18 Sep भारतीय नौसेना के लिए दूसरी पीढ़ी के मिसाइल पोत की स्टील कटिंग: आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा कदम
✎ अगली पीढ़ी के मिसाइल पोत (NGMV) परियोजना भारतीय नौसेना की लड़ाकू क्षमताओं को बढ़ाने और रक्षा क्षेत्र में 'आत्मनिर्भर भारत' के लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण स्वदेशी पहल है।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS पेपर III — आंतरिक सुरक्षा और रक्षा | GS पेपर III — विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी (रक्षा प्रौद्योगिकी) | GS पेपर III — भारतीय अर्थव्यवस्था (रक्षा विनिर्माण)
- Prelims: अगली पीढ़ी के मिसाइल पोत (NGMV), कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड (CSL), भारतीय नौसेना, आत्मनिर्भर भारत, मेक इन इंडिया, रक्षा अधिग्रहण, स्वदेशीकरण
- Essay: रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता: भारत की रणनीतिक अनिवार्यता, समुद्री सुरक्षा और हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की भूमिका
त्वरित पुनरावृत्ति: अगली पीढ़ी के मिसाइल पोत (NGMV) परियोजना भारतीय नौसेना की लड़ाकू क्षमताओं को बढ़ाने और रक्षा क्षेत्र में ‘आत्मनिर्भर भारत’ के लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण स्वदेशी पहल है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
17 सितंबर, 2026 को कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड (CSL), कोच्चि में भारतीय नौसेना के लिए दूसरी अगली पीढ़ी के मिसाइल पोत (NGMV) परियोजना के ‘स्टील कटिंग’ समारोह का आयोजन किया गया। यह घटना भारत के रक्षा विनिर्माण क्षमताओं में आत्मनिर्भरता और स्वदेशीकरण के प्रयासों को रेखांकित करती है, विशेषकर नौसेना की लड़ाकू क्षमताओं को बढ़ाने की दिशा में।
पृष्ठभूमि
- भारतीय नौसेना के लिए NGMV के निर्माण हेतु मार्च 2023 में कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड (CSL) के साथ एक अनुबंध संपन्न हुआ था।
- NGMV को अत्याधुनिक हथियारों और सेंसर से लैस करने की योजना है, जिससे भारतीय नौसेना की लड़ाकू क्षमताएं काफी बढ़ेंगी।
- इन जहाजों का निर्माण हिंद महासागर क्षेत्र (Indian Ocean Region) के जटिल समुद्री वातावरण में संचालन करने में सक्षम एक मजबूत और आधुनिक नौसेना बनाने की भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
- यह परियोजना भारत सरकार की ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘मेक इन इंडिया’ पहल के अनुरूप है, जिसमें रक्षा उपकरणों के स्वदेशी विकास और निर्माण पर जोर दिया गया है।
अगली पीढ़ी के मिसाइल पोत (NGMV) क्या हैं?
- अगली पीढ़ी के मिसाइल पोत (NGMV) भारतीय नौसेना के लिए डिज़ाइन किए गए अत्याधुनिक युद्धपोत हैं।
- इन पोतों को उन्नत मिसाइल प्रणालियों, सेंसर और अन्य युद्ध प्रणालियों से लैस किया जाएगा।
- NGMV का निर्माण भारत में ही किया जा रहा है, जो रक्षा क्षेत्र में स्वदेशीकरण और आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
- ये पोत हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की समुद्री सुरक्षा और रणनीतिक हितों की रक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
- इनका डिज़ाइन जटिल समुद्री वातावरण में उच्च गतिशीलता और प्रभावी संचालन सुनिश्चित करने के लिए किया गया है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| अगली पीढ़ी के मिसाइल पोत (NGMV) | भारतीय नौसेना की युद्धक क्षमताओं में महत्वपूर्ण वृद्धि। |
| अत्याधुनिक हथियार और सेंसर | भविष्य के लिए तैयार और लड़ाकू बल के रूप में नौसेना को सुदृढ़ करना। |
| स्वदेशी विकास और निर्माण | आत्मनिर्भर भारत, मेक इन इंडिया और मेक फॉर द वर्ल्ड पहलों को बढ़ावा। |
| कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड (CSL) द्वारा निर्माण | घरेलू जहाज निर्माण उद्योग की क्षमता और कौशल का प्रदर्शन। |
| हिंद महासागर क्षेत्र में संचालन | भारत की समुद्री सुरक्षा और रणनीतिक हितों की रक्षा। |
महत्व
सामरिक महत्व
- अगली पीढ़ी के मिसाइल पोतों का निर्माण भारतीय नौसेना की मारक क्षमता और परिचालन पहुंच को बढ़ाएगा, विशेष रूप से हिंद महासागर क्षेत्र में।
- ये पोत भारत की समुद्री सुरक्षा को मजबूत करने और क्षेत्रीय शक्ति संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
- आधुनिक हथियारों और सेंसर से लैस होने के कारण, ये पोत भविष्य के समुद्री युद्ध परिदृश्यों में प्रभावी ढंग से कार्य कर सकेंगे।
आर्थिक महत्व
- जहाज निर्माण उद्योग में स्वदेशीकरण से रोजगार सृजन होगा और घरेलू रक्षा विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र को बढ़ावा मिलेगा।
- यह परियोजना कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड (CSL) जैसी सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयों की क्षमताओं को बढ़ाएगी और उन्हें वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाएगी।
- रक्षा आयात पर निर्भरता कम होने से विदेशी मुद्रा की बचत होगी और देश की आर्थिक संप्रभुता मजबूत होगी।
आत्मनिर्भरता और प्रौद्योगिकी
- यह परियोजना ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘मेक इन इंडिया’ जैसी सरकारी पहलों के अनुरूप है, जो रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता प्राप्त करने पर जोर देती है।
- स्वदेशी रूप से विकसित और निर्मित उपकरण भारत के तकनीकी कौशल और इंजीनियरिंग क्षमताओं को प्रदर्शित करते हैं।
- यह रक्षा प्रौद्योगिकी के विकास और नवाचार को प्रोत्साहित करेगा, जिससे भारत वैश्विक रक्षा आपूर्तिकर्ता के रूप में उभर सकता है।
चुनौतियाँ
1. तकनीकी जटिलता और नवाचार
- अत्याधुनिक मिसाइल पोतों के डिजाइन और निर्माण में जटिल प्रौद्योगिकियों का उपयोग होता है, जिसके लिए निरंतर अनुसंधान और विकास की आवश्यकता होती है।
- वैश्विक स्तर पर तेजी से विकसित हो रही रक्षा प्रौद्योगिकियों के साथ तालमेल बिठाना एक चुनौती है।
यूपीएससी लिंक: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी – रक्षा प्रौद्योगिकी
2. लागत और समय पर डिलीवरी
- बड़े रक्षा परियोजनाओं में अक्सर लागत में वृद्धि और डिलीवरी में देरी का जोखिम होता है, जिससे बजट और परिचालन योजनाएं प्रभावित हो सकती हैं।
- परियोजनाओं का समय पर पूरा होना नौसेना की क्षमता निर्माण के लिए महत्वपूर्ण है।
यूपीएससी लिंक: अर्थव्यवस्था – रक्षा व्यय और बजट
3. मानव संसाधन और कौशल
- जटिल युद्धपोतों के निर्माण और रखरखाव के लिए उच्च कुशल इंजीनियरों, तकनीशियनों और श्रमिकों की आवश्यकता होती है।
- आवश्यक कौशल सेट विकसित करने और बनाए रखने के लिए प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण में निवेश महत्वपूर्ण है।
यूपीएससी लिंक: मानव संसाधन विकास – कौशल विकास
4. आपूर्ति श्रृंखला और स्वदेशीकरण
- महत्वपूर्ण घटकों और प्रणालियों के लिए एक मजबूत और विश्वसनीय स्वदेशी आपूर्ति श्रृंखला विकसित करना आवश्यक है।
- कुछ विशिष्ट प्रौद्योगिकियों के लिए अभी भी विदेशी निर्भरता एक चुनौती बनी हुई है।
यूपीएससी लिंक: अर्थव्यवस्था – औद्योगिक नीति, रक्षा विनिर्माण
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| प्रौद्योगिकी हस्तांतरण | महत्वपूर्ण रक्षा प्रौद्योगिकियों तक पहुंच और उनके प्रभावी आत्मसात्करण की आवश्यकता। |
| गुणवत्ता नियंत्रण | युद्धपोतों की उच्च गुणवत्ता और विश्वसनीयता सुनिश्चित करना, जो समुद्री वातावरण में महत्वपूर्ण है। |
| रखरखाव और मरम्मत | जहाजों के जीवनकाल में प्रभावी रखरखाव और मरम्मत सुविधाओं का विकास। |
| साइबर सुरक्षा | आधुनिक युद्धपोतों में एकीकृत उन्नत प्रणालियों को साइबर खतरों से बचाना। |
| वैश्विक प्रतिस्पर्धा | अंतर्राष्ट्रीय रक्षा बाजार में अन्य देशों के साथ प्रतिस्पर्धा बनाए रखना। |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- आत्मनिर्भर भारत
- मेक इन इंडिया
आगे की राह
- रक्षा अनुसंधान और विकास में निवेश बढ़ाना ताकि अत्याधुनिक प्रौद्योगिकियों का स्वदेशी विकास सुनिश्चित हो सके।
- निजी क्षेत्र की भागीदारी को प्रोत्साहित करना और रक्षा विनिर्माण में नवाचार के लिए एक अनुकूल पारिस्थितिकी तंत्र बनाना।
- कौशल विकास कार्यक्रमों को मजबूत करना ताकि जहाज निर्माण और रक्षा प्रौद्योगिकी के लिए आवश्यक मानव संसाधन तैयार किए जा सकें।
- वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं को अपनाते हुए परियोजना प्रबंधन और गुणवत्ता नियंत्रण प्रक्रियाओं में सुधार करना।
- अंतर्राष्ट्रीय सहयोग और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण के माध्यम से महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों तक पहुंच बनाना, जहाँ स्वदेशी विकास संभव न हो।
- रक्षा निर्यात को बढ़ावा देना ताकि ‘मेक फॉर द वर्ल्ड’ के लक्ष्य को प्राप्त किया जा सके और वैश्विक रक्षा आपूर्ति श्रृंखला में भारत की स्थिति मजबूत हो सके।
- एक मजबूत और लचीली स्वदेशी आपूर्ति श्रृंखला विकसित करना ताकि रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भरता बढ़ाई जा सके।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
आत्मनिर्भर भारत · मेक इन इंडिया · रक्षा विनिर्माण · नौसेना आधुनिकीकरण · स्वदेशी रक्षा उत्पादन · कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड · अगली पीढ़ी के मिसाइल पोत · हिंद महासागर क्षेत्र · सामरिक स्वायत्तता · रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता
अवधारणा प्रवाह
रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की आवश्यकता → स्वदेशी जहाज निर्माण को बढ़ावा देना → अगली पीढ़ी के मिसाइल पोतों का निर्माण → भारतीय नौसेना की युद्धक क्षमता में वृद्धि → भारत की समुद्री सुरक्षा और रणनीतिक हितों की रक्षा
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. अगली पीढ़ी के मिसाइल पोत (NGMV) परियोजना का उद्देश्य भारतीय नौसेना की लड़ाकू क्षमताओं को बढ़ाना है।
2. इन पोतों का निर्माण ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘मेक इन इंडिया’ पहल के अनुरूप स्वदेशी रूप से किया जा रहा है।
3. कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड (CSL) भारतीय नौसेना के लिए युद्धपोतों के निर्माण में शामिल एक प्रमुख सार्वजनिक क्षेत्र का उपक्रम है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: सभी तीन — कथन 1 सही है क्योंकि NGMV परियोजना का मुख्य उद्देश्य भारतीय नौसेना की लड़ाकू क्षमताओं को अत्याधुनिक हथियारों और सेंसर के साथ बढ़ाना है। कथन 2 सही है क्योंकि विज्ञप्ति में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि सभी प्रमुख उपकरण स्वदेशी रूप से विकसित और निर्मित किए गए हैं, जो ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘मेक इन इंडिया’ पहल के अनुरूप हैं। कथन 3 भी सही है क्योंकि कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड भारतीय नौसेना के लिए विभिन्न प्रकार के जहाजों और युद्धपोतों के निर्माण में सक्रिय रूप से शामिल है, जैसा कि इस परियोजना से भी स्पष्ट है।
Q2. अभिकथन (A): भारत सरकार ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘मेक इन इंडिया’ जैसी पहलों के माध्यम से रक्षा क्षेत्र में स्वदेशीकरण पर जोर दे रही है।
कारण (R): यह पहलें देश की सामरिक स्वायत्तता को बढ़ाने और आयात पर निर्भरता कम करने के लिए महत्वपूर्ण हैं।
- A और R दोनों सही हैं, और R, A की सही व्याख्या है।
- A और R दोनों सही हैं, लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है।
- A सही है, लेकिन R गलत है।
- A गलत है, लेकिन R सही है।
उत्तर: A और R दोनों सही हैं, और R, A की सही व्याख्या है। — अभिकथन (A) सही है क्योंकि सरकार रक्षा विनिर्माण में स्वदेशीकरण को बढ़ावा देने के लिए ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘मेक इन इंडिया’ जैसी पहलों को सक्रिय रूप से बढ़ावा दे रही है। कारण (R) भी सही है और यह अभिकथन की सही व्याख्या करता है, क्योंकि स्वदेशीकरण का प्राथमिक लक्ष्य रक्षा क्षमताओं में आत्मनिर्भरता प्राप्त करना और विदेशी आपूर्तिकर्ताओं पर निर्भरता कम करके सामरिक स्वायत्तता सुनिश्चित करना है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ भारतीय नौसेना के आधुनिकीकरण में स्वदेशी रक्षा उत्पादन की भूमिका का परीक्षण कीजिए। ‘आत्मनिर्भर भारत’ पहल इस दिशा में किस प्रकार सहायक सिद्ध हो रही है? (15 Marks)
रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. परिचय: भारतीय नौसेना के आधुनिकीकरण की आवश्यकता और इसमें स्वदेशीकरण के महत्व पर संक्षिप्त प्रकाश डालें।
2. स्वदेशी रक्षा उत्पादन की भूमिका: भारतीय नौसेना के आधुनिकीकरण में स्वदेशी रक्षा उत्पादन के विभिन्न पहलुओं का विश्लेषण करें, जैसे:
क. सामरिक स्वायत्तता और सुरक्षा: आयात पर निर्भरता कम करना, महत्वपूर्ण समय में आपूर्ति सुनिश्चित करना।
ख. तकनीकी उन्नति और नवाचार: घरेलू अनुसंधान एवं विकास को बढ़ावा देना, अत्याधुनिक प्रौद्योगिकियों का विकास।
ग. आर्थिक लाभ: रोजगार सृजन, औद्योगिक विकास, विदेशी मुद्रा की बचत।
घ. भू-राजनीतिक प्रभाव: हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की स्थिति को मजबूत करना, क्षेत्रीय सुरक्षा प्रदाता के रूप में भूमिका।
3. ‘आत्मनिर्भर भारत’ पहल की भूमिका: ‘आत्मनिर्भर भारत’ पहल के तहत रक्षा क्षेत्र में किए गए विशिष्ट उपायों और उनके प्रभावों पर चर्चा करें, जैसे:
क. रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया (DAP) में बदलाव: ‘बाय इंडियन’ और ‘मेक’ श्रेणियों को प्राथमिकता।
ख. नकारात्मक आयात सूची: कुछ रक्षा वस्तुओं के आयात पर प्रतिबंध।
ग. रक्षा गलियारे और निजी क्षेत्र की भागीदारी: विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करना।
घ. रक्षा निर्यात को बढ़ावा देना: ‘मेक फॉर द वर्ल्ड’ दृष्टिकोण।
ङ. कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड (CSL) जैसी संस्थाओं का योगदान: अगली पीढ़ी के मिसाइल पोत (NGMV) जैसी परियोजनाओं का उदाहरण।
4. चुनौतियाँ और आगे की राह: स्वदेशीकरण में आने वाली चुनौतियों (जैसे अनुसंधान एवं विकास में निवेश, तकनीकी अंतराल) और उन्हें दूर करने के लिए आवश्यक कदमों पर संक्षिप्त चर्चा करें।
5. निष्कर्ष: भारतीय नौसेना के आधुनिकीकरण और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए स्वदेशी रक्षा उत्पादन के महत्व को दोहराते हुए एक संतुलित निष्कर्ष प्रस्तुत करें।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
Kerala PCS (Kerala PSC (KAS)) — राज्य PCS अभ्यास
Prelims: कोच्चि शिपयार्ड लिमिटेड द्वारा भारतीय नौसेना के लिए निर्मित दूसरी पीढ़ी के मिसाइल पोत (एनजीएमवी) के संबंध में हाल ही में हुई स्टील कटिंग समारोह का मुख्य उद्देश्य क्या था?
- A. नौसेना के लिए स्वदेशी युद्धपोत निर्माण में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देना
- B. अंतरराष्ट्रीय नौसेना सहयोग को मजबूत करना
- C. निजी क्षेत्र के जहाज निर्माण उद्योग को बढ़ावा देना
- D. विदेशी तकनीकी हस्तांतरण को सुगम बनाना
उत्तर: A. नौसेना के लिए स्वदेशी युद्धपोत निर्माण में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देना — स्टील कटिंग समारोह नौसेना के लिए स्वदेशी युद्धपोत निर्माण में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से आयोजित किया गया था।
Mains: भारतीय नौसेना के लिए दूसरी पीढ़ी के मिसाइल पोत (एनजीएमवी) के निर्माण में कोच्चि शिपयार्ड लिमिटेड की भूमिका और इसके राज्य की अर्थव्यवस्था एवं रक्षा उद्योग पर पड़ने वाले प्रभाव का वर्णन कीजिए।
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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