22 Jul राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन योजना (एनडीएमपी) 2026: केंद्र-राज्य समन्वय और संसाधन प्रबंधन
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper I — भूगोल (आपदा एवं आपदा प्रबंधन) | GS Paper II — शासन, संविधान, राजव्यवस्था (केंद्र एवं राज्यों द्वारा आपदा प्रबंधन) | GS Paper III — आपदा प्रबंधन (आपदा जोखिम न्यूनीकरण, संस्थागत ढाँचा)
- Prelims: राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन योजना (NDMP), आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005, आपदा प्रबंधन पर राष्ट्रीय नीति (NPDM), 2009, आपदा जोखिम न्यूनीकरण के लिए सेंडाई फ्रेमवर्क, सतत विकास लक्ष्य (SDG), जलवायु परिवर्तन पर पेरिस समझौता, भारत आपदा संसाधन नेटवर्क (IDRN)
- Essay: आपदा प्रबंधन में भारत की तैयारी और चुनौतियाँ, सतत विकास लक्ष्यों की प्राप्ति में आपदा जोखिम न्यूनीकरण की भूमिका
त्वरित पुनरावृत्ति: राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन योजना (NDMP) भारत में आपदा जोखिम न्यूनीकरण के लिए एक व्यापक ढाँचा प्रदान करती है, जो राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय प्रतिबद्धताओं को एकीकृत करती है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
गृह राज्यमंत्री श्री नित्यानंद राय ने राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन योजना (NDMP) और भारत आपदा संसाधन नेटवर्क (IDRN) के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि NDMP को पहली बार 2016 में तैयार किया गया था और 2019 में इसे संशोधित किया गया, जो केंद्र, राज्य और जिला स्तर पर आपदा जोखिम न्यूनीकरण में विभिन्न हितधारकों की भूमिकाओं और जिम्मेदारियों को निर्धारित करती है।
पृष्ठभूमि
- भारत एक आपदा-प्रवण देश है जहाँ विभिन्न प्रकार की प्राकृतिक और मानव-निर्मित आपदाएँ आती रहती हैं।
- आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 भारत में आपदा प्रबंधन के लिए कानूनी और संस्थागत ढाँचा प्रदान करता है।
- आपदा प्रबंधन पर राष्ट्रीय नीति (NPDM), 2009 आपदा प्रबंधन के लिए एक व्यापक दृष्टिकोण प्रस्तुत करती है, जिसमें रोकथाम, शमन, तैयारी, प्रतिक्रिया, राहत और पुनर्वास शामिल हैं।
- भारत ने आपदा जोखिम न्यूनीकरण (DRR) के लिए सेंडाई फ्रेमवर्क, सतत विकास लक्ष्य (SDG) और जलवायु परिवर्तन पर पेरिस समझौता जैसे कई वैश्विक समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं, जो आपदा प्रबंधन में अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देते हैं।
- प्रधानमंत्री का आपदा जोखिम न्यूनीकरण के लिए दस-सूत्री एजेंडा राष्ट्रीय प्राथमिकताओं को रेखांकित करता है और आपदा प्रबंधन के लिए एक सक्रिय दृष्टिकोण पर जोर देता है।
- सामाजिक समावेशन और आपदा जोखिम न्यूनीकरण को मुख्यधारा में लाना NDMP के प्रमुख सिद्धांतों में से एक है।
राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन योजना (NDMP) क्या है?
- इसे पहली बार 2016 में जारी किया गया था और सभी संबंधित हितधारकों के परामर्श के बाद 2019 में संशोधित किया गया।
- यह योजना केंद्र और राज्य स्तर के सभी सेक्टरों, मंत्रालयों एवं विभागों के साथ-साथ जिला स्तर के अधिकारियों को एक साथ लाती है।
- NDMP का मुख्य उद्देश्य आपदा से जुड़े जोखिम को कम करने में विभिन्न हितधारकों की भूमिकाओं और जिम्मेदारियों को निर्धारित करना है।
- यह राष्ट्रीय विधिक नियमों (आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 और आपदा प्रबंधन पर राष्ट्रीय नीति, 2009) का पालन करती है।
- यह आपदा जोखिम न्यूनीकरण (DRR) के लिए सेंडाई फ्रेमवर्क, सतत विकास लक्ष्य (SDG) और जलवायु परिवर्तन पर पेरिस समझौता जैसे वैश्विक लक्ष्यों को प्राप्त करने में सक्रिय रूप से भाग लेती है।
- NDMP में आपदा जोखिम न्यूनीकरण के लिए प्रधानमंत्री का दस-सूत्री एजेंडा और सामाजिक समावेशन जैसे सिद्धांत शामिल हैं।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| राष्ट्रीय विधिक नियमों का पालन | आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 और राष्ट्रीय नीति (एनपीडीएम) 2009 के तहत एक सुदृढ़ कानूनी ढाँचा प्रदान करता है। |
| वैश्विक लक्ष्यों में सहभागिता | सेंडाई फ्रेमवर्क, SDG और पेरिस समझौते जैसे अंतरराष्ट्रीय समझौतों के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। |
| प्रधानमंत्री का दस-सूत्री एजेंडा | आपदा जोखिम न्यूनीकरण (DRR) के लिए राष्ट्रीय प्राथमिकताओं और रणनीतिक दिशा को रेखांकित करता है। |
| सामाजिक समावेशन | आपदा प्रबंधन में समाज के सभी वर्गों की भागीदारी सुनिश्चित करता है, जिससे अधिक प्रभावी प्रतिक्रिया संभव होती है। |
| आपदा जोखिम न्यूनीकरण का मुख्यधारा में लाना | आपदा प्रबंधन को विकास योजनाओं का अभिन्न अंग बनाता है, जिससे दीर्घकालिक सुरक्षा सुनिश्चित होती है। |
| भारत आपदा संसाधन नेटवर्क (IDRN) | आपातकालीन स्थिति में आवश्यक उपकरणों और मानव संसाधनों की उपलब्धता तथा स्थान की जानकारी प्रदान कर त्वरित निर्णय लेने में सहायक। |
महत्व
शासन और प्रशासन
- एनडीएमपी केंद्र, राज्य और जिला स्तर पर विभिन्न मंत्रालयों, विभागों और अधिकारियों की भूमिकाओं तथा जिम्मेदारियों को स्पष्ट रूप से परिभाषित करता है, जिससे आपदा प्रतिक्रिया में समन्वय और दक्षता बढ़ती है।
- यह आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 और राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन नीति, 2009 जैसे मौजूदा कानूनी ढाँचों को मजबूत करता है, जिससे आपदाओं से निपटने के लिए एक मजबूत संस्थागत तंत्र बनता है।
आपदा जोखिम न्यूनीकरण (DRR)
- यह योजना आपदा जोखिम न्यूनीकरण को मुख्यधारा में लाने पर जोर देती है, जिसका अर्थ है कि आपदा संबंधी विचारों को विकास योजनाओं और नीतियों में एकीकृत किया जाता है, जिससे भविष्य में होने वाले नुकसान को कम किया जा सके।
- सेंडाई फ्रेमवर्क, सतत विकास लक्ष्य (SDG) और जलवायु परिवर्तन पर पेरिस समझौते जैसे वैश्विक समझौतों के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाता है, जिससे अंतरराष्ट्रीय सहयोग और सर्वोत्तम प्रथाओं का आदान-प्रदान संभव होता है।
प्रौद्योगिकी और नवाचार
- भारत आपदा संसाधन नेटवर्क (IDRN) एक वेब-आधारित प्लेटफॉर्म है जो आपातकालीन स्थिति में आवश्यक उपकरणों, कुशल मानव संसाधनों और महत्वपूर्ण सामानों के भंडार का प्रबंधन करता है, जिससे त्वरित प्रतिक्रिया और संसाधनों का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित होता है।
- यह डेटाबेस निर्णय लेने वालों को किसी भी आपातकालीन स्थिति से निपटने हेतु आवश्यक उपकरणों और मानव संसाधनों की उपलब्धता का पता लगाने में सक्षम बनाता है, जिससे तैयारी और प्रतिक्रिया में सुधार होता है।
चुनौतियाँ
1. संसाधनों का प्रभावी आवंटन
- आपदा प्रबंधन के लिए आवश्यक वित्तीय, भौतिक और मानव संसाधनों का राज्यों और जिलों के बीच असमान वितरण एक चुनौती है।
- संसाधनों की कमी या उनके अनुपयुक्त उपयोग से आपदा प्रतिक्रिया और पुनर्वास प्रयासों में बाधा आ सकती है।
यूपीएससी लिंक: आपदा प्रबंधन; शासन
2. अंतर-एजेंसी समन्वय
- केंद्र, राज्य और जिला स्तर पर विभिन्न एजेंसियों, मंत्रालयों और विभागों के बीच प्रभावी समन्वय स्थापित करना एक जटिल कार्य है।
- समन्वय की कमी से प्रतिक्रिया में देरी, संसाधनों का दोहराव और अक्षमता हो सकती है।
यूपीएससी लिंक: शासन; आपदा प्रबंधन
3. क्षमता निर्माण और जागरूकता
- स्थानीय समुदायों, स्वयंसेवकों और जिला स्तर के अधिकारियों के बीच आपदा प्रबंधन के लिए पर्याप्त क्षमता निर्माण और जागरूकता का अभाव है।
- प्रशिक्षण और शिक्षा की कमी से आपदा के समय प्रभावी प्रतिक्रिया देने की क्षमता प्रभावित होती है।
यूपीएससी लिंक: आपदा प्रबंधन; सामाजिक मुद्दे
4. तकनीकी बुनियादी ढाँचे का विस्तार
- IDRN जैसे तकनीकी प्लेटफॉर्म की पहुंच और उपयोगिता को दूरस्थ और ग्रामीण क्षेत्रों तक बढ़ाना एक चुनौती है।
- इंटरनेट कनेक्टिविटी और डिजिटल साक्षरता की कमी इन उपकरणों के पूर्ण उपयोग में बाधा डाल सकती है।
यूपीएससी लिंक: आपदा प्रबंधन; विज्ञान और प्रौद्योगिकी
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| डेटा की सटीकता और अद्यतन | IDRN में उपलब्ध संसाधनों के डेटा को नियमित रूप से अद्यतन और सटीक बनाए रखना एक सतत चुनौती है, विशेषकर दूरदराज के क्षेत्रों में। |
| सामुदायिक भागीदारी का अभाव | आपदा प्रबंधन योजनाओं में स्थानीय समुदायों और पंचायती राज संस्थाओं की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करना अक्सर मुश्किल होता है, जिससे जमीनी स्तर पर प्रभावशीलता कम हो जाती है। |
| जलवायु परिवर्तन के बढ़ते प्रभाव | जलवायु परिवर्तन के कारण आपदाओं की आवृत्ति और तीव्रता में वृद्धि हो रही है, जिससे मौजूदा योजनाएँ और संसाधन अपर्याप्त साबित हो सकते हैं। |
| पुनर्वास और पुनर्निर्माण की धीमी गति | आपदा के बाद पुनर्वास और पुनर्निर्माण कार्य अक्सर धीमी गति से होते हैं, जिससे प्रभावित आबादी को लंबे समय तक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। |
| निजी क्षेत्र की सीमित भागीदारी | आपदा प्रबंधन में निजी क्षेत्र की विशेषज्ञता और संसाधनों का पूरी तरह से लाभ उठाने में चुनौतियाँ हैं, जबकि यह एक महत्वपूर्ण हितधारक हो सकता है। |
आगे की राह
- आपदा प्रबंधन में प्रौद्योगिकी के उपयोग को बढ़ावा देना, विशेषकर दूरस्थ संवेदन (Remote Sensing), भौगोलिक सूचना प्रणाली (GIS) और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) का उपयोग कर प्रारंभिक चेतावनी प्रणालियों को मजबूत करना।
- स्थानीय समुदायों और पंचायती राज संस्थाओं को आपदा प्रबंधन प्रक्रियाओं में सक्रिय रूप से शामिल करना, उन्हें प्रशिक्षण और संसाधन प्रदान कर सशक्त बनाना।
- आपदा प्रतिरोधी बुनियादी ढाँचे (Disaster Resilient Infrastructure) के निर्माण पर ध्यान केंद्रित करना, ताकि भविष्य की आपदाओं से होने वाले नुकसान को कम किया जा सके।
- आपदा प्रबंधन के लिए समर्पित वित्तीय संसाधनों को बढ़ाना और उनके प्रभावी उपयोग के लिए एक पारदर्शी तंत्र स्थापित करना।
- जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को ध्यान में रखते हुए आपदा प्रबंधन योजनाओं को नियमित रूप से अद्यतन करना और अनुकूलन रणनीतियों (Adaptation Strategies) को एकीकृत करना।
- अंतर्राष्ट्रीय सहयोग और सर्वोत्तम प्रथाओं के आदान-प्रदान को बढ़ावा देना, ताकि भारत वैश्विक स्तर पर आपदा प्रबंधन में अपनी भूमिका को मजबूत कर सके।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन योजना (एनडीएमपी) · आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 · आपदा प्रबंधन पर राष्ट्रीय नीति (एनपीडीएम) 2009 · आपदा जोखिम न्यूनीकरण (डीआरआर) · सेंडाई फ्रेमवर्क · सतत विकास लक्ष्य (एसडीजी) · जलवायु परिवर्तन पर पेरिस समझौता · प्रधानमंत्री का दस-सूत्री एजेंडा · सामाजिक समावेशन · भारत आपदा संसाधन नेटवर्क (आईडीआरएन)
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- {‘अनुच्छेद 256’: ‘संघ और राज्यों के बीच प्रशासनिक संबंध’, ‘अनुच्छेद 257’: ‘कुछ मामलों में राज्यों पर संघ का नियंत्रण’, ‘अनुच्छेद 282’: ‘संघ या राज्य द्वारा अनुदान’}
अवधारणा प्रवाह
आपदा जोखिम की पहचान और मूल्यांकन → राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन योजना का निर्माण → संसाधनों का संग्रह (IDRN के माध्यम से) → प्रारंभिक चेतावनी और तैयारी → आपदा प्रतिक्रिया और राहत कार्य → पुनर्वास और पुनर्निर्माण → आपदा जोखिम न्यूनीकरण का मुख्यधारा में लाना
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन योजना (एनडीएमपी) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. एनडीएमपी को पहली बार 2016 में जारी किया गया था और 2019 में इसमें संशोधन किया गया।
2. यह योजना केवल केंद्र और राज्य स्तर पर आपदा प्रबंधन से संबंधित मंत्रालयों और विभागों की भूमिकाओं को परिभाषित करती है।
3. सेंडाई फ्रेमवर्क और सतत विकास लक्ष्य (एसडीजी) एनडीएमपी के प्रमुख स्तंभों में से हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है क्योंकि एनडीएमपी को पहली बार 2016 में तैयार और जारी किया गया था, तथा 2019 में संशोधित किया गया। कथन 2 गलत है क्योंकि यह केंद्र, राज्य और जिला स्तर के सभी सेक्टरों, मंत्रालयों, विभागों और अधिकारियों को एक साथ लाता है। कथन 3 सही है क्योंकि सेंडाई फ्रेमवर्क और सतत विकास लक्ष्य (एसडीजी) एनडीएमपी के मुख्य स्तंभों में शामिल हैं।
Q2. भारत आपदा संसाधन नेटवर्क (आईडीआरएन) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. आईडीआरएन एक देशव्यापी इलेक्ट्रॉनिक भंडार है जिसमें केवल उपकरणों की जानकारी शामिल होती है।
2. यह एक वेब-आधारित प्लेटफॉर्म है जिसका उपयोग आपातकालीन स्थिति में आवश्यक उपकरणों और कुशल मानव संसाधनों के प्रबंधन के लिए किया जाता है।
3. आईडीआरएन का मुख्य उद्देश्य निर्णय लेने वालों को आपदाओं से निपटने हेतु उपकरणों और मानव संसाधनों की उपलब्धता का पता लगाने में सक्षम बनाना है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
- केवल 1 और 2
- केवल 2 और 3
- केवल 3
- 1, 2 और 3
उत्तर: केवल 2 और 3 — कथन 1 गलत है क्योंकि आईडीआरएन में उपकरणों और मानव संसाधनों दोनों की जानकारी शामिल होती है। कथन 2 सही है क्योंकि यह एक वेब-आधारित प्लेटफॉर्म है जिसका उपयोग आपातकालीन स्थिति में आवश्यक उपकरणों, कुशल मानव संसाधनों और अहम सामानों के भंडार को प्रबंधित करने के लिए किया जाता है। कथन 3 सही है क्योंकि इसका मुख्य उद्देश्य निर्णय लेने वालों को किसी भी आपातकालीन स्थिति से निपटने हेतु आवश्यक उपकरणों और मानव संसाधनों की उपलब्धता का पता लगाने में सक्षम बनाना है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन योजना (एनडीएमपी) भारत में आपदा जोखिम न्यूनीकरण (डीआरआर) के लिए एक व्यापक ढाँचा प्रस्तुत करती है। इस कथन के आलोक में, एनडीएमपी के प्रमुख स्तंभों और भारत आपदा संसाधन नेटवर्क (आईडीआरएन) की भूमिका का विस्तार से विश्लेषण कीजिए। (250 शब्द)
रूपरेखा: उत्तर की शुरुआत एनडीएमपी के परिचय और उसके उद्देश्य से करें। इसके बाद, एनडीएमपी के मुख्य स्तंभों का विस्तार से वर्णन करें, जिसमें आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005, आपदा प्रबंधन पर राष्ट्रीय नीति (एनपीडीएम) 2009, सेंडाई फ्रेमवर्क, सतत विकास लक्ष्य (एसडीजी), पेरिस समझौता और प्रधानमंत्री के दस-सूत्री एजेंडा जैसे राष्ट्रीय व वैश्विक संदर्भ शामिल हों। सामाजिक समावेशन और आपदा जोखिम न्यूनीकरण को मुख्यधारा में लाने के महत्व को रेखांकित करें। अंत में, भारत आपदा संसाधन नेटवर्क (आईडीआरएन) की भूमिका और उसके महत्व पर प्रकाश डालें, यह बताते हुए कि यह कैसे आपदा प्रतिक्रिया और तैयारी में सहायता करता है।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

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