06 Aug राज्यसभा ने 2026 का विनियोग (सं.3) विधेयक लोकसभा को वापस भेजा, जानिए पूरा विवरण
✎ विनियोग विधेयक एक धन विधेयक है जो सरकार को भारत की संचित निधि से धन निकालने की अनुमति देता है और इस पर राज्यसभा की शक्तियाँ सीमित होती हैं।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — भारतीय संविधान – संसद और राज्य विधानमंडल – संरचना, कार्य-संचालन, शक्तियों और विशेषाधिकार एवं इनसे उत्पन्न होने वाले विषय | GS Paper III — भारतीय अर्थव्यवस्था तथा योजना, संसाधनों को जुटाने, प्रगति, विकास तथा रोज़गार से संबंधित विषय
- Prelims: विनियोग विधेयक, धन विधेयक, भारत की संचित निधि, राज्यसभा की शक्तियाँ, लोकसभा की शक्तियाँ, संसदीय प्रक्रिया, अनुच्छेद 114, अनुच्छेद 110
- Essay: भारतीय लोकतंत्र में संसद की भूमिका और जवाबदेही, राजकोषीय संघवाद और राज्यों के वित्तीय अधिकार
त्वरित पुनरावृत्ति: विनियोग विधेयक एक धन विधेयक है जो सरकार को भारत की संचित निधि से धन निकालने की अनुमति देता है और इस पर राज्यसभा की शक्तियाँ सीमित होती हैं।
यह खबर चर्चा में क्यों?
हाल ही में, राज्यसभा ने विनियोग (सं. 3) विधेयक, 2026 (Appropriation (No.3) Bill, 2026) पर विचार करने के बाद उसे लोकसभा को वापस लौटा दिया। यह विधेयक भारत की संचित निधि (Consolidated Fund of India) से वित्तीय वर्ष 31 मार्च, 2023 को समाप्त हुए कुछ सेवाओं पर किए गए अतिरिक्त खर्चों को पूरा करने के लिए धन के विनियोग को अधिकृत करता है। यह घटना संसदीय प्रक्रिया और धन विधेयकों से संबंधित राज्यसभा की सीमित शक्तियों को रेखांकित करती है।
पृष्ठभूमि
- संसद के मानसून सत्र के दौरान कई महत्वपूर्ण विधेयक चर्चा और पारित होने के लिए सूचीबद्ध थे, जिनमें विनियोग (सं. 3) विधेयक, 2026 भी शामिल था।
- विनियोग विधेयक एक धन विधेयक (Money Bill) होता है, जिसके संबंध में राज्यसभा की शक्तियाँ सीमित होती हैं।
- इस विधेयक का उद्देश्य वित्तीय वर्ष 2022-23 के दौरान कुछ सेवाओं पर स्वीकृत राशि से अधिक खर्च की गई राशि को कानूनी वैधता प्रदान करना था।
- संविधान के अनुसार, सरकार भारत की संचित निधि से कोई भी धन संसद की अनुमति के बिना नहीं निकाल सकती।
- विपक्षी दलों ने विभिन्न मुद्दों पर सरकार से बयान की मांग करते हुए सदन में गतिरोध बनाए रखा, जिससे विधायी कार्य प्रभावित हुआ।
- लोकसभा ने कराधान और अन्य कानून (संशोधन) विधेयक, 2026 (The Taxation and Other Laws (Amendment) Bill, 2026) भी पारित किया, जो भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007, आयकर अधिनियम, 2025 और वित्त अधिनियम, 2026 में संशोधन करता है।
विनियोग विधेयक क्या है?
- विनियोग विधेयक एक ऐसा विधेयक है जो सरकार को भारत की संचित निधि से धन निकालने और खर्च करने की अनुमति देता है।
- भारतीय संविधान के अनुच्छेद 114 के तहत, संसद द्वारा पारित विनियोग विधेयक के बिना भारत की संचित निधि से कोई भी धन नहीं निकाला जा सकता है।
- यह विधेयक आमतौर पर वार्षिक बजट प्रक्रिया के हिस्से के रूप में पेश किया जाता है, जिसमें सरकार के अनुमानित व्यय को अधिकृत किया जाता है।
- विनियोग विधेयक को धन विधेयक माना जाता है, और इसलिए इसे केवल लोकसभा में ही पेश किया जा सकता है।
- लोकसभा में पारित होने के बाद, इसे राज्यसभा में भेजा जाता है, जो इसे केवल 14 दिनों के लिए रोक सकती है या इसमें संशोधन का सुझाव दे सकती है।
- राज्यसभा द्वारा सुझाए गए संशोधनों को स्वीकार करना या अस्वीकार करना लोकसभा के विवेक पर निर्भर करता है। यदि राज्यसभा 14 दिनों के भीतर विधेयक को वापस नहीं करती है, तो इसे दोनों सदनों द्वारा पारित मान लिया जाता है।
- एक बार जब विनियोग विधेयक दोनों सदनों द्वारा पारित हो जाता है और राष्ट्रपति की स्वीकृति प्राप्त कर लेता है, तो सरकार को उसमें उल्लिखित उद्देश्यों के लिए धन खर्च करने का अधिकार मिल जाता है।
- वर्तमान विधेयक (सं. 3) विशेष रूप से पिछले वित्तीय वर्ष (2022-23) में किए गए ‘अतिरिक्त अनुदान’ (excess grants) को नियमित करने से संबंधित है, जब स्वीकृत राशि से अधिक खर्च किया गया था।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| विनियोग विधेयक (Appropriation Bill) | यह भारत की संचित निधि (Consolidated Fund of India) से धन निकालने और खर्च करने के लिए सरकार को अधिकृत करता है। इसके बिना सरकार कोई भी व्यय नहीं कर सकती। |
| राज्यसभा की भूमिका | धन विधेयक (Money Bill) होने के कारण, राज्यसभा इसे केवल विचार के लिए वापस कर सकती है या संशोधनों की सिफारिश कर सकती है, लेकिन इसे अस्वीकृत नहीं कर सकती। लोकसभा राज्यसभा की सिफारिशों को स्वीकार या अस्वीकार कर सकती है। |
| अतिरिक्त व्यय का विनियमन | यह विधेयक वित्तीय वर्ष के दौरान स्वीकृत राशि से अधिक किए गए व्यय को नियमित करने के लिए प्रस्तुत किया गया था, जो सरकार के वित्तीय प्रबंधन का एक महत्वपूर्ण पहलू है। |
| संसदीय सत्र की कार्यवाही | मानसून सत्र के दौरान इस विधेयक पर विचार और वापसी, संसदीय कार्यवाही और विधायी प्रक्रिया की निरंतरता को दर्शाती है। |
| कराधान और अन्य कानून (संशोधन) विधेयक, 2026 | लोकसभा द्वारा पारित यह विधेयक विभिन्न वित्तीय कानूनों में संशोधन करता है, जो देश की कराधान नीति और वित्तीय प्रणाली को प्रभावित करेगा। |
महत्व
आर्थिक महत्व
- विनियोग विधेयक का पारित होना सरकार के लिए आवश्यक व्यय को पूरा करने और वित्तीय स्थिरता बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण है। यह सुनिश्चित करता है कि सरकार के पास अपने कार्यक्रमों और सेवाओं को चलाने के लिए धन उपलब्ध हो।
- अतिरिक्त व्यय का विनियमन वित्तीय अनुशासन और जवाबदेही सुनिश्चित करता है, जिससे यह पता चलता है कि सरकार ने स्वीकृत बजट से अधिक खर्च क्यों किया और इसे कैसे नियमित किया जा रहा है।
संवैधानिक और विधायी महत्व
- यह घटना भारतीय संविधान के अनुच्छेद 114 (विनियोग विधेयक) और अनुच्छेद 110 (धन विधेयक) के तहत निर्धारित विधायी प्रक्रिया को दर्शाती है, जिसमें लोकसभा और राज्यसभा की विशिष्ट भूमिकाएँ शामिल हैं।
- विधेयकों का पारित होना संसद की विधायी शक्ति और देश के शासन में उसकी केंद्रीय भूमिका को रेखांकित करता है।
शासन और जवाबदेही
- संसद में विधेयकों पर चर्चा और विचार-विमर्श सरकार के वित्तीय निर्णयों पर संसदीय निरीक्षण और जवाबदेही सुनिश्चित करता है।
- विपक्ष द्वारा गृह मंत्री से बयान की मांग और अध्यक्ष द्वारा निर्देश, सरकार को जनता के प्रति जवाबदेह ठहराने में विपक्ष की भूमिका और संसदीय प्रक्रियाओं के महत्व को दर्शाता है।
चुनौतियाँ
1. संसदीय गतिरोध और व्यवधान
- विपक्ष द्वारा विभिन्न मुद्दों पर सरकार से बयान की मांग और परिणामस्वरूप सदन की कार्यवाही में व्यवधान, संसदीय कामकाज की दक्षता को प्रभावित करता है।
- लगातार गतिरोध महत्वपूर्ण विधायी कार्यों में देरी कर सकता है और सार्वजनिक धन का अपव्यय कर सकता है।
यूपीएससी लिंक: भारतीय संसद और राज्य विधायिका – संरचना, कार्यप्रणाली, कार्य संचालन, शक्तियाँ एवं विशेषाधिकार और इनसे उत्पन्न होने वाले विषय।
2. वित्तीय अनुशासन और जवाबदेही
- अतिरिक्त व्यय का होना कभी-कभी वित्तीय कुप्रबंधन या अप्रत्याशित परिस्थितियों का संकेत हो सकता है, जिस पर गहन संसदीय जांच की आवश्यकता होती है।
- सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि सार्वजनिक धन का उपयोग विवेकपूर्ण और प्रभावी ढंग से किया जाए।
यूपीएससी लिंक: सरकारी बजटिंग। सरकारी वित्त।
3. केंद्र-राज्य संबंध (फरक्का संधि)
- फरक्का संधि के नवीनीकरण को लेकर बिहार के हितों पर चिंता व्यक्त करना, अंतर-राज्यीय जल विवादों और केंद्र-राज्य संबंधों में राज्यों की चिंताओं के महत्व को उजागर करता है।
- ऐसी संधियाँ राज्यों की कृषि और आर्थिक गतिविधियों को सीधे प्रभावित करती हैं।
यूपीएससी लिंक: केंद्र-राज्य वित्तीय संबंध। अंतर-राज्यीय जल विवाद।
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| विनियोग विधेयक पर विचार | अतिरिक्त व्यय का औचित्य और वित्तीय अनुशासन बनाए रखना। |
| संसदीय गतिरोध | महत्वपूर्ण विधायी कार्यों में देरी और सदन के समय का नुकसान। |
| विपक्ष की मांगें | सरकार द्वारा जवाबदेही और पारदर्शिता सुनिश्चित करने में संभावित देरी। |
| फरक्का संधि का नवीनीकरण | संधि के नवीनीकरण में संबंधित राज्यों (जैसे बिहार) के हितों की पर्याप्त सुरक्षा। |
| कराधान कानूनों में संशोधन | संशोधनों का अर्थव्यवस्था और विभिन्न हितधारकों पर संभावित प्रभाव। |
आगे की राह
- संसदीय कार्यवाही को सुचारू बनाने के लिए सरकार और विपक्ष के बीच रचनात्मक संवाद और आम सहमति स्थापित की जानी चाहिए।
- अतिरिक्त व्यय के कारणों की गहन जांच की जानी चाहिए और भविष्य में ऐसे व्यय को कम करने के लिए प्रभावी वित्तीय प्रबंधन तंत्र लागू किए जाने चाहिए।
- जनता के महत्वपूर्ण मुद्दों पर सरकार को संसद में समय पर और व्यापक बयान देने चाहिए ताकि जवाबदेही और पारदर्शिता सुनिश्चित हो सके।
- फरक्का संधि जैसे महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय समझौतों के नवीनीकरण से पहले, संबंधित राज्यों के साथ व्यापक परामर्श किया जाना चाहिए और उनके हितों की रक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए।
- कराधान और अन्य कानूनों में संशोधन करते समय, अर्थव्यवस्था पर उनके व्यापक प्रभाव का मूल्यांकन किया जाना चाहिए और हितधारकों के साथ परामर्श किया जाना चाहिए।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
विनियोग विधेयक · भारत की संचित निधि · धन विधेयक · संसदीय प्रक्रिया · राजकोषीय उत्तरदायित्व · बजटीय नियंत्रण · संसद की वित्तीय शक्तियाँ · लोकसभा की विशेष शक्तियाँ · राज्यसभा की भूमिका · अतिरिक्त अनुदान
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- अनुच्छेद 110: धन विधेयक की परिभाषा।
- अनुच्छेद 114: विनियोग विधेयक।
- अनुच्छेद 266: भारत की संचित निधि और लोक लेखा।
- अनुच्छेद 112: वार्षिक वित्तीय विवरण (बजट)।
अवधारणा प्रवाह
सरकार द्वारा वित्तीय वर्ष के लिए अतिरिक्त व्यय। → विनियोग (सं. 3) विधेयक, 2026 लोकसभा में पारित। → राज्यसभा द्वारा विधेयक पर विचार और वापसी। → सरकार को भारत की संचित निधि से धन निकालने की अनुमति। → अतिरिक्त व्यय का विनियमन और वित्तीय जवाबदेही सुनिश्चित करना।
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
1. विनियोग विधेयक (Appropriation Bill) एक धन विधेयक (Money Bill) है।
2. राज्यसभा विनियोग विधेयक में संशोधन कर सकती है।
3. विनियोग विधेयक भारत की संचित निधि (Consolidated Fund of India) से धन निकालने की अनुमति देता है।
उपरोक्त में से कितने कथन सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है। विनियोग विधेयक अनुच्छेद 114 के तहत एक धन विधेयक है। कथन 2 गलत है। राज्यसभा धन विधेयक में संशोधन नहीं कर सकती, केवल सिफारिशें कर सकती है जिन्हें लोकसभा स्वीकार या अस्वीकार कर सकती है। कथन 3 सही है। विनियोग विधेयक भारत की संचित निधि से व्यय के लिए धन अधिकृत करता है।
Q2. अभिकथन (A): राज्यसभा विनियोग विधेयक को अस्वीकार नहीं कर सकती।
कारण (R): विनियोग विधेयक धन विधेयक की प्रकृति का होता है और धन विधेयक के संबंध में राज्यसभा की शक्तियाँ सीमित हैं।
- A और R दोनों सत्य हैं, और R, A का सही स्पष्टीकरण है।
- A और R दोनों सत्य हैं, लेकिन R, A का सही स्पष्टीकरण नहीं है।
- A सत्य है, लेकिन R असत्य है।
- A असत्य है, लेकिन R सत्य है।
उत्तर: A और R दोनों सत्य हैं, और R, A का सही स्पष्टीकरण है। — अभिकथन (A) सही है क्योंकि राज्यसभा धन विधेयक को अस्वीकार नहीं कर सकती, और विनियोग विधेयक एक धन विधेयक है। कारण (R) भी सही है और A का सही स्पष्टीकरण है, क्योंकि संविधान धन विधेयक के संबंध में राज्यसभा को सीमित शक्तियाँ प्रदान करता है, जिसमें इसे अस्वीकार करने या संशोधन करने की शक्ति शामिल नहीं है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ विनियोग विधेयक क्या है और भारतीय संसदीय प्रणाली में इसकी क्या भूमिका है? धन विधेयक के रूप में इसकी प्रकृति के आलोक में, राज्यसभा की शक्तियों के संदर्भ में इसकी जांच करें। (15 Marks)
रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. **परिचय:** विनियोग विधेयक की परिभाषा, इसका संवैधानिक आधार (अनुच्छेद 114) और इसका प्राथमिक उद्देश्य (भारत की संचित निधि से धन का विनियोग)।
2. **विनियोग विधेयक की भूमिका:**
* सरकार को व्यय करने के लिए कानूनी अधिकार प्रदान करना।
* संसद के वित्तीय नियंत्रण का एक महत्वपूर्ण साधन।
* बजटीय प्रक्रिया का अभिन्न अंग।
* अतिरिक्त अनुदान (Supplementary Grants), अतिरिक्त अनुदान (Excess Grants) आदि के लिए भी उपयोग।
3. **धन विधेयक के रूप में प्रकृति:**
* संविधान के अनुच्छेद 110 के तहत धन विधेयक की परिभाषा।
* विनियोग विधेयक का धन विधेयक के रूप में वर्गीकरण।
* लोकसभा अध्यक्ष का प्रमाणीकरण।
4. **राज्यसभा की शक्तियाँ (धन विधेयक के संदर्भ में):**
* राज्यसभा इसे अस्वीकार या संशोधित नहीं कर सकती।
* यह केवल सिफारिशें कर सकती है, जिन्हें लोकसभा स्वीकार या अस्वीकार कर सकती है।
* लोकसभा द्वारा पारित होने के 14 दिनों के भीतर इसे वापस करना अनिवार्य।
* यदि 14 दिनों के भीतर वापस नहीं किया जाता है, तो इसे दोनों सदनों द्वारा पारित मान लिया जाता है।
5. **निष्कर्ष:** विनियोग विधेयक का महत्व, लोकसभा की वित्तीय सर्वोच्चता और राज्यसभा की सीमित भूमिका के साथ संसदीय लोकतंत्र में वित्तीय जवाबदेही सुनिश्चित करने में इसकी भूमिका का संक्षिप्त सारांश।
स्रोत: The Hindu
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

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