11 Aug राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन: पेट्रोलियम क्षेत्र में 30 KTपीए क्षमता स्थापना की योजना

✎ राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन का लक्ष्य भारत को हरित हाइड्रोजन के उत्पादन, उपयोग और निर्यात का वैश्विक केंद्र बनाना है, जिससे ऊर्जा सुरक्षा बढ़ेगी और नेट-जीरो लक्ष्य प्राप्त होंगे।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper III — अर्थव्यवस्था | GS Paper III — पर्यावरण और पारिस्थितिकी | GS Paper III — विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी
- Prelims: राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन (NGHM), हरित हाइड्रोजन, पेट्रोलियम रिफाइनिंग, स्ट्रेटेजिक इंटरवेंशन्स फॉर ग्रीन हाइड्रोजन ट्रांजिशन (साइट) योजना, ऊर्जा सुरक्षा, नेट-जीरो लक्ष्य
- Essay: भारत का ऊर्जा संक्रमण और नेट-जीरो लक्ष्य: चुनौतियाँ और अवसर, हरित अर्थव्यवस्था की ओर भारत का मार्ग: हाइड्रोजन की भूमिका
त्वरित पुनरावृत्ति: राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन का लक्ष्य भारत को हरित हाइड्रोजन के उत्पादन, उपयोग और निर्यात का वैश्विक केंद्र बनाना है, जिससे ऊर्जा सुरक्षा बढ़ेगी और नेट-जीरो लक्ष्य प्राप्त होंगे।
यह खबर चर्चा में क्यों?
नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय ने हाल ही में राज्यसभा में जानकारी दी कि राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन (National Green Hydrogen Mission – NGHM) के तहत पेट्रोलियम और रिफाइनिंग क्षेत्र में हरित हाइड्रोजन (Green Hydrogen) के अंगीकरण को बढ़ावा दिया जा रहा है। ‘स्ट्रेटेजिक इंटरवेंशन्स फॉर ग्रीन हाइड्रोजन ट्रांजिशन’ (Strategic Interventions for Green Hydrogen Transition – SIGHT) मोड – 2बी योजना के तहत रिफाइनरियों के लिए कुल 30 किलो टन प्रति वर्ष (KTPA) की हरित हाइड्रोजन उत्पादन क्षमता आवंटित की गई है, जिसका उद्देश्य भारत को हरित हाइड्रोजन उत्पादन, उपयोग और निर्यात का वैश्विक केंद्र बनाना है।
पृष्ठभूमि
- भारत सरकार ने 4 जनवरी, 2023 को राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन को मंजूरी दी, जिसका कुल परिव्यय 19,744 करोड़ रुपये है।
- इस मिशन का लक्ष्य भारत को हरित हाइड्रोजन और उसके व्युत्पन्न पदार्थों के उत्पादन, उपयोग और निर्यात के लिए एक वैश्विक केंद्र बनाना है।
- मिशन का एक प्रमुख उद्देश्य जीवाश्म ईंधन (Fossil Fuels) के आयात पर निर्भरता कम करना और ऊर्जा सुरक्षा (Energy Security) बढ़ाना है।
- यह मिशन भारत के स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण (Clean Energy Transition) और वर्ष 2070 तक नेट-जीरो (Net-Zero) उत्सर्जन के लक्ष्य को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
- ‘साइट’ (SIGHT) योजना राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन का एक महत्वपूर्ण घटक है, जो हरित हाइड्रोजन के उत्पादन और उपयोग को बढ़ावा देने के लिए रणनीतिक हस्तक्षेप प्रदान करती है।
- पेट्रोलियम और रिफाइनिंग क्षेत्र में हरित हाइड्रोजन का उपयोग डीकार्बोनाइजेशन (Decarbonisation) प्रयासों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, क्योंकि यह क्षेत्र ऊर्जा की खपत में एक बड़ा योगदानकर्ता है।
राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन (NGHM) क्या है?
- राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन भारत सरकार द्वारा शुरू की गई एक महत्वाकांक्षी पहल है जिसका उद्देश्य देश को हरित हाइड्रोजन के उत्पादन, उपयोग और निर्यात के लिए एक वैश्विक केंद्र बनाना है।
- हरित हाइड्रोजन वह हाइड्रोजन है जिसे नवीकरणीय ऊर्जा (Renewable Energy) जैसे सौर या पवन ऊर्जा का उपयोग करके जल के इलेक्ट्रोलिसिस (Electrolysis) द्वारा उत्पादित किया जाता है, जिससे कार्बन उत्सर्जन न्यूनतम होता है।
- मिशन का लक्ष्य वर्ष 2030 तक प्रति वर्ष कम से कम 50 लाख मीट्रिक टन (MMT) हरित हाइड्रोजन उत्पादन क्षमता विकसित करना है।
- यह मिशन लगभग 125 गीगावाट (GW) की नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता वृद्धि और लगभग 8 लाख करोड़ रुपये के निवेश को आकर्षित करने का अनुमान लगाता है।
- मिशन के तहत ‘साइट’ (SIGHT) कार्यक्रम के तहत दो वित्तीय प्रोत्साहन तंत्र शामिल हैं: एक इलेक्ट्रोलाइज़र (Electrolyser) के निर्माण के लिए और दूसरा हरित हाइड्रोजन के उत्पादन के लिए।
- यह मिशन अनुसंधान एवं विकास (Research and Development) गतिविधियों, पायलट परियोजनाओं और कौशल विकास को भी बढ़ावा देगा ताकि हरित हाइड्रोजन पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत किया जा सके।
- हरित हाइड्रोजन का उपयोग विभिन्न क्षेत्रों जैसे उर्वरक, रिफाइनरी, इस्पात, सीमेंट और परिवहन में डीकार्बोनाइजेशन के लिए किया जा सकता है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन (NGHM) | भारत को हरित हाइड्रोजन उत्पादन, उपयोग और निर्यात का वैश्विक केंद्र बनाना। |
| साइट (Strategic Interventions for Green Hydrogen Transition) मोड – 2बी योजना | रिफाइनरियों में हरित हाइड्रोजन के अंगीकरण को बढ़ावा देने के लिए विशिष्ट क्षमता आवंटन। |
| 30 केटीपीए हरित हाइड्रोजन उत्पादन क्षमता | इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन, भारत पेट्रोलियम, हिंदुस्तान पेट्रोलियम और नुमालीगढ़ रिफाइनरीज को आवंटित। |
| निजी डेवलपर्स के माध्यम से कार्यान्वयन | बिल्ड ओन ऑपरेट (Build Own Operate) व्यवस्था के तहत निजी निवेश और दक्षता को बढ़ावा। |
| पेट्रोलियम और रिफाइनिंग क्षेत्र पर ध्यान | ऊर्जा-गहन क्षेत्र में डीकार्बोनाइजेशन और आयात निर्भरता कम करने का लक्ष्य। |
महत्व
आर्थिक महत्व
- हरित हाइड्रोजन के घरेलू उत्पादन से आयातित जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता कम होगी, जिससे विदेशी मुद्रा की बचत होगी।
- पेट्रोलियम और रिफाइनिंग जैसे प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों में हरित हाइड्रोजन के उपयोग से ऊर्जा लागत में स्थिरता आएगी और परिचालन दक्षता बढ़ेगी।
- निजी डेवलपर्स के माध्यम से निवेश को आकर्षित करने से रोजगार सृजन होगा और संबंधित उद्योगों में नवाचार को बढ़ावा मिलेगा।
सामरिक महत्व
- ऊर्जा सुरक्षा में वृद्धि होगी क्योंकि भारत अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं के लिए बाहरी स्रोतों पर कम निर्भर करेगा।
- भारत को हरित हाइड्रोजन प्रौद्योगिकी में एक वैश्विक नेता के रूप में स्थापित करने में मदद मिलेगी, जिससे भू-राजनीतिक प्रभाव बढ़ेगा।
- स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन के माध्यम से भारत के ‘नेट-जीरो’ लक्ष्यों को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण योगदान मिलेगा, जिससे अंतर्राष्ट्रीय जलवायु प्रतिबद्धताओं को पूरा किया जा सकेगा।
पर्यावरणीय महत्व
- जीवाश्म ईंधन के उपयोग में कमी से कार्बन उत्सर्जन में उल्लेखनीय गिरावट आएगी, जिससे वायु प्रदूषण कम होगा।
- हरित हाइड्रोजन उत्पादन के लिए नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों के उपयोग से पर्यावरणीय स्थिरता को बढ़ावा मिलेगा।
- औद्योगिक प्रक्रियाओं में हरित विकल्पों को अपनाने से समग्र पारिस्थितिक पदचिह्न (ecological footprint) कम होगा।
चुनौतियाँ
1. उच्च उत्पादन लागत
- हरित हाइड्रोजन का उत्पादन पारंपरिक जीवाश्म ईंधन-आधारित हाइड्रोजन की तुलना में महंगा है।
- इलेक्ट्रोलाइजर (electrolyzer) और नवीकरणीय ऊर्जा संयंत्रों की प्रारंभिक पूंजीगत लागत अधिक होती है।
यूपीएससी लिंक: अर्थव्यवस्था: ऊर्जा क्षेत्र, औद्योगिक नीतियां
2. तकनीकी बाधाएँ
- हरित हाइड्रोजन उत्पादन, भंडारण और परिवहन के लिए उन्नत प्रौद्योगिकियों की आवश्यकता है।
- बड़े पैमाने पर इलेक्ट्रोलाइजर की उपलब्धता और दक्षता एक चुनौती बनी हुई है।
यूपीएससी लिंक: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी: ऊर्जा प्रौद्योगिकियाँ, नवाचार
3. बुनियादी ढाँचे का अभाव
- हरित हाइड्रोजन के उत्पादन, भंडारण, वितरण और उपयोग के लिए समर्पित बुनियादी ढाँचे का विकास आवश्यक है।
- मौजूदा पाइपलाइन और भंडारण सुविधाओं को हरित हाइड्रोजन के लिए अनुकूलित करना एक चुनौती है।
यूपीएससी लिंक: अर्थव्यवस्था: बुनियादी ढाँचा विकास, ऊर्जा सुरक्षा
4. नवीकरणीय ऊर्जा की निरंतर आपूर्ति
- हरित हाइड्रोजन उत्पादन के लिए आवश्यक नवीकरणीय ऊर्जा (सौर, पवन) की आंतरायिक प्रकृति एक चुनौती है।
- ऊर्जा भंडारण समाधानों की आवश्यकता है ताकि उत्पादन प्रक्रिया में निरंतरता बनी रहे।
यूपीएससी लिंक: पर्यावरण: नवीकरणीय ऊर्जा, जलवायु परिवर्तन
5. नीतिगत और नियामक ढाँचा
- हरित हाइड्रोजन अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए एक स्पष्ट और स्थिर नीतिगत एवं नियामक ढाँचे की आवश्यकता है।
- विभिन्न मंत्रालयों और हितधारकों के बीच समन्वय सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है।
यूपीएससी लिंक: शासन: सरकारी नीतियाँ और हस्तक्षेप, नियामक निकाय
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| लागत प्रतिस्पर्धात्मकता | जीवाश्म ईंधन-आधारित हाइड्रोजन की तुलना में हरित हाइड्रोजन की उच्च उत्पादन लागत। |
| प्रौद्योगिकी का पैमाना | बड़े पैमाने पर हरित हाइड्रोजन उत्पादन के लिए इलेक्ट्रोलाइजर प्रौद्योगिकियों का विकास और उपलब्धता। |
| वित्तीय प्रोत्साहन | निजी निवेश को आकर्षित करने और जोखिम कम करने के लिए पर्याप्त वित्तीय प्रोत्साहन और समर्थन की आवश्यकता। |
| सुरक्षा मानक | हरित हाइड्रोजन के उत्पादन, भंडारण और परिवहन के लिए कड़े सुरक्षा मानकों का विकास और अनुपालन। |
| कौशल विकास | हरित हाइड्रोजन क्षेत्र में आवश्यक तकनीकी और परिचालन कौशल वाले कार्यबल की कमी। |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन (National Green Hydrogen Mission)
आगे की राह
- हरित हाइड्रोजन उत्पादन लागत को कम करने के लिए अनुसंधान और विकास (R&D) में निवेश बढ़ाना।
- इलेक्ट्रोलाइजर विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए ‘मेक इन इंडिया’ पहल के तहत प्रोत्साहन प्रदान करना।
- हरित हाइड्रोजन के भंडारण, परिवहन और वितरण के लिए आवश्यक बुनियादी ढाँचे के विकास में तेजी लाना।
- नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों से निरंतर बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए ऊर्जा भंडारण समाधानों को एकीकृत करना।
- हरित हाइड्रोजन परियोजनाओं के लिए आकर्षक वित्तीय प्रोत्साहन, सब्सिडी और कर लाभ प्रदान करना।
- हरित हाइड्रोजन अर्थव्यवस्था के लिए एक मजबूत नियामक ढाँचा और सुरक्षा मानक विकसित करना।
- पेट्रोलियम और रिफाइनिंग क्षेत्र के अलावा अन्य उद्योगों में भी हरित हाइड्रोजन के उपयोग को बढ़ावा देना।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन · हरित हाइड्रोजन · पेट्रोलियम और रिफाइनिंग सेक्टर · ऊर्जा सुरक्षा · नेट-जीरो लक्ष्य · जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता · स्वच्छ ऊर्जा · कार्बन उत्सर्जन में कमी · मेक इन इंडिया · आत्मनिर्भर भारत
अवधारणा प्रवाह
राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन की शुरुआत → साइट मोड-2बी योजना के तहत रिफाइनरियों को क्षमता आवंटन → निजी डेवलपर्स द्वारा ‘बिल्ड ओन ऑपरेट’ मॉडल पर परियोजना कार्यान्वयन → हरित हाइड्रोजन का घरेलू उत्पादन और उपयोग → आयातित जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता में कमी और ऊर्जा सुरक्षा में वृद्धि → भारत के स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन और नेट-जीरो लक्ष्यों की प्राप्ति
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन (National Green Hydrogen Mission) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. इसका उद्देश्य भारत को हरित हाइड्रोजन के उत्पादन, उपयोग और निर्यात के लिए एक वैश्विक केंद्र बनाना है।
2. ‘साइट (Strategic Interventions for Green Hydrogen Transition) मोड – 2बी’ योजना के तहत, रिफाइनरियों के लिए 30 किलो टन प्रति वर्ष (KTPA) की हरित हाइड्रोजन उत्पादन क्षमता आवंटित की गई है।
3. इन परियोजनाओं का कार्यान्वयन केवल सरकारी कंपनियों द्वारा किया जा रहा है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- केवल तीन
- कोई नहीं
उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है क्योंकि मिशन का प्राथमिक उद्देश्य भारत को हरित हाइड्रोजन का वैश्विक केंद्र बनाना है। कथन 2 भी सही है, जैसा कि प्रेस विज्ञप्ति में 30 KTPA क्षमता के आवंटन का उल्लेख है। कथन 3 गलत है क्योंकि परियोजनाएं निजी डेवलपर्स के माध्यम से ‘बिल्ड ओन ऑपरेट’ व्यवस्था के तहत कार्यान्वित की जा रही हैं।
Q2. निम्नलिखित में से कौन-सा/से राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन का/के संभावित लाभ है/हैं?
1. आयातित जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता में कमी।
2. ऊर्जा सुरक्षा में वृद्धि।
3. भारत के स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन लक्ष्यों को सहायता।
4. कार्बन उत्सर्जन में कमी।
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:
- केवल 1 और 2
- केवल 3 और 4
- केवल 1, 2 और 3
- 1, 2, 3 और 4
उत्तर: 1, 2, 3 और 4 — हरित हाइड्रोजन के घरेलू उत्पादन और उपयोग से आयातित जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता कम होगी, जिससे ऊर्जा सुरक्षा बढ़ेगी। यह भारत के स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन और नेट-जीरो लक्ष्यों को प्राप्त करने में भी सहायक होगा, जिसका अर्थ है कार्बन उत्सर्जन में कमी। अतः सभी कथन सही हैं।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन (National Green Hydrogen Mission) के उद्देश्यों और महत्व पर चर्चा कीजिए। पेट्रोलियम और रिफाइनिंग सेक्टर में हरित हाइड्रोजन के अंगीकरण से भारत के ऊर्जा सुरक्षा लक्ष्यों को कैसे बल मिलेगा? (15 Marks)
रूपरेखा: परिचय में राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन (NGHM) का संक्षिप्त परिचय और इसके मुख्य उद्देश्य। मिशन के उद्देश्यों का विस्तार से वर्णन, जैसे वैश्विक केंद्र बनना, उत्पादन क्षमता बढ़ाना, निर्यात को बढ़ावा देना। हरित हाइड्रोजन के महत्व पर चर्चा, जिसमें ऊर्जा सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन शमन, आर्थिक लाभ और स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण शामिल हैं। पेट्रोलियम और रिफाइनिंग सेक्टर में हरित हाइड्रोजन के अंगीकरण से होने वाले विशिष्ट लाभों पर प्रकाश डालें, जिसमें आयातित जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता में कमी, कार्बन फुटप्रिंट में कमी और आत्मनिर्भरता में वृद्धि शामिल है। निष्कर्ष में भारत के नेट-जीरो लक्ष्यों और वैश्विक स्वच्छ ऊर्जा नेतृत्व में मिशन की भूमिका का सारांश।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
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