04 Feb राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) : भारत में प्रवासन
राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) : भारत में प्रवासन
सामान्य अध्ययन- I : भारतीय समाज
चर्चा में क्यों?
राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO), सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के अधीन, जुलाई 2026 से जून 2027 तक देशभर में प्रवासन पर एक व्यापक सर्वेक्षण आयोजित करने जा रहा है। यह सर्वेक्षण प्रवासन की सीमा/प्रकृति, ग्रामीण-शहरी तथा अंतर-राज्यीय आवागमन, प्रमुख कारणों, वापसी प्रवासन, मौसमी प्रवासन और प्रवासियों की रोजगार स्थिति पर विस्तृत आंकड़े एकत्र करेगा। यह डेटा शहरी नियोजन, आवास, परिवहन, रोजगार सृजन, सामाजिक सुरक्षा और कौशल विकास में लक्षित हस्तक्षेप के लिए अत्यंत उपयोगी होगा।

हालिया रुझान (PLFS 2020-21 के अनुसार) :
कुल प्रवासन दर → 28.9%
पुरुष → 10.7%
महिला → 47.9%
ग्रामीण क्षेत्रों में लगभग एक चौथाई (26.8%) भारतीय प्रवासी हैं।
- जुलाई 2026 से जून 2027 तक किए जाने वाले एक सर्वेक्षण में प्रवासन के पैटर्न, ग्रामीण-शहरी और अंतर-राज्यीय आवागमन और इसके कारणों का विस्तृत विवरण दिया जाएगा।
- पीएलएफएस 2020-21 में प्रवासन दर 28.9% दिखाई गई है, जिसमें विवाह महिला प्रवासन (86.8%) को और रोजगार पुरुष प्रवासन (22.8%) को बढ़ावा दे रहा है।
- प्रमुख उपायों में ग्रामीण विकास (DAY-NRLM), शहरी लचीलापन (AMRUT) और श्रमिक कल्याण योजनाएं (PMSYM, PMGKAY, ONORC) शामिल हैं।
लैंगिक अंतर अत्यंत स्पष्ट है। महिलाओं में 86.8% प्रवासन विवाह के कारण होता है (सामाजिक कारक प्रधान), जबकि पुरुषों में 22.8% प्रवासन रोजगार/बेहतर रोजगार की तलाश में होता है (श्रम बाजार के अवसर प्रधान)। यह पैटर्न भारत में प्रवासन की लैंगिक रूप से विशिष्ट प्रकृति को दर्शाता है।
प्रवासन के प्रमुख कारक :
आकर्षण कारक (Pull Factors): बेहतर नौकरी, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाएँ, शहरी सुविधाएँ, उच्च आय।
प्रतिकर्ष कारक (Push Factors): ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार की कमी, कृषि संकट, कम मजदूरी, प्राकृतिक आपदाएँ, पर्यावरणीय दबाव।
चुनौतियाँ :

शहरी क्षेत्रों में प्रवासियों के लिए आवास, स्वच्छता, स्वास्थ्य, शिक्षा और सामाजिक सुरक्षा की कमी।
मौसमी/अंतर-राज्यीय प्रवासियों का शोषण, बाल श्रम, स्वास्थ्य जोखिम।
मूल क्षेत्रों में जनसांख्यिकीय असंतुलन और कृषि श्रम की कमी।
सरकारी स्तर पर उठाए गए प्रमुख कदम :
ग्रामीण विकास एवं रोजगार सृजन
दीनदयाल अंत्योदय योजना – राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (DAY-NRLM)
विकसित भारत – रोजगार एवं आजीविका गारंटी मिशन (ग्रामीण) ,शहरी समुत्थानशीलता
अटल कायाकल्प और शहरी परिवर्तन मिशन (AMRUT)
स्मार्ट सिटी मिशन
पारगमन-उन्मुख विकास (Transit-Oriented Development)
श्रमिक कल्याण एवं सामाजिक सुरक्षा
प्रधानमंत्री श्रम योगी मान-धन योजना (PMSYM)
प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना (PMGKAY)
एक राष्ट्र एक राशन कार्ड (ONORC) – प्रवासियों के लिए पोर्टेबल राशन सुरक्षा
निष्कर्ष :
NSO का आगामी सर्वेक्षण प्रवासन के नवीनतम पैटर्न को उजागर कर नीति-निर्माण को वैज्ञानिक आधार प्रदान करेगा। दीर्घकालिक समाधान के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में समावेशी विकास, श्रम बाजार की गतिशीलता और प्रवासियों के अधिकारों पर जोर देना आवश्यक है। केवल आंकड़ों से ही नहीं, बल्कि इन आंकड़ों पर आधारित समावेशी नीतियों से ही भारत सतत और समान विकास की दिशा में अग्रसर हो सकता है।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न :
Q.निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1.PLFS 2020-21 के अनुसार भारत में कुल प्रवासन दर 28.9% है।
2.महिलाओं में प्रवासन का मुख्य कारण रोजगार है जबकि पुरुषों में विवाह।
उपरोक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
(a) केवल 1
(b) केवल 2
(c) 1 और 2 दोनों
(d) न तो 1 और न ही 2
उत्तर: (a) केवल 1
मुख्य परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न :
Q.“भारत में प्रवासन मुख्यतः लैंगिक रूप से विभाजित है, जिसमें महिलाएँ विवाह और पुरुष रोजगार के कारण प्रवास करते हैं।” इस कथन के आलोक में प्रवासन के सामाजिक-आर्थिक आयामों का विश्लेषण कीजिए तथा सरकारी योजनाओं द्वारा इन चुनौतियों से निपटने के प्रयासों का मूल्यांकन कीजिए। (250 शब्द)
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