23 Jul पीएम विश्वकर्मा योजना पश्चिम बंगाल में शुरू, पारंपरिक कारीगरों को मिलेगा लाभ
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — सरकार की नीतियाँ और हस्तक्षेप | GS Paper III — भारतीय अर्थव्यवस्था और योजना, संसाधनों का संग्रहण, वृद्धि, विकास और रोज़गार से संबंधित विषय
- Prelims: पीएम विश्वकर्मा योजना, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय, प्रधानमंत्री मुद्रा योजना (PMMY), उद्यम पंजीकरण पोर्टल, कौशल उन्नयन, महिला उद्यमी
- Essay: भारत में समावेशी विकास और उद्यमिता को बढ़ावा देना, पारंपरिक कला और शिल्प का संरक्षण एवं संवर्धन
त्वरित पुनरावृत्ति: पीएम विश्वकर्मा योजना पारंपरिक कारीगरों और शिल्पकारों को कौशल उन्नयन, वित्तीय सहायता और विपणन सहायता प्रदान करके उनके सशक्तिकरण और पारंपरिक व्यवसायों के संरक्षण पर केंद्रित है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय (MSME) पश्चिम बंगाल में राज्य सरकार के सहयोग से पीएम विश्वकर्मा योजना लागू कर रहा है। इस पहल का उद्देश्य पारंपरिक कारीगरों और शिल्पकारों को समग्र सहायता प्रदान करना है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार हो सके और पारंपरिक व्यवसायों को बढ़ावा मिल सके। पश्चिम बंगाल में योजना के क्रियान्वयन के लिए राज्य निगरानी समिति और जिला कार्यान्वयन समितियों का गठन किया गया है।
पृष्ठभूमि
- पीएम विश्वकर्मा योजना 17 सितंबर, 2023 को शुरू की गई थी।
- इस योजना का मुख्य उद्देश्य हाथों और औजारों से काम करने वाले 18 पारंपरिक व्यवसायों के कारीगरों और शिल्पकारों को सहायता प्रदान करना है।
- पश्चिम बंगाल सरकार ने 14 मई, 2026 को योजना के क्रियान्वयन के लिए राज्य निगरानी समिति और जिला कार्यान्वयन समितियों के गठन संबंधी अधिसूचना जारी की।
- प्रधानमंत्री मुद्रा योजना (PMMY) के तहत पश्चिम बंगाल में 8 अप्रैल, 2015 से 26 जून, 2026 तक 5.82 करोड़ ऋण वितरित किए गए, जिनकी कुल राशि 3.55 लाख करोड़ रुपये है।
- सरकार ने महिला उद्यमियों के लिए कई पहलें की हैं, जिनमें उद्यम पंजीकरण पोर्टल, सार्वजनिक खरीद नीति, ऋण गारंटी योजना (CGTMSE) और पीएमईजीपी शामिल हैं।
- एमएसएमई अभिनव योजना के तहत पश्चिम बंगाल में 23 मेजबान संस्थान (HI) अधिकतम 15 लाख रुपये तक की वित्तीय सहायता प्रदान करेंगे।
पीएम विश्वकर्मा योजना क्या है?
- यह योजना 18 पारंपरिक व्यवसायों को कवर करती है, जिनमें बढ़ई, सुनार, कुम्हार, मोची, नाई, दर्जी आदि शामिल हैं।
- योजना के तहत कारीगरों और शिल्पकारों को कौशल प्रशिक्षण, आधुनिक टूलकिट के लिए प्रोत्साहन, बिना गारंटी के ऋण सहायता, डिजिटल लेनदेन के लिए प्रोत्साहन और विपणन सहायता प्रदान की जाती है।
- इसका लक्ष्य पारंपरिक कला और शिल्प को संरक्षित करते हुए कारीगरों की आर्थिक स्थिति में सुधार करना है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| पारंपरिक व्यवसायों का समावेशन | बढ़ई, कुम्हार, सुनार जैसे 18 पारंपरिक व्यवसायों के कारीगरों और शिल्पकारों को लक्षित करता है, जिससे उनकी विशिष्ट आवश्यकताओं को पूरा किया जा सके। |
| समग्र सहायता पैकेज | कौशल प्रशिक्षण, आधुनिक उपकरण, संपार्श्विक-मुक्त ऋण, डिजिटल लेनदेन प्रोत्साहन और विपणन सहायता प्रदान करता है। |
| राज्य सरकारों का सहयोग | पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में राज्य निगरानी और जिला कार्यान्वयन समितियों के माध्यम से योजना का क्रियान्वयन, संघवाद को मजबूत करता है। |
| महिला लाभार्थियों पर विशेष ध्यान | महिला कारीगरों के लिए उच्च मार्जिन मनी सब्सिडी, कम स्व-योगदान और बढ़ी हुई गारंटी कवरेज जैसे प्रोत्साहन शामिल हैं। |
| एमएसएमई नवाचार योजना से जुड़ाव | मेजबान संस्थानों (HI) के माध्यम से नवाचार और उद्यमिता को बढ़ावा देता है, जिससे पारंपरिक कौशल को आधुनिक व्यावसायिक उद्यमों में बदला जा सके। |
महत्व
आर्थिक महत्व
- सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) क्षेत्र को सशक्त बनाता है, जो भारत के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में महत्वपूर्ण योगदान देता है और रोजगार सृजन का एक प्रमुख स्रोत है।
- पारंपरिक कारीगरों और शिल्पकारों की आय में वृद्धि करता है, जिससे ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में आर्थिक असमानता कम होती है।
- कौशल उन्नयन और आधुनिक उपकरणों के माध्यम से इन व्यवसायों की उत्पादकता और प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाता है, जिससे उनके उत्पादों की बाजार पहुंच बेहतर होती है।
सामाजिक महत्व
- पारंपरिक कलाओं और शिल्पों का संरक्षण और संवर्धन करता है, जो भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का अभिन्न अंग हैं।
- महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देता है, विशेष रूप से सुंदरबन जैसी वंचित क्षेत्रों की महिला उद्यमियों को वित्तीय सहायता और कौशल विकास के अवसर प्रदान करके।
- आत्मनिर्भरता और उद्यमिता की भावना को बढ़ावा देता है, जिससे समाज के कमजोर वर्गों को मुख्यधारा की अर्थव्यवस्था में शामिल होने का अवसर मिलता है।
शासनिक महत्व
- केंद्र और राज्य सरकारों के बीच सहयोगात्मक संघवाद (Cooperative Federalism) का एक उदाहरण प्रस्तुत करता है, जहां राज्य सरकारें केंद्रीय योजनाओं के प्रभावी कार्यान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
- डिजिटल लेनदेन को बढ़ावा देकर वित्तीय समावेशन (Financial Inclusion) को मजबूत करता है और औपचारिक अर्थव्यवस्था में भागीदारी बढ़ाता है।
- लक्षित लाभार्थियों तक सीधे लाभ पहुंचाने के लिए एक सुव्यवस्थित तंत्र स्थापित करता है, जिससे योजनाओं की प्रभावशीलता बढ़ती है।
चुनौतियाँ
1. जागरूकता और पहुंच का अभाव
- दूरदराज के क्षेत्रों में कारीगरों और शिल्पकारों के बीच योजना के लाभों और आवेदन प्रक्रिया के बारे में जागरूकता की कमी।
- डिजिटल साक्षरता की कमी के कारण ऑनलाइन आवेदन और डिजिटल लेनदेन में कठिनाई, विशेषकर वृद्ध कारीगरों के लिए।
यूपीएससी लिंक: सामाजिक न्याय: कमजोर वर्गों का उत्थान
2. कौशल उन्नयन और प्रौद्योगिकी अनुकूलन
- पारंपरिक कौशल को आधुनिक बाजार की मांगों के अनुरूप ढालने और नई तकनीकों को अपनाने में प्रतिरोध या कठिनाई।
- गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण बुनियादी ढांचे और प्रशिक्षकों की उपलब्धता सुनिश्चित करना, विशेषकर विभिन्न व्यवसायों के लिए।
यूपीएससी लिंक: मानव संसाधन विकास: कौशल विकास
3. वित्तीय समावेशन और ऋण वितरण
- बैंकों और वित्तीय संस्थानों द्वारा छोटे कारीगरों को ऋण देने में संकोच या प्रक्रियात्मक जटिलताएं।
- बिना गारंटी के ऋण तक पहुंच सुनिश्चित करना और ऋण के दुरुपयोग को रोकना।
यूपीएससी लिंक: अर्थव्यवस्था: वित्तीय समावेशन
4. विपणन और बाजार संपर्क
- छोटे कारीगरों के उत्पादों के लिए बड़े बाजारों तक पहुंच स्थापित करना और बिचौलियों पर निर्भरता कम करना।
- उत्पाद की गुणवत्ता, मानकीकरण और ब्रांडिंग में सहायता प्रदान करना ताकि वे प्रतिस्पर्धा कर सकें।
यूपीएससी लिंक: अर्थव्यवस्था: एमएसएमई क्षेत्र
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| योजना के लाभों की जानकारी | ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में लाभार्थियों तक योजना के बारे में पर्याप्त जानकारी का न पहुंचना। |
| प्रशिक्षण की गुणवत्ता | प्रदान किए गए कौशल प्रशिक्षण की प्रासंगिकता और गुणवत्ता, जो आधुनिक बाजार की आवश्यकताओं को पूरा कर सके। |
| ऋण तक पहुंच | छोटे और सीमांत कारीगरों के लिए बैंकों से संपार्श्विक-मुक्त ऋण प्राप्त करने में नौकरशाही बाधाएं। |
| बाजार संपर्क | कारीगरों के उत्पादों के लिए बड़े और प्रतिस्पर्धी बाजारों तक सीधी पहुंच स्थापित करने में कठिनाई। |
| डिजिटल साक्षरता | डिजिटल लेनदेन और ऑनलाइन पंजीकरण प्रक्रियाओं को समझने और उपयोग करने में कारीगरों की अक्षमता। |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना
- प्रधानमंत्री मुद्रा योजना (PMMY)
- उद्यम पंजीकरण पोर्टल (UR)
- उद्यम सहायता पोर्टल (UAP)
- सूक्ष्म एवं लघु उद्यमों के लिए सार्वजनिक खरीद नीति
- सूक्ष्म एवं लघु उद्यमों के लिए ऋण गारंटी योजना (CGTMSE)
- प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (PMEGP)
- कौशल उन्नयन और महिला नारियल जटा योजना
- खरीद एवं विपणन सहायता (PMS) योजना
- यशस्विनी अभियान
- एमएसएमई नवाचार योजना
आगे की राह
- योजना के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए व्यापक प्रचार अभियान चलाए जाएं, जिसमें स्थानीय भाषाओं और पारंपरिक मीडिया का उपयोग किया जाए।
- कौशल उन्नयन प्रशिक्षण कार्यक्रमों को बाजार की बदलती मांगों के अनुरूप अद्यतन किया जाए और आधुनिक तकनीकों को शामिल किया जाए।
- बैंकों और वित्तीय संस्थानों के साथ समन्वय स्थापित कर ऋण वितरण प्रक्रिया को सरल और तेज बनाया जाए, विशेषकर संपार्श्विक-मुक्त ऋणों के लिए।
- कारीगरों के उत्पादों के लिए ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म और राष्ट्रीय/अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मेलों के माध्यम से बाजार संपर्क बढ़ाया जाए।
- डिजिटल साक्षरता कार्यक्रमों को बढ़ावा दिया जाए ताकि कारीगर डिजिटल लेनदेन और ऑनलाइन सेवाओं का प्रभावी ढंग से उपयोग कर सकें।
- योजना के कार्यान्वयन की नियमित निगरानी और मूल्यांकन किया जाए ताकि कमियों को दूर किया जा सके और सर्वोत्तम प्रथाओं को साझा किया जा सके।
- महिला लाभार्थियों के लिए विशेष सहायता तंत्र और परामर्श सेवाएं स्थापित की जाएं ताकि उनकी उद्यमशीलता क्षमता को पूरी तरह से विकसित किया जा सके।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
पीएम विश्वकर्मा योजना · सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) · पारंपरिक कारीगर और शिल्पकार · उद्यमिता विकास · महिला सशक्तिकरण · कौशल उन्नयन · वित्तीय समावेशन · प्रधानमंत्री मुद्रा योजना (PMMY) · सार्वजनिक खरीद नीति · क्रेडिट गारंटी योजना (CGTMSE) · आत्मनिर्भर भारत · ग्रामीण अर्थव्यवस्था
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 38’, ‘note’: ‘राज्य लोक कल्याण की अभिवृद्धि का प्रयास करेगा’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 39’, ‘note’: ‘आजीविका के पर्याप्त साधनों का अधिकार’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 43’, ‘note’: ‘कर्मकारों के लिए निर्वाह मजदूरी आदि’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 243G’, ‘note’: ‘पंचायतों की शक्तियां, प्राधिकार और उत्तरदायित्व’}
अवधारणा प्रवाह
पारंपरिक कारीगरों की पहचान और पंजीकरण → कौशल उन्नयन प्रशिक्षण और आधुनिक उपकरण → संपार्श्विक-मुक्त ऋण तक पहुंच → डिजिटल लेनदेन और वित्तीय समावेशन → उत्पादों का विपणन और बाजार संपर्क → आय में वृद्धि और जीवन स्तर में सुधार → सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण और संवर्धन
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. पीएम विश्वकर्मा योजना के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. यह योजना केवल शहरी क्षेत्रों में पारंपरिक कारीगरों और शिल्पकारों को सहायता प्रदान करती है।
2. यह 18 पारंपरिक व्यवसायों को कवर करती है, जिनमें बढ़ई, सुनार और कुम्हार शामिल हैं।
3. योजना के तहत लाभार्थियों को बिना गारंटी के ऋण सहायता और डिजिटल लेनदेन के लिए प्रोत्साहन मिलता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
- केवल 1 और 2
- केवल 2 और 3
- केवल 1 और 3
- 1, 2 और 3
उत्तर: केवल 2 और 3 — कथन 1 गलत है क्योंकि पीएम विश्वकर्मा योजना शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों के कारीगरों और शिल्पकारों को समग्र सहायता प्रदान करती है। कथन 2 सही है, यह योजना 18 पारंपरिक व्यवसायों को कवर करती है जिनमें बढ़ई, सुनार, कुम्हार आदि शामिल हैं। कथन 3 भी सही है, योजना के तहत कौशल प्रशिक्षण, टूलकिट प्रोत्साहन, बिना गारंटी के ऋण सहायता और डिजिटल लेनदेन के लिए प्रोत्साहन जैसे लाभ प्रदान किए जाते हैं।
Q2. सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) मंत्रालय द्वारा महिला उद्यमियों के लिए की गई पहलों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. लघु एवं मध्यम उद्यमों के लिए सार्वजनिक खरीद नीति के तहत, केंद्रीय मंत्रालयों को अपनी वार्षिक खरीद का कम से कम 3% महिला स्वामित्व वाले सूक्ष्म एवं लघु उद्यमों से प्राप्त करना अनिवार्य है।
2. सूक्ष्म एवं लघु उद्यमों के लिए ऋण गारंटी योजना (CGTMSE) के तहत, महिला स्वामित्व वाले MSME 90% तक की बढ़ी हुई गारंटी कवरेज के पात्र हैं।
3. प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (PMEGP) में महिला लाभार्थियों को सामान्य श्रेणी के लाभार्थियों की तुलना में उच्च मार्जिन मनी सब्सिडी दर प्राप्त होती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?
- केवल 1 और 2
- केवल 2 और 3
- केवल 1 और 3
- 1, 2 और 3
उत्तर: 1, 2 और 3 — कथन 1 सही है, सार्वजनिक खरीद नीति में महिला स्वामित्व वाले MSME से 3% खरीद अनिवार्य है। कथन 2 भी सही है, CGTMSE के तहत महिला MSME को 90% तक की बढ़ी हुई गारंटी कवरेज मिलती है। कथन 3 भी सही है, PMEGP में महिला लाभार्थियों को सामान्य श्रेणी के लाभार्थियों की तुलना में 35% तक की उच्च मार्जिन मनी सब्सिडी दर और कम स्व-योगदान का लाभ मिलता है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ पीएम विश्वकर्मा योजना पारंपरिक कारीगरों और शिल्पकारों को सशक्त बनाने तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने में किस प्रकार महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है? सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) मंत्रालय द्वारा महिला उद्यमियों के लिए की गई विभिन्न पहलों पर भी प्रकाश डालिए। (250 शब्द)
रूपरेखा: प्रश्न के पहले भाग में, पीएम विश्वकर्मा योजना के उद्देश्यों, इसके तहत शामिल व्यवसायों और कारीगरों को मिलने वाले लाभों (कौशल प्रशिक्षण, टूलकिट, ऋण, विपणन सहायता) का उल्लेख करते हुए बताएं कि ये कैसे पारंपरिक कौशल को संरक्षित करते हुए आय सृजन और ग्रामीण विकास में सहायक हैं। दूसरे भाग में, MSME मंत्रालय द्वारा महिला उद्यमियों के लिए चलाई जा रही विभिन्न योजनाओं जैसे उद्यम पंजीकरण पोर्टल, सार्वजनिक खरीद नीति, CGTMSE, PMEGP, कौशल उन्नयन और पीएम विश्वकर्मा योजना में विशेष प्रावधानों का विस्तार से वर्णन करें, जो उनके वित्तीय समावेशन और उद्यमिता को बढ़ावा देते हैं।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

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