21 Jul राज्यसभा समिति ने प्रतिस्पर्धा कानूनों में व्यापक सुधारों की सिफारिश की, जानिए प्रमुख प्रस्ताव
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — भारतीय संविधान: संसद और राज्य विधानमंडल—संरचना, कार्य, कार्य-संचालन, शक्तियाँ एवं विशेषाधिकार और इनसे उत्पन्न होने वाले विषय। | GS Paper III — भारतीय अर्थव्यवस्था तथा योजना, संसाधनों को जुटाने, प्रगति, विकास तथा रोज़गार से संबंधित विषय। समावेशी विकास तथा इससे उत्पन्न विषय। सरकारी बजटिंग।
- Prelims: भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI), प्रतिस्पर्धा अधिनियम, 2002, अधीनस्थ विधान समिति, प्रतिस्पर्धा-विरोधी व्यवहार, एकाधिकार, MSME, डिजिटल अर्थव्यवस्था
- Essay: भारत में आर्थिक प्रतिस्पर्धा और नियामक चुनौतियाँ, डिजिटल युग में विनियमन की भूमिका और आवश्यकता
त्वरित पुनरावृत्ति: राज्यसभा की अधीनस्थ विधान समिति ने भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) के विनियमों पर अपनी रिपोर्ट में प्रतिस्पर्धा कानून ढांचे की आवधिक समीक्षा और जन-जागरूकता बढ़ाने पर जोर दिया है, विशेषकर MSME और डिजिटल बाजारों के लिए।
यह खबर चर्चा में क्यों?
राज्यसभा की अधीनस्थ विधान समिति ने भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) से संबंधित चार प्रमुख विनियमों और मार्गदर्शक सिद्धांतों पर अपनी 257वीं रिपोर्ट प्रस्तुत की है। इस रिपोर्ट में समिति ने प्रतिस्पर्धा कानून ढांचे की समीक्षा, जन-जागरूकता बढ़ाने और विशेष रूप से सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSME) के लिए CCI की भूमिका को सुदृढ़ करने हेतु कई महत्वपूर्ण सिफारिशें की हैं।
पृष्ठभूमि
- भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) की स्थापना प्रतिस्पर्धा अधिनियम, 2002 (Competition Act, 2002) के तहत की गई थी, जिसका उद्देश्य भारत में प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देना और उसे बनाए रखना है।
- यह आयोग प्रतिस्पर्धा-विरोधी समझौतों को रोकना, प्रमुख स्थिति के दुरुपयोग को रोकना और संयोजनों (अधिग्रहण, नियंत्रण प्राप्त करना और विलय) को विनियमित करना सुनिश्चित करता है।
- अधीनस्थ विधान समिति (Committee on Subordinate Legislation) संसद की एक महत्वपूर्ण समिति है, जो यह जांच करती है कि क्या कार्यपालिका द्वारा बनाए गए नियम, विनियम और उप-नियम संविधान या संबंधित अधिनियम के प्रावधानों के अनुरूप हैं।
- हाल ही में, CCI ने भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (प्रतिबद्धता) विनियम, 2024; भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (परिनिर्धारण) विनियम, 2024; भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (व्यापारावर्त या आय का अवधारण) विनियम, 2024; और भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (धनीय शास्ति का अवधारण) मार्गदर्शक सिद्धांत, 2024 जैसे नए विनियम और सिद्धांत जारी किए हैं।
- ये विनियम प्रतिस्पर्धा अधिनियम के प्रवर्तन और अनुपालन को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं, विशेषकर डिजिटल अर्थव्यवस्था के संदर्भ में।
- समिति ने इन विनियमों की गहन जांच की और कॉरपोरेट कार्य मंत्रालय तथा CCI के प्रतिनिधियों के विचार सुने, जिसके बाद अपनी सिफारिशें प्रस्तुत कीं।
भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) क्या है?
- भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) भारत सरकार का एक वैधानिक निकाय है, जो प्रतिस्पर्धा अधिनियम, 2002 के प्रावधानों को लागू करने के लिए जिम्मेदार है।
- इसका मुख्य उद्देश्य भारतीय बाजारों में स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देना और उसे बनाए रखना, उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करना तथा व्यापार की स्वतंत्रता सुनिश्चित करना है।
- CCI प्रतिस्पर्धा-विरोधी समझौतों (जैसे कार्टेल), प्रमुख स्थिति के दुरुपयोग (जैसे एकाधिकारवादी व्यवहार) और संयोजनों (जैसे विलय और अधिग्रहण) को नियंत्रित करता है, जो प्रतिस्पर्धा पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकते हैं।
- आयोग में एक अध्यक्ष और छह सदस्य होते हैं, जिनकी नियुक्ति केंद्र सरकार द्वारा की जाती है।
- यह आयोग प्रतिस्पर्धा संबंधी मामलों में जांच करता है, आदेश जारी करता है और आवश्यकता पड़ने पर धनीय शास्ति (pecuniary penalties) भी लगाता है।
- CCI जन-जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से प्रतिस्पर्धा कानून के महत्व के बारे में विभिन्न हितधारकों को शिक्षित करने का भी प्रयास करता है।
- डिजिटल अर्थव्यवस्था के उदय के साथ, CCI की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो गई है, क्योंकि उसे नए और उभरते बाजार व्यवहारों को समझना और विनियमित करना है।
- इसका मुख्यालय नई दिल्ली में है और यह कॉरपोरेट कार्य मंत्रालय के अधीन कार्य करता है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| प्रतिस्पर्धा कानून ढांचे की समीक्षा | यह सुनिश्चित करना कि भारतीय बाजार प्रतिस्पर्धी, निष्पक्ष और वैश्विक मानकों के अनुरूप बना रहे, विशेषकर डिजिटल युग में। |
| हितधारकों के साथ व्यापक परामर्श | कानूनों को अद्यतन करने और उभरती चुनौतियों का प्रभावी ढंग से समाधान करने के लिए विभिन्न पक्षों के विचारों को शामिल करना। |
| वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं के अनुरूप बेंचमार्किंग | अंतर्राष्ट्रीय मानकों के साथ घरेलू ढांचे को संरेखित करना ताकि भारतीय अर्थव्यवस्था वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनी रहे। |
| जन-जागरूकता और जनसंपर्क | प्रतिस्पर्धा कानून के प्रभावी प्रवर्तन को सुदृढ़ करना और स्वैच्छिक अनुपालन को बढ़ावा देना। |
| MSME, स्टार्ट-अप्स पर विशेष ध्यान | इन क्षेत्रों को प्रतिस्पर्धी बाजारों में प्रभावी ढंग से भाग लेने में सक्षम बनाना और स्वस्थ प्रतिस्पर्धा की संस्कृति विकसित करना। |
| CCI की स्वतः संज्ञान लेने की शक्तियाँ | बाजार में प्रतिस्पर्धा-विरोधी गतिविधियों का पता लगाने और उन्हें संबोधित करने के लिए आयोग की सक्रिय भूमिका। |
महत्व
आर्थिक महत्व
- यह भारतीय बाजारों में निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा सुनिश्चित करता है, जिससे उपभोक्ताओं को बेहतर गुणवत्ता वाले उत्पाद और सेवाएँ उचित मूल्य पर उपलब्ध होती हैं।
- यह छोटे व्यवसायों, MSME और स्टार्ट-अप्स को बड़े खिलाड़ियों के साथ प्रतिस्पर्धा करने के लिए समान अवसर प्रदान करता है, जिससे आर्थिक समावेशिता बढ़ती है।
- यह नवाचार (Innovation) और दक्षता को बढ़ावा देता है, क्योंकि कंपनियाँ प्रतिस्पर्धी बने रहने के लिए लगातार सुधार करने का प्रयास करती हैं।
नियामकीय महत्व
- यह भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) को प्रतिस्पर्धा-विरोधी प्रथाओं से निपटने के लिए आवश्यक उपकरण और दिशानिर्देश प्रदान करता है, जैसे कि कार्टेल और प्रमुख स्थिति का दुरुपयोग।
- यह प्रतिस्पर्धा कानून के ढांचे की आवधिक समीक्षा की आवश्यकता पर बल देता है, जिससे यह सुनिश्चित होता है कि कानून डिजिटल युग की उभरती चुनौतियों के अनुरूप रहें।
- यह प्रतिस्पर्धा कानून के प्रवर्तन में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्धता और परिनिर्धारण (Settlement) जैसे तंत्रों को मजबूत करता है।
सामाजिक महत्व
- यह जन-जागरूकता बढ़ाने पर जोर देता है, जिससे आम जनता और छोटे व्यवसाय प्रतिस्पर्धा-विरोधी व्यवहारों की पहचान कर सकें और उनकी रिपोर्ट कर सकें।
- यह एक स्वस्थ व्यावसायिक वातावरण को बढ़ावा देता है जहाँ सभी आकार के उद्यम फल-फूल सकते हैं, जिससे रोजगार सृजन और आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलता है।
- यह सुनिश्चित करता है कि आर्थिक शक्ति का केंद्रीकरण न हो, जिससे समाज में धन के अधिक समान वितरण में मदद मिलती है।
चुनौतियाँ
1. डिजिटल अर्थव्यवस्था में प्रतिस्पर्धा
- डिजिटल बाजारों की जटिल और तेजी से बदलती प्रकृति के कारण प्रतिस्पर्धा-विरोधी व्यवहारों की पहचान करना और उन्हें विनियमित करना कठिन हो जाता है।
- बड़े डिजिटल प्लेटफॉर्म अक्सर डेटा और नेटवर्क प्रभावों के माध्यम से महत्वपूर्ण बाजार शक्ति रखते हैं, जिससे नए प्रवेशकों के लिए प्रतिस्पर्धा करना मुश्किल हो जाता है।
यूपीएससी लिंक: अर्थव्यवस्था: भारतीय अर्थव्यवस्था और योजना, संसाधन जुटाना, वृद्धि, विकास और रोजगार
2. जागरूकता और क्षमता निर्माण
- विशेषकर MSME, स्टार्ट-अप्स और आम जनता के बीच प्रतिस्पर्धा कानून के सिद्धांतों और प्रक्रियाओं के बारे में जागरूकता का अभाव है।
- CCI के लिए बाजार के सभी प्रतिभागियों तक पहुँचने और उन्हें शिक्षित करने के लिए पर्याप्त संसाधन और जनशक्ति की आवश्यकता है।
यूपीएससी लिंक: शासन: सरकारी नीतियों और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिए हस्तक्षेप
3. नियामकीय ढाँचे का अद्यतन
- प्रतिस्पर्धा कानून ढांचे की निरंतर समीक्षा और अद्यतन की आवश्यकता है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि यह उभरती हुई बाजार गतिशीलता और वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं के अनुरूप है।
- कानूनों को अद्यतन करते समय सभी हितधारकों के विचारों को संतुलित करना एक चुनौती है।
यूपीएससी लिंक: शासन: सरकारी नीतियों और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिए हस्तक्षेप
4. प्रवर्तन में विलंब
- प्रतिस्पर्धा-विरोधी मामलों की जाँच और निर्णय में लगने वाला समय लंबा हो सकता है, जिससे बाजार में अनिश्चितता पैदा होती है और प्रभावी निवारण में देरी होती है।
- न्यायिक समीक्षा और अपीलीय प्रक्रियाओं के कारण भी प्रवर्तन में विलंब हो सकता है।
यूपीएससी लिंक: शासन: सरकारी नीतियों और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिए हस्तक्षेप
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| डिजिटल बाजारों की जटिलता | तेजी से बदलते डिजिटल परिदृश्य में प्रतिस्पर्धा-विरोधी प्रथाओं की पहचान और विनियमन। |
| जागरूकता की कमी | MSME, स्टार्ट-अप्स और आम जनता के बीच प्रतिस्पर्धा कानून के बारे में अपर्याप्त ज्ञान। |
| नियामकीय अद्यतन की आवश्यकता | वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं और उभरती चुनौतियों के अनुरूप कानून को लगातार संशोधित करने की चुनौती। |
| प्रवर्तन में देरी | जांच और निर्णय प्रक्रियाओं में लगने वाला लंबा समय, जिससे बाजार में अनिश्चितता बढ़ती है। |
| संसाधन और क्षमता | CCI के लिए प्रभावी ढंग से कार्य करने और व्यापक जागरूकता फैलाने के लिए पर्याप्त संसाधनों और विशेषज्ञता की आवश्यकता। |
आगे की राह
- भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) को डिजिटल बाजारों की विशिष्ट चुनौतियों का समाधान करने के लिए अपनी विशेषज्ञता और क्षमता को बढ़ाना चाहिए।
- CCI को MSME, स्टार्ट-अप्स और आम जनता के लिए लक्षित जागरूकता कार्यक्रम और आउटरीच पहल (Outreach Initiatives) जारी रखनी चाहिए।
- प्रतिस्पर्धा कानून ढांचे की नियमित और व्यापक समीक्षा की जानी चाहिए, जिसमें सभी हितधारकों के साथ परामर्श शामिल हो।
- वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं से सीखने और भारतीय संदर्भ में उन्हें अनुकूलित करने के लिए अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा दिया जाना चाहिए।
- प्रतिस्पर्धा-विरोधी मामलों की जांच और निर्णय प्रक्रियाओं को तेज करने के लिए प्रक्रियात्मक दक्षता में सुधार किया जाना चाहिए।
- स्वैच्छिक अनुपालन को प्रोत्साहित करने के लिए प्रतिबद्धता और परिनिर्धारण जैसे तंत्रों का प्रभावी ढंग से प्रचार किया जाना चाहिए।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग · प्रतिस्पर्धा अधिनियम · अधीनस्थ विधान · समिति की सिफारिशें · डिजिटल अर्थव्यवस्था · सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSME) · स्वैच्छिक अनुपालन · जन-जागरूकता · नियामकीय ढांचा · प्रतिस्पर्धा-विरोधी व्यवहार
अवधारणा प्रवाह
राज्यसभा की अधीनस्थ विधान समिति की रिपोर्ट → भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) के विनियमों की समीक्षा → प्रतिस्पर्धा कानून ढांचे के अद्यतन और जन-जागरूकता की सिफारिश → बाजार में स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देना → उपभोक्ताओं के लिए बेहतर विकल्प और नवाचार → आर्थिक संवृद्धि और समावेशी विकास
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. राज्यसभा की अधीनस्थ विधान समिति के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
1. यह समिति संसद द्वारा बनाए गए कानूनों के तहत बनाए गए नियमों, विनियमों और उप-नियमों की जांच करती है।
2. यह समिति केवल उन्हीं अधीनस्थ विधानों की जांच कर सकती है, जो संसद के दोनों सदनों में प्रस्तुत किए गए हों।
3. समिति की सिफारिशें सरकार के लिए बाध्यकारी होती हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
- केवल 1
- केवल 1 और 2
- केवल 2 और 3
- 1, 2 और 3
उत्तर: केवल 1 — कथन 1 सही है। अधीनस्थ विधान समिति का मुख्य कार्य संसद द्वारा प्रत्यायोजित विधायी शक्तियों के प्रयोग की जांच करना है। कथन 2 गलत है क्योंकि यह समिति उन नियमों की भी जांच कर सकती है, जिन्हें अभी तक संसद में प्रस्तुत नहीं किया गया है। कथन 3 गलत है क्योंकि समिति की सिफारिशें आमतौर पर सलाहकार प्रकृति की होती हैं, बाध्यकारी नहीं।
Q2. भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
1. CCI एक सांविधिक निकाय है, जिसे प्रतिस्पर्धा अधिनियम, 2002 के तहत स्थापित किया गया है।
2. इसका मुख्य उद्देश्य भारतीय बाजारों में प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देना और उसे बनाए रखना है।
3. CCI केवल शिकायतों के आधार पर ही मामलों की जांच कर सकता है, स्वतः संज्ञान नहीं ले सकता।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
- केवल 1
- केवल 1 और 2
- केवल 2 और 3
- 1, 2 और 3
उत्तर: केवल 1 और 2 — कथन 1 और 2 सही हैं। भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) प्रतिस्पर्धा अधिनियम, 2002 के तहत स्थापित एक सांविधिक निकाय है, जिसका उद्देश्य प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देना और उपभोक्ता हितों की रक्षा करना है। कथन 3 गलत है क्योंकि CCI के पास स्वतः संज्ञान लेने की शक्ति है, जैसा कि अधीनस्थ विधान समिति की रिपोर्ट में भी उल्लेख किया गया है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) द्वारा जारी किए गए नए विनियमों और मार्गदर्शक सिद्धांतों के आलोक में, भारत में प्रतिस्पर्धा कानून के नियामकीय ढांचे की समय-समय पर समीक्षा के महत्व पर चर्चा करें। साथ ही, प्रतिस्पर्धा कानून के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाने में CCI की भूमिका का भी मूल्यांकन करें। (250 शब्द)
रूपरेखा: प्रश्न के पहले भाग में, भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) द्वारा जारी किए गए नए विनियमों (प्रतिबद्धता, परिनिर्धारण, व्यापारावर्त/आय का अवधारण, धनीय शास्ति का अवधारण) का संक्षिप्त उल्लेख करते हुए, प्रतिस्पर्धा कानून के नियामकीय ढांचे की समय-समय पर समीक्षा के महत्व पर प्रकाश डालें। इसमें डिजिटल युग में तीव्र परिवर्तनों, वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं के साथ तालमेल और उभरती हुई चुनौतियों का समाधान करने की आवश्यकता को शामिल करें। दूसरे भाग में, प्रतिस्पर्धा कानून के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाने में CCI की भूमिका का मूल्यांकन करें। इसमें MSME, स्टार्ट-अप्स और आम जनता के लिए जागरूकता कार्यक्रमों की आवश्यकता, स्वैच्छिक अनुपालन को बढ़ावा देने और प्रतिस्पर्धा-विरोधी व्यवहारों की रिपोर्टिंग को प्रोत्साहित करने जैसे बिंदुओं पर चर्चा करें। अंत में, एक संतुलित निष्कर्ष प्रस्तुत करें।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
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