बस्तर में पीएम: नक्सलवाद पर विजय और आंतरिक सुरक्षा का महत्व

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बस्तर में पीएम: नक्सलवाद पर विजय और आंतरिक सुरक्षा का महत्व

वामपंथी उग्रवाद का समाधानउग्रवाद के कारणअसमानता, विस्थापनहिंसा का चरम2010 में 223 जिलेसमाधान रणनीतिसुरक्षा, विकास, पुनर्वासकानूनी सुधारवन-अधिकार, पेसाविकास की पहुँचसड़क, बिजली, स्कूलउग्रवाद समाप्तिकोई जिला प्रभावित नहीं
वामपंथी उग्रवाद का समाधान

✎ वामपंथी उग्रवाद का स्थायी समाधान केवल सुरक्षा-अभियान से नहीं, बल्कि SAMADHAN जैसी समग्र रणनीति, विकास और वन-अधिकार व PESA जैसे संवैधानिक-वैधानिक ढाँचे के संतुलित क्रियान्वयन से ही संभव है।

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विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper III — आंतरिक सुरक्षा: उग्रवाद, सुरक्षा बल, केंद्र-राज्य समन्वय और आंतरिक सुरक्षा की चुनौतियाँ  |  GS Paper II — शासन: संघीय ढाँचा, पुलिस एवं लोक व्यवस्था का राज्य-विषय होना, केंद्र की सहायता और अनुसूचित क्षेत्रों का प्रशासन  |  GS Paper II — सामाजिक न्याय: अनुसूचित जनजातियों के वन-अधिकार और पंचायती राज का विस्तार (PESA)
  • Prelims: वामपंथी उग्रवाद (LWE) और CPI (Maoist) की स्थापना (2004), SAMADHAN रणनीति (2017) के घटक, गैरकानूनी गतिविधियाँ (रोकथाम) अधिनियम, 1967 (UAPA), अनुच्छेद 355 और पुलिस का राज्य सूची में होना, केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) — CRPF, BSF, CISF, ITBP, SSB, असम राइफल्स, COBRA (Commando Battalion for Resolute Action) — CRPF की विशेष इकाई, अनुसूचित क्षेत्र: अनुच्छेद 244 और पाँचवीं अनुसूची, PESA अधिनियम, 1996 और अनुसूचित जनजाति एवं अन्य परंपरागत वन निवासी (वन अधिकारों की मान्यता) अधिनियम, 2006
  • Essay: विकास और सुरक्षा साथ-साथ: क्या उग्रवाद का स्थायी समाधान केवल बल-प्रयोग से संभव है?, आंतरिक सुरक्षा बनाम जनजातीय अधिकार: लोकतांत्रिक शासन में संतुलन की चुनौती

त्वरित पुनरावृत्ति: वामपंथी उग्रवाद का स्थायी समाधान केवल सुरक्षा-अभियान से नहीं, बल्कि SAMADHAN जैसी समग्र रणनीति, विकास और वन-अधिकार व PESA जैसे संवैधानिक-वैधानिक ढाँचे के संतुलित क्रियान्वयन से ही संभव है।

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यह खबर चर्चा में क्यों?

8 नवंबर 2026 को प्रधानमंत्री कार्यालय द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति में छत्तीसगढ़ के बस्तर में सुरक्षा बलों के साथ दीपावली के अवसर पर हुई बातचीत का मूल पाठ प्रकाशित किया गया। इस संबोधन में प्रधानमंत्री ने दावा किया कि वामपंथी उग्रवाद के विरुद्ध दशकों पुराना संघर्ष अब लगभग समाप्त हो चुका है और देश का कोई भी जिला इससे प्रभावित नहीं है। संबोधन में सुरक्षा बलों की भूमिका, 2010 की प्रमुख घटनाओं और पूर्ववर्ती वर्षों के आँकड़ों का भी उल्लेख है। परीक्षा की दृष्टि से इस समाचार का महत्व इस बात में है कि यह आंतरिक सुरक्षा की नीति, सुरक्षा बलों की भूमिका और सरकार के दावों के सत्यापन की प्रक्रिया, तीनों को एक साथ सामने लाता है। किसी भी जिले के उग्रवाद-मुक्त होने की वास्तविक स्थिति का निर्धारण गृह मंत्रालय के आधिकारिक वर्गीकरण और सत्यापित आँकड़ों के आधार पर ही किया जाता है, इसलिए उत्तर लिखते समय संबोधन के दावों को आधिकारिक स्रोतों से अलग करके प्रस्तुत करना उचित होगा।

पृष्ठभूमि

  • वामपंथी उग्रवाद की जड़ें 1967 में पश्चिम बंगाल के नक्सलबाड़ी आंदोलन से जुड़ी हैं। बाद में 2004 में CPI (Maoist) का गठन हुआ, जो भूमिगत माओवादी संगठनों के विलय से बना।
  • भूमि-वितरण में असमानता, वन-संसाधनों से जनजातियों का विस्थापन और दूरस्थ क्षेत्रों में प्रशासन व विकास की कमी को इस आंदोलन के प्रमुख कारणों के रूप में देखा जाता है।
  • 2010 में दंतेवाड़ा (छत्तीसगढ़) के पास हुए हमले में CRPF के 76 जवान शहीद हुए थे। उस समय गृह मंत्रालय के अनुसार लगभग 223 जिले कई राज्यों में इसकी चपेट में थे, जो इसके चरम का संकेत है।
  • 2017 में गृह मंत्रालय ने SAMADHAN नामक समग्र रणनीति घोषित की, जिसमें सुरक्षा, खुफिया सूचना, विकास, वित्तीय रोक और पुनर्वास, तीनों पहलुओं को शामिल किया गया।
  • वन-अधिकार अधिनियम, 2006 और PESA अधिनियम, 1996 जैसे कानून जनजातीय समुदायों के अधिकारों और ग्राम सभाओं की भूमिका को मजबूत करते हैं, जिन्हें इस संघर्ष के सामाजिक आयाम से जोड़कर देखा जाता है।

वामपंथी उग्रवाद (Left Wing Extremism) क्या है?

  • वामपंथी उग्रवाद ऐसा हिंसक आंदोलन है, जो माओवादी विचारधारा के आधार पर सशस्त्र संघर्ष से राजसत्ता को चुनौती देता है। भारत में इसका प्रमुख संगठन CPI (Maoist) है, जिसे UAPA के तहत प्रतिबंधित किया गया है।
  • यह मुख्य रूप से वन और जनजाति-बहुल क्षेत्रों में सक्रिय रहा है, जहाँ विकास और प्रशासनिक पहुँच सीमित रही है। इसलिए इसे केवल कानून-व्यवस्था की समस्या नहीं, बल्कि विकास से जुड़ी संरचनात्मक समस्या भी माना जाता है।
  • संवैधानिक दृष्टि से पुलिस और लोक व्यवस्था राज्य सूची के विषय हैं, इसलिए प्रथम दृष्टया इसका नियंत्रण राज्य सरकारों के पास है। अनुच्छेद 355 के अंतर्गत केंद्र का दायित्व है कि वह राज्यों को बाह्य आक्रमण और आंतरिक अशांति से सुरक्षित रखे।
  • केंद्र सरकार राज्यों को सुरक्षा बल उपलब्ध कराती है और CAPF के माध्यम से अभियान चलाती है। सुरक्षा-व्यय से जुड़ी योजनाएँ और सड़क, संचार व दूरसंचार अवसंरचना के विकास के लिए विशेष योजनाएँ भी इसमें शामिल हैं।
  • SAMADHAN रणनीति में सशक्त नेतृत्व, आक्रामक किंतु संतुलित अभियान, प्रशिक्षण, कार्य-योजना, तकनीक के उपयोग और वित्तीय आपूर्ति के रोक जैसे तत्व शामिल हैं। इसका मूल्यांकन प्रदर्शन-संकेतकों के आधार पर किया जाता है।
  • दीर्घकालिक समाधान के लिए विकास, वन-अधिकारों की मान्यता, PESA के तहत ग्राम सभाओं का सशक्तिकरण और प्रभावित युवाओं के पुनर्वास को आवश्यक माना जाता है। इसलिए उग्रवाद-मुक्ति को केवल सुरक्षा-उपलब्धि मानना अधूरा दृष्टिकोण होगा।

मुख्य विशेषताएँ

Feature Significance
घोषित लक्ष्य: सभी जिले वामपंथी उग्रवाद से मुक्त प्रधानमंत्री के भाषण के अनुसार देश का हर जिला वामपंथी उग्रवाद से मुक्त है। यह सरकारी दावा है और इसकी स्वतंत्र पुष्टि के मानदंड स्पष्ट होने चाहिए
प्रभाव का पैमाना भाषण में लगभग 20 राज्यों के 230 से अधिक जिलों के प्रभावित होने का उल्लेख है, जिससे इस समस्या की भौगोलिक व्यापकता का अनुमान होता है
सुरक्षा बलों की बहुस्तरीय भूमिका CRPF, कोबरा, BSF, ITBP, SSB, IRB, राज्य पुलिस और बस्तर फाइटर्स जैसे विशेष बल आंतरिक सुरक्षा में तैनात हैं
बहु-आयामी नीति दृष्टिकोण गृह मंत्रालय की राष्ट्रीय नीति और कार्य योजना (2015) में सुरक्षा, विकास और स्थानीय समुदायों के अधिकारों को एक साथ रखा गया है
ऐतिहासिक संदर्भ 2010 में दंतेवाड़ा में CRPF के 76 जवानों की शहादत इस समस्या की गंभीरता का प्रतीक मानी जाती है। भाषण में 2004 से 2013 के बीच सुरक्षा बलों की हानि अधिक होने का दावा भी किया गया है
राज्य विषय और केंद्र की भूमिका पुलिस और लोक व्यवस्था राज्य सूची के विषय हैं, जबकि केंद्र बल, वित्तीय सहायता और समन्वय उपलब्ध कराता है

महत्व

आंतरिक सुरक्षा (Internal Security)

  • भाषण में उद्धृत सूक्ति ‘आभ्यन्तरं भयं रक्ष्यम्’ के अनुसार आंतरिक सुरक्षा की मजबूती बाहरी सुरक्षा का भी आधार है
  • वामपंथी उग्रवाद जैसी चुनौती का क्षेत्र-विशेष तक सीमित होना राज्य की वैध बल-प्रयोग क्षमता और प्रशासनिक नियंत्रण की पुनर्स्थापना को दर्शाता है
  • सुरक्षा बलों के बीच समन्वय और खुफिया सूचनाओं का आदान-प्रदान इस नीति का केंद्रीय तत्व है

विकास और सामाजिक न्याय

  • दूरस्थ आदिवासी क्षेत्रों में सड़क, बिजली, स्कूल और स्वास्थ्य सेवाओं की पहुँच को सुरक्षा की स्थिति से सीधे जोड़ा जाता है
  • भाषण में ‘विकास की बहार’ का उल्लेख है, किंतु विकास को सुरक्षा का परिणाम मानने और उसे उसकी पूर्व-शर्त मानने के बीच का संबंध नीति-विमर्श का विषय है
  • सुरक्षा के बाद विकास से वंचित समुदायों के सशक्तीकरण की दीर्घकालिक चुनौती बनी रहती है

लोकतंत्र और शासन

  • भाषण में प्रभावित क्षेत्रों में मतदान और आवागमन जैसे नागरिक अधिकारों के बाधित होने का उल्लेख है
  • सुरक्षा स्थिति सुधरने से प्रशासनिक उपस्थिति, ग्राम स्तरीय सेवाओं और स्थानीय लोकतांत्रिक संस्थाओं की सक्रियता बढ़ने की संभावना होती है

संघवाद और केंद्र-राज्य संबंध

  • पुलिस राज्य का विषय होने के कारण इस नीति में केंद्र और राज्यों के बीच सहयोगात्मक संघवाद की भूमिका केंद्रीय है
  • केंद्र द्वारा बल-प्रेषण और वित्तीय सहायता तथा राज्य द्वारा कानून-व्यवस्था का नेतृत्व, दोनों का समन्वय आवश्यक है

चुनौतियाँ

1. उपलब्धि के सत्यापन के मानदंड

  • ‘जिला मुक्त’ घोषणा के लिए स्पष्ट, सार्वजनिक और मापने योग्य मानदंड होने चाहिए, जैसे हिंसक घटनाओं की संख्या, सक्रिय सशस्त्र दस्तों की स्थिति और हानि का आँकड़ा
  • केवल उपस्थिति के आधार पर घोषणा से पुनरुत्थान का खतरा छिपा रह सकता है
  • पारदर्शी आँकड़ों से नीति का मूल्यांकन और संसदीय जवाबदेही दोनों सुदृढ़ होते हैं

2. सुरक्षा और विकास के बीच संतुलन

  • केवल बल-प्रयोग पर आधारित दृष्टिकोण स्थायी शांति नहीं दे सकता, इसलिए विकास और सुरक्षा का समेकित मॉडल आवश्यक है
  • विकास परियोजनाओं की सुरक्षा और स्थानीय समुदाय का विश्वास, दोनों पर निर्भर करते हैं
  • अधूरी विकास योजनाएँ असंतोष को फिर से जन्म दे सकती हैं

3. आदिवासी अधिकार और वन अधिकारों का क्रियान्वयन

  • बस्तर जैसे क्षेत्र अनुसूचित क्षेत्रों में आते हैं, जहाँ पाँचवीं अनुसूची के प्रावधान लागू होते हैं
  • वन अधिकारों की मान्यता के लिए अनुसूचित जनजाति एवं अन्य पारंपरिक वनवासी (वन अधिकारों की मान्यता) अधिनियम, 2006 का प्रभावी क्रियान्वयन आवश्यक है
  • ग्रामसभा की सहमति और भागीदारी के बिना लिए गए निर्णय विश्वास की कमी पैदा कर सकते हैं

4. आत्मसमर्पण और पुनर्वास

  • पूर्व उग्रवादियों के आत्मसमर्पण के बाद उनके सामाजिक और आर्थिक पुनर्वास की व्यवस्था सफलता की कुंजी है
  • पुनर्वास नीति का सतत क्रियान्वयन और उसके प्रति भरोसा नए लोगों को मुख्यधारा में लाने में मदद करता है
  • सामाजिक कलंक और रोजगार के अवसरों की कमी पुनः हिंसा की ओर धकेल सकती है

5. मानवाधिकार और न्यायिक जवाबदेही

  • सुरक्षा अभियानों में नागरिकों की सुरक्षा और मानवाधिकारों का सम्मान राज्य की वैधता के लिए आवश्यक है
  • निष्पक्ष जाँच और दोषियों पर कार्रवाई से विश्वास बढ़ता है
  • न्यायिक प्रक्रिया में देरी होने पर पीड़ितों को न्याय नहीं मिल पाता

6. सुरक्षा बलों की सुरक्षा और खतरे के नए रूप

  • IED जैसे विस्फोटक उपकरणों से जवानों की जान और अंग-भंग का खतरा बना रहता है
  • सुरक्षा बलों के लिए प्रशिक्षण, आधुनिक उपकरण और मनोवैज्ञानिक सहायता आवश्यक है
  • खतरे की प्रकृति बदलने पर खुफिया तंत्र को लगातार अद्यतन रखना होता है

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

Issue Concern
सत्यापन ‘जिला मुक्त’ घोषणा के मानक सार्वजनिक न होने से दावे की विश्वसनीयता पर प्रश्न उठ सकते हैं
पुनरुत्थान का खतरा सुरक्षा बलों की उपस्थिति घटने पर संगठनों के फिर से सक्रिय होने की आशंका बनी रहती है
विकास में अंतराल सड़क, बिजली, शिक्षा और स्वास्थ्य की पहुँच में कमी से असंतोष पैदा हो सकता है
वन और भूमि अधिकार वन अधिकार अधिनियम, 2006 का अधूरा क्रियान्वयन विश्वास की कमी का कारण बन सकता है
पुनर्वास आत्मसमर्पण करने वालों के लिए रोजगार और सामाजिक स्वीकृति की व्यवस्था कमजोर होने पर नीति का प्रभाव सीमित हो सकता है
मानवाधिकार सुरक्षा अभियानों में जवाबदेही की कमी से समुदाय और राज्य के बीच दूरी बढ़ सकती है

सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें

  • सुरक्षा संबंधी व्यय (Security Related Expenditure) योजना
  • विशेष अवसंरचना योजना (Special Infrastructure Scheme)

आगे की राह

  • ‘जिला मुक्त’ घोषणा के लिए स्वतंत्र और सार्वजनिक सत्यापन मानदंड तय किए जाएँ, ताकि उपलब्धि की विश्वसनीयता बनी रहे
  • सुरक्षा स्थापित होने के बाद सड़क, बिजली, स्कूल और स्वास्थ्य केंद्रों का निर्माण समयबद्ध रूप से पूरा किया जाए
  • वन अधिकार अधिनियम, 2006 और पंचायत (अनुसूचित क्षेत्रों तक विस्तार) अधिनियम, 1996 का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित हो
  • आत्मसमर्पण और पुनर्वास नीति को कौशल विकास, रोजगार और सामाजिक स्वीकृति से जोड़ा जाए
  • सुरक्षा अभियानों में मानवाधिकार मानकों का पालन हो और शिकायत निवारण की स्वतंत्र व्यवस्था बने
  • राज्य पुलिस की क्षमता, प्रशिक्षण और जन-संपर्क (community policing) को सुदृढ़ किया जाए
  • केंद्र और राज्यों के बीच खुफिया सूचना-साझाकरण और समन्वय तंत्र को नियमित रूप से सक्रिय रखा जाए
  • स्थानीय ग्रामसभाओं को विकास और सुरक्षा दोनों निर्णयों में सहभागी बनाया जाए

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

वामपंथी उग्रवाद (Left Wing Extremism) · आंतरिक सुरक्षा (Internal Security) · अनुच्छेद 355 (Article 355) · पाँचवीं अनुसूची (Fifth Schedule) · पेसा अधिनियम, 1996 (Panchayats Extension to Scheduled Areas Act, 1996) · वन अधिकार अधिनियम, 2006 (Forest Rights Act, 2006) · वामपंथी उग्रवाद की राष्ट्रीय नीति एवं कार्य योजना, 2015 · सुरक्षा-संबंधी व्यय योजना (Security Related Expenditure Scheme) · ग्राम सभा की सहमति · सलवा जुडूम निर्णय, 2011 · समावेशी विकास · सुरक्षा और विकास का संतुलन

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • अनुच्छेद 355: बाह्य आक्रमण और आंतरिक अशांति से राज्यों की रक्षा का संघ का कर्तव्य
  • अनुच्छेद 244 और पाँचवीं अनुसूची: अनुसूचित क्षेत्रों और जनजातियों का प्रशासन
  • सातवीं अनुसूची, राज्य सूची: पुलिस और लोक व्यवस्था का राज्य का विषय
  • सातवीं अनुसूची, संघ सूची: सशस्त्र बलों की तैनाती, राज्य की सहायता हेतु

अवधारणा प्रवाह

वामपंथी उग्रवाद के कारण हिंसा, विस्थापन और प्रशासनिक शून्यता का विस्तार हुआ  →  केंद्र और राज्यों ने सुरक्षा बलों की तैनाती और समन्वित रणनीति से हिंसक घटनाओं पर नियंत्रण का प्रयास किया  →  सुरक्षा स्थिति सुधरने से प्रशासनिक पहुँच और विकास परियोजनाओं के लिए मार्ग खुलते हैं  →  विकास और सामाजिक सेवाओं की उपलब्धता से स्थानीय समुदाय का शासन में विश्वास बढ़ता है  →  आत्मसमर्पण, पुनर्वास और वन अधिकारों के क्रियान्वयन से पुनः हिंसा की संभावना घटती है  →  निरंतर सत्यापन, जवाबदेही और सहभागी शासन से यह उपलब्धि स्थायी बनती है

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. पाँचवीं अनुसूची के अंतर्गत अनुसूचित क्षेत्रों में राज्यपाल संसद या राज्य विधानमंडल के किसी अधिनियम को ऐसे क्षेत्र में लागू न होने का निर्देश दे सकता है, या उसे संशोधनों सहित लागू करने का निर्देश दे सकता है।
2. पाँचवीं अनुसूची वाले प्रत्येक राज्य में जनजाति सलाहकार परिषद का गठन किया जाता है।
3. पाँचवीं अनुसूची असम, मेघालय, त्रिपुरा और मिज़ोरम के जनजातीय क्षेत्रों पर लागू होती है।

उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. केवल तीन
  4. सभी

उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है: पाँचवीं अनुसूची के पैरा 5 के अंतर्गत राज्यपाल ऐसा निर्देश दे सकता है। कथन 2 सही है: पैरा 4 के अनुसार अनुसूचित क्षेत्र वाले राज्य में जनजाति सलाहकार परिषद का गठन होता है। कथन 3 गलत है, क्योंकि असम, मेघालय, त्रिपुरा और मिज़ोरम के जनजातीय क्षेत्र छठी अनुसूची के अंतर्गत आते हैं।

Q2. निम्नलिखित दो कथनों (A और R) पर विचार कीजिए:
कथन (A): पुलिस और लोक व्यवस्था सातवीं अनुसूची में राज्य सूची के विषय हैं, फिर भी वामपंथी उग्रवाद से निपटने में राज्यों को संघ सरकार से वित्तीय और रसद सहायता दी जाती है।
कारण (R): अनुच्छेद 355 के अंतर्गत संघ का यह कर्तव्य है कि वह प्रत्येक राज्य को बाहरी आक्रमण और आंतरिक अशांति से सुरक्षा प्रदान करे।

नीचे दिए विकल्पों में से सही उत्तर चुनिए:

  1. (A) और (R) दोनों सही हैं, और (R), (A) की सही व्याख्या है
  2. (A) और (R) दोनों सही हैं, किंतु (R), (A) की सही व्याख्या नहीं है
  3. (A) सही है, किंतु (R) गलत है
  4. (A) गलत है, किंतु (R) सही है

उत्तर: (A) और (R) दोनों सही हैं, और (R), (A) की सही व्याख्या है — पुलिस और लोक व्यवस्था सूची-2 (राज्य सूची) की प्रविष्टि 1 के विषय हैं। अनुच्छेद 355 संघ को राज्यों की आंतरिक अशांति से रक्षा का कर्तव्य देता है, जो केंद्रीय सहायता का संवैधानिक आधार है। अतः R, A की सही व्याख्या है।

Q3. निम्नलिखित योजनाओं/कार्यक्रमों को उनकी विशेषताओं से सुमेलित कीजिए:

सूची-I (योजना/अधिनियम)
A. सुरक्षा-संबंधी व्यय योजना
B. विशेष अवसंरचना योजना
C. नागरिक कार्य कार्यक्रम (Civic Action Programme)
D. वन अधिकार अधिनियम, 2006

सूची-II (विशेषता)
1. वामपंथी उग्रवाद-प्रभावित जिलों में सुरक्षा बलों के अभियानों से जुड़े व्यय की प्रतिपूर्ति
2. वामपंथी उग्रवाद-प्रभावित क्षेत्रों में पुलिस थानों, सड़कों और संचार जैसी अवसंरचना का निर्माण
3. सुरक्षा बलों और स्थानीय जनता के बीच संवाद के लिए विकास और स्वास्थ्य शिविरों का आयोजन
4. वनवासियों के व्यक्तिगत और सामुदायिक वन अधिकारों की मान्यता

सही सुमेलन चुनिए:

  1. A-1, B-2, C-3, D-4
  2. A-2, B-1, C-3, D-4
  3. A-1, B-3, C-2, D-4
  4. A-4, B-2, C-3, D-1

उत्तर: A-1, B-2, C-3, D-4 — सुरक्षा-संबंधी व्यय योजना सुरक्षा अभियानों के व्यय की प्रतिपूर्ति करती है (A-1)। विशेष अवसंरचना योजना सड़क, थाना और संचार जैसे निर्माण कार्यों के लिए है (B-2)। नागरिक कार्य कार्यक्रम सुरक्षा बलों और जनता के बीच सेतु का काम करता है (C-3)। वन अधिकार अधिनियम, 2006 वन अधिकारों की मान्यता देता है (D-4)।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ प्रधानमंत्री के बस्तर संबोधन में वामपंथी उग्रवाद के प्रभाव में कमी को एक ऐतिहासिक उपलब्धि बताया गया है। वामपंथी उग्रवाद से निपटने की बहुआयामी रणनीति (सुरक्षा, विकास और अधिकार) का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। साथ ही उत्तर दीजिए कि पाँचवीं अनुसूची वाले क्षेत्रों में पेसा अधिनियम, 1996 और वन अधिकार अधिनियम, 2006 के क्रियान्वयन के बिना स्थायी शांति और विकास की रणनीति किन परिणामों का सामना कर सकती है। (15 Marks)

रूपरेखा: MODEL-ANSWER SKELETON: (1) भूमिका: प्रधानमंत्री के भाषण के दावे (प्रभावित जिलों में कमी, 2010 के दंतेवाड़ा प्रसंग का उल्लेख) को सरकारी दावे के रूप में रखें और स्वतंत्र सत्यापन की आवश्यकता बताएँ; वामपंथी उग्रवाद की परिभाषा और उसके सामाजिक-आर्थिक कारण (भूमि, वन, विस्थापन, असमानता) लिखें। (2) संवैधानिक ढाँचा: पुलिस और लोक व्यवस्था राज्य सूची का विषय (सातवीं अनुसूची, सूची-2, प्रविष्टि 1); अनुच्छेद 355 के अंतर्गत संघ का कर्तव्य; अनुच्छेद 244 और पाँचवीं अनुसूची के अंतर्गत जनजाति सलाहकार परिषद और राज्यपाल की शक्तियाँ; पेसा, 1996 के अंतर्गत ग्राम सभा की परामर्श और सहमति की भूमिका। (3) नीतिगत ढाँचा: वामपंथी उग्रवाद की राष्ट्रीय नीति एवं कार्य योजना, 2015 के तीन आयाम (सुरक्षा, विकास, अधिकार और संप्रेषण); सुरक्षा-संबंधी व्यय योजना, विशेष अवसंरचना योजना, नागरिक कार्य कार्यक्रम; राज्यों की आत्मसमर्पण और पुनर्वास नीतियाँ। (4) न्यायिक दृष्टिकोण: सर्वोच्च न्यायालय का नंदिनी सुंदर बनाम छत्तीसगढ़ राज्य (2011) निर्णय, जिसमें सलवा जुडूम और विशेष पुलिस अधिकारियों की नियुक्ति को असंवैधानिक ठहराया गया; नियमगिरि (2013) में ग्राम सभा की सहमति के सिद्धांत का उल्लेख। (5) संतुलित दृष्टिकोण: सुरक्षा की अनिवार्यता बनाम मानवाधिकार और नागरिक स्वतंत्रता की आलोचना; अमर्त्य सेन के क्षमता दृष्टिकोण से विकास को स्वतंत्रता के रूप में देखना; विकास योजनाओं में ग्राम सभा की भागीदारी न होने पर अविश्वास और विद्रोह का पुनरुत्पादन। (6) निष्कर्ष: सुरक्षा, विकास और अधिकार-आधारित शासन के समन्वय को दीर्घकालिक शांति की शर्त बताते हुए संतुलित निष्कर्ष।

स्रोत: PIB (Press Information Bureau)

Chhattisgarh PCS (CGPSC) — राज्य PCS अभ्यास

Prelims: प्रधानमंत्री ने हाल ही में छत्तीसगढ़ के बस्तर में सुरक्षा बलों के साथ बातचीत की। इस बातचीत के दौरान उनके भाषण का मुख्य विषय क्या था?

  1. A. बस्तर में पर्यटन को बढ़ावा देना
  2. B. सुरक्षा बलों के मनोबल को बढ़ाना और उनके योगदान की सराहना करना
  3. C. स्थानीय उद्योगों को प्रोत्साहन देना
  4. D. नक्सलवाद के आर्थिक कारणों पर चर्चा करना

उत्तर: B. सुरक्षा बलों के मनोबल को बढ़ाना और उनके योगदान की सराहना करना — प्रधानमंत्री के बस्तर में सुरक्षा बलों के साथ बातचीत का मूल पाठ उनके मनोबल को बढ़ाने और उनके बलिदानों की सराहना करने पर केंद्रित था।

Mains: प्रधानमंत्री के बस्तर में सुरक्षा बलों के साथ बातचीत के दौरान दिए गए भाषण के मुख्य बिंदुओं का विश्लेषण कीजिए और छत्तीसगढ़ राज्य के संदर्भ में इसके महत्व पर प्रकाश डालिए।


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।


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