07 Aug मिशन पोषण 2.0: कुपोषण मुक्ति का सरकार का नवीनतम प्रयास, जानें इसकी खासियतें

✎ मिशन पोषण 2.0 कुपोषण से निपटने और बाल विकास को बढ़ावा देने के लिए सरकार का एक समन्वित और सुदृढ़ प्रयास है, जो 'पोषण ट्रैकर' जैसे ICT उपकरणों का उपयोग कर रहा है।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — सामाजिक न्याय: गरीबी और भूख से संबंधित विषय | GS Paper II — स्वास्थ्य, शिक्षा और मानव संसाधन से संबंधित सामाजिक क्षेत्र/सेवाओं के विकास और प्रबंधन से संबंधित विषय | GS Paper III — भारतीय अर्थव्यवस्था तथा योजना, संसाधनों को जुटाने, प्रगति, विकास तथा रोजगार से संबंधित विषय
- Prelims: मिशन पोषण 2.0, पोषण अभियान, महिला एवं बाल विकास मंत्रालय, पोषण ट्रैकर, कुपोषण, बौनापन, एनीमिया, स्तनपान, नीति आयोग, विश्व बैंक
- Essay: भारत में कुपोषण की चुनौती: कारण, प्रभाव और समाधान, बाल विकास में सरकारी योजनाओं की भूमिका और प्रभाव
त्वरित पुनरावृत्ति: मिशन पोषण 2.0 कुपोषण से निपटने और बाल विकास को बढ़ावा देने के लिए सरकार का एक समन्वित और सुदृढ़ प्रयास है, जो ‘पोषण ट्रैकर’ जैसे ICT उपकरणों का उपयोग कर रहा है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री श्रीमती सावित्री ठाकुर ने लोकसभा में जानकारी दी कि मिशन पोषण 2.0 (Mission Poshan 2.0) कुपोषण से समग्र रूप से निपटने और बाल विकास को बढ़ावा देने के लिए सरकार का नवीनतम प्रयास है। यह पिछले कार्यक्रमों पर आधारित एक समन्वित और सुदृढ़ दृष्टिकोण अपनाता है। नीति आयोग के विकास निगरानी एवं मूल्यांकन कार्यालय (DMEO) द्वारा वर्ष 2025 में किए गए परिणाम-आधारित मूल्यांकन अध्ययन ने इस मिशन की प्रासंगिकता और प्रभावशीलता को प्रमाणित किया है, जिससे यह वर्तमान में चर्चा का विषय बना हुआ है।
पृष्ठभूमि
- पोषण अभियान (Poshan Abhiyaan) का तृतीय-पक्ष मूल्यांकन और प्रभाव आकलन 2020 में नीति आयोग द्वारा किया गया था, जिसमें देश में कुपोषण से निपटने के लिए इसकी प्रासंगिकता को संतोषजनक पाया गया।
- 2021 में, विश्व बैंक (World Bank) ने आंध्र प्रदेश सहित 11 राज्यों में पोषण अभियान के अंतर्गत एक सर्वेक्षण किया, जिसमें बच्चों में बौनेपन (Stunting) और महिलाओं में एनीमिया (Anemia) की उच्च व्यापकता वाले राज्यों को चुना गया था।
- इस सर्वेक्षण के निष्कर्षों से पोषण अभियान के माध्यम से दी जाने वाली सेवाओं के संबंध में पोषण संबंधी व्यवहार में सुधार प्रदर्शित हुआ; कार्यक्रम के पोषण संदेश 80% से अधिक महिलाओं तक पहुंचे और 81% महिलाओं ने पहले छह महीनों तक केवल स्तनपान कराया।
- नीति आयोग के DMEO द्वारा वर्ष 2025 में 12 राज्यों (आंध्र प्रदेश सहित) और एक केंद्र शासित प्रदेश में मिशन सक्षम आंगनवाड़ी और पोषण 2.0 (मिशन पोषण 2.0) का परिणाम-आधारित मूल्यांकन अध्ययन पुनः आयोजित किया गया।
- साक्ष्यों से पता चला कि अपने वर्तमान स्वरूप में, मिशन पोषण 2.0 कुपोषण से समग्र रूप से निपटने और बाल विकास को बढ़ावा देने के लिए सरकार का नवीनतम प्रयास है, जो पिछले कार्यक्रमों पर आधारित एक समन्वित और सुदृढ़ दृष्टिकोण अपनाता है।
- पूरक पोषण (Supplementary Nutrition), विकास निगरानी और परामर्श जैसी आंगनवाड़ी सेवाओं का उच्च स्तर पर उपयोग और स्वीकार्यता इस बात का प्रबल संकेत है कि पोषण अभियान लाभार्थियों के बीच जागरूकता बढ़ाने और व्यवहार में परिवर्तन लाने में सफल रहा है।
मिशन पोषण 2.0 क्या है?
- मिशन पोषण 2.0, महिला एवं बाल विकास मंत्रालय (Ministry of Women and Child Development – MWCD) द्वारा शुरू किया गया एक एकीकृत पोषण सहायता कार्यक्रम है, जिसका उद्देश्य कुपोषण से समग्र रूप से निपटना और बाल विकास को बढ़ावा देना है।
- यह मिशन पोषण अभियान, सक्षम आंगनवाड़ी और प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना (PMMVY) जैसे पूर्ववर्ती कार्यक्रमों का एक सुदृढ़ और समन्वित रूप है।
- इसका मुख्य लक्ष्य बच्चों में बौनापन, कम वज़न (Underweight) और एनीमिया को कम करना तथा महिलाओं और किशोरियों में एनीमिया की व्यापकता को संबोधित करना है।
- मिशन पोषण 2.0 के अंतर्गत लाभार्थियों को दी जा रही सेवाओं की निगरानी और समीक्षा के लिए ‘पोषण ट्रैकर’ (Poshan Tracker) नामक एक सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (Information and Communication Technology – ICT) आधारित डिजिटल एप्लिकेशन लॉन्च किया गया है।
- पोषण ट्रैकर एप्लिकेशन में फेशियल रिकॉग्निशन सिस्टम (Facial Recognition System – FRS) शुरू किया गया है ताकि घर ले जाने वाले राशन (Take Home Ration – THR) का वितरण सुनिश्चित किया जा सके और यह सुनिश्चित हो कि लाभ केवल पंजीकृत लक्षित लाभार्थी को ही मिले।
- आधार आधारित ट्रैकिंग (Aadhaar-based Tracking) से लाभार्थियों की सही पहचान, डेटा लीक की रोकथाम और फर्जी प्रविष्टियों को खत्म करने में मदद मिली है, जिससे कार्यक्रम की पारदर्शिता और दक्षता बढ़ी है।
- यह कार्यक्रम पोषण संबंधी व्यवहार में सुधार लाने, जागरूकता बढ़ाने और समुदाय-आधारित दृष्टिकोण के माध्यम से पोषण परिणामों को बेहतर बनाने पर केंद्रित है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| समग्र दृष्टिकोण | कुपोषण के बहुआयामी पहलुओं जैसे बौनापन, कम वज़न, एनीमिया और अन्य पोषण संबंधी कमियों को एक साथ संबोधित करता है। |
| समन्वित और सुदृढ़ रणनीति | विभिन्न मंत्रालयों और कार्यक्रमों के बीच बेहतर तालमेल सुनिश्चित करता है, जिससे सेवाओं का प्रभावी वितरण हो सके। |
| पिछले कार्यक्रमों पर आधारित | पोषण अभियान जैसे पूर्ववर्ती पहलों की सफलताओं और सीखों का लाभ उठाता है, जिससे निरंतरता और सुधार सुनिश्चित होता है। |
| पोषण ट्रैकर डिजिटल एप्लिकेशन | ICT आधारित शासन उपकरण जो लाभार्थियों को दी जा रही सेवाओं की निगरानी और समीक्षा करता है, पारदर्शिता बढ़ाता है। |
| फेशियल रिकॉग्निशन सिस्टम (FRS) | पोषण ट्रैकर में शामिल यह प्रणाली घर ले जाने वाले राशन के वितरण को सुनिश्चित करती है और लक्षित लाभार्थी तक लाभ पहुँचाती है। |
| आधार आधारित ट्रैकिंग | लाभार्थियों की सही पहचान सुनिश्चित करती है, डेटा लीक को रोकती है और फर्जी प्रविष्टियों को समाप्त करती है। |
महत्व
सामाजिक महत्व
- बच्चों में बौनापन (Stunting), कम वज़न (Underweight) और एनीमिया (Anaemia) जैसी पोषण संबंधी समस्याओं को कम करके बाल विकास को बढ़ावा देता है।
- महिलाओं और बच्चों के स्वास्थ्य में सुधार करके समाज के सबसे कमज़ोर वर्गों को सशक्त बनाता है।
- पोषण संबंधी व्यवहार में सुधार के लिए जागरूकता और परामर्श प्रदान करता है, जिससे दीर्घकालिक स्वास्थ्य लाभ मिलते हैं।
आर्थिक महत्व
- कुपोषण के कारण होने वाली बीमारियों और उत्पादकता के नुकसान को कम करके स्वास्थ्य देखभाल लागत को कम करता है।
- स्वस्थ बच्चों का विकास भविष्य में एक मज़बूत और अधिक उत्पादक कार्यबल तैयार करता है, जिससे आर्थिक संवृद्धि (Economic Growth) को बल मिलता है।
- मानव पूंजी (Human Capital) के निर्माण में निवेश करता है, जो देश के दीर्घकालिक विकास के लिए महत्वपूर्ण है।
प्रशासनिक महत्व
- पोषण ट्रैकर जैसे डिजिटल उपकरणों के माध्यम से कार्यक्रमों के कार्यान्वयन में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करता है।
- डेटा-संचालित निर्णय लेने को बढ़ावा देता है, जिससे योजनाओं की प्रभावशीलता में सुधार होता है और संसाधनों का अनुकूलतम उपयोग होता है।
- केंद्र और राज्य सरकारों के बीच समन्वय को मज़बूत करता है, जिससे नीतियों का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित होता है।
चुनौतियाँ
1. डेटा गोपनीयता और सुरक्षा
- आधार आधारित ट्रैकिंग और फेशियल रिकॉग्निशन सिस्टम से व्यक्तिगत डेटा की गोपनीयता और सुरक्षा को लेकर चिंताएँ उत्पन्न हो सकती हैं।
- संवेदनशील स्वास्थ्य डेटा के दुरुपयोग या लीक होने का जोखिम रहता है, जिसके लिए मज़बूत सुरक्षा उपायों की आवश्यकता है।
यूपीएससी लिंक: शासन, पारदर्शिता और जवाबदेही
2. डिजिटल डिवाइड
- ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में इंटरनेट कनेक्टिविटी और डिजिटल साक्षरता की कमी पोषण ट्रैकर जैसे डिजिटल उपकरणों के प्रभावी उपयोग में बाधा डाल सकती है।
- आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को डिजिटल उपकरणों के उपयोग के लिए पर्याप्त प्रशिक्षण और सहायता की आवश्यकता है।
यूपीएससी लिंक: ई-गवर्नेंस, समावेशी विकास
3. सेवा वितरण में असमानता
- भौगोलिक, सामाजिक-आर्थिक और सांस्कृतिक कारकों के कारण विभिन्न क्षेत्रों और समुदायों में सेवाओं के वितरण और पहुँच में असमानताएँ बनी रह सकती हैं।
- लक्षित लाभार्थियों तक पहुँच सुनिश्चित करने के लिए विशेष रणनीतियों की आवश्यकता है, खासकर हाशिए पर पड़े समुदायों के लिए।
यूपीएससी लिंक: सामाजिक न्याय, मानव विकास
4. व्यवहारिक परिवर्तन की चुनौती
- पोषण संबंधी व्यवहार में स्थायी परिवर्तन लाना एक जटिल और दीर्घकालिक प्रक्रिया है, जिसके लिए निरंतर परामर्श और सामुदायिक भागीदारी की आवश्यकता होती है।
- सांस्कृतिक प्रथाएँ और सामाजिक मानदंड पोषण संबंधी आदतों को प्रभावित कर सकते हैं, जिन्हें संबोधित करना चुनौतीपूर्ण होता है।
यूपीएससी लिंक: सामाजिक सशक्तिकरण, स्वास्थ्य
5. संसाधन और क्षमता निर्माण
- मिशन पोषण 2.0 के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए पर्याप्त वित्तीय और मानव संसाधनों की आवश्यकता है।
- आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और अन्य ज़मीनी स्तर के कर्मचारियों की क्षमता निर्माण और प्रशिक्षण एक सतत प्रक्रिया है।
यूपीएससी लिंक: मानव संसाधन, विकास प्रक्रियाएँ
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| कुपोषण का बहुआयामी स्वरूप | सिर्फ भोजन नहीं, बल्कि स्वच्छता, स्वास्थ्य सेवाओं और शिक्षा जैसे कारकों का भी प्रभाव। |
| डेटा की सटीकता और विश्वसनीयता | पोषण ट्रैकर में दर्ज डेटा की गुणवत्ता और उसकी वास्तविक स्थिति से मिलान सुनिश्चित करना। |
| अंतर-मंत्रालयी समन्वय | महिला एवं बाल विकास, स्वास्थ्य, शिक्षा और ग्रामीण विकास मंत्रालयों के बीच प्रभावी तालमेल की आवश्यकता। |
| जागरूकता और व्यवहार परिवर्तन | पोषण संबंधी सही आदतों को अपनाने के लिए समुदायों को प्रेरित करना और मिथकों को दूर करना। |
| निगरानी और मूल्यांकन की निरंतरता | कार्यक्रम के प्रभाव का नियमित और स्वतंत्र मूल्यांकन सुनिश्चित करना ताकि कमियों को दूर किया जा सके। |
| वित्तीय संसाधनों का आवंटन | मिशन के लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए पर्याप्त और समय पर धन की उपलब्धता सुनिश्चित करना। |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- पोषण अभियान (POSHAN Abhiyaan)
- मिशन सक्षम आंगनवाड़ी और पोषण 2.0 (Mission Saksham Anganwadi and POSHAN 2.0)
आगे की राह
- डिजिटल उपकरणों के उपयोग के साथ-साथ ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में डिजिटल साक्षरता और कनेक्टिविटी में सुधार किया जाए।
- डेटा गोपनीयता और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए मज़बूत कानूनी ढाँचा और तकनीकी सुरक्षा उपाय लागू किए जाएँ।
- आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को डिजिटल उपकरणों के प्रभावी उपयोग और पोषण संबंधी परामर्श प्रदान करने के लिए निरंतर प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण किया जाए।
- कुपोषण के सामाजिक-सांस्कृतिक निर्धारकों को संबोधित करने के लिए सामुदायिक भागीदारी और व्यवहार परिवर्तन संचार (BCC) रणनीतियों को मज़बूत किया जाए।
- विभिन्न मंत्रालयों और विभागों के बीच अधिक प्रभावी समन्वय और अभिसरण सुनिश्चित किया जाए ताकि सेवाओं का समग्र वितरण हो सके।
- कार्यक्रम के प्रभाव का नियमित, स्वतंत्र तृतीय-पक्ष मूल्यांकन (Third-Party Evaluation) किया जाए और प्राप्त निष्कर्षों के आधार पर नीतिगत सुधार किए जाएँ।
- पोषण सेवाओं तक पहुँच में क्षेत्रीय असमानताओं को कम करने के लिए लक्षित हस्तक्षेप और आउटरीच कार्यक्रम चलाए जाएँ।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
मिशन पोषण 2.0 · कुपोषण · बाल विकास · पोषण अभियान · महिला एवं बाल विकास मंत्रालय · पोषण ट्रैकर · आईसीटी आधारित शासन · आधार आधारित ट्रैकिंग · पूरक पोषण · विकास निगरानी · व्यवहार परिवर्तन
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- अनुच्छेद 21: जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार
- अनुच्छेद 39(e): बच्चों के स्वस्थ विकास के अवसर
- अनुच्छेद 47: पोषण स्तर और लोक स्वास्थ्य में सुधार
अवधारणा प्रवाह
कुपोषण की उच्च व्यापकता (High Prevalence of Malnutrition) → पोषण अभियान जैसे पूर्व कार्यक्रम → मिशन पोषण 2.0 का शुभारंभ → पोषण ट्रैकर और FRS का उपयोग → सेवा वितरण और निगरानी में सुधार → पोषण संबंधी व्यवहार में परिवर्तन → बाल विकास और स्वास्थ्य में सुधार
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
1. मिशन पोषण 2.0 का उद्देश्य कुपोषण से समग्र रूप से निपटना और बाल विकास को बढ़ावा देना है।
2. पोषण ट्रैकर डिजिटल एप्लिकेशन का उपयोग केवल लाभार्थियों को घर ले जाने वाले राशन के वितरण को सुनिश्चित करने के लिए किया जाता है।
3. नीति आयोग ने 2020 में पोषण अभियान का तृतीय-पक्ष मूल्यांकन किया था।
उपरोक्त में से कितने कथन सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- केवल तीन
- कोई नहीं
उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है क्योंकि मिशन पोषण 2.0 का यही मुख्य उद्देश्य है। कथन 2 गलत है क्योंकि पोषण ट्रैकर का उपयोग महिलाओं और बच्चों के स्वास्थ्य एवं पोषण की स्थिति सहित विभिन्न मापदंडों पर योजना के कार्यान्वयन की निगरानी और समीक्षा के लिए भी किया जाता है। कथन 3 सही है क्योंकि नीति आयोग ने 2020 में पोषण अभियान का तृतीय-पक्ष मूल्यांकन किया था।
Q2. अभिकथन (A): मिशन पोषण 2.0 कुपोषण से निपटने के लिए पिछले कार्यक्रमों पर आधारित एक समन्वित और सुदृढ़ दृष्टिकोण अपनाता है।
कारण (R): पोषण अभियान के तृतीय-पक्ष मूल्यांकन और विश्व बैंक के सर्वेक्षण ने पोषण संबंधी व्यवहार में सुधार प्रदर्शित किया, जिससे कार्यक्रम की प्रासंगिकता सिद्ध हुई।
उपरोक्त कथनों के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन सा सही है?
- A और R दोनों सही हैं और R, A की सही व्याख्या है।
- A और R दोनों सही हैं, लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है।
- A सही है, लेकिन R गलत है।
- A गलत है, लेकिन R सही है।
उत्तर: A और R दोनों सही हैं और R, A की सही व्याख्या है। — अभिकथन (A) सही है क्योंकि मिशन पोषण 2.0 पिछले कार्यक्रमों के अनुभवों पर आधारित है। कारण (R) भी सही है क्योंकि विभिन्न मूल्यांकनों ने पोषण अभियान की सफलता और प्रासंगिकता को दर्शाया है, जो मिशन पोषण 2.0 के समन्वित दृष्टिकोण का आधार बना। अतः R, A की सही व्याख्या है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ मिशन पोषण 2.0 के प्रमुख उद्देश्यों और विशेषताओं पर चर्चा कीजिए। कुपोषण से निपटने में सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (ICT) की भूमिका का भी विश्लेषण कीजिए। (15 Marks)
रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. परिचय: मिशन पोषण 2.0 का संक्षिप्त परिचय, इसके पूर्ववर्ती पोषण अभियान से संबंध और समग्र दृष्टिकोण पर जोर।
2. प्रमुख उद्देश्य: कुपोषण (बौनापन, कम वजन, एनीमिया) को कम करना, बाल विकास को बढ़ावा देना, गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली माताओं के पोषण में सुधार।
3. मुख्य विशेषताएँ: पूरक पोषण कार्यक्रम, विकास निगरानी, स्वास्थ्य सेवाएँ, पोषण शिक्षा और परामर्श, अभिसरण (विभिन्न मंत्रालयों का समन्वय)।
4. आईसीटी की भूमिका: ‘पोषण ट्रैकर’ डिजिटल एप्लिकेशन का उल्लेख, लाभार्थियों की निगरानी, सेवा वितरण की अंतिम चरण की ट्रैकिंग, फेशियल रिकॉग्निशन सिस्टम (FRS) और आधार आधारित ट्रैकिंग का उपयोग।
5. आईसीटी के लाभ: पारदर्शिता बढ़ाना, डेटा लीक रोकना, फर्जी प्रविष्टियों को खत्म करना, दक्षता में सुधार, नीति निर्माण और हस्तक्षेप के लिए वास्तविक समय डेटा प्रदान करना।
6. चुनौतियाँ और आगे की राह: डिजिटल डिवाइड, डेटा गोपनीयता, तकनीकी बुनियादी ढाँचा, क्षमता निर्माण।
7. निष्कर्ष: कुपोषण मुक्त भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने में मिशन पोषण 2.0 और आईसीटी के महत्व पर बल।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

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