भारत का विनिर्माण क्षेत्र : $1 ट्रिलियन अर्थव्यवस्था की ओर अग्रसर

भारत का विनिर्माण क्षेत्र : $1 ट्रिलियन अर्थव्यवस्था की ओर अग्रसर

पाठ्यक्रम मानचित्रण – सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र – 3 – के अंतर्गत भारतीय अर्थव्यवस्था का विकास – भारत का विनिर्माण क्षेत्र : $1 ट्रिलियन अर्थव्यवस्था की ओर अग्रसर

प्रारंभिक परीक्षा के लिए – औद्योगिक उत्पादन सूचकांक, उत्पादन-आधारित प्रोत्साहन (PLI) योजना, पीएम मित्र, सकल घरेलू उत्पाद, राष्ट्रीय विनिर्माण मिशन (NMM), प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) 

मुख्य परीक्षा के लिए – भारत की अर्थव्यवस्था में विनिर्माण क्षेत्र की भूमिका का विश्लेषण कीजिए तथा इससे जुड़ी प्रमुख चुनौतियों और उनके समाधान पर विस्तार से चर्चा कीजिए।

 

खबरों में क्यों?

 

  • हाल ही जुलाई 2025 में जारी आंकड़ों के अनुसार, औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP) में 3.5% की वार्षिक वृद्धि दर्ज की गई, जिसमें विनिर्माण क्षेत्र का योगदान सबसे महत्वपूर्ण रहा है। भारत का विनिर्माण क्षेत्र वर्तमान में अपनी आर्थिक यात्रा में एक उल्लेखनीय गति दर्शा रहा है, जो इसे आर्थिक विकास का एक प्रमुख इंजन बना रहा है। 
  • भारत के विनिर्माण क्षेत्र ने अकेले 5.4% की प्रभावशाली वृद्धि दर्ज की, जो देश की औद्योगिक मजबूती का स्पष्ट संकेत है। यह गति कई महत्वपूर्ण नीतिगत पहलों का परिणाम है, जिनमें उत्पादन-आधारित प्रोत्साहन (PLI) योजना, पीएम मित्र (PM MITRA) वस्त्र पार्क, राष्ट्रीय विनिर्माण मिशन (NMM) और स्किल इंडिया कार्यक्रम शामिल हैं। ये पहलें न केवल घरेलू विनिर्माण को मजबूत कर रही हैं और निर्यात को बढ़ावा दे रही हैं, बल्कि देश भर में रोजगार के महत्वपूर्ण अवसर भी सृजित कर रही हैं।
  • इलेक्ट्रॉनिक्स, फार्मास्यूटिकल्स, ऑटोमोबाइल और वस्त्र उद्योग जैसे प्रमुख क्षेत्र इस विकास के इंजन बनकर उभर रहे हैं। यह सब भारत की महत्वाकांक्षा को दर्शाता है कि वह वित्त वर्ष 2026 (FY26) तक $1 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर की विनिर्माण अर्थव्यवस्था बने और विश्व मानचित्र पर एक वैश्विक विनिर्माण केंद्र के रूप में अपनी स्थिति मजबूत करे।

 

भारत के विनिर्माण क्षेत्र का अर्थव्यवस्था में विस्तृत योगदान : 

 

 

सकल घरेलू उत्पाद (GDP) और औद्योगिक उत्पादन में मजबूती प्रदान करना : 

 

  • देश में विनिर्माण क्षेत्र भारतीय सकल घरेलू उत्पाद (GDP) का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। उदाहरण के लिए, ऑटोमोबाइल क्षेत्र अकेले जीडीपी में लगभग 7.1% का योगदान देता है और लाखों लोगों को रोजगार प्रदान करता है। इसी तरह, वस्त्र उद्योग जीडीपी में लगभग 2.3% का योगदान देता है और कृषि के बाद यह दूसरा सबसे बड़ा रोजगार प्रदाता है।
  • औद्योगिक उत्पादन के मोर्चे पर, जुलाई में औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP) में 3.5% की वृद्धि दर्ज की गई। इस वृद्धि में विनिर्माण क्षेत्र की 5.4% वृद्धि का प्रमुख योगदान रहा। यह गति मुख्य रूप से कुछ प्रमुख उप-क्षेत्रों से आई: मूल धातुओं में 12.7% की वृद्धि हुई, विद्युत उपकरणों में 15.9% की उल्लेखनीय वृद्धि हुई, और गैर-धात्विक खनिजों ने 9.5% की स्वस्थ वृद्धि दर्ज की। ये आंकड़े उत्पादन और अवसंरचना में तेजी का संकेत देते हैं।

 

निर्यात और विदेशी निवेश (FDI) का आकर्षण : 

 

  • विनिर्माण क्षेत्र भारत के व्यापार संतुलन के लिए महत्वपूर्ण है। अप्रैल से अगस्त 2025 की अवधि में माल निर्यात का मूल्य US$ 184.13 बिलियन रहा, जो पिछले वर्ष की तुलना में 2.52% अधिक है। 
  • इस निर्यात वृद्धि में इलेक्ट्रॉनिक्स, फार्मा और ऑटोमोबाइल जैसे क्षेत्र अग्रणी रहे। उत्पादन-आधारित प्रोत्साहन (PLI) योजना के कारण इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात में विशेष रूप से बड़ा उछाल देखा गया है।
  • यह क्षेत्र प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) का एक बड़ा आकर्षण केंद्र भी है। वित्त वर्ष 2024–25 में भारत को US$ 19.04 बिलियन का FDI प्राप्त हुआ, जो वैश्विक निवेशकों का भारत की उत्पादन क्षमता पर विश्वास दर्शाता है। 
  • इस निवेश को आकर्षित करने वाले शीर्ष राज्य महाराष्ट्र (39%), कर्नाटक (13%) और दिल्ली (12%) रहे, जबकि सिंगापुर (30%) शीर्ष निवेशक बनकर उभरा है।

 

रोजगार सृजन और कुशल कार्यबल विकास :

 

  • भारत में विनिर्माण क्षेत्र ने पिछले एक दशक में 17 करोड़ नौकरियाँ सृजित करके एक महत्वपूर्ण सामाजिक-आर्थिक भूमिका निभाई है। 
  • वर्तमान समय में, इस क्षेत्र का कार्यबल भागीदारी दर (WPR) 52.2% है, जिसमें महिला WPR 32% तक पहुँच गई है। 
  • स्किल इंडिया कार्यक्रम विनिर्माण क्षेत्र की विशिष्ट आवश्यकताओं के अनुसार कार्यबल को प्रशिक्षित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है, जिससे औपचारिक रोजगार सृजन को बढ़ावा मिल रहा है।

 

विनिर्माण क्षेत्र से संबंधित प्रमुख नीतिगत पहलें :

 

भारत सरकार ने विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए एक बहुआयामी रणनीति अपनाई है – 

  1. उत्पादन-आधारित प्रोत्साहन (PLI) योजना :

 

 

  • उद्देश्य : घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देना, बड़े निवेश को आकर्षित करना और भारतीय कंपनियों को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाना।
  • सफलता  : यह योजना एक अभूतपूर्व सफलता रही है, खासकर इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में। भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात ₹3.27 लाख करोड़ के पार चला गया है, जिसमें स्मार्टफोन निर्यात अकेले ₹2 लाख करोड़ तक पहुँच गया है, जो वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं में भारत के एकीकरण को दर्शाता है।

 

  1. राष्ट्रीय विनिर्माण मिशन (NMM) :

 

  • उद्देश्य : सतत विनिर्माण के लिए एक रणनीतिक रोडमैप तैयार करना, नवाचार को बढ़ावा देना और पर्यावरणीय अनुपालन सुनिश्चित करना।
  • सफलता : यह मिशन स्वच्छ प्रौद्योगिकी उद्योगों के विकास और देश के नेट-ज़ीरो 2070 लक्ष्य के साथ विनिर्माण प्रक्रियाओं को संरेखित करने पर केंद्रित है, जिससे एक भविष्य-तैयार औद्योगिक आधार का निर्माण हो रहा है।

 

  1. पीएम मित्र वस्त्र पार्क (PM MITRA) : 

 

  • उद्देश्य : विश्व स्तरीय एकीकृत वस्त्र और परिधान क्लस्टर बनाना, लॉजिस्टिक्स लागत कम करना और एंड-टू-एंड विनिर्माण को सक्षम करना।
  • सफलता : धार (मध्य प्रदेश) जैसे स्थानों पर पार्क स्थापित किए जा रहे हैं, जिसमें 1,300 एकड़ का क्षेत्र शामिल है। ये पार्क 80 से अधिक विनिर्माण इकाइयों को आकर्षित करने और 3 लाख तक संभावित नौकरियाँ सृजित करने की क्षमता रखते हैं।

 

  1. जीएसटी 2.0 और व्यवसाय सुगमता :

 

  • उद्देश्य : कर स्लैब को सरल बनाना, दरों में कमी करना और अनुपालन को आसान बनाना, जिससे विनिर्माण की लागत कम हो।
  • सफलता : वस्त्र और चमड़ा उत्पादों पर 5% जीएसटी और ट्रक व वैन पर 18% जीएसटी जैसे कदम लॉजिस्टिक्स और उत्पादन लागत को तर्कसंगत बनाते हैं।

 

  1. स्किल इंडिया कार्यक्रम : 

 

  • उद्देश्य : आधुनिक विनिर्माण की बदलती जरूरतों के अनुरूप कुशल कार्यबल तैयार करना।
  • सफलता : इस पहल के तहत ₹8,800 करोड़ का आवंटन किया गया है। प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (PMKVY) 4.0 और विभिन्न अप्रेंटिसशिप योजनाएँ उद्योग की मांगों को पूरा करने के लिए कार्यबल को अपस्किल और रीस्किल कर रही हैं।

 

  1. राष्ट्रीय लॉजिस्टिक्स नीति (NLP) : 

 

  • उद्देश्य : लॉजिस्टिक्स लागत को कम करना, दक्षता में सुधार करना और विनिर्माण उत्पादों की आवाजाही को सुव्यवस्थित करना।
  • सफलता : यह नीति पीएम गति शक्ति के साथ एकीकृत है, जो भौतिक और डिजिटल प्रणालियों के माध्यम से लॉजिस्टिक्स पार्क और बेहतर संपर्क विकसित कर रही है।

 

भारत के विनिर्माण क्षेत्र की प्रमुख चुनौतियाँ : 

भारत को वैश्विक विनिर्माण केंद्र बनने के लिए निम्नलिखित चुनौतियों का समाधान करना होगा –

 

क्षेत्र-विशिष्ट या क्षेत्र – आधारित समस्याएँ : 

 

  • इलेक्ट्रॉनिक्स : निर्यात बढ़ने के बावजूद, हम अभी भी कई महत्वपूर्ण पुर्जों के आयात पर निर्भर हैं। सरकार का लक्ष्य 2024-25 तक इस निर्भरता को कम करना है।
  • फार्मा : भारतीय फार्मा उद्योग वैश्विक टीकों का 50% और अमेरिका को 40% जेनेरिक दवाएँ देता है। हालाँकि, यह चीन जैसे देशों से कच्चे माल (API) की उपलब्धता और तीव्र वैश्विक प्रतिस्पर्धा के प्रति संवेदनशील है।
  • ऑटोमोबाइल : इलेक्ट्रिक वाहन (EV) और बैटरी इकोसिस्टम के लिए उन्नत अवसंरचना और तकनीकी क्षमताओं की कमी है। EV क्रांति के लिए बड़े निवेश की आवश्यकता है।
  • वस्त्र : इस उद्योग की 80% क्षमता MSME क्लस्टर में है। इन क्लस्टरों के आधुनिकीकरण और वैश्विक गुणवत्ता मानकों को अपनाने में चुनौती है, जो रोजगार सृजन के लिए महत्वपूर्ण है।

 

व्यापक संगठनात्मक बाधाएँ : 

 

  • लॉजिस्टिक्स : भारत में लॉजिस्टिक्स की लागत अभी भी वैश्विक मानकों से अधिक है। राष्ट्रीय लॉजिस्टिक्स नीति (NLP) का उद्देश्य इस लागत को कम करना और लॉजिस्टिक्स परफॉर्मेंस इंडेक्स (LPI) रैंक में सुधार करना है।
  • कुशल श्रमिकों की कमी : रोबोटिक्स और AI जैसी उन्नत विनिर्माण तकनीकों के लिए प्रशिक्षित कुशल श्रमिकों की कमी है। स्किल इंडिया कार्यक्रम को इस अंतर को पाटने के लिए पुनर्गठन की आवश्यकता है।
  • नियामक ढाँचा में व्याप्त समस्याएं : अत्यधिक अनुपालन बोझ और नियामक विलंब से ‘व्यवसाय करने में सुगमता’ प्रभावित होती है। GST 2.0 का उद्देश्य इन प्रक्रियाओं को और सरल बनाना है।

 

समाधान / आगे की राह :

 

कौशल विकास और अवसंरचना के क्षेत्र में निवेश करने की अत्यंत जरूरत : 

 

  • कौशल विकास : हमें आधुनिक विनिर्माण की विशिष्ट मांग-आधारित प्रशिक्षण पर ध्यान देना चाहिए। स्किल इंडिया को उन्नत विनिर्माण क्षेत्रों के लिए उद्योग के साथ मिलकर पाठ्यक्रम तैयार करने चाहिए।
  • विश्व-स्तरीय अवसंरचना : हमें औद्योगिक गलियारों, पीएम मित्र पार्कों और मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक्स एकीकरण पर तेज़ी से काम करना चाहिए। पीएम गति शक्ति के माध्यम से लॉजिस्टिक्स लागत को कम करने के लिए इन्हें समय पर लागू करना आवश्यक है।

 

स्वच्छ-प्रौद्योगिकी और व्यापार सुगमता अनुपालन प्रक्रियाओं को और अधिक सरल बनाने की आवश्यकता : 

 

  • प्रौद्योगिकी और नवाचार : विनिर्माण में स्वच्छ-प्रौद्योगिकी, डिजिटल विनिर्माण (उद्योग 4.0), और स्वचालन को बढ़ावा देना चाहिए। PLI योजनाओं को EV, हरित ऊर्जा और उन्नत फार्मा जैसे भविष्योन्मुखी क्षेत्रों पर अधिक केंद्रित करना चाहिए।
  • व्यवसाय सुगमता : अनुपालन प्रक्रियाओं को और सरल बनाना तथा GST के बोझ को तर्कसंगत बनाना आवश्यक है। स्टार्टअप इंडिया पहल का लाभ उठाकर नवाचार को बढ़ावा दिया जाए और वैश्विक निवेश को आकर्षित करने के लिए कर संरचनाओं को प्रतिस्पर्धी बनाया जाए।

 

निर्यात प्रतिस्पर्धा और सतत विकास के तहत नवीकरणीय ऊर्जा का उपयोग बढ़ाने की जरूरत : 

 

  • निर्यात प्रतिस्पर्धा : हमें गुणवत्ता मानकों को बढ़ाना चाहिए और बड़े पैमाने पर उत्पादन को प्रोत्साहित करना चाहिए।
  • सतत विकास : हरित विनिर्माण को अपनाना और नवीकरणीय ऊर्जा का उपयोग बढ़ाना महत्वपूर्ण है। नेट-ज़ीरो 2070 लक्ष्य के साथ विनिर्माण को संरेखित करने के लिए सख्त पर्यावरणीय दिशानिर्देशों को लागू करना चाहिए।

 

निष्कर्ष : 

 

 

  • भारत को $1 ट्रिलियन विनिर्माण अर्थव्यवस्था बनने और एक स्थायी वैश्विक केंद्र बनने के लिए एक केंद्रित रणनीति को अपनाने की आवश्यकता है।
  • विनिर्माण क्षेत्र भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ है और इसका योगदान कई मायनों में महत्वपूर्ण है। जुलाई 2025 में 5.4% की मजबूत वृद्धि के साथ, यह न केवल रोजगार सृजन और नवाचार को प्रोत्साहन दे रहा है, बल्कि निर्यात और निवेश का एक वैश्विक केंद्र बनने की ओर भी अग्रसर है।
  • सतत नीति समर्थन, एक कुशल और आधुनिक कार्यबल का विकास, प्रौद्योगिकीय अंगीकरण में निवेश और हरित विनिर्माण पर ध्यान केंद्रित करने के बल पर, भारत FY26 तक $1 ट्रिलियन डॉलर की विनिर्माण अर्थव्यवस्था बनने के अपने लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए अच्छी तरह से तैयार है। 
  • यह सफलता न केवल वर्तमान आर्थिक विकास को बढ़ावा देगी, बल्कि “विकसित भारत 2047” की औद्योगिक नींव को भी निर्णायक रूप से मजबूत करेगी।

 

स्त्रोत – पी. आई. बी एवं द हिन्दू। 

 

प्रारंभिक परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न : 

 

Q.1. भारत की उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (PLI) योजना के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए।

  1. PLI योजना में वित्तीय प्रोत्साहन सीधे तौर पर उत्पादन व बिक्री में वृद्धि से जुड़े हैं।
  2. यह 14 प्रमुख क्षेत्रों को कवर करती है, जिनमें इलेक्ट्रॉनिक्स, फार्मा, वस्त्र एवं ड्रोन शामिल हैं।
  3. इस योजना का उद्देश्य घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देना एवं आयात पर निर्भरता घटाना है।
  4. PLI लाभ केवल सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों तक सीमित है।

नीचे दिए गए विकल्पों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
(a) 1, 2 और 3 केवल
(b) 1 और 4 केवल
(c) 2 और 4 केवल
(d) 1, 2, 3 और 4

उत्तर: (a)

मुख्य परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न : 

 

Q.1. भारत के विनिर्माण क्षेत्र को $1 ट्रिलियन अर्थव्यवस्था की ओर अग्रसर बनाने में उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (PLI) योजना की भूमिका का विश्लेषण कीजिए तथा इसकी संभावनाओं और चुनौतियों पर चर्चा कीजिए। ( शब्द सीमा – 250 अंक – 15 )

 

Dr. Akhilesh Kumar Shrivastava
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