पीएमकेएसवाई के अंतर्गत सिंचाई क्षमता वृद्धि: 2016 से 2026 तक की उपलब्धियां

पीएमकेएसवाई के अंतर्गत सिंचाई क्षमता वृद्धि: 2016 से 2026 तक की उपलब्धियां — PMKSY irrigation progress by component (2016-2026)

पीएमकेएसवाई के अंतर्गत सिंचाई क्षमता वृद्धि: 2016 से 2026 तक की उपलब्धियां

विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper III — कृषि, सिंचाई, जल संसाधन  |  GS Paper II — सरकारी नीतियां और हस्तक्षेप
  • Prelims: प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (पीएमकेएसवाई), त्वरित सिंचाई लाभ कार्यक्रम (एआईबीपी), हर खेत को पानी (एचकेकेपी), कमान क्षेत्र विकास और जल प्रबंधन (सीएडी एंड डब्ल्यूएम), पर ड्रॉप मोर क्रॉप (पीडीएमसी), सूक्ष्म सिंचाई, वाटरशेड विकास घटक (डब्ल्यूडीसी), जल शक्ति मंत्रालय
  • Essay: भारत में जल सुरक्षा और कृषि उत्पादकता: चुनौतियाँ और समाधान, सरकारी योजनाएँ और ग्रामीण विकास: एक मूल्यांकन

त्वरित पुनरावृत्ति: प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (पीएमकेएसवाई) भारत में कृषि उत्पादकता बढ़ाने और जल संसाधनों के कुशल उपयोग को सुनिश्चित करने के लिए एक व्यापक सरकारी पहल है, जिसमें सिंचाई कवरेज का विस्तार, जल उपयोग दक्षता में सुधार और वाटरशेड विकास पर ध्यान केंद्रित किया गया है।

यह खबर चर्चा में क्यों?

हाल ही में, जल शक्ति मंत्रालय ने प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (पीएमकेएसवाई) के अंतर्गत हुई प्रगति का विवरण जारी किया है। यह योजना वर्ष 2015-16 में शुरू की गई थी और इसका उद्देश्य देश में सिंचाई कवरेज का विस्तार करना, जल उपयोग दक्षता में सुधार करना और कृषि उत्पादकता को बढ़ाना है। जारी किए गए आंकड़ों में योजना के विभिन्न घटकों, जैसे त्वरित सिंचाई लाभ कार्यक्रम (एआईबीपी) और हर खेत को पानी (एचकेकेपी) के तहत सृजित सिंचाई क्षमता और प्रदान की गई केंद्रीय सहायता का विस्तृत ब्यौरा शामिल है।

पृष्ठभूमि

  • भारत में कृषि मानसून पर अत्यधिक निर्भर है, जिससे सूखे और बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाओं के कारण फसल उत्पादन में अनिश्चितता बनी रहती है।
  • देश में सिंचाई क्षमता के विस्तार और मौजूदा सिंचाई प्रणालियों के आधुनिकीकरण की आवश्यकता लंबे समय से महसूस की जा रही थी।
  • जल संसाधनों के कुशल उपयोग और ‘प्रति बूंद अधिक फसल’ के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए एकीकृत दृष्टिकोण की आवश्यकता थी।
  • पीएमकेएसवाई को विभिन्न मंत्रालयों/विभागों द्वारा कार्यान्वित की जा रही मौजूदा सिंचाई योजनाओं को एक साथ लाकर एक छत्र योजना के रूप में तैयार किया गया था।
  • इस योजना का मुख्य उद्देश्य खेत स्तर पर जल उपयोग दक्षता में सुधार करना और जल संरक्षण को बढ़ावा देना है।

प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (पीएमकेएसवाई) क्या है?

  • पीएमकेएसवाई एक केंद्र प्रायोजित योजना है जिसे वर्ष 2015-16 में शुरू किया गया था, जिसका लक्ष्य ‘हर खेत को पानी’ सुनिश्चित करना और जल उपयोग दक्षता में सुधार करना है।
  • इसके तीन मुख्य घटक हैं: त्वरित सिंचाई लाभ कार्यक्रम (एआईबीपी), हर खेत को पानी (एचकेकेपी), और वाटरशेड विकास घटक (डब्ल्यूडीसी)।
  • एआईबीपी का कार्यान्वयन जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण विभाग, जल शक्ति मंत्रालय द्वारा किया जाता है, जिसका उद्देश्य बड़ी और मध्यम सिंचाई परियोजनाओं को पूरा करना है।
  • एचकेकेपी के तीन उप-घटक हैं: कमान क्षेत्र विकास और जल प्रबंधन (सीएडी एंड डब्ल्यूएम), सतही लघु सिंचाई (एसएमआई), और जल निकायों की मरम्मत, नवीकरण और पुनरूद्धार (आरआरआर)।
  • डब्ल्यूडीसी का कार्यान्वयन भूमि संसाधन विभाग (डीओएलआर) द्वारा किया जाता है, जो वर्षा सिंचित क्षेत्रों में वाटरशेड विकास गतिविधियों पर केंद्रित है।
  • पर ड्रॉप मोर क्रॉप (पीडीएमसी) योजना, जो पहले पीएमकेएसवाई का हिस्सा थी और अब प्रधानमंत्री-राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (पीएम-आरकेवीवाई) के तहत कार्यान्वित की जा रही है, सूक्ष्म सिंचाई (ड्रिप और स्प्रिंकलर) को बढ़ावा देती है।
  • योजना का लक्ष्य सिंचाई कवरेज का विस्तार करना, खेत पर जल प्रबंधन में सुधार करना, भूजल पुनर्भरण को बढ़ावा देना और जल संरक्षण तकनीकों को अपनाना है।
  • अप्रैल 2016 से एआईबीपी के तहत 30.66 लाख हेक्टेयर और एचकेकेपी-एसएमआई के तहत 4.29 लाख हेक्टेयर सिंचाई क्षमता का सृजन किया गया है, जबकि एचकेकेपी-सीएडी और डब्ल्यूएम के तहत 23.42 लाख हेक्टेयर कमान क्षेत्र विकसित किया गया है।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
अम्ब्रेला योजना यह योजना विभिन्न सिंचाई पहलों को एक साथ लाती है, जिससे जल संसाधन प्रबंधन में समन्वय और दक्षता बढ़ती है।
बहु-घटक दृष्टिकोण त्वरित सिंचाई लाभ कार्यक्रम (AIBP), हर खेत को पानी (HKKP) और वाटरशेड विकास घटक (WDC) जैसे घटक व्यापक कवरेज सुनिश्चित करते हैं।
सूक्ष्म सिंचाई पर जोर ‘पर ड्रॉप मोर क्रॉप’ (PDMC) जैसी उप-योजनाएं जल-उपयोग दक्षता बढ़ाने और जल संरक्षण को बढ़ावा देने पर केंद्रित हैं।
कमान क्षेत्र विकास कमान क्षेत्र विकास और जल प्रबंधन (CAD&WM) उप-घटक सिंचाई क्षमता के प्रभावी उपयोग को सुनिश्चित करता है।
जल निकायों का पुनरूद्धार जल निकायों की मरम्मत, नवीकरण और पुनरूद्धार (RRR) घटक पारंपरिक जल स्रोतों के संरक्षण और उपयोग में सहायक है।
केंद्रीय सहायता केंद्र सरकार द्वारा पर्याप्त वित्तीय सहायता राज्यों को सिंचाई परियोजनाओं को लागू करने में मदद करती है।

महत्व

आर्थिक महत्व

  • सिंचाई कवरेज में वृद्धि से कृषि उत्पादकता और फसल विविधीकरण को बढ़ावा मिलता है, जिससे किसानों की आय में वृद्धि होती है।
  • जल-उपयोग दक्षता में सुधार से कृषि लागत कम होती है और जल संसाधनों का इष्टतम उपयोग सुनिश्चित होता है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होती है।

सामाजिक महत्व

  • सिंचाई सुविधाओं की उपलब्धता ग्रामीण क्षेत्रों में खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करती है और कृषि पर निर्भर आबादी के जीवन स्तर में सुधार करती है।
  • सूक्ष्म सिंचाई तकनीकों को अपनाने से छोटे और सीमांत किसानों को लाभ होता है, जिससे ग्रामीण असमानता कम होती है।

पर्यावरणीय महत्व

  • जल संरक्षण और वाटरशेड विकास गतिविधियों से भूजल स्तर में सुधार होता है और मिट्टी के कटाव को रोका जा सकता है।
  • जल निकायों के पुनरूद्धार से स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र को लाभ होता है और जैव विविधता का संरक्षण होता है।

शासनिक महत्व

  • यह योजना केंद्र और राज्य सरकारों के बीच समन्वय को बढ़ावा देती है, जिससे राष्ट्रीय स्तर पर जल संसाधन प्रबंधन में एकीकृत दृष्टिकोण आता है।
  • योजना के विभिन्न घटकों का कार्यान्वयन प्रभावी नीति निर्माण और निगरानी के महत्व को दर्शाता है।

चुनौतियाँ

1. परियोजना कार्यान्वयन में देरी

  • भूमि अधिग्रहण, पर्यावरणीय मंजूरी और अंतर-विभागीय समन्वय की कमी के कारण परियोजनाओं के पूरा होने में विलंब होता है।
  • स्थानीय स्तर पर क्षमता निर्माण और तकनीकी विशेषज्ञता की कमी भी कार्यान्वयन को प्रभावित करती है।

2. जल-उपयोग दक्षता

  • किसानों के बीच आधुनिक सिंचाई तकनीकों (जैसे ड्रिप और स्प्रिंकलर) को अपनाने में अभी भी चुनौतियाँ हैं, जिससे जल का अपव्यय होता है।
  • पुराने और खराब रखरखाव वाले सिंचाई बुनियादी ढांचे के कारण जल का रिसाव और नुकसान होता है।

3. वित्तीय बाधाएँ

  • राज्यों द्वारा केंद्रीय सहायता के प्रभावी उपयोग में कमी और परियोजनाओं के लिए पर्याप्त राज्य हिस्सेदारी का अभाव।
  • रखरखाव और संचालन के लिए दीर्घकालिक वित्तपोषण की कमी।

4. किसानों की भागीदारी

  • जल उपयोगकर्ता संघों (Water User Associations) के गठन और सशक्तिकरण में चुनौतियाँ, जिससे जल वितरण और प्रबंधन में किसानों की सक्रिय भूमिका कम होती है।
  • किसानों को नई तकनीकों और जल संरक्षण के महत्व के बारे में शिक्षित करने की आवश्यकता।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
सिंचाई क्षमता का उपयोग सृजित सिंचाई क्षमता का पूर्ण उपयोग सुनिश्चित करना एक चुनौती है, अक्सर ‘लास्ट माइल’ कनेक्टिविटी की कमी के कारण।
भूजल का अत्यधिक दोहन कुछ क्षेत्रों में सिंचाई के लिए भूजल पर अत्यधिक निर्भरता भूजल स्तर में गिरावट का कारण बन रही है।
जलवायु परिवर्तन का प्रभाव अनियमित वर्षा पैटर्न और सूखे की बढ़ती आवृत्ति सिंचाई योजनाओं की प्रभावशीलता को प्रभावित कर रही है।
अंतर-राज्यीय जल विवाद नदी जल के बंटवारे को लेकर राज्यों के बीच विवाद सिंचाई परियोजनाओं के कार्यान्वयन को बाधित कर सकते हैं।
तकनीकी उन्नयन पुरानी सिंचाई प्रणालियों का आधुनिकीकरण और नई तकनीकों को अपनाना एक बड़ी चुनौती है।
डेटा की उपलब्धता और सटीकता सिंचाई कवरेज और जल-उपयोग दक्षता पर विश्वसनीय डेटा की कमी प्रभावी योजना और निगरानी में बाधा डालती है।

सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें

  • प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (PMKSY)
  • त्वरित सिंचाई लाभ कार्यक्रम (AIBP)
  • हर खेत को पानी (HKKP)
  • कमान क्षेत्र विकास और जल प्रबंधन (CAD&WM)
  • सतही लघु सिंचाई (SMI)
  • जल निकायों की मरम्मत, नवीकरण और पुनरूद्धार (RRR)
  • वाटरशेड विकास घटक (WDC)
  • पर ड्रॉप मोर क्रॉप (PDMC)
  • प्रधानमंत्री-राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (PM-RKVY)

आगे की राह

  • परियोजना कार्यान्वयन में तेजी लाने के लिए भूमि अधिग्रहण और पर्यावरणीय मंजूरी प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित करना।
  • सूक्ष्म सिंचाई (Micro Irrigation) तकनीकों को बढ़ावा देने के लिए किसानों को वित्तीय प्रोत्साहन और तकनीकी सहायता प्रदान करना।
  • जल उपयोगकर्ता संघों (Water User Associations) को सशक्त बनाना और सिंचाई प्रबंधन में उनकी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करना।
  • पुराने सिंचाई बुनियादी ढांचे के आधुनिकीकरण और रखरखाव के लिए पर्याप्त बजटीय आवंटन सुनिश्चित करना।
  • जल-उपयोग दक्षता बढ़ाने के लिए फसल विविधीकरण और कम पानी वाली फसलों को बढ़ावा देना।
  • जल संसाधन प्रबंधन के लिए एकीकृत दृष्टिकोण अपनाना, जिसमें भूजल और सतही जल दोनों का विवेकपूर्ण उपयोग शामिल हो।
  • जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने के लिए जल संरक्षण और वर्षा जल संचयन (Rainwater Harvesting) पर विशेष ध्यान देना।
  • सिंचाई परियोजनाओं की निगरानी और मूल्यांकन के लिए मजबूत डेटा संग्रह और विश्लेषण प्रणाली विकसित करना।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना · त्वरित सिंचाई लाभ कार्यक्रम · हर खेत को पानी · कमान क्षेत्र विकास और जल प्रबंधन · सूक्ष्म सिंचाई · जल निकायों का नवीनीकरण · जल उपयोग दक्षता · कृषि उत्पादकता · वॉटरशेड विकास · लास्ट माइल कनेक्टिविटी

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • {‘अनुच्छेद 246’: ‘संघ सूची, राज्य सूची, समवर्ती सूची’}
  • {‘अनुच्छेद 262’: ‘अंतर-राज्यीय नदी जल विवाद’}
  • {‘सातवीं अनुसूची’: ‘जल राज्य सूची का विषय’}

अवधारणा प्रवाह

अपर्याप्त सिंचाई सुविधाएँ  →  कृषि उत्पादकता में कमी  →  प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (PMKSY) का शुभारंभ  →  सिंचाई कवरेज का विस्तार और जल-उपयोग दक्षता में वृद्धि  →  कृषि उत्पादन में वृद्धि और किसानों की आय में सुधार  →  खाद्य सुरक्षा और ग्रामीण विकास

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (PMKSY) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
1. यह योजना वर्ष 2015-16 में शुरू की गई थी और इसका उद्देश्य ‘प्रति बूंद अधिक फसल’ प्राप्त करना है।
2. त्वरित सिंचाई लाभ कार्यक्रम (AIBP) और हर खेत को पानी (HKKP) इसके दो प्रमुख घटक हैं।
3. सूक्ष्म सिंचाई विकास के लिए ‘पर ड्रॉप मोर क्रॉप’ (PDMC) योजना अब प्रधानमंत्री-राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (PM-RKVY) के अंतर्गत कार्यान्वित की जा रही है।
उपरोक्त में से कितने कथन सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. सभी तीनों
  4. कोई नहीं

उत्तर: सभी तीनों — कथन 1 सही है क्योंकि PMKSY 2015-16 में शुरू हुई थी और इसका मुख्य उद्देश्य जल उपयोग दक्षता बढ़ाना है, जिसमें ‘प्रति बूंद अधिक फसल’ एक महत्वपूर्ण पहलू है। कथन 2 भी सही है क्योंकि AIBP और HKKP PMKSY के दो प्रमुख घटक हैं। कथन 3 भी सही है क्योंकि PDMC योजना, जो पहले PMKSY का हिस्सा थी, अब PM-RKVY के तहत कार्यान्वित की जा रही है।

Q2. निम्नलिखित में से कौन-सा/से घटक जल शक्ति मंत्रालय के जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण विभाग द्वारा प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (PMKSY) के तहत कार्यान्वित किया/किए जा रहे हैं?
1. त्वरित सिंचाई लाभ कार्यक्रम (AIBP)
2. हर खेत को पानी (HKKP)
3. वॉटरशेड विकास घटक (WDC)
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:

  1. केवल 1
  2. केवल 1 और 2
  3. केवल 2 और 3
  4. 1, 2 और 3

उत्तर: केवल 1 और 2 — त्वरित सिंचाई लाभ कार्यक्रम (AIBP) और हर खेत को पानी (HKKP) जल शक्ति मंत्रालय के जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण विभाग द्वारा कार्यान्वित किए जा रहे हैं। वॉटरशेड विकास घटक (WDC) भूमि संसाधन विभाग (DoLR) द्वारा कार्यान्वित किया जा रहा है।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (PMKSY) भारत में कृषि उत्पादकता बढ़ाने और जल संसाधनों के कुशल उपयोग को सुनिश्चित करने में किस प्रकार सहायक है? योजना के प्रमुख घटकों और उनके द्वारा प्राप्त की गई प्रगति का विश्लेषण करें। (15 Marks)

रूपरेखा: उत्तर की शुरुआत PMKSY के उद्देश्यों और इसके लॉन्च वर्ष (2015-16) से करें। योजना के प्रमुख घटकों (AIBP, HKKP, WDC, PDMC) का विस्तृत विवरण दें। प्रत्येक घटक के तहत की गई प्रगति (सिंचाई क्षमता सृजन, कमान क्षेत्र विकास, सूक्ष्म सिंचाई कवरेज, वॉटरशेड परियोजनाएं) को आंकड़ों के साथ प्रस्तुत करें। योजना के सकारात्मक प्रभावों जैसे जल-उपयोग दक्षता में वृद्धि, लास्ट माइल कनेक्टिविटी, फसल उत्पादकता और जल संरक्षण पर चर्चा करें। चुनौतियों और आगे की राह पर संक्षिप्त टिप्पणी के साथ निष्कर्ष निकालें।

स्रोत: PIB (Press Information Bureau)


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

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