06 Dec भारत में सौर ऊर्जा की प्रगति
पाठ्यक्रम : GS – 3 – पर्यावरण और पारिस्थितिकी
भारत में सौर ऊर्जा की प्रगति : स्वच्छ ऊर्जा नेतृत्व की ओर भारत
भूमिका :
मुख्य बातें
- भारत की सौर ऊर्जा क्षमता 2014 के 3 जीडब्ल्यू से बढ़कर 2025 में 129 जीडब्ल्यू हो गई।
- गैर-जीवाश्म (फॉसिल) ऊर्जा भारत की कुल मौजूदा 500 जीडब्ल्यू क्षमता की 50% से ज्यादा हो गई।
- पीएम सूर्य घर के तहत दिसंबर 2025 तक लगभग 24 लाख घरों ने रूफटॉप सोलर अपनाया है, जिसकी स्थापित क्षमता 7 जीडब्ल्यू स्वच्छ ऊर्जा है और ₹13,464.6 करोड़ की सब्सिडी जारी की गई है।
- पीएम-कुसुम ने भाग बी के तहत लगभग 9.2 लाख स्टैंडअलोन सौर पंप की सुविधा दी, जिससे खेती में स्वच्छ ऊर्जा का इस्तेमाल बढ़ा।
- 31 अक्टूबर 2025 तक, 13 भारतीय राज्यों में 40 जीडब्ल्यू की कुल स्वीकृत क्षमता वाले 55 सौर पार्कों को मंजूरी दी गई है।
पिछले एक दशक में भारत ने सौर ऊर्जा के क्षेत्र में अभूतपूर्व प्रगति की है। 2014 में जहाँ भारत की सौर स्थापित क्षमता मात्र 3 जीडब्ल्यू थी, वहीं 2025 तक यह बढ़कर लगभग 129 जीडब्ल्यू हो गई है। इसके साथ ही भारत की कुल स्थापित विद्युत क्षमता में गैर-जीवाश्म ऊर्जा की हिस्सेदारी 50% से अधिक हो चुकी है। यह उपलब्धि भारत को वैश्विक स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) में अग्रणी देशों की श्रेणी में स्थापित करती है।
सौर ऊर्जा में तीव्र विस्तार
भारत की सौर ऊर्जा क्षमता में लगभग 40 गुना वृद्धि ने न केवल ऊर्जा मिश्रण को हरित बनाया है, बल्कि ऊर्जा सुरक्षा और आत्मनिर्भरता को भी मजबूत किया है। सौर ऊर्जा अब भारत की नवीकरणीय ऊर्जा का सबसे बड़ा स्रोत बन चुकी है, जिसने पवन, जलविद्युत और बायोमास को पीछे छोड़ दिया है।
आईआरईएनए (IRENA) 2025 रिपोर्ट के अनुसार भारत : सौर ऊर्जा क्षमता में विश्व में तीसरे स्थान पर हैपवन ऊर्जा में चौथा, और कुल नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता में चौथे स्थान पर है।
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नीति समर्थन और प्रमुख सरकारी पहलें
1. पंचामृत फ्रेमवर्क के पांच मुख्य हिस्से इस प्रकार हैं:
- 2030 तक 500जीडब्ल्यू गैर–जीवाश्म ईंधन–आधारित स्थापित बिजली क्षमता– इसमें सौर, पवन, बायोमास, पनबिजली और परमाणु ऊर्जा शामिल हैं, इस लक्ष्य का मकसद भारत के बिजली मिश्रण में स्वच्छ ऊर्जा का हिस्सा काफी बढ़ाना है।
- 2030 तक गैर-जीवाश्म स्रोत से स्थापिच बिजली क्षता का 50% हिस्सा – ऊर्जा पोर्टफोलियो में विविधता लाने और जीवाश्व ईंधन पर निर्भरता कम करने के लिए तैयार किया गया है।
- 2030 तक कुल अनुमानित कार्बन उत्सर्जन में 1 अरब टन की कमी – यह स्वच्छ ऊर्जा और बेहतर क्षक्षता उपायों के जरिए ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को कम करने की भारत की प्रतिबद्धता को दिखाता है।
- 2030 तक अर्थव्यवस्था की कार्बन तीव्रता (इंटेंसिटी) में 45% की कमी (2005 के लेवल की तुलना में) – ऊर्जा दक्षती, निम्न–कार्बन प्रौद्योगिकी और सतत औद्योगिक अभ्यासों को बढ़ावा देना।
- 2070 तक नेट जीरो उत्सर्जन– एक लंबे समय का लक्ष्य जिसका मकसद उत्सर्जन को कार्बन हटाने के साथ संतुलित करना है, जिससे सतत विकास सुनिश्चित हो सके।
2. पीएम सूर्य घर योजना
2024 में शुरू की गई इस योजना का उद्देश्य 1 करोड़ घरों को रूफटॉप सोलर से जोड़ना है।
दिसंबर 2025 तक: लगभग 24 लाख घर कवर, 7 जीडब्ल्यू स्वच्छ ऊर्जा स्थापित ₹13,464 करोड़ से अधिक की सब्सिडी जारी
यह योजना विकेंद्रीकृत ऊर्जा, उपभोक्ता सशक्तिकरण और कार्बन उत्सर्जन में कमी का प्रभावी साधन है।
3. पीएम-कुसुम योजना
यह योजना किसानों को ‘ऊर्जा उपभोक्ता’ से ‘ऊर्जा उत्पादक’ बनाने की दिशा में अहम है।
9 लाख से अधिक स्टैंडअलोन सोलर पंप स्थापित
ग्रिड-कनेक्टेड पंपों का सोलराइजेशन
ग्रामीण भारत में स्वच्छ ऊर्जा के विस्तार में यह योजना अत्यंत महत्वपूर्ण है।
4. सोलर पीवी हेतु पीएलआई योजना : ₹24,000 करोड़ की इस योजना का उद्देश्य:
घरेलू सोलर पीवी विनिर्माण को बढ़ावा
आयात निर्भरता कम करना
गीगावॉट-स्तरीय उत्पादन क्षमता विकसित करना
अब तक इस योजना से:₹50,000 करोड़ से अधिक निवेश , 40,000+ रोजगार का सृजन हुआ है।
5. सौर पार्क और बड़े पैमाने की परियोजनाएँ
13 राज्यों में 55 सौर पार्कों को मंजूरी दी गई है, जिनकी कुल स्वीकृत क्षमता लगभग 40 जीडब्ल्यू है। ये पार्क बड़े पैमाने पर सौर परियोजनाओं के लिए साझा ढाँचागत सुविधाएँ प्रदान करते हैं, जिससे लागत और जोखिम कम होते हैं।
वैश्विक नेतृत्व और अंतर्राष्ट्रीय भूमिका
भारत-फ्रांस द्वारा स्थापित अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन (ISA) के माध्यम से भारत ने 125 से अधिक देशों को सौर ऊर्जा अपनाने में मदद की है।
“वन सन, वन वर्ल्ड, वन ग्रिड (OSOWOG)” पहल वैश्विक ऊर्जा सहयोग की भारत की दृष्टि को दर्शाती है।
निष्कर्ष:
भारत की सौर ऊर्जा यात्रा यह दर्शाती है कि स्पष्ट लक्ष्य, मज़बूत नीतियाँ और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग किसी भी देश को स्वच्छ ऊर्जा नेतृत्व की ओर ले जा सकते हैं। सौर ऊर्जा आज भारत के लिए केवल बिजली उत्पादन का साधन नहीं, बल्कि सतत विकास, ऊर्जा सुरक्षा और जलवायु नेतृत्व का आधार बन चुकी है। भविष्य में नवाचार, भंडारण तकनीक और समावेशी नीति ढाँचा भारत को वैश्विक हरित ऊर्जा परिवर्तन का पथप्रदर्शक बना सकता है।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न :
Q.निम्नलिखित में से कौन-सा कथन भारत की सौर ऊर्जा प्रगति के संदर्भ में सही है?
1.भारत ने 2030 का 50% गैर-जीवाश्म विद्युत क्षमता वाला लक्ष्य 2025 में ही हासिल कर लिया है।
2.पीएम सूर्य घर योजना का उद्देश्य केवल कमर्शियल उपभोक्ताओं को सौर ऊर्जा से जोड़ना है।
3. सौर पीवी के लिए पीएलआई योजना घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने से संबंधित है।
नीचे दिए गए कूट का उपयोग कर सही उत्तर चुनिए:
(a) 1 और 3 केवल
(b) 2 और 3 केवल
(c) 1 केवल
(d) 1, 2 और 3
उत्तर: (a)
मुख्य परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न :
Q. भारत में सौर ऊर्जा के तीव्र विकास के कारणों की चर्चा कीजिए। इस संदर्भ में हाल की प्रमुख सरकारी पहलों और पंचामृत फ्रेमवर्क की भूमिका का विश्लेषण कीजिए। ( शब्द सीमा – 250, अंक – 15 )
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