक न्याय (शिक्षा, मानव संसाधन) | GS Paper II — शासन (सरकारी नीतियों और हस्तक्षेपों का प्रदर्शन) | GS Paper III — भारतीय अर्थव्यवस्था (मानव पूंजी निर्माण)
- Prelims: समग्र शिक्षा योजना, CAG रिपोर्ट, शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE), छात्र-शिक्षक अनुपात (PTR), स्कूल छोड़ने की दर, केंद्र प्रायोजित योजनाएँ
- Essay: भारत में शिक्षा के अधिकार की चुनौतियाँ और समाधान, मानव पूंजी निर्माण में शिक्षा की भूमिका, संघवाद और केंद्र-राज्य वित्तीय संबंध
त्वरित पुनरावृत्ति: समग्र शिक्षा योजना पूर्व-विद्यालय से कक्षा 12 तक स्कूली शिक्षा के सभी स्तरों को कवर करने वाली एक एकीकृत योजना है, जिसका उद्देश्य समावेशी और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करना है, लेकिन पश्चिम बंगाल में CAG रिपोर्ट ने इसके कार्यान्वयन में गंभीर कमियों को उजागर किया है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की एक प्रदर्शन ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार, पश्चिम बंगाल में समग्र शिक्षा योजना (Samagra Shiksha Scheme) का कार्यान्वयन उच्च ड्रॉपआउट दर, शिक्षकों की कमी और केंद्रीय निधियों के खराब उपयोग से प्रभावित हुआ है। ऑडिट में ऊपरी प्राथमिक और उच्च माध्यमिक स्तरों के बीच 28 से 42 प्रतिशत तक का भारी संक्रमण नुकसान (transition loss) उजागर किया गया है।
पृष्ठभूमि
- CAG ऑडिट रिपोर्ट ने 2019-20 से 2023-24 तक राज्य में समग्र शिक्षा योजना के कार्यान्वयन की जांच की।
- सर्वेक्षण किए गए छात्रों के स्कूल छोड़ने के मुख्य कारणों में वित्तीय बाधाएँ (53%), प्रारंभिक विवाह (12%), काम के लिए पलायन (13%) और छात्रों की पढ़ाई जारी रखने की अनिच्छा (14%) शामिल थे।
- रिपोर्ट में बताया गया है कि राज्य के 8% (5,152) स्कूल केवल एक शिक्षक के साथ चल रहे थे, जिससे 1,76,491 छात्र प्रभावित हुए, और 520 स्कूलों में कोई शिक्षक नहीं था, जिससे 8,596 छात्रों की शिक्षा प्रभावित हुई।
- 40,530 प्रधानाध्यापकों को 150 से कम छात्रों वाले स्कूलों में तैनात किया गया था, जो शिक्षा का अधिकार (RTE) अधिनियम के तैनाती मानदंडों का उल्लंघन है।
- प्राथमिक विद्यालयों में 29% और ऊपरी प्राथमिक विद्यालयों में 30% न्यूनतम छात्र-शिक्षक अनुपात (Pupil-Teacher Ratio – PTR) मानदंडों को पूरा करने में विफल रहे, जबकि उच्च माध्यमिक स्तर पर 79% स्कूलों में निर्धारित PTR सीमा से अधिक छात्र थे।
- योजना निधि का उपयोग राज्य में पांच साल की अवधि में 46 से 65 प्रतिशत के निम्न स्तर पर रहा।
समग्र शिक्षा योजना क्या है?
- समग्र शिक्षा योजना शिक्षा मंत्रालय (Ministry of Education) की एक एकीकृत योजना है, जिसे स्कूली शिक्षा के लिए एक व्यापक कार्यक्रम के रूप में 2018-19 में शुरू किया गया था।
- यह योजना पूर्व-विद्यालय से लेकर कक्षा 12 तक स्कूली शिक्षा के सभी स्तरों को कवर करती है।
- इसका उद्देश्य स्कूली शिक्षा को समावेशी और न्यायसंगत बनाना, शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार करना और छात्रों के सीखने के परिणामों को बढ़ाना है।
- यह योजना सर्व शिक्षा अभियान (SSA), राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान (RMSA) और शिक्षक शिक्षा (TE) की तीन पूर्ववर्ती योजनाओं को समाहित करती है।
- योजना का मुख्य उद्देश्य शिक्षा के अधिकार (Right to Education – RTE) अधिनियम, 2009 के प्रावधानों को लागू करने में राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों की सहायता करना है।
- यह योजना केंद्र प्रायोजित है, जिसमें केंद्र और राज्य सरकारों के बीच एक विशिष्ट अनुपात में लागत साझा की जाती है (सामान्यतः 60:40, पूर्वोत्तर और हिमालयी राज्यों के लिए 90:10)।
- इसके प्रमुख घटकों में प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल और शिक्षा, मूलभूत साक्षरता और संख्या ज्ञान, शिक्षकों का व्यावसायिक विकास, डिजिटल शिक्षा, खेल और शारीरिक शिक्षा, व्यावसायिक शिक्षा और स्कूल के बुनियादी ढांचे का विकास शामिल हैं।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| उच्च ड्रॉपआउट दर | यह शिक्षा प्रणाली की अक्षमताओं और सामाजिक-आर्थिक बाधाओं को दर्शाता है, जिससे मानव पूंजी का नुकसान होता है। |
| शिक्षकों की कमी | यह शिक्षा की गुणवत्ता को सीधे प्रभावित करता है और छात्रों के सीखने के परिणामों पर नकारात्मक प्रभाव डालता है। |
| निधियों का कम उपयोग | यह योजना के उद्देश्यों को प्राप्त करने में बाधा डालता है और आवश्यक शैक्षिक बुनियादी ढांचे के विकास को रोकता है। |
| छात्र-शिक्षक अनुपात (PTR) में असंतुलन | यह शिक्षा के अधिकार (RTE) अधिनियम के मानदंडों का उल्लंघन करता है और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तक पहुंच को प्रभावित करता है। |
| वित्तीय बाधाएँ और प्रारंभिक विवाह | ये सामाजिक-आर्थिक कारक शिक्षा तक पहुंच में प्रमुख बाधाएँ हैं, खासकर लड़कियों और वंचित वर्गों के लिए। |
महत्व
सामाजिक महत्व
- उच्च ड्रॉपआउट दरें समाज में असमानताओं को बढ़ाती हैं, जिससे वंचित वर्गों के लिए शिक्षा तक पहुंच और अवसरों में कमी आती है।
- गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की कमी से सामाजिक गतिशीलता बाधित होती है और गरीबी का दुष्चक्र जारी रहता है।
आर्थिक महत्व
- शिक्षा में निवेश की कमी और ड्रॉपआउट दरों का उच्च होना भविष्य के कार्यबल की उत्पादकता को कम करता है, जिससे आर्थिक संवृद्धि (Economic Growth) धीमी होती है।
- मानव पूंजी के विकास में बाधाएँ देश की समग्र प्रतिस्पर्धात्मकता पर नकारात्मक प्रभाव डालती हैं।
शासनिक महत्व
- CAG रिपोर्ट सरकारी योजनाओं के कार्यान्वयन में पारदर्शिता और जवाबदेही की कमी को उजागर करती है।
- निधियों के अप्रभावी उपयोग और योजना के लक्ष्यों को प्राप्त करने में विफलता शासन की अक्षमता को दर्शाती है।
चुनौतियाँ
1. शिक्षा तक पहुंच और समानता
- वित्तीय बाधाओं, प्रारंभिक विवाह और काम के लिए पलायन के कारण छात्रों का स्कूल छोड़ना एक बड़ी चुनौती है।
- ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच शिक्षा के अवसरों में असमानताएँ अभी भी बनी हुई हैं।
यूपीएससी लिंक: सामाजिक न्याय: शिक्षा, मानव संसाधन
2. शिक्षा की गुणवत्ता
- शिक्षकों की भारी कमी और छात्र-शिक्षक अनुपात में असंतुलन शिक्षा की गुणवत्ता को गंभीर रूप से प्रभावित करता है।
- बुनियादी ढांचे की कमी और अपर्याप्त शिक्षण सामग्री भी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा में बाधा डालती है।
यूपीएससी लिंक: सामाजिक न्याय: शिक्षा, मानव संसाधन
3. योजना कार्यान्वयन और वित्तीय प्रबंधन
- समग्र शिक्षा योजना (Samagra Shiksha Scheme) के तहत निधियों का कम उपयोग और उनके जारी होने में देरी कार्यान्वयन में बड़ी बाधाएँ हैं।
- राज्यों और केंद्र सरकारों के बीच समन्वय की कमी भी योजना के प्रभावी कार्यान्वयन को प्रभावित करती है।
यूपीएससी लिंक: शासन: सरकारी नीतियाँ और हस्तक्षेप
4. मानव संसाधन प्रबंधन
- शिक्षकों की तैनाती में असंतुलन, जहाँ कुछ स्कूलों में शिक्षक नहीं हैं और अन्य में आवश्यकता से अधिक हैं, एक गंभीर मुद्दा है।
- शिक्षकों के प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण में कमी भी शिक्षा की गुणवत्ता को प्रभावित करती है।
यूपीएससी लिंक: मानव संसाधन विकास
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| उच्च ड्रॉपआउट दर (28-42%) | यह शिक्षा प्रणाली की विफलता और सामाजिक-आर्थिक असमानताओं को दर्शाता है, जिससे बच्चों का भविष्य प्रभावित होता है। |
| शिक्षकों की भारी कमी (31,684 प्राथमिक, 2,058 उच्च प्राथमिक) | यह शिक्षा की गुणवत्ता को सीधे प्रभावित करता है और छात्रों के सीखने के परिणामों को कमजोर करता है। |
| निधियों का कम उपयोग (46-65%) | यह योजना के उद्देश्यों को प्राप्त करने में बाधा डालता है और शैक्षिक बुनियादी ढांचे के विकास को रोकता है, जिससे केंद्रीय निधि में ₹2,428 करोड़ की कमी हुई। |
| छात्र-शिक्षक अनुपात (PTR) में असंतुलन | यह शिक्षा के अधिकार (RTE) अधिनियम के मानदंडों का उल्लंघन करता है और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तक पहुंच को प्रभावित करता है। |
| 520 स्कूलों में कोई शिक्षक नहीं | यह 8,596 छात्रों की शिक्षा को सीधे बाधित करता है और शिक्षा के मौलिक अधिकार का उल्लंघन है। |
| वित्तीय बाधाएँ, प्रारंभिक विवाह, पलायन | ये सामाजिक-आर्थिक कारक शिक्षा तक पहुंच में प्रमुख बाधाएँ हैं, खासकर लड़कियों और वंचित वर्गों के लिए। |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- समग्र शिक्षा योजना (Samagra Shiksha Scheme)
- शिक्षा का अधिकार (Right to Education – RTE) अधिनियम
आगे की राह
- ड्रॉपआउट दरों को कम करने के लिए लक्षित हस्तक्षेप जैसे वित्तीय सहायता, छात्रवृत्ति और परामर्श कार्यक्रम शुरू किए जाएँ।
- शिक्षकों की कमी को दूर करने के लिए तत्काल भर्ती अभियान चलाए जाएँ और शिक्षकों की तैनाती में संतुलन सुनिश्चित किया जाए।
- निधियों के प्रभावी उपयोग के लिए एक मजबूत वित्तीय प्रबंधन प्रणाली विकसित की जाए और निधियों के जारी होने में देरी को कम किया जाए।
- शिक्षा के अधिकार (RTE) अधिनियम के तहत निर्धारित छात्र-शिक्षक अनुपात (PTR) मानदंडों का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाए।
- स्कूलों में बुनियादी ढांचे के विकास के लिए स्वीकृत सिविल कार्यों का समय पर निष्पादन सुनिश्चित किया जाए।
- प्रारंभिक विवाह और काम के लिए पलायन जैसे सामाजिक-आर्थिक कारकों को संबोधित करने के लिए जागरूकता कार्यक्रम और सामुदायिक भागीदारी को बढ़ावा दिया जाए।
- केंद्र और राज्य सरकारों के बीच समन्वय में सुधार किया जाए ताकि योजना के कार्यान्वयन को सुचारू बनाया जा सके।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
समग्र शिक्षा योजना · CAG रिपोर्ट · ड्रॉपआउट दर · शिक्षक-छात्र अनुपात · निधियों का कुप्रबंधन · शिक्षा का अधिकार अधिनियम · राजकोषीय अनुशासन · शैक्षिक असमानता · मानव संसाधन विकास · संघवाद और शिक्षा · समावेशी शिक्षा · बुनियादी ढाँचा
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 21A’, ‘note’: ‘शिक्षा का अधिकार’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 45’, ‘note’: ‘बच्चों के लिए निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा’}
अवधारणा प्रवाह
CAG रिपोर्ट में योजना कार्यान्वयन की कमियाँ उजागर → उच्च ड्रॉपआउट दर, शिक्षकों की कमी, निधियों का कम उपयोग → शिक्षा की गुणवत्ता और पहुंच पर नकारात्मक प्रभाव → मानव पूंजी विकास और सामाजिक न्याय में बाधा → दीर्घकालिक आर्थिक संवृद्धि और सामाजिक प्रगति पर असर
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. समग्र शिक्षा योजना के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. यह योजना स्कूली शिक्षा के सभी स्तरों को कवर करती है, जिसमें पूर्व-प्राथमिक से लेकर बारहवीं कक्षा तक शामिल है।
2. इसका उद्देश्य शिक्षा के अधिकार (RTE) अधिनियम, 2009 के कार्यान्वयन का समर्थन करना है।
3. यह केंद्र प्रायोजित योजना है जिसमें केंद्र और राज्य सरकारों के बीच लागत-साझाकरण का प्रावधान है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: सभी तीन — कथन 1 सही है क्योंकि समग्र शिक्षा योजना पूर्व-प्राथमिक से बारहवीं कक्षा तक स्कूली शिक्षा के सभी स्तरों को एकीकृत करती है। कथन 2 भी सही है क्योंकि यह योजना RTE अधिनियम के प्रावधानों को लागू करने में राज्यों का समर्थन करती है। कथन 3 भी सही है क्योंकि यह एक केंद्र प्रायोजित योजना है, जिसमें केंद्र और राज्यों के बीच एक निश्चित अनुपात में लागत साझा की जाती है।
Q2. भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. CAG भारत के संविधान के अनुच्छेद 148 के तहत स्थापित एक संवैधानिक निकाय है।
2. CAG केंद्र और राज्य सरकारों के सभी प्राप्तियों और व्यय का लेखा-परीक्षण करता है।
3. CAG अपनी रिपोर्ट सीधे संसद को प्रस्तुत करता है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है। CAG एक संवैधानिक निकाय है जिसका उल्लेख अनुच्छेद 148 में है। कथन 2 सही है। CAG केंद्र और राज्य सरकारों के सभी प्राप्तियों और व्यय का लेखा-परीक्षण करता है। कथन 3 गलत है। CAG अपनी रिपोर्ट राष्ट्रपति को प्रस्तुत करता है, जो इसे संसद के प्रत्येक सदन के समक्ष रखवाता है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ समग्र शिक्षा योजना के उद्देश्यों को प्राप्त करने में प्रमुख चुनौतियों का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए, जैसा कि हाल ही में CAG रिपोर्ट में उजागर किया गया है। इन चुनौतियों का समाधान करने के लिए क्या उपाय किए जा सकते हैं? (15 Marks)
रूपरेखा: परिचय: समग्र शिक्षा योजना का संक्षिप्त परिचय और इसके प्रमुख उद्देश्य।
मुख्य भाग:
1. CAG रिपोर्ट में उजागर की गई प्रमुख चुनौतियाँ:
– उच्च ड्रॉपआउट दर: वित्तीय बाधाएँ, बाल विवाह, जल्दी कमाई की इच्छा।
– शिक्षकों की कमी: एकल-शिक्षक वाले स्कूल, बिना शिक्षकों वाले स्कूल, प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्तर पर शिक्षक-छात्र अनुपात (PTR) मानदंडों का उल्लंघन।
– निधियों का कुप्रबंधन: केंद्रीय निधियों का कम उपयोग (46-65%), केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा निधियों को जारी करने में देरी, लक्षित हस्तक्षेपों के निष्पादन में देरी।
– बुनियादी ढाँचे का अभाव: स्वीकृत सिविल कार्यों का गैर-निष्पादन, जिसके कारण धन का समर्पण हुआ।
– प्रशासनिक असंतुलन: RTE मानदंडों का उल्लंघन करते हुए कम छात्रों वाले स्कूलों में प्रधानाध्यापकों की तैनाती।
2. इन चुनौतियों के कारण और प्रभाव:
– शैक्षिक परिणामों पर नकारात्मक प्रभाव, शैक्षिक असमानता में वृद्धि, मानव संसाधन विकास में बाधा।
– राजकोषीय अनुशासन की कमी और योजना के उद्देश्यों को प्राप्त करने में विफलता।
सुधारात्मक उपाय:
– ड्रॉपआउट दर को कम करने के लिए: लक्षित वित्तीय सहायता, जागरूकता कार्यक्रम, बाल विवाह रोकथाम, व्यावसायिक शिक्षा को बढ़ावा देना।
– शिक्षक की कमी को दूर करना: शिक्षकों की समय पर भर्ती, तर्कसंगत तैनाती, PTR मानदंडों का पालन सुनिश्चित करना, शिक्षकों के प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण पर ध्यान केंद्रित करना।
– वित्तीय प्रबंधन में सुधार: निधियों के समय पर जारी होने और उपयोग को सुनिश्चित करना, राजकोषीय अनुशासन को बढ़ावा देना, उपयोग प्रमाण-पत्रों को समय पर जमा करना।
– बुनियादी ढाँचे का विकास: सिविल कार्यों के निष्पादन में तेजी लाना, प्रभावी निगरानी तंत्र स्थापित करना।
– प्रशासनिक सुधार: RTE मानदंडों का सख्ती से पालन, शिक्षकों की तैनाती में पारदर्शिता।
निष्कर्ष: समग्र शिक्षा योजना के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए केंद्र और राज्य सरकारों के बीच समन्वय, मजबूत निगरानी और जवाबदेही तंत्र की आवश्यकता पर बल देना, ताकि समावेशी और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित की जा सके।
स्रोत: The Hindu
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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