21 Jul पीएमकेएसवाई: सिंचाई क्षमता बढ़ाने हेतु केंद्र-राज्य सहयोगी योजना
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper III — कृषि, सिंचाई और जल संसाधन | GS Paper II — केंद्र प्रायोजित योजनाएँ और उनका कार्यान्वयन
- Prelims: प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (PMKSY), एक्सेलरेटेड इरिगेशन बेनिफिट प्रोग्राम (AIBP), हर खेत को पानी (HKKP), वॉटरशेड डेवलपमेंट कंपोनेंट (WDC), जल शक्ति मंत्रालय, ग्रामीण विकास मंत्रालय, कमांड एरिया डेवलपमेंट, ऑन-फार्म विकास कार्य
- Essay: भारत में कृषि उत्पादकता बढ़ाने में सिंचाई की भूमिका, जल प्रबंधन और सतत कृषि विकास
त्वरित पुनरावृत्ति: प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना का लक्ष्य ‘प्रति बूंद अधिक फसल’ के सिद्धांत पर आधारित है, जो सुनिश्चित सिंचाई और जल उपयोग दक्षता में सुधार के माध्यम से कृषि उत्पादकता बढ़ाना है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री श्री रामनाथ ठाकुर ने हाल ही में लोकसभा में एक लिखित उत्तर में प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (PMKSY) के संबंध में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह एक समग्र योजना है जिसके तीन प्रमुख घटक हैं और इसके तहत राज्यों को सिंचाई क्षमता सृजित करने, कमांड एरिया डेवलपमेंट और ऑन-फार्म विकास कार्यों के लिए केंद्रीय सहायता प्रदान की जाती है। मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि योजना में निजी क्षेत्र के निवेश के लिए कोई विशेष प्रावधान नहीं है और जल प्रबंधन से संबंधित क्षमता निर्माण व प्रशिक्षण गतिविधियों का राज्य-वार समेकित डेटा केंद्रीय स्तर पर नहीं रखा जाता है।
पृष्ठभूमि
- भारत में कृषि मानसून पर अत्यधिक निर्भर है, जिससे कृषि उत्पादन में अनिश्चितता बनी रहती है।
- सिंचाई सुविधाओं का विस्तार और जल उपयोग दक्षता में सुधार कृषि उत्पादकता बढ़ाने तथा किसानों की आय स्थिर करने के लिए महत्वपूर्ण है।
- पूर्व में विभिन्न सिंचाई योजनाएँ चलाई गईं, लेकिन उनमें समन्वय की कमी थी, जिसके कारण संसाधनों का इष्टतम उपयोग नहीं हो पाता था।
- प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना को ‘प्रति बूंद अधिक फसल’ के नारे के साथ शुरू किया गया, जिसका उद्देश्य जल संसाधनों का कुशल उपयोग सुनिश्चित करना है।
- यह योजना केंद्र प्रायोजित योजना (Centrally Sponsored Scheme) है, जिसमें केंद्र और राज्य सरकारों के बीच लागत साझा की जाती है।
- योजना का लक्ष्य देश के सभी कृषि योग्य खेतों तक सुनिश्चित सिंचाई पहुँचाना और जल उपयोग दक्षता में सुधार करना है।
- योजना का क्रियान्वयन विभिन्न मंत्रालयों के समन्वय से होता है, जो इसके बहुआयामी दृष्टिकोण को दर्शाता है।
प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (PMKSY) क्या है?
- प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (PMKSY) एक केंद्र प्रायोजित योजना है जिसे 2015 में शुरू किया गया था, जिसका मुख्य उद्देश्य ‘हर खेत को पानी’ सुनिश्चित करना और जल उपयोग दक्षता में सुधार करना है।
- यह योजना तीन प्रमुख घटकों को एकीकृत करती है: ‘एक्सेलरेटेड इरिगेशन बेनिफिट प्रोग्राम’ (AIBP), ‘हर खेत को पानी’ (HKKP) और ‘वॉटरशेड डेवलपमेंट कंपोनेंट’ (WDC)।
- AIBP घटक का कार्यान्वयन जल शक्ति मंत्रालय के जल संसाधन, नदी विकास और गंगा पुनरुद्धार विभाग द्वारा किया जाता है, जिसका लक्ष्य बड़ी और मध्यम सिंचाई परियोजनाओं को पूरा करना है।
- HKKP घटक भी जल शक्ति मंत्रालय द्वारा कार्यान्वित किया जाता है और इसमें कमांड एरिया डेवलपमेंट (CAD), भूजल विकास, लघु सिंचाई और मरम्मत, नवीनीकरण व बहाली (RRR) जैसे उप-घटक शामिल हैं।
- WDC घटक का कार्यान्वयन ग्रामीण विकास मंत्रालय के भूमि संसाधन विभाग द्वारा किया जाता है, जो वर्षा जल संचयन, मृदा संरक्षण और भूजल पुनर्भरण पर केंद्रित है।
- PMKSY के तहत राज्यों को सिंचाई क्षमता सृजित करने, कमांड एरिया डेवलपमेंट और ऑन-फार्म विकास कार्यों के लिए केंद्रीय सहायता प्रदान की जाती है।
- परियोजनाओं का कार्यान्वयन सामान्यतः राज्य सरकारों द्वारा प्रतिस्पर्धी निविदा प्रक्रियाओं (competitive tendering processes) के माध्यम से किया जाता है, जिसमें निजी ठेकेदार और कंपनियाँ भाग ले सकती हैं।
- योजना के दिशानिर्देशों के अनुसार, जल के कुशल प्रबंधन से संबंधित क्षमता निर्माण और प्रशिक्षण गतिविधियाँ लागू करने वाले राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों द्वारा संबंधित घटकों के तहत की जाती हैं।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| समग्र योजना | यह सिंचाई से संबंधित विभिन्न पहलुओं को एक साथ लाती है, जिससे जल संसाधनों का एकीकृत प्रबंधन सुनिश्चित होता है। |
| तीन घटक | एकीकृत दृष्टिकोण के लिए ‘एक्सेलरेटेड इरिगेशन बेनिफिट प्रोग्राम’ (AIBP), ‘हर खेत को पानी’ (HKKP) और ‘वॉटरशेड डेवलपमेंट कंपोनेंट’ (WDC) शामिल हैं। |
| केंद्रीय सहायता | राज्यों को सिंचाई क्षमता सृजित करने, कमांड एरिया डेवलपमेंट और ऑन-फार्म विकास कार्यों के लिए वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है। |
| राज्य-स्तरीय कार्यान्वयन | परियोजनाओं को सामान्यतः राज्य सरकारों द्वारा प्रतिस्पर्धी निविदा प्रक्रियाओं (competitive tendering processes) के माध्यम से कार्यान्वित किया जाता है। |
| निजी क्षेत्र की भागीदारी | योजना में निजी क्षेत्र के निवेश के लिए कोई विशेष प्रावधान नहीं है, हालांकि निजी ठेकेदार राज्य के नियमों के अनुसार भाग ले सकते हैं। |
| क्षमता निर्माण और प्रशिक्षण | जल के कुशल प्रबंधन से संबंधित क्षमता निर्माण और प्रशिक्षण गतिविधियाँ राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों द्वारा की जाती हैं। |
महत्व
आर्थिक महत्व
- सिंचाई क्षमता में वृद्धि से कृषि उत्पादकता (agricultural productivity) बढ़ती है, जिससे किसानों की आय में सुधार होता है और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलता है।
- जल के कुशल उपयोग से फसल विविधीकरण (crop diversification) को प्रोत्साहन मिलता है और सूखा-प्रवण क्षेत्रों में कृषि को स्थिरता मिलती है।
- कृषि क्षेत्र में निवेश को बढ़ावा मिलता है, जिससे रोजगार के अवसर सृजित होते हैं और खाद्य सुरक्षा (food security) सुनिश्चित होती है।
सामाजिक महत्व
- किसानों को सिंचाई के लिए पर्याप्त जल उपलब्ध होने से उनकी आजीविका सुरक्षित होती है और पलायन में कमी आती है।
- जल प्रबंधन में सुधार से ग्रामीण समुदायों के जीवन स्तर में सुधार होता है और जल-जनित बीमारियों का जोखिम कम होता है।
- महिलाओं को कृषि कार्यों में सहायता मिलती है, जिससे उनकी सामाजिक-आर्थिक स्थिति मजबूत होती है।
पर्यावरणीय महत्व
- वॉटरशेड डेवलपमेंट कंपोनेंट के माध्यम से मृदा संरक्षण (soil conservation), जल संचयन (water harvesting) और भूजल पुनर्भरण (groundwater recharge) को बढ़ावा मिलता है।
- जल के कुशल उपयोग से जल संसाधनों पर दबाव कम होता है और पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने में मदद मिलती है।
- सूखा और बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाओं के प्रभावों को कम करने में सहायता मिलती है।
शासनिक महत्व
- यह योजना केंद्र और राज्यों के बीच सहयोगात्मक संघवाद (cooperative federalism) का एक उदाहरण है, जहाँ केंद्र वित्तीय सहायता प्रदान करता है और राज्य कार्यान्वयन करते हैं।
- योजना के तहत परियोजनाओं का कार्यान्वयन राज्य सरकारों की खरीद प्रक्रियाओं के अनुसार होता है, जिससे पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित होती है।
- जल प्रबंधन और कृषि विकास के लिए एक एकीकृत नीतिगत ढाँचा प्रदान करती है।
चुनौतियाँ
1. डेटा की कमी
- किसानों और फील्ड-लेवल के कर्मचारियों के प्रशिक्षण संबंधी राज्य-वार समेकित डेटा का केंद्रीय स्तर पर रखरखाव नहीं किया जाता है।
- डेटा की कमी से योजना के प्रभाव का सटीक मूल्यांकन करना और लक्षित सुधार करना मुश्किल हो जाता है।
यूपीएससी लिंक: शासन, पारदर्शिता और जवाबदेही
2. कार्यान्वयन में असमानता
- राज्यों के नियमों और क्षमताओं में भिन्नता के कारण योजना के कार्यान्वयन में असमानताएँ हो सकती हैं।
- कुछ राज्यों में परियोजनाओं की धीमी गति या अपर्याप्त कवरेज एक चुनौती हो सकती है।
यूपीएससी लिंक: संघवाद, केंद्र-राज्य संबंध
3. निजी क्षेत्र की सीमित भागीदारी
- योजना में निजी क्षेत्र के निवेश के लिए कोई विशेष प्रावधान न होने से नवाचार और दक्षता की संभावनाएँ सीमित हो सकती हैं।
- निजी क्षेत्र की विशेषज्ञता और संसाधनों का पूर्ण लाभ नहीं उठाया जा सकता है।
यूपीएससी लिंक: सरकारी नीतियाँ और हस्तक्षेप
4. जल प्रबंधन की चुनौतियाँ
- जल संसाधनों का अत्यधिक दोहन और जलवायु परिवर्तन के कारण जल उपलब्धता में अनिश्चितता एक बड़ी चुनौती है।
- सिंचाई जल के कुशल उपयोग और जल संरक्षण तकनीकों को अपनाने में किसानों को प्रेरित करना।
यूपीएससी लिंक: संसाधन जुटाना, पर्यावरण
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| प्रशिक्षण डेटा का अभाव | योजना के क्षमता निर्माण घटक की प्रभावशीलता का मूल्यांकन करना कठिन है। |
| राज्य-स्तरीय कार्यान्वयन | राज्यों के बीच कार्यान्वयन की गति और गुणवत्ता में भिन्नता हो सकती है। |
| निजी निवेश का अभाव | योजना में निजी क्षेत्र की विशेषज्ञता और पूंजी का पूर्ण उपयोग नहीं हो पाता है। |
| जल संसाधनों का स्थायी प्रबंधन | बढ़ती मांग और जलवायु परिवर्तन के कारण जल संसाधनों पर दबाव बढ़ रहा है। |
| कमांड एरिया डेवलपमेंट | सिंचाई क्षमता के सृजन के बाद जल वितरण नेटवर्क और ऑन-फार्म जल प्रबंधन में कमियाँ। |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (Pradhan Mantri Krishi Sinchayee Yojana)
- एक्सेलरेटेड इरिगेशन बेनिफिट प्रोग्राम (Accelerated Irrigation Benefit Program)
- हर खेत को पानी (Har Khet Ko Pani)
- वॉटरशेड डेवलपमेंट कंपोनेंट (Watershed Development Component)
आगे की राह
- प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले किसानों और फील्ड-लेवल के कर्मचारियों के डेटा का केंद्रीकृत और व्यवस्थित रखरखाव किया जाए ताकि योजना की प्रभावशीलता का आकलन हो सके।
- जल के कुशल उपयोग के लिए आधुनिक सिंचाई तकनीकों (जैसे ड्रिप और स्प्रिंकलर) को अपनाने हेतु किसानों को और अधिक प्रोत्साहन और तकनीकी सहायता प्रदान की जाए।
- निजी क्षेत्र की भागीदारी को बढ़ावा देने के लिए योजना में विशेष प्रावधान किए जाएँ, जिससे नवाचार और पूंजी निवेश को आकर्षित किया जा सके।
- राज्य सरकारों के साथ समन्वय स्थापित कर कार्यान्वयन में आने वाली बाधाओं को दूर किया जाए और सर्वोत्तम प्रथाओं (best practices) को साझा किया जाए।
- वॉटरशेड डेवलपमेंट और जल संचयन संरचनाओं के निर्माण पर अधिक ध्यान केंद्रित किया जाए ताकि भूजल स्तर में सुधार हो सके।
- जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने के लिए जल-कुशल फसलों और कृषि पद्धतियों को बढ़ावा दिया जाए।
- कमांड एरिया डेवलपमेंट के तहत जल वितरण नेटवर्क के रखरखाव और आधुनिकीकरण पर जोर दिया जाए।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना · सिंचाई क्षमता · जल प्रबंधन · कृषि उत्पादकता · सूक्ष्म सिंचाई · कमांड एरिया डेवलपमेंट · वाटरशेड विकास · केंद्रीय सहायता · कृषि विकास · जल सुरक्षा
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 246’, ‘note’: ‘केंद्र और राज्यों के बीच विधायी शक्तियों का वितरण’}
- {‘article’: ‘सातवीं अनुसूची’, ‘note’: ‘कृषि और जल राज्य सूची के विषय’}
अवधारणा प्रवाह
सिंचाई क्षमता का अभाव → प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना का शुभारंभ → केंद्रीय सहायता और राज्य-स्तरीय कार्यान्वयन → सिंचाई क्षमता का सृजन और जल प्रबंधन में सुधार → कृषि उत्पादकता में वृद्धि और किसानों की आय में सुधार → ग्रामीण विकास और खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (PMKSY) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. यह कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय द्वारा कार्यान्वित एक समग्र योजना है।
2. ‘एक्सेलरेटेड इरिगेशन बेनिफिट प्रोग्राम’ (AIBP) इसका एक घटक है।
3. इस योजना में निजी क्षेत्र के निवेश के लिए विशेष प्रावधान हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
- केवल 1
- केवल 2
- केवल 1 और 3
- केवल 2 और 3
उत्तर: केवल 2 — कथन 1 गलत है क्योंकि PMKSY एक समग्र योजना है जिसके घटक विभिन्न मंत्रालयों (जल शक्ति मंत्रालय और ग्रामीण विकास मंत्रालय) द्वारा कार्यान्वित किए जाते हैं, न कि केवल कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय द्वारा। कथन 2 सही है क्योंकि AIBP PMKSY का एक घटक है। कथन 3 गलत है क्योंकि इस योजना में निजी क्षेत्र के निवेश के लिए कोई विशेष प्रावधान नहीं है।
Q2. प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (PMKSY) के घटकों के संबंध में, निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए:
1. एक्सेलरेटेड इरिगेशन बेनिफिट प्रोग्राम (AIBP): जल शक्ति मंत्रालय
2. हर खेत को पानी (HKKP): ग्रामीण विकास मंत्रालय
3. वाटरशेड डेवलपमेंट कंपोनेंट (WDC): जल शक्ति मंत्रालय
उपर्युक्त युग्मों में से कौन-सा/से सही सुमेलित है/हैं?
- केवल 1
- केवल 1 और 2
- केवल 2 और 3
- 1, 2 और 3
उत्तर: केवल 1 — युग्म 1 सही सुमेलित है। AIBP जल शक्ति मंत्रालय के जल संसाधन, नदी विकास और गंगा पुनर्जीवन विभाग द्वारा कार्यान्वित किया जाता है। युग्म 2 गलत सुमेलित है क्योंकि ‘हर खेत को पानी’ (HKKP) भी जल शक्ति मंत्रालय द्वारा कार्यान्वित किया जाता है। युग्म 3 गलत सुमेलित है क्योंकि ‘वाटरशेड डेवलपमेंट कंपोनेंट’ (WDC) ग्रामीण विकास मंत्रालय के भूमि संसाधन विभाग द्वारा कार्यान्वित किया जाता है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (PMKSY) भारत में कृषि उत्पादकता बढ़ाने और जल संसाधनों के कुशल उपयोग को सुनिश्चित करने में किस प्रकार सहायक है? इसके प्रमुख घटकों और कार्यान्वयन चुनौतियों पर विस्तार से चर्चा कीजिए।
रूपरेखा: प्रश्न के पहले भाग में PMKSY के उद्देश्यों और कृषि उत्पादकता तथा जल उपयोग दक्षता में इसकी भूमिका को स्पष्ट करें। योजना के तीन प्रमुख घटकों (AIBP, HKKP, WDC) का उल्लेख करें और प्रत्येक की भूमिका संक्षेप में बताएं। दूसरे भाग में, योजना के कार्यान्वयन से संबंधित चुनौतियों, जैसे कि अंतर-मंत्रालयी समन्वय, राज्य-स्तरीय डेटा प्रबंधन की कमी, और निजी क्षेत्र की सीमित भागीदारी पर चर्चा करें। अंत में, इन चुनौतियों का समाधान करने और योजना की प्रभावशीलता बढ़ाने के लिए कुछ सुझाव दें।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
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