पीएम आवास योजना-ग्रामीण: पाँच वर्षों में 3.08 करोड़ घरों का लक्ष्य पूरा

पीएम आवास योजना-ग्रामीण: पाँच वर्षों में 3.08 करोड़ घरों का लक्ष्य पूरा

विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper II — सरकार की नीतियाँ और हस्तक्षेप, सामाजिक न्याय  |  GS Paper III — भारतीय अर्थव्यवस्था, समावेशी संवृद्धि
  • Prelims: प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण (PMAY-G), ग्रामीण विकास मंत्रालय, स्वच्छ भारत मिशन-ग्रामीण (SBM-G), महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा), जल जीवन मिशन (JJM), प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (PMUY)
  • Essay: भारत में ग्रामीण विकास और सामाजिक सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं का अभिसरण और समावेशी विकास

त्वरित पुनरावृत्ति: प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण (PMAY-G) ग्रामीण क्षेत्रों में ‘सभी के लिए आवास’ के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए एक महत्वपूर्ण सरकारी पहल है, जो आवास के साथ-साथ स्वच्छता, पेयजल, बिजली और आजीविका के अवसरों को एकीकृत करके समग्र ग्रामीण विकास को बढ़ावा देती है।

यह खबर चर्चा में क्यों?

ग्रामीण विकास मंत्रालय ने हाल ही में प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण (PMAY-G) के अंतर्गत पिछले पाँच वर्षों (2021-22 से 2025-26) में निर्धारित लक्ष्यों की प्राप्ति और योजना के बहुआयामी प्रभावों पर विस्तृत जानकारी जारी की है। इस अवधि के दौरान राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को ₹1,34,242.45 करोड़ की केंद्रीय हिस्सेदारी जारी की गई है, जिससे आवास निर्माण में तेज़ी आई है और लाभार्थियों को विभिन्न अन्य योजनाओं के साथ एकीकृत लाभ प्राप्त हुए हैं।

पृष्ठभूमि

  • यह योजना इंदिरा आवास योजना (IAY) का पुनर्गठन है, जिसमें ग्रामीण क्षेत्रों में कच्चे मकानों में रहने वाले या बेघर परिवारों को मूलभूत सुविधाओं के साथ पक्का मकान उपलब्ध कराने का लक्ष्य है।
  • योजना का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में आवास की कमी को पूरा करना और ग्रामीण गरीबों के जीवन स्तर में सुधार लाना है।
  • केंद्र और राज्य सरकारों के बीच लागत-साझाकरण का पैटर्न मैदानी क्षेत्रों में 60:40 और उत्तर-पूर्वी तथा हिमालयी राज्यों के लिए 90:10 है।
  • योजना के तहत लाभार्थियों का चयन सामाजिक-आर्थिक जाति जनगणना (SECC) 2011 के आंकड़ों का उपयोग करके किया जाता है, जिसमें ग्राम सभा द्वारा सत्यापन किया जाता है।
  • सरकार ने आवास निर्माण में तेज़ी लाने और लक्ष्यों की प्राप्ति सुनिश्चित करने के लिए समय पर लक्ष्य आवंटन, नियमित समीक्षा, डैशबोर्ड निगरानी और ग्रामीण राजमिस्त्री प्रशिक्षण जैसे कई कदम उठाए हैं।

प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण (PMAY-G) क्या है?

  • यह ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा कार्यान्वित एक केंद्र प्रायोजित योजना है, जिसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में पात्र परिवारों को बुनियादी सुविधाओं के साथ पक्का मकान उपलब्ध कराना है।
  • योजना के तहत मैदानी क्षेत्रों में ₹1.20 लाख और पहाड़ी/उत्तर-पूर्वी/दुर्गम क्षेत्रों में ₹1.30 लाख तक की वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है।
  • लाभार्थियों को आवास सहायता के अतिरिक्त, स्वच्छ भारत मिशन-ग्रामीण (SBM-G) के साथ एकीकरण के माध्यम से शौचालय निर्माण के लिए ₹12,000 की वित्तीय सहायता भी मिलती है।
  • महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत अकुशल मजदूरी रोजगार का प्रावधान है, जिससे लाभार्थियों को आवास निर्माण में सहायता मिलती है।
  • जल जीवन मिशन (JJM) और हर घर नल से जल (HGNSJ) जैसी योजनाओं के माध्यम से पाइपलाइन के ज़रिए पेयजल उपलब्ध कराया जाता है।
  • लाभार्थियों को विद्युत मंत्रालय की योजनाओं के माध्यम से बिजली कनेक्शन और प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (PMUY) के तहत LPG कनेक्शन भी उपलब्ध कराए जाते हैं।
  • योजना में लाभार्थी परिवारों की महिला सदस्यों को स्वयं सहायता समूहों (SHG) से जोड़कर उनके सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण को बढ़ावा देने पर भी ज़ोर दिया गया है।
  • विभिन्न प्रतिष्ठित संस्थानों जैसे NIPFP, NIRD&PR, NITI आयोग और IIM-A द्वारा किए गए अध्ययनों ने आवास और समग्र जीवन गुणवत्ता पर योजना के सकारात्मक प्रभावों की पुष्टि की है।

मुख्य विशेषताएँ

Feature Significance
एकीकृत दृष्टिकोण यह योजना केवल आवास निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि स्वच्छ भारत मिशन-ग्रामीण, मनरेगा, जल जीवन मिशन और प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना जैसी अन्य योजनाओं के साथ एकीकृत है। यह लाभार्थियों को शौचालय, पेयजल, बिजली और एलपीजी कनेक्शन जैसी आवश्यक सुविधाएँ प्रदान करती है, जिससे जीवन की समग्र गुणवत्ता में सुधार होता है।
महिला सशक्तिकरण लाभार्थी परिवारों की महिला सदस्यों को स्वयं सहायता समूहों (SHG) से जोड़कर उनके सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण को बढ़ावा दिया जाता है। यह महिलाओं को आर्थिक गतिविधियों में शामिल होने और आत्मनिर्भर बनने का अवसर प्रदान करता है।
रोजगार सृजन मनरेगा के साथ एकीकरण के माध्यम से, लाभार्थियों को आवास निर्माण में अकुशल मजदूरी रोजगार उपलब्ध कराया जाता है। यह ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर पैदा करता है और स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देता है।
वित्तीय सहायता केंद्र सरकार द्वारा राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को पर्याप्त धनराशि जारी की जाती है, जिससे आवास निर्माण में तेजी आती है और निर्धारित लक्ष्यों की प्राप्ति सुनिश्चित होती है। विगत पाँच वर्षों में ₹1,34,242.45 करोड़ की केंद्रीय हिस्सेदारी जारी की गई है।
निगरानी एवं पर्यवेक्षण योजना की प्रगति की नियमित समीक्षा, डैशबोर्ड के माध्यम से निगरानी और मंत्रालय द्वारा राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के साथ नियमित कार्यशालाओं का आयोजन पारदर्शिता और दक्षता सुनिश्चित करता है।
ग्रामीण राजमिस्त्री प्रशिक्षण यह कार्यक्रम ग्रामीण क्षेत्रों में कुशल श्रमिकों की उपलब्धता सुनिश्चित करता है, जिससे आवास निर्माण की गुणवत्ता और गति में सुधार होता है। यह स्थानीय स्तर पर कौशल विकास को भी बढ़ावा देता है।

महत्व

सामाजिक महत्व

  • आवासीय सुरक्षा में वृद्धि: योजना ग्रामीण परिवारों को सुरक्षित और पक्के आवास प्रदान कर आवासीय सुरक्षा सुनिश्चित करती है, जिससे उनके जीवन स्तर में सुधार होता है।
  • जीवन की गुणवत्ता में सुधार: शौचालय, पेयजल, बिजली और एलपीजी कनेक्शन जैसी बुनियादी सुविधाओं के एकीकरण से ग्रामीण परिवारों के स्वास्थ्य, स्वच्छता और समग्र जीवन की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार होता है।
  • महिला सशक्तिकरण: स्वयं सहायता समूहों से जुड़ाव के माध्यम से महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त किया जाता है, जिससे समाज में उनकी भूमिका और निर्णय लेने की क्षमता बढ़ती है।

आर्थिक महत्व

  • रोजगार सृजन: मनरेगा के साथ एकीकरण से आवास निर्माण में अकुशल मजदूरी रोजगार के अवसर पैदा होते हैं, जिससे ग्रामीण आय में वृद्धि होती है और गरीबी कम होती है।
  • आय एवं बचत में वृद्धि: बेहतर आवास और सुविधाओं से परिवारों की उत्पादकता बढ़ती है, जिससे उनकी आय और बचत में वृद्धि होती है, जैसा कि आईआईएम-ए के अध्ययन में पाया गया है।
  • ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बढ़ावा: आवास निर्माण गतिविधियों से स्थानीय सामग्री आपूर्तिकर्ताओं और श्रमिकों को लाभ होता है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति मिलती है।

शासनिक महत्व

  • एकीकृत सेवा वितरण: विभिन्न मंत्रालयों और योजनाओं के साथ एकीकरण एक समग्र और समन्वित सेवा वितरण मॉडल को दर्शाता है, जो सरकारी कार्यक्रमों की दक्षता बढ़ाता है।
  • पारदर्शिता और जवाबदेही: डैशबोर्ड के माध्यम से नियमित निगरानी और समीक्षा, साथ ही राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के साथ कार्यशालाएं, योजना के कार्यान्वयन में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करती हैं।
  • नीति निर्माण में साक्ष्य-आधारित दृष्टिकोण: NIPFP, NIRD&PR, NITI आयोग और IIM-A जैसे संस्थानों द्वारा किए गए मूल्यांकन अध्ययन योजना के प्रभाव का आकलन करने और भविष्य की नीतियों को सूचित करने के लिए महत्वपूर्ण डेटा प्रदान करते हैं।

चुनौतियाँ

1. भूमि की उपलब्धता और स्वामित्व

  • ग्रामीण क्षेत्रों में भूमि विवाद या भूमिहीन परिवारों के लिए भूमि की अनुपलब्धता आवास निर्माण में बाधा डालती है।
  • महिलाओं के नाम पर भूमि स्वामित्व सुनिश्चित करने में भी चुनौतियाँ आती हैं, जो सशक्तिकरण के लक्ष्य को प्रभावित कर सकती हैं।

2. निर्माण सामग्री की लागत और उपलब्धता

  • निर्माण सामग्री (सीमेंट, ईंट, रेत) की बढ़ती कीमतें और दूरदराज के क्षेत्रों में उनकी उपलब्धता एक चुनौती बनी हुई है, जिससे परियोजना लागत बढ़ सकती है।
  • गुणवत्तापूर्ण सामग्री की आपूर्ति सुनिश्चित करना भी एक मुद्दा है।

3. कुशल श्रमिकों की कमी

  • ग्रामीण राजमिस्त्री प्रशिक्षण कार्यक्रम के बावजूद, दूरदराज के क्षेत्रों में कुशल राजमिस्त्री और अन्य निर्माण श्रमिकों की कमी आवास निर्माण की गति और गुणवत्ता को प्रभावित कर सकती है।
  • प्रशिक्षित श्रमिकों का पलायन भी एक चुनौती है।

4. निगरानी और कार्यान्वयन में अंतराल

  • योजना की प्रगति की नियमित समीक्षा और डैशबोर्ड के बावजूद, जमीनी स्तर पर कार्यान्वयन में देरी, भ्रष्टाचार या लाभार्थियों के चयन में अनियमितताओं की संभावना बनी रहती है।
  • दूरदराज के क्षेत्रों में प्रभावी निगरानी सुनिश्चित करना एक चुनौती है।

5. योजनाओं के एकीकरण में समन्वय

  • विभिन्न मंत्रालयों और विभागों के बीच प्रभावी समन्वय सुनिश्चित करना एक चुनौती है ताकि स्वच्छ भारत मिशन-ग्रामीण, मनरेगा, जल जीवन मिशन आदि के लाभ लाभार्थियों तक सुचारू रूप से पहुँच सकें।
  • फंड के प्रवाह और उपयोग में देरी समन्वय की कमी के कारण हो सकती है।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

Issue Concern
भूमि संबंधी मुद्दे भूमिहीन परिवारों के लिए भूमि की अनुपलब्धता और स्वामित्व विवाद।
सामग्री लागत में वृद्धि निर्माण सामग्री की बढ़ती कीमतें और दूरस्थ क्षेत्रों में आपूर्ति श्रृंखला की चुनौतियाँ।
श्रमबल की कमी ग्रामीण क्षेत्रों में कुशल राजमिस्त्री और निर्माण श्रमिकों की अपर्याप्त उपलब्धता।
कार्यान्वयन में देरी जमीनी स्तर पर प्रशासनिक अक्षमता या लालफीताशाही के कारण परियोजना पूर्ण होने में विलंब।
अंतर-विभागीय समन्वय विभिन्न संबद्ध योजनाओं के बीच प्रभावी तालमेल और फंड के सुचारू प्रवाह की कमी।
लाभार्थी चयन में पारदर्शिता पात्र लाभार्थियों की पहचान और चयन प्रक्रिया में संभावित अनियमितताएँ।

सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें

  • स्वच्छ भारत मिशन–ग्रामीण (SBM-G)
  • महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा)
  • जल जीवन मिशन (JJM)
  • प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (PMUY)

आगे की राह

  • भूमिहीन परिवारों के लिए भूमि बैंक स्थापित करना और भूमि स्वामित्व विवादों के त्वरित समाधान के लिए तंत्र विकसित करना।
  • स्थानीय रूप से उपलब्ध और पर्यावरण-अनुकूल निर्माण सामग्री के उपयोग को बढ़ावा देना तथा आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करना।
  • ग्रामीण राजमिस्त्री प्रशिक्षण कार्यक्रमों का विस्तार करना और प्रशिक्षित श्रमिकों के लिए स्थायी रोजगार के अवसर सुनिश्चित करना।
  • योजना के कार्यान्वयन की निगरानी प्रणाली को और अधिक मजबूत करना, विशेषकर दूरदराज के क्षेत्रों में, और शिकायत निवारण तंत्र को प्रभावी बनाना।
  • केंद्र और राज्य सरकारों के बीच तथा विभिन्न संबद्ध मंत्रालयों के बीच समन्वय को और बेहतर बनाना ताकि एकीकृत लाभ सुचारू रूप से पहुँच सकें।
  • लाभार्थी चयन प्रक्रिया को पूरी तरह से पारदर्शी और जवाबदेह बनाना, जिसमें ग्राम सभाओं की भूमिका को और सशक्त किया जा सके।
  • आवासों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए नियमित गुणवत्ता जाँच और तकनीकी सहायता प्रदान करना।
  • आवासों को जलवायु परिवर्तन के प्रति अधिक प्रतिरोधी बनाने के लिए आपदा-रोधी निर्माण तकनीकों को बढ़ावा देना।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण · आवास सुरक्षा · ग्रामीण विकास · एकीकृत दृष्टिकोण · सामाजिक-आर्थिक सशक्तिकरण · स्वच्छ भारत मिशन-ग्रामीण · मनरेगा · जल जीवन मिशन · वित्तीय समावेशन · नीति मूल्यांकन

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 21’, ‘note’: ‘गरिमापूर्ण जीवन का अधिकार’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 38’, ‘note’: ‘लोक कल्याणकारी राज्य की स्थापना’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 46’, ‘note’: ‘कमजोर वर्गों के हितों का संवर्धन’}

अवधारणा प्रवाह

ग्रामीण आवास की कमी  →  प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण का शुभारंभ  →  आवास निर्माण हेतु वित्तीय सहायता और एकीकरण  →  बुनियादी सुविधाओं (शौचालय, जल, बिजली) का प्रावधान  →  जीवन की गुणवत्ता में सुधार और सशक्तिकरण  →  सामाजिक-आर्थिक विकास और गरीबी उन्मूलन

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण (PMAY-G) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. यह योजना केवल ग्रामीण क्षेत्रों में बेघर परिवारों को वित्तीय सहायता प्रदान करती है।
2. इस योजना के तहत लाभार्थियों को शौचालय निर्माण के लिए स्वच्छ भारत मिशन-ग्रामीण (SBM-G) के साथ एकीकरण के माध्यम से अतिरिक्त वित्तीय सहायता मिलती है।
3. लाभार्थियों को पाइपलाइन के ज़रिए पेयजल उपलब्ध कराने के लिए जल जीवन मिशन (JJM) के साथ इसका एकीकरण किया गया है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. सभी तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: सभी तीन — कथन 1 सही नहीं है क्योंकि यह योजना बेघर परिवारों के साथ-साथ कच्चे मकानों में रहने वाले परिवारों को भी पक्के मकान बनाने में सहायता करती है। कथन 2 और 3 सही हैं, क्योंकि PMAY-G का SBM-G और JJM के साथ एकीकरण किया गया है ताकि लाभार्थियों को शौचालय और पेयजल की सुविधा मिल सके।

Q2. प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण (PMAY-G) के कार्यान्वयन में सरकार द्वारा उठाए गए कदमों में निम्नलिखित में से कौन-कौन से शामिल हैं?
1. राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को समय पर लक्ष्य आवंटित करना।
2. प्रगति की नियमित समीक्षा और डैशबोर्ड के माध्यम से निगरानी।
3. ग्रामीण राजमिस्त्री प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन।
4. लाभार्थी परिवारों की महिला सदस्यों को स्वयं सहायता समूहों (SHG) से जोड़ना।
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:

  1. केवल 1, 2 और 3
  2. केवल 2, 3 और 4
  3. केवल 1, 3 और 4
  4. 1, 2, 3 और 4

उत्तर: 1, 2, 3 और 4 — सभी चारों कथन सही हैं। सरकार द्वारा PMAY-G के लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को समय पर लक्ष्य आवंटित करना, प्रगति की नियमित समीक्षा, ग्रामीण राजमिस्त्री प्रशिक्षण कार्यक्रम और महिला स्वयं सहायता समूहों से जोड़ना जैसे अनेक कदम उठाए गए हैं।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण (PMAY-G) केवल एक आवास योजना से कहीं अधिक है, यह ग्रामीण भारत में समग्र सामाजिक-आर्थिक सशक्तिकरण का एक साधन है। इस कथन का समालोचनात्मक विश्लेषण कीजिए और इसके बहुआयामी प्रभावों पर प्रकाश डालिए।

रूपरेखा: प्रश्न के पहले भाग में PMAY-G के एकीकरण दृष्टिकोण पर चर्चा करें, जिसमें स्वच्छ भारत मिशन-ग्रामीण, मनरेगा, जल जीवन मिशन, उज्ज्वला योजना और स्वयं सहायता समूहों के साथ इसके जुड़ाव का उल्लेख करें। दूसरे भाग में, इन एकीकरणों के माध्यम से आवास सुरक्षा, स्वच्छता, स्वास्थ्य, आय वृद्धि, महिला सशक्तिकरण और समग्र जीवन गुणवत्ता पर पड़ने वाले बहुआयामी सकारात्मक प्रभावों का विश्लेषण करें। निष्कर्ष में, योजना की सफलताओं और ग्रामीण विकास में इसके योगदान को संक्षेप में प्रस्तुत करें।

स्रोत: PIB (Press Information Bureau)


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

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