18 Sep मुंबई में मानव गतिविधियों से बदला मानसून: जानिए कैसे?
✎ मानवीय गतिविधियों और शहरीकरण के कारण मुंबई में मानसून के दौरान भी अत्यधिक गर्मी और अनियमित वर्षा दर्ज की जा रही है, जो जलवायु परिवर्तन के गंभीर प्रभावों को दर्शाती है।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper I — भूगोल (जलवायु परिवर्तन, शहरीकरण के प्रभाव) | GS Paper III — पर्यावरण (जलवायु परिवर्तन, प्रदूषण, सतत विकास)
- Prelims: जलवायु परिवर्तन, ग्रीनहाउस गैसें, शहरी ऊष्मा द्वीप प्रभाव, अल नीनो, जलवायु परिवर्तन सूचकांक (CSI)
- Essay: जलवायु परिवर्तन: चुनौतियाँ और समाधान, शहरीकरण और पर्यावरण पर इसके प्रभाव
त्वरित पुनरावृत्ति: मानवीय गतिविधियों और शहरीकरण के कारण मुंबई में मानसून के दौरान भी अत्यधिक गर्मी और अनियमित वर्षा दर्ज की जा रही है, जो जलवायु परिवर्तन के गंभीर प्रभावों को दर्शाती है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
एक हालिया अध्ययन से पता चला है कि जून से अगस्त के बीच 92 में से 86 दिनों तक मुंबई और नवी मुंबई में मानवीय गतिविधियों, जैसे वाहन और ग्रीनहाउस गैस (GHG) उत्सर्जन, ने स्थानीय मौसम पैटर्न को प्रभावित किया, जिससे अत्यधिक गर्मी और वर्षा दर्ज की गई। यह अध्ययन मुंबई और मुंबई महानगर क्षेत्र (MMR) के अन्य जिलों में जलवायु परिवर्तन के बढ़ते प्रभावों को उजागर करता है, जो मानसून के दौरान भी असामान्य मौसम की घटनाओं का कारण बन रहा है।
पृष्ठभूमि
- मुंबई और नवी मुंबई में जून से अगस्त के बीच 86 दिनों तक मानवीय गतिविधियों ने स्थानीय मौसम को प्रभावित किया।
- इस अवधि में शहरों में अत्यधिक गर्मी और वर्षा दर्ज की गई, जो मानव निर्मित कारकों से सीधे प्रभावित थी।
- मुंबई महानगर क्षेत्र (MMR) के अन्य जिलों जैसे डोंबिवली, ठाणे और कल्याण में भी मानवीय गतिविधियों से प्रभावित दिनों की संख्या अधिक रही।
- अध्ययन में पाया गया कि मुंबई और नवी मुंबई में 28 दिन अत्यधिक गर्मी वाले थे।
- संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट ने भी मुंबई की बढ़ती समुद्री स्तर की भेद्यता पर प्रकाश डाला था।
- वैज्ञानिकों ने दैनिक तापमान पर जलवायु परिवर्तन के प्रभाव की पहचान करने के लिए ‘जलवायु परिवर्तन सूचकांक’ (Climate Shift Index – CSI) का उपयोग किया, जिसमें मुंबई का औसत 4 से 5 के बीच रहा, जो गंभीर प्रभाव दर्शाता है।
जलवायु परिवर्तन और शहरीकरण का प्रभाव
- जलवायु परिवर्तन (Climate Change) पृथ्वी के औसत तापमान और मौसम पैटर्न में दीर्घकालिक बदलाव है, जो मुख्य रूप से मानवीय गतिविधियों, विशेषकर जीवाश्म ईंधन के जलने से उत्पन्न ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन के कारण होता है।
- शहरीकरण (Urbanization) के कारण शहरों में कंक्रीट और डामर जैसी सतहें गर्मी को अधिक अवशोषित करती हैं, जिससे ‘शहरी ऊष्मा द्वीप प्रभाव’ (Urban Heat Island Effect) उत्पन्न होता है। यह आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों की तुलना में शहरी क्षेत्रों को अधिक गर्म बनाता है।
- वाहन उत्सर्जन (Vehicular Emissions) और औद्योगिक गतिविधियाँ (Industrial Activities) कार्बन डाइऑक्साइड, मीथेन और नाइट्रस ऑक्साइड जैसी ग्रीनहाउस गैसों का प्रमुख स्रोत हैं, जो वायुमंडल में गर्मी को रोककर वैश्विक तापमान में वृद्धि करती हैं।
- अल नीनो (El Niño) एक प्राकृतिक जलवायु पैटर्न है जो मध्य और पूर्वी प्रशांत महासागर की सतह के पानी को गर्म करता है, जिससे वैश्विक मौसम पैटर्न प्रभावित होते हैं। भारत में यह अक्सर मानसून की वर्षा को प्रभावित करता है, जिससे कुछ क्षेत्रों में कम वर्षा और तापमान में वृद्धि होती है।
- जलवायु परिवर्तन सूचकांक (CSI) एक वैज्ञानिक उपकरण है जिसका उपयोग यह निर्धारित करने के लिए किया जाता है कि किसी विशेष दिन का तापमान या मौसम पैटर्न मानवीय गतिविधियों से प्रेरित जलवायु परिवर्तन से कितना प्रभावित हुआ है। यह 0 से 5 तक के पैमाने पर प्रभाव की गंभीरता को मापता है।
- असामान्य वर्षा पैटर्न (Erratic Rainfall Patterns) जलवायु परिवर्तन का एक महत्वपूर्ण परिणाम है, जिसमें कुछ क्षेत्रों में अत्यधिक वर्षा और बाढ़ आती है, जबकि अन्य में सूखे की स्थिति उत्पन्न होती है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| मानवीय गतिविधियों का प्रभाव | मुंबई और नवी मुंबई में मानसून के 92 में से 86 दिनों पर वाहन उत्सर्जन और ग्रीनहाउस गैस (GHG) उत्सर्जन जैसी मानवीय गतिविधियों का स्थानीय मौसम पर सीधा प्रभाव देखा गया। |
| अत्यधिक गर्मी और वर्षा | अध्ययन की अवधि के दौरान, इन शहरों में अत्यधिक गर्मी और वर्षा दर्ज की गई, जो सीधे तौर पर मानव निर्मित कारकों से प्रभावित थी। |
| MMR क्षेत्र की संवेदनशीलता | मुंबई महानगर क्षेत्र (MMR) के डोम्बिवली, ठाणे, कल्याण, पिंपरी, पुणे और शिवाजी नगर जैसे जिलों में भी मानवीय गतिविधियों से प्रभावित दिनों की संख्या अधिक रही। |
| जलवायु बदलाव सूचकांक (CSI) | वैज्ञानिकों ने दैनिक तापमान पर जलवायु परिवर्तन के प्रभाव की पहचान करने के लिए CSI का उपयोग किया; मुंबई के लिए औसत अंक 4 से 5 के बीच रहे, जो गंभीर प्रभाव दर्शाता है। |
| अल-नीनो का प्रभाव | मानसून के महीनों में उच्च तापमान के लिए अल-नीनो (El-Niño) एक प्रमुख कारण रहा, जिसने वर्षा के असमान वितरण में योगदान दिया, जिसे मानव निर्मित कारकों ने और बढ़ा दिया। |
| समुद्र स्तर में वृद्धि | संयुक्त राष्ट्र के एक अध्ययन ने मुंबई की बढ़ती समुद्री स्तरों के प्रति संवेदनशीलता को उजागर किया है, जो इस रिपोर्ट के कुछ हफ्तों बाद आया है। |
महत्व
पर्यावरणीय महत्व
- यह अध्ययन शहरीकरण और औद्योगिक गतिविधियों के स्थानीय जलवायु पर पड़ने वाले गंभीर प्रभावों को रेखांकित करता है, विशेषकर मानसून जैसे संवेदनशील मौसम में।
- यह ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन और वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने की तत्काल आवश्यकता पर बल देता है, जो शहरी क्षेत्रों में अत्यधिक मौसमी घटनाओं को ट्रिगर कर रहे हैं।
- समुद्र स्तर में वृद्धि और अत्यधिक वर्षा जैसी घटनाओं के कारण तटीय शहरों की भेद्यता (Vulnerability) बढ़ रही है, जिससे पारिस्थितिक तंत्र और जैव विविधता पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है।
सामाजिक महत्व
- अत्यधिक गर्मी और अनियमित वर्षा पैटर्न शहरी आबादी के स्वास्थ्य और जीवन की गुणवत्ता पर प्रतिकूल प्रभाव डालते हैं, जिससे हीटस्ट्रोक, जल-जनित रोग और कृषि संबंधी चुनौतियाँ बढ़ सकती हैं।
- जलवायु परिवर्तन से प्रेरित आपदाएँ, जैसे बाढ़ और सूखे, विस्थापन और आजीविका के नुकसान का कारण बन सकती हैं, जिससे सामाजिक असमानताएँ बढ़ सकती हैं।
- यह अध्ययन शहरी नियोजन और बुनियादी ढाँचे के विकास में जलवायु परिवर्तन अनुकूलन (Climate Change Adaptation) और शमन (Mitigation) रणनीतियों को एकीकृत करने की आवश्यकता पर जोर देता है।
आर्थिक महत्व
- अत्यधिक मौसमी घटनाएँ कृषि, मत्स्य पालन और पर्यटन जैसे क्षेत्रों को प्रभावित करके आर्थिक स्थिरता को कमजोर कर सकती हैं।
- जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से निपटने के लिए बुनियादी ढाँचे के उन्नयन और आपदा प्रबंधन पर भारी निवेश की आवश्यकता होगी, जिससे सार्वजनिक वित्त पर दबाव पड़ सकता है।
- यह अध्ययन स्वच्छ ऊर्जा स्रोतों और सतत परिवहन प्रणालियों में निवेश को बढ़ावा देने के लिए एक आर्थिक अवसर प्रस्तुत करता है, जिससे नई नौकरियाँ और हरित अर्थव्यवस्था का विकास हो सकता है।
चुनौतियाँ
1. शहरीकरण और उत्सर्जन नियंत्रण
- तेजी से शहरीकरण और औद्योगिक विकास के कारण वाहनों और उद्योगों से ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन बढ़ रहा है, जिससे स्थानीय तापमान और वर्षा पैटर्न प्रभावित हो रहे हैं।
- शहरी क्षेत्रों में अपर्याप्त सार्वजनिक परिवहन और जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता उत्सर्जन को नियंत्रित करने में बड़ी चुनौती पेश करती है।
यूपीएससी लिंक: पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण
2. जलवायु परिवर्तन अनुकूलन और शमन
- बदलते मौसम पैटर्न, जैसे अत्यधिक गर्मी और अनियमित वर्षा, के अनुकूल होने के लिए शहरों को नए बुनियादी ढाँचे और नीतियों की आवश्यकता है।
- जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने के लिए प्रभावी शमन रणनीतियों, जैसे नवीकरणीय ऊर्जा को अपनाना और कार्बन उत्सर्जन में कमी, को लागू करना एक जटिल चुनौती है।
यूपीएससी लिंक: आपदा और आपदा प्रबंधन
3. वैज्ञानिक डेटा और नीति निर्माण
- जलवायु परिवर्तन के स्थानीय प्रभावों को समझने और सटीक भविष्यवाणियाँ करने के लिए उन्नत वैज्ञानिक अनुसंधान और डेटा विश्लेषण की आवश्यकता है।
- वैज्ञानिक निष्कर्षों को प्रभावी नीतियों में अनुवादित करना और उन्हें विभिन्न हितधारकों के बीच समन्वय के साथ लागू करना एक महत्वपूर्ण चुनौती है।
यूपीएससी लिंक: विज्ञान और प्रौद्योगिकी का विकास
4. तटीय शहरों की भेद्यता
- मुंबई जैसे तटीय शहर समुद्र स्तर में वृद्धि और तूफान की बढ़ती आवृत्ति के प्रति विशेष रूप से संवेदनशील हैं, जिससे बाढ़ और तटीय क्षरण का खतरा बढ़ जाता है।
- तटीय क्षेत्रों में घनी आबादी और महत्वपूर्ण आर्थिक गतिविधियों के कारण इन प्रभावों से निपटने के लिए व्यापक योजना और निवेश की आवश्यकता है।
यूपीएससी लिंक: भू-भौतिकीय घटनाएँ
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| मानवीय गतिविधियों का जलवायु पर प्रभाव | वाहन उत्सर्जन और ग्रीनहाउस गैसों के कारण स्थानीय मौसम पैटर्न में बदलाव, जिससे अत्यधिक गर्मी और अनियमित वर्षा हो रही है। |
| शहरीकरण और बुनियादी ढाँचा | तेजी से शहरीकरण और अपर्याप्त हरित बुनियादी ढाँचा शहरों को जलवायु परिवर्तन के प्रभावों के प्रति अधिक संवेदनशील बना रहा है। |
| अल-नीनो और मानव निर्मित कारक | अल-नीनो जैसे प्राकृतिक जलवायु पैटर्न के साथ मानव निर्मित कारकों का संयोजन मौसमी अनियमितताओं को बढ़ा रहा है। |
| तटीय भेद्यता | समुद्र स्तर में वृद्धि और अत्यधिक वर्षा के कारण मुंबई जैसे तटीय शहरों में बाढ़ और तटीय क्षरण का बढ़ता खतरा। |
| सार्वजनिक स्वास्थ्य और आजीविका | अत्यधिक गर्मी और अनियमित वर्षा से स्वास्थ्य संबंधी समस्याएँ, जल-जनित रोग और कृषि तथा मत्स्य पालन पर नकारात्मक प्रभाव। |
आगे की राह
- शहरी क्षेत्रों में सार्वजनिक परिवहन को मजबूत करना और इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देना ताकि वाहन उत्सर्जन को कम किया जा सके।
- नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों, जैसे सौर और पवन ऊर्जा, में निवेश बढ़ाना और जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करना।
- शहरी नियोजन में हरित बुनियादी ढाँचे, जैसे पार्क, शहरी वन और जल निकायों का संरक्षण, को प्राथमिकता देना।
- जलवायु परिवर्तन के प्रभावों के अनुकूल होने के लिए शहरों में जल प्रबंधन प्रणालियों, विशेषकर वर्षा जल संचयन और बाढ़ नियंत्रण, को मजबूत करना।
- जलवायु परिवर्तन के जोखिमों और अनुकूलन रणनीतियों के बारे में जन जागरूकता बढ़ाना और सामुदायिक भागीदारी को प्रोत्साहित करना।
- वैज्ञानिक अनुसंधान और डेटा विश्लेषण को बढ़ावा देना ताकि जलवायु परिवर्तन के स्थानीय प्रभावों को बेहतर ढंग से समझा जा सके और प्रभावी नीतियाँ बनाई जा सकें।
- तटीय क्षेत्रों के लिए विशेष रूप से अनुकूलन योजनाएँ विकसित करना, जिसमें तटीय सुरक्षा उपाय और प्रारंभिक चेतावनी प्रणालियाँ शामिल हों।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
मानवजनित जलवायु परिवर्तन · शहरीकरण के प्रभाव · अत्यधिक मौसमी घटनाएँ · जलवायु परिवर्तन सूचकांक (CSI) · शहरी ताप द्वीप प्रभाव · ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन · अल-नीनो प्रभाव · स्थानीय मौसम पैटर्न · सतत शहरी विकास · जलवायु अनुकूलन रणनीतियाँ
अवधारणा प्रवाह
मानवीय गतिविधियाँ (वाहन, उद्योग) → ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन → स्थानीय तापमान में वृद्धि और जलवायु परिवर्तन → वर्षा पैटर्न में बदलाव (अत्यधिक वर्षा/सूखा) → अत्यधिक मौसमी घटनाएँ (गर्मी की लहरें, बाढ़) → पर्यावरण, समाज और अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक प्रभाव
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
1. जलवायु परिवर्तन सूचकांक (CSI) का उपयोग जलवायु परिवर्तन के दैनिक तापमान पर पड़ने वाले प्रभाव को पहचानने के लिए किया जाता है।
2. CSI स्तर 4 और 5 गंभीर प्रभाव दर्शाते हैं।
3. अल-नीनो एक जलवायु पैटर्न है जो मध्य और पूर्वी प्रशांत महासागर के सतही जल को गर्म करता है।
उपरोक्त में से कितने कथन सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: सभी तीन — कथन 1 सही है क्योंकि CSI का उपयोग दैनिक तापमान पर जलवायु परिवर्तन के प्रभाव को मापने के लिए किया जाता है। कथन 2 सही है क्योंकि CSI स्तर 4 और 5 गंभीर प्रभाव को दर्शाते हैं। कथन 3 भी सही है क्योंकि अल-नीनो मध्य और पूर्वी प्रशांत महासागर के सतही जल को गर्म करने वाला एक जलवायु पैटर्न है।
Q2. अभिकथन (A): मुंबई और नवी मुंबई जैसे शहरों में अत्यधिक गर्मी और वर्षा की घटनाओं में वृद्धि हुई है।
कारण (R): मानवजनित गतिविधियाँ जैसे वाहन और ग्रीनहाउस गैस (GHG) उत्सर्जन स्थानीय मौसम पैटर्न को प्रभावित करते हैं और जलवायु परिवर्तन में योगदान करते हैं।
उपरोक्त कथनों के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन सा सही है?
- A और R दोनों सही हैं, और R, A की सही व्याख्या है।
- A और R दोनों सही हैं, लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है।
- A सही है, लेकिन R गलत है।
- A गलत है, लेकिन R सही है।
उत्तर: A और R दोनों सही हैं, और R, A की सही व्याख्या है। — अभिकथन (A) सही है क्योंकि अध्ययन में मुंबई में अत्यधिक गर्मी और वर्षा की घटनाओं में वृद्धि पाई गई है। कारण (R) भी सही है और यह A की सही व्याख्या है, क्योंकि मानवजनित गतिविधियाँ और उत्सर्जन इन मौसमी परिवर्तनों के प्रमुख कारण हैं।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ हाल के अध्ययनों से पता चला है कि मुंबई जैसे शहरों में मानवजनित गतिविधियों ने स्थानीय मौसम पैटर्न को काफी हद तक बदल दिया है। भारत में शहरीकरण और औद्योगिक गतिविधियों के कारण होने वाले जलवायु परिवर्तन के प्रभावों का समालोचनात्मक परीक्षण करें। (15 Marks)
रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. परिचय: मुंबई के संदर्भ में मानवजनित गतिविधियों द्वारा स्थानीय मौसम पैटर्न में बदलाव पर हालिया अध्ययन का संक्षिप्त उल्लेख करें।
2. शहरीकरण और औद्योगिक गतिविधियों के कारण जलवायु परिवर्तन के प्रभाव:
क. अत्यधिक मौसमी घटनाएँ: अत्यधिक वर्षा, बाढ़, सूखे और गर्मी की लहरों की आवृत्ति और तीव्रता में वृद्धि।
ख. शहरी ताप द्वीप प्रभाव: शहरों में तापमान में वृद्धि और इसके कारण ऊर्जा की खपत पर प्रभाव।
ग. वायु प्रदूषण और ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन: वाहनों, उद्योगों और निर्माण से होने वाले उत्सर्जन का स्थानीय और क्षेत्रीय जलवायु पर प्रभाव।
घ. जल निकायों और पारिस्थितिक तंत्रों पर प्रभाव: शहरीकरण के कारण जल निकासी पैटर्न में बदलाव, भूजल स्तर में कमी और जैव विविधता का नुकसान।
ङ. अल-नीनो जैसे प्राकृतिक कारकों के साथ मानवजनित प्रभावों का संयोजन: कैसे मानवजनित कारक प्राकृतिक जलवायु पैटर्न के प्रभावों को बढ़ा सकते हैं।
3. समालोचनात्मक विश्लेषण:
क. नीतिगत और नियामक ढाँचे: मौजूदा नीतियों (जैसे राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन, स्मार्ट सिटी मिशन) की प्रभावशीलता और उनकी सीमाओं का मूल्यांकन।
ख. सतत शहरी नियोजन की आवश्यकता: हरित बुनियादी ढाँचे, सार्वजनिक परिवहन और नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देने की आवश्यकता।
ग. अनुकूलन और शमन रणनीतियाँ: जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने और उनके अनुकूलन के लिए आवश्यक कदम।
घ. सामाजिक-आर्थिक असमानताएँ: जलवायु परिवर्तन के प्रभावों का विभिन्न सामाजिक-आर्थिक समूहों पर असमान प्रभाव।
4. निष्कर्ष: भारत में जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने और सतत विकास सुनिश्चित करने के लिए एक एकीकृत और बहु-आयामी दृष्टिकोण की आवश्यकता पर बल दें।
स्रोत: The Indian Express
Maharashtra PCS (MPSC) — राज्य PCS अभ्यास
Prelims: मुंबईच्या मान्सून हंगामातील बदलांसंदर्भात खालील विधानांचा विचार करा:
1. मुंबईतील अतिक्रमण आणि बांधकामांमुळे पावसाचे पाणी जमिनीमध्ये मुरण्याचे प्रमाण कमी झाले आहे.
2. शहरातील जलाशयांच्या संख्येत घट झाल्याने पूरस्थितीचा धोका वाढला आहे.
3. ‘अर्बन हीट आयलंड’ प्रभावामुळे मुंबईतील रात्रीचे तापमान दिवसाच्या तुलनेत अधिक राहते.
वरीलपैकी कोणती विधाने बरोबर आहेत?
- फक्त 1 आणि 2
- फक्त 2 आणि 3
- फक्त 1 आणि 3
- 1, 2 आणि 3
उत्तर: 1, 2 आणि 3 — मुंबईतील अतिक्रमण आणि बांधकामांमुळे जमिनीमध्ये पाणी मुरण्याचे प्रमाण कमी झाले आहे. ‘अर्बन हीट आयलंड’ प्रभावामुळे रात्रीचे तापमान वाढते. जलाशयांच्या संख्येत घट झाल्याने पूरस्थितीचा धोका वाढतो.
Mains: मुंबईतील मान्सूनच्या बदलांमध्ये मानवी क्रियाकलापांचा कसा प्रभाव पडला आहे, याचे विश्लेषण करा. या बदलांचे पर्यावरणीय आणि सामाजिक परिणाम स्पष्ट करून, त्यावर उपाययोजना सुचवा.
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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