06 Mar भारत – कनाडा द्विपक्षीय संबंध : चुनौतियाँ और अवसर
( यह लेख यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा के मुख्य परीक्षा के सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र – 2 के अंतर्गत ‘ अंतर्राष्ट्रीय संबंध, अंतर्राष्ट्रीय संगठन द्विपक्षीय समूह और समझौते, भारत पर विकसित और विकासशील देशों की नीतियों का प्रभाव ’ खण्ड से और यूपीएससी के प्रारंभिक परीक्षा के अंतर्गत ‘ भारत – कनाडा द्विपक्षीय संबंध, अंतरिक्ष तथा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में सहयोग के लिए समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर, व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौता (CEPA), G20 सम्मेलन, राष्ट्रमंडल ’ खण्ड से संबंधित है। )
खबरों में क्यों ?

- हाल ही में कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी की भारत यात्रा ने दोनों देशों के बीच 2023-24 से चले आ रहे तनाव को समाप्त कर ‘द्विपक्षीय संबंधों को पुनः मजबूत’ करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है।
- नई दिल्ली के हैदराबाद हाउस में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पीएम कार्नी के बीच हुई यह वार्ता आर्थिक, ऊर्जा और सुरक्षा सहयोग को नई दिशा देने की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
- कूटनीतिक तनाव के बाद इस बैठक में व्यापार एवं ऊर्जा सुरक्षा प्रमुख एजेंडा रहे। कनाडा द्वारा भारत को यूरेनियम आपूर्ति बढ़ाने संबंधी समझौते की संभावना व्यक्त की गई है, जो भारत की परमाणु ऊर्जा आवश्यकताओं के लिए महत्त्वपूर्ण है, इसके साथ ही दोनों देशों ने 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना कर लगभग 70 अरब कनाडाई डॉलर तक पहुँचाने, आपूर्ति शृंखलाओं को सुदृढ़ करने तथा अमेरिका पर अत्यधिक निर्भरता कम करने पर सहमति जताई।
- इसके अतिरिक्त व्यापार, ऊर्जा, प्रौद्योगिकी व एआई, प्रतिभा, संस्कृति तथा रक्षा क्षेत्रों में व्यापक साझेदारी को मजबूत करने पर भी बल दिया गया है।
भारत-कनाडा द्विपक्षीय संबंधों के प्रमुख आधार स्तंभ :

- इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में रणनीतिक सहयोग : इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में उभरती भू-राजनीतिक चुनौतियों के संदर्भ में कनाडा अपनी रणनीति में भारत को एक महत्वपूर्ण साझेदार के रूप में देखता है। कनाडा ने चीन को एक ‘विघटनकारी वैश्विक शक्ति’ के रूप में चिह्नित करते हुए भारत को लोकतंत्र, बहुलवाद और नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था का समर्थक बताया है। ऐसे में क्षेत्रीय स्थिरता और संतुलन बनाए रखने के लिए भारत-कनाडा सहयोग का विशेष महत्व है।
- ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग : ऊर्जा सुरक्षा के क्षेत्र में भी दोनों देशों के बीच महत्वपूर्ण साझेदारी है। वर्ष 2010 में भारत और कनाडा के बीच परमाणु सहयोग समझौता (Nuclear Cooperation Agreement – NCA) पर हस्ताक्षर किए गए, जिसके अंतर्गत असैन्य परमाणु सहयोग को बढ़ावा देने के लिए एक संयुक्त समिति का गठन किया गया। इस व्यवस्था के तहत भारत को यूरेनियम की आपूर्ति की भी व्यवस्था की गई है।
- अंतरिक्ष, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी : भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) और कनाडाई अंतरिक्ष एजेंसी (CSA) के बीच बाह्य अंतरिक्ष के अन्वेषण और उपयोग के क्षेत्र में कई समझौता ज्ञापनों (MoUs) पर हस्ताक्षर किए गए हैं। इन सहयोगों के माध्यम से उपग्रह प्रक्षेपण, अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी तथा वैज्ञानिक अनुसंधान को बढ़ावा मिला है।
- व्यापार, निवेश और आर्थिक गतिशीलता : आर्थिक मोर्चे पर कनाडा, भारत का एक महत्वपूर्ण व्यापारिक भागीदार है। द्विपक्षीय व्यापार के 5 बिलियन डॉलर के स्तर को पार करने के साथ-साथ, कनाडा के बड़े पेंशन फंड्स (जैसे CPPIB) ने भारत के बुनियादी ढांचे और नवीकरणीय ऊर्जा में भारी निवेश किया है, जो भारतीय अर्थव्यवस्था के प्रति उनके दीर्घकालिक विश्वास को दर्शाता है।
- सामाजिक विकास और गैर-लाभकारी निवेश : कनाडा अपने गैर-लाभकारी संगठनों, जैसे ‘ग्रैंड चैलेंज कनाडा’ के माध्यम से भारत के सामाजिक-आर्थिक विकास में योगदान दे रहा है। वर्ष 2018-2019 के दौरान लगभग 24 मिलियन डॉलर का निवेश 75 से अधिक विकास परियोजनाओं में किया गया, जो स्वास्थ्य, नवाचार और सामाजिक विकास के क्षेत्रों को प्रोत्साहन मिला है।
- बौद्धिक आदान-प्रदान शैक्षणिक सहयोग : शिक्षा के क्षेत्र में भारत और कनाडा के बीच मजबूत संबंध हैं। भारत, कनाडा में अंतरराष्ट्रीय छात्रों का सबसे बड़ा स्रोत है। भारतीय छात्रों की बड़ी संख्या कनाडा के विश्वविद्यालयों और कॉलेजों के लिए आर्थिक और शैक्षणिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है तथा इससे वहां के संस्थानों को घरेलू छात्रों को अपेक्षाकृत रियायती शिक्षा उपलब्ध कराने में भी सहायता मिलती है।
- प्रवासी भारतीय समुदाय की भूमिका और उसका राजनीतिक प्रभाव : कनाडा में लगभग 1.6 मिलियन भारतीय मूल के लोग रहते हैं, जो वहां की कुल आबादी का 3% से अधिक हैं। यह समुदाय दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक, आर्थिक और राजनीतिक संबंधों को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। कनाडाई राजनीति में इनका प्रभाव इस बात से स्पष्ट है कि वर्तमान कनाडा की संसद ‘हाउस ऑफ कॉमन्स (House of Commons of Canada)’ में भी भारतीय मूल के अनेक सांसद प्रतिनिधित्व करते हैं, जो दोनों देशों के बीच संबंधों को और सुदृढ़ बनाने में योगदान दे रहे हैं।
भारत और कनाडा के बीच द्विपक्षीय संबंधों की मुख्य चुनौतियाँ :

- खालिस्तानी अलगाववादी कारक : यह भारत और कनाडा के बीच आपसी द्विपक्षीय संबंधों के बीच सबसे बड़ी चुनौती है, क्योंकि कनाडा की वर्तमान सरकार की नीति सिखों के अधिकारों और भारत के साथ संबंधों के बीच संतुलन बनाने में असफल रही है।
- भारतीय वाणिज्य दूतावासों और प्रवासी भारतीयों पर हमले : गैर-सिख भारतीय प्रवासियों, वाणिज्य दूतावासों और मंदिरों पर हमलों ने दोनों देशों के बीच के संबंधों को और अधिक तनावपूर्ण बना दिया है।
- व्यापारिक चुनौतियाँ : जटिल श्रम कानून, बाजार संरक्षणवाद और नौकरशाही से संबंधित बाधाएँ दोनों देशों के बीच के आपसी व्यापार संबंधों में रुकावट डाल रही हैं। सीईपीए और बीआईपीपीए जैसे द्विपक्षीय समझौतों पर बातचीत में अभी तक कोई प्रगति नहीं हुई है, और जी-20 शिखर सम्मेलन से पहले कनाडा ने भारत के साथ व्यापार वार्ता रोक दी है। ये तमाम कारकों ने भारत और कनाडा के बीच के द्विपक्षीय व्यापार को कम करने में योगदान दिया है।
- चीन और कनाडा के बीच घनिष्ठ संबंध : कनाडा की वर्तमान संघीय सरकार और चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के बीच के आपसी संबंधों ने भी भारत-चीन संबंधों में भी तनाव बढ़ाया है।
समाधान / आगे की राह :

- कनाडा की धरती पर भारत विरोधी अलगाववादी आंदोलनों की अनुमति नहीं देना : भारत सरकार ने कनाडा के वर्तमान सरकार को स्पष्ट रूप से बता दिया है कि है कि वे भारत विरोधी अलगाववादी आंदोलनों को कनाडा की धरती पर अनुमति नहीं दे सकते हैं। अगर भारत और कनाडा को आपस में द्विपक्षीय संबंधों को सुधारना है तो निम्नलिखित रणनीति भारत और कनाडा के बीच विवादों को कम करने और दोनों देशों के बीच संबंधों को सुधारने में सहायक हो सकती है।
- दोनों देशों को रचनात्मक और सतत सहभागिता को बढ़ावा देना : भारत को सिख समुदाय के साथ रचनात्मक और स्थायी संबंध स्थापित करने होंगे और खालिस्तानी अलगाववादियों द्वारा फैलाई जा रही गलत सूचनाओं का मुकाबला करना होगा, ताकि पंजाब में बढ़ रही असंतोष की भवना को रोका जा सके।
- आपस में सहयोग का नया और बेहतर ढांचा विकसित करना : भारत और कनाडा के आपसी द्विपक्षीय संबंधों के लिए एक व्यावहारिक सहयोग ढांचा विकसित करना आवश्यक है, जो व्यापार, ऊर्जा, बुनियादी ढांचे और परिवहन जैसे लाभकारी क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करे और दोनों देशों के परस्पर संबंधों को और अधिक मजबूत कर सके।
- आपस में द्विपक्षीय व्यापार वार्ता को पुनः शुरू करना : भारत और कनाडा को खालिस्तान मुद्दे और अपने व्यापार व निवेश संबंधों में राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता को डीहाइपन करना चाहिए, और आपस में द्विपक्षीय व्यापार वार्ता को पुनः शुरू करना चाहिए, ताकि दोनों देशों के बीच बढ़ रही कटुता और गलतफहमियों को दूर किया जा सके।
- नागरिक समाज संगठनों को बढ़ावा देकर सतत निगरानी कूटनीति का उपयोग करना : दोनों देशों के लोगों के बीच आपसी संपर्क, संवाद और संघर्ष से संबंधित समाधान के उपायों के प्रयासों को बढ़ावा देने के लिए नागरिक समाज संगठनों को बढ़ावा देकर सतत निगरानी कूटनीतिक पहलों को प्रोत्साहित करना चाहिए, ताकि दोनों देशों के नागरिकों के बीच आपसी सांस्कृतिक संबंध और मजबूत हो सके।
- मीडिया और सार्वजनिक कूटनीति को बढ़ावा देना : भारत और कनाडा के बीच के आपसी रिश्तों को सुधारने और मजबूत करने के लिए भड़काऊ मीडिया रिपोर्टिंग की जगह एक जिम्मेदार मीडिया रिपोर्टिंग को बढ़ावा देना चाहिए ताकि मीडिया कवरेज और सार्वजनिक संवाद संबंधों की जटिलताओं और इसे मजबूत करने के लिए किए जा रहे प्रयासों को सटीक रूप से प्रतिबिंबित किया जा सके।
निष्कर्ष :

- भारत और कनाडा के बीच उभरते द्विपक्षीय संबंध अब पुराने तनावों से उबरकर व्यावहारिक सहयोग की ओर बढ़ रहे हैं। आर्थिक साझेदारी, स्वच्छ ऊर्जा और सुरक्षा समन्वय में बढ़ता तालमेल न केवल आपसी विश्वास को पुनर्जीवित करेगा, बल्कि दोनों देशों के विकास को नई गति भी प्रदान करेगा।
- कनाडाई प्रधानमंत्री की यह यात्रा केवल कूटनीतिक बर्फ पिघलने तक सीमित नहीं है, बल्कि व्यापार, ऊर्जा और रक्षा जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में एक महत्वाकांक्षी और दीर्घकालिक साझेदारी की नींव रखती है।
- भारत और कनाडा के बीच द्विपक्षीय संबंधों का महत्व बहुआयामी है, जो भू-राजनीति से लेकर अर्थव्यवस्था और जनसांख्यिकी तक फैला हुआ है।
- एक स्थिर और संतुलित भारत-कनाडा द्विपक्षीय संबंध एक स्वतंत्र, खुले और लचीले इंडो-पैसिफिक क्षेत्र की मजबूती के लिए भी अनिवार्य है।
- भारत और कनाडा द्विपक्षीय संबंध के परिप्रेक्ष्य में यह एक ऐसा गठबंधन है जो न केवल द्विपक्षीय विकास को गति देगा, बल्कि व्यापार, रक्षा और ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में एक दीर्घकालिक और महत्वाकांक्षी रणनीतिक साझेदारी का शंखनाद भी है।
- इस प्रकार भारत और कनाडा के बीच संबंध केवल आर्थिक या कूटनीतिक आयाम तक सीमित नहीं हैं, बल्कि रणनीतिक, शैक्षणिक, तकनीकी और सामाजिक स्तर पर भी गहराई से जुड़े हुए हैं, जो भविष्य में व्यापक वैश्विक सहयोग की संभावनाओं को और मजबूत बनाते हैं।
स्त्रोत – पी.आई.बी एवं द हिन्दू।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न :
Q.1. भारत और कनाडा के बीच व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौता (CEPA) का क्या लाभ हो सकता है?
- व्यापार में वृद्धि और निवेश में बढ़ोतरी।
- कृषि क्षेत्र में सुधार और स्वास्थ्य प्रौद्योगिकी।
- सांस्कृतिक जागरूकता एवं पर्यटन प्रचार।
- तकनीकी नवाचार एवं वैज्ञानिक डेटा का आदान-प्रदान।
उपर्युक्त में से कौन सा कथन सही है?
A. केवल 1 और 3
B. केवल 2 और 4
C. इनमें से कोई नहीं।
D. उपरोक्त सभी।
उत्तर – B
मुख्य परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न :
Q.1. भारत और कनाडा के द्विपक्षीय संबंधों में अंतरिक्ष, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में सहयोग हेतु किए गए समझौता ज्ञापनों और व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौते का विश्लेषण करते हुए, यह चर्चा कीजिए कि इन समझौतों के माध्यम से भारत-कनाडा संबंधों में संभावित चुनौतियाँ और भविष्य की दिशा क्या हो सकती है? ( शब्द सीमा – 250 अंक – 15 )

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