भारत-मलेशिया संबंध : व्यापक रणनीतिक साझेदारी के नए आयाम

भारत-मलेशिया संबंध : व्यापक रणनीतिक साझेदारी के नए आयाम

भारत-मलेशिया संबंध : व्यापक रणनीतिक साझेदारी के नए आयाम

सामान्य अध्ययन-II : अंतर्राष्ट्रीय संबंध

चर्चा में क्यों? 

हाल के वर्षों में भारत की ‘एक्ट ईस्ट’ नीति के तहत दक्षिण-पूर्व एशिया के साथ संबंधों में एक नई गतिशीलता देखी गई है। इसी क्रम में, अगस्त 2024 में भारत के प्रधानमंत्री की मलेशिया की आधिकारिक यात्रा ने द्विपक्षीय संबंधों के इतिहास में एक मील का पत्थर स्थापित किया। इस यात्रा के दौरान दोनों देशों ने अपने संबंधों को ‘व्याप व्यापक रणनीतिक साझेदारी’ (Comprehensive Strategic Partnership- CSP) के स्तर पर उन्नत करने का निर्णय लिया, जो न केवल आर्थिक एकीकरण बल्कि क्षेत्रीय स्थिरता और सुरक्षा के प्रति साझा प्रतिबद्धता को भी दर्शाता है। भारत और मलेशिया के बीच यह नया तालमेल बदलते वैश्विक परिदृश्य, विशेष रूप से इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में उभरती चुनौतियों के बीच अत्यंत प्रासंगिक है।

ऐतिहासिक और सांस्कृतिक आधार : 

  • भारत और मलेशिया के संबंध केवल आधुनिक कूटनीति तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इनकी जड़ें हज़ारों वर्ष पुरानी हैं। चोल काल (9वीं-13वीं शताब्दी) के दौरान दक्षिण भारत और मलय प्रायद्वीप के बीच व्यापक समुद्री व्यापार ने इन संबंधों की प्रारंभिक नींव रखी थी। राजराज चोल प्रथम और राजेंद्र चोल द्वितीय जैसे शासकों के समय भारतीय नौसैनिक शक्ति का प्रभाव वर्तमान मलेशिया के हिस्सों तक फैला हुआ था।
  •  मलेशिया में लगभग 29 लाख (2.9 मिलियन) भारतीय प्रवासी निवास करते हैं, जो विश्व स्तर पर तीसरा सबसे बड़ा भारतीय प्रवासी समुदाय है। यह समुदाय दोनों देशों के बीच एक जीवंत सेतु का कार्य करता है।
  • सांस्कृतिक संबंधों को और प्रगाढ़ करने के उद्देश्य से हाल ही में ‘यूनिवर्सिटी ऑफ मलाया’ में ‘तिरुवल्लुवर चेयर’ की स्थापना और मलेशियाई नागरिकों के लिए ‘तिरुवल्लुवर छात्रवृत्ति’ की शुरुआत की गई है। इसके अतिरिक्त, मलेशिया में तमिल सिनेमा की लोकप्रियता, विशेष रूप से एम.जी. रामचंद्रन की विरासत, दोनों समाजों के बीच गहरे भावनात्मक जुड़ाव को दर्शाती है

सामरिक और रक्षा सहयोग : 

  • CSP के तहत रक्षा और सुरक्षा सहयोग को एक नया ढांचा प्रदान किया गया है। ‘रणनीतिक मामलों पर कार्य समूह’ (SAWG) और ‘Su-30 फोरम’ का गठन किया जाना एक महत्वपूर्ण कदम है। Su-30 फोरम के माध्यम से दोनों देशों की वायु सेनाएं रखरखाव और तकनीकी विशेषज्ञता साझा करेंगी, जिससे आपूर्ति श्रृंखला की बाधाओं को दूर किया जा सकेगा।
  • दोनों देश नियमित रूप से संयुक्त सैन्य अभ्यास करते हैं, जिनमें ‘हरिमऊ शक्ति’ (थल सेना), ‘समुद्र लक्ष्मण’ (नौसेना) और ‘उदारशक्ति’ (वायु सेना) प्रमुख हैं। भारत अब मलेशिया के लिए तेजस लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (LCA) और ब्रह्मोस मिसाइल जैसे रक्षा प्लेटफार्मों के लिए एक विश्वसनीय आपूर्तिकर्ता के रूप में उभर रहा है।
  • आतंकवाद के विरुद्ध ‘शून्य सहिष्णुता’ की साझा नीति और सीमा पार आतंकवाद को रोकने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग पर दोनों देशों का एकमत होना सुरक्षा संबंधों की गंभीरता को दर्शाता है।

आर्थिक और व्यापारिक साझेदारी : 

  • आर्थिक मोर्चे पर, मलेशिया आसियान (ASEAN) देशों में भारत का तीसरा सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार है। वर्ष 2024-25 में द्विपक्षीय व्यापार लगभग 19.86 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुँच गया है।
  • व्यापार को और अधिक सुगम बनाने के लिए दोनों देशों ने स्थानीय मुद्राओं (भारतीय रुपया और मलेशियाई रिंगित – INR-MYR) में व्यापार निपटान को प्रोत्साहित करने का समझौता किया है, जिससे अमेरिकी डॉलर पर निर्भरता कम होगी।
  • खाद्य सुरक्षा के क्षेत्र में मलेशिया भारत के लिए पाम ऑयल का एक विश्वसनीय स्रोत बना हुआ है। साथ ही, भविष्य की अर्थव्यवस्था को ध्यान में रखते हुए डिजिटल अर्थव्यवस्था, सेमीकंडक्टर और हरित ऊर्जा में सहयोग बढ़ाया जा रहा है।
  • मलेशियाई कंपनियां भारत के सौर ऊर्जा और ग्रीन हाइड्रोजन क्षेत्रों में निवेश कर रही हैं। ‘मलेशिया-भारत डिजिटल परिषद’ (MIDC) का गठन और NPCI इंटरनेशनल लिमिटेड एवं मलेशिया के ‘PayNet’ के बीच साझेदारी डिजिटल भुगतान और फिनटेक के क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव लाने के संकेत हैं

क्षेत्रीय और बहुपक्षीय सहयोग : 

  • भारत और मलेशिया दोनों ही ‘आसियान की केंद्रीयता’ (ASEAN Centrality) और ‘इंडो-पैसिफिक क्षेत्र’ में नियम-आधारित व्यवस्था के समर्थक हैं। भारत की ‘इंडो-पैसिफिक ओशन्स इनिशिएटिव’ (IPOI) और ‘आसियान आउटलुक ऑन द इंडो-पैसिफिक’ (AOIP) के बीच तालमेल बिठाने पर सहमति बनी है।
  • मलेशिया ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में भारत की स्थायी सदस्यता के दावे का समर्थन किया है और वह भारत के नेतृत्व वाले ‘इंटरनेशनल बिग कैट अलायंस’ (IBCA) में भी शामिल हो गया है। ब्रिक्स (BRICS) के संदर्भ में भी दोनों देशों ने एक-दूसरे की भूमिका का समर्थन किया है, जहाँ भारत ने मलेशिया की सदस्यता आकांक्षाओं का स्वागत किया है।

प्रमुख चुनौतियाँ

सहयोग के व्यापक क्षेत्रों के बावजूद, कुछ चुनौतियाँ अभी भी विद्यमान हैं:

1. व्यापार असंतुलन: द्विपक्षीय व्यापार वर्तमान में मलेशिया के पक्ष में झुका हुआ है। भारत का आयात (पाम ऑयल, इलेक्ट्रॉनिक्स, क्रूड ऑयल) उसके निर्यात (माँस, एल्यूमिनियम) की तुलना में बहुत अधिक है।
2. पाम ऑयल कूटनीति: भारत की पाम ऑयल के लिए मलेशिया पर निर्भरता कभी-कभी कूटनीतिक अस्थिरता का कारण बनती है। उदाहरण के लिए, 2019-20 के दौरान राजनीतिक मतभेदों के कारण इस व्यापार पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा था।
3. चीन कारक: चीन मलेशिया का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार और ‘बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव’ (BRI) के माध्यम से एक प्रमुख निवेशक है। जहाँ भारत दक्षिण चीन सागर में कड़ा रुख अपनाता है, वहीं मलेशिया प्रायः कूटनीतिक और शांतिपूर्ण दृष्टिकोण को प्राथमिकता देता है।
4. विगत राजनीतिक टिप्पणियाँ: पूर्व में कुछ मलेशियाई नेताओं द्वारा अनुच्छेद 370 और CAA जैसे भारत के आंतरिक मामलों पर की गई टिप्पणियों ने संबंधों में तनाव पैदा किया था, जिसे वर्तमान नेतृत्व अब सुधारने का प्रयास कर रहा है।

आगे की राह  : 

भारत-मलेशिया संबंधों को सुदृढ़ करने के लिए निम्नलिखित कदम उठाए जाने आवश्यक हैं:
• रक्षा निर्यात और सुरक्षा: भारत को मलेशिया के लिए एक विश्वसनीय रक्षा भागीदार के रूप में स्वयं को स्थापित करना चाहिए, जिससे क्षेत्र में चीन के प्रभाव को संतुलित किया जा सके। साथ ही, मलक्का जलडमरूमध्य की संवेदनशीलता को देखते हुए ‘समुद्री क्षेत्र जागरूकता’ (MDA) पर सहयोग बढ़ाना चाहिए।
• व्यापार समझौते की समीक्षा: भारत को ‘आसियान-भारत वस्तु व्यापार समझौता’ (AITIGA) की समीक्षा को 2026-27 तक पूरा करने का प्रयास करना चाहिए ताकि व्यापार घाटे को कम किया जा सके।
• सॉफ्ट पावर का उपयोग: साझा सांस्कृतिक विरासत, विशेषकर तमिल भाषा और संस्कृति का उपयोग जन-संपर्क को मज़बूत करने के लिए किया जाना चाहिए
• दीर्घकालिक अनुबंध: पाम ऑयल जैसे संवेदनशील उत्पादों के लिए सरकार-से-सरकार (G2G) स्तर पर दीर्घकालिक अनुबंध करने से मूल्य स्थिरता और आपूर्ति सुनिश्चित हो सकेगी।

निष्कर्ष : 

भारत और मलेशिया के संबंधों का भविष्य केवल लेन-देन या ‘पाम ऑयल की खरीद’ तक सीमित नहीं रहना चाहिए। भविष्य की साझेदारी ‘चिप्स और जेट’ (सेमीकंडक्टर और रक्षा विमान) जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में होनी चाहिए, ताकि दोनों देश एक अस्थिर इंडो-पैसिफिक शताब्दी में अपनी स्वायत्तता और समृद्धि को सुरक्षित रख सकें।

प्रारंभिक परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न :

Q.भारत और मलेशिया के बीच ‘व्यापक रणनीतिक साझेदारी’ (Comprehensive Strategic Partnership – CSP) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1.CSP का उद्देश्य केवल द्विपक्षीय व्यापार और निवेश को बढ़ाना है।
2.Su-30 फोरम के माध्यम से दोनों देशों की वायु सेनाओं के बीच तकनीकी सहयोग को संस्थागत रूप दिया गया है।
3.भारत और मलेशिया दोनों ही ‘आसियान केंद्रीयता’ और नियम-आधारित इंडो-पैसिफिक व्यवस्था के समर्थक हैं।
4. मलेशिया ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी सदस्यता के दावे का समर्थन किया है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?
(a) 1 और 2
(b) 2, 3 और 4
(c) 1, 3 और 4
(d) 1, 2, 3 और 4

उत्तर: (b) 2, 3 और 4

 मुख्य परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न :

Q.“भारत और मलेशिया के बीच ‘व्यापक रणनीतिक साझेदारी’ (CSP) इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में भारत की ‘एक्ट ईस्ट नीति’ को नई दिशा प्रदान करती है।”( शब्द सीमा – 250, अंक – 15 )

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