19 Dec प्रधानमंत्री की ओमान यात्रा : भारत-ओमान रणनीतिक साझेदारी की नई दिशा
प्रधानमंत्री की ओमान यात्रा : भारत-ओमान रणनीतिक साझेदारी की नई दिशा
पाठ्यक्रम – जीएस 2 – अंतर्राष्ट्रीय संबंध
परिचय :

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 17-18 दिसंबर 2025 को ओमान की आधिकारिक यात्रा भारत-ओमान संबंधों के लिए एक महत्वपूर्ण पड़ाव साबित हुई। यह यात्रा दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंधों की 70वीं वर्षगांठ के अवसर पर हुई और दिसंबर 2023 में ओमान के सुल्तान हैथम बिन तारिक की भारत यात्रा की निरंतरता को दर्शाती है। इस यात्रा ने द्विपक्षीय संबंधों को बहुआयामी रणनीतिक साझेदारी के स्तर पर मजबूत किया, जिसमें आर्थिक, रक्षा, समुद्री, सांस्कृतिक और ऊर्जा जैसे क्षेत्र शामिल हैं। यह यात्रा भारत की पश्चिम एशिया नीति, हिंद महासागर क्षेत्र में समुद्री कूटनीति और विकसित भारत 2047 के लक्ष्यों के साथ तालमेल को समझने के लिए उपयोगी है।
प्रमुख उपलब्धियां और समझौते :
यात्रा के दौरान कई महत्वपूर्ण समझौते और दस्तावेज हस्ताक्षरित हुए, जो दोनों देशों के बीच सहयोग को नई ऊंचाइयों पर ले जाते हैं:
समग्र आर्थिक साझेदारी समझौता (CEPA): यह समझौता द्विपक्षीय व्यापार में बाधाओं को कम कर एक स्थिर ढांचा प्रदान करता है। वस्त्र, ऑटोमोबाइल, रसायन, उर्वरक और उपकरण जैसे क्षेत्रों में व्यापार वृद्धि की संभावना को बढ़ावा देगा। इससे आर्थिक विकास, रोजगार सृजन और निवेश प्रवाह में वृद्धि होगी। स्थानीय मुद्राओं में व्यापार की संभावनाओं पर भी चर्चा हुई, जो रुपये-रियाल व्यापार को प्रोत्साहित करेगा। यह समझौता भारत की ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘मेक इन इंडिया’ पहलों के साथ जुड़ता है, साथ ही ओमान के ‘विजन 2040’ के आर्थिक विविधीकरण से तालमेल रखता है।
समुद्री सहयोग पर संयुक्त दृष्टि दस्तावेज: यह दस्तावेज क्षेत्रीय समुद्री सुरक्षा, समुद्री डकैती और अपराधों से निपटने, नीली अर्थव्यवस्था तथा समुद्री संसाधनों के सतत उपयोग पर जोर देता है। भारत की SAGAR (Security and Growth for All in the Region) नीति के अनुरूप, यह हिंद महासागर क्षेत्र में स्थिरता सुनिश्चित करेगा। रक्षा क्षेत्र में संयुक्त अभ्यास, प्रशिक्षण और सूचना आदान-प्रदान को मजबूत करेगा।
समुद्री विरासत और संग्रहालयों के क्षेत्र में एमओयू: लोथल में राष्ट्रीय समुद्री विरासत परिसर सहित संग्रहालयों में सहयोग स्थापित करेगा। संयुक्त प्रदर्शनियां, अनुसंधान और कलाकृतियों का आदान-प्रदान सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करेगा। यह दोनों देशों की साझा समुद्री परंपराओं को वैश्विक मंच पर प्रदर्शित करेगा, जो सॉफ्ट पावर कूटनीति का उदाहरण है।
कृषि और संबद्ध क्षेत्रों में एमओयू: कृषि, पशुपालन, मत्स्य पालन, बागवानी और सूक्ष्म सिंचाई में सहयोग को बढ़ावा देगा। श्री अन्न (मोटे अनाज) की खेती और खाद्य नवाचार के लिए कार्यकारी कार्यक्रम भारत की वैज्ञानिक विशेषज्ञता और ओमान की अनुकूल जलवायु का समन्वय करेगा, जो खाद्य सुरक्षा और जल संरक्षण में योगदान देगा।
उच्च शिक्षा के क्षेत्र में एमओयू: संयुक्त अनुसंधान, संकाय-छात्र आदान-प्रदान और क्षमता निर्माण को सुविधाजनक बनाएगा। भारत-ओमान ज्ञान संवाद और ITEC कार्यक्रम के तहत सहयोग बढ़ेगा। सोहार विश्वविद्यालय में ICCR चेयर की स्थापना सांस्कृतिक आदान-प्रदान को मजबूत करेगी।
अन्य क्षेत्रों में सहयोग: ऊर्जा क्षेत्र में हरित हाइड्रोजन और अमोनिया पर फोकस, प्रौद्योगिकी में आईटी और अंतरिक्ष अनुप्रयोग, तथा स्वास्थ्य में आयुष चेयर और पारंपरिक चिकित्सा केंद्र की स्थापना। ओमान चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री और भारतीय उद्योग परिसंघ के बीच एमओयू निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाएगा।
व्यापक महत्व और चुनौतियां :
- भारत की पश्चिम एशिया नीति को मजबूती
- हिंद महासागर में समुद्री कूटनीति और सुरक्षा
- विकसित भारत 2047 और ओमान विजन 2040 के बीच तालमेल
- प्रवासी भारतीयों (लगभग 6.75 लाख) की भूमिका को संस्थागत समर्थन
यह यात्रा भारत की विदेश नीति के कई आयामों को छूती है। आर्थिक रूप से, CEPA से द्विपक्षीय व्यापार (वर्तमान में लगभग 10 अरब डॉलर) में वृद्धि की संभावना है, जो भारत को मध्य पूर्व में मजबूत बनाएगा। समुद्री सहयोग से हिंद महासागर में चीन की बढ़ती उपस्थिति का मुकाबला होगा। सांस्कृतिक और शैक्षिक सहयोग से लोग-से-लोग संपर्क मजबूत होगा, विशेषकर ओमान में रहने वाले 6.75 लाख भारतीय प्रवासियों के माध्यम से।
चुनौतियां शामिल हैं:
क्षेत्रीय अस्थिरता (जैसे गाजा संकट पर चर्चा), आतंकवाद का मुकाबला और ऊर्जा संक्रमण में सहयोग। दोनों देशों ने गाजा में मानवीय सहायता और फिलिस्तीनी राज्य की स्थापना पर समर्थन दोहराया, जो भारत की संतुलित मध्य पूर्व नीति को दर्शाता है।
निष्कर्ष :
प्रधानमंत्री की ओमान यात्रा ने भारत-ओमान संबंधों को नई ऊर्जा प्रदान की है, जो आर्थिक अवसरों, समुद्री सुरक्षा और सांस्कृतिक आदान-प्रदान पर आधारित है। यह विकसित भारत 2047 और ओमान विजन 2040 के बीच तालमेल का प्रतीक है।, यह यात्रा भारत की बहुपक्षीय कूटनीति का उदाहरण है, जो वैश्विक चुनौतियों का सामना करते हुए सतत विकास को बढ़ावा देती है। भविष्य में, इन समझौतों का प्रभावी कार्यान्वयन दोनों देशों की साझेदारी को और मजबूत करेगा।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न :
Q.भारत–ओमान संबंधों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1.भारत और ओमान ने समग्र आर्थिक साझेदारी समझौते (CEPA) पर हस्ताक्षर किए हैं।
2.समुद्री सहयोग पर संयुक्त दृष्टि दस्तावेज़ का उद्देश्य केवल व्यापारिक नौवहन को बढ़ावा देना है।
3.श्री अन्न (मोटे अनाज) सहयोग का संबंध खाद्य सुरक्षा और सतत कृषि से है।
उपरोक्त में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
(a) 1 और 3 केवल
(b) 1 केवल
(c) 2 और 3 केवल
(d) 1, 2 और 3
उत्तर: (a)
मुख्य परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न :
Q.प्रधानमंत्री की दिसंबर 2025 की ओमान यात्रा के प्रमुख परिणामों की चर्चा कीजिए। यह यात्रा भारत की पश्चिम एशिया नीति और हिंद महासागर क्षेत्र में उसकी समुद्री कूटनीति को किस प्रकार सुदृढ़ करती है? (250 शब्द)
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